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Friday, April 3, 2026

93 लाख के घोटाले में जबलपुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा निलंबित


93 लाख के घोटाले में जबलपुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा निलंबित

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जबलपुर। लगातार घोटाले दर घोटाले की आंच आखिरकार सीएमएचओ जबलपुर डा संजय मिश्रा तक पहुंच गई और तत्काल प्रभाव से आयुक्त लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग ने निलंबित कर दिया है। प्रभारी मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी, जिला जबलपुर सह क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं जबलपुर संभाग यानी दो प्रमुख पदों से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही निलंबन काल में मिश्रा का मुख्यालय कार्यालय क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल संभाग नियत किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

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मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा फर्जी देयकों से भुगतान मामले में जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह द्वारा गठित जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर भोपाल मुख्यालय से यह आदेश जारी किए गए हैं। इस पूरे मामले में सरकारी खजाने को करोडों रुपये की चपत लगाने के साथ ही महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों के गायब होने की पुष्टि हुई है। जांच में पाया गया कि विभागीय स्तर पर वित्तीय नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई और बिना सामग्री प्राप्त किए ही निजी कंपनियों को भुगतान कर दिया गया।


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उल्लेखनीय है कि कलेक्‍टर राघवेन्‍द्र सिंह ने मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी कार्यालय में फर्जी देयक लगाकर भुगतान किये जाने के प्रकरण में दोषी पाये जाने पर स्‍टोर कीपर का दायित्‍व संभाल रहे फार्मासिस्‍ट नीरज कौरव को तत्‍काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था‌। वही इसी मामले में संविदा आधार पर नियुक्‍त जिला कार्यक्रम प्रबंधक आदित्‍य तिवारी एवं फार्मासिस्‍ट जवाहर लोधी को मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी कार्यालय से हटाकर जांच पूरी होने तक सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र सिहोरा में पदस्‍थ किया है।

डॉ. राहुल अग्रवाल एवं डॉ. आकाश जैन द्वारा संचालित क्‍लीनिकों का पंजीयन तत्‍काल प्रभाव से निरस्‍त

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संविदा आधार पर इन दोनों कर्मचारियों के विरूद्ध कार्यवाही का प्रस्‍ताव डायरेक्‍टर एनएचएम को भेजा गया था। ज्ञात हो कि कलेक्‍टर श्री सिंह द्वारा मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी कार्यालय में फर्जी देयकों के माध्‍यम से साईनेज निर्माण तथा स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र सामग्री के नाम से भोपाल की निजी कंपनी को बिना सामग्री प्राप्त हुए भुगतान किये जाने की शिकायतें प्राप्‍त होने पर डिप्‍टी कलेक्‍टर रघुवीर सिंह मरावी के नेतृत्‍व में जांच दल गठित किया था।

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जांच में पाया गया था 12 फर्जी देयकों के माध्‍यम से भोपाल की सिंह एंटरप्राइजे़ज को साइनेज एवं स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र सामग्री के नाम से 93 लाख 04 हजार 998 रूपये का भुगतान किया जा चुका है। जबकि, भौतिक रूप से यह सामग्री प्राप्‍त ही नहीं हुई थी। जांच रिपोर्ट को आगे की कार्यवाही के लिए डायरेक्‍टर एनएचएम भोपाल को प्रेषित कर दिया गया था।

  • भोपाल की एक फर्म को 82.51 लाख का क्रय आदेश जारी कर भुगतान भी कर दिया, जबकि सामग्री आज तक रिसीव नहीं हुई। 
  • शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं में बिना रंगाई-पुताई किए एवं बिना कम्प्यूटर सुधार किए 51.30 लाख का फर्जी भुगतान।
  • जबलपुर की एक फर्म को 25 लाख का भुगतान, इसमें वर्क ऑर्डर 2 मार्च को जारी हुआ और 3 दिन में बिल लगा दिया गया। 
  • जबलपुर की फर्मों से कम्प्यूटर सामग्री नहीं ली गई, सीएमएचओ स्टोर में इससे जुड़ी एंट्री नहीं है, फिर भी भुगतान किया गया।

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