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Sunday, August 25, 2019

प्रतिमाओं के निर्माण में पीओपी एवं रासायनिक रंगों का इस्तेमाल प्रतिबंधित

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प्रतिमाओं के निर्माण में पीओपी एवं रासायनिक रंगों का इस्तेमाल प्रतिबंधित
TOC NEWS @ www.tocnews.org
जिला ब्यूरो चीफ जबलपुर // प्रशांत वैश्य : 79990 57770
जबलपुर, कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री भरत यादव ने नदी-तालाबों और झील को प्रदूषण से बचाने तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण सेन्ट्रल जोन बैंच भोपाल के निर्देशों एवं केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नई दिल्ली द्वारा जारी गाइड लाइन के परिप्रेक्ष्य में जबलपुर जिले में प्रतिमाओं के निर्माण में प्लास्टर ऑफ पेरिस तथा रासायनिक एवं विषाक्त रंगों के इस्तेमाल को दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत आदेश जारी कर प्रतिबंधित कर दिया है ।
प्रतिबंधात्मक आदेश में कहा गया है कि जिले में केवल परंपरागत मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से निर्मित प्रतिमाओं का ही उत्पादन व विक्रय किया जा सकेगा । प्लास्टर ऑफ पेरिस या किसी भी प्रकार के केमिकल एवं रासायनिक वस्तुओं का उपयोग मूर्ति निर्माण में किया जाना प्रतिबंधित किया जाता है।
अगर रासायनिक पदार्थों से प्रतिमाओं के निर्माण का मामला प्रकाश में आता है तो तत्काल स्थानीय निकाय इस प्रकार की प्रतिमा को अपने कब्जे में लेकर नियमानुसार उसका निपटान करेंगे । जिला दण्डाधिकारी द्वारा जारी प्रतिबंधात्मक आदेश के मुताबिक प्रतिमाओं का विसर्जन इसके लिए बनाये गये विसर्जन कुण्डों एवं अधिकृत तालाबों पर ही किया जा सकेगा ।
प्रतिबंधात्मक आदेश में कहा गया है कि इन स्थानों पर भी प्रतिमाओं के विसर्जन के पूर्व पूजन सामग्री जैसे फल-फूल, नारियल, आभूषण एवं प्लास्टिक से निर्मित सजावट के सामान को अलग-अलग एकत्रित किया जायेगा तथा इन सामग्रियों का निपटान ठोस अपशिष्ट नियम-2000 के प्रावधान के अनुसार स्थानीय निकायों द्वारा किया जायेगा ।
प्रतिबंधात्मक आदेश में जिला दण्डाधिकारी ने कहा है कि प्रतिमाओं के विसर्जन के 24 घंटे के भीतर विसर्जित मूर्ति एवं प्रतिमाओं से उत्पन्न अपशिष्ट जैसे बांस, रस्सी, मिट्टी, पी.ओ.पी. आदि हिस्सों को एकत्रित कर उनका निपटान ठोस अपशिष्ट अधिनियम-2000 के प्रावधानों के परिप्रेक्ष्य में स्थानीय निकायों द्वारा किया जायेगा। जिला दण्डाधिकारी द्वारा जारी प्रतिबंधात्मक आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है ।
आदेश में कहा गया है इसका उल्लंघन भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 188 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध होगा । 

Monday, July 29, 2019

टायर फैक्ट्री से हो रहा प्रदूषण अधिकारी क्यो है मौन ? जानकारी किसी भी प्रशासनिक अधिकारी को नही

 टायर फैक्ट्री से हो रहा प्रदूषण अधिकारी क्यो है मौन ? जानकारी किसी भी प्रशासनिक अधिकारी को नही

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ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567
नागदा । छह माह पुर्व 20 जनवरी। मंदसौर टायर फैक्ट्री जैसे हाद्शे का इन्तजार कर रहा है प्रसाशन जहा 5 लोगो झुलस गये थे और जान जाते जाते बची थी।
नागदा के समीप  नागदा जावरा मार्ग पर घिनोदा के समीप टायर फेक्ट्री से लगातार कार्बन युक्त काला धुवा निकलता रह्ता है जिसकी वजह से वायु प्रदूषण हो रहा है पास ही ग्रामीणो के परिवार का भरण पोषण करने वाली खेत भी बंजर हो रहे है।ओर इस विषय की जानकारी किसी भी प्रशासनिक अधिकारी को नही है ये हास्यास्पद है ।
नागदा से लगभग 6 किलोमिटर दुरी पर टायर फेकट्री है जो टायरो को जला कर तेल निकालती है । वही फेकट्री मे लगभग 3 से 4 परिवार भी रहते है जो उत्तर भारत के निवासी है जिनके साथ बच्चे भी होँगे । यदि कभी कोई हादसा होता होता है तो बडी घटना हो सकती है किन्तु प्रशासन का इस ओर ध्यान तक नही है।

 अनुविभागीय अधिकारी खाचरौद से टायर फेक्ट्री के बारे मे एएनआई न्यूज़ इंडिया के द्वारा पुछा गया तो  उन्हे भी इस बात की जानकारी नही होना पाई गई अधिकारी का कहना था की आप से मुझे इस विषय की जानकारी मिली है इसकी जाच करवाई जायेगी।
फेक्ट्री के मालिक से बात करने की कोशिस की गई पर बात नही हो पाई है। 

Sunday, July 28, 2019

फरनेस ब्लास्ट होने का वीडियो मीडिया में आने के बाद जामगांव स्थित एम एस पी स्टील एंड पावर लिमिटेड प्लांट में सभी एम्प्लॉई को मोबाइल पर बैन

फरनेस ब्लास्ट होने का वीडियो मीडिया में आने के बाद जामगांव स्थित  एम एस पी स्टील एंड पावर लिमिटेड  प्लांट में सभी एम्प्लॉई को मोबाइल पर बैन

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जिला ब्यूरो चीफ रायगढ़  // उत्सव वैश्य : 9827482822 
रायगढ़. पिछले दिनों जामगाँव स्थित एम एस पी प्लांट से एक मजदूर गायब होने की खबर आ रही थी और प्लांट प्रशासन किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने से लगातार इन्कार कर रहा था, इसी बिच मिडिया में एक वीडियो रिलीज कर दिया.
जिसमें फरनेस ब्लास्ट होते हुए दिखाया जिससे एम एस पी प्रशासन की सुरक्षा के दावे के पूरी तरह से धज्जियाँ उड़ गई, उसके बाद से एम एस पी उद्योग ने एम्प्लॉई को मोबाईल लाने को बैन लगा दिया, जिससे एम एस पी उद्योग की कोई भी खबर बाहर न जा सके, ऐसे में कोई भी एम्प्लॉई अपने आप को सुरक्षित महसूस नही कर रहा

अगर किसी एम्प्लॉई को उद्योग के अंदर कुछ हो जाता है तो उसके घर तक कैसे खबर पहुँचेगी, ये बहुत सोचने वाली बात है, इस मुद्दे पर ए एन आई न्यूज़ इंडिया ने एम एस पी उद्योग के चीफ ऑपरेटिंग अफसर से बात करने की कोशिश की उस पर उन्होंने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए फोन काट दिया ।
 वही दूसरी और एम एस पी उद्योग  से गायब मजदूर की आज तक कोई खबर नही मिली जब मजदूर के परिजनों ने एम एस पी उद्योग प्रशासन से बात करनी चाही तो उद्योग प्रशासन ने पुलिस खोज रही है 
बोलकर मजदूर के परिजनों को चलता कर दिया, एएनआई न्यूज़ इंडिया ने मजदूर के परिजनों से बात करने पर उन्होंने बताया 29 तारीख तक देखने की बात की अगर सोमवार तक कोई नतीजा नही निकला तो सभी गाँव वालों के साथ एम एस पी उद्योग के सामने चक्का जाम करने की बात कही।।

Friday, July 26, 2019

नागदा : उन्हेल में दूसरे दिन भी डेयरी एवं मावा व्यापारियों पर खाद्य विभाग की कार्रवाई जारी


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ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567
उन्हैल। प्रदेश भर में चल रहे नकली दूध मावा के काले धंधे को रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा प्रशासन द्वारा लगातार उज्जैन जिला कलेक्टर शशांक मिश्र के निर्देश पर छापामारी कार्रवाई जारी है ।जिसके चलते नागदा-उन्हेल में दूसरे दिन भी खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीम जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी शैलेश गुप्ता के नेतृत्व में सक्रिय नजर आई।
नागदा : उन्हेल में दूसरे दिन भी डेयरी एवं मावा व्यापारियों पर खाद्य विभाग की कार्रवाई जारी

दल ने नागदा उन्हैल सहित ग्रामीण क्षेत्रों में दूध डेयरी व चिलिंग प्लांट पर छापामारी करते हुए दूध के सैंपल एकत्रित किए  जिन्हें जांच हेतु भेजा जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार रात्रि 8:00 बजे के लगभग उन्हैल चौपाटी स्थित कृष्णा दूध डेयरी एवं उज्जैन रोड पर सांवरिया दूध डेयरी पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी शैलेश गुप्ता की टीम ने दूध के सैंपल लिए है वही इनके संचालन हेतु आवश्यक खाद्य लाइसेंस का भी निरीक्षण किया ले गए दूध के सैंपल के परीक्षण के बाद इन पर कार्रवाई की जाएगी।

दूसरे दिन भी मावा व्यापारी रहे नदारद

क्षेत्र में हो रही लगातार छापेमारी की कार्रवाई को देखते हुए उन्हैल सहित आसपास के क्षेत्र के मामा व्यापारी व दूध डेयरी संचालक अपने प्रतिष्ठान पर ताले लगाकर भूमिगत हो गए हैं वहीं दबी जुबान में हो रही कार्रवाई को लेकर अधिकारियों को कोसते नजर आ रहे हैं क्योंकि त्यौहार का सीजन नजदीक आ रहा है और ऐसी परिस्थितियों में लगातार कार्यवाही के चलते वे मावा निर्माण नहीं कर पा रहे हैं। 

Tuesday, July 23, 2019

पर्यावरण विभाग का एम एस पी स्टील एंड पावर जामगांव में दाबिश



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जिला ब्यूरो चीफ रायगढ़  // उत्सव वैश्य : 9827482822 
रायगढ़. आज शाम चार बजे पर्यावरण विभाग की टीम ने जामगांव स्थित एम एस पी स्टील एंड पावर लिमिटेड प्लांट में दाबिश किया और शाम को चार बजे से सात बजे तक प्लांट का निरीक्षण किया पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नई की,
ग्रामीणों द्वारा कई बार शिकायत करने पर भी इस एम एस पी प्लांट पर कोई कार्यवाही नई हुई, देखा जाए तो एम एस पी प्लांट को पर्यावरण विभाग के आने की पहले से ही जानकारी थी इसलिए एम एस पी के मैनेजमेंट ने फेरो फर्नेस 1, फेरो फरनेस 2, और फेरो फरनेस 3 को बंद करवा दिया गया, और जैसे ही पर्यावरण की टीम वापस गयी तीनो फेरो फरनेस को चार्ज करवा लिया गया,
इससे साफ पता चलता है कि पर्यावरण विभाग ने अपने आने की जानकारी एम एस पी प्लांट में पहले ही दी थी, एक बात और पर्यावरण विभाग की टीम ने फील्ड में कम और प्लांट के  सी. ओ. ओ. बी. के. सिंघ के ऑफिस में ज्यादा वक्त बिताया, करीब दो घंटे तक पर्यावरण विभाग की टीम और बी. के. सिंघ के बीच बातचित चली।

Wednesday, July 17, 2019

ग्रेसिम उद्योग के मजदूरो ने हड़ताल कर किया थाने का घेराव, साथ आई कॉंग्रेस, वीडियो


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ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567
नागदा। ग्रेसिम उद्योग के मजदूरो द्वारा हड़ताल कर बिरला ग्राम पुलिस थाने का घेराव किया गया । हड़ताल मजदूरो के रिटर्न प्रक्रिया को लेकर की गई। बिरला मन्दिर, बिरला हाऊस व कालोनियो मे कार्य करने वाले मजदूरो ने सड़कों पर आ कर उद्योग के खिलाफ नारेबाजी करना प्रारम्भ कर दी। जिसमे आकर कॉंग्रेस के जनप्रतिनिधि भी सामिल हो गये। 
मौके पर पहुंचे सीएसपी मनोज रत्नाकर के द्वारा मामले की गम्भीरता को देखते हुवे सभी आन्दोलन कारियो को बिरला ग्राम थाने पर बुला लिया गया थाने पहुचते ही आन्दोलन कारियो ने उद्योग के खिलाफ नारेबाजी करना शुरु कर दी । सी एस पी द्वारा उद्योग के अधिकारीयो को बुलाया गया ।

ग्रेसिम उद्योग के अधिकारी के साथ कॉंग्रेस के जनप्रतिनिधि सुबोध स्वामी, अजय शर्मा, रघुनाथ ठाकुर ओर पाच से छह मजदूरो की मिटिंग बंद कमरे मे की गई जहा से मिडिया को दूर रखा गया।
मजदूरो की इस हड़ताल मे कही किसी भी युनियन के नेता नजर नही आये। ग्रेसिम उद्योग के अधिकारीयो का कांग्रेस नेताओ के साथ बद कमरे मे चर्चा ओर फिर मजदूरो को समझा कर कार्य पर भेजना कही ना कही सवाल खड़ा होता है की इस पूरी घटना में कॉंग्रेस के नेताओ का होंना ओर ट्रेड युनियन का  नही दिखने के पीछे क्या कारण है।

Tuesday, July 16, 2019

कैसे करते हैं मोदी मंत्रिमंडल का चुनाव, क्यों बाहर हुए प्रभु, मेनका, उमा और राठौड़

कैसे करते हैं मोदी मंत्रिमंडल का चुनाव, क्यों बाहर हुए प्रभु, मेनका, उमा और राठौड़
कैसे करते हैं मोदी मंत्रिमंडल का चुनाव, क्यों बाहर हुए प्रभु, मेनका, उमा और राठौड़
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मोदी सरकार को बने हुए डेढ़ महीने हो चुके हैं, पर मंत्रिमंडल से बाहर किए गए मंत्रियों को अब तक समझ नहीं आया है कि उनसे क्या ख़ता हुई है. जिसकी उन्हें सज़ा मिली है. मोदी सरकार में शामिल कुछ मंत्रियों और निर्णय प्रक्रिया को समझने वाले भाजपा नेताओं से दिप्रिंट ने समझने की कोशिश की आखिर पीएम मोदी के फैसले का आधार क्या रहा ?
भाजपा सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री के अपने मंत्रिमंडल में मंत्री को लेने और निकालने के पीछे उनका जातीय और सामाजिक समीकरण, कार्य में निपुणता, चुनावी समीकरण मुख्य वजह होती है. प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष के साथ उनकी केमिस्ट्री का भी चयन और विदाई में अहम रोल होता है.
उदाहरण के तौर पर बिहार से आने वाले भूमिहार नेता गिरिराज सिंह की बात करते हैं. पिछले पांच साल में गिरिराज सिंह ने कई बार पार्टी की फ़ज़ीहत कराई. लेकिन वे मोदी कैबिनेट-2 में भी राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री बने. इसकी वजह रही भूमिहार समुदाय का कोई बड़ा या मंझोले कद का नेता भाजपा में नहीं है, जो अपनी राष्ट्रीय पहचान रखता हो. बिहार की राजनीति में भूमिहार वोट को ध्यान में रखते हुए और बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए गिरिराज सिंह को पदोन्नति दी गई. यानि जातिगत समीकरण दूसरे कारणों पर भारी पड़े.
राधामोहन सिंह को मुख्यत: उनकी नॉन परफार्मेंस की वजह से हटाया गया. किसानों के देश भर में आंदोलन ख़ासकर राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में कृषि संकट के कारण दिसंबर 2018 में भाजपा को अपनी तीन सरकारें गंवानी पड़ीं थी .
2018 में चुनाव से पहले मोदी को लगा कि राधामोहन सिंह उतनी डिलीवरी नहीं कर पा रहे हैं, तो अमित शाह ने वसुंधरा के समानांतर नए नेतृत्व को बढाने के लिए गजेन्द्र शेखावत की कृषि मंत्रालय में राज्यमंत्री के रूप में एंट्री कराई. वैसे राधामोहन सिंह पर मिट्टी की जांच करने वाली किट को उपलब्ध कराने वाली आंध्रप्रदेश की कंपनी नागार्जुन केमीकल को फायदा पहुंचाने का आरोप भी लगा था पर राधामोहन सिंह इन आरोपों का खंडन करते रहे. हर कैबिनेट फेरबदल के समय हटने वाले मंत्रियों में राधामोहन सिंह का नाम सबसे पहले लिया जाता था, पर वो हटाए नहीं गए थे.
अपने स्वास्थ्य के कारण अरूण जेटली पहले ही ऐलान कर चुकी थी कि वह इस बार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होंगी पर सुषमा स्वराज ने ऐसा कोई ऐलान नहीं किया था. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक पहले कार्यकाल में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को कैबिनेट में लेना एक तरह से पीएम की राजनैतिक मजबूरी थी पर दूसरे कार्यकाल में प्रचंड बहुमत लाने के बाद मोदी के लिये कोई कहा अनकहा दबाब नहीं था. मंत्रिमंडल के चार टॉप मे जगह नहीं होने के कारण यह स्वाभाविक था कि वरिष्ठ सुषमा स्वराज सम्मानजनक विदाई लें.
शिवसेना में रहे सुरेश प्रभु को प्रधानमंत्री ने 2014 में शिवसेना की नाराजगी के बावजूद भाजपा में शामिल कर अपने कोटे से मंत्री बनाया था. भाजपा और शिवसेना में लोकसभा चुनाव जीतने के लिए युद्धविराम हो गया और उसकी भेंट चढ़े सुरेश प्रभु. सुरेश प्रभु को ड्राप कराने में उद्भव ठाकरे के वीटो ने काम किया, पर प्रभु पीएम मोदी के ‘गुड बुक्स’ से बाहर नहीं हुए और उन्हें जी -20 का शेरपा बनाया गया.
मेनका गांधी को बाहर करने के पीछे अमित शाह का व्यक्तिगत कॉल था. शाह के काम करने के तरीके में मेनका और वरूण बहुत सालों से फ़िट नहीं बैठ रहे थे. गांधी परिवार के आभामंडल में क़ैद और संगठन के लिए उपलब्ध न रहना मेनका की परफार्मेंस रिपोर्ट खराब करने के लिए काफी था.
शाह के क़रीबी और निर्णय प्रक्रिया की जानकारी रखने वाले एक भाजपा नेता के मुताबिक यूपी से शाह उन्हीं नेताओं को लाना चाहते थे. जो यूपी में सपा, बसपा गठबंधन के बाद भी भाजपा की विजय यात्रा को 64 सीट तक पहुंचाने में योगदान दिया हो. भाजपा नेता के मुताबिक जीत में भूमिका निभाने वाले ब्राह्मण समुदाय के यूपी भाजपा अध्यक्ष महेन्द्रनाथ पांडे को कैबिनेट में लेने के बाद यूपी कोटे से दूसरे मंत्री के लिए जगह नहीं बचती थी.
अगर परफॉर्मेंस की बात की जाय तो उड़ान स्कीम को देशभर में लागू कर जयंत सिन्हा का ट्रैक रिकार्ड उतना खराब नहीं था. अमित शाह के करीबी एक नेता के मुताबिक उन्हें मंत्रिमंडल में जगह पिता यशवंत सिन्हा की विरासत के कारण ही मिली थी और मंत्रिमंडल से जाने की वजह भी पिता यशवंत सिन्हा ही थे. जयंत को हटाने की वजहों में अर्जुन मुंडा को कैबिनेट में लिया जाना भी था. झारखंड विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए आदिवासी बहुलता वाले राज्य में आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को कैबिनेट में जगह देकर जातिगत संतुलन साधने का प्रयास किया गया और इन दोनों वजहों के कारण जयंत को ड्राप करना पड़ा.
उमा भारती ने तो पहले ही स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था, वैसे भी उनका परफारमेंस पीएमओ की नज़र में ख़राब था.
नाथूराम गोडसे पर विवादित बयान देकर पार्टी की किरकिरी कराने वाले हेगड़े की जगह लो प्रोफाईल रहने वाले प्रह्लाद जोशी को पीएम ने कर्नाटक कोटे से चुनना ठीक समझा.
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सूचना प्रसारण और खेल मंत्रालय संभाल रहे राज्यवर्द्धन को जिस तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा था. उससे साफ़ था कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में वे अपने लिए बड़ी भूमिका की राह देख रहे थे.
दूसरे कार्यकाल में उन्हें जगह तक नहीं मिलना बहुतों को चौंकाया पर एक वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक पीएम मोदी और शाह ने किसी दूसरी ज़िम्मेदारी के लिए राज्यवर्द्धन को चुन रखा हो. इससे इंकार नहीं किया जा सकता. वैसे राज्य में अभी संगठन के चुनाव होने बारी है और राजस्थान भाजपा के नए अध्यक्ष के तौर पर राठौड़ केन्द्र की पसंद हो सकते हैं .
इस बार बिहार भाजपा प्रभारी और गृहमंत्री अमित शाह शाह के करीबी भूपेन्द्र यादव की सलाह पर शाह ने 2019 लोकसभा चुनाव में बिहार से शत प्रतिशत जीत दिलाने वाले राज्य भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय को चुनना ज्यादा बेहतर समझा. राय की पकड़ बिहार की राजनीति पर बनी हुई है. जिसका फायदा आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को नित्यानंद राय और रामकृपाल दोनों यादव समुदाय से आतें है पर राय को भूपेन्द्र यादव की नज़दीकी का फायदा मिला .
दोनों नेता को उनके मंत्रालय में अपनी नान परफार्मेंस के आधार पर हटाया गया है.
एयरपोर्ट के निर्माण में शर्मा के जरूरत से ज्यादा रूचि लेने पर पीएमओ में की गई शिकायत भी उनके खिलाफ गई. शर्मा पर आरोप लगा कि शर्मा एयरपोर्ट डेवलेपमेंट का काम किसी विशेष कंपनी को दिलाने के लिए लॉबिंग कर रहे थे . पीएमओ और शाह तक शिकायत पहुचने के बाद उन्हें दुबारा मंत्रिपद देना ठीक नहीं समझा गया.
ये तो रहा जो ड्राप किए उनकी कहानी जिन्हें लिया गया अब उनपर भी एक नज़र
अरूण जेटली की सलाह पर पीएम मोदी ने पीयूष गोयल की जगह वित्त मंत्रालय निर्मला सीतारमण को सौंपा. इससे एक संभावना बची रहती है कि जेटली स्वस्थ होकर लौटे तो वित्त मंत्रालय में उनकी वापसी हो सकती है. जेटली के करीबी अनुराग ठाकुर को भी उनकी सलाह पर ही वित्त राज्यमंत्री का पद दिया गया. भाजपा सूत्रों के मुताबिक हरदीप पुरी की पदोन्नति भी जेटली की सलाह पर ही की गई है .
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सूचना प्रसारण ही एक ऐसा मंत्रालय था, जो चार मंत्रियों के बीच बदलता रहा. दूसरे कार्यकाल में पुरानी गलतियों से सीख लेते हुए पीएम ने ज्यादा परिपक्व जावड़ेकर के हवाले मंत्रालय किया. जावड़ेकर की सबको साथ लेकर चलने की शख़्सियत उनकी तरक़्क़ी का आधार बनी.
पिछले कैबिनेट में परफार्मर रहे गडकरी को रोजगार सृजन करने वाला सूक्ष्म लघु उद्योग मंत्रालय सौंपा गया, तो नरेन्द्र सिंह तोमर को उनके परफार्मेंस के कारण ग्रामीण विकास के साथ-साथ राधामोहन सिंह का कृषि मंत्रालय भी दिया गया. हर घर में जल पहुंचाने की महत्वकांक्षी योजना को राजस्थान के जोधपुर से जीते शेखावत के हवाले किया गया. वसुंधरा की जगह शेखावत को राजस्थान का भावी नेतृत्व के रूप में तैयार करने के उद्देश्य जल संसाधन का नया मंत्रालय बनाकर उन्हें ज़िम्मा दिया गया है .
सबसे आश्चर्य एंट्री रमेश पोखरियाल निशंक की हुई पांच साल से अज्ञातवास में चल रहे निशंक को स्वामी रामदेव के शाह से सिफ़ारिश के बाद इस बार भारी भरकम मंत्रालय मिल गया. निशंक के मुख्यमंत्री रहते भष्ट्राचार के आरोप लगने के बाद वो आलाकमान की नज़र से उतर गए थे. यही हाल अर्जुन मुंडा के साथ था. जमशेदपुर से चुनाव हारने के बाद अर्जुन मुंडा लगातार अज्ञातवास में थे, हालात यह थे कि जब अमित शाह रांची जाते थे तो संगठन की बड़ी बैठकों में उन्हें बुलाया तक नहीं जाता था, पर राज्य में विधानसभा चुनाव होने के कारण आदिवासी वोटबैंक को प्रतिनिधित्व देने की राजनैतिक चाह में मुंडा की लाटरी खुल गई.
कुल मिलाकर ड्राप किए और नए लिए गए मंत्रियों के चयन प्रक्रिया से जो तीन बातें सामने आती हैं कि परफार्मेंस सबसे बड़ा आधार रहा है, पर चुने जाने और निकाले जाने के लिए पर केवल वही आधार नहीं रहा है. कई सारे नॉन परफार्मर मंत्री भी बचे हैं. लेकिन उनके बचने की वजह मजबूत जातिगत समीकरण और पीएमओ के साथ तारतम्य बनाने की कला मुख्य वजह रही है. मसलन संतोष गंगवार, श्रीपद नाईक, फग्गनसिंह कुलस्ते, किशन पाल, रामदास आठवले, संजीव बालियान परफार्मर नहीं होते हुए भी जाति, राज्य और सामाजिक समीकरण के कारण बच गए और उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान मिला.
मंत्रिमंडल चुनाव में जो दूसरा दिलचस्प तथ्य दिखा है कि वह है विवाद पैदा करने वाले ज्यादातर मंत्रियों की छुट्टी हुई है चाहे वो अनंत हेगड़े हों या मेनका सिर्फ़ इस नियम में छूट गिरिराज सिंह को मिली है.
मोदी के काम करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया से तीसरा दिलचस्प तथ्य यह उभरता है कि मोदी दबाब में कभी मंत्रियों को ड्राप नहीं करते और बिना मीडिया इवेंट बनाए ड्राप होने वाले मंत्रियों को स्वाभाविक मौत मरने देते है. दबाब में केवल मोदी ने एमजे अकबर को हटाया था. निर्णय लेने की इस गोपनीयता के कारण मंत्री को अंत तक पता नहीं चल पाता कि वह अच्छा परफ़ार्म कर रहा है या बुरा और उसके राजनैतिक भविष्य में आगे क्या लिखा है.

Monday, June 24, 2019

नागदा : Lanxess industry में हो सकता था बड़ा हादसा, धड़ाम से गिरी 150 फिट ऊँची चिमनी


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ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567
नागदा । शहर में रविवार शाम को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. शाम 4 बजे आए आंधी-तूफान से LANXESS उद्योग के भीतर एक चिमनी गिर गई गनीमत रही कि घटना के समय मौके पर कोई भी श्रमिक वहा नहीं था। रविवार को अवकाश होने की वजह से उक्त प्लांट मे एक दो ही श्रमिक थे, जो चिमनी से काफी  दूरी पर थे।
सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार उद्योग के कोजन (पावर प्लांट)प्लांट में लगभग 150 फीट ऊंची चिमनी धराशयी हो गई । यह चिमनी एस एस के उपकरण की बनी थी जो काफी पुरानी हो गई थी। तेज हवा चलने से चिमनी लटकी गई । घटना की जानकारी मिलते ही LANXESS उद्योग प्रबंधन हरकत में आया और मौके पर पहुंचा।
प्रशासन की टीम भी मौके पर पहुंची और पंचनामा बनाया। राजस्व विभाग के अधिकारि व बिरलाग्राम पुलिस ने शाम 5.30 बजे मौका मुआएना कर पंचनामा बनाया । उद्योग में लगभग 2 माह पूर्व भी इस तरह की घटना हुई थी ।गनीमत थी कि उस समय चिमनी छोटी थी जो अन्य चिमनी पर टिक गई थी। जिस प्लांट में चिमनी गिरी उस प्लांट में भूसा (बायोमास) जलाकर बिजली का उत्पादन किया जाती है।

बड़ा हादसा टला

इस घटना से गनीमत रही कि कोई जनहानी नहीं हुई। जिस स्थान पर यह चिमनी गिरी वहां पर कार्यदिवस के दिन 24 घंटे लगभग 25 से 30 ठेकाश्रमिक चिमनी के ही निचे कार्य करते है। परंतु रविवार को कार्य ना के बराबर होता है।
प्रतिदिन उक्त स्थान पर भूसे (बायोमास) के ट्रक भी आते है । पूरे उद्योग परिसर में कई जहरीली गैस की पाइप लाइन गुजर रही है । ऐसे में यदि चिमनी किसी पाइप लाइन पर गिर जाती और पाइप लाइन लिकेज हो जाती तो उद्योग ओर उद्योग के आसपास रहवासी इलाको मे भी बड़े हादसे से इंनकार नही किया जा सकता था।

सूत्रो से मिली जानकरी के अनुशार बताया जा रहा है कि चिमनी काफी पुरानी हो गई थी, उद्योग प्रबंधन द्वारा समय पर देखरेख नहीं करने व मरम्मत नहीं करने से चिमनी जर्जर हो चुकी थी जिससे तेज हवा से वह धराशयी हो गई।
सवाल ये भी उठता है की अभी डेढ माह पहले ही सुरक्षा जाच की गई थी तो जाच कर्ता ने इस चिमनी को क्यो नजर अंदाज कर दिया। उद्योग ने लापरवाही दबाने के लिए किसी भी मीडियाकर्मी को उद्योग परिसर में जाने नही दिया।

Friday, June 21, 2019

इंडियन टिम्बर लकड़ी टाल में लगी आग, तीन फायर ब्रिगेड मौके पर, पूरा वीडियो देखें

इंडियन टिम्बर लकड़ी टाल में लगी आग, तीन फायर ब्रिगेड मौके पर

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जिला ब्यूरो चीफ रायगढ़  // उत्सव वैश्य : 9827482822 
रायगढ़, जूटमिल चौकी के अंतर्गत, रेलवे स्टेशन के पीछे स्थित लकड़ी के ताल में आज अचानक आग लग गई, रायगढ़ नगर निगम की तीन फायर ब्रिगेड मौके पर आ गई,
साथ ही साथ जूटमिल चौकी और कोतवाली पुलिस भी मौके पर मौजूद हो गई, प्राप्त जानकारी के अनुसार इंडियन टिम्बर लकड़ी टाल के मालिक मंजीत सिंह ने एएनआई न्यूज़ इंडिया से बात करके बताया कि उनको आग लगने के करणो का पता नई चला है और कितना नुकसान हुआ ये भी अभी तक इसका अंदाजा नही लगा पा रहे ,
साथ ही साथ इंश्योरेंस के बारे में पूछने पर उन्होंने कोई जवाब नई दिया। अभी आग पर काबू पा लिया गया है।

पेंशन एवं मजदूरी भुगतान के लिए बैंकर्स शिविर का आयोजन

पेंशन एवं मजदूरी भुगतान के लिए बैंकर्स शिविर का आयोजन

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जिला ब्यूरो चीफ रायगढ़  // उत्सव वैश्य : 9827482822 
रायगढ़,  उच्च शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री उमेश पटेल की  कारगर पहल पर पेंशन एवं मजदूरी भुगतान के समस्याओं के निराकरण के लिए प्रति बुधवार बैंकर्स शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
हितग्राहियों को अपनी समस्याओं के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है और वे इस शिविर के माध्यम से आसानी से अपनी समस्याओं का निदान प्राप्त कर रहे है। जिला पंचायत में 2 पेंशनर, बरमकेला में 12, सारंगढ़ में 86, पुसौर में 6, रायगढ़ में 18, खरसिया में 7, घरघोड़ा में 12, तमनार 63, लैलूंगा में 12 एवं धरमजयगढ़ में 5 एवं कुल 229 पेंशनरों की समस्याओं का समाधान किया गया।
वहीं मनरेगा के मजदूर में जिला पंचायत में 2, बरमकेला में 25, सारंगढ़ में 11, पुसौर में 8, खरसिया में 26, घरघोड़ा में 5, तमनार में 20, धरमजयगढ़ में 88 एवं कुल 192 श्रमिकों की समस्याओं का निराकरण किया गया।

Wednesday, June 19, 2019

नागदा : ग्रेसिम उद्योग बंद होने की कगार पर, यह रही बड़ी वजह 

नागदा : ग्रेसिम उद्योग बंद होने की कगार पर, यह रही बड़ी वजह 

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ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567
नागदा - जल संकट से ग्रेसिम उद्योग बंद होने की कगार पर है। उद्योग के स्टेपल फाईबर के उत्पादन में गिरावट शुरू हो गई है। कुल 11 मशीनों में से मशीने एक एक कर स्लो हो रही है। 
चंबल नदी में अब 40 एमसीएफटी पानी ही शेष रहने से प्रबंधक ने ग्रेसिम उद्योगो को धीरे-धीरे बंद करने का निर्णय लिया है। मानसून की स्थिति के अनुसार बाद में एक के बाद एक मशीनों को बंद कर उत्पादन को लगातार कम किया जाएगा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उद्योग में प्रतिदिन भारी मात्रा में पानी की खपत रा-मटेरियल के रूप में होती है। उत्पादन में रोजाना तकरीबन 2 एमसीएफटी पानी की आवश्यकता होती है। सवा लाख की आबादी के शहर नागदा में जलापूर्ति भी चबंल नदी के भरोसे हैं। शहर से लगभग 14 किमी दूर कस्बा खाचरौद के वाशीयो की प्यास भी नदी से बुझती है। दोनों शहरों में मिलाकर प्रतिदिन आधा एमसीएफटी पानी की जरूरत आंकी जा रही है। मुख्य जंक्शन होने से यहां से गुजरने वाली रेलगाडिय़ों में पानी की आपूर्ती चबंल से की जाता है।
यदि जल्दी बारिश नहीं हुई तो उद्योग में कार्यरत कर्मचारियों पर भी प्रभाव पडऩे की संभावना है। उद्योग में लगभग 1600 स्थायी मजदूर तथा 2500 हजार ठेका श्रमिक की रोजी-रोटी जुड़ी है।

उद्योग में स्थानीय के अलावा बिहार, राजस्थान, उप्र, केरल, उतराखंड, उड़ीसा आदि प्रांतों के कर्मचारी बड़ी संख्या में कार्यरत हैं। पूरे ग्रेसिम उद्योग के बंद होने से शासन-प्रशासन को भी राजस्व में हानि की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। उद्योग प्रबंधक प्रतिदिन केंद्र एवं प्रदेश सरकार को तकरीबन 1 करोड़ का राजस्व चुकाता है। यहां का उत्त्पादन देश के कई भागों में कच्चा माल के रूप में पहुंचता है। विदेशों में भी ग्रेसिम का उत्पादन निर्यात होता है। ऐसी स्थिति में परिवहन में जुड़े लोगों का कारोबार प्रभावित हो सकता है।

Saturday, June 15, 2019

ग्रेसिम उद्योग के पावर हाउस गेट पर 11 साथियों सहित मालपानी उपवास पर बैठे

ग्रेसिम उद्योग के पावर हाउस गेट पर 11 साथियों सहित मालपानी उपवास पर बैठे

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ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567
नागदा- ग्रेसिम प्रबंधक से अपनी उचित मांगो को मनवाने के लिये एवं अपने अधिकारों के लिये लड़ने हेतु आप सभी मजदूर साथियो को जागरूक होकर एकजूट होना होगा। आज हम हमारे 11 साथियों सहित उद्योग गेट के बाहर 8 घंटे के सामूहिक उपवास पर बैठे है और कल 15 जून को आप सभी श्रमिक साथी एक दिवसीय केन्टीन का बहिष्कार करे।
उक्त संबोधन म.प्र. कांग्रेश कमेटी सदस्य बसंत मालपानी ने ग्रेसिम समझौता 2019 में हो रही देरी एवं श्रम संगठनों के मांगपत्र सार्वजनिक करने को लेकर श्रमिकों में जागरूकता एवं एकजुटता लाने के उद्देश्य से 11 साथियों के साथ दिनांक 14 जून शुक्रवार को सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक ग्रेसिम पावर हाउस गेट के सामने 8 घंटे का उपवास के दौरान दिया।
उपवास समाप्त होने के पूर्व नायब तहसीलदार सलोनी पटवा को अनुविभागीय अधिकारी नागदा के नाम एक ज्ञापन पत्र भी सौपा गया जिसकी प्रतिलिपि श्रमायुक्त इन्दौर को भेजी गई जिसमें यह मांग करी कि  ठेका श्रमिको की मासिक पगार 18 से 20 हजार रूपये हो।, ठेका श्रमिकों को 20 प्रतिशत बोनस मिले। 20 प्रतिशत ठेका श्रमिको को स्थायी किया जावे। मान्यताप्राप्त ट्रेड युनियनों के पदाधिकारियों के प्रत्यक्ष चुनाव हो। जिन मजदूरों को 10 साल हो गये है उन्हें स्थायी किया जावे। बाहरी मजदूरों के कारण स्थानीय मजदूरों को ब्रेक दिया जाता है वहीं रिटर्न भी की जाती है। स्थानीय श्रमिको का ब्रेक व रिटर्न बंद करे। बाहरी ठेकेदार बाहर से मजदूर लाना बंद करें।
स्थानीय लोगों को रोजगार दे। समान कार्य, समान वेतन, समान सुविधा की बात हो। जनसेवा अस्पताल को बीमा अस्पताल से लिंक किया जावे। हेलमेट, जूते, कपड़े, स्वेटर, सभी को एक जैसी अच्छी क्वालिटी के मिले। बोनस पर से सीलिंग हटाई जावे। ठेका श्रमिकों को उद्योग से लोन की सुविधा मिले। सीएस 2 ठेका श्रमिकों को गैस अलाउंस मिले। ट्रेड यूनियन के पदाधिकारी जो समझौते में बैठते है वे उद्योग में कार्यरत श्रमिक ही हो। ठेका श्रमिकों के बच्चों को भी ग्रेसिम के स्कूलों में फीस में छूट मिले। यूनियन के चंदे की रसीद एक हो।

ताकि श्रमिको से भेदभाव ना हो सके। समझौता जब संयुक्त ट्रेड युनियन के नाम से कहा जाता है तो रसीद भी एक होना चाहिये। 10 हजार के मासिक वेतन में व 15 हजार एलाउंस में टोटल 25 हजार की बढोतरी हो। ग्रेज्यूटी को 15 लाख रू किया जावे। बिडला मंदिर व जनसेवा गार्डन में काम करने वाले श्रमिको का ब्रेक व रिटर्न बंद हो। कार्ड पंच करवाया जाये और सबसे महत्वपूर्ण कि समझौता मजदूर हित में जल्द से जल्द किया जावे। नहीं तो उग्र आंदोलन किया जावेगा।
इन्होने किया उपवास- प्रदेश कांग्रेस सदस्य बसंत मालपानी, युवा कांग्रेस विधानसभा उपाध्यक्ष कमल आर्य, जिला युवक कांग्रेस महासचिव रामकिशोर भाटी, जिला कांग्रेस संगठन मंत्री चेतन नामदेव, कांग्रेस पिछड़ा वर्ग नागदा ग्रामीण अध्यक्ष अनिल भाट, श्रवण सोलंकी, नितेश गोयल, लक्ष्मण चैधरी, राजेश सिया, जितेन्द्र चैधरी, धीरज बोरासी, श्रवण परमार ने उपवास किया। इस मौके पर अशोक परांजपे, जसवन्त राठौर, सचिन सरोज, आसिफ शेख, राजेश चन्द्रवंशी सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Thursday, June 13, 2019

मुख्यमंत्री कमलनाथ की नई पहल : 4000 करोड़ के 6 प्रस्ताव को मंजूरी 7500 लोगों को मिलेगा रोजगार

मुख्यमंत्री कमलनाथ की नई पहल : 4000 करोड़ के 6 प्रस्ताव को मंजूरी 7500 लोगों को मिलेगा रोजगार 

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  • प्रदेश में निवेश को तेजी से लाने मुख्यमंत्री की नई पहल
  • प्रदेश में पहली बार सात दिन में 4000 करोड़ के 6 प्रस्ताव को मंजूरी 7500 लोगों को मिलेगा रोजगार 
  • मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ की अध्यक्षता में निवेश प्रोत्साहन संबंधी मंत्रीमंडल समिति की बैठक
भोपाल : मध्यप्रदेश में पहली बार निवेश के इच्छुक सात निवेशकों के 6 प्रस्तावों को सात दिन में मंजूरी दी गई। चार हजार करोड़ के निवेश से प्रदेश के 7500 लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में निवेश प्रोत्साहन संबंधी केबिनेट कमेटी में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्हें बेहतर एवं आधुनिकतम सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जायेंगी।
मुख्यमंत्री श्री नाथ ने कहा कि निवेश नीति को उन क्षेत्रों पर केंद्रित करेंगे जहाँ रोजगार अधिक है और जहाँ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज कई ऐसे क्षेत्र जैसे टेक्सटाईल, फार्मास्युटिकल, आर्टिफिशियल इन्टेलीजेंस जिसमें निवेश और रोजगार की व्यापक संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में वे सारी सुविधाएँ निवेशकों को उपलब्ध करवानी, चाहिए जिससे वे प्रोत्साहित हों।
निवेशकों का विश्वास जीतना चुनौती
मुख्यमंत्री श्री नाथ ने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती है कि मध्यप्रदेश में निवेशकों का विश्वास लौटाएं। उन्होंने कहा कि इसके लिए पूरी कार्य-संस्कृति को मित्रवत और सहयोगी बनाना होगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पूर्व से विद्यमान निवेश को भी विस्तार देने और प्रोत्साहित करने को कहा। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों की पहचान करें और उन्हें बढ़ावा दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 15 साल में निवेशकों का विश्वास घटा है। कई निवेशकों ने प्रारंभिक रूचि दिखाकर आगे कदम नहीं बढ़ाये। अब निवेशकों का विश्वास जीतना चुनौतीपूर्ण है।
स्वत: निवेश आकर्षित हो ऐसा वातावरण बनाए
मुख्यमंत्री श्री नाथ ने कहा कि औद्योगिक वातावरण और निवेश की संभावनाओं पर झूठे प्रचार से बचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रभावी प्रचार-प्रसार के अनुरूप उद्योगों को प्रदेश में अनुकूल स्थितियाँ उपलब्ध हों, यह भी सुनिश्चित करना होगा जिससे पूरे देश में उद्योग जगत और निवेश के क्षेत्र में बेहतर संदेश जाए। मुख्यमंत्री ने देश के उन राज्यों की बेस्ट प्रेक्टिसेज का अध्ययन कर उन्हें अपनाने को कहा जिसके कारण उन प्रदेशों में स्वत: ही निवेश आकर्षित होता है। 
निवेश के 6 प्रस्ताव को मंजूरी
मुख्यमंत्री श्री नाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश में पहली बार निवेश के 6 प्रस्तावों को सात दिन के अंदर मंजूरी देने का निर्णय हुआ। रुपये 4025 करोड़ के इन प्रस्तावों से 7500 रोजगार सृजित होंगे। जिन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई उनमें मेसर्स स्प्रिंगवे माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड का 1400 करोड़, मेसर्स प्रोक्टर एंड गेम्बल होम प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का 500 करोड़, मेसर्स आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड का 125 करोड़, मेसर्स एच.ई.जी. लिमिटेड का 1200 करोड़, मेसर्स श्रीराम पिस्टन एंड रिंग्स लिमिटेड का 600 करोड़ और मेसर्स वंडर सीमेंट लिमिटेड का 200 करोड़ का निवेश प्रस्ताव शामिल है।
माह में एक बार होगी केबिनेट कमेटी की बैठक
मुख्यमंत्री ने बैठक में निवेश संबंधी प्रस्तावों पर माह में एक बार केबिनेट कमेटी में समीक्षा के निर्देश दिए। इनमें ऐसे प्रस्ताव जिनमें नीतिगत या व्यवस्थागत कोई समस्या होगी उसका त्वरित निराकरण कर निर्णय लिया जाएगा।
टेक्सटाइल कंपनी के उद्योगपतियों से की बातचीत
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल क्षेत्र में प्रदेश में पहले से ही बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। हमारे यहाँ से तैयार गारमेंट्स गुजरात एवं अन्य राज्यों में बिक्री के लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी टेक्सटाइल कंपनियाँ अगर प्रदेश में निवेश करेंगी तो बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री ने बैठक में ही टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े बड़े उद्योगपतियों से चर्चा कर उन्हें प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया।
मंत्री-मंडल की बैठक में वित्तमंत्री श्री तरुण भनोत, नगरीय विकास मंत्री श्री जयवर्धन सिंह, मुख्य सचिव श्री एस.आर. मोहंती, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा श्री आई.सी.पी. केसरी, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री अनुराग जैन, प्रमुख सचिव जनसंपर्क एवं उद्योग श्री राजेश राजौरा, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम श्री विवेक पोरवाल एवं संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Wednesday, June 12, 2019

नरवा योजना से हो रहा नाले का उन्न्यन : बायसी में डबरी निर्माण, दुलोपाली में चेकडेम, परसानाला में बुलडोजर चेक डेम का कार्य पूर्ण

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जिला ब्यूरो चीफ रायगढ़  // उत्सव वैश्य : 9827482822 
रायगढ़, रायगढ़ जिले में गर्मी के मौसम में किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी की सुविधा उपलब्ध कराने एवं बाड़ी में साग-सब्जी के साथ जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए नरवा योजना के तहत मनरेगा से ग्राम पंचायतों में किसानों के लिए नाले का उन्नयन कार्य करवाया जा रहा है। किसानों के परम्परागत नालों को उन्नयन करने के लिए जोर दिया जा रहा है।
आने वाले समय में जल संकट से निपटने के साथ ही खेती-किसानी एवं पेयजल निस्तारी जैसे कार्यों के लिए पानी जैसे उपलब्धता ग्रामीण क्षेत्रों में बनी रहे। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने बताया कि जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए डबरी निर्माण, नाला बंधान, तालाब गहरीकरण, चेकडेम, कुआं गहरीकरण के कार्य प्राथमिकता से किए जा रहे है। धरमजयगढ़ विकासखण्ड के बायसी में डबरी निर्माण, बरमकेला विकासखण्ड के दुलोपाली में चेकडेम, परसानाला में बुलडोजर चेक डेम का कार्य पूर्ण हो चुके है। 
उल्लेखनीय है कि रायगढ़ जिले के 9 विकासखण्डों में नरवा कार्यक्रम अंतर्गत जिले में जीआईएस मेपिंग के आधार पर 13 नालों का चिन्हांकन किया गया है जिनमें से 122 ग्राम पंचायतों में कार्यों का लक्ष्य 28422 रखा गया है। जिनमें से 26359 कार्यों की स्वीकृति प्रदान की गई है। 2216 कार्य पूर्ण हो चुके है। इस कार्य में कृषि, वन, जल संसाधन विभाग द्वारा सामूहिक क्षेत्रीय कार्य किया जा रहा है।
नालों में पुसौर विकासखण्ड के केन्दवाई, केनसरा, सबकेलो नाला, सारंगढ़ विकासखण्ड के बेलपाली, बरमकेला के जीरानाला, धरमजयगढ़ के चीनीनाला, परसनाला, घरघोड़ा के कछार नाला, तमनार का चीनीनाला, रायगढ़ के चक्रधरपुल नाला, खरसिया का पीडीझर नाला, दनतारा नाला, सपनई नाला, धरमजयगढ़ के कोड़ासिया नाला शामिल है। नरवा नाला के अंतर्गत एमआईटी, बोल्डर चेकडेम, ब्रशवुड चेकडेम, सिल्ट टे्रप, स्थायी स्टाप डेम, डाईक, डाईक कम बोल्डर चेक, नाला पाथ ट्र्रीटमेंट सरचनाएं शामिल है।

हादसा : आदित्य बिरला ग्रुप ग्रेसिम उद्योग के श्रमिक को लगी गैस, सीने में उठा दर्द

हादसा : आदित्य बिरला ग्रुप ग्रेसिम उद्योग के श्रमिक को लगी गैस, सीने में उठा दर्द

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ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567

नागदा मे स्थित आदित्य बिरला ग्रुप ग्रेसिम उद्योग मे कार्यरत स्थाई श्रमिक सुरेश मावर आज सुबह मार्निग सिफ्ट से स्वस्थ अवस्था में अपने कार्य पर उद्योग मे कार्यरत थे ।

कार्य के दौरान उन्हें उद्योग के ही विस्कोस नंबर एक मे गैस लगी और सीने मे दर्द का एहसास हुआ और उन्हें सांस लेने में तकलीफ और परेशानी होने लगी ।प्ला न्ट इन्चार्ज पंकज सिन्धे को सूचना दी गई और जल्द ही उपचार के लिए एम्बुलेंस द्वारा जनसेवा हॉस्पिटल लाया गया ।

जब एएनआई न्यूज़ इंडिया ने सुरेश मावर से जानकारी ली तो उनका कहना था की मै सुबह जल्दी फेक्ट्री चला गया था फैक्ट्री मे जाने के बाद कार्ड पंच कीया और प्वाइन्ट मे जाने के लिए उपर चढने लगा तो मुझे गैस जैसा लगा और फिर चक्कर आने लगे और मै गिर गया सिने मे दर्द होने लगा, अधिकारी पंकज सिन्धे को सुचना दी गई फिर मुझे जनसेवा हॉस्पिटल मे भर्ती कराया गया ।जानकारी मिलने तक सुरेश मावर जनसेवा हॉस्पिटल मे स्वास्थ्य लाभ ले रहे है।

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