Monday, February 28, 2011

कोई तो मुझे रामूदेव बाबा बनाओं ......!



लेख:- रामकिशोर पंवार ''रोंढ़ा वाला
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मुझे अब पता लग रहा है कि बाबा बनने का कितना फायदा होता है. टी वी चैनलो पर बाबा के प्रवचन - भजन - कीर्तन - दर्शन के फायदे इतने होते कि बाबा लोगो की चांदी हो जाती है. कल का चोर - उच्चका - डाकु - लूटेरा - बलात्कारी - दुराचारी अपनी पति द्धारा कभी स्वामी के रूप में नहीं स्वीकारा गया व्यक्ति थोड़े से रास्ते परिवर्तन के बाद जगत स्वामी हो जाता है. नेशनल से लेकर वह इंटरनेशनल हो जाता है. ओशो की तरह महान और स्वामी इच्छाधारी की तरह पहचान बना लेता है. योग से भोग और फिर संभोग से समाधी तक का शार्टकट रास्ता दिखाने वाला महान दार्शनिक ओशो की तरह वह भी अमेरिका जैसे शहरो में स्वंय का शहर - नगर - महानगर बसा सकता है. बस करना क्या है यह कोई नहीं बताता लेकिन सभी बाबाओं के जलवे देख कर मन में यही तराना गुंजने लगता है कि ''हर तरफ मेरा ही जलवा ......!
अब बाबा बनने का एक फायदा यह होता है कि मोदी से लेकर लेकर शिवराज तक पैरो के नीचे बैठे कहते रहते है कि ''बाबा जी हमारे लायक कोई सेवा हो तो एक बार हमें भी आपकी सेवा का मौका तो दीजिए......!
मुख्यमंत्री से लेकर संत्री तक के साथ फोटो छपने के बाद यदि कोई स्कैण्डल में फंस भी गये तो मंत्री से लेकर संत्री तक स्वंय अपने को बचाने के चक्कर में आपको झुठा फंसाने का तराना तो जरूर गायेगें. देश में बाबा बनने की तरकीब अच्छी है. इससे आपके पचास फायदे है लेकिन जो पक्के है उनमे पहला नाई का खर्चा बचेगा. दुसरा साबुन और शैम्पू से नहाने का खर्च बचेगा. तीसरा मंहगे कपड़ो का खर्चा बचेगा. चौथा आने - जाने के किराये का खर्चा बचेगा. पांचवा खाने और पीने का भी खर्चा बचेगा. गोबर की या फिर शमशान की राख को शरीर में लगाने से बाबा बनने की पहली राह आसान हो जायेगी. मैने एक पुस्तक में पढ़ा था कि सफल ज्योतिषी कैसे बने...? उस किताब की तरकीब बाबा बनने पर अचमाई जा सकती है. जैसे कोई भक्त आपके पास आकर सवाल करता है कि ''बाबा मेरे घर लड़का होगा की लड़की ......!उसे यदि लड़का बताया तो अपने पास की डायरी में लड़की लिखो यदि वह आकर कहता है कि ''बाबा आपने झुठ बोला था ,
मेरे घर तो लड़की हुई है ......! तब उसे गालियां देकर दुत्कार कर - फटकार कर यह कहो कि ''मूर्ख बाबा को झुठा साबित करता है , देख मैने अपने चेले से इस डायरी में तेरे नाम के आगे क्या लिखा था.....! कुछ दिनो बाद तो आप कहो कुछ और लिखो कुछ के चलते इतनी प्रसिद्धी पा जाओगें कि लोगो की आपके दरबार में कतारे लगना शुरू हो जायेगी. पहले पैदलछाप आया करते थे कुछ दिनो और महिनो बाद हवाई जहाज आना शुरू हो जायेगा. बाबा बनने का एक यह भी है कि बाबा के पास खाने और पीने की कोई कमी नहीं रहेगी. पीने के पानी को तरसने वाले बाबा के पास मिनरल वाटर होगी साथ में फलो का और फूलो का जुस भी जिसको पीने के बाद बाबा में वह ताकत और फूर्ति आ जायेगी कि वह रामदेव से लेकर कामदेव से भी अधिक कलाबाजी दिखा पायेगा. मुझे हर हाल में बाबा बनना है.
बाबा बनने से परिवार की जवाबदारी से भी छुटकारा मिल जायेगा. बीबी से लेकर टी वी तक की वहीं घिसी - पिटी किस्से कहानियों से भी छुटकारा मिल जायेगा. बाबा बनने के लिए मैने सोचा है कि मैं अपने शहर के बाहर से चार - पांच मेरी तरह के चतुर - चालक लोगो को अनुबंध पर लेकर आ जाऊ ताकि वे शहर और गांव में जाकर मेरी कीर्ति और यश का गान कर सके. दो चार टुर्चे टाइप के भूखे - नंगे पत्रकारो और टी वी चैनलो के रिर्पोटरो और कैमरामेनो को भी अपनी गिरोटी में शामिल करने से एक फायदा मिलेगा कि वे लोग मुझे भी कुंजीलाल और बिरजू की तरह हाईलाइट कर देगें. ऐसा करने से मेरी लोकप्रियता की टी आर पी भी बढ़ेगी और मैं भी सफेद उल्लू की तरह भगवान श्री हरि विष्णु के वाहन गरूड़ महाराज की तरह पूजा जाऊंगा. जिस रामू को अब तक कोई घास नहीं डालता था उसके पास तक पहुंचने वालो की आस ही मुझे श्री श्री एक हजार चार सौ बीस रामूदेव बाबा का दर्जा दिला देगी. जिस देश में आज भी असली की जगह नकली को पूला जाता है. स्थिति तो यह तक है कि इस देश में जगतगुरू शंकराचार्य तक नकली हो सकते है तब मेरे रामूदेव बाबा बनने की राह में कौन हरामी की लाल रोड़ा अटका पायेगा. बाबा बनने के फायदे को देख कर मै सोच रहा हँू कि वन विभाग की किसी पहाड़ी पर अतिक्रमण करके एक आश्रम बना लेता हँू. आश्रम ऐसी जगह पर हो कि लोगो को आने और जाने में आसानी हो इसलिए मैं सोचता हँू कि सेन्टर पाइंट बरसाली की पहाड़ी सबसे अच्दी रहेगी.
इसका आगे चल कर फायदा यह होगा कि सेन्टर पाइंट बरसाली रेल्वे स्टेशन माडल स्टेशन बन जायेगा और फिर राजधानी से लेकर शताब्दी एक्सप्रेस तक रूका करेगा. बाबा होने के कारण मेरे चेले चपाटो में ऐसे हाई - फाई लोग जुड़ जायेगे कि उनके हवाई जहाजो की लेडिंग के लिए एक हाई प्रोफाइल हवाई पटट्ी भी बन जायेगी. कुछ दिनो तक लोकल चैनल पर चाचा से मिल कर अपना लाइव टेलिकास्ट करवाने के बाद खुद का ही रामूदेव बाबा चैनल शुरू कर देगें. दिन भर अपने उल्टे - सीधे आलेखो व्यंग को ही अपने प्रवचनो का आधार बना कर लोगो को नित्य नई अपनी काल्पनिक कथाओं के गहरे सागर में गोते लगवायेगें. वैसे भी मेरी बीबी से लेकर बच्चे तक मुझे मेरे यार - दोस्तो की तरह फेकोलाजी का मास्टर मान चुके है.मै फेकने में इतना मास्टर मांइड हँू कि मेरे सामने कोई भी बाबा और बाबी टिक नहीं पायेगें. मेरे बाबा बनने की राह मेरी टांग टुटने के बाद और भी आसान हो गई है क्योकि अब तो घुमना - फिरना - मोटर साइकिल चलाना संभव नहीं है ऐसे में कमाई का सबसे अच्छा तरीका रामू बाबा बनने से कोई दुसरा दिखाई नहीं देता.
बाबा बनने के बाद मेरे जिले के कलैक्टर कार्यालय का लखन काका मुझे भाव नहीं देता उसी लखन काका से बड़े कई लोग अपने आला अफसरो के साथ कतार में खड़े होकर मुझे भाव देने के लिए मरे जायेगें. मेरा दिन प्रतिदिन भाव भी बढ़ता जायेगा. मेरे फिर कोठी बाजार से लेकर रिलायंस के बिग बाजार में तक में आसमान को छुते भाव स्क्रीन पर नज़र आयेगें. उन बाजारो में मेरी फोटो से लेकर चरण पादुका तक बेभाव बिकेगी . इस तरह मैं रातो रात महान बन जाऊंगा क्योकि बुर्जग लोग कहते है कि राई के भाव रात में ही बढ़ते है. मैं भी तो राई नहीं रामू भाई हँू इस बात में कोई दो मत नहीं लेकिन मुझे कोई रामूदेव बाबा न बनाये .
आज नहीं तो कल मैं अपने गांव से लेकर वाशिंगटन तक का सर्वाधिक खुलने वाली बेवसाइट की तरह लोकप्रिय - जनप्रिय बाबा बन जाऊंगा लेकिन कोई तो मुझे भी आसाराम - रामदेव - कामदेव की तरह बाबा बनाये. भैया लोग याद रखना कहीं गलती से मुझे शैलेन्द्र बाबा ना बना देना ...? वरणा मुझे लोग भाजपा का मीडिया प्रभारी समझ कर मुझे ही नोचने - खरोचने लग जायेगें. वह तो भला हो शैलेन्द्र बाबा की हिम्मत का जिसकी दाद देनी चाहिये कि वह इतने सारे अपनी बिरादरी के लोगो को झेल पाते है. मेरा इस समय बाबा बनने का टाइम भी सही है क्योकि गर्मी पडऩे के बाद लोग ठंडे स्थान पर चले जाते है. ऐसे में बरसाली की पहाडिय़ा सबसे ठंडी है. बरसात में उस स्थान पर शानदार झरना है इसलिए पर्यटन की दृष्टि से यह स्थान सबसे बढिय़ा स्थान रहेगा. मैं अपने लोगो से बार - बार यही कहता हँू कि मुझे बाबा बनाओ , मुझे बाबा बनाओ ....?
बाबा बनने से मकान मालिक का किराया देने का , बिजली के बिल भरने का , पेपर छपवाने का , पेपर के लिए विज्ञापन मांगने का , होली - दशहरा साहब लोगो से भीख मांगने का , लिफापा मांगने का चक्कर बच जायेगा. मेरे बाबा बनने से भाई लोगो का सबसे ज्यादा फायदा होगा क्योकि वे मेरे टेंशन में दिन प्रतिदिन और भी काले होते चले जा रहे है. उन्हे फिर किसी तंत्र - मंत्र क्रिया की जरूरत नहीं पड़ेगी और तो और उनके कोर्ट - कचहरी के चक्कर में जेल जाने का डर भी नही रहेगा. कोई यदि आगे नहीं आता है तो भाई लोगो को ही मुझे बाबा बनवा की तरकीब सोचना चाहिये. वैसे भी भाई लोग किसी को भी बाबा और दादा बनाने में एक्सपर्ट है. बाबा बनने के इतने सारे फायदे गिनाने के बाद कहीं ऐसा न हो कि मेरे से पहले भाई लोग ही बाबा बन जायें. वैसे देखा जाये तो बाबा बनने से जो मान - सम्मान मिलता है वहीं भीख मांगने से भी नहीं मिलता. बाबा बनने का एक सबसे बढिय़ा फायदा यह है कि अपनी भी सीडी वाले और इच्छाधारी बाबा की तरह लाटरी लग जायेगी.
पांच सौ तो नहीं पर चार - पांच तो अपनी भी सेवा चाकरी में लगी रहेगी लेकिन बाबा बनने से पहले मुझे बार - बार इस बात का डर सता रहा है कि कहीं मेरी उन बाबाओं की तरह पुलिस और जनता ने कंबल कुटाई और सार्वजनिक धुलाई कर दी तो मेरी तो अभी एक टांग टूटी है बाद मे पता चला कि मैं जगह - जगह से टूट - फूट जाऊंगा और लोग मुझे टूटे - फूटे - खुब पिटे बाबा जी की तरह जानने - पहचानने लग जायेगें. बाबा बन कि नहीं यह सोच कर मन बार - बार कांप जाता है कि क्या करू क्या न करू.....? मेरी अंतरआत्मा से जब मैने इस बारे में सवाल किया तो उसने मुझे दुत्कार और बुरी तरह फटकारा वह कहने लगी कि ''जवाबदेही और जिम्मेदारी से मुँह मोड़ कर भागने वाला बाबा नहीं कायर - डरपोक इंसान होता है , परिवार और संघर्ष के साथ लडऩे वाला ही महान होता है.
कई लोगो की जब हिम्मत टूट जाती है तो वे आत्महत्या कर लेते है. लेकिन तेरी टूटी टांग फिर जुड़ जायेगी लेकिन एक बार टूटी हिम्मत कभी नही जुड़ पायेगी. सहीं इंसान बनना है तो अपने परिवार - बीबी - बच्चो की जिम्मेदारी का वहन करो और अच्छे आदर्श पति -पिता बनने की कोशिस करो ताकि लोग आने वाले कल में तुम्हारी तारीफ कर सके कि इतने संघर्ष के बाद भी यह इंसान टूटा नहीं बल्कि सारे बवडंरो को झेलने के बाद भी आज भी पत्थर रूपी शिला की तरह टिका है. बाबा बनने से लोग यही कहेगें कि देखो बीबी - बच्चे पाल नहीं सका और बाबा बन गया डरपोक कही का ........! अंतरआत्मा की आवाज को सुनने के बाद मैने सोचा कि भगवान ने दो हाथ दिये है इसी से ऐसा कुछ लिखा जाये कि समाज में मेरी तरह कोई दुसरा बाबा बनने की हिमाकत न कर सके.

शिक्षा का लगा बाजार चौतरफा मची है लूट

लूट सके तो लूट बैतूल जिले में मिशनरी स्कूलों में अर्थदंड का चल पड़ा दौर


बैतूल// रामकिशोर पंवार ( टाइम्स ऑफ क्राइम)
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लोगो के दिलो दिमाग पर छाई पश्चिमी सभ्यता और दुसरो से अच्छा बनने की चाहत कई बार अनजान मुसीबतों का पहाँड़ लेकर टूट पड़ती हैं। ऐसे में आदमी बन जाता हैं धोबी का कुत्ता जो तो घर का रहता हैं और घाट का ....
बैतूल
जिला मुख्यालय के कुछ हाई प्रोफाइल कहलाने वाले पालको को उस समझ तगड़ा छटका लगा जब ईएलसी कोठीबाजार प्रबंधन ने अपने स्कूल में पढऩे वाले छात्रों को प्रवेश पत्र देने से पहले अतिरिक्त रूपए की मांग रख दी और फीस के रूप में अर्थदण्ड वसूलने शुरू कर दिए। कुछ ने तो विरोध किया लेकिन अधिकांश अर्थदंड की भरपाई करके अपने बच्चों के प्रवेश पत्र लेकर चलते बने। क्षणिक विरोध की परवाह किए बिना स्कूल प्रबंधन ने अपना सुरसा जैसा मुंह फाडऩा शुरू किया तो भागे - भागे स्कूल के छात्र और उनके पालक पहुंच गए भाजपा एवं संघ के विचारक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद नामक संगठन के पास और फिर शुरू हो गई नेतागिरी। इसाई मिशनरी द्वारा संचालित स्कूली शिक्षा से वैसे ही नाराज संघ विचारक विद्यार्थी परिषद के हाथों में जैसे कोई ब्रहमास्त्र आ गया और उन्होने मिशनरी संचालित स्कूल पर धावा बोल दिया। भाजपा समर्थक संगठन के दबाव में तथाकथित शिकायत सहीं पाई गई और स्कूल प्रबंधन को फीस वापस करनी पड़ी। पूरी कहानी कुछ इस प्रकार से रही।
पैसे मांगने और प्रवेश पत्र नहीं देने से नाराज स्कूल के छात्रों ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। अभाविप के आंदोलन प्रभारी सनी राठौर के नेतृत्व में अवैध फीस वसूली बंद करने के विरोध में प्रदर्शन किया। बिगड़ती हुई स्थिति को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस भी स्कूल पहुंच गई थी। पुलिस ने मामला शांत कराया। प्रदर्शन के बाद स्कूल प्रबंधन ने छात्रों को प्रवेश पत्र दिए। कलैक्टर कार्यालय रोड़ पर कोठीबाजार स्थित ईएलसी स्कूल के छात्रों ने प्राचार्य एवं शिक्षकों पर अवैध रूप से फीस के नाम पर पैसों वसूली करने एवं परिजनों से अभद्र व्यवहार करने की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी बीके पटेल से भी की थी। छात्रों की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग से स्कूल में जांच के लिए दो सदस्यीय दल पहुंचा।
दल
में शामिल कन्या गंज स्कूल के प्राचार्य केके वरवड़े, सिविल लाइन प्राथमिक स्कूल के प्रधानपाठक वीआर वाघमोड़े पहुंचे। जांच दल ने छात्रों को प्रवेश पत्र देने एवं फीस वापस करने के निर्देश स्कूल प्रबंधन को दिए हैं। जांच करके लौटे प्राचार्य केके वरवड़े को स्कूल के छात्रों ने बताया कि स्कूल प्रबंधन अनपुस्थित रहने पर एक छात्र से प्रतिदिन 10 रूपए के हिसाब से अर्थदंड से वसूल रहा है। रेडक्रास, स्काउट गाइड के नाम पर भी अर्थदंड लिए जा रहे हैं। छात्रों ने 500 रूपए से लेकर एक हजार रूपए तक लिए जा रहे हैं। इसकी कोई रसीद भी नहीं दी जा रही है।छात्रों ने जांच अधिकारी वरवड़े को बताया कि पैसे नहीं देने पर प्रवेश पत्र नहीं दिए जा रहे हैं।
रिजल्ट
खराब करने की धमकी दी जा रही है। श्री वरकड़े के कहे अनुसार स्कूल प्रबंधन परिजनों से भी अभद्र व्यवहार किया जा रहा है। प्रथम दृष्टया फीस वसूली में गड़बड़ी नजर आ रही है। छात्रों को प्रवेश पत्र देने एवं फीस वापस करने के प्रबंधन को निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट डीईओ को सौंप दी है। छात्र पालको ने कभी किसी से यह नहीं कहा कि उनके बच्चों से टाई , बैल्ट , जूते मौजे, होमवर्क न करके आने पर जबरिया अर्थदंड आरोपित कर वसूला जाता हैं। यहां यह उल्लेखनीय हैं कि बैतूल जिले में सवा सौ से अधिक मिशनरी द्वारा संचालित हाई प्रोफाइल स्कूल हैं जहां पर क्लासवन से लेकर आम आदमी तक के बच्चे शोषण एवं यातना के शिकार बन रहे हैं लेकिन कथित बच्चों के भविष्य के चलते पालक सब कुछ सहन कर रहा हैं जिसके शोषण की गथा आमजन तक नहीं पहुंच पाती हैं। अकसर देखने में आया हैं कि धनबल - बाहुबल से समर्थ इन स्कूल प्रबंधनो द्वारा अनैतिक नियम विरूद्ध कानून के मंशा के खिलाफ ऐसे कार्य संपादित किए जाते हैं जो भादवि के अनुसार संगीन अपराध की श्रेणी में आते हैं।

सारणी ताप बिजली घर की जहरीली राख से नर्मदा , तवा , देनवा प्रदूषित

सारणी ताप बिजली घर की जहरीली राख से नर्मदा , तवा , देनवा प्रदूषित






सारणी ताप बिजली घर की जहरीली राख से नर्मदा , तवा , देनवा प्रदूषित
राख से खाक हो गई दर्जनों गांवों की आबादी

बैतूल// रामकिशोर पंवार ( टाइम्स ऑफ क्राइम)
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अगर आपको परम पूज्यनीय सलिला माँ नर्मदा के स्नान के बाद खुजली होने लगे तो समझ लीजिये कि सारणी ताप बिजली घर की राख ने कमाल कर दिया .विचारणीय प्रश्र है कि सारणी ताप बिजली घर की राख से होशंगाबाद जिले का बहुचर्चित तवा नगर स्थित तवा जलाशय दिन - प्रति दिन तवा नदी में मिल रही राख के कारण वह आने वाले कल में अगर राख का दल-दल बन जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होगी .
बैतूल जिले में स्थित सतपुड़ा ताप बिजली घर सारणी के जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार नदी के बहते जल में राख ना बहाने की चेतावनी तक तवा जलाशय की ओर से दी जा चुकी है लेकिन आज भी राख का हजारों टन का बहाव जारी है. बैतूल जिला पर्यावरण संरक्षण समिति के जिला संयोजक पर्याविद एवं बैतूल जिला पर्यावरण वाहिणी के जिला सदस्य ने शासन को देनवा नदी के संरक्षण के लिए 1 करोड़ 35 लाख की एक योजना भेजी थी जिसमें नदी की साफ सफाई तथा निकाली गई राख से रोजगार केन्द्र खोल कर बेरोजगारी को दूर करने का सुझाव भेजा जा चुका है लेकिन पर्यावरण मंत्री बदल गये लेकिन सुझाव पर आज तक किसी प्रकार का अमल नही हो सका . पूर्व वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री सुश्री मेनका से लेकर कमलनाथ तक को सारनी ताप बिजली घर क राख से अपना स्वरूप खो चुकी देनवा नदी की प्रोजेक्ट रिपोर्ट कई बार भेजी जा चुकी है लेकिन राख से खाक हो रहे जल जीवन पर आज तक कोई भी सरकार इस दिशा में ठोस कारगर योजना नहीं बन सकी है .
सारणी बिजली घर की चिमनियों से निकलने वाली राख से सारनी के आस पास के दर्जनों गांव प्रभावित है. राख में खाक हो रहा जन जीवन दिन प्रतिदिन मौत की आगोश में समा रहा है. मीलों दूर तक खेतों में जमी राख ने गरीब आदिवासी मजदूर किसानो की फसल के साथ साथ जानवरों का चारा-पानी तक को जहरीला बना दिया है.जब इस ताप बिजली घर की स्थापना हुई थी तब उन आदिवासियों को भरोसा दिलाया गया था कि यह पावर हाउस उनकी जिंदगी में उजाला ला देगा लेकिन उजाला तो दूर रहा इन आदिवासियों की जिंदगी में काला अंधकार छा गया है. इस क्षेत्र के रहवासियो के दुधारू और खेती में उपयोगी जानवर राख युक्त पानी तथा चारा खाकर घुट-घुट कर मर रहे है.
वहीं दूसरी ओर उन्हें फसल के उत्पादन के प्रतिशत में लगातार आ रही गिरावट के साथ साथ उनके जीवन यापन पर भी भारी संकट आ खड़ा है. राख ने मानव के शरीर से लेकर जानवरों तक के शरीर में घुस कर उसके फेफड़ों एवं आतों तक में बारीक छेद कर डाले है. एक जानकारी के अनुसार सारणी ताप बिजली घर से प्रति दिन हजारों टन राख पानी के साथ पाईप लाइनों के जरिये बांध में बहा दी जाती है. इससे बांध एक प्रकार से दल-दल बन गया है. जिसमें जानवर धंस कर मर रहे है. राख बांध की लागत करोड़ों में आंकी जाती है लेकिन मजेदार तथ्य यह ह कि इस बांध में इतना पैसा खर्च हो चुका है कि इतनी लागत से कम से कम चार-पांच इस जैसे राख बांध बनाये जा सकते थे.हर साल बरसात में राख बांध तोड़ जाता है ताकि, ओवर फोलो राख का बहाव बांध को ही बहाकर ना ले जाये.
जानकार सूत्रों ने बताया कि देनवा, फोपस, तवा एवं नर्मदा तक इस राख से प्रभावित होकर राख युक्त सफेद पानी तथा जहरीले रासायनिक पदार्थो के कारण यह नदियां जहरीली बन रही है. अब अगर आपको नर्मदा के स्नान के बाद खुजली होने लगे तो समझ लीजिये कि सारणी की राख ने कमाल कर दिया. सारणी की राख से तवा नगर का जलाशय राख का दल-दल बनते जा रहा है. सारणी बिजली घर के अधिकारियों को कई बार राख न बहाने की चेतावनी तवा जलाशय की ओर से दी जा चुकी है लेकिन हजारों टन राख का बहाव जारी है. सारणी ताप बिजली घर की राख ने मोरडोंगरी, विक्रमपुरी, धसेड़, सलैया, सीताकामथ, चोर कई गांवों को अपनी आगोश में जकड़ लिया है. सारणी ताप बिजली घर की राख के कारण प्रदूषित नदियों का मामला प्रदेश की विधानसभा में उठाया जा चुका है.
बैतूल जिला पर्यावरण संरक्षण समिति तथा देनवा बचाओं समिति के द्वारा की गई पहल पर इटारसी के भाजपा के तत्कालिन विधायक डाक्टर सीताशरण शर्मा ने विधानसभा में जब देनवा नदी के मामले पर शासन को गलत जानकारी देने के लिये लताड़ते हुए देनवा नदी की एक वीडियो कैसेट दी तब जाकर उस समय के राज्य सरकार के पर्यावरण मंत्री को यह स्वीकार करना पड़ा कि प्रदेश की 10 प्रदूषित नदियों में देनवा भी शामिल है. देनवा बचाओं अभियान से जुड़े पर्याविद का कहना है कि शासन ने आज तक दस प्रदूषित नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिये कोई खास कारगार योजना नहीं बनाई है. सारणी की राख से प्रभावित नदियों के लिये महामहिम राष्टï्रपति को हजारों पोस्टकार्ड लिख चुकी बैतूल जिला पर्यावरण संरक्षण समिति ने शासन को देनवा नदी के संरक्षण के लिये 1 करोड़-35 लाख की एक योजना भेजी थी जिसमें नदी की साफ सफाई तथा निकाली गई राख से रोजगार केन्द्र खोल कर बेरोजगारी को दूर करने का सुझाव भेजा था. पूर्व में तत्कालिन वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री सुश्री मेनका से लेकर वर्तमान केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ को तक देनवा नदी की प्रोजेक्ट रिपोर्ट भेजी जा चुकी है लेकिन राख से खाक हो रहे जल जीवन पर आज तक कोई ठोस कारगर योजना नहीं बन सकी है.
सारणी की राख को लेकर सतपुड़ा ताप बिजली घर भी चिंतित है लेकिन मंडल के पास ठेकेदारों के राख निकासी के फर्जी बिलों के भुगतान करने के अलावा कोई योजना नहीं है. मंडल प्रतिवर्ष तवा जलाशय एवं राख नाले में राख के निकालने तथा राख बांध के रख-रखाव के साथ साथ बांध की ऊंचाई बढ़ाने के नाम पर करोड़ों रूपये खर्च करता है. राख बांध के पानी की रिसायक्लीन योजना भी फेल हो गई है. अब सारणी ताप बिजली की राख से प्रभावित ग्रामवासी राख से नष्टï हो रहे जल जीवन से दुखी होकर पलायन करते जा रहे है.अपने पूर्वजो की अनमोल धरोहर को छोड़कर भविष्य को बचाने के लिये गांवों को छोड़कर जाने से इन गांवों में चीखता सन्नाटा इस बात का संकेत देता है कि गांवों में मौत का कहर शुरू हो चुका है यही कारण कि यहां के ग्रामीण पलायन कर चुके ह

प्रमाण तो सिर्फ बहाना था, चार लाख के विज्ञापन जो छपवाना था

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमति लता राजू महस्की की पोल खुली


बैतूल// रामकिशोर पंवार ( टाइम्स ऑफ क्राइम)
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जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमति लता राजू महस्की की पोल खुली
प्रमाण तो सिर्फ बहाना था , चार लाख के विज्ञापन जो छपवाना था
बैतूल,रामकिशोर पंवार:
जिस ढंग से बैतूल जिले की पहली महिला जिला पंचायत अध्यक्ष एवं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त श्रीमति लता राजू महस्की ने बीते पखवाड़े सम्पन्न हुई जिला पंचायत की बैठक में आर इ एस के इंजीनियरो को खुले आम धमकी दी थी कि यदि वह सोच लेगी तो जिस भी चाहेगी जिले के तथाकथित भ्रष्ट्राचारी अधिकारियों के भ्रष्टाचार के मामले के दस्तावेजो को लेकर एफआईआर करवा देगी तो आर इ एस प्रभारी बानिया और मेघवाल दोनों आज ही जेल चले जाओगे। बैतूल जिले की प्रथम महिला जनप्रतिनिधि की इस सिंह गर्जना का जिले भर में स्वागत हुआ लेकिन इस तथाकथित धमकी की पोल उस समय खुल गई जब महिला जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमति लता राजू महस्की ने जिले भर के सभी प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में पूरे पेज के अपने महिमा मंडित कार्यकाल के एक साल पूरे हो जाने की खुशी में लगभग चार लाख रूपए के विज्ञापन छपवा डाले।
सभी समाचार पत्रों के पत्रकारों को आर इ एस प्रभारी श्री बानिया का नाम एवं पता तथा मोबाइल नम्बर देकर महिला जनप्रतिनिधि ने अपने आप को बैतूल के विकास पुरूष कहे जाने वाले स्वर्गीय विजय कुमार खण्डेलवाल के समकक्ष लाकर खड़ा कर दिया। बैतूल जिले के पिछड़े समाज से आने वाली एक छोटे से गांव के कटट्र इमानदार भाजपा नेता स्वर्गीय मानिकराव महस्की की पुत्रवधु ने अपने ससुर के निधन के मात्र डेढ़ साल भी पूरे नहीं हो सके समय के भीतर ही वह कार्य कर डाला कि लोग सन्न रह गए। इमानदार जनप्रतिनिधि के बदले एक ब्लेकमेलर जनप्रतिनिधि के रूप में ख्याति पाने वाली इस महिला जनप्रतिनिधि ने अपने पास मौजूद कथित दस्तावेजो का खुले आम सौदा करके आरईएस के कार्यपालन यंत्री केएस वानिया एवं पूर्व कार्यपालन यंत्री आर एस मेघवाल के खिलाफ आज दिनांक तक कोई शिकायत नहीं की और न ही किसी भी अधिकारी को जेल भिजवाया।
महिला जनप्रतिनिधि द्वारा सार्वजनिक रूप से किसी दो जवाबदेह प्रशासनिक अधिकारियों को अपमानित करने के बजाय सीधे उनके खिलाफ लोकायुक्त या राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान में रिर्पोट दर्ज करवानी चाहिये थी ताकि हकीगत में दोनो उक्त अधिकारी जेल जा सके। विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस पार्टी ने भाजपा की महिला जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमति लता राजू महस्की को चुनौती दी है कि यदि वे दोनो अधिकारियों को ब्लेकमेल नहीं कर रही है तो एक जागरूक नागरिक एवं प्रतिनिधि के नाते पुलिस में या लोकायुक्त में रिर्पोट दर्ज करवा कर अपनी नैतिक जवाबदेही का निर्वाहण करे।
इन सब बातों को दरकिनार कर महिला जनप्रतिनिधि ने अपने पूरे एक साल के कार्यक्रम का पूरा पेज का रंगीन महिमा मंडित बखान छपवा कर अपनी कथनी और करनी में भिन्नता को सिद्ध कर दिया। कुछ चुनिंदा पत्रकारों के समक्ष अपना दुखड़ा बाटते हुए श्री केएस वानिया ने बातो ही बातो में जिला पंचायत अध्यक्ष के आरोपो की पोल खोल कर रख दी। श्री वानिया से हुई बातचीत के टेप के अनुसार पूरे विज्ञापनों का भुगतान पूर्व में ही कर दिया गया तब जाकर जान बची हुई है। श्री वानिया की तरह अनेक अधिकारियों से भी एक साल के पूरे हो जाने की खुशी में अध्यक्ष मैडम के निज सहायक गायकवाड़ ने घुम - घुम कर चंदा जमा किया। उल्लेखनीय है कि हाल ही में बैतूल जिला मुख्यालय पर जिला योजना मंडल की बैठक में आरईएस विभाग की समीक्षा के दौरान आरईएस के कार्यपालन यंत्री केएस वानिया पर भड़कते हुए उक्त धमकी दी थी । थोड़ी देर के लिए तो बैठक में सन्नाटा ही छा गया लेकिन इसके बाद तो आरईएस को लेकर भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने ही आरोपों की झड़ी लगा दी। हाल ही में बैतूल से सीहोर तबादला होकर गए सीईओ बीएस जामोद को लेकर भी उन्हीं जनप्रतिनिधियों ने जमकर आरोप लगाए, जिनसे जामोद के बेहतर संबंध बताए जाते थे। जिले के अधिकांश निर्माण कार्यों के मूल्यांकन में सब इंजीनियर लापरवाही बरत रहे हैं। बिना रिश्वत लिए कोई काम नहीं हो रहा है।
अधिकारी दफ्तरों से ही काम कर रहे हैं। फील्ड में कभी कोई सुध नहीं लेता। ऐसे कई आरोप भाजपा नेताओं ने जिला योजना समिति की बैठक में मध्यप्रदेश के वन मंत्री एवं बैतूल जिले के प्रभारी मंत्री सरताज सिंह के सामने अपनी ही सरकार के आला अफसरों पर लगाए। जिला पंचायत के सभा कक्ष में जिला योजना समिति की बैठक अधिकारियों के लिए परेशानी भरी साबित हुई। प्रभारी मंत्री सरताज सिंह ठीक 11 बजे सभाकक्ष में पहुंच गए थे, इस समय तक अधिकांश विभाग प्रमुख सभा कक्ष में नहीं पहुंच पाए थे। अधिकारियों का इंतजार करने के लिए प्रभारी मंत्री सीईओ के चैंबर में जाकर बैठ गए। मौजूद अधिकारियों ने अन्य अधिकारियों को फोन पर बुलावा भेजा। भागते-दौड़ते अधिकारी साढ़े 11 बजे तक सभाकक्ष में पहुंचे, तब कहीं जाकर बैठक शुरू हो पाई। पाले से प्रभावित फसलों के सर्वे और मुआवजे की समीक्षा के दौरान उस वक्त माहौल गर्मा गया जब नेताओं ने कहा कि किसानों को सर्वे की जानकारी नहीं मिल रही है। चेक देते समय उसे यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कितने क्षेत्र की फसल को सर्वे में शामिल किया गया है और किस आधार पर मुआवजा तय हुआ है।
किसी भी अधिकारी ने क्षेत्र में जाकर सर्वे की मॉनिटरिंग नहीं की। यही कारण है कि किसानों की फसल का आधा-अधूरा मूल्यांकन हो रहा है। इस पर प्रभारी मंत्री ने नाराजगी जताई। जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा पवार ने आरोप लगाए कि ग्राम पंचायत क्षेत्रों में हो रहे निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग और मूल्यांकन के लिए सबइंजीनियर नहीं पहुंचते। अधिकांश सबइंजीनियर टूर के नाम पर गायब रहते हैं। भाजपा के ही जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा पंवार ने तो महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में सब इंजीनियर और एसडीओ द्वारा कमीशन लिए जाने का आरोप लगाते हुए बताया कि बघोली बुजुर्ग से मालेगांव ग्रेवल सड़क निर्माण में रोलर चलाया ही नहीं और राशि निकाल ली गई। बैठक में मौजूद पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल ने यह कहा कि भ्रष्टाचार इंजीनियर, सब इंजीनियर, एसडीओ करते हैं और वसूली गरीब सरपंचों पर होती है। जबकि गड़बड़ी के लिए पूरी तरह से यह तकनीकी अधिकारी ही जिम्मेदार है।
पिछले तीन साल में आरईएस द्वारा करवाए गए कार्यो की जांच को लेकर भी भाजपा के विधायक अलकेश आर्य और गीता उइके ने आवाज उठाई तो बाकी सभी ने इसका समर्थन किया। इस पर पालक मंत्री सरताज सिंह ने यह कहा कि आगामी 17 फरवरी को आरईएस को लेकर ही फिर बैठक में सभी जनप्रतिनिधि क्षेत्र की दो-दो सड़कों की जानकारी देंगे।इ सकी जांच भोपाल के दल द्वारा की जाएगी। बैठक में भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने विद्युत कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी जमकर आक्रोश जाहिर किया। जिसमें शार्टेज के आधार पर किसानों से जबरन वसूली की बात भी कहीं गई। वहीं 14 नए सब स्टेशनों का काम धीमी गति से चलने पर भी नाराजगी जाहिर की।इस पर जिला भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने टिप्पणी की कि यहां जो कमाई हो रही है उससे भोपाल में बंगले बन रहे हैं। आरईएस और पीडब्ल्यूडी के सबइंजीनियरों की कार्यशैली को लेकर विधायकों ने भी जमकर खिंचाई की।पीएचई और पीडब्ल्यूडी के निर्माण कार्यों को लेकर जनप्रतिनिधियों के आक्रोश को देखकर प्रभारी मंत्री सरताजसिंह ने कहा कि प्रत्येक ब्लाक की दो-दो सड़कों की जांच कराई जाएगी। निर्माण कार्यों की समीक्षा के लिए जनप्रतिनिधियों की बैठक शीघ्र ही होगी। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष लता राजू महस्की, विधायक अलकेश आर्य, चैतराम मानेकर, गीता उइके, सहकारी बैंक अध्यक्ष बसंत माकोड़े, ग्रामीण कृषि विकास बैंक अध्यक्ष सदन आर्य समेत अन्य जनप्रतिनिध एवं अधिकारी मौजूद थे।

पीआरओ बन जन सम्पर्क कार्यालय चला रहा है चतुर्थश्रेणी कर्मचारी

कलैक्टर को कटींग भिजवाने की आड़ में होता है ब्लेकमेलिंग सौदेबाजी का खेल


बैतूल// रामकिशोर पंवार ( टाइम्स ऑफ क्राइम)

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मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले का जन सम्पर्क कार्यालय में भले ही सहायक सूचना अधिकारी की पदस्थापना हो जाती हैं लेकिन पूरा जन सम्पर्क कार्यालय एवं जिले में पीआरओ बन कर एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही अवैध चौथ वसूली का कार्य एक दो नहीं बल्कि पूरे एक दशक से अधिक समय से कर रहा है। भोपाल में बैठे जन सम्पर्क विभाग के आला अफसरो का कथित मुंह लगा जन सम्पर्क विभाग का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपने आप को कर्मचारी संघ का नेता बता कर जहां एक ओर प्रशासन पर अपनी कथित पहुंच का दबाव बना कर उन्हे ब्लेकमेल कर रहा हैं वही दुसरी ओर वह यह तय करता हैं कि जिले में किस पत्रकार की $खबर की कतरन कलैक्टर तक पहुंचाई जाए या नहीं।
सबसे शर्मनाक बात तो यह हैं कि जन सम्पर्क विभाग के अभी तक के अधिकारी उसके सामने पानी भरते है और जो उसकी बात नहीं मानता हैं तो उसे वह पत्रकारो से आपस में लड़वा देता है या फिर जिला प्रशासन से उसे उलझा देता हैं। दो पूर्व जन सम्पर्क अधिकारियों का हश्र भी इसी चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी की नीति और रीति के चलते हुआ था। बैतूल में पदस्थ रहे सहायक संचालक जन सम्पर्क श्री धौलपुरिया का पूर्व कलैक्टर चन्द्रहास दुबे एवं अरूण भटट से विवाद के पीछे का षडय़ंत्र भी इसी कर्मचारी की ही देन है। पत्रकार गगनदीप खरे एवं रजत परिहार के बीच कथित वाद विवाद को हवा देकर इसी कर्मचारी रूपी नेता ने दोनो को लड़वा दिया। इस घटना का दुखद पहलू यह रहा कि श्री धौलपुरिया के कहने पर एक कर्मचारी की शिकायत पर दोनो पत्रकारो के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा एवं अनुसूचित जाति जन जाति प्रताडऩा अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज करवाया गया। कलैक्टर से विवा के चलते श्री धौलपुरिया की जल्दी से बिदाई हो गई।
इसी कड़ी में बीते दो वर्षो से प्रशासन एवं पत्रकारों के बीच मध्यस्थता कर रहे सहायक सूचना अधिकारी गुलाब सिंह मर्सकोले एवं बैतूल कलैक्टर के बीच विवाद का बीज बोने में इसी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की कथित भूमिका रही। बताया जाता हैं कि जन सम्पर्क कार्यालय में लिपीक के अभाव में कार्यालय की लेखा शाखा का कार्य एपीआरओ श्री मर्सकोले ने इस कर्मचारी नेता को न देकर एक अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को दे रखा था जिसके चलते विभाग की आतंरिक कलह बाजार में आने लगी। लाल बंगले को खाली करवाने की कलैक्टर की तथाकथित एपीआरओ से बातचीत को भी इसी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी द्वारा सार्वजनिक कर पत्रकारो को आपस में ही एक दुसरे से उलझा कर लाल बंगले को खाली करवाने को लेकर हुई कथित सौदेबाजी की कहानी गढ़ कर प्रशासन और पत्रकारों के बीच एक लम्बी चौड़ी दिवार खीच कर दोनो को आपस में लड़वा कर एपीआरओं को मोहरा बना कर उसे कलैक्टर के विवाद में बलि का बकरा बना दिया गया। सूत्रो का तो यहां तक कहना हैं कि पिछले छै माह से बैतूल आने का लालयीत वर्तमान एपीआरओ एवं इस कर्मचारी नेता के बीच हुई कथित सौदेबाजी के चलते सोची समझी साजिश के तहत एक षडय़ंत्र रचा गया।
जिसके लिए कलैक्टर को मोहरा बना कर जानबुझ का लाल हवेली का मामला उछाला गया। अपने विभाग की गोपनीयता से लेकर एसडीएम और कलैक्टर के द्वारा लाल बंगले को खाली करवाने के गोपनीय शासकीय पत्रों को सार्वजनिक कर एक ओर कलैक्टर के कथित विरोधी पक्ष के पत्रकारो को भड़काने का काम किया गया वही दुसरी सवर्ण जाति के कुछ पत्रकारों के साथ मिल कर कलैक्टर को आदिवासी एपीआरओ मर्सकोले के खिलाफ इस कदर भड़काया गया कि कलैक्टर और एपीआरओं के बीच हुए विवाद ने सवर्ण जाति के एपीआरओं के रास्ते का कांटा बना आदिवासी एपीआरओं को बलि का बकरा बनना पड़ा। पूरे मामले के कुछ रोचक तथ्य यह सामने आए थे कि एपीआरओं को पता चल चुका था कि चर्तुथ श्रेणी कर्मचारी जन सम्पर्क कार्यालय से प्रतिदिन होने वाली कंटिगो को कलैक्टर के कार्यालय भेजने के पूर्व संबधित विभाग के कर्मचारियों को फोन लगा कर डराता एवं धमकाता था कि यदि उनके खिलाफ छपी कतरने कलैक्टर तक पहुंचा दी गई तो उनकी नौकरी पर आफत आ जाएगी। कलैक्टर तक वे ही कतरने भेजी जाती थी जिसमें कुछ मिला न हो।
समय - समय पर कलैक्टर एवं एपीआरओं के बीच चले शीतयुद्ध का इस चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने भरपुर फायदा उठाया और आज भी वहीं कार्य कर रहा हैं। अब बैतूल जन सम्पर्क कार्यालय का वर्तमान सवर्ण जाति के एपीआरओं के आने के बाद एक बार फिर दलित एवं आदिवासी तथा पिछड़े वर्ग के पत्रकारो के साथ वहीं होगा जो अभी तक नहीं हुआ था। अब बैतूल जन सम्पर्क कार्यालय में अधिमान्यता से लेकर विज्ञापन तक की दुकाने लगेगी और चपरासी से लेकर अधिकारी तक मिल बाट कर माल कमायेंगें।

अपने ममेरे ससुर पर लगाया दहेज न देने का आरोप

शिवराज की कन्यादान योजना के पात्रों को ही नहीं मिल रहा दान

बैतूल// रामकिशोर पंवार ( टाइम्स ऑफ क्राइम)

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अपने ममेरे ससुर पर लगाया दहेज न देने का आरोप हैं
शिवराज की कन्यादान योजना के पात्रों को ही नहीं मिल रहा दान
प्रदेश की लाड़लियों के लोकप्रिय जगत मामा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अति महात्वाकांक्षी कन्यादान योजना अब विवादो में घिर गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के अनुसार दहेज लेना एवं देना कानून की नज़र में अपराध हैं तब बैतूल जिले की उस युवक का क्या होगा जो अपनी पत्नि के साथ अपने ममेरे ससुद शिवराज सिंह के सुशासन में कुछ बैतूल जिले के अधिकारी उसे दहेज नहीं दे रहे हैं। इस सनसनी खेज आरोप का अंदाजा इस घटना से लगाया जा सकता है कि शादी के नौ माह बाद भी कन्या को मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत मिलने वाला दान - दहेज नहीं मिल सका है। महिला ने इसकी शिकायत जिला कलैक्टर की जनसुनवाई के दौरान करते हुए आरोप लगाया कि मामा के राज्य में उसके साथ उसे दान - दहेज का वादा करने के बाद भी वादा खिलाफी हो रही हैं। प्रभारी जिला कलैक्टर से अपना दान दहेज , उपहार सामग्री दिलाने की मांग की करने वाली दंपति ग्राम बरेठा झल्लार थाना क्षेत्र की रहने वाली हैं। श्रीमति अनिता इवने ने बताया कि उसका विवाह ग्राम चौकी निवासी समाज के प्रेम उइके से मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत ग्राम हरदू मे 12 मई 2010 को हुआ। योजना के तहत शादी रचाने वाली महिला को उपहार में सामग्री प्रदान की जाती है। अनीता ने बताया कि शादी होने को अब नौ महीने से अधिक समय हो गया है, लेकिन अभी तक उपहार में कुछ नहीं दिया गया है। अनिता ने बताया कि हरदू में कन्यादान योजना के तहत शादी करने वाली और भी महिलाएं है, जिन्हें योजना के उपहार में मिलने वाली सामग्री नहीं मिली है। महिलाएं सामग्री के लिए अधिकारियों के चक्कर काट काट कर थक गई हैं

दैहिक शोषण का अडड बनी खाण्डसारी मिले पुलिस की अवैध कमाई के धंधे

बने आदिवासी बालाओं के साथ रोज हो रहे दुराचार के मामले

बैतूल, रामकिशोर पंवार
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दैहिक शोषण का अडड बनी खाण्डसारी मिले
पुलिस की अवैध कमाई के धंधे बने आदिवासी बालाओं के साथ रोज हो रहे दुराचार के मामले
आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले की आदिवासी बालाए आजकल जिले की आमला एवं मुलताई तहसील के कुछ क्षेत्रों में कार्यरत खाण्डसारी मिलों में दैहिक शोषण एवं दुराचार के मामलों की शिकार बन रही हैं। पुलिस के संरक्षण में रही पौने दो सौ से अधिक खाण्डसारी मिलो में कार्यरत आमला विधानसभा क्षेत्र की सैकड़ो आदिवासी बाला किसी ने किसी खाण्डसारी मिल पर रोज रात्री में किसी न किसी वासना के भूखे दंरिदे की यौन कुंठा का शिकार बन रही हैं। जिले की देश भक्ति जनसेवा का तमगा लगानी वाली पुलिस इन दुराचार एवं दैहिक शोषण की शिकार बनी आदिवासी बालाओं की आड़ में खाण्सरी मिलों के संचालको से चौथ वसूली करने में लगी हुई हैं।
प्रतिमाह एक खाण्डसरी मिल से आमला एवं बोरदेही थाना प्रभारी के अलावा अजाक के थाना प्रभारी तक को एक मोटी रकम दी जाती हैं। इन सबके बाद भी पुलिस किसी न किसी आदिवासी बाला के नाम का सहारा लेकर किसी ने किसी मिल पर मिल ही जाती हैं। पुलिस को सूचना न देने पर पुलिस अपना गुस्सा सीधे - साधे आदिवासियों पर निकालती हैं। आमला से बोरदेही मार्ग पर चुटकी के पास उत्तर भारत के किसी राठौड़ के द्वारा एन आर आई हाजी साहब से खरीदी गई। खाण्डसारी मिल पर भाटिया नामक युवक द्वारा सारनी क्षेत्र की दो युवतियों के साथ किये गए दुराचार के मामले में घटना के प्रत्यक्षदर्शी युवक को पुलिस ने मल संचालक के इशारे पर देर रात में बेरहमी से पीटा। उस आदिवासी युवक की गलती मात्र इतनी थी कि वह अपने साथियों के साथ दुराचार की शिकार हो रही आदिवासी लड़कियों को बचाने के लिए दौड़ पड़ा था।
मिल के संचालक ने रात्री में ही कुंभकरणी निंद्रा मेंं सोई पुलिस को जगा दिया और पुलिस ने उस युवक को ही बेरहमी से पीट डाला। दुराचार की शिकार बनी लड़कियों से घटना के संदर्भ में कुछ पुछताछ करना भी उचित नहीं समझा और उस युवक को बेरहमी से पीट डाला और विरोध करने पर उसके संगी साथियों पर डकैती एवं लूट का मामला तक दर्ज करने की धौंस दे डाली। आदिवासी नेता राजेश वटकी को जब इस बात की भनक लगी तो उसने अपने साथियों के साथ मीडिया के समक्ष पूरे मामले की जानकारी ली। श्री वटकी पूरे मामले को लेकर बैतूल जिला मुख्यालय पर धरना - प्रदर्शन करने जा रहे है। बैतूल जिले में कार्यरत पौने दो सौ मिलो मेे एक समुदाय विशेष के लोगो की बड़ी संख्या में उपस्थिति का बैतूल जिले के बोरदेही एवं आमला थाने में कोई रिकार्ड एवं चरित्र सत्यापन दर्ज नहीं हैं। बैतूल जिले में यूपी के बदायूं जिले के चार सौ से लोग इस समय विभिन्न मिलों में कार्यरत है। अवैध खतरनाक हथियारों से लैस इन यूपी के अपराधिक चरित्र के एक समुदाय विशेष के लोगो के बैतूल जिले में मौजूदगी के बाद उनके द्वारा किये जाने वाले कृत्य भी सामने आने लगे हैं।
आमला तहसील में अवैध रूप से संचालित इन खाण्डसारी में होने वाली गतिविधियों के प्रति पुलिस का ढुलमुल रवैया किसी दिन किसी भी बड़ी घटना को अजंाम दे सकता हैं। खाण्डसारी मिलों में उत्तर भारत के लोगो की मौजूदगी पर दोनो थाना क्षेत्रों की पुलिस संरक्षक के रूप में उभरती छबि के चलते आदिवासी एवं गरीब सीधे - साधे किसानो का आर्थिक एवं शारीरिक शोषण अब दैहिक शोषण में बदलने लगा हैं। बैतूल जिले में बड़े पैमाने पर हो रहा है अवैध खांड़सारी मिलो के अनैतिक कारोबार पर जिले भर के सरकारी विभाग खामोश हैं।
मध्यप्रदेश की भगवा सरकार के राज्य में किसानों के हमदर्द मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की राज्य सरकार के अधिनस्थ कार्यपूरे सरकारी विभाग की मौजूदगी में किसानो का हो रहा शोषण बैतूल : प्रदेश सरकार के कृषि विभाग के अधिनस्थ कार्यरत गुड़ उत्पादक विभाग एवं प्रदुषण विभाग की बिना अनुमति के एक नहीं पूरे 176 खांड़सारी एवं शक्कर की उत्पादक मिलो का अवैध कारोबार बैतूल जिले के आमला विकासखण्ड में धडल्ले से चल रहा है। बैतूल जिले की शासकीय एवं अनुसूचित जाति एवं जनजाति के गरीब किसानो से किराये पर ली गई जमीन पर उत्तर प्रदेश के एक मात्र बदायु जिले से आने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के करीब पौने दौ सौ लोगो द्वारा संचालित इन खांड़सारी मिलो में सारे नियमों को ताक में रख कर बड़े पैमाने पर अध कच्चा गुड़ का जिसे खांड़सारी अथवा राब भी कहते है का उत्पादन कर उत्तर प्रदेश , बिहार , पश्चिम बंगाल को भेजा जा रहा है। औसतन प्रतिदिन दस से बारह ट्रको से छिन्दवाड़ा होते हुये परिवहन किये जाने वाले ट्रक मालिको एवं विके्त्रा द्वारा कृषि उपज मंडी तथा सेल टैक्स विभाग को कोई शासकीय शुल्क चुकाया जाता है।
जहां एक ओर राजनैतिक संरक्षण में चल रहे है इन खांड़सारी मिलो के संचालको द्वारा समय - समय पर किसानो के साथ कथित धोखाधड़ी किये जाने के भी मामले प्रकाश में आ रहे है वही दुसरी ओर इनके द्वारा हर साल नये स्थान पर नए नाम के साथ अपनी मिलो को स्थापित भी किया जा रहा है ताकि किसानो में भ्रम की स्थिति बनी रहे। बीते वर्ष 2010 में छिन्दवाड़ा जिले के एक ही ग्राम चांद के सौ से अधिक किसानो के साथ धोखाधड़ी का मामला भी प्रकाश में आया है। चांद गांव के किसी शैलू पटेल के कथित संरक्षण में चल रही एक खांड़सारी मिल के संचालक द्वारा करीब 25 लाख रूपये का गन्ने का भुगतान किये बिना ही नौ दो ग्यारह हो जाने से किसानो के परिवारो को भूखे मरने की स्थिति आ गई थी। उक्त खांड़सारी मिल के संचालक द्वारा इस बार बैतूल जिले के आमला विकासखड़ के जम्बाड़ा ग्राम में अपनी मिलो को स्थान परिर्वतन कर लगाया गया है।
बैतूल जिले में चार से छै माह तक अस्थायी रूप से लगने वाली इन अवैध खांड़सारी मिलो द्वारा पूरा काला कारोबार ग्राम एवं तहसील तथा जिले के कुछ तथाकथित स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियो , वकीलो , पत्रकारो , राजनैतिक दलो के नेताओं, तथा शासकीय विभागो के आला अफसरो के संरक्षण में चल रहे इस अवैध कारोबार के चलते किसानो द्वारा अपने गन्ने से न तो गुड़ का उत्पादन किया जा रहा है और न उत्पादन करवा कर गुड़ को मुलताई एवं बैतूल बाजार की गुड़ मंडिय़ो में लाकर बेचा जा रहा है। बड़े पैमाने पर दबाव डाल कर या तरह - तरह के लोभ लालच देकर किसानो का खेतो में लगा गन्ना अपने लोगो से कटवा कर अवैध रूप से परिवहन में लगे बिना नम्बरो के टैक्टर ट्रालियो से लाकर मिलो में पहुंचाया जा रहा है। सबसे चौकान्ने वाली बात तो यह है कि बैतूल जिले के अकेले आमला विकासखण्ड में पौने दो सौ अवैध खांड़सारी की मिलो में एक क्षेत्र विशेष के एक ही समुदाय के सैकड़ो लोग बोरदेही एवं आमला थाना में अपनी मुसाफिरी लिखवाये बिना ही रह रहे है।
इन लोगो के पास अवैध रूप से हथियारो का जखीरा लोगो को डराने एवं धमकाने के अलावा अपने कारोबार की तथाकथित सुरक्षा के नाम पर एकत्र कर रखा है। अकसर कम दाम पर किसानो का गन्न अपनी - अपनी खांडसारी मिलो के लिए खरीदने के चलते इन लोगो के बीच गैंगवार की स्थिति भी अकसर बन जाती है। भाजपा शासन काल में प्राकृतिक आपदा के चलते किसानो की लगातार मौते के बीच किसानो का कम भाव में गुण्डागर्दी एवं डरा धमका कर खरीदे जाने वाले गन्ना एवं अवैध खांडसारी मिलो की जानाकारी राज्य एवं केन्द्र सरकार के बैतूल जिले के कार्यरत कृषि विभाग , कृषि उपज मंडियो , खाद्य विभाग विभाग , नापतौल विभाग , पुलिस विभाग , सेल टैक्स विभाग , इनकम टैक्स विभाग सहित पूरे सरकारी मोहकमे को रहने के बाद भी पूरा कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। अंतराज्यीय खांड़सारी , राब , शक्कर के परिवहन तथा व्यापार के बदले सभी को कुछ न कुछ इस अवैध काले कारोबार से मिलता है। बैतूल जिले के इस काले कारोबार में भारतीय लोगो की साझेदारी तो समझ में आती लेकिन अब तो इस कारोबार में अप्रवासी भारतीय भी कुद गये है। आमला - बोरदेही मार्ग पर चुटकी - खतेड़ा जोड़ में हाजी साहब नामक अप्रवासी भारतीय द्वारा पिछले तीन सालो से जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन को जानकारी दिये बिना ही कारोबार बिना किसी रोक - टोक के संचालित किया जा रहा है।
इस वर्ष हाजी साहब द्वारा अपने कारोबार को बरेली के किसी बड़े करोड़पति को बेच कर पुन: अपनी नई खांड़सारी मिल को स्थापित किया जा रहा है। नजूल की जमीन पर कथित लीज लेकर स्थापित खांड़सारी मिल के स्थापना के पूर्व गन्ना उत्पादक विभाग एवं प्रदुषण विभाग की अनुमति के बिना चल रही इस प्रकार की मिलो से जिले के किसानो के गन्ने का गुड़ नहीं बन पा रहा है।

बाबा रामदेव का कुत्ता















































एक्सएमएलए जी, बिटिया की शादी में दे रहे हैं हेलिकॉप्टर!

नई दिल्ली।। अब तक आपने शादी में महंगी गाडि़यां, सोना चांदी व रुपया गिफ्ट देते हुए तो सुना होगा, लेकिन दिल्ली में एक शादी ऐसी हो रही है, जिसमें सगाई में हेलिकॉप्टर गिफ्ट में दिया गया है। यह शादी है दिल्ली विधानसभा और लोकसभा चुनाव में बीएसपी के उम्मीदवार रहे कंवर सिंह तंवर के बेटे ललित तंवर की। उनकी शादी हो रही है सोहना से विधायक रहे सुखबीर सिंह जौनपुरिया की बेटी से। शादी 1 मार्च को होगी।

बताया जा रहा है कि शुक्रवार को हुई सगाई में जौनपुरिया ने अपने होने वाले दामाद को गिफ्ट के रूप में हेलिकॉप्टर दिया है। लोगों में इस शादी को लेकर चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि यह शादी एक यादगार साबित होगी।

कंवर सिंह तंवर ने बताया कि गिफ्ट में कोई भी पिता बेटी को कुछ भी दे सकता है।जहां तक एक 1 मार्च को होने वाली शादी का सवाल है तो शादी पूरे रीति रिवाज के साथ होगी। शाम 6:30 बजे के करीब बारात छतरपुर स्थित उनके फार्म हाउस से चलकर करीब 7 बजे सुखबीर फार्म हाउस पहुंचेगी।

शादी को यादगार बनाने के लिए कई पंजाबी गायक और जाने-माने कलाकार शिरकत करेंगे। कंवर सिंह तंवर विधानसभा चुनावों में छतरपुर सीट से बीएसपी के उम्मीदवार थे। उन्होंने 154 करोड़ के करीब अपनी संपत्ति का ब्यौरा दिया था। वह दिल्ली के सबसे अमीर उम्मीदवार थे। उन्होंने लोक सभा का चुनाव भी लड़ा था। लेकिन इस चुनाव में बीएसपी के ही दीपक भारद्वाज ने अपनी संपत्ति 602 करोड़ दिखाई और राजधानी में अब तक के सबसे अमीर उम्मीदवार साबित हुए।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सावित्री की आत्म हत्या की पुष्टि की

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बाराबंकी। क्रूरता की सारी हदे पार करके अपने जिगर के टुकड़ो दो कमसिन बच्चो की हत्या कर आत्म हत्या करने वाली सावित्री की मौत आत्म हत्या से ही हुई थी इस बात की पुष्टि आज अन्त्य परीक्षण की रिपोर्ट में डाक्टर द्वारा कर दी गयी।
नगर कोतवाली अंतर्गत नई बसी मुनेश्वर विहार बस्ती के एक छोटे से कमरे में एक ऐसा खौफनाक नजारा शायद ही इससे पूर्व नगर के किसी स्थान में देखने को मिला हो। जब 30 वर्षीय विवाहिता सावित्री का शव एक तख्त पर मृतक अवस्था में गिरा पड़ा था। पास ही प्लास्टिक की दो कुर्सिया तले उपर रखी थी रोशन दान से एक सूत की रस्सी लटक रही थी जिसे काटकर सावित्री के शव को उतारा गया था तख्त के नीचे चंद फिट के फासले पर सावित्री के दो मासूम बच्चो क्रमशः सत्यम (5) व रितेश (2) के शव पड़े हुए थे सत्यम का शव देखने से लगता था कि उसे धारदार असलहे से कई वार गर्दन पर करके मारा गया था आधी गर्दन उसकी कट चुकी थी पास ही दो वर्ष का छोटा बालक रितेश लेटा था उसकी नरखटी के बीचो बीच एक गहरा छेद स्पष्ट रुप से दिख रहा था। बच्चो के शवो के पास ही एक अदद दरमियानी साइज का बाॅका पड़ा हुआ था जिस पर रक्त का निशान मौजूद था उसी के करीब सब्जी काटने वाला लगभग पाॅच इंच का एक चाकू भी पड़ा हुआ था जिस पर रक्त का कोई निशान नही दिख रहा था।
यह दिल को दहला देने वाला मंजर देखकर मुनेश्वर विहार मोहल्ले के हर आदमी के मुॅह से एक ही आवाज निकलती थी कि बड़ा दर्दनाक हादसा है और एक माॅ क्या इतनी निर्दयी हो सकती है कि अपने खून से बने अपने जिगर के टुकड़ो को एक के बाद एक इतनी बेरहमी से काट कर उन्हे मार सकती है?
पुलिस को इस बात पर शक था कि शायद माॅ ऐसा नही कर सकती इसीलिए उसने सबसे पहले मृतका के पति अम्बर लाल वर्मा को अपनी हिरासत में ले लिया था।जिसने पुलिस को यह बताया कि बीती रात उसका झगड़ा पत्नी से उसके मायके मे रहने वाले इन्दर लोध से मोबाइल द्वारा बराबर बात करने को लेकर हुआ था और बात इतनी बढी कि क्रोध में आकर उसने पत्नी का मोबाइल तोड़कर फेंक दिया। दोनो पति पत्नी ने रात में खाना भी नही खाया और सो गए। प्रातः उठकर अपने काम पर ठेकेदार अमर सिंह वर्मा जिसके पास वह विगत 12 वर्षाे से मेठ के पद पर नौकरी करता था, जाने से पहले अपने दोनो बच्चो को बिस्किट खरीदवाने ले गया और घर पर छोड़ कर काम पर चला गया। ठेकेदार अमर सिंह के अनुसार अम्बर उसके यहाॅ से अपने घर के लिए दिन के 12 बजे रवाना हुआ और पुनः थोड़ी देर बाद उसका फोन उसके मोबाइल पर आया कि उसके दोनो बच्चो की हत्या करके उसकी पत्नी ने आत्म हत्या कर ली है।
उधर मृतका सावित्री की मृत्यु की सूचना पाकर जनपद गोण्डा के थाना करनैल गंज के फत्तेपुरवा ग्राम निवासी हरिनाम वर्मा अपनी माॅ प्रभा देवी व छोटी छोटी तीन बहनो व परिवार के अन्य सदस्यो के साथ बिलखता हुआ आया और आते ही उसने अपने बहनोई पर आरोप लगाया कि इसी के व्यवहार से हादसा हुआ है और उसकी बहन व उसके भाॅजो को अम्बर ने ही मार डाला है। हरिनाम के अनुसार अम्बर अव्वल दर्जेे का जुॅआरी व शराबी था और दीपावली के कुछ पहले उसने बहन के कहने पर अम्बर को 50 हजार रुपये इस लिए दिए थे कि जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय मे सफाई कर्मी के पद पर होने वाली नियुक्ति में रिश्वत देने के लिए अम्बर को जरुरत थी। परन्तु अम्बर ने दिवाली में अपने गांव सिरौलीगौसपुर थाना बदोसरायं मे जुए मे सारी रकम हार डाली। इस बात को लेकर पति पत्नी में इतना तनाव बढा वह मायके आकर बैठ गयी मृत्यु से 8 दिन पहले ही मुनेश्वर विहार क्वार्टर आयी थी हरिनाम के अनुसार मरने से एक रात पहले 6ः44 बजे सावित्री का फोन उसके मोबाइल पर आया और उसके द्वारा बताया गया कि चार दिन के बाद अम्बर आज घर आया है परन्तु कोई बात उससे नही कर रहा है। यह उसकी आखिरी बातचीत अपनी बहन के साथ थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भले ही सावित्री की मौत का कारण आत्म हत्या बताकर पुलिस का काम आसान कर दिया हो क्योंकि पुलिस के अनुसार मुल्जिम भी उसके कब्जे में है परन्तु मुनेश्वर विहार में यह बात किसी के गले के नीचे नही उतर रही है। कारण यह कि अम्बर ने जब अपने कमरे मे कदम रखा तो दरवाजा अन्दर से बंद था तो वह किसने खोला? क्या सावित्री बरामदे में खुलने वाले दरवाजे को खुला छोड़कर हिंसा का नग्न नाच,कर रही थी? यदि नही तो फिर अम्बर के आने पर दरवाजा किसने खोला? दूसरा प्रश्न जो खड़ा होता है वह यह कि अम्बर ने जब अपनी पत्नी को फाॅसी के फन्दे पर झूलता देखा तो उसने पुलिस को सूचित करने के बजाए उसे क्यों उतारा? अम्बर का यह जवाब कि उसका छोटा बेटा रितेश में कुछ जान बाकी थी इसलिए उसे लेकर पहले वह पास के कृष्णा नर्सिंग होम दौड़ता गया जहाॅ डाक्टरो ने जब उसके बच्चे को मृत्यु घोषित कर दिया तो पुनः वह अपने क्वार्टर आया उसके बाद उसने सबसे पहले अपने मालिक ठेकेदार अमर सिंह वर्मा को मोबाइल पर सूचना दी पुलिस को तब भी सूचना न देना एक और सवाल खड़ा करता है। फिर छोटे बेटे को यदि पास रखी सब्जी की छूरी से घोंपकर उसकी हत्या की गयी है तो फिर छूरी में रक्त का निशान क्यों नही था।

क्या गांधी छोटी छोटी लड़कियों के साथ सोते थे?

(कनिष्क कश्यप की बक बक)
जी हाँ, मात्र यहीँ नहीँ और कई बातेँ को सुनकर आपको भी आपको आश्चर्य होगा , मसलन

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  • क्या झांसी की रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों का साथ देती थीं?
  • क्या स्वामी विवेकानंद ने लोगों को गोमांस खाने को कहा था?
  • क्या लक्ष्मण की सीता के प्रति कामभावना थी?
  • स्वामी विवेकानन्द ने गोमांस खाने की वकालत की थी.

खबर नवभारत टाइम्स मेँ छपी. इससे पहले की हम कोई वैचारिक समर का आगाज़ करेँ आईये पहले खबर पर नज़र डालेँ . भारत के इतिहासपूर्ण समन्वित से जुड़े ये अजीब-ओ-गरीब दावे अमेरिका की शिकागो यूनिवर्सिटी की प्रफेसर वेंडी डोनिगर ने अपनी किताब ’द हिंदू- ऐन ऑल्टरनेटिव हिस्ट्री’ में किए हैं। इस किताब को लेकर भारत और अमेरिका में खासा विरोध हो रहा है। इसी विरोध के चलते किताब को अमेरिका में मिलनेवाला एक पुरस्कार भी रोक दिया गया। मंगलवार को शिक्षा बचाओ आंदोलन नामक एक संगठन ने दिल्ली समेत देश के कई भागों में इस किताब के खिलाफ प्रदर्शन किया और इस पर दुनियाभर में बैन लगाए जाने की मांग की। अमेरिकी दूतावास के सामने प्रदर्शन के बाद संगठन के संयोजक दीनानाथ बत्रा ने कहा कि इस किताब की लेखिका ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर भारतीय इतिहास को पेश किया है, जो सरासर गलत है। इस किताब को पेंगुइन बुक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने छापा है। संगठन इस पब्लिशिंग हाउस के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर भी विचार कर रहा है। संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अगर इस किताब पर महीने भर के भीतर बैन नहीं लगाया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। सामाजिक संगठनों ने एक अमरीकी प्रोफेसर की हिन्दू धर्म, भारतीय संस्कृति और महापुरूषों को अपमानित करने वाली पुस्तक द हिन्दू एन अल्टरनेटिव हिस्ट्री पर पूरे विश्व में प्रतिबंध लगाने की मांग की है . शिक्षा बचाओ आन्दोलन समिति के नेतृत्व में इस पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए कार्यकर्ताओं ने आज यहां अमरीकी दूतावास के सामने प्रदर्शन किया और गिरफ्तारी दी। प्रदर्शनकारियों ने भारत में अमरीका के राजदूत को ज्ञापन भी दिया। समिति के राष्ट्रीय संयोजक दीनानाथ बत्ना ने आरोप लगाया है कि पुस्तक की लेखिका शिकागो विश्वविद्यालय की प्रो. वेंडी डोनिगर ने भारत के इतिहास और हिन्दुओं के बारे में घृणा भरी मानसिकता से निराधार तथा अस्पष्ट वर्णन किया है। उन्होंने दावा किया है कि पुस्तक में भगवान श्रीकृष्ण, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बारे में आधारहीन और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं। उन्होंने कहा है कि इस पुस्तक के खिलाफ भारत और अमरीका में आंदोलन जारी हैं तथा इन्हीं आंदोलनों के चलते वेंडी डोनिगर को अमरीका का राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार देने पर रोक भी लगा दी गई है। श्री बत्ना ने कहा कि यदि इस पुस्तक पर एक महीने के भीतर रोक नहीं लगाई गई तो भारत के अलावा दुनिया भर में इसके खिलाफ आंदोलन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि पुस्तक की लेखिका और पुस्तक के प्रकाशक पेंगुइन बुक्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कानूनी कार्रवाही भी की जायेगी। अमरीकी राजदूत को दिये गये ज्ञापन में कहा गया है कि इस पुस्तक में दी गई जानकारी कपोल कल्पित तथा आधारहीन है और भारत के लोग इससे बहुत अधिक आहत हैं। राजदूत से पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने के साथ साथ लेखिका के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई है। श्री बत्ना ने कहा कि उन्होंने इस मामले को अमरीकी राष्ट्रपति के संज्ञान में लाने के लिए उन्हें भी पत्न लिखा है। http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/5973729.cms
क्या झांसी की रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों का साथ देती थीं?
क्या स्वामी विवेकानंद ने लोगों को गोमांस खाने को कहा था?
क्या लक्ष्मण की सीता के प्रति कामभावना थी?
स्वामी विवेकानन्द ने गोमांस खाने की वकालत की थी.

wendy donigar क्या गांधी छोटी छोटी लड़कियों के साथ सोते थे?(कनिष्क कश्यप की बक बक) क्या गांधी छोटी छोटी लड़कियों के साथ सोते थे?(कनिष्क कश्यप की बक बक) यह खबर नवभारत टाइम्स मेँ छपी. इससे पहले की हम कोई वैचारिक समर का आगाज़ करेँ आईये पहले खबर पर नज़र डालेँ . भारत के इतिहास से जुड़े ये अजीब-ओ-गरीब दावे अमेरिका की शिकागो यूनिवर्सिटी की प्रफेसर वेंडी डोनिगर ने अपनी किताब ’द हिंदू- ऐन ऑल्टरनेटिव हिस्ट्री’ में किए हैं। इस किताब को लेकर भारत और अमेरिका में खासा विरोध हो रहा है। इसी विरोध के चलते किताब को अमेरिका में मिलनेवाला एक पुरस्कार भी रोक दिया गया। मंगलवार को शिक्षा बचाओ आंदोलन नामक एक संगठन ने दिल्ली समेत देश के कई भागों में इस किताब के खिलाफ प्रदर्शन किया और इस पर दुनियाभर में बैन लगाए जाने की मांग की। अमेरिकी दूतावास के सामने प्रदर्शन के बाद संगठन के संयोजक दीनानाथ बत्रा ने कहा कि इस किताब की लेखिका ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर भारतीय इतिहास को पेश किया है, जो सरासर गलत है। इस किताब को पेंगुइन बुक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने छापा है। संगठन इस पब्लिशिंग हाउस के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर भी विचार कर रहा है। संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अगर इस किताब पर महीने भर के भीतर बैन नहीं लगाया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। सामाजिक संगठनों ने एक अमरीकी प्रोफेसर की हिन्दू धर्म, भारतीय संस्कृति और महापुरूषों को अपमानित करने वाली पुस्तक द हिन्दू एन अल्टरनेटिव हिस्ट्री पर पूरे विश्व में प्रतिबंध लगाने की मांग की है . शिक्षा बचाओ आन्दोलन समिति के नेतृत्व में इस पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए कार्यकर्ताओं ने आज यहां अमरीकी दूतावास के सामने प्रदर्शन किया और गिरफ्तारी दी। प्रदर्शनकारियों ने भारत में अमरीका के राजदूत को ज्ञापन भी दिया। समिति के राष्ट्रीय संयोजक दीनानाथ बत्ना ने आरोप लगाया है कि पुस्तक की लेखिका शिकागो विश्वविद्यालय की प्रो. वेंडी डोनिगर ने भारत के इतिहास और हिन्दुओं के बारे में घृणा भरी मानसिकता से निराधार तथा अस्पष्ट वर्णन किया है। उन्होंने दावा किया है कि पुस्तक में भगवान श्रीकृष्ण, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बारे में आधारहीन और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं। उन्होंने कहा है कि इस पुस्तक के खिलाफ भारत और अमरीका में आंदोलन जारी हैं तथा इन्हीं आंदोलनों के चलते वेंडी डोनिगर को अमरीका का राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार देने पर रोक भी लगा दी गई है। श्री बत्ना ने कहा कि यदि इस पुस्तक पर एक महीने के भीतर रोक नहीं लगाई गई तो भारत के अलावा दुनिया भर में इसके खिलाफ आंदोलन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि पुस्तक की लेखिका और पुस्तक के प्रकाशक पेंगुइन बुक्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कानूनी कार्रवाही भी की जायेगी। अमरीकी राजदूत को दिये गये ज्ञापन में कहा गया है कि इस पुस्तक में दी गई जानकारी कपोल कल्पित तथा आधारहीन है और भारत के लोग इससे बहुत अधिक आहत हैं। राजदूत से पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने के साथ साथ लेखिका के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई है। श्री बत्ना ने कहा कि उन्होंने इस मामले को अमरीकी राष्ट्रपति के संज्ञान में लाने के लिए उन्हें भी पत्न लिखा है।

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Friday, February 25, 2011

फिर आ धमकी सीबीआई नेताओं की धकडऩ़े बढ़ी पारधियों के पुन: लिए जा रहे अंगूठे के निशान

बैतूल// रामकिशोर पंवार ( टाइम्स ऑफ क्राइम)
toc news internet चैनल

बैतूल जिले में जब -जब सीबीआई चौथिया पारधी कांड को लेकर आ धमकती हैं तब- तब पारधीकांड को लेकर आरोपो के घेरे में आ चुके कांग्रेस, भाजपा, सपा के नेताओं की दिल की धड़कने बढऩे लगती हैं।
अचानक बैतूल आई सीबीआई की टीम ने मुलताई तहसील की ग्राम पंचायत चौथिया के सचिव विजय सराठकर और पटवारी गुलटकर को तलब किया। इन दोनों के बयान भी रिकॉर्ड कर जिला मुख्यालय में शरणार्थी का जीवन जी रहे पारधियों के अंगूठे के निशानों को दोबारा लिया गया हैं। ग्राम पंचायत चौथिया में पारधी कांड के पहले ग्राम पंचायत चौथिया द्वारा अतिक्रमण में बसे पारधियों को हटाए जाने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। करीब 51 पारधी परिवारों को यह नोटिस दिए थे। पारधियो का कहना था कि फर्जी अंगूठों के निशान थे और बच्चों तक के नाम से नोटिस जारी किए गए थे। उनके मकान भी बिना पूर्व सूचना के सुनियोजित तरीके से तोड़े गए हैं। अतिक्रमण हटाने के पूर्व लिए गए अंगूठो की जांच करने के लिए एक बार फिर से दिल्ली से आए सीबीआई अधिकारी गुप्ता के साथ आई टीम ने पिछले दो दिनों से पारधियों के दोनों डेरों से पारधियों को तलब कर नए सिरे से अंगूठे लगवाने का काम किया है, ताकि दोनों निशानों के बीच तुलनात्मक पड़ताल की जा सके।पूरे अंगूठे गलत तरीके से लगाए गए थे। पारधियों के अंगूठे के निशान नहीं थे और अब अचानक नए - नए फण्डे के साथ आ धमकी सीबीआई ने पुन: बुलाकर अंगूठे लगवा रही है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। पारधी सरगना अलस्या पारधी के अनुसार जांच के परिणाम कब तक आएगें हमें नहीं मालूम लेकिन इस तरह सीबीआई के आ धमकने से हमें रोज एक नई सुबह का इंतजार रहता हैं। उस सुबह के चक्कर में अभी तक 28 पारधियों की मौते भी हो चुकी हैं। बैतूल जिला मुख्यालय पर बने अस्थाई सीबीआई के कार्यालय के सामने जब भी वाहनो का जमावड़ा होने को लगता हैं जिले की मीडिया और राजनीति में उथल - पुथल शुरू हो जाती हैं। जिले के पूर्व एवं वर्तमान विधायक, पूर्व सासंद ,सहित आधा दर्जन नेता तथा लगभग आधा दर्जन अधिकारी पारधी कांड को लेकर सीबीआई के द्वारा दर्ज अपराध में आरोपी बनाए जा चुके हैं। पूरे मामले में पिछले कई सालों से सिर्फ जांच चल रही हैं जिसके चलते सीबीआई की गिरफ्त से बाहर जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की दिल की धड़कने बढऩे लग जाती हैं।

शैफाली की जेल में सुरंग कहीं गोद भराई करने वालों ने तो नहीं की......?

शैफाली की जेल में सुरंग
कहीं गोद भराई करने वालों ने तो नहीं की......?


बैतूल, रामकिशोर पंवार
toc news internet channel

के चुने हुए जिलों में से एक है आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिला जहां सुश्री शैफाली तिवारी नामक महिला जेल अधिक्षक पदस्थ हैं। सुश्री शैफाली यूं तो शोले की गब्बर सिंह या फूलनदेवी की तरह कोई डाकू नहीं है बल्कि चोर उच्चको को सुधारने वाली सुधारगृह की अधिक्षक हैं। महिला जेल अधिक्षक को इस बात के लिए चिंता सता रही हैं कि उनकी जेल में आखिर ऐसी कौन सी सुरंग खुद गई कि अकसर आलू चोर सुरंग से आकर आलू ही चोरी करके नौ - दो ग्यारह हो जाती हैं। दबंग छवि की यह महिला अधिक्षक वैसे तो सुदंरता में किसी से कम नहीं हैं लेकिन भोली सूरत पर इस समय इस बात को लेकर मायूसी हैं कि उनकी जेल की चार दिवारी को भलां कोई कैसे लांध सकता हैं। फिल्म शोले में जिस तरह अंग्रेजों के जमाने के जेलर के होश जेल में सुरंग खोदे जाने की खबर से उड़ गए थे। ठीक इसी तरह अंग्रेजों के जमाने की बैतूल जेल में जहां पर परिंदा भी पर नहीं मार सकता वहां से कथित आलू खोदकर चोरी किए जाने से की घटना से सुश्री शैफाली तिवारी को गहरा धक्का लगा हैं।
अभी कुछ दिन पहले ही मीडिया में सुर्खियों में छाई रही बैतूल जेल अधिक्षक सुश्री शैफाली तिवारी ने बाजे - गाजे के साथ जेल कैम्पस में अपने पति को आत्महत्या के लिए उकसाने वाली एक महिला की गोद भरवाई का कार्यक्रम संपादित करवाया था। महिला बाल विकास विभाग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों तथा भाजपा सासंद श्रीमति ज्योति बेवा प्रेम धुर्वे की उपस्थिति में सम्पन्न हुए गोद भराई के कार्यक्रम की अपार पब्लिसिटी के बाद अचानक नींद से जाग उठी सुश्री शैफाली लगातार एक सप्ताह से जेल परिसर में विचारधीण कैदियों द्वारा लगाई गई आसू की फसल की निगरानी के बावजूद चोरी का खुलासा न होने से हैरान एवं परेशान हैं। सुश्री शैफाली तिवारी को समझ नहीं आ रहा कि उनकी जेल से आलू की चोरी करने वाले चोर को धरती खा गई या आसमान निगल गया है। वही दुसरी ओर बैतूल जिले में बंद 350 कैदियों में कई शातीर - चोर - उच्चके - गुण्डे - मवाली यहां तक कि लूटेरे तक हैं इन सब लोगो की मेहनत पर पानी फेर कर जाने वाले चोर का पता नहीं लगने से उनकी भी हालत पतली हो चुकी हैं।
बैतूल जेल परिसर के अंदर कैदियों ने पहली बार आलू और गेहंू की खेती शुरू की। जिसमें करीब तीन एकड़ में आलू की फसल बोई थी और वर्तमान में आलू भी तैयार हो गए हैं। आलू की इस फसल को अज्ञात चोरों द्वारा रात के समय चुराकर ले जाने का काम चल रहा है। चोर आलू खोदकर निकाल लेते हैं और आलू के पौधे को वहीं छोड़ देते हैं। लगातार एक सप्ताह से धड़ल्ले से चल रही इस चोरी ने जेल प्रबंधन को शर्मसार कर दिया हैं उनकी समझ में यह नहीं आ रहा है कि आखिर चोर आते कहां से हैं और जाते कहां है?
बैतूल जेल जो कि सुरक्षा के लिहाज से बेहद मजबूत और अभेद किले की तरह मानी जाती है। हालाकि बहुंत कम लोगो को पता होगा कि खेड़ला के किले से जो सुरंग एलिजपुर आज के अचलपुर महाराष्ट्र तक जाती हैं। उस सुरंग का रास्ता जेल के अंदर से भी जाता हैं। सैकड़ो सालों से बंद सुरंग के अंदर कहीं कोई हलचल तो शुरू नहीं हो रही हैं इस बात से भी जेल प्रबंधन परेशान हैं। जिला जेल में इस तरह आलू की फसल चोरी होने से जेल के अधिकारियों को तो चिंता में डाल दिया हैं लेकिन पुलिस भी कम सकते में नहीं हैं कि आखिर यदि जेल प्रबंधन चोरी की रिर्पोट लिखवाता हैं तो उसे कैसे लिखे.....?
वर्तमान में जिला जेल में 6 बैरक में 350 कैदी बंद है और इनकी सुरक्षा के लिए महज 17 सुरक्षा प्रहरी तैनात है। खाने के शौकिन कथित आलू चोरों ने जेल की सुरक्षा और अधिकारियों के अभेद जेल होने के दावे पर सवालिया निशान लगा दिया है। सबसे मजेदार बात यह हैं कि दिमाग में नम्बर वन कहे जाने वाले पंडितो जिसमें जेल अधिक्षक सुश्री शैफाली तिवारी एवं उप जेल अधिक्षक एस एन शुक्ला के पदस्थ हैं। हालाकि इस समय जेल अधिक्षक सुश्री शैफाली तिवारी दो दिन से छुटट्ी पर हैं इसलिए उनसे कोई घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी हैं।

बाबा रामदेव बताएं कि उनके गुरु साढ़े 3 साल से हैं कहां?

देहरादून। बेशक बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम में अगुआई की हो लेकिन धीरे-धीरे वे कई आरोपों से खुद ही घिरते जा रहे हैं।

कांग्रेस के पूर्व मंत्री व वर्तमान में टिहरी से विधायक किशोर उपाध्याय ने बाबा रामदेव पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव के गुरु शंकर देव जो आज से साढ़े तीन साल पहले रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे, उनका आज तक पता नहीं चला है। टिहरी विधायक ने आरोप लगाया है कि शंकर देव के लापता होने से पहले रामदेव और उनके बीच कई मुद्दों पर मतभेद गहरा गए थे। जिसके बाद शंकर देव लापता हो गए। शंकर देव दिव्ययोग मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख संरक्षक हुआ करते थे।

उन्होंने बताया कि बाबा रामदेव ने दिव्ययोग मंदिर ट्रस्ट से पुराने ट्रस्टियों को बाहर निकाल दिया और अपने सारे रिश्तेदारों को शामिल कर लिया है। विधायक ने कहा कि काले धन की बात करना अच्छी बात है, काला धन देश में वापस आना चाहिए, लेकिन बाबा रामदेव ये भी बताएं 12 साल में कई हजार करोड़ की संपदा कैसे जमा की गई। इनके ट्रस्टों में पैसा किस किस का लगा है।

वहीं, दूसरी ओर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि बाबा रामदेव देश की सेवा कर रहे हैं। कांग्रेस हल्ला क्यों मचा रही है।

-संजीव शर्मा, देहरादून से

भगवान भरोसे हो गई बैतूल जिले की स्वास्थ सेवा गांव से लेकर शहर तक हर जगह अव्यवस्था का ही आलम



भगवान भरोसे हो गई बैतूल जिले की स्वास्थ सेवा गांव से लेकर शहर तक हर जगह अव्यवस्था का ही आलम
बैतूल, रामकिशोर पंवार:
मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले की आमला तहसील के ग्राम बोरदेही के सरकारी अस्पताल में बीते करीब छ: महीनों से जननी एक्सप्रेस नहीं है। यह वाहन नहीं होने से डिलेवरी करवाने अस्पताल तक पहुचने में महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।वहीं अब सप्ताह में 2 दिन डॉक्टर पहुंचनें से लोगों ने थोड़ी राहत महसूस की है। यहां करीब छ: माह पहले तक वाहन उपलब्ध था, लेकिन कुछ कारणों से वाहन की सेवाएं बंद हो गई है।लिहाजा अब महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचना है तो आशा कार्यकर्ता का मुंंह ताकना पड़ता है या फिर किराए का वाहन लेकर अस्पताल पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि वाहन नहीं होने से उन्हें जहां अक्सर अधिक खर्च उठाना पड़ता है तो कई बार वाहन नहीं मिलने पर जिंदगी और मौत से जूझने जैसी परेशानी का सामना भी करना पड़ता है। जानकारी के मुताबिक करीब 6 माह पहले तक अस्पताल में जननी एक्सप्रेस की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन कुछ समय बाद इसे बंद कर दिया गया। तब से यह समस्या बढ़ गई है। जानकारी के मुताबिक पर्याप्त प्रकरण नहीं मिलने के कारण संबंधित ने यहां वाहन की सेवा देना बंद कर दिया है। इटावा सरपंच उमा प्रमोद सोनी, हथनोरा की संध्याबाई राजेंद्र सिंह, बामला के भवानी सूर्यवंशी, बोरदेही के संजय सूर्यवंशी, हथनोरा के भगवत पटेल, घाटावाड़ी के हरिराम पटेल का कहना है कि प्राइवेट वाहन बंद भी हो गया है तो शासन अस्पताल में स्थाई वाहन का इंतजाम किया जाना था। ग्राम पंचायत की शिकायतों से कई ज्यादा गंभरी हैं बैतूल जिला मुख्यालय के मुख्य अस्पताल की जहां पर ओपीडी में डाक्टरों के बैठने के समय में कोई सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। प्रतिदिन जिला चिकित्सालय में सभी डयूटी पर पदस्थ डाक्टर अपने कक्षों से नदारद रहते हैं। इससे मरीजों को देर तक इंतजार करना पड़ा। कतार लगाकर खड़े मरीज कहने को मजबूर हो गए कि, डॉक्टर साहब कब आएंगें.....? जिला अस्पताल में सुबह 8 से 1 बजे तक डॉक्टरों की ड्यूटी रहती है। वैसे तो जिला चिकित्सालय में मरीजों की हमेशा लम्बी कतार लगी रहती हैं। सुबह से मरीज ओपीडी में बैठकर डॉक्टरों का इंतजार करते रहे। कई बार तो सुबह से देर शाम तक डॉक्टरों के नहीं आने पर कई लोग तो बिना उपचार कराए ही वापस चले जातें हैं। गौठान से डॉक्टर को स्वास्थ्य दिखाने आई युवती कमलती ने बताया कि वह साढ़े 9 बजे से डॉक्टर के आने का इंतजार कर रही है। कक्ष में डॉक्टर नहीं है तो फिर किसे दिखाऊं...? अस्पताल में अक्सर ऐसी ही स्थिति बनी रहती है। बच्चे को इंजेक्शन लगवाने वाले भी अकसर सुबह 9 बजे से आकर डाक्टरों को ताकते रहते हैं। डाक्टरों के कक्ष में बैठने का इंतजार करते रहे। बीते दिनो मोबाइल टार्ज में हुई महिला की डिलेवरी की घटना को लेकर हुई अपने विभाग की फजी़हत के बाद जिला चिकित्सालय बैतूल अधिक्षक द्वारा रानीपुर अस्पताल में एक महिला के प्रसव में लापरवाही के मामले में पदस्थ महिला डॉक्टर पुष्पारानी को तलब किया है। सीएमएचओ डॉ. डीके कौशल ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रानीपुर में पदस्थ चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीमती पुष्पारानी सिंह को निर्धारित मुख्यालय पर नियमित न रहने, स्वास्थ्य केंद्र में रात में दरवाजे पर हुए एक प्रसव में लापरवाही के मामले में कारण बताओ नोटिस दिया है। सीएमएचओ ने नोटिस में डॉ. पुष्पारानी को निर्धारित मुख्यालय पर निवास कर मरीजों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने तथा अधीनस्थ कर्मचारियों का मुख्यालय पर निवास सुनिश्चित करने के लिए भी पाबंद किया है। परिवार कल्याण कार्यक्रम के क्रियान्वयन में उदासीनता एवं लापरवाही बरतने के मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र प्रभातपट्टन में पदस्थ एलएचवी रेणुका कातलकर तथा महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता सत्यफुला देशमुख को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सीएचएमओ डॉ. डीके कौशल ने बताया कि निलंबन अवधि में दोनों कर्मचारियों का मुख्यालय जिला अस्पताल बैतूल होगा। इतना सब कुछ होने के बाद भी हर मंगलवार को लगने वाले मेडिकल बोर्ड में कर्मचारी तो बैठे मिले, लेकिन डॉक्टर नहीं आए। समय में परिवर्तन के बावजूद डॉक्टरों ने अपनी सीटों पर बैठकर ही आवेदनोंं पर हस्ताक्षर किए और टाइम पर निकल गए। हर मंगलवार को लगने वाले मेडिकल बोर्ड के बैठने के समय में प्रभारी मंत्री के निर्देश पर परिवर्तन कर दिया गया है। इससे अब बोर्ड सुबह 9 से 1 बजे की जगह 4 बजे तक लगेगा। यह परिवर्तन मेडिकल व विकलांग सर्टिफिकेट बनाने आने वाले लोगों की सुविधा के लिए किया गया था। इस मंगलवार को लगे मेडिकल बोर्ड में कर्मचारी बैठकर सील-सिक्के लगाते रहे, लेकिन डॉक्टर नहीं बैठे। दूर-दराज से आने वाले लोगों को प्रमाण पत्रों पर सील-सिक्के लगाने के बाद डाक्टरों को ढूंढते रहना पड़ा। डाक्टरों ने ओपीडी में बैठकर प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षकर करने का काम निपटाया और एक बजे राइट टाइम पर घर रवाना हो गए। मेडिकल बोर्ड के नियम के मुताबिक डॉक्टरों को बोर्ड में बैठना चाहिए, लेकिन वे बोर्ड में न बैठकर ओपीडी में हस्ताक्षर करते रहे। जिन व्यक्तियों को डॉक्टर मिल गए तो उनके प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर हो गए, लेकिन जिन्हें नहीं मिले उन्हें भटकते रहना पड़ा। मुलताई चूनाभट्टी गांव के रमेश अपनी विकलांग बेटी का प्रमाण पत्र बनाने आए थे। उनके प्रमाण पत्रों पर सील सिक्के तो लग गए थे, लेकिन डाक्टरों के हस्ताक्षर कराने उन्हें कक्षों में परेशान होते रहना पड़ा। मेडिकल बोर्ड में सिविल सर्जन डॉ. डब्ल्यूए नागले, डॉ. ओपी माहोर, डॉ. पीके कुमरा, डॉ. डीटी गजभिए, डॉ. के बाजपेयी, डॉ. श्रीमती आर गोहिया, आरएमओ डॉ. एके पांडे सदस्य हैं। मंगलवार की शाम 4 बजे बोर्ड कक्ष में डॉ. बाजपेयी और अस्पताल परिसर में डॉ. नागले नजर आए। इनके अलावा कोई डॉक्टर नहीं था। मेडिकल बोर्ड की दीवार पर प्रमाण पत्र बनाने की सूचना के संबंध में चस्पा पर्चें में टाइम टेबल नहीं बदला गया। इस पर्चे पर सुबह 9 से 1 बजे का टाइम लिखा हुआ था। इससे लोग भ्रमित होते नजर आए। जबकि टाइम सुबह 9 से 4 बजे तक का हो चुका है। इसे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। मेडिकल बोर्ड के सदस्य डॉक्टरों ने ओपीडी में पहुंचने वाले लोगोंं के प्रमाण पत्रों के बनाने का काम निपटाया। दोपहर 1 बजे तक 35 विकलांग और 28 मेडिकल प्रमाण पत्र बनाए। इसके बाद कोई प्रमाण पत्र नहीं बन सके। क्योंकि 1 बजे ओपीडी बंद हो जाती है। बोर्ड का समय 4 बजे का होने के बावजूद डॉक्टर नहीं आए। इससे 1 बजे के बाद आने वाले लोगों को परेशान होना पड़ा। वे डाक्टरों के बैठने का इंतजार करते रहे। विकलांगता श्रेणी में मिलने वाली छूट एवं फायदों के लिए अब अपात्र भी एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। यही कारण है कि अस्पताल के आसपास दलालों की सक्रियता भी बढ़ गई है। 40 प्रतिशत विकलांगता की पात्रता के लिए लोग जहां बार-बार अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। वहीं इनकी हर सप्ताह बढ़ती संख्या से जिला मेडिकल बोर्ड भी खासा चितिंत है। विकलांगता प्रमाण-पत्र से मिलने वाले लाभ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब प्रमाण-पत्र बनाने की कतार में फै्रक्चर और मामूली विकलांगता वाले भी खड़े नजर आ रहे हैं। जिला मेडिकल बोर्ड का कहना था कि अधिकांश लोग लाभ के लिए प्रमाण-पत्र बनवाना चाहते हैं। यहीं कारण है कि एक बार अपात्र घोषित कर दिए जाने के बाद भी वे दोबारा यहां आ रहे हैं। जिससे ?से लोगों की संख्या बढ़ रही है। विकलांगता प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए हर मंगलवार को करीब एक सैकड़ा से अधिक लोग जिला अस्पताल के चक्कर काटते हैं। जबकि नियमानुसार जिला मेडिकल बोर्ड द्वारा 40 प्रतिशत से ऊपर विकलांगता होने पर ही प्रमाण-पत्र जारी किए जाते हैं, लेकिन कुछ लोग विकलांगता प्रमाण-पत्र का लाभ लेने अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। देखने में आ रहा है कि अपात्र लोग भी विकलांगता प्रमाण-पत्र बनाने के लिए आ रहे हैं। बार-बार इनके आने से अस्पताल में भीड़ बढ़ जाती है। इस स्थिति से निपटने के लिए अब जिला चिकित्सालय बैतूल में कम्प्यूटर फिडिंग के संबंध में भी विचार किया जा रहा है ताकि ?से लोग आसानी से पकड़े जा सके।

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