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Thursday, September 19, 2019

रजनीकांत की अमित शाह को दो टूक – पूरे देश पर मत थोपो हिन्दी वरना…..

रजनीकांत की अमित शाह के लिए इमेज परिणाम
रजनीकांत की अमित शाह को दो टूक – पूरे देश पर मत थोपो हिन्दी वरना…..
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कमल हासन के बाद अब मशहूर अभिनेता रजनीकांत ने हिंदी भाषा को लेकर दिये गए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर टिप्पणी की है। रजनीकांत ने बुधवार को कहा कि कोई भी दक्षिणी राज्‍य हिंदी भाषा को नहीं अपनाएगा। उन्‍होंने कहा कि हिंदी हो या कोई और भाषा उसे जबरन नहीं थोपा जाना चाहिए।
उन्होंने यहां हवाईअड्डे पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘केवल भारत ही नहीं, बल्कि किसी भी देश के लिए एक आम भाषा होना उसकी एकता एवं प्रगति के लिए अच्छा होता है। दुर्भाग्यवश, हमारे देश में एक आम भाषा नहीं हो सकती, इसलिए आप कोई भाषा थोप नहीं सकते।”
उन्होंने कहा, ‘‘विशेष रूप से, यदि आप हिंदी थोपते हैं, तो तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि कोई भी दक्षिणी राज्य इसे स्वीकार नहीं करेगा। उत्तर भारत में भी कई राज्य यह स्वीकार नहीं करेंगे।”
बता दें कि रजनीकांत से पहले अभिनेता से नेता बने कमल हासन ने भी सोमवार को केंद्र सरकार को ‘एक देश, एक भाषा’ को बढ़ावा देने के खिलाफ चेतावनी दी थी। एक विडियो जारी कर कमल ने अप्रत्यक्ष रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर हमला करते हुए कहा है कि भारत 1950 में ‘अनेकता में एकता’ के वादे के साथ गणतंत्र बना था और अब कोई ‘शाह, सुल्तान या सम्राट’ इससे इनकार नहीं कर सकता है। बता दें कि अमित शाह ने हिंदी दिवस पर ‘एक राष्ट्र, एक भाषा’ की पैरवी की थी।
कमल हासन ने कहा था, ‘जल्लीकट्टू तो सिर्फ विरोध प्रदर्शन था। हमारी भाषा के लिए जंग उससे कई गुना ज्यादा होगी। राष्ट्रगान भी बांग्ला में होता है, उनकी मातृभाषा में नहीं। वह जिस बात का प्रतीक है, उसकी वजह से हम उसे गाते हैं और इसलिए क्योंकि जिस शख्स ने उसे लिखा वह हर भाषा को अहमियत और सम्मान देते थे।’ कमल ने कहा कि भारत एक संघ है जहां सभी सौहार्द के साथ मिलकर बैठते हैं और खाते हैं। हमें बलपूर्वक खिलाया नहीं जा सकता।

Friday, July 26, 2019

ग्रीक इतिहास की खूंखार राक्षसी, इंसान को बदल देती थी पत्थर में


ग्रीक इतिहास की खूंखार राक्षसी, इंसान को बदल देती थी पत्थर में
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आज हम बात करने वाले है ग्रीक के प्राचीन इतिहास की राक्षसी मेडुसा के बारे में. मेडुसा प्राचीन ग्रीस पौराणिक कथाओं के अधिक असामान्य दिव्य आंकड़ों में से एक है। गोरगोन बहनों के तीनों में से एक, मेडुसा एकमात्र बहन थी जो अमर नहीं थी। वह अपने सांप की तरह बाल और उसकी नज़र के लिए प्रसिद्ध है.

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मेडुसा गोरगोन बहनों में से एक थी, फॉर्सी और केटो की बेटी वह एक बार लंबे, सुनहरे बाल के साथ एक सुंदर युवती थीं। हालांकि, उसने पवित्रता का प्रतिज्ञा की शपथ ली और जल्द ही पोसेडॉन के साथ एक चक्कर लगाकर इसे तोड़ दिया, माना जाता है कि एथेना के मंदिर में सजा के रूप में, एथेना ने अपना चेहरा एक पुरानी ईसाई में बदल दिया, उसके सुंदर बालों को सांपों की माने में बदल दिया, और उसकी त्वचा को एक हरा रंग दिया। उसने उसे भी शाप दिया था: जो भी मेडुसा की आँखों में देखेगा वह तुरंत पत्थर में बदल जाएगा। मेडुसा थोड़ी देर के लिए अफ्रीका के माध्यम से घूमते थे, और उनके बाल से निकलने वाले सांप अफ्रीका में जहरीले सांप क्यों हैं.

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पर्सियस को सर्दुहुस के राजा पॉलिटेक्शस द्वारा माडुसा के सिर को वापस लाने के लिए खोज पर भेजा गया था। वह हेमीज़ द्वारा प्रदान की गई पंखों वाला सैंडल, अदृश्यता के हेडस के हेल्म, हेपैस्टस द्वारा प्रदान की गई तलवार और एथेना से एक चिंतनशील ढाल का इस्तेमाल किया। जब उन्होंने मेडुसा को अपनी मांद में देखा, तो उसने ढाली का इस्तेमाल करके मेडुसा का प्रतिबिंब देखा और उसके पीछे तलवार को दबा दिया, उसकी हत्या कर दी। उसने अपने सिर को हटा दिया, और जैसा उसने किया था, उसके बच्चों पेगसस और क्रिससावर उसके रक्त में खून से उग आए थे.

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पर्सियस ने एक बोरी में मेडुसा का सिर रखा था और जब उसने आखिरकार इसे घर बनाया, तो पता चला कि खोज को रास्ते से बाहर निकालने के लिए खोज का एक मकसद रहा है ताकि राजा पॉलिडेटेस पर्सियस की मां दाना से शादी कर सकें। उन्होंने राजा को राजा के पत्थर में बदलने और उसकी मां को बचाने के लिए मेडुसा के सिर का इस्तेमाल किया। उसने फिर अपने सिर को समुद्र के नीचे फेंक दिया, जहां यह मूला बना देता है जहां कहीं भी बहाया जाता है. पौराणिक कथाओं के अन्य संस्करणों में, पर्सियस ने मेडुसा के सिर को एथेना को दिया, जिसने इसे तत्वाधान में पहन रखा था.

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Monday, July 15, 2019

16 जुलाई गुरु पूर्णिमा की रात लगने वाला है चन्द्र ग्रहण, सावधान रहें इन 2 राशि के लोग


16 जुलाई गुरु पूर्णिमा की रात लगने वाला है चन्द्र ग्रहण, सावधान रहें इन 2 राशि के लोग
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तुला राशि : आपका आने वाला समय बहुत ही शुभ हैं। आप अपने व्यापार को नए लेवल तक ले जाने में कामयाबी हासिल करेंगे। अपने जीवन में काफी ज्यादा तरक्की करते हुए नजर आएँगे। आपका व्यापार सफलता की ऊंचाइयों को छुएगा। फैसला लेने से पहले अपने घर में बड़े बुजुर्गों की सलाह अवश्य लें। महादेव की कृपा से आपको सभी बिगड़े काम तेजी से बनेंगे। आपके जीवन में आने वाली विपत्तियां महादेव की कृपा से दूर हो जाएंगी। इनके जीवन का हर एक क्षण सुहाना हो जाएगा नए प्रेमी प्रेमिका के संबंध बेहतर होंगे। परिवार में माहौल शांतिपूर्ण और खुशनुमा रहेगा। 

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कुम्भ राशि : आपका आने वाला समय बहुत ही शुभ हैं। आपको अपना कई वर्षों से खोया हुआ धन पुनः मिलने वाला है। आपके जीवन का हर पल हर लम्हा शानदार तरीके से बीतेगा। आप जो सपने कई वर्षों से देख रहे थे, वह हकीकत में बदलने का समय आ गया है। व्यापार-व्यवसाय में उन्नति के अवसर सामने आएंगे। महादेव की कृपा से आपको सभी बिगड़े काम तेजी से बनेंगे। आपको अपना सच्चा प्यार मिलने की पूरी संभावना नजर आ रही है।आपका दांपत्य जीवन प्रेम से परिपूर्ण होगा।

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आपकी सभी मनोकामनाये पूर्ण होगी। और आपके जीवन में खुशियां ही खुशियां आयेगी। भगवान शिव जी का आशीर्वाद पाने के लिए हमें फॉलो करना ना भूलें। और इस पोस्ट को लाइक और शेयर जरूर करें।

Wednesday, July 3, 2019

जब भर आई एसडीएम अशोक भार्गव सर की आंखें...

जब भर आई एसडीएम अशोक भार्गव सर की आंखें...



TOC NEWS @ www.tocnews.org
जिला ब्यूरो चीफ नीमच  // विश्वजीत भट्ट  : 9575888891 
कमलेश भार्गव, गोल चेहरा घुंघराले बाल और चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट लिए यह प्रशासनिक अधिकारी नीमच की रगो में रच बस गया था, सालों पहले जब बड़े भाई श्री अशोक भार्गव नीमच में एसडीएम थे तभी कमलेश भार्गव प्रशासनिक अधिकारी बनने का लक्ष्य तय किया और एमपीपीएससी की तैयारी में उतर गए, 
रामपुरा में प्रोफेसर रहते हुए उन्होंने डिप्टी कलेक्टर पद की तैयारी शुरू की और तमाम मुसीबतों को साधते हुए अपनी मंजिल तक पहुंचे, इसी बीच पूरे भारतवर्ष में बाइक यात्रा कर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया, करीब 2 साल पहले श्री भार्गव अपर कलेक्टर के पद पर रहते हुए नीमच जिला पंचायत के सीईओ बनकर नीमच आए और अपने काम में ऐसे लगे कि वे नीमच के होकर रह गए ।

"पीएम आवास योजना में नीमच को बनाया नंबर वन"

सरल सहज और सौम्य व्यवहार के धनी श्री कमलेश भार्गव ग्रामीणों की आवाज बने और गांव को सुधारने का संकल्प उन्होंने जो लिया उस पर लगातार कार्य करते रहे
नीमच को प्रधानमंत्री आवास योजना में पूरे देश में नंबर वन लाने का श्रेय से भार्गव को ही जाता है,जिले में सर्वाधिक प्रधानमंत्री आवास बनाकर उन्होंने इतिहास रच दिया और हर बेघर को घर उपलब्ध कराया।

"नीमच में बनाया पहला पंचायत पार्क"

जिला पंचायत के सामने जो भव्य गार्डन तैयार हो रहा है वह जिले का पहला पंचयात पार्क बनने जा रहा है इस पार्क में   जिला पंचायत की हर योजना का मॉडल नजर आएगा ,इस भव्य पार्क  की कल्पना भी कमलेश भार्गव ने की और वह अब मूर्त रूप लेने जा रही है।

# सुख-दुख के लिए बनाया व्हाट्सएप ग्रुप#

कमलेश भार्गव ऐसे अधिकारी रहे जिन्होंने नीमच को जिला नहीं बल्कि अपना परिवार समझा, अपने अधिकारी कर्मचारियों के लिए हमेशा समर्पित रहे और कार्य के प्रति सजग रहे अधिकारी कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए साथ ही सुख-दुख ओके मारने के लिए उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप भी तैयार किया किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को कोई समस्या होती तो वह व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर कर देता जिस पर श्री भार्गव अमल कर तुरंत समस्याओं का समाधान करते।

---और भावुक मन से खूब रोए हमारे भार्गव सर"

ऐसे अधिकारी का जाना वास्तव में नीमच के लिए क्षति है
मंगलवार शाम को जिला पंचायत सभागार में जब कमलेश भार्गव सर को विदाई दी जा रही थी और नई  सीईओ भव्या मित्तल का स्वागत किया जा रहा था उस समय सिर्फ भार्गव के आंखों से आंसू छलक पड़े वे नीमच  को याद कर खूब रोए उन्होंने नीमच को अपना परिवार माना और छोटे से एक कर्मचारी से लेकर ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक तक के दर्द को समझा।
भार्गव सर आप जहां भी रहेंगे नीमच  हमेशा आपके दिल में रहेगा और नीमच की यादों में आप बसे रहेंगे

एल्कलाइन पानी यानी हैण्डपम्प का साफ़ पानी : लेकिन कैंसर उससे भी नहीं रुकता


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ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567

आदित्य बिरला हायर सेकेंड्री स्कूल के रसायन शास्त्र के शिक्षक श्री धर्मेन्द्र गान्धी जी के कथनानुसार-

एल्कलाइन पानी आजकल प्रचलन में आया हुआ है। उदासीनता अब निष्क्रियता जान पड़ने लगी है , इसलिए उसमें एक चुटकी क्षारीयता मिलानी ज़रूरी है।
एल्कली शब्द अरबी भाषा के 'अल-क़ली' से बना है। 'क़ली' कैल्शियम ऑक्साइड यानी चूने को कहते हैं और यह पानी के सम्पर्क में आकर क्षार का निर्माण करता है। 
कई लेखों में यह प्रचलित किया जा रहा है कि नोबेल पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिक ऑटो वॉरबर्ग ने यह सिद्ध किया था कि कैंसर की कोशिकाएँ ऑक्सीजन की प्रचुरता और एल्कलाइन ( अर्थात् क्षारीय ) माहौल में मर जाती हैं। इंटरनेट पर एल्कलाइन पानी के बहुप्रचलित झूठ की शुरुआत दरअसल यहीं से होती है।
वॉरबर्ग ने दरअसल यह सिद्ध किया ही नहीं था। उन्होंने तो वस्तुतः यह बताया था कि ऑक्सीजन की उपस्थिति होने के बावजूद कैंसर-कोशिकाएँ बिना उसके इस्तेमाल के अपने लिए ऊर्जा पैदा करती और कर सकती हैं। यह प्रक्रिया किण्वन या फ़र्मेन्टेशन कहलाती है और वॉरबर्ग के नाम पर इसे वॉरबर्ग-प्रभाव नाम दिया है।
वॉरबर्ग की इस बात को लोगों ने अनजाने में या जानबूझ कर उलट दिया। उन्होंने यह प्रचारित करना शुरू कर दिया कि कैंसर-कोशिकाएँ ऑक्सीजन की कमी और दैहिक अम्लीयता का नतीजा हैं। जिस आदमी का शरीर जितना अम्लीय , उसे कैंसर होने का उतना ही ख़तरा।
फिर भ्रम फैलाये गये कि मनुष्य का आहार अम्लीय हो चला है। जिस कारण शरीर में अम्लीयता बढ़ती जा रही है। अम्लीय भोजन से रक्त में अम्लीयता में वृद्धि हो रही है और इसी लिए कैंसर का प्रचलन भी बढ़ रहा है।
आपको यह बात जाननी चाहिए कि मानव-रक्त थोड़ा सा क्षारीय ( एल्केलाइन ) होता है। शरीर रक्त की पीएच को , जो कि अम्लीयता-क्षारीयता को नापने का एक पैमाना है , उसे एक सँकरी रेंज में बनाए रखता है। पीएच गिरी तो अम्लीयता बढ़ी। पीएच उठी तो क्षारीयता बढ़ी। दोनों ही हालत में इंसान की मौत तय।
अम्लीयता-क्षारीयता को सन्तुलित रखने का यह काम मुख्यतः दो अंग करते हैं : वृक्क और फेफड़े। लेकिन कभीकभी बीमारियों के फलस्वरूप रक्त का पीएच सचमुच गड़बड़ा जाता है और उसमें अम्लीयता यानी एसिडोसिस या क्षारीयता यानी एल्केलोसिस प्रकट हो जाती है।
यह सच है कि वॉरबर्ग के कथनानुसार कैंसर-कोशिकाएँ जब ग्लूकोज़ से बिना ऑक्सीजन के ऊर्जा पैदा करती हैं , तो उनके आसपास का माहौल अम्लीय हो जाता है। लेकिन इससे आप यह नतीजा हरगिज़ नहीं निकाल सकते कि यह अम्लीयता पूरे शरीर में व्याप्त है।
आपके शरीर में हर अंग का पीएच अलग-अलग है। लार अम्लीय है , आमाशय में मौजूद हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तो साक्षात् तीक्ष्ण तेज़ाब है जिसकी पीएच 2 या 3 होती है। पित्त क्षारीय है , अग्न्याशय के रस क्षारीय हैं। रक्त क्षारीय है , वीर्य क्षारीय है लेकिन पेशाब फिर अम्लीय है। भिन्न-भिन्न अंग , भिन्न-भिन्न उनकी अम्लीयता-क्षारीयता !
आदमी का जिस्म कोई बीकर या फ़्लास्क नहीं है जिसमें कोई रसायन का घोल पड़ा है। आपने लिटमस पेपर डाला और झट से अम्लीयता-क्षारीयता देखकर बता दिया कि आपको कैंसर होने की सम्भावना ज़्यादा है या कम।
कैंसर होने के कारण बहुत सारे हैं। अलग-अलग कैंसर अलग-अलग कारणों से होते हैं। आनुवंशिकी से लेकर तमाम रसायन और विकिरण तक अपना-अपना काम इन्हें उत्पन्न करने में देते हैं। केवल एल्कलाइन पानी पीने भर से अगर आप कैंसर से बचने की सोच रहे हैं , तो यह सोच बड़ी बचकानी है।
एल्कलाइन पानी और कुछ नहीं मैग्नीशियम व कैल्शियम जैसे खनिजों से युक्त पानी को कहा जा रहा है , जो आपकी-हमारी पिछली पीढ़ियाँ पीती रही हैं। हैण्डपम्पों-कुँओं-नदियों में यही जल तो मिलता आया है। लेकिन अब प्रदूषण के बढ़ने से और कीटाणुओं के संक्रमण से यह पानी पीने योग्य नहीं रहा। ऐसे में बाज़ार की कम्पनियाँ इसी तरह के पानी को शुद्ध रूप में आपको-हमको बेच रही हैं। यानी हैण्डपम्प-तालाब-कुएँ का पानी , लेकिन प्रदूषण व कीटाणुओं से मुक्त।
इस पानी में जो हलकी क्षारीयता है भी , वह कैसे कैंसर से आपको बचा लेगी , यह एकदम सोच से परे है। यह एल्कलाइन पानी पेट के तीखे तेज़ाब से मिलेगा न , रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरूप उसे खो बैठेगा। बस मामला ख़त्म। अब न कोई क्षारीयता बची और न उसका कोई कैंसर-कनेक्शन।
मोटी सी बात आपको यह समझनी है कि कैंसर-कोशिकाओं के कारण ( उनके आसपास के माहौल में ) अम्लीयता पैदा होती है , अम्लीयता के कारण कैंसर-कोशिकाएँ नहीं पैदा होतीं। और यह अम्लीय माहौल भी पूरे-के-पूरे शरीर में नहीं होता , केवल लोकल होता है।
कैंसर से बचाव का कोई एक तरीक़ा नहीं क्योंकि कैंसर कोई एक रोग नहीं है। न उसका कारण एक है , न उसका इलाज एक है। अलग-अलग अंगों में अलग-अलग कैंसर अलग-अलग कारणों से होते हैं।
बाज़ार आपको चूने की बोतल बेचकर चूना लगा रहा है , लगवाना चाहें तो लगवाइए। शरीर को नुक़सान नहीं , केवल आपकी जेब को है।
बेस्ट ऑफ़ लक !

Wednesday, June 26, 2019

ऐसे अधिकारियों को दिल से सलाम : जेल में 6 साल से बेगुनाही की सजा काट रही खुशी का हुआ इंटरनेशनल स्कूल में एडमिशन, कलेक्टर के साथ स्कूल पहुँची खुशी

ऐसे अधिकारियों को दिल से सलाम : जेल में 6 साल से बेगुनाही की सजा काट रही खुशी का हुआ इंटरनेशनल स्कूल में एडमिशन, कलेक्टर के साथ स्कूल पहुँची खुशी

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जिला ब्यूरो चीफ रायगढ़  // उत्सव वैश्य : 9827482822 
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) जब एक पिता अपनी बेटी को खुद से विदा करता है तब दोनों तरफ से सिर्फ आंसू ही बहते हैं। बिलासपुर केंद्रीय जेल में ऐसा ही नजारा देखने को मिला।
जेल में बंद एक सजायफ्ता कैदी अपनी 6 साल की बेटी खुशी( बदला हुआ नाम) से लिपटकर खूब रोया। वजह बेहद खास थी, आज से उसकी बेटी जेल की सलाखों के बजाय बड़े स्कूल के हॉस्टल में रहने जा रही थी।
करीब एक माह पहले जेल निरीक्षण के दौरान कलेक्टर डॉ संजय अलंग की नजर महिला कैदियों के साथ बैठी खुशी पर गयी थी। तभी वे उससे वादा करके आये थे कि उसका दाखिला किसी बड़े स्कूल में करायेंगे। आज कलेक्टर डॉ संजय अलंग खुशी को अपनी कार में बैठाकर केंद्रीय जेल से स्कूल तक खुद छोड़ने गये।
कलेक्टर की पहल पर शहर के जैन इंटरनेशनल स्कूल ने खुशी को अपने स्कूल में एडमिशन दिया। वह स्कूल के हॉस्टल में ही रहेगी। खुशी के लिये विशेष केयर टेकर का भी इंतजाम किया गया है। स्कूल संचालक अशोक अग्रवाल ने कहा है कि खुशी की पढ़ाई और हॉस्टल का खर्चा स्कूल प्रबंधन ही उठायेगा। खुशी को स्कूल छोड़ने जेल अधीक्षक  एस एस तिग्गा भी गये।
बताते चलें कि खुशी के पिता केंद्रीय जेल बिलासपुर में एक अपराध में सजायफ्ता कैदी हैं, जिसने पांच साल की सजा काट ली है। पांच साल और जेल में रहना है। खुशी जब पंद्रह दिन की थी तभी उसकी मां की मौत पीलिया से हो गयी थी। पालन पोषण के लिये घर में कोई नहीं था इसलिये उसे जेल में ही पिता के पास रहना पड़ रहा था।
कलेक्टर की पहल पर जेल में रह रहे 17 अन्य बच्चों को भी जेल से बाहर स्कूल में एडमिशन की प्रक्रिया शुरु कर दी गयी ।

Tuesday, May 7, 2019

खौफनाक मंजर: मां के आंचल में छिपी बेटी पर मौत ने सरेराह मारा झपट्टा, मासूम की गर्दन कट कर सर से अलग हुई



झालावाड़ जिले में मंगलवार सुबह दिल दहला देने वाली घटना हो गई। हादसे के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। बाइक पर सवार मां की गोद में बैठी मासूम बच्ची सिर धड़ से अलग हो गया।

सुनेल. झालावाड़ जिले में मंगलवार सुबह दिल दहला देने वाली घटना हो गई। हादसे के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सुनेल-पिड़ावा मार्ग स्थित सेमला के पास बाइक पर सवार मां की गोद में बैठी मासूम बच्ची के गले में लिपटा दुपट्टा बाइक की चैन में फंस गया। तेज झटके के साथ दम्पति बाइक से नीचे गिर पड़े और इसी के साथ बच्ची का सिर धड़ से अलग हो गया।

यहां से गुजर रहे राहगीर खौफनाक मंजर देख सहम उठे। मौके पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। और घायलों को तुरंत सुनेल अस्पताल पहुंचाया। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर मामले की जांच शुरू की थानाधिकारी जितेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि भवानीमंडी निवासी अजीत सिंह पत्नी परमजीत कौर व 5 वर्षीय बेटी गुनगुन के साथ बाइक से जीरापुर से भवानीमंडी जा रहे थे।

इसी दौरान बच्ची का दुपट्टा बाइक की चैन में आ गया। अचानक तेज झटके के साथ बाइक सवार दम्पति सड़क पर गिर पड़े। इसी बीच बालिका को फांसी लग गई और बेटी के गले में फंसा दुपट्टा निकालने के प्रयास करने के दौरान बच्ची का सिर धड़ से अलग हो गया। सूचना पर पुलिस घटना स्थल पर पंहुची। इस दौरान घटना स्थल पर राहगीरों की भीड़ जमा हो गई। शव को सुनेल चिकित्सालय मे लाया गया जंहा पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौप दिया।

Monday, April 22, 2019

पति ने प्रेमी संग कराई पत्नी की शादी, गिफ्ट में दिया ढाई साल का बेटा, फिर एक दिन....


man done his wife marriage with boyfriend and gifted him two and a half years old son
पति ने प्रेमी संग कराई पत्नी की शादी, गिफ्ट में दिया ढाई साल का बेटा, फिर एक दिन....

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खबर फिल्मी नहीं बल्कि असल जिंदगी में घटी घटना पर आधारित है। एक पति ने अपनी पत्नी और अपने ढाई वर्ष के बच्चे की मां की शादी किसी और के साथ कर दी। दरअसल, ढाई वर्ष के बच्चे की मां को अपने ही मकान मालिक के बेटे से प्यार हो गया।
प्यार का जुनून सिर पर ऐसा चढ़ा कि वो पति से बेवफाई करने लगी। हालांकि बाद में जब पति को पत्नी की करतूत का पता चला तो वो भी दिल पर पत्थर रख उसे उसके प्रेमी के हवाले कर दिया साथ ही अपने ढाई साल के बेटे को भी नवदंपति को सौंप दिया। मामला भागलपुर के जगदीशपुर प्रखंड का है। प्रखंड के खिरीबांध पंचायत के सालेपुर में शनिवार की देर रात पति की उपस्थिति में महिला की शादी मकान मालिक के बेटे और प्रेमी मोनु कुमार सिंह( 20 वर्ष) से ग्राम कचहरी में हो गई। शादी की रस्मो रिवाज के बाद पति ने अपने ढाई वर्ष के बेटे को भी उसके नये पिता को सौंप दिया। 
काजबलीचक के रहने वाला युवक कई साल से सालेपुर में किराए के मकान में रहता था। कुछ दिन पहले उसे किसी केस में जेल भेज दिया गया था। इसी दौरान मकान मालिक के बेटे मोनु से उस महिला की नजदीकियां बढ़ने लगीं। धीरे-धीरे दोनों में प्रेमसंबंध हो गया। दोनों के कुछ दिन पहले घर से भागकर जोगनी मंदिर में शादी कर लेने की बात सामने आ रही थी। जब इस बात का पता पति को चला तो उस युवक ने पत्नी की शादी उसके प्रेमी संग ही कराने का निर्णय लिया। युवक की शादी करीब चार वर्ष पूर्व गोड्डा जिला के एक गांव में हुई थी।
खिरीबांध पंचायत के सरपंच डा, पवन कुमार साह ने बताया की दोनों परिवारों के सहमति से पूर्व पति ने अपने उपस्थिति में ग्रामीणों के समक्ष ग्राम कचहरी मे अपनी पत्नी और उसके प्रेमी मोनू की शादी करा दी और अपने ढाई वर्ष के बेटे को भी प्रेमी जोड़े को ही सुपुर्द कर दिया। 

Sunday, April 21, 2019

‘सेक्स के बदले डिग्री’ देती थी ये प्रोफेसर, गिरफ्तारी के 11 महीने बाद हुआ ये …

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सेक्स के बदले डिग्री’ सनसनीखेज सेक्स स्कैंडल कांड में आरोपी महिला कॉलेज की प्रोफेसर को मद्रास हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी के 11 महीने बाद सशर्त जमानत दी है. मदुरैई बेंच के जस्टिस एन किरूबाकरण और एसएस सुंदर ने निलंबित असिस्टेंट प्रोफेसर निर्मला देवी को जमानत दी है.
सेक्स के बदले डिग्री
प्रोफेसर पर आरोप है कि वह महिला छात्राओं को मदुरैई कामराज यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए अच्छे नंबर और पैसों का लालच देती थी. सरकारी वकील ने कोर्ट में कहा कि उन्हें जमानत देने पर कोई एतराज नहीं है. कोर्ट ने प्रोफेसर को पुलिस के साथ जांच में पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए हैं और मीडिया में किसी तरह का इंटरव्यू देने से मना किया, जिससे जांच प्रभावित हो.
इससे पहले निचली कोर्ट और हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी. प्राइवेट कॉलेज देवंगा आर्ट्स कॉलेज की प्रोफेसर देवी को पिछले साल 16 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था. प्रोफेसर का छात्राओं के साथ बातचीत का एक ऑडियो वायरल होने के बाद कॉलेज और एक महिला फोरम की शिकायत पर उसके खिलाफ कार्रवाई हुई थी. ऑडियो क्लिप में प्रोफेसर कथित रूप से कुछ अधिकारियों के साथ छात्राओं को ‘एडस्ट’ करने की सलाह दे रही थीं
गिरफ्तारी से पहले कॉलेज की अंदरूनी जांच के बाद प्रोफेसर को निलंबित कर दिया था. ऑडियो सामने आने के बाद विवाद बढ़ने पर मामले को राज्य की सीआईडी को सौंप दिया गया था. देवी से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने असिस्टेंट प्रोफेसर वी मुरुगन और रिसर्च छात्र करुप्पासामी को भी इस मामले में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद इन दोनों को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी थी.
पिछले साल सितंबर महीने में सीबी-सीआईडी ने 200 पेज की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी. इससे पहले जुलाई महीने में 1600 पेज की प्री चार्जशीट दाखिल की गई थी.

Monday, April 15, 2019

शादी की पहली रात दूल्हे ने पूछा एक सवाल, अगली सुबह उजड़ गई दुल्हन की मांग

शादी की पहली रात दूल्हे ने पूछा एक सवाल, अगली सुबह उजड़ गई दुल्हन की मांग

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शादी हर लड़की के जीवन का एक ख़ास लम्हा होता हैं. इस पल का इंतज़ार लगभग हर लड़की को होता हैं. शादी को लेकर एक लड़की के कई तरह के सपने होते हैं. शादी के बाद उसकी लाइफ कैसी होगी और वो अपने पति के साथ बाकी की जिन्दगी कैसे बिताएगी ये सभी बातें वो पहले से ही सोचने लगती हैं. लेकिन जरा सोचिए क्या होगा जब एक लड़की शादी कर के अपने ससुराल जाती हैं.
रात को आने पति के साथ सोती हैं. और अगले दिन ही उसे अपना पति फांसी के फंदे पर झूलता हुआ दिखाई देता हैं. यक़ीनन ये किसी भी लड़की के लिए काफी भयावह स्थिति होगी जिसकी कल्पना उसने कभी सपने में भी नहीं करी होगी. लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में रहने वाली 28 वर्षीय निर्मला के साथ हुआ. आइए विस्तार से जाने क्या हैं मामला…   
दरअसल 21 फरवरी को बांदा जिले के बबेरू कोतवाली क्षेत्र के पतवन गांव में विकास नाम के लड़के की शादी निर्मला से हुई थी. ये शादी में सबकुछ बढ़िया रहा. पूरी शांति और अच्छे से शादी निपट गई. पत्नी निर्मला का कहना हैं कि शादी के बाद 22 फरवरी को विकास मेरे आस आए थे. वे मुझ से मेरी परीक्षा के बारे में पूछ रहे थे. इसके बाद वो वहां से चले गए. उन्होंने अपना मोबाइल भी वहां छोड़ दिया था. फिर रात में 3 से 5 के बीच कई बार उनकी भाभी का फोन आया. ये सब क्या हो रहा हैं मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा. उझे आए यहाँ सिर्फ एक ही दिन हुआ हैं.   
उधर विकास के परिवार वाले भी उसकी आत्महत्या की वजह नहीं बता पा रहे हैं. उनके मुताबिक विकास ने शुक्रवार की रात खाना खाया था जिसके बाद वो अपने अलग अक्मरे में सोने गया था. सुबह उनके परिवार वाले विकास को फांसी पर लटका देख चुँक गए. उन्होंने इसकी खबर पुलिस को दी जिन्होंने मौकाए वारदात पर आकर विकास को फांसी से नीचे उतारा. जवान बेटे के यूं अचानक चले जाने के कारण पुरे परिवार में शौक की लहर हैं. वहीँ गाँव के प्रधान रणवीर सिंह राणा का कहना हैं कि विकास बहुत ही सीधा साडा लड़का था. उसका किसी से कोई लड़ाई झगड़ा भी नहीं हुआ था. साझ नहीं आ रहा कि उसने खुदखुशी क्यों की होगी.   
एएसपी लाल भरत पाल ने कहा कि हमने विकास के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया हैं. रिपोर्ट आने पर स्थिति और भी सपष्ट हो सकती हैं. फिलहाल हम इस मामले की जांच कर रहे हैं.  इस घटना के बाद पुरे गाँव में भी शोक का माहोल हैं. साथ ही लोग इस बात को हैरान हैं कि आखिर ऐसी क्या वजह रही होगी जो विकास जैसे सीधे सादे लड़के ने अपनी शादी के अगले दिन ही आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा लिया. वहीँ उसकी नई नवेली बीवी पर ना जाने क्या बीत रही होगी. किसने सोचा था कि वो शादी के एक दिन बाद ही यूं अचानक विधवा हो जाएगी.

Thursday, March 21, 2019

इस खूबसूरत स्त्री को पाने के लिए अकबर का बेटा इस हद तक जा गुजरा था

इस खूबसूरत स्त्री को पाने के लिए अकबर का बेटा इस हद तक जा गुजरा था

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अकबर का बड़ा बेटा जहांगीर उर्फ सलीम नूरजहां नाम की एक खूबसूरत लड़की से प्यार करता था। नूरजहां और सलीम दोनों ही पहली बार एक बगीचे में मिले और दोनों को पहली नजर में ही प्यार हो गया था। दोस्तों जैसे जैसे समय गुजरता गया वैसे वैसे सलीम और नूरजहां का प्यार भी परवान चढ़ता गया।

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लेकिन इन दोनों के परिवार इनके प्यार से खुश नही थे इसलिए इन दोनों की शादी अलग अलग जगह कर दी गयी। जब सलीम अकबर की मृत्यु के बाद राजगद्दी पर बैठा तो उसने सबसे पहले नूरजहां से निकाह करने का निर्णय लिया लेकिन नूरजहां ने यह कहकर मना कर दिया था की अब वह किसी की पत्नी है और किसी की पत्नी को धमका कर विवाह करना किसी सम्राट को शोभा नही देता है।

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तब सलीम ने नूरजहां के पति शेर अफगान अलीकुली को धोखे से मरवा दिया था। जब नूरजहां विधवा हो गयी तो सलीम उसे अपने हरम आने के लिए मिन्नते करने लगा। लेकिन फिर भी नूरजहां ने आने से मना कर दिया। सलीम नूरजहां के लिए तड़पने लग उसने सारा राजकार्य बंद कर दिया और शराब पीने लगा। तब सभी दरबारियों ने नूरजहां से सलीम से निकाह करने के लिए मिन्नत करने लग गए और आखिर में नूरजहां सलीम से निकाह करने को राजी हो गयी।

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सलीम का नूरजहां से निकाह होते ही वह दिन रात उसकी साथ रहने लगा और दरबार में भी वह उसके साथ आने लगा। नूरजहां सुंदर होने के साथ साथ समझदार भी था इसलिए वह धीरे धीरे सलीम के पीछे से राज करने लग गयी थी जबकि सलीम नूरजहां के प्यार में आजीवन पागल रहा।

Tuesday, March 12, 2019

खेलने-कूदने की उम्र में इस तरह शुरू की खुद की कंपनी, कमाते हैं करोड़ों रूपये



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नई दिल्ली।चेन्नई में जन्में दो भाई श्रवण कुमारन और संजय कुमारन को बचपन से ही कम्प्यूटर चलाने में खास रूचि थी। कुमारन भाईयों को कम्प्यूटर चलाने का इतना चाव था कि वे स्कूल और घर में ज्यादा से ज्यादा समय कम्प्यूटर पर ही बिताते थे। और इसी शौक की बदौलत महज 12 साल के श्रवण कुमारन और 10 साल के संजय कुमारन करोड़ो का टर्नओवर करने वाली कंपनी के सीईओ बन गए।

कम्प्यूटर पर गेम खेलने का शौक रखने वाले कुमारन भाइयों ने और बच्चों की तरह केवल गेम खेलने में ही रूचि नहीं दिखाई, बल्कि इससे आगे बढ़कर खुद का गेम डवलप करने का फैसला किया। साथ ही जब श्रवण 8वीं कक्षा में और संजय 6वीं कक्षा में पढ़ते थे तभी दोनों ने मिलकर कई मोबाइल एप बनाऐ।

कुमारन भाई गेम के क्षेत्र में कुछ अलग करना चाहते थे जिसके लिए उन्होंने एक कंपनी बनाने की योजना बनाई, लेकिन उम्र कम होने की वजह से उनकी कंपनी को रजिस्ट्रेशन नहीं मिला।

इस असफलता से निराश ना होकर उन्होंने अपने माता-पिता के नाम पर गो डायमेंशन नाम की कंपनी की आधारशिला रखी और इसके बैनर तले कई शानदार मोबाइल एप का निर्माण किया।

Thursday, February 7, 2019

RTI का कमाल : आपके '10 रुपये' में इतनी बड़ी ताकत, 600 अफसर बर्खास्त।

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 rti act



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घोटालेबाज इनसे खौफ खाते हैं। इनके 10 रुपये से सरकार को बड़े से बड़ा फैसला बदलना पड़ गया। कई घोटालेबाज अधिकारियों को जेल तक भेजना पड़ा गया। ये खौफ है आरटीआइ का।...
10 रुपये और जागरुकता की अहमियत क्या है, पढ़ो!आपका 10 रुपये का नोट बड़े काम का है। बड़े से बड़ा घोटाला हो या फिर कोई बड़ा घोटालेबाज अफसर, कर्मचारी। हर कोई खौफ खाएगा। बस आपको करना होगा ये। फिर देखिए 10 रुपये से लगाई गई आरटीआइ से किस तरह का बदलाव आता है।
इन आरटीआई कार्यकर्ता का नाम है एचसी अरोड़ा। उम्र 66 वर्ष 5 महीने। ये किसी सरकारी कार्यालय में पहुंच जाते हैं तो इनके नाम से ही घोटालेबाज सहम जाते हैं। दरअसल, इन्होंने आरटीआइ को ऐसा हथियार बनाया कि हरियाणा ही नहीं, चंडीगढ़ और पंजाब के भी बड़े घोटाले पकड़े गए। आरटीआइ से मिले सुबूतों पर जब राज्यों सरकारों ने कार्रवाई नहीं की तो अंबाला के एडवोकेट एचसी अरोड़ा हाईकोर्ट पहुंच गए। जनहित याचिका के बाद आखिरकार सरकारों को फैसले बदलने पड़े। इनकी ही याचिका की वजह से हरियाणा और पंजाब सरकार को छह सौ अधिकारियों-कर्मचारियों को बर्खास्त करना पड़ा।
#हरिचंद_अरोड़ा ने आरटीआइ के माध्यम से हरियाणा और पंजाब विजिलेंस से ब्योरा एकत्र किया। पूछा कि इन राज्यों में कितने कर्मी या अधिकारियों को भ्रष्टाचार के मुकदमे में सजा हो रखी है। मौजूदा स्टेट्स क्या है। चौंकाने वाले तथ्य सामने आए कि पंजाब पुलिस में 6 हत्या के दोषी थे। इसके बावजूद उनकी नौकरी बरकरार चल रही थी।
अपील को ढाल बनाकर बचा रखी थी भ्रष्टाचारियों ने नौकरी।
हरियाणा में भी पुलिस अधिकारी, कुछ डॉक्टर, हेड मास्टर्स, एसडीओ, अधीक्षण अभियंता और भ्रष्ट तहसीलदार कुर्सी संभाले हुए थे। इनमें छह डीएसपी रैंक के अधिकारी भी शामिल थे। कानून यह था कि भ्रष्टाचार के मुकदमे में सजा होने के बाद नौकरी में नहीं रहेंगे। इन भ्रष्टाचारियों ने हाई कोर्ट में अपील को ढाल बनाकर नौकरी बचा रखी थी।
जनहित याचिका दायर की छह सौ अधिकारी बर्खास्त।
अरोड़ा ने आरटीआइ में मिली जानकारी पर हाई कोर्ट में पब्लिक इंटरस्ट लिटिगेशन (#PIL) दायर की तो करीब छह सौ कर्मी व अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। इसके अलावा एसिड अटैक पीडि़तों का मुफ्त इलाज और मुआवजे की आवाज उठाई तो कानून बन गए। अब अटैक पीडि़तों का मुफ्त इलाज और मुआवजे का प्रावधान है। यहां तक की आठ हजार रुपये पेंशन के रूप में दिए जा रहे हैं।
एक #आरटीआई से चार महीने में थानों में शौचालय बने
इसके अलावा पुलिस थानों में महिला पुलिस अफसरों एवं मुलाजिमों के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था न होने का तथ्य आरटीआइ में उजागर होने के बाद अरोड़ा की जनहित याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक को चार महीने में सभी थानों में अलग से महिला शौचालय बनाने का निर्देश जारी कर दिया।
तीन महीने तक चाइनीज डोरे में लग गई थी रोक
करंट आने व काटने की क्षमता रखने वाली चाइनीज डोर का मामला भी हाई कोर्ट पहुंचाने वाले #एचसी_अरोड़ा ही थे। इसके बाद हरियाणा ने सभी पुलिस कमिश्नरों, आयुक्तों व जिला मजिस्ट्रेटों को धारा-144 की शक्तियों का इस्तेमाल कर तीन महीने की अवधि के लिए चाइनीज डोर पर रोक लगाने के लिए कहा गया था।
अफसरशाही को किया चैलेंज
नीली-लाल बत्ती के उल्लंघन का मामला भी अरोड़ा ने हाई कोर्ट तक पहुंचाया। हाई कोर्ट ने #अफसरशाही को तलब कर दोनों राज्यों को निर्देश जारी किए। लालबत्ती लगाने वाले एक डीआरएम को माफी तक मांगनी पड़ी थी। इनकी #पीआईएल के बाद ही राजकीय स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय, कमजोर स्कूलों को गिराने के निर्देश जारी हुए। पंजाब में जमीन अधिग्रहण के मामले में जालंधर के एक आइएएस अफसर ने अपने हिसाब से जमीन के रेट तय करते हुए किसानों और नेशनल हाईवे अथॉरिटी को राशि जमा कराने के निर्देश दिए। किसानों ने करीब तीन करोड़ रुपये जमा करा दिए, जबकि नेशनल हाईवे अथॉरिटी इसके अलावा लड़ाई लड़ता रहा। रुपये जमा नहीं कराए। अरोड़ा ने हाई कोर्ट में कहा कि अफसर इस तरह रुपये जमा नहीं हो सकते। तब कोर्ट ने रिकवरी कराई।
यह जंग अभी जारी है।
1- भ्रष्टाचार व अन्य मामलों में दोषी विधायकों और पूर्व मंत्रियों को दी जा रही पेंशन को रोकने के लिए जनहित याचिका दायर कर रखी है। पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला, पूर्व सांसद अजय चौटाला, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष सतबीर सिंह कादियान और अन्य दोषी ठहराए गए हैं।
2- पंजाब के सरकारी स्कूलों के बच्चों को वर्दी के लिए अनुदान जारी करने के लिए जनहित याचिका को हाई कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।
3- संविधान जातिवाद मुक्त फिर एफआइआर में आरोपित की जाति क्यों दर्ज।
4- सीएम सहित अन्य मंत्री, पूर्व मंत्री, आइएएस और आइपीएस क्यों ले रहे सब्सिडी का लाभ। सब्सिडी की जरूरत गरीब किसानों को है, जबकि वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्री, पूर्व मंत्री, आईएएस और आईपीएस भी सब्सिडी का लाभ ले रहे हैं। हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को जमकर फटकार लगाई थी। इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी है।
एचसी अरोड़ा ने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अभियान चलाकर सरकारों को जगाया। करीब सवा चार सौ जनहित याचिकाएं दायर की।
उन्हे कई बार केस वापस लेने की भी धमकियां मिली, उन्होंने कोर्ट को सूचित कर दिया। अदालत ने चंडीगढ़ पुलिस को आदेश दिया कि जब भी वह पंजाब जाएंगे, उन्हें सुरक्षा मुहैया करानी होगी। कभी घबराए नही। जिन्होंने गलत किया है, उन्हें डरना चाहिए। वह कभी पीछे हटते। चाहे कितने ही प्रलोभन क्यों न दिए जाएं। यही वजह है कि डीएसपी स्तर के अफसर को नौकरी से हाथ धोना पड़ा और पंजाब के आइएएस से रिकवरी हो सकी।

Tuesday, February 5, 2019

मृतक बंटी उर्फ धर्मेन्द्र ऑटो चालक का दाह संस्कार कराया जनसंवेदना ने

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राधेश्याम अग्रवाल

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भोपाल 4 फरवरी 2019. चैादह वर्षो से परिवार से अलग रह रहे आॅटो चालक के बैमेल विवाह बंधन स्वीकारने से नाराज हुए उसके परिजनों ने मृतक आॅटो चालक का शव पोस्टमार्टम के बाद लेने से इंकार कर दिया। अन्ततः अयोध्या पुलिस ने ढूंढ कर निकाला जनसंवेदना का सहारा। 

बीती रात अयोध्या पुलिस थाना अंतर्गत राजीव नगर बस्ती निवासी बंटी उर्फ धर्मेंद्र ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। यह सब जब पड़ोसियों ने खिड़की से देखा कि मृतक फांसी पर लटका है तो तत्काल पुलिस को खबर दी।

 पुलिस ने सूचना के आधार पर मर्ग कायम कर मृतक का पोस्टमार्टम कराने के बाद जनसंवेदना के सहयोग से सुभाष नगर विश्राम घाट पर आज शाम मृतक का दाह संस्कार उसकी पत्नी जो अल्पसंख्यक थी उसकी मौजूदगी में कराया। इसमें पूरा सहयोग जनसंवेदना द्वारा किया गया।

मृतक अपने पीछे दो बेटियां छोड़कर चला गया है। पुलिस मर्ग कायम कर पूरे मामले की तफ्तीश कर रही है। जनसंवेदना परिवार की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित।

राधेश्याम अग्रवाल
जनसंवेदना
9826013975

Monday, January 21, 2019

15 सालों से लावारिश शवों का क्रियाकर्म करा रहे राधेश्याम अग्रवाल उर्फ चच्चू

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 राधेश्याम अग्रवाल उर्फ चच्चू 

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भोपाल // रूपेश गुप्ता

भोपाल। उम्र 72 वर्ष, छोटा कद और फूर्ती में युवाओं को भी पीछे छोड़ देने वाले राधेश्याम अग्रवाल उर्फ चच्चू आज शहर में किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। क्योंकि यदि शहर में कोई ऐसा शव बरामद होता है, 

जिसकी कोई पहचान अथवा सहारा नहीं होता, तो सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचते है और अपने ही खर्चे से उसके कफन-दफन का पूरा इंतजाम कर देते हैं। दरअसल 15 साल पहले एक ट्रेन हादसे में बाल-बाल बचने के बाद उनके भीतर लावारिश शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने का जज्बा पैदा हुआ, जिसे वे आज तक बखूबी से निभा रहे हैं और अब तक साढ़े 5 हजार से ज्यादा लावारिश शवों का क्रियाकर्म करा चुके हैं।

शायद ही दूसरा कोई दिन गुजरता हो, जब श्री अग्रवाल के पास किसी लावारिश शव मिलने की सूचना न आती हो। इस तरह की सूचना मिलते ही वे अपने तमाम जरूरी काम छोड़कर मौके पर पहुंचते हैं और उक्त शव के कफन-दफन का पूरा इंतजाम कर देते हैं। समाजसेवा की इस अनूठी भावना के पीछे श्री अग्रवाल बताते हैं, कि वर्ष 2004 में वे किसी कार्य से नागपुर गये थे, उस दौरान वे एक ट्रेन हादसे का शिकार होते बाल-बाल बच गये लेकिन इस दौरान मौके पर मौजूद किसी अंजान व्यक्ति ने टिप्पणी की थी, ’बच गये, वरना लावारिश की तरह मरते व अंतिम संस्कार करने वाला भी कोई नहीं मिलता ’। उस अंजान व्यक्ति की इस बात ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया और मैंने तभी से इस दिशा में कार्य करने का संकल्प ले लिया।

पुलिस के पास नहीं कोई फण्ड़

श्री अग्रवाल बताते हैं, कि संकल्प लेने के बाद भोपाल आने पर उन्होंने यहां लावारिश लाशों के अंतिम संस्कार की जानकारी ली तो चैंाकाने वाली बात निकल कर सामने आयी। इसके अनुसार पुलिस को विभिन्न स्थानों पर मिलने वाले लावारिश शवों के कफन-दफन के लिए कोई फण्ड़ नहीं मिलता है और न ही उनके पास कोई व्यवस्था है। इतना ही नहीं ऐसी कोई संस्था भी शहर में नहीं है, जो इस काम में पुलिस का हाथ बंटाती हो। लिहाजा पुलिस अपने क्षेत्र के कारोबारियों से चंदा कर इन शवों का अंतिम संस्कार करवाती है।

परिचितों ने मजा़क तक उड़ाया

श्री अग्रवाल बताते हैं, कि लावारिश शवों के अंतिम संस्कार प्रक्रिया से अवगत होने के बाद मेरा संकल्प इस दिशा में काम करने के लिए और मजबूत हो गया। मैंने इससे अपने परिचितों को अवगत कराया और उनसे इस कार्य में मदद की अपेक्षा की। चूंकि यह संवेदनशील से जुड़ा काम था, इसलिए मेरा उद्देश्य जानने के बाद यह लोग सामने तो संवेदना जताते, लेकिन मेरे पीठ फेरते ही मज़ाक उड़ाने से भी नहीं चूकते। दूसरों की बात ही क्यों की जाए, शुरूआत में तो मेरे अपनों (परिजनों) के गले भी मेरी बात नहीं बैठी, लेकिन मैं अपने संकल्प पर कायम रहा। कई तरह की दिक्कतों के बीच इस मकसद को पूरा करने में जुटा रहा।

अब तक साढ़े 5 हजार शवों का कराया अंतिम संस्कार

श्री अग्रवाल बताते हैं, कि संकल्प पूरा करने के लिए उन्होंने तमाम दिक्कतों का सामना किया और उन्हें धीरे-धीरे सफलता मिलने लगी। चूंकि उनके इस कार्य में कई लोग सहयोग देने के लिए आगे आने लगे। आज स्थिति यह है, कि न सिर्फ भोपाल शहर और मध्यप्रदेश, बल्कि राजस्थान के कई समाजसेवी भी इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं और आज उन्हें इस बात पर फक्र महसूस होता है, कि लोगों के सहयोग से 1 अप्रैल 2005 से 31 दिसम्बर 2018 तक 5 हजार , 628 शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया जा चुका हैै। श्री अग्रवाल को उनके सेवा कार्य के लिए दुष्यंत संग्रहालय के विट्ठलभाई पटेल समाजसेवा सम्मान और प्रदेष सरकार के उच्चश्रेणी संस्था सम्मान के अलावा कई अन्य सम्मान भी मिल चुके हैं।

भेल से लिया था वी.आर.एस.

15 जनवरी 1947 को जन्में श्री अग्रवाल भेल में नौकरी कर अपने परिवार का जीविकोपार्जन करते थे, लेकिन किन्ही अपरिहार्य कारणों के चलते वर्ष 2000 में उन्होंने नौकरी से स्वैच्छिक सेवा निवृति ले ली थी, इसके बाद उन्होंने अल्पकालीन पत्रकारिता भी की। लेकिन वर्ष 2005 से अपने को पूरी तरह समाजसेवा के लिए समर्पित कर दिया। वर्तमान में वे जनसंवेदना नामक संस्था के बैनर तले इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं।

भोजन खराब होने से भी बचाते हैं

यदि आपके परिवार में कोई धार्मिक अथवा सामाजिक कार्यक्रमों, जिसमें आपने भोजन का प्रबंध किया है और तमाम आमंत्रितों द्वारा भोजन ग्रहण करने के बाद भी भोजन बच जाता है, तो उसके खराब होकर फेंकने से बचाने के लिए भी श्री अग्रवाल ने सेवाकार्य चला रखा है। इसके तहत ऐसे लोग उनसे संपर्क करते हैं तो वे उसी वक्त बचे हुए भोजन को लेकर तमाम झुग्गी-बस्तियों में पहुंचते हैं और उसे जरूरतमंदों में वितरित करवा देते हैं।
साभार- देशबन्धु 

Saturday, January 19, 2019

पति ने खुशी-खुशी गैरमर्द से कराई अपनी पत्नी की शादी… दहेज में दिए दो बच्चे!


पति ने पत्नी की शादी उसके प्रेमी से कराई, दहेज में दिए बच्चे

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आज से कई वर्ष पहले आयी एक फ़िल्म “हम दिल दे चुके सनम” ने पर्दे के ऊपर काफी धमाल मचाया था। तब उस वक़्त किसे मालूम था कि आने वाले वक्त में कभी उस फिल्म की स्टोरी पर आधारित कोई सच्ची घटना घटित हो जाएगी। अगर आपने वह फ़िल्म देखी होगी तो आपको उस फिल्म की स्टोरी अच्छी तरह याद होगी। उस फिल्म की कहानी ही कुछ ऐसी थी की उस फिल्म में मुख्य कलाकार के रूप में मौजूद सलमान ऐश्वर्या और अजय देवगन के बीच एक लव ट्राइंगल सा चल रहा था।
दरसअल उस फिल्म में दिखाया गया था कि किस प्रकार ऐश्वर्या सलमान से प्यार करती है पर उनके घरवाले उनकी शादी अजय देवगन से करवा देते है। उसके बाद अजय देवगन दर-दर भटकते हुए ऐश्वर्या के रियल लव की तलाश में निकल जाता है। पर वह कहानी तो बस पर्दो के पीछे थी पर आज हम जो बताने जा रहे है वह पर्दे के सामने की सच्ची कहानी है। चलिये बताते है आपको भी इस मामले के बारे में विस्तार से।
यह घटना बिहार की राजधानी पटना से सटा हुआ एक जिला हाजीपुर का है, जहाँ एक पति ने अपने 10 साल पहले हुए शादी और बच्चो को लेकर एक बेहद ही अजीब सा फैसला लिया है। उसके मुताबिक वह अपनी पत्नी की शादी उसी लड़के के साथ करवाकर रहेगा जिसे उसकी पत्नी हमेशा से प्यार किया करती थी। उसके इस फैसले के बारे में सुनकर हर कोई हैरान है। सबको ऐसा लग रहा है मानो वह पागल हो चुका है। अपनी पत्नी की इच्छा को पूरा करने वाले इस शख्स को देखकर ऐसा लगता है मानो वह भी प्यार के रिश्ते के सामने हार मान चुका हो।
इस घटना की शुरुआत आज से 10 साल पहले ही हो चुकी थी। मिली जानकारी के मुताबिक 10 साल पहले अरुण की शादी मधु से हुई थी। इन दस सालों में साथ रहते हुए उनके 2 बच्चे भी हुए। पर मधु को शादी से पहले ही श्रवण चौरसिया नाम के लड़के से प्यार हो चुका था। प्यार होने की वजह से श्रवण उसके घर के आसपास दिखाई दिया करता था। कई बार श्रवण लड़की के ससुराल तक आकर उससे मिलने की जहमत उठाया करता था। इसी क्रम में एक दिन हुआ कुछ ऐसा जिसने सबकी जिंदगी बदल दी।
दरसअल एक दिन अरुण की मौजूदगी में ही श्रवण मधु से मिलने उसके घर आ पहुँचा। घर पहुचने के बाद जब मधु के पति ने उसके में पूछा तो मधु उसे कुछ बताने को राजी ही नही थी इस डर से की क्या पता बता देने के बाद उसके इस रिश्ते में भी दरार आ जायेगा। काफी पूछें जाने के बाद भी जब उस महिला ने उसके बारे में नही बताया तो उसके पति को ऐसा शक हो गया कि वह लड़का इसका बॉयफ्रेंड है। जिसके बाद अरुण ने उस लड़के से पूछा जिसके बाद पूरी सच्चाई सामने आ गयी। प्यार की ऐसी दास्तान को देखने के बाद अरुण का दिल भी पिघल गया और उसने ले लिया ऐसा फैसला।

दोनों के बीच इतने प्यार को देखते हुए अरुण ने दोनों के घर को बसाने की ठान ली और दोनों का प्रेम विवाह करवाने का निर्णय लिया। अपनी बसी बसाई दुनिया को उजाड़ कर दुसरे का घर बसाने की जिद पर अड़ा हुआ देख पड़ोसी हैरान थे। अरुण ने अंत मे अपने प्यार का ब,लिदान देकर दोनों की शादी करवा दी और अपने जिगर के टुकड़ों को भी उसने श्रवण को सौंप दिया। प्यार के लिए ऐसे ब,लिदान को सुनकर आंखे भर आती है।

Sunday, January 13, 2019

दुल्हन के कौमार्य पर प्रोफेसर की दलील- आप सील टूटा कोल्ड ड्रिंक खरीदेंगे ?

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पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित जाधवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कनक सरकार ने महिला वर्जिनिटी को लेकर फेसबुक पर कई विवादित पोस्ट किए।

इन पोस्टों में से अधिकांश में भ्रामक और सेक्सी कमेंट थे। एक पोस्ट में उन्हें वर्जिन लड़की की तुलना सील बोतल और पैकेट से की। उन्होंने लिखा, 'क्या आप कोल्ड ड्रिंक की बोतल या बिस्कुट के पैकेट खरीदते समय टूटी सील वाली खरीदने को तैयार हैं?'

सरकार ने कहा कि वे लड़के मूर्ख हैं, जो वर्जिन लड़की या पत्नी के महत्व के बारे में अवगत नहीं हैं।सरकार जो कि एक डॉक्टरेट हैं और उनके पास पढ़ाने का 20 साल से ज्यादा का अनुभव है, कहते हैं कि एक लड़की का जन्म 'कुंवारी' होता है ओर एक 'कुंवारी पत्नी परी की तरह' होती है।

सरकार कहते हैं, 'जन्म से लड़की तब तक कुंवारी होती है, जब तक …खोला न जाए। एक कुंवारी लड़की का अर्थ है मूल्यों, संस्कृति और यौन स्वच्छता के साथ कई चीजें होती है।' हालांकि, बाद में उन्होंने अपने पोस्ट डिलिट कर दिए।

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