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Sunday, February 1, 2026

एपस्टीन फाइल : अमेरिकी यौन अपराधी और मानव तस्कर जेफ़री एपस्टीन से जुड़ी फ़ाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम आया

 
एपस्टीन फाइल : अमेरिकी यौन अपराधी और मानव तस्कर जेफ़री एपस्टीन से जुड़ी फ़ाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  का भी नाम आया 

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जेफरी एपस्टीन फाइल्स का हालिया खुलासा, जो अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा 30 जनवरी 2026 को जारी किया गया, वैश्विक स्तर पर हलचल मचा रहा है। इनमें 30 लाख से अधिक पेज, हजारों वीडियो और लाखों इमेज शामिल हैं, जो एपस्टीन की 2019 में मौत के बाद जांच से जुड़े हैं। भारत में विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि एक ईमेल (डॉक्यूमेंट ID: EFTA02645381.pdf, DOJ वेबसाइट पर उपलब्ध) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र है।

यह ईमेल 9 जुलाई 2017 का है, जिसमें एपस्टीन ने "Jabor Y" को लिखा: "The Indian Prime Minister Modi took advice and danced and sang in Israel for the benefit of the US president. They had met a few weeks ago. IT WORKED!" यह मोदी की 4-6 जुलाई 2017 की इजराइल यात्रा से ठीक तीन दिन बाद का है, जब उन्होंने ट्रंप से 25-26 जून 2017 में अमेरिका में मुलाकात की थी। विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे "राष्ट्रीय शर्म" करार दिया, और सवाल उठाया कि क्या मोदी ने वाकई एक दोषी यौन अपराधी से सलाह ली? मोदी की चुप्पी इस मामले को और संदिग्ध बनाती है, क्योंकि कोई स्पष्ट खंडन या जांच की मांग नहीं की गई, जो उनकी पारदर्शिता पर सवाल उठाती है।

एपस्टीन की यह ईमेल मोदी को उसके नेटवर्क से जोड़ती प्रतीत होती है, भले ही कोई फ्लाइट लॉग, फोटो या प्रत्यक्ष संचार का सबूत न हो। ईमेल में "सलाह" का जिक्र मोदी की इजराइल यात्रा से जुड़ा है, जो भारत-इजराइल संबंधों को मजबूत करने वाली थी, लेकिन एपस्टीन के दावे से यह संदिग्ध लगती है। मोदी ने वहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया, लेकिन क्या यह ट्रंप के फायदे के लिए था? एपस्टीन की "IT WORKED!" वाली टिप्पणी सौदेबाजी का संकेत देती है, जो मोदी की कूटनीति को संदेहास्पद बनाती है। अमेरिकी मीडिया में यह उल्लेख असत्यापित है, लेकिन एपस्टीन की अतिरंजित बातों के बावजूद, मोदी का नाम आने से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर पड़ता है। 2019 का एक और संदर्भ है जहां एपस्टीन ने स्टीव बैनन को मोदी से मिलवाने की पेशकश की (24 मई 2019, मोदी के चुनाव जीतने के बाद), और "Modi on board" लिखा, यह मोदी की ट्रंप-बैनन जैसे संदिग्ध लोगों से निकटता पर सवाल उठाता है, जो एलीट इंप्युनिटी की मिसाल है।

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भारत सरकार की प्रतिक्रिया कमजोर और बचाव वाली रही। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने 31 जनवरी 2026 को इसे "एक दोषी अपराधी की घटिया कल्पनाएं" कहा, लेकिन कोई गहन जांच या पारदर्शी स्पष्टीकरण नहीं दिया। MEA ने सिर्फ इजराइल यात्रा को तथ्य माना और बाकी को खारिज किया, लेकिन "सलाह" और "IT WORKED!" जैसे शब्दों पर चुप्पी सवालों को बढ़ाती है। एपस्टीन फाइल्स में ट्रंप, क्लिंटन, मस्क जैसे नामों के ठोस संपर्क हैं, जबकि मोदी का उल्लेख "ट्रैशी" कहकर टालना मोदी की छवि प्रबंधन की रणनीति लगती है। कांग्रेस के पोस्ट और मीडिया रिपोर्ट्स में उठाए गए सवालों का कोई जवाब नहीं आया, जो मोदी की जवाबदेही की कमी दर्शाता है। यह रुख देश की गरिमा को जोखिम में डालता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर ऐसे उल्लेखों से भारत की कूटनीतिक विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक्स पर कई पोस्ट में इसे "राष्ट्रीय शर्म" बताया और तीन सवाल उठाए: सलाह क्या थी? इजराइल में नाच-गाने से ट्रंप को क्या फायदा? "IT WORKED!" का मतलब क्या? कांग्रेस की आधिकारिक पोस्ट में समयरेखा जोड़कर "कनेक्ट द डॉट्स" किया गया, जून 2017 में ट्रंप से मिलना, जुलाई में इजराइल जाना, और एपस्टीन का ईमेल। पृथ्वीराज चव्हाण ने भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। यह राजनीतिक हमला नहीं, बल्कि वैध सवाल हैं, क्योंकि मोदी की चुप्पी और MEA का बचाव इसे छिपाने की कोशिश लगता है। एपस्टीन फाइल्स में अन्य भारतीय नाम जैसे हरदीप सिंह पुरी (2014 में एपस्टीन से मुलाकात) और अनिल अंबानी (2017 में ईमेल) हैं, जो मोदी सरकार के करीबियों से जुड़े हैं। AI चैटबॉट्स के गलत जवाबों से अफवाहें फैलीं, लेकिन मोदी की पारदर्शिता की कमी असली समस्या है।

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एपस्टीन फाइल्स का असली महत्व एलीट वर्ग की जवाबदेही में है, जहां बाल यौन शोषण और मानव तस्करी के नेटवर्क में बड़े नाम फंसे हैं। भारत में फोकस मोदी पर होना जरूरी है, क्योंकि उनका नाम आने से राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता है, लेकिन मोदी की सरकार ने इसे हल्के में लिया। फाइल्स में 3 मिलियन+ पेज हैं, और मोदी का उल्लेख, भले नगण्य, देश की छवि को नुकसान पहुंचाता है। मीडिया रिपोर्ट्स में AI से फैली अफवाहें हैं, लेकिन मोदी की अंतरराष्ट्रीय दोस्तियां (ट्रंप, बैनन) संदेहास्पद हैं। कांग्रेस अगर चिंतित है, तो जांच की मांग करे, लेकिन मोदी की चुप्पी से लगता है कि कुछ छिपाया जा रहा है। यह घटना दिखाती है कि कैसे वैश्विक स्कैंडल मोदी की कूटनीति पर सवाल उठाते हैं, बिना संदर्भ या फैक्ट-चेक के।

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यह पूरा विवाद मोदी की राजनीतिक कमजोरी का उदाहरण है। कांग्रेस के आरोप ठोस हैं, एपस्टीन की ईमेल में "सलाह" या "मीटिंग" का दावा उनकी कल्पना हो सकती है, लेकिन मोदी का नाम आने से जांच जरूरी है। मोदी के आलोचक इसे सही से उठा रहे हैं, क्योंकि बिना सबूत के भी चुप्पी उल्टे सवाल पैदा करती है। एपस्टीन जैसे अपराधियों की फाइल्स से सच्चाई निकालनी चाहिए, लेकिन मोदी सरकार का रवैया बचाव वाला है, जो एलीट इंप्युनिटी को बढ़ावा देता है। अगर मोदी निर्दोष हैं, तो क्यों नहीं पारदर्शी जांच? यह मोदी की छवि पर धब्बा है, जो राष्ट्रीय गरिमा को प्रभावित करता है।

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अंत में, यह "स्कैंडल" मोदी की कूटनीतिक मर्यादा पर सवाल है, एक दोषी व्यक्ति की ईमेल से जुड़ना भी शर्मनाक है। सच्ची पत्रकारिता और जांच की जरूरत है, लेकिन मोदी की चुप्पी आउटरेज को बढ़ाती है। अगर मोदी वाकई फंसे होते, तो ज्यादा सबूत होते, लेकिन मौजूदा उल्लेख भी काफी है सवाल उठाने के लिए। यह घटना डिजिटल युग में अफवाहों की तेजी दिखाती है, लेकिन मोदी की जवाबदेही की कमी सत्य की कीमत कम करती है, देश को ऐसे मुद्दों पर स्पष्टता चाहिए, न कि राजनीतिक चुप्पी।

by : Rajesh R. Singh

एपस्टीन फाइल्स : ब्रिटिश राजघराने के पूर्व राजकुमार, जो पहले ही इसी मामले में अपने परिवार तक से बेदखल किए जा चुके हैं, उनकी कई फोटोज सामने आई


एपस्टीन फाइल्स : ब्रिटिश राजघराने के पूर्व राजकुमार, जो पहले ही इसी मामले में अपने परिवार तक से बेदखल किए जा चुके हैं, उनकी कई फोटोज सामने आई
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एपस्टीन फाइल्स : ब्रिटिश राजघराने के पूर्व राजकुमार, जो पहले ही इसी मामले में अपने परिवार तक से बेदखल किए जा चुके हैं, उनकी कई फोटोज सामने आई हैं. एपस्टीन फाइल्स में जारी की गई तस्वीरों वाले व्यक्ति को एंड्रयू माउंटबैटन-विंडसर माना जा रहा है.

अमेरिकी न्याय विभाग ने शुक्रवार रात एपस्टीन फाइल्स के 30 लाख से अधिक और दस्तावेज जारी किए. इसके जारी होने के बाद एक बार फिर से बवाल मच गया है.
इसमें आज की दुनिया के काफी बड़े और प्रभावशाली लोगों का नाम है. इसमें ब्रिटिश राजघराने के पूर्व राजकुमार, जो पहले ही इसी मामले में अपने परिवार तक से बेदखल किए जा चुके हैं, उनकी कई फोटोज सामने आई हैं. एपस्टीन फाइल्स में जारी की गई तस्वीरों वाले व्यक्ति को एंड्रयू माउंटबैटन-विंडसर माना जा रहा है. इसमें वह एक महिला के ऊपर चारों हाथ-पैरों के बल झुका हुआ दिखाई देता है, जबकि वह महिला फर्श पर लेटी हुई है.
तीन तस्वीरों में एंड्रयू महिला के ऊपर झुका दिख रहा है. वह पीठ के बल लेटी है और उसके हाथ फैले हुए हैं. एक तस्वीर में वह सीधे कैमरे की ओर देख रहा है, जबकि दूसरी में उसका बायां हाथ महिला के पेट पर रखा हुआ दिखाई देता है. पूर्व ड्यूक ऑफ यॉर्क एंड्रयू जींस व सफेद पोलो शर्ट पहने नंगे पैर हैं. उसके हाथ में चांदी की घड़ी भी नजर आती है. तस्वीरों में एक और शख्स भी दिखाई देता है, जो लेपर्ड-प्रिंट कुर्सी पर बैठा है और उसके पैर मेज पर रखे हुए हैं. वहीं, फर्श पर लेटी महिला ने सफेद टी-शर्ट और काली पैंट पहनी हुई है. उसके हाथ फैले हुए दिखाई देते हैं. उसके चेहरे को पूरी तरह काला कर छिपा दिया गया है.
एपस्टीन फाइल्स में जारी अन्य सामग्रियों की तरह, यह भी स्पष्ट नहीं है कि ये तस्वीरें कब और कहां ली गईं. इनके साथ कोई अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की गई है. पिछले महीने फाइल्स के एक अन्य बैच में एंड्रयू की एक तस्वीर भी जारी हुई थी, जिसमें वह सैंड्रिंघम में पांच महिलाओं की गोद में लेटे हुए दिखाई दे रहे थे. डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कहा कि दस्तावेजों में काला किया (रेडक्शन) किया गया है. ब्लैंच ने यह भी बताया कि घिसलीन मैक्सवेल को छोड़कर सभी महिलाओं के चेहरों को धुंधला किया गया है, लेकिन किसी भी पुरुष के चेहरे को नहीं छिपाया गया.

ईमेल्स में क्या खुलासा हुआ? बकिंघम पैलेस में डिनर का जिक्र एंड्रयू को एपस्टीन से जुड़े अब तक के सबसे बड़े दस्तावेज़ खुलासे के बाद एक नए दौर की शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें उनके हजारों संदर्भ शामिल हैं. इन फाइलों की रिलीज में कई ईमेल का जिक्र हैं.

Friday, January 30, 2026

अवयस्क लड़की की सहमति से उसके साथ संबंध बनाने वाले लड़के को 20 साल की सजा


 अवयस्क लड़की की सहमति से उसके साथ संबंध बनाने वाले लड़के को 20 साल की सजा 

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भोपाल के विशेष POCSO न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि नाबालिग की सहमति कानून की नजर में कोई मायने नहीं रखती।

कोर्ट ने कहा कि यदि पीड़िता नाबालिग (18 वर्ष से कम) है, तो उसकी "सहमति" (Consent) को कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता। शारीरिक संबंध के मामलों में नाबालिग की मर्जी कानूनन शून्य होती है।
विशेष न्यायाधीश (पाक्सो) कुमुदिनी पटेल ने स्पष्ट किया कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम
(​POCSO Act / Protection of Children from Sexual Offences) का मूल उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण से बचाना है। भले ही नाबालिग ने अपनी इच्छा से संबंध बनाए हों, कानून इसे अपराध की श्रेणी में ही रखेगा।

इस मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए उसे 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
​भारतीय न्याय संहिता/ आईपीसी की ​धारा 375 के अंतर्गत अट्ठारह वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाना 'बलात्कार' की श्रेणी में आता है, चाहे उसकी सहमति हो या न हो।

​POCSO धारा 4 & 6 नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए कड़े दंड का प्रावधान करती हैं।
इस मामले में निशातपुरा, भोपाल का दिनेश 14 साल की अवयस्क लड़की को भगा कर ले गया था। उसने लड़की से शादी करके उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाए थे। लड़की के परिवार की शिकायत पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। घटना 17 मार्च 2024 की है।

Thursday, January 29, 2026

ई रिक्शा चुराने वाला आरोपी पकडा गया चुराया हुआ ई रिक्शा कीमती करीबन 2,40,000/- रूपये का जप्त


ई रिक्शा चुराने वाला आरोपी पकडा गया चुराया हुआ ई रिक्शा कीमती करीबन 2,40,000/- रूपये का जप्त 


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जबलपुर. पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री सम्पत उपाध्याय (भा.पु.से.) द्वारा जिले में पदस्थ समस्त राजपत्रित अधिकारियों एवं थाना प्रभारियों को नकबजनी, चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने हेतु संपत्ति संबंधी अपराधियों से सघन पूछताछ तथा उनके गुजर बसर की जांच करने हेतु निर्देशित किया गया और घटित हुई चोरी एवं नकबजनी में आरोपियों की पतासाजी करते हुये. चोरी गये मशरूका की बरामदगी हेतु आदेशित किया गया है।

आदेश के परिपालन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर श्री आयुष गुप्ता (भा.पु.से.) एवं नगर पुलिस अधीक्षक गोहलपुर श्री मधुर पटेरिया के मार्गदर्शन एवं थाना प्रभारी गोहलपुर श्री रितेश पाण्डेय के नेतृत्व में थाना गोहलपुर  पुलिस द्वारा चोरी की एक ई रिक्सा कीमती करीबन 2,40,000/- रूपये का बरामद कर कार्यवाही की गई ।

घटना का विवरण

थाना गोहलपुर में दिनांक 28-1-26 को शेख तौसीफ उम्र 40 वर्ष निवासी अमखेरा तालाब के पास गोहलपुर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी तबियत खराब होने से अपना आटो लेकर शासकीय अस्पताल मनमोहन नगर शांति नगर अपने ई रिक्शा क्रमांक एमी 20 जेड के 0210 से उपचार कराने गया था तथा अपना ई रिक्शा अस्पताल के बाहर खड़ा कर दिया था लगभग 1-30 बजे इलाज कराकर वापस आकर देखा उसका ई रिक्शा नहीं था, ईरिक्शा की तलाश आसपास की पता नहीं चला कोई अज्ञात चोर उसका ई रिक्शा चोरी कर ले गया है। रिपोर्ट पर धारा 303(2) बीएनएस का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। 

दौरान तलाश पतासाजी के सीसीटीव्ही फुटेज खंगाले गये एवं विश्वसनीय मुखबिरो को लगाया गया। दौरान तलाश पतासाजी के विश्वसनीय मुखबिर की सूचना पर लेमा गार्डन के पास दबिश दी जहॉ चोरी गया ई रिक्शे को एक व्यक्ति लिये हुये दिखा, जिसे घेराबंदी कर पकडा जिसने पूछताछ पर अपना नाम  आरिफ अली   उम्र 35 वर्ष निवासी आयशा नगर थाना अधारताल बताया जिसे अभिरक्षा में लेकर वाहन के कागजात के संबंध में पूछताछ करने पर कोई कागजात न होना बताया सघन पूछताछ पर पर थाना गोहलपुर  अतर्गत मनमोहन नगर शांति नगर क्षेत्र से चुराना स्वीकर करते हुये बताया कि वह नशे का आदि है तथा नशा करने के लिये अपराध को अंजाम देता है। 

आरोपी के कब्जे से चुराया हुआ ई-रिक्शा कीमती करीबन 2,40,000/- का जप्त कर आरोपी को थाना गोहलपुर में दर्ज अपराध कमांक 66/2026 धारा 303 (2) बीएनएस के प्रकरण मे विधिवत गिरफ्तार किया गया। 


उल्लेखनीय भूमिका - आरोपी को चुराये हुये ई रिक्शा सहित रंगे हाथ पकडने में थाना प्रभारी गोहलपुर श्री  रितेश पाण्डेय, प्रधान आरक्षक जितेन्द्र यादव,  जितेन्द्र तिवारी, आरक्षक  समरेन्द्र सिंह, लालजी यादव, आरक्षक  दिनेश दुबे,   जयकिशोर की सराहनीय भूमिका रही।

लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायत के लिए (BNSS) की धारा 175(4) के तहत शपथ पत्र अनिवार्य : सुप्रीम कोर्ट


 लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायत के लिए (BNSS) की धारा 175(4) के तहत शपथ पत्र अनिवार्य :  सुप्रीम कोर्ट 


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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(4) के तहत किसी लोक सेवक (public servant) के विरुद्ध मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत तभी प्रस्तुत की जा सकती है, जब शिकायतकर्ता पहले धारा 175(3) का अनुपालन करे।

अर्थात्, शिकायतकर्ता को यह दिखाना अनिवार्य है कि उसने पहले पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) के समक्ष शपथ-पत्र (affidavit) सहित लिखित शिकायत दी थी।
यह निर्णय जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने दिया। खंडपीठ के समक्ष यह प्रश्न था कि क्या धारा 175(4) एक स्वतंत्र प्रावधान है, जिसके तहत मजिस्ट्रेट मौखिक शिकायत पर भी कार्रवाई कर सकता है, या फिर यह धारा 175(3) का ही एक प्रक्रियात्मक विस्तार है, जिसमें Priyanka Srivastava Vs. State of U.P. (2015) में निर्धारित सुरक्षा उपाय लागू होंगे।

धारा 175(3) और 175(4) का संबंध

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 175(4) कोई स्वतंत्र या अलग-थलग प्रावधान नहीं है, बल्कि इसे धारा 175(3) के साथ सामंजस्यपूर्ण ढंग से पढ़ा जाना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि:
किसी लोक सेवक के विरुद्ध मजिस्ट्रेट के समक्ष सीधे शिकायत दाखिल कर जांच का आदेश नहीं मांगा जा सकता,
जब तक कि शिकायतकर्ता यह न दिखाए कि उसने पहले धारा 173(4) BNSS के तहत पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया था और उसके बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष शपथ-पत्र सहित आवेदन प्रस्तुत किया गया हो।

अदालत ने कहा:

“पुलिस अधीक्षक के समक्ष उपलब्ध उपाय का सहारा लेना, न्यायिक मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र को सक्रिय करने के लिए एक अनिवार्य पूर्व-शर्त है।”

प्रक्रिया को दरकिनार करने की अनुमति नहीं

अदालत ने चेतावनी दी कि यदि धारा 175(4) को एक स्वतंत्र प्रावधान मान लिया जाए, तो इससे शिकायतकर्ता कानून द्वारा स्थापित क्रमबद्ध प्रक्रिया (statutory hierarchy) को दरकिनार कर सकेगा।
ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति बिना शपथ-पत्र और बिना पहले पुलिस अधीक्षक से संपर्क किए, सीधे मजिस्ट्रेट के समक्ष लोक सेवक के विरुद्ध शिकायत कर सकेगा, जो कि विधायी मंशा के विपरीत होगा।
अदालत ने कहा कि ऐसा करने से असंगत और अवांछित परिणाम उत्पन्न होंगे, क्योंकि धारा 175(3) स्पष्ट रूप से धारा 173(4) के तहत किए गए प्रयास और शपथ-पत्र की मांग करती है, जबकि धारा 175(4) को अलग-थलग पढ़ने से यह सुरक्षा समाप्त हो जाएगी।

अदालत के निष्कर्ष:

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निष्कर्ष इस प्रकार संक्षेपित किए:

धारा 175(3) और 175(4) को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ पढ़ा जाना चाहिए; धारा 175(4), धारा 175(3) का ही विस्तार है।
जांच का आदेश देने की शक्ति मुख्य रूप से धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट को प्राप्त होती है। धारा 175(4) भी यह शक्ति देती है, लेकिन लोक सेवकों से जुड़े मामलों में एक विशेष प्रक्रिया निर्धारित करती है।
धारा 175(4) में प्रयुक्त शब्द “शिकायत (complaint)” का अर्थ मौखिक शिकायत नहीं है। इसे उसी प्रकार के आवेदन के रूप में समझा जाएगा, जैसा धारा 175(3) में है—अर्थात् शपथ-पत्र से समर्थित लिखित आवेदन, जिसमें संज्ञेय अपराध के आरोप हों।

निष्कर्ष

अदालत ने दो टूक कहा कि लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायतों में वैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन अनिवार्य है, और कोई भी शिकायतकर्ता निर्धारित प्रक्रिया को छोड़कर सीधे मजिस्ट्रेट के पास नहीं जा सकता।

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Wednesday, January 28, 2026

अब पुलिस किसी गिरफ्तार आरोपी को बाजार में बाल कटवाकर, महिलाओं के कपड़े पहनाकर या परेड कराकर नहीं घुमा सकेगी

Now the police will not be able to parade an arrested accused in the market after cutting his hair, dressing him in women's clothes or making him walk around.


अब पुलिस किसी गिरफ्तार आरोपी को बाजार में बाल कटवाकर, महिलाओं के कपड़े पहनाकर या परेड कराकर नहीं घुमा सकेगी। थाने के बाहर बैठाकर फोटो खींचना, अंडरगारमेंट में फोटो वायरल करना, बाल काटकर घुमाना आदि पुलिस को नहीं करने के आदेश जारी।


Monday, January 26, 2026

महिला ठेकेदार से रूपये छीनने वाला परिचित 'लुटेरा' अभिषेक सोनी गिरफ्तार, न्यायिक अभिरक्षा में गया जेल, छीने हुये नगद 1 लाख 33 हजार 500 रूपये नगद जप्त


महिला ठेकेदार से रूपये छीनने वाला परिचित 'लुटेरा' अभिषेक सोनी गिरफ्तार, न्यायिक अभिरक्षा में गया जेल,  छीने हुये नगद 1 लाख 33 हजार 500 रूपये नगद जप्त 


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लेबर पेमेंट हेतु बैग में रूपये लेकर जा रही महिला ठेकेदार से रूपये छीनने वाला आरोपी गिरफ्तार, छीने हुये नगद 1 लाख 33 हजार 500 रूपये नगद जप्त

जबलपुर. थाना कैंट में दिनाँक 25/1/26 को श्रीमति अर्चना मसीह ने लिखित शिकायत की कि वह वेदांत हस्पिटल में ठेकेदार के पद पर काम करती है उसेे लेबर पैमेंट करने हेतु एवं पारिवारिक समस्या के कारण लगभग 2 लाख रुपए की आवश्यकता थी उसने बड़े पिताजी के लड़के कैलाश मौर्या निवासी सप्लाई डिपो के पास एमईएस कलोनी सदर से 2 लाख रुपए उधार मागे थे जिन्होने पैसे दिनाक 24/01/2026 को देने के लिए सदर बुलाया था। 

उसने पूर्व के परिचित अभिषेक सोनी निवासी राझी से पैसों के सम्बंध में बात की थी जब उसे भैया का फोन आया तो उसने अभिषेक सोनी को फोन करके बताया कि मेरे भैया ने पैसो की व्यवस्था कर दी है मेैं पैसे लेने सदर ही जा रही हूँ। रात लगभग 8 बजे अपने भैया कैलाश से 2 लाख रुपए लेकर वह मोटर सायकिल होडा शाईन से वापिस घर के लिए निकली तभी एमईएस कालोनी बरगद पेड के पास अभिषेक सोनी मिला जिसने उसे रोका जैसे ही वह रुकी तो अभिषेक सोनी ने उसके पास टंगा कत्थे रंग के बैग को जबरदस्ती छीनकर मुर्गी ग्राउंड के अंदर से होते हुए भाग गया, उसने अपनी मोटर सायकिल से रोड से होते हुए  पीछा किया किंतु मेनरोड से अभिषेक सोनी का कुछ पता नहीं चला। बैग में भैया से उधार लिए हुए 2 लाख रुपए नगद और रियलमी कंपनी का मोवाईल था। लिखित शिकायत अवलोकन आरोपी के विरुद्ध  धारा 309 (4) बी एन एस का का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री सम्पत उपाध्याय (भा.पु.से.) द्वारा घटित हुई घटना को गम्भीरता से लेते हुये आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी हेतु आदेशित किये जाने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात सुश्री अंजना तिवारी एवं नगर पुलिस अधीक्षक कैंट श्री उदयभान बागरी के मार्गनिर्देशन में थाना प्रभारी कैंट श्री पुष्पेन्द्र पटले के नेतृत्व में टीम गठित कर लगायी गयी। 

गठित टीम द्वारा विश्वसनीय मुखबिर की सूचना पर रांझी बजरंग नगर में दबिश देते हुये आरोपी अभिषेक सोनी उम्र 40 वर्ष निवासी बजरंग नगर रांझी को अभिरक्षा में लेते हुये पूछताछ करने पर अभिषेक सोनी ने घटना कारित करना स्वीकार करते हुये बताया कि अर्चना मसीह द्वारा अधिक रूपये लेकर जाने की जानकारी मिलने पर स्वयं की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने से मन में लालच आ जाने के कारण कैंट स्थित स्पलाई डिपो रोड आटो से पहुंचा एवं श्रीमति अर्चना मसीह को रोककर बैग जिसमे रूपये रखे थे छीनकर तेजी से भाग, भागते समय मुर्गी ग्रांउड में बैग में से रूपयों की गड्डी निकालकर अपनी जेब मे रख ली तथा बैग वहीं ग्राउंड में फेंकर तेजी से भाग कर रोड पर आकर आटो से रांझी स्थित अपने घर आ गया एवं रूपयों को घर में रखे कूलर मे छिपाकर रख दिया है। आरोपी की निशादेही पर घर में कूलर के अंदर छिपाकर रखे हुये नगद 1 लाख 33 हजार 500 रूपये जप्त करते हुये, आरोपी को प्रकरण में विधिवत गिरफ्तार कर मान्नीय न्यायालय के समक्ष पेश करते हुये न्यायिक अभिरक्षा में जेल निरूद्ध किया गया। 

नगद रूपये छीनने वाले लुटेरे को पकडने में थाना प्रभारी केण्ट श्री पुष्पेन्द्र पटले, उप निरीक्षक जागेश्वरी, सहायक उप निरीक्षक लक्ष्मी बेन, प्रधान आरक्षक राजेश शर्मा, जयंत नामदेव, भूपेन्द्र पटेल, आरक्षक संदीप की सराहनीय भूमिका रही।



Saturday, January 24, 2026

कटनी कलेक्‍टर आशीष तिवारी ने वित्‍तीय अनियमितता घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता एवं उदासीनता पर स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के लेखापाल को किया निलंबित


कटनी कलेक्‍टरआशीष तिवारी ने वित्‍तीय अनियमितता घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता एवं उदासीनता पर स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के लेखापाल को किया निलंबित


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कटनी – वित्तीय अनियमितता और पदीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही बरतने पर कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने बहोरीबंद अस्पताल में पदस्थ तत्कालीन प्रभारी लेखापाल (वर्तमान में जिला अस्पताल में पदस्थ) श्री राहुल मिश्रा, सहायक ग्रेड-3 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कलेक्टर श्री तिवारी को बीते मंगलवार को बहोरीबंद में आयोजित जनसुनवाई में मिली शिकायत पर, कलेक्टर ने तत्काल जांच कराने के बाद यह कार्रवाई की है।

बहोरीबंद में आयोजित जनसुनवाई में यह तथ्य सामने आया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बाकल, बहोरीबंद से सेवानिवृत्त एएनएम श्रीमती सावित्री देवी वर्मा के पेंशन व जीपीएफ की राशि एवं अन्य स्वत्वों का भुगतान उनके खातों में नहीं मिल पाया था।
कलेक्टर के निर्देश पर की गई जांच में पाया गया कि बहोरीबंद सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के तत्कालीन प्रभारी लेखापाल श्री राहुल मिश्रा द्वारा पदीय कर्तव्यों के अनुरूप कार्य न किया जाकर म०प्र० सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 में वर्णित प्रावधानों के तहत वित्तीय अनियमितता तथा पदीय दायित्वो के प्रति लापरवाही की गयी है।
कलेक्टर श्री तिवारी ने बहोरीबंद अस्पताल के तत्कालीन प्रभारी लेखापाल श्री मिश्रा ( वर्तमान में जिला अस्पताल में पदस्थापना)का यह कृत्य पदीय दायित्वो के प्रति घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता एवं उदासीनता किये जाने के कारण म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9(2) मानते हुये तत्कालीन प्रभारी लेखापाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
निलंबन अवधि के दौरान श्री मिश्रा को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। साथ ही निलंबन अवधि के दौरान श्री मिश्रा का मुख्यालय कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कटनी होगा।

Friday, January 23, 2026

कूट रचित दास्तावेज तैयार कर बैंक से 4 लाख रूपयें का लोन लेकर धोखाधडी, 10-10 वर्ष सश्रम कारावास एवं 5-5 हजार रूपये के अर्थदंड


कूट रचित दास्तावेज तैयार कर बैंक से 4 लाख रूपयें का लोन लेकर धोखाधडी, 10-10 वर्ष सश्रम कारावास एवं 5-5 हजार रूपये के अर्थदंड 


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जबलपुर. थाना अधारताल अन्तर्गत धोखाधडी के प्रकरण में कूट रचित दास्तावेज तैयार कर किसी और की जमीन को अपना बताकर लोन वाले पति-पत्नि का सहयोग करने वाले आरोपियों को सारगर्भित विवेचना एवं मान्नीय न्यायालय में विचारण के दौरान सशक्त पैरवी के परिणाम स्वरूप 10-10 वर्ष सश्रम कारावास एवं अर्थ दण्ड से किया गया दण्डित

थाना अधारताल में गौरव प्रसाद तिवारी उम्र 32 वर्ष निवासी रिछाई रांझी ने लिखित शिकायत की थी कि उसके दादाजी गौरीशंकर तिवारी के नाम पर दर्ज जमीन मौजा बघेली रकवा 2.760 हैक्यिर भूमि है उसके दादा की मृत्यु 27-5-13 में हो चुकी है, दादाजी के स्वर्गवास के बाद जमीन पर बुआई उसके पिता एवं चाचा नारायण प्रसाद करते है। जुलाई महीने मे फौती चढवाने एवं खसरे की नकल लेने तहसील पनागर गया था जहॉ पता चला उसके दादा जी के नाम पर दर्ज जमीन पर आई.सी.आई.सी बेैंक आधारताल द्वारा 408100 रूपये दिनॉक 23-12-16 को किसान क्रैडिट कार्ड बनाकर लोन स्वीकृत किया गया है.


जब वह आईसीआईसी बैंक शाखा जाकर पता किया तो ब्लूम चौक शास्त्री ब्रज उसे भेजा गया जहॉ जाकर उसने पता कि के.सी.सी. बनाने वाले मैनेजर से मिला एवं सम्पूर्ण दस्तावेजों की छाया प्रति दी जिसमे के.सी.सी. लोन लेने वाले गौरी शंकर यादव और उनकी पत्नि रेखा यादव निवासी सुमन नगर रिछाई एंव जमानतदार राजकुमार यादव, निवासी अधारताल, विजय मिश्रा निवासी रिछाई के नाम के हस्ताक्षरित दस्तावेज थे।


हम लोगो ने किसी बैंक से कोई लोन नहीं लिये है उसके दादा श्री गौरी शंकर तिवारी के नाम की उक्त भूमि पर गौरी शंकर यादव, रेखा बाई यादव द्वारा षणयंत्र पूर्वक जमीन की फर्जी कूट रचित खाता बही तैयार बैंक से 4 लाख 8 हजार 100 रूपयें का के.सी.सी. लोन लेकर रकम हडप लिये है, जमानतदार के रूप में राजकुमार यादव निवासी सुभाष नगर महाराजपुर एवं विजय कुमार मिश्रा रिछाई द्वारा मिली भगत कर रकम निकालने मे सहयोग किये हैं ।


शिकायत जांच पर गौरी शंकर यादव, श्रीमति रेखा बाई यादव, दोनों निवासी सुमन निगर रिछाई, तथा जमानतदार राजकुमार यादव निवासी सुभाष नगर महाराजपुर एवं विजय कुमार मिश्रा निवासी रिछाईं के विरूद्ध दिनॉक 9-5-19 को अपराध क्रमांक 375/2019, धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी,34 भादवि का अपराध पंजीबद्ध कर आरोपी राजकुमार यादव निवासी सुभाष नगर महाराजपुर एवं विजय कुमार मिश्रा निवासी रिछाईं को अभिरक्षा में लेते हुये प्रकरण मे गिरफ्तार किया गया।


उप निरीक्षक टेकचंद शर्मा द्वारा उक्त मामले की सारगर्भित विवेचना कर चालान पेश करते हुये न्यायालय द्वारा जारी समंस वारंट की तामीली समय पर कराई जाकर समय पर साक्षियों को मान्नीय न्यायालय उपस्थित कराया गया। प्रकरण की पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक श्री अरविंद जैन द्वारा की गई।


सारगर्भित विवेचना एवं माननीय न्यायालय मे विचारण के दौरान सशक्त पैरवी के परिणाम स्वरूप दिनांक 22.1.2026 को मान्नीय न्यायालय श्रीमती प्रीति शिखा अग्निहोत्री तेईसवें अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा आरोपी 1-राजकुमार यादव उम्र 62 वर्ष, निवासी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी सुभाष नगर महाराजपुर, थाना आधारताल, 2-विजय कुमार यादव, उम्र 55 वर्ष, निवासीः कांचघर स्टेशन रोड खेरमाई मंदिर के पास थाना घमापुर, को धारा 467, 471, भा.द.वि. में 10-10 वर्ष सश्रम कारावास एवं 5-5 हजार रूपये के अर्थदंड एवं धारा 420, 468, 120 बी, भा.द.वि में 7-7 वर्ष सश्रम कारावास एवं 5-5 हजार रूपये अर्थदंड से दण्डित किया गया।

हनी ट्रैप के मुख्य सरगना अविनाश जाजपुरा ,नरेंद्र गहलोत सहित पांच जेल में बंद

हनी ट्रैप के मुख्य सरगना अविनाश जहाजपुरा की अवैध गुमटी पर चला बुलडोजर

- सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर हुई कार्रवाई

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नीमच। हनी ट्रेप गिरोह के मुख्य सरगना अविनाश जाजपुरा की कलेक्ट्रेट चौराहे के समीप ग्रीन बेल्ट की भूमि पर स्कीम नंबर३६ में लगी अवैध गुमटी को नगरपालिका प्रशासन ने शुक्रवार को हटा दिया। लंबे समय से अवैध गुमटी लगाकर आरोपी जाजपुरा यहां पर हनी ट्रेप सहित कई अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। बीज व्यापारी की शिकायत पर नीमच कैंट पुलिस ने हनी ट्रेप सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था। इस मामले में नरेंद्र गेहलोत सहित नौ आरोपी गिरफ्तार हो चुके है, लेकिन अविनाश जाजपुरा व दिलीप भारद्वाज व अन्य आरोपी अभी तक फरार है। सबसे बड़ी बात है कि अवैध तरीके से लंबे समय से इन लोगों ने गुमटी लगा रखी थी, लेकिन प्रशासन ने कभी इसको हटाने की जहमत नहीं उठाई।

नगर पालिका अधिकारी विश्वास शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि सीएम हेल्पलाइन पर हुई शिकायतों के चलते आज नगर पालिका द्वारा अवैध गुमटिया हटाने की कार्रवाई की है। नगर पालिका द्वारा जवाहर नगर एवं 36 नंबर ग्रीन बेल्ट के समीप से लगभग 4 गुमटिया हटाई है। यह कार्यवाही शाम तक जारी रहेगी, जसमें अन्य गुमटिया भी हटाई जानी है। कार्रवाई के दौरान नगर पालिका के स्वस्थ अधिकारी विश्वास शर्मा, राजस्व अधिकारी दिनेश चांदना,ओपी परमार सहित बड़ी संख्या में नपाकर्मी स्कीम नंबर- 36 स्थित मुख्य चौराहे पर पहुंचे थे। जिसके बाद यहां मौजूद एक लाइन से जमी गुमटियों को जसीबी की मदद से हटाया गया, और ट्रैक्टर में लोड कर नियत स्थान पर पहुंचाया गया।

हनी ट्रेप के मामले में आरोपी नरेंद्र गहलोत सहित पांच जेल में बंद
नीमच जिले में हनी ट्रेप में लोगों को फंसाकर पैसे वसूलने का गंदा खेल खेलने वाले एवं ब्लैकमेलिंग कर लोगों से वसूली करने वाले तीन फर्जी पत्रकारों के गिरोह के मुख्या नरेंद्र गेहलोत व दो महिला आरोपी सहित पांच को गिरफ्तार कर कैंट पुलिस ने सोमवार को न्यायालय में पेश किया गया। जिन्हें न्यायालय ने २६ अक्टूबर को जेल भेज दिया। आपको बता दें कि दिनांक 30 सितंबर २०21 की शाम करीब 6 बजे सांध्य दैनिक जय मालवा के पत्रकार अरूण पिता रमेशचन्द्र यादव जाति जाटव को आरोपी नरेन्द्र पिता हरीराम गेहलोत अपनी कार पर सवार होकर होटल भारत पेलेस के पास से बहला फुसला कर बिठा कर इंदिरा नगर के पीछे सांवरिया कॉलोनी निवास पर ले गया था। जहां पहले से मौजुद आरोपीगण अविनाश पिता कुबैरकांत जाजपुरा एवं दिलीप पिता मनोहर भारद्वाज पत्रकार अरूण यादव को कमरे में बंधक बनाकर मारपीट करते है। इतने में कमरे में पहले से मौजुद नरेन्द्र गेहलोत की तीन लड़किया भी अरूण यादव के हाथ पकड़ लेती है, और बलात्कार के झुठे आरोप में फंसाने की धमकी देती है और दिलीप भारद्वाज अपने मोबाईल से अरूण यादव के साथ कारीत घटनाक्रम का वीडियो भी बनाता है और धमकी देता है कि आज तुझे यही जान से खत्म कर देंगे। इतने में नरेन्द्र गेहलोत घर में रखी पिस्टल अपनी लडक़ी से मंगवाता है और अरूण यादव के सर पर तान देता है। अविनाश और दिलीप भारद्वाज, अरूण यादव को अभद्र और जातिसूचक गालिया देते है। जिसके बाद अरूण यादव के मोबाईल पर उनके मित्र का कॉल आता है, डरी सहमी आवाज में अरूण यादव नरेन्द्र गेहलोत के घर जल्दी आने की बात अपने मित्र से कहते है, इतने में नरेन्द्र गेहलोत की ल?कीया अरूण यादव का मोबाईल छीन लेती है और नरेन्द्र गेहलोत घर में पड़ी बियर की बोटल को फोडक़र अरूण यादव के पेट के करीब लाकर डराता-धमकाता है। उक्त घटना के बीच जब अरूण यादव के मोबाईल पर जिस मित्र का फोन आता है उन्हे वहां हो रही चिल्लाचोट की आवाज से आभास हो जाता है कि अरूण यादव के साथ कुछ तो घटनाक्रम घटित हो रहा है। आनन-फानन में अरूण यादव के मित्र नरेन्द्र गेहलोत के निवास पर पहुंचते है, लेकिन घर के बाहर पहले से मौजूद नरेन्द्र की लडकी उन्हे भी डरा-धमका कर वहां से रवाना कर देती है। अरूण यादव के मित्र के वहां से चले जाने से अविनाश जाजपुरा और दिलीप भारद्वाज कहते ही कि आज तो इसे छोड़ दो, अगली बार हत्थे चढ़ा तो जान से मार देंगे। इतने में नरेन्द्र गेहलोत बोलता है कि पुलिस के पास जायेगा तो तेरे घर अफीम रखवा देंगे। इसलिए खेरियत में रहकर यहां से चुपचाप निकल जा, और घर के बाहर भी किसी को यहां के घटनाक्रम का पता नही चलना चाहिए, इसलिए गले मिलते हुए जा। इतने में नरेन्द्र एक लडक़ी भी घर के बाहर आती है और अरूण यादव को उनका मोबाईल हाथ में थमाकर अंदर चली जाती है। पत्रकार अरूण यादव घटनाक्रम वाले दिन ही नरेन्द्र के घर से कुछ दुर छुपकर डायल-100 बुलाते है ओर सिधे पुलिस थाने पहुंचकर सारे घटनाक्रम से अवगत करवाते है, तीनों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करवाया था। वहीं दिनांक ८ अक्टूबर २०२१ को बीज व्यापारी रविंद्र पालीवाल ने आरोपीगणों के विरूद्ध प्रकरण दर्ज कराया था कि यशोदा बाई उसके यहां बीज खरीदने आई और उससे परिचय बढ़ाकर नंबर लेकर गई थी। जिसके बाद फोन पर बातचीत करना शुरू कर दिया और मिलने बुलाया। इस दौरान उसका पति आ गया और उसकी पत्नी से बातचीत करने का आरोप लगाकर मारपीट करने लगा। तभी कथित पत्रकार नरेंद्र गेहलोत आया और दोनों पहचानते हुए समझौत की बात करते हुए पांच लाख की डिमांड रखी, जिसमें करीब १.९० लाख वसूल भी कर लिए। इस पर पुलिस ने हनीट्रेप और ब्लेकमेलिंग का प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी।

फरारआरोपियों की संपत्ति कुर्क की तैयारी
हनी ट्रेप के माध्यम से लोगों से लाखों की वसूली करने एवं पत्रकार अरूण यादव के साथ मारपीट की घटना के मामले में फर्जी पत्रकार अविनाश जाजपुरा, दिलीप भारद्वाज लंबे समय से फरार है। नीमच कैंट पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर दबिश दे रही है, लेकिन आरोपियों का पता नहीं चल रहा है। ऐसी स्थिति में पुलिस फरार आरोपियों की चल—अचल संपत्ति कोर्ट से कुर्क करवाने की तैयारी शुरू कर है। पुलिस ने आरोपी दिलीपसिंह पिता मनोहरसिंह भारद्वाज निवासी खेरमालिया छोटीसादडी की चल—अचल संपत्ति की जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए ग्राम पंचायत खेरमालिया को पत्र भेजा है। इसी प्रकार अविनाश जाजपुरिया के लिए नीमच नगरपालिका व पंजीयक विभाग को सूचना पत्र भेजा है।
- राकेश मोहन शुक्ल, सीएसपी नीमच।

Thursday, January 22, 2026

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन के द्वारा प्राप्त कानूनी नोटिस का जवाब 24 घण्टे से पहले ही जारी किया जिसका हिंदी अनुवाद इस प्रकार है


शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन के द्वारा प्राप्त कानूनी नोटिस का जवाब 24 घण्टे से पहले ही जारी किया जिसका हिंदी अनुवाद इस प्रकार है

 To,

उपाध्यक्ष
प्रयागराज मेला प्राधिकरण
ऑफिस प्रयागराज मेला प्राधिकरण
माघमेला, प्रयागराज
ईमेल आईडी:mahakumbh25@gmail.com
फ़ोन: 0532-2504011, 0532-2500775
विषय: आपका पत्र संख्या 4907/15- एम. ​​के.एम. (2025-26) दिनांक 19 जनवरी 2026, जो मध्यरात्रि के बाद मेरे आदरणीय क्लाइंट के माघ-मेला सिवीर के प्रवेश द्वार पर कानूंगो और अधिकारियों तथा पुलिस द्वारा चिपकाया गया था, जब वह सो रहे थे।
मेरे मुवक्किल परम पूज्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु
शंकराचार्य स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 1008 जी महाराज, ज्योतिर्मठ, बदरिकाश्रम, हिमालय, थोट्टकाचार्य गुफा, जोशीमठ, जिला चमोली 246443 (गढ़वाल) उत्तराखंड, ईमेल: cfo@shreejvotirmathah.org, फोन नंबर 01389-222185, मोबाइल नंबर 9981140015, 8871175555 (सीईओ)।
महोदय,
मेरे उपर्युक्त अत्यंत आदरणीय मुवक्किल के निर्देशों के अधीन और उनके प्रतिनिधि के रूप में, मैं आपके उपर्युक्त नोटिस का उत्तर दे रहा हूँ, साथ ही प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की ज्यादतियों और मनमानी आपराधिक कार्रवाइयों के विरुद्ध उचित कार्यवाही शुरू करने के अपने मुवक्किल के अन्य कानूनी, मौलिक और संवैधानिक अधिकारों को भी सुरक्षित रखते हुए; और मैं इसके द्वारा निम्नानुसार उत्तर देता हूँ:
1. दिनांक 19.01.2026 का आपका उपरोक्त पत्र क्षेत्राधिकार से बाहर, मनमाना, दुर्भावनापूर्ण, द्वेषपूर्ण और भेदभावपूर्ण है तथा इसे न केवल मेरे आदरणीय ग्राहक को बदनाम करने, अपमानित करने और नीचा दिखाने के बुरे इरादे से जारी किया गया है, बल्कि शास्त्रों में विश्वास रखने वाले और उनकी पूजा करने वाले सनातन धर्म के 10 करोड़ से अधिक अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से भी जारी किया गया है।
आदि शंकराचार्य के जीवित स्वरूप के रूप में, एक लाख श्लोकों वाले शिव रहस्य के अनुसार भगवान शिव के अवतार, 11वीं शताब्दी में स्वामी आत्मानंद द्वारा व्याख्या किए गए ऋग्वेद के अस्यवमी सूक्त, यजुर्वेद, 25000 वर्ष से भी पहले आदि शंकराचार्य द्वारा रचित मठाम्नायसेतु महानुशासनम और 14वीं शताब्दी के माधवाचार्य के शंकर दिग्विजय आदि।
2. ज्योतिष्पीठ, ज्योतिर्मठ, बदरिकाश्रम, हिमालय और शारदामठ द्वारका के एचडीएम (परम पूज्य) जगद्गुरु शंकराचार्य, स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज, 11.09.2022 को ब्रह्मलीन हो गए, अपने पीछे पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 41 के तहत पंजीकृत एक वसीयत, साथ ही दिनांक 01.07.2021 का घोषणा पत्र, अन्य बातों के साथ छोड़ गए। अपने शिष्य अर्थात मेरे अत्यंत श्रद्धेय ग्राहक को ज्योतिष्पीठ ज्योतिर्मठ, बदरिकाश्रम, हिमालय, उत्तराखंड के जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में नियुक्त करना, और साथ ही अपने दूसरे शिष्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज को शारदामठ द्वारका, गुजरात के जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में नियुक्त करना।



3. दिनांक 12.09.2022 को, ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य की उक्त वसीयत और घोषणा के अनुपालन में, मेरे अत्यंत आदरणीय मुवक्किल को श्री सुबुद्धानंद ब्रह्मचारी (ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य के निजी सचिव और शिष्य) द्वारा अभिषेक (प्रतिष्ठा), तिलक (चंदन, हल्दी आदि के पवित्र पाउडर को तीर्थों के पवित्र जल में मिलाकर लगाना), चादर (पट्टाभिषेक) और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से, निर्धारित वेद मंत्रों के उच्चारण के बीच, परमहंसी गंगा आश्रम, श्रीधाम, झोंतेश्वर, जिला नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश में लाखों लोगों की उपस्थिति में, ज्योतिर्मठ के जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में नियुक्त और स्थापित किया गया। इसी प्रकार, स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज को उसी समारोह में शारदामठ, द्वारका, गुजरात के जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में नियुक्त और स्थापित किया गया, जिसमें शारदापीठ श्रृंगेरी के प्रशासक/एचडीएम जगद्गुरु शंकराचार्य महासन्निधानम के निजी सचिव स्वामी भारती तीर्थ जी उक्त एचडीएम के अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में भी उपस्थित थे।



4. यह उल्लेख किया जाना चाहिए कि मेरे आदरणीय मुवक्किल ब्राह्मण जगतगुरु शंकराचार्य की दिनांक 01.02.2017 की पंजीकृत वसीयत को गोविंदानंद सरस्वती ने माननीय गुजरात उच्च न्यायालय में विशेष सिविल आवेदन संख्या 9878/2025 दायर करके चुनौती दी थी, जिसमें अन्य बातों के अलावा यह आरोप लगाया गया था कि उक्त वसीयत जाली थी और यह भी कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 14.10.2022 के आदेश द्वारा पट्टाभिषेक करने से रोक दिया था (जिसका उल्लेख आपने अपने उत्तर पत्र में भी किया है); लेकिन उनकी उक्त रिट याचिका को माननीय गुजरात उच्च न्यायालय ने दिनांक 02.09.2025 के आदेश द्वारा खारिज कर दिया था।



5. जिस समय ब्रह्मलिन एचडीएम जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने इस संसार को त्यागा, उस समय सिविल अपील सीए संख्या 3010/2020 (जगद्गुरु शंकराचार्य, ज्योतिषपीठ पीठाधीश्वर श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती बनाम स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती) और प्रति अपील सीए संख्या 3011/2020 भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय में लंबित थीं। जब 21.09.2022 को ये अपीलें भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई के लिए आईं, तो माननीय न्यायालय के संज्ञान में यह लाया गया कि मेरे अत्यंत आदरणीय मुवक्किल को 12.09.2022 को ही ज्योतिषपीठ ज्योतिर्मठ के जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में नियुक्त और पदस्थापित किया जा चुका था। माननीय न्यायालय ने अपने दिनांक 21.09.2022 के आदेश में उक्त तथ्य को इस प्रकार दर्ज किया:



"गैर-आवेदक(कों) की ओर से उपस्थित विद्वान वरिष्ठ अधिवक्ता श्री सी.ए. सुंदरम ने बताया कि श्री स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ज्योतिरम्ठ के नए शंकराचार्य के रूप में नियुक्त किए जाने का समर्थन गुजरात (पश्चिम) के शारदा मठ, मैसूर (दक्षिण) के श्रृंगेरी मठ और पुरी (पूर्व) के गोवर्धन मठ के तीन अन्य शंकराचार्यों के साथ-साथ भारत धर्म महामंडल ने भी किया है। गैर-आवेदकों को उपरोक्त कथनों को शामिल करते हुए अपना उत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है।"
6. मेरे मुवक्किल ने जगतगुरु शंकराचार्य ज्योतिर्मठ ज्योतिषपीठाधीश्वर श्री स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज बनाम भारत संघ और अन्य के नाम से रिट याचिका (सिविल) संख्या 37/2023 दायर की थी। उक्त रिट याचिका का निपटारा तत्कालीन माननीय मुख्य न्यायाधीश सहित तीन न्यायाधीशों की विशेष पीठ द्वारा दिनांक 16.01.2023 के आदेश द्वारा किया गया था।

डी.वाई. चंद्रचूड़, माननीय न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और माननीय न्यायमूर्ति जे.बी. परदीवाला.

7. मेरे मुवक्किल ने गोविंदानंद सरस्वती स्वामी और उनके द्वारा स्थापित हिंदू कानूनी अधिकार संरक्षण मंच द्वारा दिए गए मानहानिकारक बयानों के विरुद्ध 10,00,00,000/- रुपये के हर्जाने का दावा करते हुए मानहानि का मुकदमा दायर किया है। यह मुकदमा दिल्ली उच्च न्यायालय, नई दिल्ली में सी.एस (ओ.एस.) संख्या 640/2024 के अंतर्गत दायर किया गया है, जिसमें उन्हें प्रतिवादी संख्या 1 और 31 बनाया गया है। उक्त मुकदमे का शीर्षक "एचडीएम जगतगुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज बनाम गोविंदानंद सरस्वती और अन्य" है। उक्त मुकदमे में गोविंदानंद सरस्वती स्वामी ने आदेश 7 नियम 11 के अंतर्गत एक आवेदन दायर कर वाद को खारिज करने की प्रार्थना की है, जिसमें अन्य बातों के साथ यह कहा गया है कि भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने वादी यानी मेरे मुवक्किल को दिनांक 14.10.2022 के आदेश द्वारा प्रतिबंधित कर दिया है (जैसा कि आपने अपने उक्त पत्र में भी उल्लेख किया है)। माननीय न्यायमूर्ति दिल्ली उच्च न्यायालय के सुब्रमणियम प्रसाद ने उन्हें या तो अपना आवेदन वापस लेने या उसे खर्च सहित खारिज करवाने का विकल्प दिया था, उन्होंने उक्त आवेदन वापस ले लिया और तदनुसार उनके आवेदन का निपटारा दिनांक 18.12.2025 के आदेश द्वारा किया गया।




8. अतः, उपर्युक्त तथ्यों और आदेशों के आलोक में यह स्पष्ट है कि भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कोई भी अंतरिम निषेधाज्ञा या स्थगन आदेश पारित नहीं किया गया है जो मेरे मुवक्किल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज को हिंदू व्यक्तिगत विधि के तहत और ब्राह्मण जगतगुरु शंकराचार्य की दिनांक 01.02.2017 की वसीयत (पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 41 के अंतर्गत पंजीकृत) के आधार पर ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम हिमालय के शंकराचार्य पद पर आसीन रहने और बने रहने से रोकता हो। इसके अतिरिक्त, चूंकि भारत का माननीय सर्वोच्च न्यायालय पहले से ही इस मामले पर विचार कर रहा है, इसलिए कोई भी तीसरा पक्ष इस संबंध में कोई बयान देने के लिए सक्षम नहीं है, क्योंकि यह विचाराधीन मामले में हस्तक्षेप के समान है।
9. स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने झूठा दावा किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी को किसी ने भी मान्यता नहीं दी थी।
तीन अन्य शंकराचार्यों की नियुक्ति के संबंध में और यह कहते हुए कि उनका राज्याभिषेक (पट्टाभिषेक) अभी तक नहीं हुआ था और 17.10.2022 को निर्धारित था, उन्होंने अपील संख्या 153943/2022 को सी.ए. संख्या 3011/2020 दिनांक 12.10.2022 में दायर किया, जिसमें अपीलों के निर्णय होने तक बद्रीनाथ के ज्योतिषपीठ या किसी अन्य संगठन को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी या किसी अन्य व्यक्ति का शंकराचार्य के रूप में राज्याभिषेक समारोह आयोजित करने से रोकने की मांग की गई थी। इस आवेदन में, उन्होंने गोवर्धन मठ पुरी के शंकराचार्य के नाम से एक जाली और मनगढ़ंत आवेदन भी संलग्न किया, जिसमें माननीय न्यायालय के समक्ष झूठा दावा किया गया था कि उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी की नियुक्ति को अस्वीकार कर दिया था। मामले की सुनवाई 14.10.2022 को हुई, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी द्वारका स्थित शारदा मठ में एक धार्मिक अनुष्ठान में व्यस्त थे, जिसके कारण उनकी ओर से कोई वकील उपस्थित नहीं हो सका। परिणामस्वरूप, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के झूठे बयान पर भरोसा करते हुए, मांगी गई राहत के संबंध में एक अंतरिम आदेश पारित किया। हालांकि, यह आदेश निरर्थक और अप्रभावी था, क्योंकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी का ज्योतिषपीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में अभिषेक/राज्याभिषेक/स्वर्गारोहण 14.10.2022 से पहले ही संपन्न हो चुका था। इसके बाद, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठधीश्वर के रूप में सी.ए. में दिनांक 09.03.2024 को आई.ए. संख्या 61856/2024 दायर की। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष याचिका संख्या 3010/2020 में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के खिलाफ आईपीसी, 1860 के तहत झूठी गवाही की कार्यवाही शुरू करने और उन्हें कानून के अनुसार दंडित करने की मांग की गई है।



10. यह उल्लेख किया जाना चाहिए कि सीए संख्या 3010/2020 (पूर्व में एसएलपी (सी) संख्या 36949/2017) में दिनांक 4.10.2018 को पारित आदेश के माध्यम से, यथास्थिति के आदेश को संशोधित करते हुए, भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश पारित किया था कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज को अपील के निपटारे तक ज्योतिर्मठ का शंकराचार्य माना जाएगा। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि उनके इस संसार से चले जाने के बाद केवल उनके नामित/नियुक्त/उत्तराधिकारी को ही उनका पदभार ग्रहण करना है और तदनुसार मेरे मुवक्किल उनके उत्तराधिकारी शंकराचार्य हैं। उक्त आदेश का प्रासंगिक अंश इस प्रकार है:
"श्री एच.पी. रावल, विद्वान वरिष्ठ अधिवक्ता ने हमें यह बात सही ढंग से बताई है कि जब तक इस न्यायालय द्वारा मामले का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को ज्योति पीठ के 'शंकराचार्य' के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।"



यह बताया गया कि इलाहाबाद कुंभ मेले के लिए राज्य प्रशासन द्वारा उन्हें भूमि आवंटित नहीं की जा रही है। राज्य प्रशासन द्वारा उन्हें शंकराचार्य के रूप में भूमि आवंटित की जाए। वे निर्विवाद रूप से शंकराचार्य, शारदापीठ और ओवारका भी हैं, अतः हम उत्तर प्रदेश राज्य प्रशासन को निर्देश देते हैं कि उन्हें उपयुक्त भूमि आवंटित की जाए। यदि स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती भी भूमि प्राप्त करने के इच्छुक हैं, तो उस पर भी उपयुक्त रूप से विचार किया जा सकता है, लेकिन उन्हें 2019-2020 में आयोजित होने वाले कुंभ मेले में शंकराचार्य के रूप में भूमि आवंटित नहीं की जानी चाहिए। स्पष्टतः, अंतिम सुनवाई के समय संबंधित अधिकारों का निर्णय किया जाएगा।
11. मेरे मुवक्किल को जगतगुरु शंकराचार्य की उपाधि का उपयोग करने का अधिकार नहीं है, इस बारे में फैलाए गए इन झूठे आरोपों ने अधिकारियों और आम जनता के बीच ज्योतिषपीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में मेरे मुवक्किल की नियुक्ति की वैधता के संबंध में भ्रम पैदा कर दिया है।



12. आपके उक्त पत्र में मेरे मुवक्किल के विरुद्ध प्रतिकूल निष्कर्ष दिए गए हैं, जिसका दुरुपयोग मेरे मुवक्किल और जगद्गुरु शंकराचार्य संस्था को और अधिक बदनाम करने और अपमानित करने के लिए किया जा रहा है।
13. उक्त पत्र के कारण मेरे मुवक्किल को गंभीर वित्तीय, सामाजिक और प्रतिष्ठा संबंधी क्षति हुई है, जिससे उनकी गरिमा, सम्मान और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े वित्तीय मामलों पर असर पड़ा है।
14. आपकी ओर से की गई ऐसी एकतरफा कार्रवाई मनमानी, असंवैधानिक और कानून के स्थापित सिद्धांतों के विरुद्ध है।
15. मेरे मुवक्किल ने पहले ही विभिन्न लंबित कार्यवाही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष सच्चे तथ्य और प्रामाणिक दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए हैं, इसलिए आपका निर्णय न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करता है।
16. आपका उक्त पत्र भी माननीय सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना ​​का गठन करता है क्योंकि इससे विचाराधीन मामलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
17. आपके उक्त पत्र द्वारा समाज और मीडिया में यह धारणा बनाई गई है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने मेरे मुवक्किल की नियुक्ति को अस्वीकृत या अमान्य कर दिया है, जो कि गलत और भ्रामक है।
18. प्रेस कॉन्फ्रेंस में और अधिकारियों को पत्र प्रसारित करके आपके उक्त पत्र का बार-बार दुरुपयोग करने से मेरे मुवक्किल और उनके अनुयायियों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है।
19. ऐसा कृत्य कानून के अर्थ में मानहानि के बराबर है, जिससे मेरे मुवक्किल की व्यक्तिगत और संस्थागत गरिमा को अपूरणीय क्षति पहुँचती है।
20. संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का दुर्भावनापूर्ण इरादा मीडिया और जनता को गुमराह करने के उनके लगातार प्रयासों से स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, और दुर्भाग्य से आपके पत्र का उपयोग उनके झूठे दावों का समर्थन करने के लिए एक ढाल के रूप में किया जा रहा है।
21. आपके उक्त पत्र को मीडिया और अन्य अधिकारियों तक प्रसारित करने से अनावश्यक रूप से विवाद और अशांति पैदा हुई है, जिसे तथ्यों के उचित सत्यापन द्वारा टाला जा सकता था।
22. यह कि स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती बनाम जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठ पीठहेश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के मामले में प्रथम अपील संख्या 309/2015 में दिनांक 22.09.2017 को पारित निर्णय के अनुच्छेद 744 के अनुसार, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को जगद्गुरु शंकराचार्य की उपाधि का उपयोग करने से प्रतिबंधित किया गया है और उन्हें छत्र चमार सिंहासन का उपयोग करने से भी प्रतिबंधित किया गया है। साथ ही, राज्य सरकार को नकली शंकराचार्यों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है, लेकिन आपने और मेला प्रशासन ने न केवल सुरक्षा और स्थान प्रदान किया है, बल्कि स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, स्वामी अधोक्षजानंद देव तीर्थ सहित ऐसे 15 नकली व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।
अतः, उपरोक्त तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर, आपसे अनुरोध है कि आप दिनांक 19.01.2026 के उक्त पत्र को इस नोटिस की प्राप्ति तिथि से 24 घंटे के भीतर वापस ले लें, जिसमें मेरे मुवक्किल की प्रतिष्ठा, मान-सम्मान और आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचाने वाले कथन हैं और जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित मामले में हस्तक्षेप के समान है। ऐसा करना भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा और सम्मान को चुनौती देता है, जिसके चलते आप न्यायालय की अवमानना ​​अधिनियम, 1971 और भारत के संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत दंडनीय हैं। ऐसा न करने पर, मेरे मुवक्किल आपके और जगद्गुरु शंकराचार्य संस्था और मेरे मुवक्किल की मानहानि, अपमान और बदनामी करने के लिए जिम्मेदार सभी अन्य लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने के लिए विवश होंगे।
इसके अतिरिक्त, भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय में न्यायालय की अवमानना ​​की कार्यवाही भी शुरू की जाएगी, जिसमें आपको सभी लागतों और परिणामों के लिए उत्तरदायी ठहराया जाएगा, जिसका कृपया ध्यान रखें।
भवदीय
अनजानी कुमार मिश्रा
एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड
अध्याय संख्या 12, डी-ब्लॉक, एबीसी बिल्डिंग,
भारत का सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली - 110001

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