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Saturday, February 14, 2026

इंदौर में सनसनी : 25 वर्षीय लापता MBA छात्रा का नग्न शव क्लासमेट के कमरे से बरामद, शहर दहला


इंदौर में सनसनी :  25 वर्षीय लापता MBA छात्रा का नग्न शव क्लासमेट के कमरे से बरामद, शहर दहला


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इंदौर। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में शुक्रवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। द्वारकापुरी थाना क्षेत्र की अंकल गली में 25 वर्षीय लापता MBA छात्रा का शव उसके ही क्लासमेट के किराए के कमरे से नग्न अवस्था में बरामद होने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

10 फरवरी से थी लापता, अब मिली लाश

परिजनों के मुताबिक छात्रा 10 फरवरी को आधार कार्ड ठीक कराने की बात कहकर पिता के साथ घर से निकली थी। पिता ने उसे कलेक्टोरेट के पास छोड़ा था, जिसके बाद वह रहस्यमय तरीके से लापता हो गई। परिजन लगातार तलाश कर रहे थे, लेकिन शुक्रवार को जो खबर आई उसने सबको स्तब्ध कर दिया।

क्लासमेट के कमरे से मिला शव

पुलिस जांच में सामने आया कि जिस कमरे से शव बरामद हुआ वह उसके क्लासमेट पीयूष धनोतिया का किराए का कमरा है। दोनों सांवेर रोड स्थित एक निजी संस्थान से MBA की पढ़ाई कर रहे थे। युवक मूल रूप से मंदसौर का निवासी बताया जा रहा है।

नग्न अवस्था में शव, हत्या की आशंका

युवती का शव नग्न अवस्था में मिलने से मामला बेहद संदिग्ध हो गया है। प्रथम दृष्टया हत्या की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए। कमरे को सील कर दिया गया है और आरोपी की तलाश तेज कर दी गई है।

इलाके में तनाव, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है। परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद कई अहम खुलासे हो सकते हैं।इस सनसनीखेज वारदात ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह प्रेम प्रसंग का मामला है या सुनियोजित साजिश? पुलिस हर एंगल से जांच में जुटी है।

Thursday, February 12, 2026

जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशानुसार जिले में अवैध रेत खनन और परिवहन पर नियंत्रण के लिए अभियान , खनिज माफिया कलेक्टर राघवेंद्र सिंह को दिखा रहे ठेंगा


जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशानुसार जिले में अवैध रेत खनन और परिवहन पर नियंत्रण के लिए अभियान , खनिज माफिया कलेक्टर राघवेंद्र सिंह को दिखा रहे ठेंगा

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जबलपुर जिले में अवैध रेत खनन और परिवहन पर नियंत्रण के लिए अभियान

जबलपुर. कलेक्टर श्री राघवेंद्र सिंह के निर्देशानुसार संपूर्ण जिला अंतर्गत खनिज रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर नियंत्रण की दृष्टि से एक साथ नर्मदा नदी एवं हिरन नदी के घाटों पर एसडीएम के नेतृत्व में राजस्व, पुलिस एवं खनिज अमले की टीम द्वारा छापामार कार्यवाही कराई गई। जिले में यह अभियान विगत 03 दिवस तक लगातार चलाया गया।
कार्यवाही के दौरान तहसील सिहोरा अंतर्गत ग्राम देवरी, खिरहेनी, घोराकोनी एवं मढ़ा क्षेत्र में नदी से रेत की अवैध निकासी न हो इसके लिए घाटों को जाने वाले रास्तों को अवरुद्ध किया गया एवं नदी के किनारे पड़ी रेत के ढेरों को नदी में समावेश किया गया।
इसी प्रकार तहसील कुंडम क्षेत्र में ग्राम कल्याणपुर एवं रानीपुर घाटों में जांच कर रास्ते को अवरुद्ध किया गया। तहसील शहपुरा क्षेत्र में ग्राम भड़पुरा, शीतलपुर क्षेत्र में जांच कर लगभग 4000 घनमीटर रेत अनाधिकृत रूप से अज्ञात व्यक्तियों द्वारा विभिन्न स्थलों पर एकत्र किया गया, उसे नदी में जेसीबी मशीनों द्वारा गिराया गया।
राजस्व, पुलिस एवं खनिज अमले द्वारा ग्राम सगड़ा झपनी में छापामार कार्यवाही कर 150 घनमीटर रेत एकत्रित किया गया को नर्मदा नदी में गिराया गया। तहसील पाटन क्षेत्र अंतर्गत हिरन नदी के घाट महुआखेड़ा, जूरीकला, पौड़ीकला, गाड़ाघाट, मडवा, कैमारी घाट का औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान गाड़ाघाट से लगे कोनीकला घाट में लगभग 200 घनमीटर रेत एकत्रित पाई गई, जिसे नदी के जल प्रवाह में डालकर विनिष्ट किया गया। इन घाटों पर बने रास्ते एवं रेम्प को भी नष्ट किया गया। तहसील सिहोरा क्षेत्र में जांच के दौरान 03 ट्रैक्टर ट्रॉली रेत अवैध परिवहन करते जप्त किया गया, जिनके विरुद्ध खनिज अधिनियम के तहत कार्यवाही करने हेतु प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में खनिज विभाग द्वारा प्रस्तुत किए गए।

थाना रांझी अंतर्गत हुई अंधी हत्या का खुलासा, एक्सीडेन्ट की घटना पर हुये विवाद पर क्रेटा कार चालक की मारपीट कर हत्या करने वाले 4 आरोपी गिरफ्तार


जबलपुर थाना रांझी अंतर्गत हुई अंधी हत्या का खुलासा, एक्सीडेन्ट की घटना पर हुये विवाद पर क्रेटा कार चालक की मारपीट कर हत्या करने वाले  4 आरोपी गिरफ्तार

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जबलपुर. थाना रांझी अंतर्गत हुई अंधी हत्या का खुलासा एक्सीडेन्ट की घटना पर हुये विवाद पर क्रेटा कार चालक की मारपीट कर हत्या करने वाले  4 आरोपी गिरफ्तार,  घटना में प्रयुक्त मोटर सायकिल एवं 4 मोबाईल जप्त

नाम पता गिरफ्तार आरोपी  

  • 1- शिवम बाजपेई पिता स्व.मनीष बाजपेई उम्र 29 वर्ष निवासी महात्मा गाँधी वार्ड निवाड़गंज पाण्डेय चौक कोतवाली  
  • 2. सुधीर चौधरी पिता ओमप्रकाश चौधरी उम्र 31 वर्ष निवासी सुशीला परिसर अमखेरा थाना गोहलपुर  
  • 3. सुमित चौधरी पिता बसंत चौधरी उम्र 26 वर्ष निवासी श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड कांचघर थाना घमापुर  
  • 4. अंकित चौरसिया पिता आनंद चौरसिया उम्र 31 वर्ष निवासी नन्हे जैन मंदिर के पास थाना हनुमानताल  

जबलपुर. थाना रांझी में दिनांक 8-2-26 की रात मारपीट में घायल एक व्यक्ति को सिविल अस्पताल रांझी में लाये जाने की सूचना पर पहुॅची पुलिस को ज्ञात हुआ कि एकांश साहू पिता सुरेश साहू उम्र 34 वर्ष निवासी सब्जी मंडी अधारताल को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा चाकू से हमलाकर सीना पेट में चोट पहुॅचा दी थी.

जिसे डाक्टर ने चैक कर मृत घोषित कर दिया, मौके पर उपस्थित समीर यादव उम्र 38 वर्ष निवासी यादव मोहल्ला गोकलपुर ने बताया कि दिनांक 8-2-26 की रात लगभग 11-30 बजे उसे मोहित ने सूचना दी कि लक्ष्मी मंदिर मेन रोड गोकलपुर में एकांश साहू की गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है तो वह गोकलपुर लक्ष्मी मंदिर के पास आया उसी समय विजय सिंह घोषी भी आ गया वहां पर एकांश साहू मिला जहां पर हम तीनों तथा और भी आसपास के लोग आ गये थे उसने देखा कि एक मोटर सायकल वाले ने एकांश की गाड़ी पर ठोकर मार दी थी.

मोटर सायकल के चालक के अन्य साथी ने मिलकर एकांश साहू से विवाद किये हम लोगों ने दोनों पक्षों को समझाया उसके बाद तीनों लोग बोले कि हम रांझी अस्पताल जाकर पट्टी करा लेगें और लक्ष्मी मंदिर के पास चले गये, थोड़ी देर बाद उन लोगों ने अज्ञात लड़कों को बुला लिया और एकांश साहू के साथ एक्सीडेंट की बात को लेकर लड़ाई झगड़ा करते हुये एकांश साहू के सीना एवं पेट में चाकू से हमलाकर चोट पहुॅचा दिये तथा सभी लक्ष्मी मंदिर मेन रोड़ रांझी से भाग गये, 

एक्सीडेंट वाली काले रंग की स्पेलेंडर मोटर सायकल क्रमांक एमपी 20 के एम 0511 को वही पर छोड़ दिये हैं, वह एकांश साहू को क्रेटा कार में अपने साथी विजय सिंह घोषी के साथ सिविल अस्पताल रंाझी लेकर आये जहां डाक्टर ने चैक कर एकंाश साहू को मृत घोषित कर दिया, अज्ञात लड़कों द्वारा चाकू से हमलाकर एकांश साहू के सीना पेट में चोट पहुॅचाने से एकांश साहू की मृत्यु हो गयी है। रिपोर्ट पर अपराध क्रमांक 103/26 धारा 103, 3(5) बीएनएस का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। 

पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री सम्पत उपाध्याय (भा.पु.से.) द्वारा घटित हुई घटना को गम्भीरता से लेते हुये आरोपियों की पतसाजी कर शीघ्र गिरफ्तारी हेतु आदेशित किये जाने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर श्री आयुष गुप्ता (भा.पु.से.), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अपराध श्री जितेन्द्र सिंह एवं नगर पुलिस अधीक्षक रांझी श्री सतीष कुमार साहू के मार्गनिर्देशन में थाना प्रभारी रांझी श्री उमेश गोल्हानी के नेतृत्व में क्राईम ब्रांच एवं थाना रांझी की टीम गठित कर लगायी गयी। 

गठित टीम द्वारा घटना स्थल के आसपास के सीसीटीव्ही फुटेज खंगाले गये, काले रंग की स्पेलेंडर मोटर साईकिल क्रमांक एमपी 20 केएम 0511 के रजिस्ट्रर्ड वाहन स्वामी संजय सिंह ठाकुर से पूछताछ की गयी जिसने वाहन को शिवम बाजपेयी को बेचना बताया ।

पतासाजी करते हुये विश्वसनीय मुखबिर की सूचना पर विजय नगर जीरो डिग्री में दबिश देते हुये शिवम बाजपेयी को  अभिरक्षा मे लेकर पूछताछ की गई जिसने अपने साथी सुधीर चौधरी, अकिंत चौरसिया , कमलेश महोबिया, सुमित चौधरी , जय बेन , छोटू ठाकुर व एक अन्य साथी के साथ मिलकर घटना करना स्वीकार किया ।  

आरोपी सुधीर चौधरी को अमखेरा, अंकित चौरसिया को घमापुर व सुमित चौधरी को विजय नगर से अभिरक्षा मे लेकर थाना लाकर पूछताछ की गई।

पूछताछ पर पाया गया कि दिनांक 08.02.2025 को रात्रि 11.00 बजे गोकलपुर मे काले रंग की क्रेटा कार से एक्सीडेटं होने पर कार चालक (मृतक एकांश साहू) से शिवम बाजपेई का विवाद होने पर फोन कर अपने साथी सुधीर चौधरी, अकिंत चौरसिया , कमलेश महोबिया, सुमित चौधरी , जय बेन , छोटू ठाकुर व एक अन्य साथी को गोकलपुर बुलाया तथा सभी के साथ मिलकर कार चालक के साथ मारपीट की, कमलेश महोबिया व छोटू ठाकुर ने कार चालक पर चाकूओ से हमला कर चोटें पहुंचा दी तथा सभी  मोटर  साईकिलो पर बैठकर भाग गये। 

आरोपियो की निशादेही पर घटना मे प्रय़ुक्त मोटर सायकिल, बाचतीच मे उपयोग किये गये 4 मोबाईल   जप्त करते हुये चारों आरोपियों को प्रकरण मे विधिवत गिरफ्तार किया गया। प्रकरण के अन्य आरोपी कमलेश महोबिया, जय बेन, छोटू ठाकुर व एक अन्य साथी फरार जिनकी तलाश जारी है ।

उल्लेखनीय भूमिका- अंधी हत्या के खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार करने में थाना प्रभारी रांझी श्री उमेश कुमार गोल्हानी, उप निरीक्षक मयंक यादव, सहायक उप निरीक्षक मनीष जाटव, सुभाष बागरी,  प्रधान आरक्षक पुरूषोत्तम, चन्द्रभान, आरक्षक मनीष, अभिषेक मिश्रा व क्राईम ब्रांच के सहायक उप निरीक्षक संतोष पाण्डेय, कैलाश मिश्रा,  प्रधान आरक्षक आनंद तिवारी, वीरेन्द्र चन्देल, आऱक्षक आशुतोष बघेल, सतेन्द्र बिसेन की सराहनीय भूमिका रही।

Monday, February 9, 2026

बैतूल SP की बड़ी कार्यवाही SI निलंबित, चार केस डायरी गायब, न्यायालय में पेश नहीं हुए चालान, सात दिन में जांच के निर्देश

 


बैतूल SP की बड़ी कार्यवाही SI निलंबित, चार केस डायरी गायब, न्यायालय में पेश नहीं हुए चालान, सात दिन में जांच के निर्देश

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पुलिस अधीक्षक की सख्त कार्रवाई, चार चालान गायब एसआई सस्पेंड

बैतूल. मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाले एक गंभीर मामले में पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने सख्त कार्रवाई करते हुए उप निरीक्षक पवन कुमार को निलंबित कर दिया है। 

आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान कोतवाली थाना क्षेत्र से जुड़े चार आपराधिक मामलों की केस डायरी (चालान) न्यायालय में पेश नहीं की गईं ओर वे अब तक लापता है। जानकारी के अनुसार जिन मामलों के चालान गायब हुए हैं, उनमें जबरन वसूली, शासकीय कार्य में बाधा, मारपीट और धमकी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। 

समय पर चालान प्रस्तुत नहीं होने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई, जिसे पुलिस प्रशासन ने गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना है। पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि पवन कुमार वर्तमान में थाना गंज, बैतूल में पदस्थ थे। निलंबन के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से रक्षित केंद्र बेतूल से संबद्ध कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। 

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनील लाटा को सात दिवस के भीतर प्रारंभिक जांच पूर्ण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। जांच में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि चालान किन परिस्थितियों में गायब हुए और इसमें किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका रही या नहीं। 

पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की लापरवाही से न केवल न्यायिक प्रक्रिया बाधित होती है, बल्कि आम जनता का विश्वास भी प्रभावित होता है। भविष्य में इस तरह की चूक किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कार्रवाई पुलिस विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

यदि पुलिस अधिकारी FIR दर्ज करने से मना "करें तो क्या करें" अपनाएं ये कानूनी कदम...

 


यदि पुलिस अधिकारी FIR दर्ज करने से मना "करें तो क्या करें" अपनाएं ये कानूनी कदम...

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यदि पुलिस अधिकारी FIR दर्ज करने से मना करे (BNSS 2023 के तहत विस्तृत विश्लेषण)

भारत में अपराधों की रिपोर्टिंग और न्याय पाने का पहला कदम एफआईआर (FIR – First Information Report) दर्ज करना है। किसी भी नागरिक के लिए यह महत्वपूर्ण अधिकार है, विशेषकर जब मामला संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) का हो। संज्ञेय अपराध ऐसे अपराध होते हैं जिनमें पुलिस बिना कोर्ट की अनुमति के सीधे जांच शुरू कर सकती है। हालाँकि, कई बार पुलिस अधिकारी एफआईआर दर्ज करने से मना कर देते हैं। ऐसे में नए भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNSS 2023) ने स्पष्ट प्रक्रियाएँ और अधिकार दिए हैं ताकि नागरिक को न्याय मिल सके और पुलिस जवाबदेह रहे। नीचे इसका विस्तृत विवरण दिया गया है।


✅ 1. FIR दर्ज करने का कर्तव्य (Duty to Register FIR – Sec 173(1) BNSS)

BNSS 2023 के अनुसार, यदि कोई संज्ञेय अपराध घटित होता है तो पुलिस अधिकारी पर FIR दर्ज करना अनिवार्य है। यह पुलिस का प्राथमिक दायित्व है। यदि कोई नागरिक अपराध की जानकारी देता है, तो पुलिस जांच प्रारंभ करने के लिए FIR दर्ज करने से मना नहीं कर सकती।

महत्त्वपूर्ण बिंदु:

प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) केवल तब की जा सकती है जब अपराध की सज़ा 3 से 7 वर्ष के बीच हो और उसके लिए DSP (Deputy Superintendent of Police) की अनुमति आवश्यक हो।

सामान्य संज्ञेय अपराधों में किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है, और सीधे FIR दर्ज की जानी चाहिए।

FIR दर्ज करने से इनकार करना कानून का उल्लंघन है।

✅ 2. शून्य FIR (Zero FIR – Sec 173(2) BNSS)

कई बार पीड़ित को यह स्पष्ट नहीं होता कि अपराध किस थाने के क्षेत्र में हुआ है। ऐसी स्थिति में BNSS 2023 ने ‘Zero FIR’ का प्रावधान किया है। इसका अर्थ है कि पीड़ित किसी भी पुलिस स्टेशन में जाकर अपराध की रिपोर्ट दर्ज कर सकता है।

Zero FIR की विशेषताएँ:

थाना क्षेत्र की परवाह किए बिना FIR दर्ज की जाएगी।

बाद में इसे संबंधित क्षेत्र के थाना में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

शिकायतकर्ता को FIR की मुफ्त प्रति उपलब्ध कराई जाएगी।


यह प्रावधान विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, वंचित वर्गों, और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वालों के लिए अत्यंत उपयोगी है।


✅ 3. एसपी के पास शिकायत (Escalation to Superintendent of Police – Sec 173(4) BNSS)

यदि थाना प्रभारी (SHO) FIR दर्ज करने से मना करता है, तो नागरिक लिखित शिकायत एसपी (Superintendent of Police) को कर सकता है। एसपी को कानूनन अधिकार है कि:

FIR दर्ज करने का आदेश दे।

मामले की जांच का आदेश दे।

थाना प्रभारी की लापरवाही पर कार्यवाही करे।


यह प्रक्रिया नागरिक को न्याय पाने की अगली वैधानिक राह देती है।


✅ 4. मजिस्ट्रेट से राहत (Magistrate Intervention – Sec 175 BNSS जैसे प्रावधान)

यदि एसपी भी कार्यवाही नहीं करता है, तो नागरिक मजिस्ट्रेट के पास आवेदन कर सकता है। मजिस्ट्रेट शिकायत पर संज्ञान लेकर पुलिस को FIR दर्ज करने और जांच शुरू करने का आदेश दे सकता है। यद्यपि BNSS 2023 में स्पष्ट रूप से धारा 175 का उल्लेख नहीं मिलता, यह अधिकार पुराने CrPC की धारा 156(3) के समान है।


यह उपाय न्याय प्रणाली का तीसरा स्तर है, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।


✅ 5. उच्च न्यायालय में रिट याचिका (High Court Remedy – Article 226 of the Constitution)

यदि थाना और एसपी दोनों FIR दर्ज करने से मना करें, और मजिस्ट्रेट भी राहत न दे, तो नागरिक सीधे उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कर सकता है।


संभावित राहतें:

FIR दर्ज करने का निर्देश।

जांच की निगरानी का आदेश।

पीड़ित को मुआवजा प्रदान करने का निर्देश।

पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश।


उच्च न्यायालय नागरिकों के अधिकारों की अंतिम सुरक्षा प्रदान करता है।


✅ 6. FIR दर्ज न करने पर पुलिस अधिकारी पर दंड (Penalties for Police Refusal – Sec 199(c) BNSS)

BNSS 2023 में पुलिस अधिकारियों के लिए दंड का प्रावधान भी किया गया है। यदि कोई पुलिस अधिकारी जानबूझकर FIR दर्ज करने से इनकार करता है, तो:


उसे 6 महीने से 2 वर्ष तक की कैद की सजा हो सकती है।

साथ में आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।


यह प्रावधान पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित करता है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।


✅ 7. पुलिस अधिकारी के विरुद्ध अपराध (Offences Against Police – Sec 121 BNSS)


पुलिस के कार्य में बाधा डालने या उन्हें घायल करने वाले अपराधों के लिए भी BNSS ने कठोर दंड का प्रावधान किया है। यदि कोई व्यक्ति पुलिस को उनकी ड्यूटी निभाने से रोकने के लिए चोट पहुँचाता है, तो:


उसे 5 से 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है।

साथ में जुर्माना भी लगाया जाएगा।


यह प्रावधान पुलिस के सम्मान और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।


🔑 व्यावहारिक पहलू और सुझाव

FIR दर्ज न होने पर:

तुरंत उच्च अधिकारी से संपर्क करें, लिखित शिकायत दें, और शिकायत की रसीद या कॉपी लें।

Zero FIR का प्रयोग करें:

क्षेत्रीय अस्पष्टता की स्थिति में किसी भी थाना में जाकर शिकायत करें।

डिजिटल प्लेटफॉर्म:

कई राज्यों में ऑनलाइन FIR सुविधा भी उपलब्ध है। इसका उपयोग करें।

कानूनी सहायता लें:

वकील या विधिक सेवा प्राधिकरण से मदद लेकर उच्च न्यायालय या मजिस्ट्रेट से राहत लें।

FIR की कॉपी:

FIR की मुफ्त कॉपी अवश्य लें, जो भविष्य में सबूत के रूप में उपयोगी होगी।

✅ निष्कर्ष


BNSS 2023 ने नागरिकों को FIR दर्ज कराने का स्पष्ट और प्रभावी अधिकार दिया है। पुलिस का दायित्व है कि संज्ञेय अपराधों की रिपोर्ट तुरंत दर्ज करे। Zero FIR जैसे प्रावधान नागरिकों के लिए राहत का रास्ता खोलते हैं। SHO द्वारा मना करने पर एसपी, मजिस्ट्रेट और उच्च न्यायालय तक शिकायत का अधिकार है। साथ ही पुलिस अधिकारियों की लापरवाही पर दंड का प्रावधान न्याय प्रणाली को मजबूत बनाता है।


यह कानून न केवल अपराध की रिपोर्टिंग में मदद करता है बल्कि पुलिस की जवाबदेही, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और न्याय की उपलब्धता को सुनिश्चित करता है। नागरिकों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए और कानून द्वारा प्रदत्त सभी राहत उपायों का उपयोग करना चाहिए।


✅ 1. FIR क्या है?


FIR (First Information Report) अपराध की प्राथमिक जानकारी है जिसे पुलिस संज्ञेय अपराध की स्थिति में दर्ज करती है।


✅ 2. पुलिस पर FIR दर्ज करने का क्या दायित्व है?


पुलिस को संज्ञेय अपराध की शिकायत मिलते ही FIR दर्ज करनी होती है, बिना किसी अनुमति के।


✅ 3. Preliminary Enquiry कब की जा सकती है?


Preliminary enquiry केवल तब की जा सकती है जब अपराध की सजा 3 से 7 वर्षों के बीच हो और DSP की अनुमति ली जाए।


✅ 4. Zero FIR क्या है?


Zero FIR वह प्रक्रिया है जिसमें पीड़ित किसी भी थाने में जाकर FIR दर्ज करा सकता है, भले ही अपराध का क्षेत्र अस्पष्ट हो।


✅ 5. SHO FIR दर्ज न करे तो क्या करें?


SHO के मना करने पर शिकायत लिखित रूप में एसपी (Superintendent of Police) को दी जा सकती है।


✅ 6. यदि एसपी भी कार्यवाही न करे तो क्या उपाय है?


मजिस्ट्रेट के पास आवेदन कर FIR दर्ज कराने का आदेश लिया जा सकता है।


✅ 7. उच्च न्यायालय से क्या राहत मिल सकती है?


उच्च न्यायालय FIR दर्ज कराने का आदेश, जांच की निगरानी और मुआवजे का निर्देश दे सकता है।


✅ 8. FIR दर्ज न करने पर पुलिस अधिकारी को क्या सजा हो सकती है?


पुलिस अधिकारी को 6 महीने से 2 वर्ष तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।


✅ 9. पुलिस की ड्यूटी में बाधा डालने पर क्या दंड है?


जो व्यक्ति पुलिस को ड्यूटी से रोकने के लिए चोट पहुँचाता है, उसे 5 से 10 वर्ष तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।


✅ 10. FIR की कॉपी लेने का क्या लाभ है?


FIR की कॉपी भविष्य में सबूत के रूप में काम आती है और शिकायत की पुष्टि करती है।


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गरुड़ दल की कार्यवाही : बड़कुल रेस्टारेंट एवं बिट्टू दा ढाबा पर जुर्माना, अवैध रूप से संचालित बार किया सील


गरुड़ दल की कार्यवाही : बड़कुल रेस्टारेंट एवं बिट्टू दा ढाबा पर जुर्माना, अवैध रूप से संचालित बार किया सील

सभी जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे  (https://timesofcrime.com/ ) जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036

जिला प्रशासन द्वारा गठित गरुड़ दल ने कल रविवार की रात दीनदयाल चौक बस स्टैंड स्थित बड़कुल रेस्टोरेंट, बिट्टू दा ढाबा एवं मदिरा बार का आकस्मिक निरीक्षण किया।अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कुंडेश्वर धाम प्रगति गनवीर के नेतृत्व में किये गए निरीक्षण में तहसीलदार वीर बहादुर सिंह धुर्वे, खाद्य सुरक्षा अधिकारी विनोद धुर्वे, आबकारी निरीक्षक अंकित जैन एवं माढ़ोताल थाने का पुलिस बल शामिल था।

बड़कुल रेस्टोरेंट एवं बिट्टू के ढाबे में बिना ग्लब्स के किचन में खाना बनाने एवं साफ सफाई का अभाव होने के कारण 5-5 हजार का और कुल 10 हजार रुपये का अर्थदंड नगर निगम की टीम द्वारा वसूल किया गया तथा बड़कुल रेस्टोरेंट के किचन से पनीर, पापड़ आदि के सैंपलिंग लेकर परीक्षण के लिये भेजे गए।

बिट्टू दा ढाबे के ऊपर संचालित मदिरा बार एवं पब में बिना लाइसेंस एवं सक्षम अनुमति के संचालित बार को सील कर विदेशी एल्कोहल जब्त कर आबकारी विभाग के सुपर्द किया गया। सालाना टर्नओवर 40 लाख होने के बाद भीं मदिरा बार के पास एफएसएसएआई का लाइसेंस नहीं था।

Friday, February 6, 2026

पैसों के संदिग्ध लेनदेन : होटल कारोबारी से लेनदेन के मामले में महिला डीएसपी कल्पना वर्मा निलंबित, आदेश जारी,

 


पैसों के संदिग्ध लेनदेन : होटल कारोबारी से लेनदेन के मामले में महिला डीएसपी कल्पना वर्मा निलंबित, आदेश जारी

#DSP कल्पना वर्मा निलंबित, आदेश जारी

छत्तीसगढ़ के गृह विभाग ने दंतेवाड़ा में पदस्थ डीएसपी कल्पना वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक होटल कारोबारी के साथ पैसों के संदिग्ध लेनदेन का वीडियो सामने आने और प्राथमिक जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद की गई है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के गृह विभाग ने दंतेवाड़ा में पदस्थ डीएसपी कल्पना वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक होटल कारोबारी के साथ पैसों के संदिग्ध लेनदेन का वीडियो सामने आने के बाद की गई है। जानकारी के मुताबिक, डीएसपी कल्पना वर्मा का एक होटल व्यवसायी के साथ रुपयों के लेनदेन को लेकर वीडियो सोशल मीडिया और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंचा था।

छत्तीसगढ़ शासन ने ( DSP Kalpana Verma suspend ) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वे अभी दंतेवाड़ा जिले में पदस्थ हैं। इस संबंध में गृह ( पुलिस) विभाग ने आदेश जारी किया है।

जारी आदेश के अनुसार, शिकायत की प्राथमिक जांच में उनके खिलाफ वित्तीय लेनदेन, जांच में दिए गए कथनों और व्हाट्सएप चैट के तथ्यों में विरोधाभासी, कर्तव्य के दौरान अवैध आर्थिक लाभ प्राप्त करना, अपने पद का दुरूपयोग करना व अनुपातहीन सम्पत्ति अर्जित करने के आरोप सामने आए हैं।
यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम-3 के विपरीत है। जिसे देखते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में कल्पना वर्मा का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर रहेगा और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
बता दें कि डीएसपी कल्पना वर्मा (DSP Kalpana Verma) और रायपुर के कारोबारी दीपक टंडन (Businessman Deepak Tandon) से जुड़े विवाद में जांच के दौरान कई गंभीर तथ्य सामने आए थे। सरकार के निर्देश पर एडिशनल एसपी स्तर पर कराई गई जांच की करीब 1475 पेज की रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपी गई थी। इस रिपोर्ट में कई अहम खुलासे किए गए थे।

जांच रिपोर्ट में डीएसपी वर्मा और दीपक टंडन के बीच हुई व्हाट्सएप चैट सामने आई, जिनमें पुलिस विभाग से जुड़ी संवेदनशील और खुफिया जानकारियां साझा किए जाने का उल्लेख था, जो खुफिया जानकारी लीक करने जैसे गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
वहीं अब शासन ने एक्शन लेते हुए डीएसपी कल्पना वर्मा को निलंबित कर दिया है।

EpsteinFiles:- क्या दुनिया के सबसे क्रूर यौन अपराधी को डिजिटल इंडिया की आड़ में भारत में वीआईपी एक्सेस मिल रहा था ? इस मामले में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की क्या भूमिका थी ?


#EpsteinFiles :- 
EpsteinFiles:- क्या दुनिया के सबसे क्रूर यौन अपराधी को डिजिटल इंडिया की आड़ में भारत में वीआईपी एक्सेस मिल रहा था ? इस मामले में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की क्या भूमिका थी ?


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 केंद्रीय मंत्री #HardeepSinghPuri  हरदीप सिंह पुरी की इसमें क्या भूमिका थी?

#EpsteinFiles :- क्या #Digital_India की आड़ में दुनिया के क्रूरतम सेक्स अपराधी को मिल रही थी भारत में वीआईपी एक्सेस? 


हाल ही में सामने आए #EpsteinFiles के दस्तावेज बताते हैं कि किस तरह एक सजायाफ्ता अंतरराष्ट्रीय अपराधी को भारतीय कूटनीतिक तंत्र तक का रास्ता दिया गया.

24 अक्टूबर 2014 को #Jeffry_Epstein –जिसे 2008 में ही नाबालिगों की सेक्स ट्रैफिकिंग का दोषी ठहराया जा चुका था—उसने तत्कालीन भाजपा सदस्य और पूर्व राजनयिक हरदीप पुरी को ईमेल किया– "मेरी असिस्टेंट को भारत के लिए तुरंत वीजा चाहिए"

#EpsteinFiles :- क्या #Digital_India की आड़ में दुनिया के क्रूरतम सेक्स अपराधी को मिल रही थी भारत में वीआईपी एक्सेस? 



एक रिटायर हो चुके अधिकारी और तत्कालीन भाजपा नेता ने अपनी पूरी राजनीतिक और कूटनीतिक ताकत झोंक दी. #हरदीप_सिंह_पूरी ने रिटायर्ड राजदूत प्रमोद कुमार बजाज और न्यूयॉर्क के संपर्कों को ईमेल कर निर्देश दिए कि एपस्टीन का काम "प्रायोरिटी" पर हो.

#EpsteinFiles :- क्या #Digital_India की आड़ में दुनिया के क्रूरतम सेक्स अपराधी को मिल रही थी भारत में वीआईपी एक्सेस? 



2013 में हरदीप पुरी IFS से रिटायर होते हैं,जनवरी 2014 में वह #BJP में शामिल होते हैं और अक्टूबर 2014 में एक सजायाफ्ता अपराधी के लिए 'वीजा सर्विस' का जरिया बनते हैं.

2008 में ही एपस्टीन के 'पीडोफाइल' और 'यौन तस्कर' होने की खबर पूरी दुनिया को थी. क्या हरदीप पुरी जैसे अनुभवी पूर्व राजनयिक और भाजपा नेता के तौर पर वे नहीं जानते थे कि एपस्टीन कौन है?

#EpsteinFiles :- क्या #Digital_India की आड़ में दुनिया के क्रूरतम सेक्स अपराधी को मिल रही थी भारत में वीआईपी एक्सेस? 



राजनीति में कुछ भी मुफ्त नहीं होता. हरदीप पुरी ने एपस्टीन के लिए अपनी सारी हदें पार कीं, तो सवाल उठता है कि इसके बदले में उन्हें क्या हासिल हुआ? एपस्टीन का ऐसा कौन सा 'एहसान' था जिसे चुकाने की उन्हें इतनी बेताबी थी?

हरदीप सिंह पुरी ने बाद में सफाई दी थी कि Epstein से उनकी बातचीत 'डिजिटल इंडिया' को लेकर थी.

सवाल यह है कि एक यौन अपराधी भारत के इतने महत्वपूर्ण मिशन में किस हैसियत से सलाह दे रहा था? क्या डिजिटल इंडिया को एक अपराधी के इनपुट की जरूरत थी?

13 नवंबर 2014 को भेजे गए ईमेल में हरदीप सिंह पुरी ने #जेफरी_एपस्टीन और #Reed_Hoffman को भारत में इंटरनेट आधारित आर्थिक गतिविधियों, 'डिजिटल इंडिया' और सॉफ्टबैंक जैसे बड़े निवेशों के बारे में विस्तार से बताया था.

3 अक्टूबर 2014 को उनकी रीड हॉफमैन के साथ सिलिकॉन वैली में बातचीत हुई थी, जिसके बारे में उन्होंने एपस्टीन को जानकारी दी थी. 

एक केंद्रीय मंत्री का नाम अंतरराष्ट्रीय सेक्स स्कैंडल से जुड़े व्यक्ति के साथ जुड़ना केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि का मामला है या नहीं.फिर भी मोदी सरकार ने इस पर मुंह में दही जमा रखा है? भारत के मान,सम्मान,स्वाभिमान की प्रधानमंत्री को कोई परवाह ही नहीं?

Thursday, February 5, 2026

ऐप्सटिन फाइल्स : “एक बंदे ने एलीट पार्टी से चिल्लाते हुए बाहर दौड़ लगा दी कि— ‘वो लोग इंसान खा रहे हैं!’


 
ऐप्सटिन फाइल्स : “एक बंदे ने एलीट पार्टी से चिल्लाते हुए बाहर दौड़ लगा दी कि- ‘वो लोग इंसान खा रहे हैं!’


 “एक बंदे ने एलीट पार्टी से चिल्लाते हुए बाहर दौड़ लगा दी कि- ‘वो लोग इंसान खा रहे हैं!’

और अब वह व्हिसलब्लोअर (भेद खोलने वाला) रहस्यमय तरीके से गायब है।”

“वो इंसान खा रहे हैं”
यह घटना 2013 की बताई जाती है। 21 साल की मॉडल गिउफ्रे रिक्की जेम्सन एक हाई-प्रोफाइल पार्टी से बदहवास हालत में बाहर निकली। उनका दावा था कि उन्होंने वहाँ कुछ अत्यंत डरावनी और असामान्य चीज़ें देखीं। इस घटना के कुछ समय बाद, वह रहस्यमय तरीके से गायब हो गईं और तब से उनका कोई पुख्ता सुराग नहीं मिला।
अब लगभग एक दशक बाद, 2026 में जेफ्री एप्सटीन जांच से जुड़े कुछ दस्तावेज़ सामने आने के बाद यह मामला फिर से चर्चा में है। हालाँकि, इन फाइलों में बड़े लोगों के शोषण नेटवर्क से जुड़ी बातें सामने आई हैं, लेकिन नरभक्षण (कैनिबलिज़्म) या इंसानी बलि जैसे दावों का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। इनमें से ज़्यादातर बातें सुनी-सुनाई या अपुष्ट कहानियाँ हैं, जिन्हें बिना प्रमाण सच मानना ठीक नहीं माना जाता।
गिउफ्रे का मामला आज भी एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है और इंटरनेट पर इसे लेकर तरह-तरह की थ्योरियाँ चलती रहती हैं। सच्चाई यह है कि अमीर और रसूखदार लोगों के बीच शोषण और तस्करी के पैटर्न तो मिले हैं, लेकिन “इंसान खाने” जैसे भयानक दावे अब तक सिर्फ दावे ही हैं, जिनकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

Tuesday, February 3, 2026

बालिका शेल्टर होम कांड भारत के सबसे भयावह और शर्मनाक बाल यौन शोषण का मामला


बालिका शेल्टर होम कांड भारत के सबसे भयावह और शर्मनाक बाल यौन शोषण का मामला 


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मुज़फ्फरपुर बालिका शेल्टर होम कांड भारत के सबसे भयावह और शर्मनाक बाल यौन शोषण मामलों में से एक था। यह कोई अफ़वाह या राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि अदालतों और जाँच एजेंसियों द्वारा प्रमाणित अपराध है।

यह मामला 2018 में सामने आया। बिहार के मुज़फ्फरपुर जिले में बृजेश ठाकुर नामक व्यक्ति सरकार से अनुदान लेकर नाबालिग लड़कियों का शेल्टर होम चला रहा था। काग़ज़ों में यह “बालिका संरक्षण गृह” था, लेकिन असल में वह संगठित यौन शोषण, बलात्कार और तस्करी का अड्डा बन चुका था।

TISS (टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़) की सोशल ऑडिट रिपोर्ट ने पहली बार पर्दा उठाया। रिपोर्ट में साफ़ कहा गया कि शेल्टर होम में रहने वाली बच्चियों के साथ नियमित बलात्कार, मारपीट, भूखा रखना और बाहर के “मेहमानों” को उपलब्ध कराना सामान्य बात थी। बच्चियाँ डरी हुई थीं, कई मानसिक रूप से टूट चुकी थीं।

जाँच में सामने आया कि

– शेल्टर होम को सरकारी फंड और संरक्षण मिला हुआ था

– स्थानीय प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और पुलिस की मिलीभगत या घोर लापरवाही थी

– पीड़ित बच्चियों की शिकायतें वर्षों तक दबाई जाती रहीं

– मेडिकल जाँच तक में गड़बड़ी हुई, सबूत मिटाने की कोशिश की गई

CBI जाँच के बाद 2019–2020 में अदालत ने बृजेश ठाकुर को और कुछ सहयोगियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। अदालत ने माना कि यह “दुर्लभ से दुर्लभतम” अपराध है।

लेकिन यहीं कहानी खत्म नहीं होती।

सबसे बड़ा सवाल हमेशा अधूरा रह गया—

बृजेश ठाकुर अकेला नहीं था।

वह एक मोहरा था, जिसका इस्तेमाल शक्तिशाली लोग करते थे। कई गवाहों ने प्रभावशाली नेताओं, अधिकारियों और रसूखदार लोगों की ओर इशारा किया, लेकिन

– राजनीतिक नाम सामने नहीं आए

– बड़े संरक्षण नेटवर्क पर हाथ नहीं डाला गया

– “ऊपर तक” जाने वाली जाँच रोक दी गई

यही कारण है कि मुज़फ्फरपुर कांड की तुलना आज Epstein Files से की जा रही है।

अंतर बस इतना है कि

अमेरिका में देर से सही, लेकिन नाम सार्वजनिक हो रहे हैं,

जबकि भारत में सिस्टम ने अपराध को सज़ा तक सीमित कर दिया, साज़िश तक नहीं पहुँचने दिया।

Epstein मामला बताता है कि यौन शोषण केवल अपराध नहीं होता, वह सत्ता, पैसा और ब्लैकमेल का नेटवर्क होता है।

मुज़फ्फरपुर कांड भी वही था—बस भारत में उस नेटवर्क को आज तक पूरी तरह उजागर नहीं किया गया।

जब तक यह सवाल खुला रहेगा कि

कौन लोग आते थे? किसके संरक्षण में यह चलता रहा? और किन लोगों को बचाया गया?

तब तक न्याय अधूरा ही रहेगा।

यह मामला सिर्फ़ बिहार का नहीं, पूरे भारतीय तंत्र के चरित्र पर लगा दाग है।

Sunday, February 1, 2026

एपस्टीन फाइल : अमेरिकी यौन अपराधी और मानव तस्कर जेफ़री एपस्टीन से जुड़ी फ़ाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम आया

 
एपस्टीन फाइल : अमेरिकी यौन अपराधी और मानव तस्कर जेफ़री एपस्टीन से जुड़ी फ़ाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  का भी नाम आया 

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जेफरी एपस्टीन फाइल्स का हालिया खुलासा, जो अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा 30 जनवरी 2026 को जारी किया गया, वैश्विक स्तर पर हलचल मचा रहा है। इनमें 30 लाख से अधिक पेज, हजारों वीडियो और लाखों इमेज शामिल हैं, जो एपस्टीन की 2019 में मौत के बाद जांच से जुड़े हैं। भारत में विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि एक ईमेल (डॉक्यूमेंट ID: EFTA02645381.pdf, DOJ वेबसाइट पर उपलब्ध) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र है।

यह ईमेल 9 जुलाई 2017 का है, जिसमें एपस्टीन ने "Jabor Y" को लिखा: "The Indian Prime Minister Modi took advice and danced and sang in Israel for the benefit of the US president. They had met a few weeks ago. IT WORKED!" यह मोदी की 4-6 जुलाई 2017 की इजराइल यात्रा से ठीक तीन दिन बाद का है, जब उन्होंने ट्रंप से 25-26 जून 2017 में अमेरिका में मुलाकात की थी। विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे "राष्ट्रीय शर्म" करार दिया, और सवाल उठाया कि क्या मोदी ने वाकई एक दोषी यौन अपराधी से सलाह ली? मोदी की चुप्पी इस मामले को और संदिग्ध बनाती है, क्योंकि कोई स्पष्ट खंडन या जांच की मांग नहीं की गई, जो उनकी पारदर्शिता पर सवाल उठाती है।

एपस्टीन की यह ईमेल मोदी को उसके नेटवर्क से जोड़ती प्रतीत होती है, भले ही कोई फ्लाइट लॉग, फोटो या प्रत्यक्ष संचार का सबूत न हो। ईमेल में "सलाह" का जिक्र मोदी की इजराइल यात्रा से जुड़ा है, जो भारत-इजराइल संबंधों को मजबूत करने वाली थी, लेकिन एपस्टीन के दावे से यह संदिग्ध लगती है। मोदी ने वहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया, लेकिन क्या यह ट्रंप के फायदे के लिए था? एपस्टीन की "IT WORKED!" वाली टिप्पणी सौदेबाजी का संकेत देती है, जो मोदी की कूटनीति को संदेहास्पद बनाती है। अमेरिकी मीडिया में यह उल्लेख असत्यापित है, लेकिन एपस्टीन की अतिरंजित बातों के बावजूद, मोदी का नाम आने से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर पड़ता है। 2019 का एक और संदर्भ है जहां एपस्टीन ने स्टीव बैनन को मोदी से मिलवाने की पेशकश की (24 मई 2019, मोदी के चुनाव जीतने के बाद), और "Modi on board" लिखा, यह मोदी की ट्रंप-बैनन जैसे संदिग्ध लोगों से निकटता पर सवाल उठाता है, जो एलीट इंप्युनिटी की मिसाल है।

RTI में मांगी जानकारी न देना खेल अधिकारी आशीष पांडे को पड़ा महंगा, राज्‍य सूचना आयुक्‍त ने लगाया 10 हजार का जुर्माना

भारत सरकार की प्रतिक्रिया कमजोर और बचाव वाली रही। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने 31 जनवरी 2026 को इसे "एक दोषी अपराधी की घटिया कल्पनाएं" कहा, लेकिन कोई गहन जांच या पारदर्शी स्पष्टीकरण नहीं दिया। MEA ने सिर्फ इजराइल यात्रा को तथ्य माना और बाकी को खारिज किया, लेकिन "सलाह" और "IT WORKED!" जैसे शब्दों पर चुप्पी सवालों को बढ़ाती है। एपस्टीन फाइल्स में ट्रंप, क्लिंटन, मस्क जैसे नामों के ठोस संपर्क हैं, जबकि मोदी का उल्लेख "ट्रैशी" कहकर टालना मोदी की छवि प्रबंधन की रणनीति लगती है। कांग्रेस के पोस्ट और मीडिया रिपोर्ट्स में उठाए गए सवालों का कोई जवाब नहीं आया, जो मोदी की जवाबदेही की कमी दर्शाता है। यह रुख देश की गरिमा को जोखिम में डालता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर ऐसे उल्लेखों से भारत की कूटनीतिक विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक्स पर कई पोस्ट में इसे "राष्ट्रीय शर्म" बताया और तीन सवाल उठाए: सलाह क्या थी? इजराइल में नाच-गाने से ट्रंप को क्या फायदा? "IT WORKED!" का मतलब क्या? कांग्रेस की आधिकारिक पोस्ट में समयरेखा जोड़कर "कनेक्ट द डॉट्स" किया गया, जून 2017 में ट्रंप से मिलना, जुलाई में इजराइल जाना, और एपस्टीन का ईमेल। पृथ्वीराज चव्हाण ने भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। यह राजनीतिक हमला नहीं, बल्कि वैध सवाल हैं, क्योंकि मोदी की चुप्पी और MEA का बचाव इसे छिपाने की कोशिश लगता है। एपस्टीन फाइल्स में अन्य भारतीय नाम जैसे हरदीप सिंह पुरी (2014 में एपस्टीन से मुलाकात) और अनिल अंबानी (2017 में ईमेल) हैं, जो मोदी सरकार के करीबियों से जुड़े हैं। AI चैटबॉट्स के गलत जवाबों से अफवाहें फैलीं, लेकिन मोदी की पारदर्शिता की कमी असली समस्या है।

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एपस्टीन फाइल्स का असली महत्व एलीट वर्ग की जवाबदेही में है, जहां बाल यौन शोषण और मानव तस्करी के नेटवर्क में बड़े नाम फंसे हैं। भारत में फोकस मोदी पर होना जरूरी है, क्योंकि उनका नाम आने से राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता है, लेकिन मोदी की सरकार ने इसे हल्के में लिया। फाइल्स में 3 मिलियन+ पेज हैं, और मोदी का उल्लेख, भले नगण्य, देश की छवि को नुकसान पहुंचाता है। मीडिया रिपोर्ट्स में AI से फैली अफवाहें हैं, लेकिन मोदी की अंतरराष्ट्रीय दोस्तियां (ट्रंप, बैनन) संदेहास्पद हैं। कांग्रेस अगर चिंतित है, तो जांच की मांग करे, लेकिन मोदी की चुप्पी से लगता है कि कुछ छिपाया जा रहा है। यह घटना दिखाती है कि कैसे वैश्विक स्कैंडल मोदी की कूटनीति पर सवाल उठाते हैं, बिना संदर्भ या फैक्ट-चेक के।

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यह पूरा विवाद मोदी की राजनीतिक कमजोरी का उदाहरण है। कांग्रेस के आरोप ठोस हैं, एपस्टीन की ईमेल में "सलाह" या "मीटिंग" का दावा उनकी कल्पना हो सकती है, लेकिन मोदी का नाम आने से जांच जरूरी है। मोदी के आलोचक इसे सही से उठा रहे हैं, क्योंकि बिना सबूत के भी चुप्पी उल्टे सवाल पैदा करती है। एपस्टीन जैसे अपराधियों की फाइल्स से सच्चाई निकालनी चाहिए, लेकिन मोदी सरकार का रवैया बचाव वाला है, जो एलीट इंप्युनिटी को बढ़ावा देता है। अगर मोदी निर्दोष हैं, तो क्यों नहीं पारदर्शी जांच? यह मोदी की छवि पर धब्बा है, जो राष्ट्रीय गरिमा को प्रभावित करता है।

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अंत में, यह "स्कैंडल" मोदी की कूटनीतिक मर्यादा पर सवाल है, एक दोषी व्यक्ति की ईमेल से जुड़ना भी शर्मनाक है। सच्ची पत्रकारिता और जांच की जरूरत है, लेकिन मोदी की चुप्पी आउटरेज को बढ़ाती है। अगर मोदी वाकई फंसे होते, तो ज्यादा सबूत होते, लेकिन मौजूदा उल्लेख भी काफी है सवाल उठाने के लिए। यह घटना डिजिटल युग में अफवाहों की तेजी दिखाती है, लेकिन मोदी की जवाबदेही की कमी सत्य की कीमत कम करती है, देश को ऐसे मुद्दों पर स्पष्टता चाहिए, न कि राजनीतिक चुप्पी।

by : Rajesh R. Singh

एपस्टीन फाइल्स : ब्रिटिश राजघराने के पूर्व राजकुमार, जो पहले ही इसी मामले में अपने परिवार तक से बेदखल किए जा चुके हैं, उनकी कई फोटोज सामने आई


एपस्टीन फाइल्स : ब्रिटिश राजघराने के पूर्व राजकुमार, जो पहले ही इसी मामले में अपने परिवार तक से बेदखल किए जा चुके हैं, उनकी कई फोटोज सामने आई
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एपस्टीन फाइल्स : ब्रिटिश राजघराने के पूर्व राजकुमार, जो पहले ही इसी मामले में अपने परिवार तक से बेदखल किए जा चुके हैं, उनकी कई फोटोज सामने आई हैं. एपस्टीन फाइल्स में जारी की गई तस्वीरों वाले व्यक्ति को एंड्रयू माउंटबैटन-विंडसर माना जा रहा है.

अमेरिकी न्याय विभाग ने शुक्रवार रात एपस्टीन फाइल्स के 30 लाख से अधिक और दस्तावेज जारी किए. इसके जारी होने के बाद एक बार फिर से बवाल मच गया है.
इसमें आज की दुनिया के काफी बड़े और प्रभावशाली लोगों का नाम है. इसमें ब्रिटिश राजघराने के पूर्व राजकुमार, जो पहले ही इसी मामले में अपने परिवार तक से बेदखल किए जा चुके हैं, उनकी कई फोटोज सामने आई हैं. एपस्टीन फाइल्स में जारी की गई तस्वीरों वाले व्यक्ति को एंड्रयू माउंटबैटन-विंडसर माना जा रहा है. इसमें वह एक महिला के ऊपर चारों हाथ-पैरों के बल झुका हुआ दिखाई देता है, जबकि वह महिला फर्श पर लेटी हुई है.
तीन तस्वीरों में एंड्रयू महिला के ऊपर झुका दिख रहा है. वह पीठ के बल लेटी है और उसके हाथ फैले हुए हैं. एक तस्वीर में वह सीधे कैमरे की ओर देख रहा है, जबकि दूसरी में उसका बायां हाथ महिला के पेट पर रखा हुआ दिखाई देता है. पूर्व ड्यूक ऑफ यॉर्क एंड्रयू जींस व सफेद पोलो शर्ट पहने नंगे पैर हैं. उसके हाथ में चांदी की घड़ी भी नजर आती है. तस्वीरों में एक और शख्स भी दिखाई देता है, जो लेपर्ड-प्रिंट कुर्सी पर बैठा है और उसके पैर मेज पर रखे हुए हैं. वहीं, फर्श पर लेटी महिला ने सफेद टी-शर्ट और काली पैंट पहनी हुई है. उसके हाथ फैले हुए दिखाई देते हैं. उसके चेहरे को पूरी तरह काला कर छिपा दिया गया है.
एपस्टीन फाइल्स में जारी अन्य सामग्रियों की तरह, यह भी स्पष्ट नहीं है कि ये तस्वीरें कब और कहां ली गईं. इनके साथ कोई अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की गई है. पिछले महीने फाइल्स के एक अन्य बैच में एंड्रयू की एक तस्वीर भी जारी हुई थी, जिसमें वह सैंड्रिंघम में पांच महिलाओं की गोद में लेटे हुए दिखाई दे रहे थे. डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कहा कि दस्तावेजों में काला किया (रेडक्शन) किया गया है. ब्लैंच ने यह भी बताया कि घिसलीन मैक्सवेल को छोड़कर सभी महिलाओं के चेहरों को धुंधला किया गया है, लेकिन किसी भी पुरुष के चेहरे को नहीं छिपाया गया.

ईमेल्स में क्या खुलासा हुआ? बकिंघम पैलेस में डिनर का जिक्र एंड्रयू को एपस्टीन से जुड़े अब तक के सबसे बड़े दस्तावेज़ खुलासे के बाद एक नए दौर की शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें उनके हजारों संदर्भ शामिल हैं. इन फाइलों की रिलीज में कई ईमेल का जिक्र हैं.

Friday, January 30, 2026

अवयस्क लड़की की सहमति से उसके साथ संबंध बनाने वाले लड़के को 20 साल की सजा


 अवयस्क लड़की की सहमति से उसके साथ संबंध बनाने वाले लड़के को 20 साल की सजा 

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भोपाल के विशेष POCSO न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि नाबालिग की सहमति कानून की नजर में कोई मायने नहीं रखती।

कोर्ट ने कहा कि यदि पीड़िता नाबालिग (18 वर्ष से कम) है, तो उसकी "सहमति" (Consent) को कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता। शारीरिक संबंध के मामलों में नाबालिग की मर्जी कानूनन शून्य होती है।
विशेष न्यायाधीश (पाक्सो) कुमुदिनी पटेल ने स्पष्ट किया कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम
(​POCSO Act / Protection of Children from Sexual Offences) का मूल उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण से बचाना है। भले ही नाबालिग ने अपनी इच्छा से संबंध बनाए हों, कानून इसे अपराध की श्रेणी में ही रखेगा।

इस मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए उसे 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
​भारतीय न्याय संहिता/ आईपीसी की ​धारा 375 के अंतर्गत अट्ठारह वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाना 'बलात्कार' की श्रेणी में आता है, चाहे उसकी सहमति हो या न हो।

​POCSO धारा 4 & 6 नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए कड़े दंड का प्रावधान करती हैं।
इस मामले में निशातपुरा, भोपाल का दिनेश 14 साल की अवयस्क लड़की को भगा कर ले गया था। उसने लड़की से शादी करके उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाए थे। लड़की के परिवार की शिकायत पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। घटना 17 मार्च 2024 की है।

Thursday, January 29, 2026

ई रिक्शा चुराने वाला आरोपी पकडा गया चुराया हुआ ई रिक्शा कीमती करीबन 2,40,000/- रूपये का जप्त


ई रिक्शा चुराने वाला आरोपी पकडा गया चुराया हुआ ई रिक्शा कीमती करीबन 2,40,000/- रूपये का जप्त 


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जबलपुर. पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री सम्पत उपाध्याय (भा.पु.से.) द्वारा जिले में पदस्थ समस्त राजपत्रित अधिकारियों एवं थाना प्रभारियों को नकबजनी, चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने हेतु संपत्ति संबंधी अपराधियों से सघन पूछताछ तथा उनके गुजर बसर की जांच करने हेतु निर्देशित किया गया और घटित हुई चोरी एवं नकबजनी में आरोपियों की पतासाजी करते हुये. चोरी गये मशरूका की बरामदगी हेतु आदेशित किया गया है।

आदेश के परिपालन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर श्री आयुष गुप्ता (भा.पु.से.) एवं नगर पुलिस अधीक्षक गोहलपुर श्री मधुर पटेरिया के मार्गदर्शन एवं थाना प्रभारी गोहलपुर श्री रितेश पाण्डेय के नेतृत्व में थाना गोहलपुर  पुलिस द्वारा चोरी की एक ई रिक्सा कीमती करीबन 2,40,000/- रूपये का बरामद कर कार्यवाही की गई ।

घटना का विवरण

थाना गोहलपुर में दिनांक 28-1-26 को शेख तौसीफ उम्र 40 वर्ष निवासी अमखेरा तालाब के पास गोहलपुर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी तबियत खराब होने से अपना आटो लेकर शासकीय अस्पताल मनमोहन नगर शांति नगर अपने ई रिक्शा क्रमांक एमी 20 जेड के 0210 से उपचार कराने गया था तथा अपना ई रिक्शा अस्पताल के बाहर खड़ा कर दिया था लगभग 1-30 बजे इलाज कराकर वापस आकर देखा उसका ई रिक्शा नहीं था, ईरिक्शा की तलाश आसपास की पता नहीं चला कोई अज्ञात चोर उसका ई रिक्शा चोरी कर ले गया है। रिपोर्ट पर धारा 303(2) बीएनएस का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। 

दौरान तलाश पतासाजी के सीसीटीव्ही फुटेज खंगाले गये एवं विश्वसनीय मुखबिरो को लगाया गया। दौरान तलाश पतासाजी के विश्वसनीय मुखबिर की सूचना पर लेमा गार्डन के पास दबिश दी जहॉ चोरी गया ई रिक्शे को एक व्यक्ति लिये हुये दिखा, जिसे घेराबंदी कर पकडा जिसने पूछताछ पर अपना नाम  आरिफ अली   उम्र 35 वर्ष निवासी आयशा नगर थाना अधारताल बताया जिसे अभिरक्षा में लेकर वाहन के कागजात के संबंध में पूछताछ करने पर कोई कागजात न होना बताया सघन पूछताछ पर पर थाना गोहलपुर  अतर्गत मनमोहन नगर शांति नगर क्षेत्र से चुराना स्वीकर करते हुये बताया कि वह नशे का आदि है तथा नशा करने के लिये अपराध को अंजाम देता है। 

आरोपी के कब्जे से चुराया हुआ ई-रिक्शा कीमती करीबन 2,40,000/- का जप्त कर आरोपी को थाना गोहलपुर में दर्ज अपराध कमांक 66/2026 धारा 303 (2) बीएनएस के प्रकरण मे विधिवत गिरफ्तार किया गया। 


उल्लेखनीय भूमिका - आरोपी को चुराये हुये ई रिक्शा सहित रंगे हाथ पकडने में थाना प्रभारी गोहलपुर श्री  रितेश पाण्डेय, प्रधान आरक्षक जितेन्द्र यादव,  जितेन्द्र तिवारी, आरक्षक  समरेन्द्र सिंह, लालजी यादव, आरक्षक  दिनेश दुबे,   जयकिशोर की सराहनीय भूमिका रही।

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