Saturday, July 30, 2016

आइसना प्रदेश अध्यक्ष के ज्ञापन के बाद पुलिस महानिदेशक ने एसपी से मांगे प्रकरण

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भोपाल. प्रदेश भर में पत्रकारों पर हो रहे हमलों के मद्देनजर गत दिनों आइसना के प्रदेश अध्यक्ष श्री अवधेश भार्गव जी, एवं भोपाल सम्भागीय महासचिव माखन विजयवर्गीय एवं अन्य पत्रकार साथी प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ऋषि शुक्ला से राजगढ़ के पत्रकार पर दर्ज हुए प्रकरण के सिलसिले में मिले थे उस दौरान श्री भार्गव जी ने पूर्व में गृह मंत्रालय द्वारा जारी सर्कुलर जिसमे पत्रकारों पर प्रकरण दर्ज होने की स्थिति में एसपी या आईजी की निगरानी में जांच कर जबरिया फंसाने के मामले एवं फर्जी प्रकरणों में जांच के बाद कोर्ट में खात्मा आवेदन की प्रक्रिया के दस्तावेज प्रस्तुत कर प्रकरण का खात्मा करने संबंधित नियमो के निर्देश का सर्कुलर सौंपा था जिसे संपूर्ण प्रदेश में पुलिस थानों एवं एसपी को पुनः सर्कुलेट करने का आग्रह किया गया था, साथ ही पत्रकारों पर दर्ज हुए प्रकरणों की रिपोर्ट प्रति तीन माह में पुलिस महांनिदेशक को  भेजी जाए , इस सर्कुलर को पुलिस महानिदेशक ऋषि शुक्ला द्वारा सर्कुलेट कर दिया गया है, राजगढ़ एसपी कार्यालय से मिली जानकारी अनुसार पुलिस मुख्यालय मप्र ने एसपी से विगत तीन माह में कितने प्रकरण दर्ज हुए और उनकी विवेचना के दौरान क्या पाया गया एवं निर्दोष पाए जाने पर खात्मे के लिए क्या प्रक्रिया की गयी है उसकी ताजा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है.

आइसना जिंदाबाद, पत्रकार एकता जिंदाबाद

Thursday, July 28, 2016

पत्रकारों के दुश्मनों को एक और झटका, पत्रकार भवन के मामले में औंधे मुंह गिरे,,,,

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भोपाल, पत्रकार भवन पर कब्जा करने की नीयत से 1992 में पैदा हुई नाजायज औलादों को आज एक और जोर का झटका लगा। जब उनकी अपील जिला एवम् सत्र ऩ्यायालय ने प्रकरण क्रमॉक 14/15 एम जे सी ख़ारिज कर दी।
उल्लेखनीय है, कि श्री एन पी अग्रवाल की अध्यक्षता में पत्रकार भवन समिति गठित हुई थी, किन्तु एक स्वयम् भू पत्रकार नेता औऱ उसके कथित चेलों ने पत्रकार भवन में कब्जा करने की कुचेस्टा की थी। जिसके विरुद्ध श्री एन पी अग्रवाल ने न्यायालय से 2014 में स्थगन प्राप्त कर लिया था।
इस स्थगन के विरुद्ध तथाकथित सचिव अरशद अली उर्फ अरशद पठान, पत्रकार भवन समिति अपील में सत्र न्यायालय गये थे। लगभग दो साल तक चली जद्दोजहद,के बाद आज 27 जुलाई को माननीय न्यालय ने गुण दोषों के आधार पर अरशद अली उर्फ अरशद पठान की अपील खारिज़ कर दी।
कदम दर कदम, किश्त दर किश्त शिकश्त ख़ाने के बाद भी ना तो चेलों की समझ में आ रही है,न ही फरेबी उस्ताद के,,,, एक तो शायद थोड़ा समझ चुके हैँ क्योंकि , उसने चोटी बढ़वाकर चोटी वाले बाबा बन गये थे किन्तु लगातार मिल रही शिकस्त से पश्त होकर चोटी कटवा ली है। अभी भी वक्त है, पत्रकार भवन समिति के वर्तमान अध्यक्ष श्री राधा वल्लभ शारदा ने चेतावनी दी है, कि मीडिया सेंटर के निर्माण में जो भी टॉग अड़ाकर पत्रकार बिरादरी का नुकसान करेगा, उसका यही हश्र होगा।

जज को पब्लिक ने पीटा, कपड़े फाड़े, नंगा करने की कोशिश की .... देखे विडियों..

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भोपाल। महू-नीमच फोरलेन पर मल्हारगढ़ जिला मंदसौर में एक रोड एक्सीडेंट के बाद लोगों ने कार में सवार प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, पास्को व लोकायुक्त के विशेष न्यायाधीश राजवर्धन गुप्ता के साथ बेरहमी से मारपीट की एवं कपड़े फाड़​ दिए। बीच सड़क पर नंगा करने की कोशिश की। पता चला है कि भीड़ कार में आग लगाने की तैयारी कर रही थी तभी पुलिस आ गई। इस मारपीट की कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है परंतु भिंड जिले की मेहगांव कोर्ट में पदस्थ जज मनोज कुमार तिवारी ने इस हादसे का वीडियो जरूर फेसबुक पर शेयर किया है। 

श्री तिवारी ने फेसबुक पर लिखा है कि जजों की हालत अच्छी नहीं है और न ही सुरक्षित है। हादसा हुआ है तो भी सजा देने का यह क्या तरीका? उन्होंने मारपीट करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है। 
यह हुआ था घटनाक्रम 
हादसा शनिवार को हुआ। फोरलेन पर एक ट्रक ने जज की कार को पीछे से टक्कर मार दी थी। अनियंत्रित हुई कार डिवाइडर पर चढ़ी और वहां खड़े 10 वर्षीय साहिल से टकराते हुए पलट गई। हादसे में बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। जज के साथ यात्रा कर रहे कोर्ट मुंशी राजेंद्रसिंह चौहान ने दैनिक भास्कर बताया कि ' मैं साहब के साथ मल्हारगढ़ जा रहा था। कार ड्राइवर कन्हैयालाल कुमावत चला रहा था। साहब पीछे की सीट पर थे। हादसे के बाद साहब कार से बाहर निकले। लोगों को बताया मैं जज हूं। इसी बात को लेकर लोगों ने अभद्रता कर शुरू कर दी। दुर्घटना के कारण कार की चाबी कहीं गिर गई और डोर लगने के बाद कार लॉक हो गई। मैं कार में फंसा रहा। कुछ लोगों ने मुझे देखा और बाहर निकाला। कुछ ही देर बाद पुलिस पहुंच गई। लोगों में बहुत गुस्सा था। वे कार में आग लगाकर हमें मार भी सकते थे।

इसलिए दर्ज नहीं कराया गया मामला
जिला सत्र न्यायाधीश राजेंद्र प्रसाद शर्मा का कहना है कि दुर्घटना किसी से भी हो सकती है। इस तरह की अभद्रता करना किसी भी हाल में ठीक नहीं है। न्यायाधी श सर्विस कंडक्ट रूल्स में बंधे होने के चलते किसी के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कर सके। इस रुल्स के अंतर्गत न्यायाधीश को अपना पक्ष रखने की स्वतंत्रता नहीं है। वो मीडिया से भी चर्चा नहीं कर सकते। 

मप्र में जज भी सुरक्षित नहीं
मप्र के तमाम न्यायालयों में हर रोज अपराधियों को सजाएं सुना रहे जज सुरक्षित नहीं है। कुछ समय पहले तक तो सरकार ने उनसे लालबत्ती का अधिकार भी छीन लिया था। हालात यह हैं कि जजों को सरकारी आवास तक उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। उन्हें आम नागरिकों के बीच किराए के मकानों में रहना पड़ता है। चूंकि वो हर रोज अपराधियों के खिलाफ सजाएं सुनाते है इसलिए स्वभाविक है कि उनका व उनके परिवार का जीवन खतरे में होता है परंतु सरकार की ओर से उन्हें किसी प्रकार की सुरक्षा मुहैया नहीं कराई जाती।
वीडियो देखने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें
https://youtu.be/QVCZDat2kQg

मरने के बाद लाशों को होता है उपयोग, जानकर रूह कांप

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दुनियाभर में कितना कुछ अजीब होता है हम तो बस देखते ही रह जाते है समझ ही नहीं आता की ऐसा कहाँ होता होगा। कई चीज़े हम पहली पहली बार देखते है तो हमे लगता है यह सब झूठ है. और हमारे मुँह से निकलता है की "भिया इ हो का रिया है" अब जो होता है सो होकर ही रहता है। चलो हम बताते है की मरने के बाद क्या होता है-

1. पाउडर बनाकर दफनाया जाता है- स्वीडन की एक कंपनी है। मरे हुए आदमी की लाश ले लेती है। फिर उसको फ्रिज़ में डाल के एकदम फ्रॉस्ट करती है। फ्रॉस्ट करने का मतलब एकदम फ्रिज़ में डाल कर बर्फ़ जैसा बना देती है। फिर उसको वाइब्रेटर में डाल के पाउडर बना दिया जाता है। इसके बाद इसका पानी-वानी सब सुखा देते हैं। अब उसको जाली में अच्छे से छान लिया जाता है। छानने से आप जो ज़िंदगी भर पूरे शरीर में मेटल जमा किए हैं न वो सब अलग हो जाता है। फिर उसको मक्के के आंटे से बने कलश में भर के दफनाया जाता है। एक साल के अंदर जो पूरा कॉफिन है वो कम्पोस्ट हो जाता है। बोलो भला इतना ख्याल है इनको एनवायर्नमेंट का।

2. लाश को हीरे की अंगूठी बना दिया जाता है - अमेरिका की एक कंपनी है। जो डेड बॉडी ले लेती है। और उसको हीरा बना देती है। डायमंड भिया डायमंड। फिर चाहे उसको आपके घर वाले यूज कर लें। ऐसा बोलते हैं कि एक आदमी के शरीर में इतना कार्बन होता है कि उससे 50 हीरे तक बनाए जा सकते हैं। जिसको बेच के एक स्कॉर्पियो खरीद सकते हैं। लाश से मिले कार्बन को पहले प्यूरीफाय करके ग्रेफाइट बना दिया जाता है। उसके बाद सिंथेटिक हीरे में बदल दिया जाता है। जिसको चाहें आप अंगूठी बना के पहन लें या बेच के गाड़ी खरीद लें आपकी मर्ज़ी। वैसे हीरे पर मरने वाले आदमी का नाम भी लिखा जाता है। 2007 में ईबे पर एक हीरा लगभग 1.4 करोड़ में बिका था।

3. लाश को मसालेदार बना के गिद्धों के लिए फेंक देते हैं- तिब्बत में रहने वाले बौद्ध लोग न थोड़े उस टाइप के होते हैं। कि दुनिया मोह-माया है। अब जब आदमी मर ही गया तो क्या बचा। इसको भी किसी भलाई में लगा दो। बस फिर क्या। लाश को टुकड़ों में काट देते हैं। फिर एक टुकड़ा लेके अलग-अलग बौद्ध उसको पत्थरों से कुचल कर उसमें कुछ आटा और बटर मिला देते हैं। उसके बाद इसे गिद्धों के लिए छोड़ दिया जाता है।

4. लाशों को निकाल के उनके साथ नाच किया जाता है- मेडागास्कर का नाम तो सुने होंगे। एक सनीमा भी आया था। कार्टून जैसा सिनेमा था। अफ्रिकन कंट्री है। वहां एक फ्यूनरल ट्रेडिशन होता है। हर साल। इसमें लाशों को हर साल जमीन से निकाल के उसको बढ़िया-बढ़िया कपड़े पहिना देते हैं। एकदम सिल्क-विल्क टाइप का। और फिर उसके साथ डांस करते हैं। ये ट्रेडिशन आज का नहीं है। 17वीं शताब्दी से ही चलता आ रहा है। लेकिन अब लोगों ने इसका थोड़ा विरोध करना शुरू कर दिया है।

5. इंसान है या साबुन- कहते हैं कुछ लोग मरने के बाद साबुन बन जाते हैं। खास करके जो लोग ज्यादा मोटे होते हैं। उनमें ये ज्यादा दिखता है। सोपिफ़िकेशन करके एक प्रोसेस होता है। जिससे शरीर का बचा हुआ जो फैट होता है वो और दूसरे लिक्विड से मिल के लम्प बन जाता है। अमेरिका के एक म्यूजियम में एक औरत की मूर्ती रखी है। जिसको ऐसे ही किसी कब्र से निकाले गए वैक्स से बनाया गया है। इसे ‘The Soap Lady’ का नाम दिया गया है।

स्कूल की शर्मीली लड़की सनी कैसे बन गई पोर्न फिल्मों की स्टार

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सनी लियोनी आज बॉलीवुड का जाना-पहचाना नाम हैं। हमेशा होठों पर खूबसूरत सी मुस्कुराहट रखने वाली सनी लियोनी की जिंदगी पर बड़े पर्दे पर दिखेगी। निर्देशक अभिषेक वर्मा ने उनकी जिंदगी पर फिल्म बनाने की बात कही है। इस फिल्म में क्या खास होगा? दरअसल उनके बॉलीवुड में आने की कहानी तो कई लोग जानते हैं लेकिन स्कूल की सबसे शर्मीली लड़की करनजीत कौर पोर्न की दुनिया में कैसे आई और फिर ऐसी छाई कि हर तरफ उसी के चर्चे हो गए। इस पर आज भी उनके प्रशंसक सोचते हैं। फिल्म की कहानी क्या होगी, इसके लिए हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आए सनी की जिंदगी में बदलाव, कब उन्होंने देखी पहली पोर्न फिल्म? दरअसल करनजीत कौर के बदलने का दौर तब आया जब वो 19 साल की थीं।

सनी लियोनी इस समय करनजीत हुआ करती थीं। पंजाबी मूल की ये लड़की कनाडा में पढ़ाई कर रही थी। सनी ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि वो बेहद शर्मीली हुआ करती थीं। वो जब जवान हो रही थीं तो मन में पोर्न फिल्म देखने की हसरत हुई। सनी लियोनी एक पोर्न फिल्म की डीवीडी खरीद लाईं। सनी ने जैसे ही डीवीडी चलाने को कमरे में गईं, एक आवाज हुई।

सनी जब पोर्न फिल्म देखने को कमरे में बैठीं तो उन्हें लगा कि जैसे कोई देख रहा है। दरअसल ये सनी का डर था, आखिर उन्होंने डीवीडी को उठाकर एक तरफ रख दिया। कुछ साल बाद घर पर कोई नहीं था तो सनी ने दोस्तों संग पोर्न देखने का प्रोग्राम बनाया। सनी 19 साल की हो गई थी।

दोस्तों के साथ पोर्न देखने केा सनी लियोनी का ये पहला अनुभव था। लियोनी ने एक इंटरव्यू में इसके बारे में बताया। सनी ने कहा था कि जवान दोस्तों के साथ पोर्न फिल्म देखना और बिना कपड़ों के घर में घूमना एक अलग ही एहसास था। अभी भी सनी लियोनी ने पोर्न फिल्मों में काम करने जेसी कोई बात नहीं सोची थी। इन दिनों उन्हें एक नया काम मिला।

सनी लियोनी ने कुछ कमाई के इरादे से बेकरी और फिर टैक्स और रिटायरमेंट कंपनी में नौकरी कर ली। सनी ने भले ही एक बेहद आम सी जॉब अपने लिए ढूंढी थी लेकिन तकदीर ने तो उनके लिए कुछ और ही बदा था। सनी का परिवार कनाडा से अमेरिका आ गया। सनी को इसी दौर में कुछ मॉडलिंग के असाइंमेंट मिले। उनके काम और फिगर को देख पोर्न फिल्मों के एक एजेंट की नजर उन पर ठहर गई। पोर्न फिल्मों का ये एजेंट सनी के पास ऑफर लेकर पहुंचा लेकिन सनी परिवार की मर्जी के बिना कुछ नहीं करना चाहती थीं।

सनी लियोनी माली तौर पर इन दिनों बहुत मजबूत नहीं थीं। उन्होंने पोर्न फिल्मों में काम करने का ऑफर स्वीकार कर लिया। सनी ने अपने परिवार को अपने इस निर्णय के बारे में बताया और सबसे इजाजत भी ली। इसी दौरान उनके साथ काम कर चुके एक पूर्व संपादक ने उनके नाम के साथ लियोनी जोड़ दिया। यहीं से सफर शुरु हुआ पोर्न स्टार सनी लियोनी का लेकिन ये सब इतना आसान नहीं था, अलग-अलग लोगों के साथ सोना सनी को बड़ा अजीब लगता था।

सनी लियोनी ने कुछ ज्यादा पैसा कमा लेने की गरज से पोर्न फिल्मों का ऑफर कुबूला था। उनको जब अलग-अलग लोगों के साथ सेक्स करने के ऑफर मिलते तो उन्हें बड़ी मुश्किल होती। सनी का कहना है कि उन्होंने वही किया जो उनके दिल ने कहा। सनी का कहना है कि शुरू में भले ही परिवार को अजीब लगा लेकिन बाद में उन्होंने इसको स्वीकार लिया। सनी के घर में पोर्न फिल्मों की कितनी सारी डीवीडी होंगी? इसका जवाब सनी एक इंटरव्यू में दे चुकी हैं।

सनी लियोनी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके घर में एक भी पोर्न फिल्म की डीवीडी नहीं है। सनी ने कभी अपने पोर्न फिल्मों के चयन को लेकर दुख जाहिर नहीं किया। वो हमेशा कहती हैं कि उन्हें किसी फैसले को लेकर कोई अफसोस नहीं है। पोर्न की बड़ी स्टार सनी की दुनिया में बड़ा बदलाव आया 2012 में जब उनकी मुलाकात हुई पूजा भट्ट से।

पूजा भट्ट को फिल्म के लिए एक नए चेहरे की तलाश थी और उनकी भा गईं सनी लियोनी। सनी ने पूजा का ऑफर खुशी से स्वीकार कर लिया। पोर्न फिल्मों को बाय-बाय कर सनी बॉलीवुड में आ गईं। फिल्मी गलियारों में इस बात को लेकर खूब चर्चा हुई कि आखिर पोर्न स्टार फिल्मों में कैसी आ सकती है।

सनी लियोनी तमाम विरोधों और चुभते हुए सवालों के बीच बॉलीवुड में जमी रहीं। आज वो हिन्दी फिल्मों में किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। दशकों से बॉलीवुड में जमी कई दूसरी विदेशी हीरोइनों के मुकाबले सनी अच्छी हिन्दी भी बोलने लगी हैं। इतनी शोहरतों के बावजूद आज भी कुछ ऐसी चीजे हैं जो उन्हें सोने नहीं देती हैं।

सनी कई बार इस बात को लेकर अपना दुख जाहिर कर चुकी हैं कि बॉलीवुड के लोग उन्हें बेहद प्यार देते हैं लेकिन लगातार ये एहसास भी कोई ना कोई दिलाता रहता है कि वो पोर्न फिल्मों से आई ह

जमीनी हकीकत से कोसो दूर हैं जनसंपर्क महकमा

जमीनी हकीकत से कोसो दूर हैं मध्यप्रदेश का जनसम्पर्क विभाग देखिए आगे-आगे होता है क्या... जनसंपर्क महकमा याने ???????
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गरीब की भोपाल। प्रदेश का जनसंपर्क महकमा कभी मुख्यमंत्रियों के आंख, कान और नाक हुआ करता था। मगर इस आंख के तारे जैसे विभाग की हालत खराब है। यह कई बरस से गरीब की ..... की तरह हो गया है जिसके सब मजे ले रहे हैं। हंसी ठिठोली भी उसके साथ और सरकार की बदनामी का ठीकरा भी उसी के माथे। तभी तो सीएम-मंत्री की छवि सुधार का काम बाहरी लोग कर रहे हैं। हद है यह.. जनसंपर्क विभाग का जलवा ऐसा भी था कि आज के पत्रकारों और अफसरों को उस पर यकीन करना मुश्किल होगा। 

मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह हुआ करते थे। जो खुद कम बोलते थे उनकी आंखों और अंदाज से ही नौकरशाही समझ लेती थी कि करना क्या है। एक किस्सा है अविभाजित मध्यप्रदेश के छत्तीसगढ़ का। वहां अफसरों की मीटिंग में अर्जुन सिंह और जनसंपर्क प्रमुख सुदीप बैनर्जी उनके साथ थे। बारिश में आदिवासियों को कैरोसिन की जरूरत ज्यादा होती थी, तब राशन दुकान से मिलने वाले घासलेट की तंगी भी रहती थी सो यह बाजार में कम तो था ही मंहगा भी मिलता था। बैठक में उस समय के जिला जनसंपर्क अधिकारी ने एक पर्ची में लिखा कि घासलेट के दाम कम कर दिए जाएं तो आदिवासियों को इससे राहत मिलेगी। चपरासी को इशारे से बुलाकर यह पर्ची उस अधिकारी ने अपने साहब (याने बैनर्जी) को देने का कहा। चूंकि अर्जुन सिंह और बैनर्जी अगल-बगल ही बैठे थे इसलिए पर्ची साहब याने अर्जुन सिंह को दे दी गई। 

पहले सरकार में साहब का मतलब अर्जुन सिंह ही माना जाता था। यह देख जनसंपर्क अधिकारी सख्ते में आ गया। उन्होंने मुख्यमंत्री की तरफ कातर भाव से माफी के अंदाज में देखा। इसके बाद अर्जुन सिंह ने अपने संबोधन के दौरान ही चौकाने वाली घोषणा कर दी, कि सरकार घासलेट के दाम में कटौती करती है। यह महत्व था जनसंपर्क अधिकारी का सीएम की नजर में। इसके अलावा जनसंपर्क संचालक या आयुक्त कोई बात सीएम या किसी मंत्री से संकेत में भी कह दे तो न चाहने पर भी उसपर गंभीरता से अमल होता था। क्योंकि यह माना जाता था कि जनसंपर्क से जो बात आ रही है वह सरकार व प्रशासन को लेकर जनता व समाज की जमीनी हकीकत है। तब जनसंपर्क कुछ लोगों के हित साधने के लिए किसी एजेंडे पर काम नहीं करता था। 

सरकार की छवि चमकाने का काम करता था, जिसमें मुख्यमंत्री के साथ मंत्रिगण भी शामिल होते थे। जनसंपर्क प्रमुख जो कि अपने जिला अधिकारियों से मंत्री व प्रशासन की ग्राउंड रिपोर्ट जब सीएम को देते थे उसके आधार पर अधिकारियों की पोस्टिंग व मंत्रियों के विभाग तक कई दफा तय होते थे। चुनाव के समय भी जनसंपर्क की जिला व कस्बों की रिपोर्ट जिसमें नेताओं के समीकरण, चुनावी गणित,दावेदारों की छवि और सेबोटेज पर आई रिपोर्ट को गंभीरता से लिया जाता था। तब के सत्यानन्द मिश्र, एल.के. जोशी, सुदीप बैनर्जी, ओ.पी. रावत जैसे जनसंपर्क प्रमुख के नामों की आज भी चर्चा होती है जिन्होंने विभाग की वर्किंग 24 घंटे मीडिया की तर्ज पर रखी थी। 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सचिन तेंदुलकर कहे जाने वाले नरोत्तम मिश्रा के पास जनसंपर्क विभाग है। उन्हें मिला है सबकी भौजाई बने इस महकमे की पुन: प्राण प्रतिष्ठा का जिम्मा। और वे हैं कि अभी तक विभाग ही नहीं समझ पाये,,,,, प्रिन्ट मीडिया को तीन माह से जारी होने वाले एक भई विग्यापन नहीं जारी हो पाये,ओम्म्म्म् शॉति ओम, बेव साइट्स को प्रति माह जारी होने वाले एक भी विग्यापन तीन महीने से फाइल पहले, पहले वाले और अब नरोत्म मिश्रा के पास लम्बित है, लगता है तूफान से पहले की शॉति है,,,,, लगता है मंहगा घासलेट अपना असर दिखायेगा,,,

इलेक्ट्रानिक चैनल के पत्रकार, पत्रकार नहीं कानून कहता है

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भोपाल । दूरदर्शन सहित देश में चल रहे चैनल जो हमें हर पल की खबर से रूबरू कराते है। इन चैनल में काम करने वाले पत्रकार जो चैनल की आईडी और कैमरा लेकर चलने वाले कैमरामैन के साथ 24 घंटे सातों दिन आम जनता की समस्याएं, अफसरों की लापरवाही और नेताओं को खट्टे-मीठे बोल बोलते हुये दिखाते हैं। वो पत्रकार की श्रेणी में नहीं आते यह खुलासा हुआ प्रधानमंत्री को लिखे पत्र के जवाब में।
देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को पत्र तो लिखा था दूरदर्शन में काम करने वाले पत्रकारों को लेकर। उस पत्र को प्रधानमंत्री कार्यालय से संबंधित विभाग को उचित कार्यवाही के लिये भेजा गया।
पिछले दिनों केन्द्रीय सरकार के प्रसार भारती से एक पत्र फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा को प्राप्त हुआ। उस पत्र से यह तो स्पष्ट हो गया कि दूरदर्शन में काम करने वाले पत्रकारों को द वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट 1955 के अनुसार पत्रकार नहीं माना गया इसलिये उनके वेतन आदि के बारे में विचार नहीं किया जा सकता।
हमारे देश में दूरदर्शन लगभग 1982 में प्रारंभ हुआ और उसके बाद अन्य चैनल धीरे-धीरे वजूद में आये। परन्तु 1955 में बने वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट में 2016 जुलाई तक कोई संशोधन नहीं हुआ।
1. वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट 1955 में स्पष्ट है कि न्यूज पेपर का मतलब मुद्रित समाचार पत्र।
2. न्यूज पेपर एम्पलाई का अर्थ वर्किंग जर्नलिस्ट।
3. न्यूज पेपर इस्टवलिसमेंट का अर्थ व्यक्ति अथवा कंपनी का मालिकाना हक।
4. वर्किंग जर्नलिस्ट जो न्यूज पेपर में कार्यरत हो। उसमें संपादक, न्यूज एडीटर, लीडर राईटर, सब एडीटर, फीचर राईटर, कापी लेस्टर, रिर्पोटर, क्रसपांडेन्ट, कार्टूनिस्ट, न्यूज फोटोग्राफर और प्रूफ रीडर शामिल है।  एक्ट में यह भी स्पष्ट है कि मैनेजमेंट अथवा एडमिनिस्ट्रेशन जैसे कार्य करने वाले वर्किंग जर्नलिस्ट की श्रेणी में नहीं आते है।
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प्रसार भारती से प्राप्त पत्र पढ़े......

Tuesday, July 26, 2016

नशा मुक्ति अभियान बना सबसे बडा़ कमाई का जारिया, पुलिस अधीक्षक के नाम पर गोरखधंधा

पंकज साहू //  नरसिहंपुर

नरसिहंपुर । ठेमी थाना मे पदस्त थाना प्रभारी भारती जी इस समय SP साहब के गुन गा कर अच्छी कमाई करने कोई कसर नही छोड़ रहे। ग्रामीण क्षेत्र अनपढ़ लोगों को sp साहब का नाम लेकर मामले को खत्म करने की बात करते है चाहे मामले शिकायत से लेकर जांच तक कमाई ही कमाई नजर आ रही है सट्टा   पर तो हर गांब मे सटोरियों से महीने फिक्स है सबसे बड़ा कमाऊ अभियान नशा मुक्ति बना हुआ है क्षेत्रीय लोग इसमें खासे परेशान हो चुके है हर किसी को उठाकर शराब स्मैक के नाम पर वसूली की जा रही है टीआई साहब के रवैयें के चलते ग्रामीण एवं दूर दराज से आने वाले यात्रियो को कई मुश्किलो का सामना करना पड रहा है जैसे की अवैध वसूली का कार्य ठेमी थाने मेे जोरो से फल फूल रहा है जबकि प्रदेश सरकार द्वारा ऐसा कोई प्रवधान नही है लेकिन यहा मौजूद स्टाफ द्वारा अवैध तरीके से जैसे मोटर सायकल  एवं वडे वाहनो के चालको को परेशान तो किया ही जा रहा है लेकिन वहा से गुजरने वाले अवैध वाहन जैसे मादक पदार्थ कवाड, वाहन, अवैध तरीके से पशुओ की तंस्करी करने वाले वाहन,रेत से लदे वाहनो को खुली छूट दी जा रही है, जबकी मोटर साइकल एवं ट्रैक्टर या रोड से निकलने वाले बड़े बाहनों से अबैध रूप से बसूली कर रहें है। प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना प्रभारी द्वारा 100 रू की रशीद बना कर 500 रूपये प्रति वाहन वसूला जा रहा है वही इन्टीऊ वसूली का कोई समया सीमा निर्धारित नही किया गया है जब जेब मे कमी महसूस हुई तो डण्डा उठाकर रोड पर खडे हो गये। कभी सुबह तो कभी दोपहर तो कभी शाम को इन्टीऊ वसूली का काम थाना प्रभारी द्वारा किया जा रहा है और मोटरसाइकिल चालको को परेशान कर मोटी रकम वसूली जा रहा है। अवैध वसूली कर रहे प्राप्त जानकारी के अनुसार ए.एस.आई द्वारा कई मोटर सायकल चालको सें 500 रूपये लेकर 100 रूपये की रसीद दी जाती है ऐसा ही एक दिन मे 100 से 500 सौ मोटर सायकले निकलती है तो एक दिन की अवैध कमाई का अंदाजा लगाना आसान नही होगा भारती जी ।

"आइसना " नीमच के पत्रकार साथियो ने दिखाई मानवता, घायल को चिकित्सालय पहुंचवा

आल इंडिया स्माल न्यूज़ पेपर्स एसोसिएशन "आइसना " नीमच के पत्रकार साथियो ने दिखाई मानवता, ट्रांसपोर्ट के सामने हुई घटना कोई नही पहुंचा मदद को

नीमच। नीमच के जावद फंटे फोरलेन चौराहे से आगे स्थित पेट्रोल पंप के सामने स्थित ट्रांसपोर्ट के सामने ट्रक से हुई दुर्घटना के आधे घण्टे तक भी ट्रांसपोर्ट के अंदर से कोई निकलकर नही आया जिसके पश्चात जावद से आ रहे. आल इंडिया स्माल न्यूज़ पेपर्स एसोसिएशन (आइसना) के पत्रकार साथी अभय भारद्वाज, राकेश गुर्जर , दीपक शर्मा, नरेंद्र गेहलोद, एसएस यादव, और मिश्रीलाल पाटीदार मोके पर पहुंचे जिन्होंने मानवता दिखते हुए 108 पर फोन कर घायल को हॉस्पिटल रैफर करवाया। इस घटना में घायल अकेला CD डीलक्स गाड़ी से जा रहा था जिसका नंबर MP44 MF7308 है जिसका ट्रक क्रमांक HR74 3762  से हुआ। घायल को गम्भीर चोंटे आई है गम्भीर हालत में घायल को चिकित्सालय ले जाया जा रहा है। घायल कौन है और कहा से आ रहा था इसकी जानकारी नही मिल पाई है। इस पूरी घटना में यह बात सामने आई की आज की मानवता किस स्तर तक गिर चुकी है अगर ट्रांसपोर्ट वाले, राहगीर और ग्रामीणजन चाहते तो उसे जल्द से जल्द हॉस्पिटल पहुंचा सकते थे। इस पूरी घटना को लेकर आइसना के पत्रकार साथी ट्रांसपोर्ट मालिको और राहगीरों के रवैये की निंदा करता है।

आधार कार्ड : देश का सबसे बड़ा हॉस्पिटल एम्स ( AIIMS New DELlHI ) में इलाज कराना हुआ और आसान

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 *⭕आधार कार्ड नम्बर दीजिये और आन लाइन रजिस्ट्रेशन कराइये⭕*
           एम्स ने इसकी शुरुआत कर दी है। जी हाँ एम्स ने ये पहल आज से शुरू कर दिया है। अब आपको ओपीडी कार्ड बनाने के लिये लम्बी लम्बी लाइन में लगना नहीं पड़ेगा और ना ही किसी दलाल के चक्कर में पड़ना पड़ेगा। इसके लिए आपको सिर्फ aiims की वेबसाइट पर जाना है और ओपीडी पर क्लिक करना है। इसमें ऑप्शन आयेगा न्यू रजिस्ट्रेशन एवं ओल्ड रजिस्ट्रेशन का। आपको अपना आधार कार्ड नं० डालना है। उसमें आपकी सारी डिटेल आ जायेगी।
       अब आपको जिस विभाग में दिखाना है उस पर क्लिक करना है। उसके बाद पेमेंट का ऑप्शन आयेगा। आपको क्रेडिट कार्ड या एटीएम कार्ड का नं० डालना है और ओके पर क्लिक करना है। बस हो गया आपका रजिस्ट्रेशन। अब आपके मोबाइल पर मेसेज आ जायेगा जिसमें रजिस्ट्रेशन नं० से लेकर डाक्टर का नाम और दूसरी सारी जानकारी आपके मोबाइल पर आ जायेगा .कृपया यह जानकारी आगे भी प्रेषित करने का कष्ट करें !

         *आप सबसे निवेदन है, यह मैसेज सिर्फ 3 लोगों को जरूर भेजें... और उन तीन लोगो को कहे की यह मैसेज आगे तीन लोगों को भेजें, हम सब बलिदान ना सही पर देश कै लिए इक छोटा सा काम तो कर सकते हैं*

आइसना ने झाबुआ पुलिस अधिक्षक को सोंपा ज्ञापन* _भाजपा नेता पर हो कड़ी कार्यवाही

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धरमपुरी के पत्रकार श्री सुनील उपाध्याय पर भाजपा नेता द्वारा किए गए प्राणघातक हमले के विरोध में आज मंगलवार को *आइसना, जिला पत्रकार संघ व भारतीय पत्रकार संघ के पदाधिकारीयों व सदस्य पत्रकारों ने बड़ी संख्या में जिला मुख्यालय पर एकत्रित होकर जिला पुलिस अधिक्षक को प्रदेश के गृहमंत्री के नाम पृथक-पृथक तीन ज्ञापन सोंपे तथा चेतावनी दि कि अगर अपराध पृवृति के भाजपा नेता और संबंधित पुलिस अधिकारी के विरुद्ध शिघ्र कड़ी कार्यवाही नहीं की गई तो पत्रकारों को आंदोलनात्मक कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ेगा ।

अॉल इंडिया स्मॉल न्यूज पेपर्स एसो. के प्रदेश उपाध्यक्ष कुन्दन अरोड़ा, संभागीय उपायाध्यक्ष यशवंत भंडारी, जिला संयोजक मुकेश अहिरवार, जिलाध्यक्ष संजय जैन, जिला पत्रकार संघ अध्यक्ष विमल मुथा, पूर्व अध्यक्ष सलीम सैरानी, भारतीय पत्रकार संघ अध्यक्ष हरिश यादव, वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रभानसिंह भदौरीया, सत्यनारायण शर्मा, सचिन जोशी, राजेन्द्र सोनी   अजगर अली बोहरा, रहीम सैरानी, गोपाल ठाकुर, हरिश त्रिवेदी, फारुख सैरानी, अमित शर्मा, शाहीद खान, नरेन्द्र पंवार, राजेश मिश्र, दौलत गोलानी, दशरथ कट्ठा, भूपेंद्र बरमंडलीया, देवीसिंह भूरिया सहित *झाबुआ, रानापुर, थान्दला, मेघनगर* सहित अनेक ग्रामीण पत्रकारगण उपस्थित थे ।
*पत्रकारों ने जिला पुलिस अधिक्षक को जिले के पत्रकारों के विरूध्द दुर्भावनावश फर्जी रिपोर्ट दर्ज होने पर बिना जांच के मुकदमें दर्ज किए जाने की और ध्यान आकर्षित किया जिस पर उन्होंने आश्वस्त किया कि अब ऐसी किसी भी घटना पर वे स्वयं संज्ञान लेंगे और उसके बाद ही प्रकरण दर्ज हो सकेगा ।
पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर फर्जी व असत्य समाचारों के माध्यम से किसी व्यक्ति व संगठन को बदनाम करने जैसे कृत्य करने वालों के विरुध्द कार्यवाही करने की मांग करते हुए एक लिखित शिकायत जिला पत्रकार संघ की और से दी । शिकायत पर पुलिस अधिक्षक ने कहा कि वे इसकी जांच पश्चात ऐसे कृत्य करने वालों के साथ ही संबंधित ग्रुप एडमिन के विरुध्द भी कार्यवाही करेंगे ।

आईसना "एक प्रयास" पत्रकार सम्मेलन 31 जुलाई को खरगौन में

आधा दर्जन टीआई बने डीएसपी

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रायपुर ! छत्तीसगढ़ गृह निर्माण (पुलिस) विभाग द्वारा हुई विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में आधा दर्जन निरीक्षकों को पदोन्नति देते हुए डीएसपी बनाया गया है। इनमें से तीन को कम्पनी कमांडर बनाया गया है। यह आदेश आज गृह विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है। गृह विभाग द्वारा जारी नवीन पदस्थापना और पदोन्नति सूची के अनुसार शिव कैलाश सिंह निरीक्षक बिलासपुर को उप पुलिस अधीक्षक अविवि पुमु रायपुर, रमाकांत शर्मा निरीक्षक सामान्य शाखा पुलिस मुख्यालय रायपुर को उप पुलिस अधीक्षक आईयूसीएडब्लयू बिलासपुर, राजेश जोशी निरीक्षक बलौदाबाजार की एसडीओपी बोड़ला कबीरधाम, घनश्याम कुरूवंशी निरीक्षक बस्तार को उप पुलिस अधीक्षक अविवि पुमु रायपुर, भोगीलाल भोई कम्पनी कमांडर 3री वाहिनी अमलेश्वर दुर्ग को सहायक सेनानी 8वीं वाहिनी राजनांदगांव, राकेश सिंह कम्पनी कमांडर 8वीं वाहिनी राजनांदगांव को सहायक सेनानी 8वीं राजनांदगांव व जयलाल मरका कम्पनी कमांडर व्हीआईपी वाहिनी माना रायपुर को सहायक सेनानी 4थी वाहिनी माना रायपुर हैं। जिले के 35 पुलिस कर्मिंयों का तबादला रायपुर जिले के नए एसपी डॉ. संजीव शुक्ला ने शनिवार को जिले के 35 पुलिस कर्मिंयों का तबादला आदेश जारी किया है। इनमें एक उप निरीक्षक 7 सहायक उप निरीक्षक, 26 प्रधान आरक्षक एवं एक आरक्षक शामिल हैं। जारी आदेशानुसार उप निरीक्षक लतेश सोरी को थाना आजाद चौक से थाना नेवरा, सहायक उपनिरीक्षक में एन के ठाकुर रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना सिविल लाइन, पैकूराम भगत रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना गोबरा नयापारा, ओमप्रकाश नाथ त्रिपाठी रक्षित आरक्षण केन््रद से थाना तेलीबांधा, शत्रुहन कौशल रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना सिविल लाइन, पैकू राम भगत रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना गोबरा नयापारा, ओमकार नाथ त्रिपाठी रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना तेलीबांधा, शत्रुहन कौशल रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना आजाद चौक , अमित अंदानी रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना देवेन्द्रनगर, कमल चंद्राकर रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना माना, घनश्याम सिंह रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना कोतवाली है। इसी प्रकारा प्रधान आरक्षकों में जीवन लाल परकर रक्षित आरक्षण केन््रद से थाना आमानाका, छगनलाल वर्मा रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना सिविल लाइन, संतोष सिंह रक्षित आरक्षण केन्द्र से टिकरापारा, ओमप्रकाश साहू थाना पुरानी बस्ती से रक्षित आरक्षण केन्द्र, घनश्याम द्विवेदी रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना विधानसभा, कैलाश दुबे रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना खेरारा, पवन कुमार सिन्हा रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना पंडरी, प्रफुल्ल राजपुत रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना तेलीबांधा, सुभान खान रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना सिविल लाइन, महावीर प्रसाद मिश्रा रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना देवेन्द्रनगर, रामानुज पांडेय रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना कोतवाली, भूपेन्द्र शुक्ला रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना गंज, देवेन्द्र शर्मा रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना मौदहापारा, मुखीराम रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना पुरानी बस्ती, दानीपुरी गोस्वामी रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना राजेन्द्रनगर, चुम्मन लाल रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना टिकरापारा, नीलकमल त्रिपाठी रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना रीडर, उप पुलिस अधीक्षक लाईन तथा आरक्षक कुलभूषण को रक्षित आरक्षण केन्द्र से थाना यातायात भेजा गया है।

फर्जी रजिस्ट्रेशन मामले में RTO बाबू गिरफ्तार


छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ के कोरबा में वाहनों का फर्जी रजिस्ट्रेशन करके लाखों रुपए गबन करने के मामले में पुलिस ने जिला परिवहन विभाग के एक बाबू को अरेस्ट किया है . जिला परिवहन विभाग से 10 वाहनों की फर्जी रजिस्ट्रेशन लाखों रुपए का गबन हुआ था. जानकारी के मुताबिक इस मामले की शिकायत पर जांच की गई थी. जिसमें विभाग में पदस्थ बाबू उमेश वनवासी की संलिप्तता सामने आई थी. मामले का खुलासा होने के बाद बाबू फरार हो गया था. इसके बाद से ही बालकोनगर पुलिस उसकी तलाश कर रही थी. इस बीच पुलिस ने गुप्त सुचना के आधार पर बाबू को बिलासपुर से गिरफ्तार कर लिया. आरोपी बाबू के खिलाफ धारा 409 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है

Monday, July 25, 2016

कलेक्टर कार्यालय में सूचना के अधिकार अधिनियम की उड़ रही धज्जियां

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समयसीमा में नहीं मिलती आवेदन की जानकारी
सुनवाई की जगह होती है पेशी

छिंदवाड़ा-आम जनमानस को समयसीमा में चाही गई जानकारी प्रदान करने और शासकीय कार्यों में पादर्शिता लाने की मंशा से शासन द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 अमल में लाया गया था लेकिन जिले के कलेक्टर कार्यालय में ही इस अधिनियम को मजाक बनाकर रख दिया गया है तो हम अन्य विभागों से क्या आस रख सकते है।
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के प्रावधानों के तहत कोई भी व्यक्ति किसी भी शासकीय संस्था से किसी भी प्रकार की जानकारी धारा 6(1) के आवेदन के तहत निर्धारित 30 दिवसों में सम्बंधित विभाग में नियुक्त लोकसूचना या सहायक लोकसूचना अधिकारी को आवेदन कर प्राप्त कर सकता है और निर्धारित समय अवधि में जानकारी न मिलने या अपूर्ण जानकारी मिलने पर धारा 19(1) के तहत सम्बंधित प्रथम अपीलीय अधिकारी को आवेदन कर सकता है नियमानुसार प्रथम अपीलीय अधिकारी को आवेदक एवं जिसके विरुद्ध अपील की गई है उसके समक्ष सुनवाई कर निर्धारित अधिकतम 45 दिवसों में अपील का निराकरण करना होता है।
        दुर्भाग्यवश सूचना के अधिकार अधिनियमों के प्रावधानों के तहत जिला कलेक्टर कार्यालय में कार्य न होकर इसे मजाक बनाकर अधिनियम का घोर उल्लंघन अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है।
         जिला कलेक्टर कार्यालय में जब किसी जानकारी को प्राप्त करने हेतु लोकसूचना अधिकारी को आवेदन दिया जाता है तो निर्धारित 30 दिवसों में कोई भी जानकारी आवेदक को उपलब्ध नहीं कराई जाती है जिससे व्यथित होकर जब आवेदक जिला कलेक्टर महोदय के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत करता है तो नियमानुसार एवं निर्धारित समय अवधि में न ही जिला कलेक्टर कार्यालय के अधिकारियों द्वारा आवेदक को सुनवाई की सूचना दी जाती है और न ही प्रथम अपीलीय अधिकारी जिला कलेक्टर महोदय के द्वारा सुनवाई की जाती है बल्कि इसके विपरीत जिला कलेक्टर कार्यालय में प्रथम अपील की सुनवाई की जगह अन्य प्रकरणों के निराकरण हेतु लगने बाले कलेक्टर कोर्ट के दौरान ही आवेदक की पेशी की जाती है और तारीख पर तारीख देकर उसे 10-12 महीने तक बुलाया जाता है जबकि सूचना के अधिकार अधिनियम में प्रथम अपील के निराकरण के सम्बन्ध में स्पष्ट उल्लेख है कि सम्बंधित अपीलीय अधिकारी द्वारा निर्धारित अधिकतम 45 दिवसों में आवेदक और अनावेदक की उपस्थिति में सुनवाई कर प्रथम अपील का निराकरण करना होता है।

          कलेक्टर कार्यालय के अतिरिक्त जिले के अधिकतर विभागों के प्रथम अपीलीय अधिकारी जिला कलेक्टर महोदय हैं इस कारण कलेक्टर कार्यालय एवं अन्य विभागों से जानकारी प्राप्त नहीं होने पर जब आवेदक प्रथम अपीलीय अधिकारी जिला कलेक्टर महोदय के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत करता है तो उसे सुनवाई की जगह लंबी पेशी का सामना करना पड़ता है जो सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के प्रावधानों के उल्लंघन के साथ ही साथ आवेदक के मौलिक अधिकारो का भी हनन है।
जिला कलेक्टर कार्यालय के सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रति इस उदासीन और लापरवाह रवैये से कैसे इस अधिनियम का लाभ आम जनमानस को मिल पायेगा और कैसे शासन की मंशा साकार हो पाएगी यह चिंतनीय प्रश्न है।
इस स्थिति में सुधार आना बहुत जरुरी है।

जिला सहकारी बैक के अध्यक्ष के समर्थन में कुंबी समाज आया

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बैतूल ।। वामनपोटे।।तीन दिन पहले जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक अध्यक्ष अशोक पांसे की निक्रियता को लेकर सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव लाया था ।अब इस मामले में राजनीति गरमाने लगी हैं ।सिद्धान्तों की बात करने वाली भाजपा में पदाधिकारियो के बीच फूट होने लगी हैं।यहीं वजह हैं की अब समाज भी पार्टी को अपना दम दिखाने से भी नही चूक रहा हैं।रविवार को  कुन्बी समाज ने मोर्चा खोल दिया है। भले ही समाज के लोग रविवार सुबह शिवाजी चौक के निकट आडिटोरियम का निर्माण शीघ्र शुरू करने का अनुरोध लेकर बैतूल विधायक के पास गए थे,। लेकिन  समाज के लोगों ने विधायक से सीसीबी अध्यक्ष अशोक  पांसे को हटाने पर समाज में रोष व्याप्त होने की बात कह डाली।
हालांकि बैतूल विधायक हेमन्त खण्डेलवाल को इस मामले में आश्वासन देना पड़ा है।

कुन्बी समाज के अचानक श्री पांसे के समर्थन में आने के बाद भाजपा में धर्मसंकट की स्थिति आ खड़ी हुई है। दरअसल कुंबी समाज के अशोक  पांसे कोअध्यक्ष पद से  हटाया जाता है तो भाजपा को चुनावों में गंभीर परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।

रविवार सुबह लगभग एक सैकड़ा कुन्बी समाज का प्रतिनिधि मंडल विधायक हेमंत खण्डेलवाल के निवास पर मिलने गया था। प्रतिनिधि मंडल वैसे शिवाजी चौक के पास लाहोरी शेड में बनने वाले आउट डोरियम निर्माण की लेट लतीफी को लेकर विधायक से मिलने गए थे। समाज के लोग निर्माण कार्य की लेट लतीफी से काफी नाराज थे उनका कहना था कि 50 लाख रूपए पूर्व मंत्री तुकोजीराव पंवार ने स्वीकृत कर दिए, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। विधायक ने समाज के लोगों को इस बारे में बताया कि राशि भी स्वीकृत हो चुकी है और शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने संबंधित विभाग से इस बारे में शीघ्र चर्चा करने का भी आश्वासन दिया।

चर्चाओं का बाजार गर्म
आडिटोरियम को लेकर एक सैकड़ा लोग विधायक से चर्चा कर ही रहे थे कि कुछ लोगों ने सीसीबी अध्यक्ष अशोक पांसे को हटाए जाने की चर्चा छेड़ दी। इस बीच कुछ वरिष्ठ सदस्यों ने विधायक श्री खण्डेलवाल से कहा कि श्री पांसे को समाज ने नहीं पार्टी ने अध्यक्ष बनवाया फिर अचानक हटाने से समाज में गलत संदेश जाएगा। समाज के लोगों का कहना था कि पार्टी की परंपरा के अनुसार ऐसा होना नहीं चाहिए। इस पर विधायक श्री खण्डेलवाल ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन भी दिया है। प्रतिनिधि मंडल में संगठन के जिलाध्यक्ष जीएस धोटे सहित  अवनीष पाटनकर, रवि माकोड़े, नरेश फाटे, भीम धोटे, बीआर कुबड़े, मनोज धोटे, पंकज साबले सहित करीब एक सैकड़ा लोग मौजूद थे।

भाजपा में हड़कम्प
विधायक श्री खण्डेलवाल के निवास पर कुन्बी समाज के प्रतिनिधि मंडल द्वारा अपनी नाराजगी जताने के बाद भाजपा में हड़कम्प मच गया है। पार्टी के 11 संचालकों ने पहले ही अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर संयुक्त संचालक कार्यालय होशंगाबाद भेज दिया। इसलिए अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होना तय माना जा रहा है। यदि कुन्बी समाज नाराज हुआ तो भी भाजपा की चिंता स्वभाविक है। वहीं संचालकों के नाराज होने के बाद भाजपा में बगावत के स्वर मुखर हो जाएंगे। यही वजह है कि अब कुन्बी समाज के श्री पांसे के समर्थन में आने के बाद भाजपा में हड़कम्प मच गया है। आने वाले दिनों में भाजपा संगठन सीसीबी बैंक अध्यक्ष को लेकर कड़ा रूख अख्तियार कर सकता है।
इधर भाजपा के जिला अध्यक्ष ने भी भाजपा भवन में सहकारी बैक के सभी सदस्यों को बैठालकर बातचीत की थी।

गुजरात दलित अत्याचार पर अजा व अजजा के की चुप्पी शर्मनाक!

गुजरात दलित अत्याचार पर अजा व अजजा के  की चुप्पी शर्मनाक! चुप्पी साधे बैठे पूर्व, वर्तमान एवं भावी जनप्रतिनिधियों से अगले चुनाव में HRD द्वारा जवाब तलब किया जाएगा।-डॉ.पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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अजा और अजजा वर्गों में शामिल वंचित जातियों के संवैधानिक, वैधानिक और प्रशासनिक हकों की रक्षण और प्रतिरक्षण के लिये संविधान में अनेक प्रावधान किये गये हैं। अजा एवं अजजा के लिये सुरक्षित निर्वाचित क्षेत्रों से निर्वाचित जनप्रतिनिधि इन सबके गारंटर की हैसियत से विधायिका में अजा एवं अजजा प्रतिनिधित्व करने को संवैधानिक रूप से बाध्य हैं।

गुजरात में दलितों के साथ गाय की हत्या के नाम पर सार्वजनिक रूप से जो वीभत्स और क्रूरतापूर्ण कुकृत्य किया गया, उस पर गुजरात और पड़ौसी राज्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राज्स्थान के पूर्व तथा वर्तमान विधायकों और सांसदों की चुप्पी शर्मनाक है।

इनकी चुप्पी ही वंचित वर्गों पर हो रहे अत्याचारों की बड़ी वजह है। अतः हक रक्षक दल (HRD) सामाजिक संगठन इन सभी से मांग करता है कि दलगत राजनीतिक कैद से बाहर निकलकर गुजरात दलित अत्याचार मामले पर आवाज उठायें। अन्यथा गुजरात का प्रयोग पड़ौसी राज्यों और देश के अन्य हिस्सों में भी दोहराया जा सकता है।

अतः चुप्पी साधे बैठे पूर्व, वर्तमान एवं भावी जनप्रतिनिधियों से सार्वजनिक रूप से आग्रह है कि यदि आज आप आवाज नहीं उठाएंगे तो आने वाले चुनावों के समय हक रक्षक दल आम जनता के माध्यम से आप से सार्वजनिक रूप से इस बारे जवाब पूछने और आपका विरोध करने में तनिक भी संकोच नहीं करेगा।

नोट : 🙏सभी मित्रों से निवेदन है कि इसे अजा एवं अजजा के सभी पूर्व, वर्तमान और दावेदार भावी जनप्रतिनिधियों को भेजकर उनकी जवाबदारी निर्धारित करने में सहयोग करें।

हमारा मकसद साफ़!
सभी के साथ इंसाफ!
सेवासुत डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
राष्ट्रीय प्रमुख-हक रक्षक दल (HRD) सामाजिक संगठन
25.07.2016, 09.24, 09875066111

पत्रकारिता की विश्वसनीयता पहली प्राथमिकता: सीतासरण शर्मा

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मध्य भारत वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन की बैठक


भोपाल। मध्य भारत वर्र्किंग जर्नलिस्ट यूनियन की शुक्रवार को स्वाराज भवन में पहली कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर के सभी प्रमुख मीडिया संस्थान के सदस्य शामिल हुए जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि पत्रकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और बीमा जैसी योजनाओं का लाभ मिले साथ ही जो पत्रकार अधिमान्यता के लिए सालों से परेशान हैं उन्हे सरकार द्वारा कैसे अधिमान्यता दिलाई जाय इन सभी विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में विधानसभा अध्यक्ष सीतासरण शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह ने भी हिस्सा लिया। पत्रकारों को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस वक्त पत्रकारों की विश्वनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं जिसे कायम रखना बड़ी चुनौती है उन्होंने कहा कि इस संगठन के माध्यम से उम्मीद है कि पत्रकारिता पर लोगों का विश्वास बढ़ेगा और लोग खबरों को गंभीरता से लेंगे। वहीं स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह ने भी पत्रकारों को संबोधित किया और उन्होने पत्रकारों की कार्यशैली और हि मत की तारीफ करते हुए कहा कि पुलिस और पत्रकार एक ही गाड़ी के दो पहिए की तरह होते हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मीडिया का काम लोगों को जागरुक करना और जानकारी पहुंचाना है जिसके लिए पत्रकार कभी पीछे नहीं हटता वहीं पुलिस भी पत्रकारों की तरह रात दिन काम करके सबकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है। संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कृष्णमोहन झा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि इस संगठन के माध्यम से पुराने पत्रकारों के साथ ही उभरते हुए पत्रकारों के लिए भी सुविधाएं मुहैया कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजधानी से लेकर प्रदेश के सभी जिलों में संगठन को मजबूत करने के लिए सदस्यता अभियान चलाया जाएगा ताकि सदस्य ज्यादा हों तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चत करने के लिए सरकार पर दबाव भी बनाने में मदद मिल सके। साथ ही उपाध्यक्ष झा ने सभी को विश्वास दिलाया कि  इस संगठन की नींव सभी पत्रकारों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना है जिसके लिए सभी सदस्य संकल्पित हैं। एकता समिति के उपाध्यक्ष एवं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त रमेश शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता के स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। लोग अपने स्वार्थों के लिए इसका उपयोग कर रहे है। इसमें पारदर्शिता की आवश्यकता है। आईएफडब्ल्यूजे के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कृष्णमोहन झा ने प्रांतीय संयोजक अवधेश भार्गव को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में आईएफडब्ल्यूजे में शामिल करने की घोषणा की। बैठक में राजेन्द्रा आगाल अध्यक्ष, अवधेश भार्गव प्रांतीय संयोजक, एनपी अग्रवाल राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, अशोक त्रिपाठी राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सचिन कासलीवाल राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित थे।

Sunday, July 24, 2016

BJP MLC टुन्ना पांडे अरेस्ट, ट्रेन में लड़की से छेड़छाड़ का आरोप

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हाजीपुर। बिहार में सीवान जिले के भारतीय जनता पार्टी के विधान पार्षद आदित्य कुमार उर्फ टुन्ना पांडे को एक नाबालिग के साथ कथित छेडख़ानी के आरोप में राजकीय रेल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। रेल पुलिस सूत्रों ने यहां बताया कि थाइलैंड के एक कारोबारी ने विधान पार्षद टुन्ना पांडे पर आरोप लगाया है कि जब वह अपनी पुत्री और पत्नी के साथ अप पूर्वांचल एक्सप्रेस से कोलकता से गोरखपुर जा रहे थे, तभी टुन्ना पांडे ने उनकी बच्ची के साथ छेडख़ानी की और जबरन बाथरूम ले जाने का प्रयास किया। 

सूत्रों ने बताया कि इस सिलसिले में हाजीपुर जीआरपी थाना में 354 ए और पास्को की धारा 11/12 के तहत विधान पार्षद के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है । पुलिस टुन्ना पांडे को गिरफ्तार कर पूछताछ कर रही है। उन्हें आज ही मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जा सकता है। शिकायत के मुताबिक, पांडे ने न सिर्फ महिला के साथ छेड़छाड़ की बल्कि अपशब्दों का प्रयोग भी किया। पीडि़त उस ट्रेन से गोरखपुर जा रही थी।

जानकारी के अनुसार ट्रेन के हाजीपुर आने के पहले सराय स्टेशन के पास टुन्ना पाण्डे ने बर्थ नंबर 46 पर सो रही 12 वर्षीया लड़की के साथ कथित छेडख़ानी की। लड़की का कहना है कि वह सो रही थी। वह अचानक हड़बड़ा कर उठी और चिल्लाई। उसने पिता को घटना के बारे में बताया। लड़की के पिता ने तुरंत ट्रेन की एस्कॉर्ट पार्टी को पूरे मामले की जानकारी दी।

इधर हाजीपुर जीआरपी थाने में हिरासत में लिए गए गए एमएलसी टुन्ना पांडे का कहना है कि वे मोबाइल चार्ज करने के लिए चार्जर लगा रहे थे और उन्होंने लाइट भी जलाई थी। बर्थ पर रखे बैग को हटाने में वह लड़की जग गई और चिल्लाने लगी। जबकि लड़की का आरोप है कि इस व्यक्ति ने उसे किस करने का प्रयास किया और बाथरूम में चलने के लिए बोला।

पत्रकार सुनील उपाध्याय को स्वास्थ्य लाभ, अस्पताल से डिस्चार्ज किया

*अपडेट - पत्रकार हमला -* toc news

पत्रकार सुनील उपाध्याय को स्वास्थ्य लाभ, अस्पताल से डिस्चार्ज किया, 15 दिन के बेड रेस्ट की सलाह...
आरोपित थाना प्रभारी दिनेश सिंह चौहान के खिलाफ जांच के आदेश जारी.

धामनोद में 22 जुलाई को भाजपा नेता रविराज वर्मा द्वारा जानलेवा हमले के शिकार हुए पत्रकार सुनील उपाध्याय के सतत 40 घन्टे चले उपचार के बाद आज उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। श्री उपाध्याय को डॉक्टरों ने 15 दिन बेड रेस्ट करने की सलाह दी हैं। उधर मामले में स्थानीय थाना प्रभारी दिनेश सिंह चौहान पर लगे रवि को संरक्षण दिए जाने के आरोपो के बाद चौहान के खिलाफ जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
      पुलिस अधीक्षक धार ने जानकारी देते हुए बताया कि पत्रकार पर जान लेवा हमला किये जाने की घटना प्रकाश में आने के बाद 22 जुलाई को रविराज वर्मा के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया था । जिसके बाद रवि  जमानत पर छूट गया था । 23 जुलाई को सेव जर्नलिज्म फाउंडेशन और धार जिला ग्रामीण पत्रकार संघ द्वारा (एसपी धार) ज्ञापन दिए जाने के बाद थाना प्रभारी चौहान के खिलाफ जांच के आदेश स्थानीय एसडीओपी को जारी किये गए हैं । जांच में दोषी पाए जाने पर चौहान के खिलाफ करवाई की जायेगी। जांच पूरी किये जाने की समय सीमा पूछे जाने पर श्री हिंगड़कर ने स्पष्ट कहा की उन्हें तय समय सीमा याद नही हैं । वे फ़िलहाल दफ्तर में नही हैं , इस सवाल का  जवाब वे दफ्तर पहुच कर दे पायेगे ।
पूर्व में आरोपी पर लगाई गई मामूली धाराओं में प्राणान्तक हमले की धाराएं जोड़े जाने के प्रश्न पर श्री हिंगड़कर ने मेडिकल रिपोर्ट अप्राप्त होने का तर्क दिया । उन्होंने कहा आगामी अनुसन्धान में तथ्यों के आधार पर धाराएं बड़ाई जा सकती हैं।
    इसी मामले में धार के एक विधायक से बातचीत किये जाने पर, विधायक ने घटना की निंदा करते हुए अपनी ही पार्टी के आरोपी नेता पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले को विधानसभा में उठाने की बात कही । विधायक ने कहा इस तरह की घटनाओं का पार्टी समर्थन नही करती। आरोपित नेता के खिलाफ कड़ी करवाई किये जाने के वे प्रयास करेंगे।
     

अवैध जुआ शराव एवं अपराधों के खिलाफ प्रदर्शन

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गंज बासौदा:- ब्लाक कांग्रेस कमेटी के  बैनर तले आज नेहरू चौक पर नगर में बढ़ते अपराधों के खिलाफ कांग्रेस ने धरना प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया  । विधायक निशंक जैन ने पुलिस प्रशासन पर नगर में अबैध शराव, हथियार, लकडी जुआ,  सट्टा और ब्राउन शूगर के काले कारोबार को संरक्षण देने का आरोप लगाया सांथ ही प्रदेश की भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा|  वहीं कांग्रेस नेता संतोष अहिरवार ने तहसीलदार पर आवेदनों की पावती न देने का आरोप लगाया ।कमलनाथ विग्रैड के प्रदेश अध्यक्ष  युवा नेता अमित मेहता ने आगामी धरना भोपाल मैं करने की बात कही .कई कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर जमकर आरोप लगाये इस अवसर पर बडी संख्या मे बासोदा विधान सभा से एवं  त्योंदा ग्यारसपुर क्षेत्र से भी  कांग्रेसी कार्यकर्ता धरना में शामिल हुए.कार्यक्रम मैं मुख्य रूप से  विधायक निशंक जैन,ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश मिश्रा. किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष बहादुर सिंह  दादा, राहुल ठाकुर,मोहमद अदनान, विदिशा से आये सुभाष वोहत, सौदान सिंह यादव, विकास शर्मा प्रदेश सचिव कांग्रेस,जितेन्द्र वाल्मीकि, रवि तिवारी, नरेन्द्र नामदेव, विष्णु प्रसाद शर्मा ,हरीश भावसार, वी डी शर्मा संतोष अहिरवार, मणि अहिरवार, कल्याण नागौरी, श्रीमती ममता नरवरिया, नारायणी कुशवाहा, मंजू  कुशवाहा, सुरेन्द्र  पस्तोर,पवन रिछारिया,ब्रजेश लोधी, संतोष पाल, विनोद जैन, योगेश यादव, रामबाबू आनंदपुर,राजेन्द्र सोलंकी, रणधीर रघुवंशी,अपूर्व जैन,प्रशांत यादव, एवं सैकड़ों की तादाद मैं कार्य कर्ता उपस्थित  रहे।विरोध के इस कार्यक्रम में कई खास कहलाने बाले चेहरे नदारद रहे।

रोज़ रात को सोती थी यह लड़की अजगर के साथ, फिर एक दिन हुआ कुछ ऐसा कि...

Toc News  Jul 24, 2016

जानवर और इन्सान के बीच प्यार और लगाव होना आम बात है। जानवरों को लोग घरों में पालते हैं। उनकी देखभाल करते हैं। कुछ लोग इंसानों से भी ज्यादा जानवरों को प्यार करते हैं और उनके साथ रहना पसंद करते हैं। कभी-कभी जानवरों को प्यार करना उनको घर में पालना इतना खतरनाक हो जाता है कि जान का खतरा भी बन जाता है। ऐसा कुछ एक महिला के साथ हुआ जिसको एक अजगर से काफी प्याार था, लेकिन इससे पहले उसके साथ कुछ बुरा होता डॉक्टर ने उसे आगाह कर दिया।
एक सच्चे साथी की चाहत हर किसी को होती है। मन में ऐसी ही चाहत लिए एक महिला ने अपने साथी के रुप में इंसान को नहीं बल्कि 7 फीट लंबे अजगर को चुना महिला अपने सांप को बहुत प्यार करती थी। वह उसके साथ रहती, खाती और यहां तक कि अपनी जिंदगी का हर पल जीती थी।

एक दिन अचानक अजगर थोड़ा सुस्त रहने लगा खाना-पीना छोड़ दिया। महिला को लगा शायद इसकी तबियत नहीं ठीक है क्योंकि अजगर ने दो-तीन दिनों से खाना नहीं खाया था।
अजगर को इस तरह खाते न देख महिला को चिंता होने लगी और वह अजगर को पशु चिकित्सक के पास ले गई। डॉक्टर ने महिला से पूछा कि क्या वह रोज इसके साथ सोती है। महिला ने बताया कि हां वह ऐसा ही करती है। डॉक्टर ने महिला के सामने एक ऐसी बात का खुलासा किया जिससे उसके पैरों तले की जमीन ही खिसक गयी।

जी हाँ, दरअसल लड़की ने डॉक्टर को बताया कि अजगर दो-तीन दिन से कुछ नहीं खा रहा है। और वह सोते समय लड़की के शरीर के चारों तरफ घेरा बना लेता है। इतना सुनकर डॉक्टर ने बताया कि यह कोई बीमारी नहीं है। बल्कि अजगर रोज़ रात अपने शरीर से लड़की के शरीर का आकार नाप रहा था ताकि वह लड़की को पूरा निगल पाए। यह सुनकर लड़की के पसीने छूट गए और उसने तुरंत ही अजगर से छुटकारा पा लिया।

जिला चिकित्सालय में छत गिरी,दो दर्जन से अधिक दब

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मलबे से आठ को निकाला,बारिश के कारण बचावकार्य में दिक्कतें

रतलाम। आधी रात के करीब हो रही तेज बारिश के दौरान जिला चिकित्सालय के मेटरनी
टी वार्ड से सर्जिकल वार्ड को जोडने वाले कारिडोर की छत अचानक धंस गई। छत ढहने से कारिडोर में सो रहे दो दर्जन से अधिक लोग मलबे में दब गए। इनमें से आठ को बाहर निकाले जाने की सूचना है। बाकी लोग अब भी मलबे में धंसे हुए है। कलेक्टर एसपी समेत तमाम प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद है,लेकिन बारिश के चलते बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही है। मलबे में दबे लोगों की स्थिति का फिलहाल कोई अंदाजा नहीं मिल पा रहा है।
रात करीब बारह बजे शहर में अचानक तेज बारिश शुरु हुई थी। इसी समय जिला अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड को सर्जिकल वार्ड
से जोडने वाले कारिडोर की छत अचानक गिर गई। कारिडोर में उस वक्त दो दर्जन से अधिक लोग सो रहे थे। छत गिरने से वहां सो रहे लोग मलबे के नीचे दब गए। देखते ही देखते अस्पताल में चीख पुकार का माहौल बन गया। शुरुआती दौर में तीन लोगों की मौत की सूचनाएं आई,लेकिन अब तक किसी मौत की पुष्टि नहीं हुई है। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मलबे में से आठ लोगों को घायलवस्था में बाहर निकाला गया है। बडी संख्या में लोग अब भी मलबे में धंसे हुए है। दुर्घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर व एसपी समेत प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पंहुच गए है। अस्पताल परिसर में अफरा तफरी का माहौल बना हुआ है। दुर्घटना के बाद बिजली गुल हो जाने से और बारिश के कारण बचाव कार्य व्यवस्थित ढंग से नहीं चल पा रहा था। समाचार लिखे जाने तक अस्पताल में मलबे से घायलों को निकालने की कोशिशें की जा रही थी।

पत्रकार शिवराज सिंह की बेटी की खुदकुशी के लिए सरकार की लापरवाही

पत्रकार शिवराज सिंह की  बेटी की खुदकुशी  के लिए सरकार की लापरवाही और मीडिया समूह की शोषण नीति जिम्मेदार

फिर किसी पत्रकार का परिजन खुदकुशी न करे इसके लिए पत्रकार आगे आएं, एकजुट हों
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भोपाल के पत्रकार शिवराज सिंह की प्रतिभावान बेटी ने पिता की आर्थिक तंगी से परेशान होकर आज खुदकुशी कर ली। वह आठवीं की छात्रा थी। इंडियन प्रेस फोरम के अध्यछ महेश दीक्षित ने इस झकझोर देने वाली दुखद घटना पर शोक जताया है।तथा कहा कि इसके लिए पूर्णत: शोषक मीडिया समूह और सरकार की लापरवाही दोषी है।  उन्होंने पत्रकार शिवराज को समुचित आर्थिक सहायता देने की राज्य सरकार से मांग की है। तथा पत्रकार साथियों से दुख की इस घड़ी में शिवराज के साथ खड़े होने का आग्रह किया है।
पत्रकार शिवराज सिंह भोपाल के कई अखबारों में काम कर चुके हैं। कुछ दिन पहले प्रबंधन की मनमानी के चलते उन्हे भोपाल के एक प्रमुख दैनिक समाचार पत्र से नौकरी से निकाल दिया गया था। इसके बाद से वे भयंकर आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे। स्कूल की टॉपर उनकी बेटी पिता की इस  तंग हालत से परेशान थी। वो पिता पर बोझ नहीं बनना चाहती थी, इसलिए उसने जान दे दी।

फोरम के अध्यछ श्री दीक्षित ने कहा कि ऐसे सैकड़ों काबिल पत्रकार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं और उनके बच्चे इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। वजह मीडिया मालिक उन्हें काम का पूरा दाम (वेतन) न देकर उनका शोषण कर रहे हैं। आज प्रदेश के कई मीडिया समूह पत्रकारों के साथ  यह रवैया अपनाए हुए हैं। उन्हें कई-कई महीने वेतन नहीं दिया जा रहा है। यदि पत्रकार कर्मी वेतन मांगने जाता है तो उसे मैनेजमेंट द्वारा अपमानित किया जाता है या फिर उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। जबकि मीडिया समूह खुद सरकार से समस्त सुविधाओं का लाभ से रहे हैं। दबाव बनाकर हर महीने लाखों के विग्यापन ऐंठ रहे हैं।

श्री दीछित ने कहा कि हालांकि सरकार ने पत्रकारों के हित में पत्रकार स्वास्थ्य बीमा और पत्रकार दुर्घटना जैसी योजनाएं लागू की हैं।पत्रकारों को इन योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है, लेकिन पत्रकारों के लिए बनाए गए मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार लागू नहीं करा पा रही है। अखबारों के दफ्तरों में मजीठिया वेजेज को लागू कराने और पत्रकारों को वेजेज के अनुसार वेतन मिल रहा है या नहीं इसकी निगरानी करने की जिम्मेदारी सरकार के श्रम विभाग की है। लेकिन लगता है श्रम विभाग ने इन निरंकुश हो चुके मीडिया समूहों के सामने घुटने टेक दिए हैं।
पत्रकार शिवराज की प्रतिभावान बेटी की आर्थिक तंगी में खुदकुशी, सरकार की लापरवाही और मीडिया समूहों की शोषण नीति का नतीजा है।

श्री दीछित ने कहा कि, फिर कोई पत्रकार की बेटी खुदकुशी न करे, इसके लिए
सरकार को चाहिए कि, वह ऐसे मीडिया समूहों पर कार्रवाई करे, जो मजीठिया वेजेज का लाभ अपने यहां काम करने वाले पत्रकार कर्मियों को नहीं दे रहे हैं। तथा जब तक मीडिया समूह अपने यहां कार्यरत पत्रकार कर्मियों को मजीठिया वेतनमान नहीं दे देते हैं, तब तक इन मीडिया समूहों को दी जाने वाली समुचित सरकारी सुविधाएं तथा सरकारी विग्यापन बंद कर देना चाहिए।

पुलिस अफसरों की सर्जरी

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भोपाल। प्रदेश में पुलिस के नए मुखिया ऋषि कुमार शुक्ला की ताजपोशी के बाद होने वाले बड़े पैमाने पर तबादलों में अभी कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा। इसकी वजह है पहले ईद का त्यौहार और फिर 15 अगस्त को लेकर की जाने वाली सुरक्षा की तैयारियां। फिलहाल उन्हीं अफसरों के फेरबदल किए जाएंगे, जिनका कार्यकाल एक ही स्थान पर तीन साल से ज्यादा हो गया है। मुख्यालय स्तर तथा इकाइयों में कुछ एडीजी के फेरबदल के साथ ही करीब एक दर्जन रेंज आईजी (एडीजी) और एसपी के फेरबदल किए जाएंगे। अगले सप्ताह तबादला सूची जारी होने की संभावना है।

चार साल वाले आईजी और एसपी बदले जाएंगे
इंदौर जोन के एडीजी विपिन माहेश्वरी तथा उज्जैन रेंज के एडीजी वी मधुकुमार की मुख्यालय वापसी होगी। दोनों अफसरों का कार्यकाल चार साल हो रहा है। वहीं आईजी से एडीजी के पदों पर पदोन्नत होने के बाद पदस्थ हैं। इसी तरह ग्वालियर आईजी आदर्श कटियार को करीब चार साल हो रहे हैं। उनका तबादला भी तय है।

भोपाल आईजी योगेश चौधरी, होशंगाबाद आईजी एसके ससंवाल भी हट सकते हैं। इधर पुलिस अधीक्षकों में भोपाल के दोनों एसपी अंशुमान सिंह, अरविंद सक्सेना का हटना तय है। उनका चार साल का कार्यकाल हो चुका है। अरविंद सक्सेना को होशंगाबाद और अंशुमान सिंह को रायसेन भेजा जा सकता है। रायसेन में पदस्थ एसपी दीपक वर्मा को अन्यत्र तो होशंगाबाद एसपी एपी सिंह को सागर भेजा जाना तय है। सागर एसपी सचिन अतुलकर को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इनके अलावा मंदसौर में पदस्थ एसपी मनोज शर्मा, धार एसपी राजेश हिंगणकर, अविनाश शर्मा एसपी रतलाम को लंबे कार्यकाल के कारण बदला जाना तय माना जा रहा है।

*यह अधिकारी हैं मैदानी पोस्टिंग के दावेदार*

रेंज आईजी के रिक्त होने वाले पदों पर जयदीप प्रसाद आईजी ईओडब्ल्यू, पंकज श्रीवास्तव आईजी प्रशासन, शाहिद अबसार आईजी प्रबंध, रविकुमार गुप्ता आईजी योजना तथा पवन श्रीवास्तव आईजी एपीटीसी इंदौर को पदस्थ किया जा सकता है। जयदीप प्रसाद को भोपाल में पदस्थ किया जा सकता है। वे यहां एसपी भी रहे हैं। पवन श्रीवास्तव को उज्जैन, पंकज श्रीवास्तव को इंदौर तथा शाहिद अबसार को ग्वालियर आईजी बनाया जा सकता है तो रविकुमार गुप्ता को होशंगाबाद भेजा जा सकता है।

*खाली पदों पर होनी है पदस्थापना*

एडीजी अनुराधा शंकर सिंह के जीआरपी से तबादले के बाद यहां रिक्त एडीजी की पोस्टिंग होना है। एडीजी एसडीईआरएफ का पद एडीजी एसके पांडे के निधन के बाद से रिक्त है तो डीजी रीना मित्रा के पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन में तबादले के बाद से एडीजी प्रशिक्षण का पद भी रिक्त है। एडीजी को-ऑपरेटिव फ्रॉड, लोक सेवा गारंटी एवं आरटीआई का पद तो एडीजी एमआर कृष्णा के चीफ विजीलेंस आफीसर सीपीडब्ल्यूडी दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद से सालों से रिक्त है।

*जांच एजेंसियों से हटेंगे*

 एडीजी लोकायुक्त पुलिस
संगठन में पदस्थ एडीजी अशोक अवस्थी और एसएम अफजल की मुख्यालय में प्रतिनियुक्ति से वापसी होगी। उनका कार्यकाल चार साल के करीब हो चुका है। इसी तरह ईओडब्ल्यू में पदस्थ एडीजी
विजय कटारिया की भी वापसी होगी। उन्हें वहां चार साल हो गए। इन अफसरों के स्थान पर दूसरे अफसरों को भेजा जाएगा।

बीमारी होती जा रही है “सेल्फी”

Present by - Toc News
मध्य प्रदेश में जबलपुर भेडाघाट के कारण भी प्रसिद्ध है ] इस बरसात में जिला प्रशासन को वहां सेल्फी लेने पर पाबंदी लगाने और और इसके क्रियान्वयन के लिए अतिरिक्त अमला लगाना पडा| सेल्फी का क्रेज दरअसल एक जानलेवा एडवेंचर साबित हो रहा है जहां मौज-मस्ती की चाह और कुछ नया कर गुजरने ख्वाहिश रखनेवाले (ज्यादातर युवाओं) को जान से हाथ धोना पड़ता है या अन्य दुर्घटना का शिकार होना पड़ता है। यह अजीब विडंबना है कि महज एक सेल्फी का क्रेज युवाओं की जिंदगी को लील रहा है। अब सेल्फी स्टिक के जरिए युवा इस लेकर ज्यादा क्रेजी हो उठे है। सेल्फी से जुड़ा एक्सपेरिमेंट दरअसल जानलेवा साबित हो रहा है लेकिन ज्यादातर युवा इसे नजरअंदाज कर रहे है जिससे भयावह स्वरूप हम सामने देख रहे है, जो चिंतित करनेवाला है।

सेल्फी स्मार्टफोन की तकनीक की देन है जिसमें उसमें लगे कैमरा की अहम भूमिका होती है। अगर स्मार्टफोन है तभी सेल्फी ली जा सकती है। भारत की आबादी 125 करोड़ को पार कर चुकी है लेकिन देश में मोबाइल की संख्या उसका पीछा करती हुई दिख रही है। देश में इस वक्त कुल 105.92 करोड़ मोबाइल यूजर्स है। ऐसा लगता है कि कुछ साल में देश की आबादी से ज्यादा मोबाइल यूजर्स की संख्या हो जाएगी। क्योंकि ज्यादातर लोग एक से ज्यादा मोबाइल रखने लगे हैं। देश में 103.42 करोड़ वाई-फाई उपभोक्ता है जो वाई-फाई नेटवर्क का इस्तेमाल करते है। लगभग 16 करोड़ लोग ब्रॉडबैंड के जरिए इंटरनेट का प्रयोग करते है। यह कुछ आंकड़े है जिनसे यह पता चलता है कि देश में मोबाइल,स्मार्टफोन और इंटरनेट का इस्तेमाल दिन-ब-दिन कितनी तेजी से बढ़ता चला जा रहा है।

94 मिलियन सेल्फी प्रतिदिन दुनिया में क्लिक होते हैं। सेल्फी यानी खुद की फोटो खींचना। भारत ही नहीं पूरे देश में इसके प्रति लोगों की दीवानगी बढ़ी है लेकिन युवाओं में इसका क्रेज सर चढ़कर बोलता है। युवाओं के अलावा शायद ही कोई ऐसा वर्ग होगा जो इसके क्रेज से अछूता हो। वर्ष 2013 में 'सेल्फी', ऑक्सफोर्ड वर्ड ऑफ द इयर बना जो इसके क्रेज की दास्तां बयां करता है। अगर देखा जाए तो इसका चलन पिछले तीन से चार साल में ज्यादा बढ़ा है। स्मार्टफोन कल्चर के दौर में इसे सबसे ज्यादा बढ़ावा मिला। क्योंकि सेल्फी लेना फ्रंट कैमरे से मुमकिन होता है। गूगल के सर्वे से पता चलता है कि स्मार्टफोन के इस दौर में आज के युवक-युवतियां जो पूरे दिन में रोजाना औसतन 11 घंटे अपने फोन पर बिताते हैं वे पूरे दिन में एक-दो नहीं बल्कि 14-14 सेल्फी लेते हैं| इसे मनोविकार की संज्ञा दी जा सकती है |

फेस बुक से साभार

भाई की सामने पड़ी थी लाश, किसी ने नहीं की मदद, तो ऐसे हो गए बहन के हाल

Represent by - Toc News
देखिए भाई की डेड बॉडी देखकर कैसे बदहवास हुई बहन...

घाटशिला(झारखंड)। यहां धालभूमगढ़ थाना क्षेत्र में एनएच-33 पर एक बाइक और ट्रक के बीच टक्कर हो गई। इसमें बाइक सवार की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जबकि बाइक पर बैठी उसकी बहन को हल्की चोटें आई। मदद के लिए वो आधे घंटे तक गुहार लगाती रही, पर कोई भी आगे नहीं आया। चीख-चीखकर लोगों को रोकने का प्रयास करती रही, पर कोई नहीं रुका। जब कोई मदद नहीं मिली तो वह अर्द्धविक्षिप्त-सी हरकत करने लगी। मौके पर जुटे लोगों पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। घटना गुरुवार की है। शुक्रवार को युवक का पोस्टमॉर्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया गया। ऐसे हुआ हादसा...

-मृतक की पहचान गौतम(22) के रूप में की गई है। हादसे में ट्रक का पहिया गौतम के सिर पर चढ़ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना के बाद शाॅर्ट सर्किट से बाइक में आग लग गई। इससे बाइक जल कर राख हो गई।

-सड़क पर दुर्घटना के बाद मदद के लिए गौतम की बहन आधे घंटे तक गुहार लगाती रही, पर कोई भी मदद को आगे नहीं आया।

-हर कोई थोड़ी देर रुक कर आगे बढ़ गया। घायल लड़की बीच सड़क पर हाथ जोड़कर ट्रक, बस, कार, बाइकवाले से मदद की गुहार लगाती रही।

-हर किसी से मोबाइल मांगती रही, ताकि परिजनों को सूचना दे सके। चीख-चीखकर लोगों को रोकने का प्रयास करती रही, पर कोई नहीं रुका।

लोगों ने मोबाइल तक नहीं दिया कहीं फोन करने को

- वो लगातार लोगों से गुहार लगाती रही कि यदि आप मदद नहीं कर रहे हैं तो अपना फोन दे दें ताकि वो किसी को बुला सके, लेकिन किसी ने अपना फोन उसे नहीं दिया।

-जब किसी ने नहीं सुनी, तो उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। उसके बाद उसने अपना आपा खो दिया। वहां आने वाले हर व्यक्ति को पत्थर मारने लगी।

-मोबाइल फोन से बात करते देख लोगों को गाली-गलौच करने लगी। उन्हें पत्थरों से मारने लगी। साथ ही चिल्ला-चिल्लाकर कह रही थी कि घंटों मदद मांगने के बाद भी कोई नहीं आया।


ससुराल से भाग आई तो भाई ने कपड़े उतार कर पीटा, लड़की ने बयां किया दर्द

Jul 24, 2016, // Toc News

रांची। दिल्ली से छुड़ाकर झारखंड की छह नाबालिग लड़कियों को रांची लाया गया है। ये सभी गुमला, साहेबगंज और चाईबासा जिले की हैं। ये सभी महिला ट्रैफिकिंग की शिकार होकर दिल्ली पहुंची थी। रांची आई साहेबगंज जिले की एक नाबालिग लड़की ने अपना दर्द मीडिया को बताया। लड़की के अनुसार, जब वह अपने ससुराल से भागकर अपने मायके आई तो उसके भाई ने उसके पूरे कपड़े उतार कर पीटा था। उसे बहुत टॉर्चर किया गया। ऐसी है इनकी दर्द भरी दास्तान...

- इन लड़कियों को रांची लाने के लिए भारतीय किसान संघ का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली गया था। वहीं से स्वर्णजयंती एक्सप्रेस से सभी गुरुवार को रांची पहुंचे।

- मौके पर झारखंड राज्य बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष शांति किंडो और संस्था के संजय कुमार मिश्रा उपस्थित थे।

- इनमें गुमला की एक लड़की ने बताया कि कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में नामांकन नहीं होने के बाद वह दलाल संग दिल्ली चली गई थी।

- वहीं, साहेबगंज के 16 साल की लड़की ने कहा कि 12 साल की उम्र में ही उसकी शादी कर दी गई थी। वहां से भागकर जब घर पहुंची तो घरवाले ने खूब पिटाई की। वह पढ़ना चाहती थी।

- कई लड़कियों की कहानी भी कमोबेश ऐसी ही थी। किसी को उसका दोस्त बहका कर ले गया तो किसी के हालत का फायदा उठाकर उन्हें या तो बेच दिया गया या जबरन गलत कामों में फंसा दिया गया।

- सफलता नहीं मिली तो दिल्ली चली गई। इन सभी लड़कियों को सीडब्ल्यूसी की सदस्य मीरा मिश्रा ने तत्काल प्रेमाश्रय नाम जगह में ठहरने के लिए भेजा है। इनके घरवालों से संपर्क किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पोस्ट पर नहीं होगी जेल, धारा 66A रद

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66A पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इसे अंसवैधानिक घोषित करते हुए रद कर दिया। न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि आईटी एक्ट की यह धारा संविधान के अनुच्छेद 19(1) A का उल्लंघन है, जोकि भारत के हर नागरिक को "भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार" देता है। कोर्ट ने कहा, धारा 66A अभिव्यक्ति की आजादी के मूल अधिकार का हनन है।
अदालत के आदेश के बाद अब फेसबुक, ट्विटर, लिंकड इन, व्हाट्स एप सरीखे सोशल मीडिया माध्यमों पर कोई भी पोस्ट डालने पर किसी की गिरफ्तारी नहीं होगी। इससे पहले धारा 66A के तहत पुलिस को ये अधिकार था कि वो इंटरनेट पर लिखी गई बात के आधार पर किसी को गिरफ्तार कर सकती थी। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में आईटी एक्ट की धारा 66A को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ता श्रेया सिंघल ने इस फैसले को बड़ी जीत बताते हुए कहा, सुप्रीम कोर्ट ने लोगों के भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को कायम रखा है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में कहा गया कि यह कानून अभिव्यक्ति की आज़ादी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है, इसलिए यह असंवैधानिक है। याचिकाओं में ये मांग भी की गई है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़े किसी भी मामले में मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना कोई गिरफ़्तारी नहीं होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने 16 मई 2013 को एक एडवाइजरी जारी करते हुए कहा था कि सोशल मीडिया पर कोई भी आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले व्यक्ति को बना किसी सीनियर अधिकारी जैसे कि आईजी या डीसीपी की अनुमति के बिना गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।
दूसरी तरफ सरकार की दलील थी कि इस कानून के दुरूपयोग को रोकने की कोशिश होनी चाहिए। इसे पूरी तरह निरस्त कर देना सही नहीं होगा। सरकार के मुताबिक इंटरनेट की दुनिया में तमाम ऐसे तत्व मौजूद हैं जो समाज के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। ऐसे में पुलिस को शरारती तत्वों की गिरफ़्तारी का अधिकार होना चाहिए।
अनुच्छेद 66A के तहत दूसरे को आपत्तिजनक लगने वाली कोई भी जानकारी कंप्यूटर या मोबाइल फ़ोन से भेजना दंडनीय अपराध है। सुप्रीम कोर्ट में दायर कुछ याचिकाओं में कहा गया है कि ये प्रावधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ हैं, जो हमारे संविधान के मुताबिक़ हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।

इस बहस के बीच सरकार ने अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा। सरकार ने अदालत से कहा कि भारत में साइबर क्षेत्र पर कुछ पाबंदियां होनी ज़रूरी हैं क्योंकि सोशल नेटवर्किंग साईट्स का इस्तेमाल करने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है।......
अमित कुमार शुक्ला
(अधिवक्ता )
उच्च न्यायालय दिल्ली

मनासा मंडी व्यापारी का आतंक, पत्रकार गुर्जर को दी फर्जी एफआईआर की धमकी

Toc news @ 24/07/2016
मनासा। गत रात्रि 7.30 बजे के लगभग एक ओवर लोड ट्रक क्रमांक R J02 GA2757 के द्वारा सांडिया रोड पर स्थित कार्यालय पर जहाँ मालवा की आवाज समाचार पत्र, अभय प्रहरी, मालवा नीमच मेल, दशपुर लाइव के समाचारों के अग्रेषण का कार्य किया जाता है कि विद्युत लाइन तोड़ दी गई। पत्रकार साथी द्वारा जब ट्रक रोककर बात की गई तो ड्राइवर ने माल मालिक खुद को मंडी व्यापारी कहने वाले प्रकाश पोरवाल जालिनेर को मोके पर बुलाया जिसने हर्जाना देने की बात कहने पर ट्रक को रवाना कर दिया गया। इसके कुछ समय पश्चात विद्युत कर्मचारियों के आने पर पत्रकार साथी राकेश गुर्जर ने जब प्रकाश पोरवाल से मो.नम्बर 9425440884 पर सम्पर्क किया तो उक्त व्यापारी पोरवाल हर्जाना देंने से मना करने लगा और धमकाते हुए पत्रकार साथियों पर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने और देख लेने को धमकी देने लगा। जिसके पश्चात पत्रकार साथी राकेश गुर्जर, एस एस यादव, दिपक शर्मा और मिश्रीलाल पाटीदार ने उक्त व्यापारी के खिलाफ मनासा थाना पहुंचकर आवेदन देते हुए सख्त कार्यवाही की मांग की। यह व्यापारी मंडी उपाध्यक्ष डॉ गोविन्द पोरवाल का भाई बताया जा रहा है।
यहाँ ज्ञात रहे मंडी व्यापारी मंडी से माल भरने के बाद मंडी के पीछे के इन रास्तों का उपयोग गाड़ियों को अपने गोदामो से ओवर लोड करने के कारनामे में करते रहते है। इसप्रकार के कई ओवर लोड वाहन प्रायः इस रास्ते पर गुजरते है, एक ओवर लोड ट्रक द्वारा पहले भी रात्रि में उक्त कार्यालय की विद्युत लाइन तोड़ दी गई थी साथ ही अन्य दुकानों पर भी रात्रि में लाइन टूटने और नुकसानी के मामले देखे गए है। इन अवैध ओवर लोड वाहनों से लोगो को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है साथ ही व्यापारियों द्वारा प्रशासन को भी चुना लगाया जाता है। प्रशासन इस और ध्यान देकर अवैध ओवर लोड वाहनों से राजस्व वसूली कर इन्हें दण्डित करे और आम जनता को इनके आतंक से मुक्त कराए। इस रास्ते पर स्कुल और आवाजाही को देखते हुए भविष्य में इस रास्ते पर किसी बड़ी अप्रिय घटना से भी इंकार नही किया जा सकता है।

में अभी किसी कार्यक्रम में हूँ और जहाँ तक मुझे पता है इस नाम का कोई मंडी व्यापारी हमारी मंडी में नही है।
बंशीलाल गुर्जर
मंडी अध्यक्ष मनासा।

पत्रकार यादव ने मुझे मामले से फोन पर अवगत कराया है। आवेदन थाने पर दिए जाने की बात कही है, में इसे दिखवाते हुए जल्द से जल्द मामले की जाँच करवाकर जाँच करवाता हूँ। पुरे मामले में निष्पक्ष कार्यवाही की जाएगी।
एस के यादव
थाना प्रभारी मनासा

धार पत्रकार पर हमला करने वाला बीजेपी नेता गिरफ्तार

Toc News
इंदौर - धार जिले के धामनोद मुख्यालय में रहरहनेवाले पत्रकार के हमलावर को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर ही लिया। पुलिस का दावा है कि उसे रात में ही पकड़ लिया है और अभी मारपीट का केस दर्ज किया है, मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद धाराएं बढाई जा सकती है। गौरतलब है कि कल खुद को स्थानीय बीजेपी नेता बताने वाले रविराज वर्मा ने स्वराज एक्सप्रेस के पत्रकार सुनील उपाध्यय पर  हमला कर दिया था। मामला आडियो वाइरल होने के बाद प्रकरण दर्ज होने से बोखलाया था वर्मा। पत्रकार सुनील उपाध्याय को फोन कर माँ-बहन की गालिया दी, जान से मारने की धमकी दी गई थी, जिसकी शिकायत करने पत्रकार शुक्रवार को थाने पहुंचा और एफआईआर करवाई थी। रिपोर्ट होने के कुछ ही देर बाद रविवर्मा और उसके कुछ साथियों द्वारा पत्रकार उपाध्याय पर जानलेवा आत्मघाती हमला कर दिया। इस घटना से धामनोद और धार ही नहीं बल्कि इंदौर के पत्रकारों में भी खासा रोष था। वे कड़ी कार्रवाई की मांग पर अडे हैं। धामनोद के पत्रकारों का भी कहना है कि गुंडे का जुलूस नही निकाला तो वे भूख हड़ताल करेेंगे।

एक्सीडेंट में घायल माँ की बेटे के सामने तड़प-तड़पकर मौत

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इंदौर -  रात को एक सड़क हादसा हुआ, जिसमें मां-बेटे घायल हो गए। मां की हालत गंभीर थी। बेटा मदद के लिए गुहार लगाता रहा, लेकिन समय पर न तो एंबुलेंस पहुंची और न कोई अन्य मददगार। कुछ लोग वहां खड़े भी थे, जो तमाशबीन बने रहे। मां को इलाज के लिए बेटा अस्पताल पहुंचाता उसके पहले ही मां ने तड़प-तड़प कर जान दे दी। बेटे का आरोप है कि मदद सही समय पर मिलती और मां अस्पताल पहुंचती तो शायद उसकी दर्दनाक मौत नही होती। घटना की जानकारी मिलते ही जब मीडियाकर्मी और पुलिस वाले भी पहुंचे तो परिजन उन पर जमकर बरसे। पुलिस के अनुसार घटना नेमावर रोड पर शुक्रवार रात हुई। दरअसल नेमावर रोड पर बाईक पर जा रहे मां और बेटे को अज्ञात चार पहिया वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे मे मां को गंभीर चोटे आईं और काफी देर तक मां की मदद के लिए बेटा चींखता रहा, लेकिन तमाशबीन बनी रही जनता देखती रही। घटना के बाद 108 एम्बूलेंस को भी मदद के लिए फोन लगाया, लेकिन किसी ने समय पर मदद नही की। अस्पताल पहुंचने के पहले ही मां कौशल्या बाई (40) पति कृष्णा गोयल निवासी श्री राम नगर पालदा की मौत हो गई। तो बेटे का गुस्सा फूट पड़ा। वह चींखता रहा चिल्लाता रहा और जिम्मेदारों को कोसने के बाद मां की लाश से लिपट-लिपटकर रोता रहा।

Saturday, July 23, 2016

आइसना ने दिया फर्जी खोजी पत्रकार के खिलाफ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन

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नीमच। देश के पत्रकारो का सबसे बड़ा संघठन *आल इण्डिया स्माल न्यूज़ पेपर्स एसोसिएशन*(आइसना)ने आज पुलिस अधीक्षक मनोजसिंह को एक  ज्ञापन दिया जिसमें अज्ञात खोजी पत्रकार के खिलाफ सख्त कारवाही करने के विषय में दिनाक 7.7.2016 को एक खोजी पत्रकार द्वारा हमारे नीमच के वरिष्ट पत्रकार एवं आल इण्डिया स्माल न्यूज़ पेपर्स एसोसिएशन के प्रदेश सदस्य तथा मालवा की आवाज के संपादक अभय भारद्वाज के नाम से एक फर्जी आवेदन पुलिस अधीक्षक के यहाँ दिया गया था एवं उपरोक्त आवेदन की जाँच *जावद के अनुविभागीय अधिकारी* द्वारा की जा रही थी।उनके द्वारा दिनांक 22.07.2016 को जब संपादक अभय भारद्वाज को फ़ोन पर सुचना देकर उक्त मामले से अवगत कराया तब पता चला की आवेदन पर केवल *अभय* नाम से हस्ताक्षर किये हुए है, जो की *अभय भारद्वाज* के नहीं हे एवं उक्त आवेदन से *अभय भारद्वाज का किसी प्रकार से कोई लेना-देना नहीं हे* उक्त मामले की ऑल इंडिया स्माल न्यूज़ पेपर्स एसोसिएशन,नीमच ने घोर निंदा करते हुवे आज पुलिस अधीक्षक के समक्ष ज्ञापन सौपा।

जिस पर पुलिस अधीक्षक नीमच ने उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया इस अवसर पर आइसना संरक्षक भगत वर्मा,अध्यक्ष हरिमोहन योगी,महासचिव अविनाश जाजपूरा,उपाध्यक्ष हेमन्त गुप्ता,कोषाध्यक्ष नरेंद्र गेहलोत,मिडिया प्रभारी गोपाल मेहरा,संघठन मंत्री गोपाल यादव,एस.एस यादव,मिश्रीलाल पाटीदार,राकेश गुजर,मधुसूदन शर्मा,नंदकिशोर समीर,प्रदीप कुमार सगर,रवि माली,दिग्विजयसिंह,विजय गेहलोत,महेश गुप्ता,जुगलकिशोर राठौर सहित कई पत्रकार साथी उपस्थित रहे।

आइसना करेगी गृहमंत्री का घेराव...

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श्री अवधेश भार्गव,
प्रांतीय अध्यक्ष, आइसना 
धार जिले के धामनोद संवाददाता (स्वनराज एक्सेप्रैस न्यूंज चैनल) सुनील उपाध्या य पर स्थादनीय भाजपा नेता रविराज वर्मा ने अपने साथियों के साथ मिलकर जानलेवा हमला किया। इसके पूर्व सुनील उपाध्यािय को रविराज वर्मा ने फोन पर अश्लीनल गालियां देकर जान से मारने, हाथ पैर तोडने की धमकी दी थी। जिसे सुनील उपाध्या य ने रिकार्ड किया था। सुनील उपाध्यासय ने धामनोद थाने में जब शिकायत की तो थाना प्रभारी दिनेश सिंह चौहान ने एफआईआर करने से साफ मना कर दिया। जिस पर स्थाथनीय पत्रकारों ने धार पुलिस कप्ताेन राजेश हिंगणकर से शिकायत की।

तब जाकर एफआईआर दर्ज की गई। जिसमें 294,506 भारतीय दंड विधान के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया। जबकि फोन पर धमकाने की धारा 507 नहीं लगाई गई। जब सुनील उपाध्याुय एफआईआर दर्ज कराके जा रहे थे, तभी टीआई दिनेश चौहान ने भाजपा नेता रविराज वर्मा को उसके विरूद्ध सुनील उपाध्याेय द्वारा एफआईआर करवाने की खबर दे दी गई। गुस्से  में तमतमाए भाजपा नेता रविराज वर्मा ने रास्ते  में ही सुनील उपाध्याीय को रोककर अपने साथियों के साथ जानलेवा हमला कर दिया। सुनील उपाध्याेय को स्थासनीय अस्पगताल ले जाया गया जहां से प्रीएमएलसी बनाकर थाने को सूचित किया गया। सुनील को सिर में व शरीर के अन्यं भागों में काफी गंभीर चोटें हैं। स्थिति काफी नाजुक थी और डॉक्टोरों ने उन्हेंं इंदौर के एमवाय हास्पिटल रेफर कर दिया। जहां वो गंभीर हालत में भर्ती हैं।

 प्रीएमएलसी होने के बावजूद और हालात गंभीर होने के बावजूद टीआई दिनेश सिंह चौहान ने साधारण धाराओं 506, 294, 323 के अंतर्गत फिर एक मुकदमा दर्ज कर भाजपा नेता को दोनों प्रकरणों में जमानत दे दी। आज 23 जुलाई 2016 को धार एसपी राजेश हिंगणकर को आइसना के प्रदेश अध्य क्ष श्री अवधेश भार्गव द्वारा फोन पर चर्चा कर सुनील की स्थिति एवं प्रकरण की गंभीरता के बारे में अवगत कराया। क्योंाकी यह जानलेवा एवं सुनियोजित हमला था अत भादवि की धारा 307 एवं 120बी के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई। एसपी ने कहा की एमएलसी रिपोर्ट मिलने के बाद धाराएं बडा दी जाएगी। किंतु टीआई के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई से इं‍कार किया। जबकि इस झगडे और हमले की वजह ही टीआई दिनेश चौहान और रविराज वर्मा की मिलीभगत की खबर सुनील उपाध्याेय ने चैनल में भेजी थी।

श्री अवधेश भार्गव ने प्रशासन एवं गृहमंत्री से मांग की, कि यदि 30 जुलाई तक धामनौद टीआई दिनेश सिंह  चौहान को सस्पेंरड नहीं किया गया और मुकदमें को धारा 307 में परिवर्तित नहीं किया गया तो भोपाल में गृहमंत्री और धार में एसपी का आइसना के मध्यमप्रदेश के कौने कौने से पत्रकार साथी घेराव करेंगे।  श्री भार्गव ने आगे कहा की पत्रकारों पर हमले की घटनाएं उन पर लचर कार्रवाई पुलिस की मिलीभगत और सुस्तीभ के कारण ही होती है। उन्होमनें पुलिस प्रशासन को  चेतावनी दी है कि वो मालिक बनकर नहीं जनता का सेवक बनकर कार्य करें।

आइसना प्रदेश महासचिव विनय डेविड ने प्रदेश के पत्रकारों को कमरकस आंदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया, वक्त पर सुनवाई नही किये जाने पर पत्रकारों को आदोलन की राह पकडनी होगी

'कबाली' की कमाई से हिल गया बॉक्स अॉफिस !

Jul 23, 2016, Toc News

सुपरस्टार

रजनीकांत

की फिल्म 'कबाली' ने रिलीज के पहले दिन 40 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है. 22 जुलाई को रिलीज हुई इस फिल्म ने महज एक दिन में 40 करोड़ रुपये की कलेक्शन दर्ज करवाई है. खास बात यह कि इस फिल्म ने रिलीज के पहले ही दिन एक रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज करवा लिया है.
रजनीकांत स्टारर फिल्म

'कबाली'

ने आमिर खान की फिल्म 'पीके' और सलमान खान की फिल्म
'सुल्तान'

के यूएस में बनाए गए रिकॉर्ड को तोड़ दिया है।
क्योंकि आमिर की 'पीके' फिल्म ने यूएस में ओपनिंग डे पर 1,418,817 डॉलर की कमाई थी और सलमान की हालिया रिलीज 'सुल्तान' की ओपनिंग डे कलेक्शन 784,194 डॉलर रही थी।

और 'कबाली' ने इन दोनों फिल्मों की कमाई के इस रिकॉर्ड को तोड़ते हुए यूएस में प्रीमियर शो पर 1,922,995 डॉलर का कलेक्शन कि‍या है। यानी फिल्म 2 मीलियन डॉलर रुपये के आंकड़े के करीब है. फिल्म की इस कलेक्शन के बारे में फिल्म ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने ट्वीट कर जानकारी दी है।

'कबाली' की कमाई को लेकर यह अनुमान भी लगाया जा रहा है कि फिल्म रिलीज के पहले तीन दिनों में ही दुनियाभर में 170 करोड़ रुपये की कमाई दर्ज करवा सकती है।

सीएम रमन सिंह के आवास पर युवक ने कि आत्मदाह की कोशिश

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गुरुवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी में सीएम रमन सिंह के आवास में आयोजित मुख्यमंत्री जनदर्शन कार्यक्रम में एक युवक ने आत्मदाह की कोशिश की। युवक ने अपने ऊपर मिट्टी तेल डालकर आग लगा लिया। जिससे वह बुरी तरह जल गया।
जनदर्शन कार्यक्रम शुरू हुआ तो भीड़ में बैठे बिरगांव निवासी योगेश कुमार साहू पिता निषाद राम साहू यहां फरियाद सुनाने आया था। बताया जा रहा है कि योगेश सरकारी नौकरी नहीं मिलने से परेशान था।

राज्य में बह रही भ्रष्टाचार की गंगोत्री ?

अवधेश पुरोहित @ Toc News
भोपाल। राज्य सरकार के मुखिया शिवराज सिंह और उनके मंत्रिमण्डल के सदस्य भले ही राज्य को जीरा टालरेंस का दावा करते हों तो वहीं यह सरकार भय, भूख और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने के वायदे पर सत्ता में काबिज हुई हो, लेकिन यदि उमा भारती और बाबूलाल गौर के शासनकाल को छोड़ दिया जाए तो राज्य की सत्ता की कुर्सी पर शिवराज सिंह के विराजते ही राज्य में जिस तरह से मंत्रियों, अधिकारियों, सत्ता के दलालों और ठेकेदारों का जो रैकेट सक्रिय हुआ जिसकी चपेट में शायद ही ऐसी कोई सरकारी योजना हो जिसमें फर्जीवाड़ा न हुआ हो और ऐसा भी नहीं इस फर्जीवाड़े के चलते लोगों ने सरकारी योजनाओं को चूना लगाकर अपनी तिजोरी न भरी हो फिर चाहे वह प्रदेश के इतिहास के शिवराज सिंह के कार्यकाल में हुआ व्यापमं का भ्रष्टाचार हो या डीमेट या कृषकों के नाम पर आयेदिन सरकारी योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार की स्थिति यह है कि उसके चलते राज्य की खेती किसानी तो चौपट हो ही रही है

तो वहीं किसान बर्बादी के रास्ते पर पहुंचकर इस धंधे को छोडऩे का मन बना रहा है और ऐसे में किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी खेती किसानी जो कि पूरी तरह से सरकारी अधिकारियों के संरक्षण में की जा रही है उसके हर होने वाले उत्पादन की हजारों लाखों रुपये की बिक्री दिखाकर पता नहीं शिवराज सिंह चौहान क्या संदेश दे रहे हैं या फिर यूं कहें कि जैसा कि खेती किसानी की आय का सहारा लेकर लोग ब्लैक मनी को व्हाइट करने का जो सिलसिला अपनाते हैं उसी रास्ते पर चलकर शिवराज सिंह भी अपनी काली कमाई खेती में आय दिखाकर करने का काम कर रहे हैं,

ऐसी आम जनों में चर्चा है। कुल मिलाकर भ्रष्टाचार की जड़ें इस राज्य में ऊपर से नीचे तक इस तरह फैल गई हंै कि जिसके चलते न तो राज्य में किसी गरीब की सुनवाई है और न ही उसकी बिना चढ़ोत्री के आगे फाइल खिसकती नजर आ रही है, जिसका जीता-जागता उदाहरण है राज्यभर में होनेवाली जनसुनवाई और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में आने वाली शिकायतें इन शिकायतों और जनसुनवाई में बढ़ रही शिकायतें इस बात का सुबूत हैं कि राज्य में सत्ता में बैठे लोगों के लाख यह घोषणा करने कि प्रदेश जीरो टालरेंस की दिशा में आगे बढ़ रहा है की पोल खोलती नजर आ रही हैं लेकिन इसके बावजूद भी हमारे राज्य के शासक प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त करने का दावा करने से नहीं थक रहे हैं,

राज्य में आयेदिन रिश्वत लेते पकड़े जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों की घटनायें भी इस बात का सबूत हैं कि राज्य में बिना लक्ष्मी दर्शन के कोई काम लोगों के नहीं हो रहे। इसके पीछे का कारण लोग बताते हैं कि जब पटवारी से लेकर कलेक्टर तक की पदस्थापनायें बिना सत्ता की देवी को चढ़ोत्री चढ़ाए नहीं की जाती हैं तो फिर ऐसी स्थिति में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अपने बीवी के जेवर या जमीन जायदाद बेचकर तो सत्ता की देवी को चढ़ोत्री नहीं चढ़ाएगा वह तो इस चढ़ोत्री की वसूली के लिए जनता को ही माध्यम बनाएगा, यही स्थिति है कि राज्य में आज चहुंओर भ्रष्टाचार का बोलबाला है और इस बोलाबाला के चलते चाहे प्रदेश की आधी आबादी को दिये जाने वाला खाद्यान्न हो या फिर नन्हें मुन्ने बच्चों के कुपोषण होने का मामला हो या फिर गर्भवती महिलाओं के पोषण आहार का मामला हो,

इन सबमें डकैती डालकर राज्य के अधिकारी सत्ता की देवी को तो चढ़ोत्री चढ़ाने में लगे हुए हैं तो वहीं अपनी तिजोरी भरने का काम कर रहे हैं, जहां तक राज्य में अति कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाले पोषण आहार का मामला हो, तो इस मामले में सीधे राज्य के पोषण आहार बनाने वाली कम्पनियां, अधिकारी, पत्रकार और मुख्यमंत्री के चहेते आईएएस अधिकारी इस काम में वर्षों से लगे हुए हैं तभी तो राज्य में कुपोषित बच्चों के कुपोषण तो ठीक नहीं हो पाया लेकिन हाँ यह जरूर है कि मुख्यमंत्री के आस पास रहने वाले आईएएस अधिकारी जो कि एमीएग्रो में एमडी के रूप में पदस्थ रहे हैं वह जरूर पोषित हो गये हैं।

राज्य में अकेले कुपोषण आहार में डाका डालने का काम ही नहीं बल्कि ऐसे कई विभाग हैं जिनमें हितग्राहियों के लिये चलाई जा रही तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं में गड़बड़झाला और कागजी घोड़े दौड़ाकर जिस तरह से फर्जीवाड़ा कर सरकारी रकम में डकैती डालने का काम मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द रहने वाले नेताओं और आईएएस अधिकारियों के संरक्षण में धड़ल्ले से चल रहा है ऐसा नहीं कि यह सब नि:स्वार्थ भावना से हो रहा है

इसमें भी कुछ न कुछ लक्ष्मी दर्शन का खेल तो है ही, कुल मिलाकर मुख्यमंत्री के चहेते आईएएस अधिकारियों के संरक्षण में जिस तरह से भ्रष्टाचार दिन-दूना रात चौगुना राज्य में सुरसा की तरह पनप रहा है जिसके चलते सरकारी योजनाओं में डाक डालने और फर्जी आंकड़ेबाजी का खेल भी जोरों से जारी है, फिर चाहे वह कुपोषण आहार का मामला हो या फिर जल संसाधन विभाग का, जल संसाधवन विभाग में भजकलदारम के खेल के चलते भ्रष्टाचार के आरोपी एएनसी चौबे को पांचवीं बार संविदा नियुक्ति मिलना भी इस बात का प्रमाण है कि राज्य में भजकलदारम और लक्ष्मी दर्शन का खेल प्राथमिकता से जारी है और इसी खेल के चलते जहां भ्रष्टाचार चहुंओर पनप रहा है इसके बावजूद भी सरकार का यह जीरो टालरेंस का दावा एक जुमला मात्र बनकर रह गया है।

पत्रकार बीमा योजना के आवेदन 5 अगस्त तक जमा करायें

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पत्रकारों का 2 लाख रू. का स्वास्थ्य बीमा व 5 लाख रू. का होगा दुर्घटना बीमा 

भोपाल 22 जुलाई, 2016 - राज्य शासन द्वारा पत्रकारों के लिये मध्यप्रदेश संचार प्रतिनिधि स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना मंजूर की गयी है। योजना में संचार प्रतिनिधि का व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा 2 लाख और दुर्घटना बीमा 5 लाख रुपये का होगा। योजना में 21 से 70 वर्ष उम्र के संचार प्रतिनिधि पात्र होंगे। बीमा कम्पनी के चिन्हित अस्पतालों में 2 लाख तक की चिकित्सा की केशलेस व्यवस्था होगी। इसके लिये पत्रकारों को एक कार्ड दिया जायेगा। अन्य अस्पतालों में इलाज पर प्रतिपूर्ति की व्यवस्था रहेगी। संचार प्रतिनिधियों के लिये स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा योजना के आवेदन-पत्र आगामी 5 अगस्त तक लिये जा सकेंगे। जिन पत्रकारों ने गत वर्ष बीमा कराया था , उनका नवीनीकरण किया जाना है तथा जो पत्रकार गत वर्ष इस योजना में शामिल नही हो सके थे, उनका नए सिरे से बीमा कराया जा सकता है। बीमित प्रतिनिधि को नामिनी भी घोषित करना होगा। दुर्घटना की स्थिति पर 7 दिवस के अंदर बीमा कम्पनी के जिला कार्यालय को सूचित करना जरूरी होगा। प्रीमियम राशि का ड्राफ्ट यूनाइटेड इण्डिया इंश्योरेंश कम्पनी लिमिटेड के नाम से बनेगा।

*कौन कर सकता है आवेदन*

बीमा योजना में संचार प्रतिनिधि के रूप में किसी भी अशासकीय समाचार एजेंसी, टेलीविजन चेनल, नेट मीडिया, समाचार पोर्टल आदि का प्रतिनिधित्व करने वाला पत्रकार, संवाददाता, फोटोग्राफर और केमरामेन शामिल होंगे। मध्यप्रदेश में निवास करने वाले तथा मध्यप्रदेश में ही कार्य करने वाले संचार प्रतिनिधि योजना में शामिल होंगे। बीमा यूनाइटेड इण्डिया इंश्योरेंस कम्पनी से करवाया जायेगा। बीमा की अवधि एक वर्ष की होगी। जनसंपर्क संचालनालय द्वारा अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार इसके पात्र होंगे। योजना में शामिल होने के लिये गैर-अधिमान्य श्रमजीवी पत्रकारों को पी.एफ. फण्ड अथवा टेक्स कटौती का फार्म नम्बर-16 देना जरूरी होगा। यह योजना सीधे बीमा कार्यालय से क्रियान्वित होगी। इसमें बीमा तिथि से पहले की सभी बीमारी कवर होंगी।

*कैसे करें आवेदन*

पत्रकार इंश्योरेंस कम्पनी की वेबसाइट www-mpindiaonline-com@mpgovt@Home-aspx  अथवा जनसम्पर्क विभाग की वेबसाइट mpinfo-org से आवेदन-पत्र डाउनलोड कर इसे भरने के बाद यूनाइटेड इण्डिया इंश्योरेंस कम्पनी डिवीजनल ऑफिस-II 153, गुरु आर्केड, फर्स्ट फ्लोर, जोन-1, एम.पी. नगर, भोपाल, फोन नं. 0755-2555338, 9425015735 अथवा जनसंपर्क संचालनालय की अधिमान्यता शाखा में जमा कर सकते हैं। 

*कितना प्रीमियम जमा कराना होगा* 

 साठ वर्ष तक की आयु के पत्रकारों के लिये निर्धारित वार्षिक प्रीमियम का 75 प्रतिशत और 61 से 70 वर्ष आयु के पत्रकारों के लिये 85 प्रतिशत अंशदान जनसंपर्क संचालनालय द्वारा दिया जायेगा। शेष राशि संबंधित संचार प्रतिनिधि द्वारा जमा की जायेगी। शेष राशि 25 अथवा 15 प्रतिशत संचार प्रतिनिधि द्वारा बीमा कम्पनी द्वारा निर्धारित कार्यालय में जमा करवाने के बाद ही अंशदान की राशि जनसंपर्क संचालनालय द्वारा जमा करवायी जायेगी। पति-पत्नी अथवा बच्चों को अतिरिक्त 10 प्रतिशत निर्धारित प्रीमियम देने पर बीमा योजना में शामिल किया जा सकता है। जनसम्पर्क विभाग द्वारा जारी प्रीमियम तालिका के अनुसार 21 से 35 वर्ष के पत्रकार का स्वयं का बीमा मात्र 829 रूपये का प्रीमियम जमा कराना होगा। पति पत्नि दोनों का बीमा 1168 रूपये में, पति पत्नि व 1 बच्चे के लिए 1507 रूपये , पति पत्नि व 2 बच्चे के लिए 1845 रूपये, पति पत्नि व 3 बच्चे के लिए 2184 रूपये जमा कराने होंगे। इसी तरह 36 से 45 वर्ष के पत्रकार का स्वयं का बीमा मात्र 981 रूपये का प्रीमियम जमा कराना होगा। पति पत्नि दोनों का बीमा 1390 रूपये में, पति पत्नि व 1 बच्चे के लिए 1798 रूपये , पति पत्नि व 2 बच्चे के लिए 2207 रूपये, पति पत्नि व 3 बच्चे के लिए 2615 रूपये जमा कराने होंगे। इसी प्रकार 46 से 55 वर्ष के पत्रकार का स्वयं का बीमा मात्र 1454 रूपये का प्रीमियम जमा कराना होगा। पति पत्नि दोनों का बीमा 2078 रूपये में, पति पत्नि व 1 बच्चे के लिए 2701 रूपये , पति पत्नि व 2 बच्चे के लिए 3324 रूपये, पति पत्नि व 3 बच्चे के लिए 3948 रूपये जमा कराने होंगे। जबकि 56 से 60 वर्ष के पत्रकार का स्वयं का बीमा मात्र 1952 रूपये का प्रीमियम जमा कराना होगा। जबकि पति पत्नि दोनों का बीमा 2802 रूपये में, पति पत्नि व 1 बच्चे के लिए 3653 रूपये , पति पत्नि व 2 बच्चे के लिए 4503 रूपये, पति पत्नि व 3 बच्चे के लिए 5354 रूपये जमा कराने होंगे। इसके अलावा 61 से 70 वर्ष के पत्रकार का स्वयं का बीमा मात्र 1575 रूपये का प्रीमियम जमा कराना होगा। जबकि पति पत्नि दोनों का बीमा 2732 रूपये में किया जायेगा। 

किन्नर आयोग के लिए आंदोलन करना पड़े तो भी नहीं हिचकेंगेः लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी

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भोपाल 18 जुलाई 2016। माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद समूचे हिंदुस्तान में किन्नरों को मुख्यधारा में शामिल करने का अभियान शुरु हो गया है। ग्यारह राज्यों की सरकारों ने किन्नर आयोग का गठन करके किन्नरों को समाज की मुख्य धारा में शामिल करने लायक प्रयास करने की शुरुआत कर दी है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी किन्नर आयोग के गठन की घोषणा की है। इसके लिए किन्नरों का एक प्रतिनिधि मंडल जल्दी ही मुख्यमंत्री महोदय से भेंट करेगा और उनसे किन्नर आयोग गठित करने का अनुरोध करेगा। मुख्यमंत्री को यदि फैसला लेने में कोई कठिनाई आ रही हो तो इसके लिए किन्नर समुदाय पूरे प्रदेश में प्रदर्शन करने और शक्ति प्रदर्शन करने से भी पीछे नहीं हटेगा। रविवार को श्यामला हिल्स भोपाल स्थित मानस भवन में आयोजित अपने सम्मान समारोह और सार्वजनिक अभिनंदन में प्रथम किन्नर महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने कहा कि किन्नरों की खोई अस्मिता लौटाने का अभियान अब थमने वाला नहीं है।
पत्रकार फाऊंडेशन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन में शामिल हजारों नागरिकों ने किन्नर महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी से आशीर्वाद लेकर किन्नर समुदाय के प्रति अपनी आस्थाओं का प्रदर्शन किया। इस मौके पर किन्नर महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने प्रदेश की खुशहाली की कामना की और नागरिकों के आनंदमयी जीवन के लिए दुआ की। इस आयोजन में किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास, आईसना के अध्यक्ष अवधेश भार्गव, जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र वर्मा,एकता परिषद के उपाध्यक्ष रमेश शर्मा,मनमोहन कुरापा, रोजगार और निर्माण के संपादक पुष्पेन्द्र पाल सिंह, नगर पालिक निगम के अध्यक्ष सुरजीत सिंह चौहान, ने भी अपने विचार व्यक्त किए। पत्रकार वेलफेयर फाऊंडेशन के संस्थापक और अध्यक्ष ओमप्रकाश हयारण ने महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के प्रशस्ति पत्र का वाचन किया और शाल श्रीफल स्मृति चिन्ह से उनका सार्वजनिक अभिनंदन किया। राजधानी के पत्रकारों की ओर से आलोक सिंघई, मोहन माहेश्वरी, दीपक शर्मा, जवाहर सिंह प्रमोद नेमा, संजय अग्रवाल, शैलेन्द्र निगम, कृष्णकांत परवाल, सलीम खादीवाला, रवि चटर्जी, विनय डेविड, राजेश सक्सेना, मुकेश अवस्थी, श्याम हयारण, राजू खत्री, विवेक बजाज, रघु मालवीय , अजय श्रीवास्तव, शिवनारायण मीणा ने भी महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को पुष्प गुच्छ भेंटकर उनका अभिनंदन किया। मृदुल सिंह राजपूत ने हस्तचित्र भेंटकर उनके प्रति अपनी आस्थाओं का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन शहर के जाने माने उद्घोषक विमल भंडारी ने किया। इस अवसर पर क्राईम हलचल पत्रिका के सिंहस्थ विशेषांक का विमोचन भी किया गया।
अपने कृतज्ञता भाषण में किन्नर महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने कहा कि प्रेम ही जिंदगी का मूल है। उज्जैन सिंहस्थ में महाकाल के आशीर्वाद से पहली बार किन्नर अखाड़े का गठन हुआ है। ये स्त्री, पुरुष के अलावा प्रकृति की तीसरी कृति नपुसंक लिंग की सामाजिक स्वीकार्यता का संदेश लेकर आया है। पूरी दुनिया में कई देश समलैंगिकता को तो स्वीकार करते हैं लेकिन किन्नरों को लेकर उनके बीच कोई विचारधारा अब तक नहीं पनप सकी है। भारतीय शास्त्रों और वेदों में दिए गए दृष्टांत आज समूचे विश्व का मार्गदर्शन कर रहे हैं। यही वजह है कि भारतीय न्याय व्यवस्था,सरकार और सामाजिक संगठनों ने मिलकर तीसरी प्रकृति को उसकी पहचान देने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि ये भारत ही है जहां समाज के उपेक्षित वर्ग को मुख्यधारा में शामिल करने का साहसपूर्ण फैसला लिया जा सका है। हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि भारत की धरती पर हम शोषण और उपेक्षा की पीड़ा झेलते इस समुदाय के कल्याण की कल्पना को साकार होते देख सकेंगे।मध्यप्रदेश बहुत सहिष्णु राज्य है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश ने पहला विधायक दिया। सागर में पहला महपौर दिया। इसकी वजह केवल यही है कि मध्यप्रदेश के लोग प्रगतिशील हैं और यहां का समाज बहुत उदार मन का है। यहां के मुख्यमंत्री भी उतने ही सहिष्णु और दयालु हैं। तभी उज्जैन सिंहस्थ में किन्नर अखाड़े का गठन संभव हो सका है। मुख्यमंत्री की भावनाओं को देखते हुए उज्जैन के प्रभारी मंत्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ने सभी तेरह अखाड़ों के संतों महंतों के बीच सहमति का माहौल बनाया और इस ऐतिहासिक फैसले को साकार कर दिखाया। उन्होंने कहा कि मेरा रोम रोम उन्हें आशीर्वाद दे रहा है । किन्नर महामंडलेश्वर ने कहा कि सारी कशमकश के बाद उज्जैन में जब किन्नर अखाड़े की पेशवाई निकली तो इतना व्यापक जन समर्थन देखकर मैं स्तब्ध रह गई। विशाल जनसमुदाय में किन्नरों के प्रति निश्चल प्रेम देखकर हमारा मन इतनी कृतज्ञता से भर गया कि हमारे दिल से आशीर्वाद निकल रहा था कि इस जन समुदाय की आने वाली पीढ़ियां सदा सुखी रहें। उन्होंने कहा कि ये पेशवाई जब मुस्लिम इलाकों से निकली तो भी उन्हें इतना ही स्नेह मिला। मुस्लिमों ने दस स्थानों पर मंच लगाकर किन्नर अखाड़े का अभिषेक किया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच इतना सौहार्द्र है फिर भी विडंबना है कि उनके बीच की खाई अब तक मौजूद है। जबकि हकीकत है कि सच्चा भारतीय कभी लैंगिक आधार पर भेदभाव की बात नहीं सोचता है। इसकी वजह है कि लोग अपने आप से प्यार करना भूल गए हैं। जबकि किन्नर समुदाय प्रेम से भरा है। शायद इसीलिए हमारे बीच वृद्धाश्रम नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि लोग प्रेम से भरे होंगे तभी तो वे प्रेम बांट सकेंगे। उन्होंने पत्रकार फाऊंडेशन वेलफेयर ऐसोसिएशन को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी।उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार आनंद मंत्रालय का गठन करने जा रही है। इसलिए उन्हें उम्मीद है कि ये सरकार अपने नागरिकों की खुशी के लिए किन्नर आयोग का गठन भी जल्दी कर लेगी।
उन्होंने कहा कि किन्नरों के पिछले 317 सालों के इतिहास में उनकी सामाजिक स्वीकृति के हजारों उदाहरण देखने मिलते हैं। प्राचीन भारत में किन्नरों को उपदेवता माना गया। बाद में मुगल सल्तनत में उन्हें हरमों का सेवादार बना दिया गया। हालांकि तब तक किन्नर समाज की महत्वपूर्ण जवाबदारियां भी स्वीकारते रहे हैं।इसकेबाद अंग्रेजी साम्राज्य ने कानूनों में फेरबदल करके किन्नरों को दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर कर दिया। नए नए कानून बनाकर उनकी संपत्तियां छीन लीं गईं।तबसे किन्नर समुदाय दर दर की ठोकरें खा रहा है। समाज में वे उपेक्षा झेल रहे हैं। मजबूरन विभिन जातियों में पैदा होने वाले किन्नरों ने उन्हें पालने वाले किन्नर गुरुओं की सेवा करते हुए इस्लाम स्वीकार कर लिया। हमें उम्मीद थी कि गौरवशाली परंपरा का वाहक रहा हिंदू संप्रदाय हमें स्वीकार करेगा। लेकिन बरसों की तपस्या के बाद किन्नरों को उनका खोया वजूद मिलने जा रहा है। किन्नरों की ये जीत केवल मेरी नहीं है बल्कि इसके पीछे हजारों लाखों किन्नरों की भावनाएं जुड़ी हुईं हैं।
उन्होंने कहा कि व्यवस्था में बदलाव की ये शुरुआत ऋषि अजय दास के अटूट प्रयासों का नतीजा है। उन्होंने बरसों के अध्ययन के बाद विवाह एक नैतिक बलात्कार, कृति प्रकृति और थर्ड जेंडर जैसी दस किताबें लिखीं जिनमें किन्नरों के बारे में विस्तृत विचार व्यक्त किए गए। उनकी लिखी किताबें किन्नरों के बीच बहुत लोकप्रिय हुईं और शेष समुदाय के लोगों का भी मार्गदर्शन कर सकीं। मेरी किताब मैं लक्ष्मी मैं हीजड़ा ने भी किन्नर समुदाय के बीच विचार प्रक्रिया को उद्वेलित किया। शायद मेरे सामाजिक कार्यकलापों को देखते हुए ऋषि अजय दास ने मुझे किन्नर महामंडलेश्वर के रूप में स्थापित करके किन्नरों को सामाजिक मान्यता दिलाने का शंखनाद किया ।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गेहलोत ने सभी राज्यों की सरकारों को पत्र लिखकर किन्नर आयोग गठित करने के निर्देश दिए हैं।
किन्नर अखाड़े के विचार को मूर्त रूप देने वाले ऋषि अजय दास ने कहा कि किन्नर महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण जी का सार्वजनिक अभिनंदन करके पत्रकार फाऊंडेशन वेलफेयर ऐसोसिएशन ने अभिनंदनीय कार्य किया है। हम उनके हृदय से आभारी हैं। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से सड़कों पर ताली बजाते किन्नरों को समाज के कटाक्ष सहते और उपेक्षित होते देखते रहे हैं। इसे देखकर ही उनके मन में किन्नरों को समाज की मुख्य धारा में शामिल करने का विचार आया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी गुलाम देश के नागरिक थे इसलिए उन्होंने गुलामी के खिलाफ लड़ाई लड़ी। नेल्सन मंडेला ने अश्वेत होने की प्रताड़ना झेली इसलिए उन्होंने रंगभेद के खिलाफ लड़ाई लड़ी। लेकिन राजा राम मोहन राय स्त्री नहीं थे इसके बावजूद उन्होंने विधवाओं को समाज की मुख्य धारा में शामिल करने की लड़ाई लड़ी। राजा राम मोहन राय की प्रेरणा से ही मैं किन्नरों की उपेक्षा और वेदना के प्रति समाज में चेतना जगाने आगे बढ़ता जा रहा हूं।उन्होंने कहा कि सदियों से किन्नर समाज के प्रति अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करते रहे हैं आज समय आ गया है कि जब हम किन्नर समुदाय का ऋण चुका सकते हैं। हम उनके प्रति यदि दुआ न भी कर सकें तो कम से कम उन्हें सम्मान से खडा़ होने की प्रक्रिया पर दया तो करें। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से किन्नर अखाड़ा जिस तरह आज सामने आया है वह लगातार इस दिशा में ईमानदारी से काम करते हुए आगे बढ़ता रहेगा और समाज की उम्मीदों पर खरा उतरेगा।
आईसना के अध्यक्ष अवधेश भार्गव ने ऋषि अजयदास और उनकी टीम के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया । उन्होंने कहा कि राजा भोज की नगरी में उन्होंने प्रथम महामंडलेश्वर का अवतरण करके प्रदेश की जनता को उनका आशीर्वाद दिलाया है। हमारे धर्म ग्रंथों में किन्नरों को उपदेवता माना गया है। उनका आशीर्वाद हमारे प्रदेश में खुशहाली और समृद्धि की वर्षा करेगा।
जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र वर्मा ने कहा कि भगवान शंकर का एक रूप अर्धनारीश्वर का है शायद इसीलिए किन्नर शिरोमणि लक्ष्मीनारायण जी को उज्जैन में महामंडलेश्वर बनने का अवसर मिला।उन्होंने कहा कि बुध ग्रह को धन संपदा और बुद्धि का प्रदाता माना जाता है।बुद्धि मानव जीवन की सबसे अमूल्य धरोहर है और बुध का ही भौतिक भाव किन्नर के रूप में हमारे बीच मौजूद है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि यदि बुध की उपासना करनी हो तो किन्नरों की सेवा करो। वे संयम से रहते हैं इसलिए उनका आशीर्वाद फलीभूत होता है। अपने त्याग, संयम और बलिदान के कारण ही तपस्वी किन्नर हमारे लिए पूजनीय होते हैं।
राष्ट्रीय एकता परिषद के उपाध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा कि शास्त्रों में मनुष्य से श्रेष्ठ गंधर्वों को माना गया है,और उनसे भी श्रेष्ठ किन्नरों को माना गया है।उन्होंने कहा कि भारत में प्राचीन काल से बच्चों को जन्म के बाद किन्नरों का आशीर्वाद दिलाया जाता रहा है। समय के साथ आई विसंगतियों के कारण आज किन्नरों को केवल चंदा वसूली करने वालों का गिरोह माना जाने लगा। अब समय आ गया है कि जब हम भारतीय संस्कृति के वैभव की ओर लौटें और किन्नरों को उनका खोया सम्मान दिलाने के लिए आगे आएं।
नगर पालिक निगम अध्यक्ष सुरजीत सिंह चौहान ने कहा कि किन्नर अखाड़े के संघर्ष की कहानी सबसे देखी सुनी है। इसके बावजूद किन्नरों को आज उनका खोया सम्मान मिल सका है ये संतोष की बात है। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज का ताना बाना अपने पूरे वैभव के साथ बरकरार रहे इसके लिए किये जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।
मनमोहन कुरापा ने कहा कि पत्रकार फाऊंडेशन वेलफेयर ऐसोसिएशन ने प्रदेश की खुशहाली के लिए किन्नर महामंडलेश्वर का जो अभिनंदन किया उसके लिए उसे बहुत बहुत शुभकामनाएं।
रोजगार निर्माण के संपादक पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने कहा कि उज्जैन सिंहस्थ के माध्यम से मध्यप्रदेश को समाज के एक बड़े उपेक्षित तबके का खोया सम्मान लौटाने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में हर व्यक्ति को समानता का अधिकार दिया गया है। इसके बावजूद किन्नरों को अपना आत्मसम्मान पाने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा। समाज तो उन्हें हमेशा से उपदेवता मानकर पूजता रहा है। आजादी के बाद उन्हें लेकर भ्रांतियां फैलती रहीं। अब उज्जैन सिंहस्थ में किन्नर अखाड़े के गठन के बाद महसूस हो रहा है कि समाज बदल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में किन्नरों को चुनाव ल़ड़ने का अधिकार रहा है लेकिन पड़ौसी पाकिस्तान में वर्ष 2013 में उन्हें चुनाव लड़ने का अधिकार मिल पाया। उन्होंने कहा कि समाज की उपेक्षा के चलते ही किन्नरों को छिपकर रहने को मजबूर होना पड़ा। सिनेमा ने उनकी छवि को बिगाड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के किन्नौर की एक आदिवासी जन जाति को किन्नर कहा जाता है। उसके कारण हिजड़ों को किन्नर कहा जाने लगा। उन्होंने कहा कि ऋषि अजय दास ने समाज के पाखंड और आडंबर के खिलाफ समानता की लड़ाई लड़ी है। हिजड़ों का खोया सम्मान लौटाने के लिए उन्होंने जो अभियान शुरु किया उससे समाज में समानता का भाव मजबूत होगा और ये भारतीय लोकतंत्र को भी मजबूती प्रदान करेगा।
कार्यक्रम के अंत में मुकेश अवस्थी ने महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को स्मृति चिन्ह भेंटकर उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन में शामिल गणमान्य नागरिकों का भी आभार माना। इसके बाद सहभोज का भी आयोजन किया गया।

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