*"ब्रह्माकुमारीज की वरिष्ठ राजयोगिनी अवधेश दीदी की प्रथम पुण्य तिथि पर मनाया वरदानी दिवस, सेवाओं और प्रेरणादायी जीवन को किया नमन"*
*"त्याग, तपस्या और ईश्वरीय सेवा की मिसाल थीं अवधेश दीदी, प्रथम पुण्य तिथि पर वरदानी दिवस में किया स्मरण"*
*"अवधेश दीदी के स्नेह, संस्कार और सेवाओं को किया याद, प्रथम पुण्य तिथि पर मनाया वरदानी दिवस"*
*"ब्रह्माकुमारीज भोपाल जोन की पूर्व अध्यक्षा अवधेश दीदी की प्रथम पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि, जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान"*
*"अवधेश दीदी ने अपने जीवन से सिखाया सेवा और समर्पण का मार्ग, प्रथम पुण्य तिथि पर मनाया वरदानी दिवस"*
भोपाल। सुख-शांति भवन, नीलबड़ में *ब्रह्माकुमारीज भोपाल जोन की पूर्व अध्यक्षा एवं वरिष्ठ राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अवधेश दीदी जी की प्रथम पुण्य तिथि* श्रद्धा, स्नेह एवं आध्यात्मिक भाव के साथ *‘वरदानी दिवस’* के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर *मध्यप्रदेश के विभिन्न सेवाकेंद्रों से वरिष्ठ राजयोगिनी बहनें विशेष रूप से पधारीं* । शहर के *गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों, उद्योगपतियों एवं पत्रकार बंधुओं ने भी उपस्थित* होकर अवधेश दीदी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
अवधेश दीदी जी का जीवन केवल एक सेवाधारी के रूप में नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, मातृवत स्नेह, आध्यात्मिक नेतृत्व और निरंतर ईश्वरीय सेवा की प्रेरणा के रूप में स्मरण किया गया। ब्रह्माकुमारीज के प्रकाशित विवरण के अनुसार, उन्होंने मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश में आध्यात्मिक सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा उनके मार्गदर्शन से अनेक सेवाकेंद्रों और समर्पित सेवाधारियों को दिशा मिली। वे भोपाल जोन की निदेशिका के साथ-साथ प्रशासक सेवा प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका के रूप में भी सेवाएं देती रहीं।
कार्यक्रम में *माउंट आबू से विशेष रूप से पधारीं वरिष्ठ राजयोगिनी बीके शारदा दीदी जी, राष्ट्रीय संयोजिका, महिला प्रभाग (RERF),* ब्रह्माकुमारीज, ने अवधेश दीदी जी के जीवन को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन त्याग, तपस्या, स्नेह और ईश्वरीय सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण था। उन्होंने कहा कि अवधेश दीदी जी ने अपना जीवन परमात्म सेवा और मानव कल्याण के लिए समर्पित किया। वे स्वयं श्रेष्ठ संस्कारों को धारण करती थीं और अपने संपर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भी श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा देती थीं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि ईश्वरीय ज्ञान को केवल सुनना नहीं, बल्कि उसे जीवन में धारण कर अपने संपर्क में आने वाले लोगों के जीवन में भी प्रकाश फैलाना ही सच्ची सफलता है। उन्होंने कहा कि अवधेश दीदी जी जैसे तपस्वी जीवन से प्रेरणा लेकर हम भी अपने समय, संकल्प और शक्तियों को विश्व कल्याण की सेवा में लगा सकते हैं।
*सीहोर से पधारीं वरिष्ठ राजयोगिनी बीके पंचशीला दीदी जी* ने अवधेश दीदी जी के प्रति अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि अपने जीवन को ईश्वरीय सेवा में समर्पित करने के संकल्प को दृढ़ बनाने में अवधेश दीदी जी की बहुत बड़ी भूमिका रही। उनका स्नेह, मार्गदर्शन और सेवा के प्रति समर्पण हमेशा प्रेरणा देता रहा। उन्होंने कहा कि अवधेश दीदी जी स्वयं एक समर्पित जीवन का उदाहरण थीं और उन्होंने अनेक बहनों को भी ईश्वरीय सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि जब जीवन परमात्मा के प्रति समर्पित हो जाता है, तो प्रत्येक परिस्थिति सेवा और परिवर्तन का माध्यम बन जाती है।
*मुरैना से पधारीं वरिष्ठ राजयोगिनी बीके रेखा दीदी जी* ने अपने बचपन की स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि उन्हें बचपन से ही अवधेश दीदी जी की पालना और स्नेह प्राप्त हुआ। उनके मार्गदर्शन ने जीवन को सही दिशा देने और श्रेष्ठ संस्कारों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि अवधेश दीदी जी का मातृवत स्नेह, आत्मिक दृष्टि और संस्कारों की पालना आज भी जीवन में प्रेरणा देती है। उनके साथ बिताए बचपन के अनुभवों ने जीवन को संवारने और आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने में विशेष सहयोग दिया।
*राजयोग भवन भोपाल की प्रभारी एवं सुख-शांति भवन की निदेशिका, वरिष्ठ राजयोगिनी आदरणीय नीता दीदी जी* ने अवधेश दीदी जी के साथ अपने आत्मीय संबंधों को भावपूर्ण ढंग से स्मरण करते हुए कहा कि वे और अवधेश दीदी जी बचपन से ही एक-दूसरे के संपर्क में थीं। सिंगरौली से शुरू हुआ उनका यह संबंध समय के साथ जीवनभर के आध्यात्मिक स्नेह, प्रेरणा और सहयोग में बदल गया। उन्होंने बताया कि उस समय पत्र-व्यवहार के माध्यम से भी अवधेश दीदी जी उन्हें लगातार प्रेरणा देतीं, प्रोत्साहित करतीं और जीवन में आगे बढ़ने के लिए हिम्मत देती थीं।
नीता दीदी जी ने कहा कि अवधेश दीदी जी की विशेषता थी कि वे सामने वाले की विशेषताओं को पहचानती थीं और उसे आगे बढ़ने का अवसर देती थीं। उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि उनके संपर्क में आने वाले अनेक लोगों को सेवा, समर्पण और आत्मिक उन्नति की नई दिशा मिली। उन्होंने कहा कि अवधेश दीदी जी का स्नेह केवल शब्दों तक सीमित नहीं था, बल्कि आवश्यकता के समय उनका विश्वास और प्रोत्साहन सामने वाले को भीतर से शक्ति देता था।
उन्होंने कहा कि अवधेश दीदी जी ने स्वयं अपना जीवन ईश्वरीय सेवा में लगाकर अनेक स्थानों पर आध्यात्मिक सेवाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके स्नेह, विश्वास और प्रोत्साहन ने अनेक सेवाधारियों को जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति दी। उन्होंने कहा कि अवधेश दीदी जी का जीवन आज भी यही प्रेरणा देता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, परमात्मा की सेवा और मानव कल्याण के कार्य में सदैव उमंग-उत्साह के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए। उनकी स्मृति को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके द्वारा दिए गए संस्कारों और सेवा की प्रेरणा को अपने जीवन में धारण कर आगे बढ़ाया जाए।
कार्यक्रम में *सतना से वरिष्ठ राजयोगिनी बीके मीना दीदी जी* , *उमरिया से बीके निशा दीदी जी* , *कटनी से बीके भगवती दीदी जी* सहित विभिन्न सेवाकेंद्रों से पधारीं वरिष्ठ राजयोगिनी बहनों ने भी अवधेश दीदी जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके सेवामयी जीवन को स्मरण किया।
इस अवसर पर शहर के गणमान्य अतिथियों में *ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के अध्यक्ष विनोद गौतम, हर्ष एक्सप्रेस भोपाल के एमडी कमल पंजवानी, सेंट्रल बैंक ऑफिसर्स ट्रेनिंग सेंटर के प्रिंसिपल राजेश गौरा सहित शहर के जाने-माने उद्योगपति, समाजसेवी, पत्रकार एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिक उपस्थित* रहे। सभी ने अवधेश दीदी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा उनके प्रेरणादायी जीवन को नमन किया।
कार्यक्रम का *कुशल मंच संचालन वरिष्ठ राजयोगी बीके रामकुमार भाई* जी ने किया।
कार्यक्रम के पश्चात सभी ने *ब्रह्मा भोजन* ग्रहण किया।
अवधेश दीदी जी की प्रथम पुण्य तिथि पर आयोजित वरदानी दिवस उनके स्नेह, श्रेष्ठ संस्कारों, त्याग, तपस्या और ईश्वरीय सेवाओं को स्मरण करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने की प्रेरणा के साथ संपन्न हुआ। उपस्थित जनों ने उनके जीवन से प्राप्त आध्यात्मिक प्रेरणाओं को आगे बढ़ाने तथा मानव कल्याण और विश्व सेवा के कार्यों में अपना योगदान देने का भाव रखा।


