Wednesday, November 17, 2010

वन वृक्षों के सफाया,अवैध खनन, वन्य जीवों के पलायन से पर्यावरण को खतरा

ब्यूरो प्रमुख उ. प्र. // सूर्य नारायण शुक्ल (इलाहाबाद //टाइम्स ऑफ क्राइम) ब्यूरो प्रमुख उ. प्र. से सम्पर्क 99362 २९४०१
शिकायतों को दबा दिया जाता है, हो रहे है मालामाल
केन्द्रीय और प्रान्तीय वन पर्यावरण मंत्री से कार्यवाहीं की दरकरार
कोरांव। इलाहाबाद। यदि वन, पर्यावरण वन्य जीव, जन्तु, को दोहन देश,मानव जीवन,पर्यावरण के लिये खतरा है, क्षति है तो शासन, प्रशासन केन्द्र और प्रदेश सरकारें क्यों मूक दर्शक हैं, शिकायतों पर अमल क्यों नहीं किया जाता? दोषीअफसरों, कर्मियों माफियाओं की नप रही गर्दनों को क्यों बचा लिया जाता है।उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश सरकार बैठे भारतीय वन सेवा से लेकर प्रादेशिक वन सेवा एवं कर्मियों तक स्वार्थ सेवा करने की परम्परा यदि समाप्त नहीं की गई तो न बचेगें वन और वन्य जीव, न होगी वर्षा और न मिलेगा लोगों को अन्न। यू.पी.के जनपद इलाहाबाद सामाजिक वानिकी प्रभाग अन्तर्गत, सबसे सुन्दर रमणीक, प्राकृतिक आरक्षित पर्वतीय वन कोरांव वन रेंज, मीरजापुर के ड्रमगंज वन रेंज तथा हलिया व मध्यप्रदेश के यू.पी. सीमा पर स्थित हनुमना,मऊगंज, चाकघाट वन रेंज जनपद रीवा में देखने को मिलता है। इसके बाद इलाहाबाद के मेजा तथा शंकरगढ़ वन रेंज भी कुछ प्राकृतिक शोभा को बढ़ाए हुए हैं।उक्त जंगलों में अक्सर शेर, भालू, हिरन, नीलगाय, सांभर, लकड़बग्घा, जंगली सूअर, सियार निरन्तर दिखाई पड़ते है। माननीय सुप्रीम कोर्ट से लेकर उच्च न्यायालय उ.प्र. मे अवैध खनन आदि उत्खननों पर पूर्णतया पाबन्दी लगा रखी है। इसके बावजूद वनधिकारियों, कर्मियों ने एवं माफियाओं ने लम्बी कमाई, ऐशो इशरत के चक्कर में पड़कर वन पर्यावरण की सुरक्षा का ध्यान नहीं दिया। अवैध खनन कटानों से हरे भरे वन वृक्ष,पौध,झाड़-झखड़ नेस्तनाबूत होते गये। गुफाओं में रह रहे वन्य जीव, जन्तु, पक्षियों का बसेरा उजड़ता रहा और आखिरकार उनका पलायन हो गया। वनों में इंसानों के आशियाने बनने लगे, इसकी चिन्ता न तो सरकार ने की और न ही वन रखवालों ने की है।कोरांव वन रेंज अंतरेंती, देवघाट, गाड़ा, हनुमानगंज, महुलीवीट, संसारपंर, बैठकवा, बांसघाट, पंचनगर, नईबस्ती, बड़ोखर, हंडियबसहा, हरदौन, मुरलिया, मोरहना, में प्राकृतिक ढंग से उगे हरसिंगार धौ, कौहा, तेन्दू, प्लास, मेढ़ी, हर्दी, डर्गडौवा, फिटकरी, खैर, सिद्ध, केकड़, परसिधि, महुलाइन, आंवला, सरई, सलई, जिगना, आदि वन वृक्ष प्रजातिया,वन विभाग की मूकदर्शता, स्वार्थपरकता, लापरवाहीं के चलते बर्बाद होती जा रही है। लोग उक्त प्रजाति के कीमती, राष्ट्रीय, वृक्षों, पौधों को लकड़ी के ग_र बना बनाकर बजारों में बेच दे रहे है। अभी हाल में कुछ वन पर्यावरण प्रमियों की शिकायतों -प्रघटनों पर अवैध उत्खनन, कटानों सप्लाईयों पर अंकुश लगा है जिससे आरक्षित वनों, पर्वतों पर हरियाली भी देखने को मिल रही है और वन्य प्राणियों की भी कुछ वापसी नजर आने लगी है। यू.पी. एम.पी. सीमा के हनुमना वन रेंज का अवैध खनन यू.पी् के माफियाओं और उनसे जुड़े वन और पुलिस विभाग के अफसरों -कर्मियों के चलते जारी था, जिसे वन परिक्षेत्राधिकारी हनुमना रीवा ने अभियान चलाकर रोका। यू.पी. के वन अफसर कुछ कर्मी माफियाओं ने रोक धाम मे लगे वन अफसरों,वन पर्यावरण प्रेमियों शिकायतियों पर तरह-तरह के धमकियों फर्जी केसों का दौर शुरू किया है। अन्ततो गंरवरा, हनुमना,वन परिक्षेत्र के अफसरों ने सक्रिय परधर वन माफियाओं पर चाबुक चलाया ट्रक पकड़ी, वन अपराध के केस दर्ज किये। एक वन पर्यावरण प्रेमी,मीडिया से जुड़े व्यक्ति को कोरांव के कुछ पुलिस कर्मी, थाने के दलाल और परधर, वन माफियाओं को जाने से मारने-झूठे केसों में फंसाने की धमकी दी। जिसकी सूचना पुलिस-प्रशासन का दी गयी। अमल न होने पर उक्त पर्यावरण प्रेमी मीडिया परसन न मानवीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की शरण ली। 4 मई 2010 को न्यायालय ने प्रदेश के पुलिस महानिर्देशक को जॉच कार्यवाहीं विनिश्चत करने का आदेश दिया। डी.जी.पी. लखनऊ ने याचिका को निस्तारिता करते हुए आई.जी.पी. लखनऊ ने याचिका को निस्तारिता करते हुए आई.जी.जोन इलाहाबाद को गैर जिले के पुलिस अधिकारी से जांच कार्यवाहीं का आदेश दिया। जिस प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ कार्यालय से हो रही है।वन अपराधियों ने म.प्र. के कुछ वन अफसरों को लम्बी रकम देकर जब्त मह पत्थर पटियाओं को रीलीज करने का आदेश गत सप्ताह कराया, लेकिन मुख्य वन संरक्षक रीवा ने 3 दिसम्बर को उपवन मंडलाधिकारी मऊगंज रीवा के ट्रक रीलीज आदेश को रोक दिया और जांच कार्यवाहीं शुरू कर दी। जिससे वन अपराधियों के हौंसले परास्त हुए। उक्त वनाधिकारी ने अवशेष फरार वन अपराधियों और उनकी और उनकी वांछित ट्रक को गिरप्तार करने एवं जांच कार्यवाही हेतु डी.एफ. ओ. रीवा को आदेश दिया है। किन्तु उ.प्र. के कोरांव और इलाहाबाद जिले के वन अफसरों ने अवैध खनन व उनकी रोकथाम हेतु कारगर कदम नहीं उठाये। इतना तक कि आर.टी.आई के तहत मांगी गई वांछित सूचनाएं भी दी जा रही है। बल्कि अवैध खनन के विरोधियों को तरजीह देना ही बन्द कर दिया गया। किन्तु यह सच है कि अवैध खनन रूकने-कमाई बन्द होने का मलाल जरूर है। वन पर्यावरण,वन्य जीव जन्तु,विभाग या मंत्रालय की नींद कब टूटेगी, यह भविष्य के गर्भ में है? इतना अवश्य चर्चे में प्रकरण है कि क्षेत्रीय आम नागरिकों, वन पर्यावरण प्रेमियोंदकी निरन्तर शिकायतों के बावजूद वन पर्यावरण, वन्य जीव जन्तु विभाग,शासन, प्रशासन वन सम्पदा दोहन करने वाले माफियाओं, वन अफसरों कर्मियों, के विरूद्ध ठोस कार्यवाहीं नहीं करता आखिर क्यों?आम नागरिकों ने केन्द्रीय वन पर्यावरण दिल्ली, तथा उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश के मुख्य मंत्री एवं वन पर्यावरण मंत्री से हस्तक्षेप कर वन पर्यावरण दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाहीं की मांग की है।

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