Saturday, July 23, 2016

किन्नर आयोग के लिए आंदोलन करना पड़े तो भी नहीं हिचकेंगेः लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी

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भोपाल 18 जुलाई 2016। माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद समूचे हिंदुस्तान में किन्नरों को मुख्यधारा में शामिल करने का अभियान शुरु हो गया है। ग्यारह राज्यों की सरकारों ने किन्नर आयोग का गठन करके किन्नरों को समाज की मुख्य धारा में शामिल करने लायक प्रयास करने की शुरुआत कर दी है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी किन्नर आयोग के गठन की घोषणा की है। इसके लिए किन्नरों का एक प्रतिनिधि मंडल जल्दी ही मुख्यमंत्री महोदय से भेंट करेगा और उनसे किन्नर आयोग गठित करने का अनुरोध करेगा। मुख्यमंत्री को यदि फैसला लेने में कोई कठिनाई आ रही हो तो इसके लिए किन्नर समुदाय पूरे प्रदेश में प्रदर्शन करने और शक्ति प्रदर्शन करने से भी पीछे नहीं हटेगा। रविवार को श्यामला हिल्स भोपाल स्थित मानस भवन में आयोजित अपने सम्मान समारोह और सार्वजनिक अभिनंदन में प्रथम किन्नर महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने कहा कि किन्नरों की खोई अस्मिता लौटाने का अभियान अब थमने वाला नहीं है।
पत्रकार फाऊंडेशन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन में शामिल हजारों नागरिकों ने किन्नर महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी से आशीर्वाद लेकर किन्नर समुदाय के प्रति अपनी आस्थाओं का प्रदर्शन किया। इस मौके पर किन्नर महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने प्रदेश की खुशहाली की कामना की और नागरिकों के आनंदमयी जीवन के लिए दुआ की। इस आयोजन में किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास, आईसना के अध्यक्ष अवधेश भार्गव, जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र वर्मा,एकता परिषद के उपाध्यक्ष रमेश शर्मा,मनमोहन कुरापा, रोजगार और निर्माण के संपादक पुष्पेन्द्र पाल सिंह, नगर पालिक निगम के अध्यक्ष सुरजीत सिंह चौहान, ने भी अपने विचार व्यक्त किए। पत्रकार वेलफेयर फाऊंडेशन के संस्थापक और अध्यक्ष ओमप्रकाश हयारण ने महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के प्रशस्ति पत्र का वाचन किया और शाल श्रीफल स्मृति चिन्ह से उनका सार्वजनिक अभिनंदन किया। राजधानी के पत्रकारों की ओर से आलोक सिंघई, मोहन माहेश्वरी, दीपक शर्मा, जवाहर सिंह प्रमोद नेमा, संजय अग्रवाल, शैलेन्द्र निगम, कृष्णकांत परवाल, सलीम खादीवाला, रवि चटर्जी, विनय डेविड, राजेश सक्सेना, मुकेश अवस्थी, श्याम हयारण, राजू खत्री, विवेक बजाज, रघु मालवीय , अजय श्रीवास्तव, शिवनारायण मीणा ने भी महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को पुष्प गुच्छ भेंटकर उनका अभिनंदन किया। मृदुल सिंह राजपूत ने हस्तचित्र भेंटकर उनके प्रति अपनी आस्थाओं का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन शहर के जाने माने उद्घोषक विमल भंडारी ने किया। इस अवसर पर क्राईम हलचल पत्रिका के सिंहस्थ विशेषांक का विमोचन भी किया गया।
अपने कृतज्ञता भाषण में किन्नर महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने कहा कि प्रेम ही जिंदगी का मूल है। उज्जैन सिंहस्थ में महाकाल के आशीर्वाद से पहली बार किन्नर अखाड़े का गठन हुआ है। ये स्त्री, पुरुष के अलावा प्रकृति की तीसरी कृति नपुसंक लिंग की सामाजिक स्वीकार्यता का संदेश लेकर आया है। पूरी दुनिया में कई देश समलैंगिकता को तो स्वीकार करते हैं लेकिन किन्नरों को लेकर उनके बीच कोई विचारधारा अब तक नहीं पनप सकी है। भारतीय शास्त्रों और वेदों में दिए गए दृष्टांत आज समूचे विश्व का मार्गदर्शन कर रहे हैं। यही वजह है कि भारतीय न्याय व्यवस्था,सरकार और सामाजिक संगठनों ने मिलकर तीसरी प्रकृति को उसकी पहचान देने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि ये भारत ही है जहां समाज के उपेक्षित वर्ग को मुख्यधारा में शामिल करने का साहसपूर्ण फैसला लिया जा सका है। हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि भारत की धरती पर हम शोषण और उपेक्षा की पीड़ा झेलते इस समुदाय के कल्याण की कल्पना को साकार होते देख सकेंगे।मध्यप्रदेश बहुत सहिष्णु राज्य है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश ने पहला विधायक दिया। सागर में पहला महपौर दिया। इसकी वजह केवल यही है कि मध्यप्रदेश के लोग प्रगतिशील हैं और यहां का समाज बहुत उदार मन का है। यहां के मुख्यमंत्री भी उतने ही सहिष्णु और दयालु हैं। तभी उज्जैन सिंहस्थ में किन्नर अखाड़े का गठन संभव हो सका है। मुख्यमंत्री की भावनाओं को देखते हुए उज्जैन के प्रभारी मंत्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ने सभी तेरह अखाड़ों के संतों महंतों के बीच सहमति का माहौल बनाया और इस ऐतिहासिक फैसले को साकार कर दिखाया। उन्होंने कहा कि मेरा रोम रोम उन्हें आशीर्वाद दे रहा है । किन्नर महामंडलेश्वर ने कहा कि सारी कशमकश के बाद उज्जैन में जब किन्नर अखाड़े की पेशवाई निकली तो इतना व्यापक जन समर्थन देखकर मैं स्तब्ध रह गई। विशाल जनसमुदाय में किन्नरों के प्रति निश्चल प्रेम देखकर हमारा मन इतनी कृतज्ञता से भर गया कि हमारे दिल से आशीर्वाद निकल रहा था कि इस जन समुदाय की आने वाली पीढ़ियां सदा सुखी रहें। उन्होंने कहा कि ये पेशवाई जब मुस्लिम इलाकों से निकली तो भी उन्हें इतना ही स्नेह मिला। मुस्लिमों ने दस स्थानों पर मंच लगाकर किन्नर अखाड़े का अभिषेक किया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच इतना सौहार्द्र है फिर भी विडंबना है कि उनके बीच की खाई अब तक मौजूद है। जबकि हकीकत है कि सच्चा भारतीय कभी लैंगिक आधार पर भेदभाव की बात नहीं सोचता है। इसकी वजह है कि लोग अपने आप से प्यार करना भूल गए हैं। जबकि किन्नर समुदाय प्रेम से भरा है। शायद इसीलिए हमारे बीच वृद्धाश्रम नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि लोग प्रेम से भरे होंगे तभी तो वे प्रेम बांट सकेंगे। उन्होंने पत्रकार फाऊंडेशन वेलफेयर ऐसोसिएशन को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी।उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार आनंद मंत्रालय का गठन करने जा रही है। इसलिए उन्हें उम्मीद है कि ये सरकार अपने नागरिकों की खुशी के लिए किन्नर आयोग का गठन भी जल्दी कर लेगी।
उन्होंने कहा कि किन्नरों के पिछले 317 सालों के इतिहास में उनकी सामाजिक स्वीकृति के हजारों उदाहरण देखने मिलते हैं। प्राचीन भारत में किन्नरों को उपदेवता माना गया। बाद में मुगल सल्तनत में उन्हें हरमों का सेवादार बना दिया गया। हालांकि तब तक किन्नर समाज की महत्वपूर्ण जवाबदारियां भी स्वीकारते रहे हैं।इसकेबाद अंग्रेजी साम्राज्य ने कानूनों में फेरबदल करके किन्नरों को दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर कर दिया। नए नए कानून बनाकर उनकी संपत्तियां छीन लीं गईं।तबसे किन्नर समुदाय दर दर की ठोकरें खा रहा है। समाज में वे उपेक्षा झेल रहे हैं। मजबूरन विभिन जातियों में पैदा होने वाले किन्नरों ने उन्हें पालने वाले किन्नर गुरुओं की सेवा करते हुए इस्लाम स्वीकार कर लिया। हमें उम्मीद थी कि गौरवशाली परंपरा का वाहक रहा हिंदू संप्रदाय हमें स्वीकार करेगा। लेकिन बरसों की तपस्या के बाद किन्नरों को उनका खोया वजूद मिलने जा रहा है। किन्नरों की ये जीत केवल मेरी नहीं है बल्कि इसके पीछे हजारों लाखों किन्नरों की भावनाएं जुड़ी हुईं हैं।
उन्होंने कहा कि व्यवस्था में बदलाव की ये शुरुआत ऋषि अजय दास के अटूट प्रयासों का नतीजा है। उन्होंने बरसों के अध्ययन के बाद विवाह एक नैतिक बलात्कार, कृति प्रकृति और थर्ड जेंडर जैसी दस किताबें लिखीं जिनमें किन्नरों के बारे में विस्तृत विचार व्यक्त किए गए। उनकी लिखी किताबें किन्नरों के बीच बहुत लोकप्रिय हुईं और शेष समुदाय के लोगों का भी मार्गदर्शन कर सकीं। मेरी किताब मैं लक्ष्मी मैं हीजड़ा ने भी किन्नर समुदाय के बीच विचार प्रक्रिया को उद्वेलित किया। शायद मेरे सामाजिक कार्यकलापों को देखते हुए ऋषि अजय दास ने मुझे किन्नर महामंडलेश्वर के रूप में स्थापित करके किन्नरों को सामाजिक मान्यता दिलाने का शंखनाद किया ।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गेहलोत ने सभी राज्यों की सरकारों को पत्र लिखकर किन्नर आयोग गठित करने के निर्देश दिए हैं।
किन्नर अखाड़े के विचार को मूर्त रूप देने वाले ऋषि अजय दास ने कहा कि किन्नर महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण जी का सार्वजनिक अभिनंदन करके पत्रकार फाऊंडेशन वेलफेयर ऐसोसिएशन ने अभिनंदनीय कार्य किया है। हम उनके हृदय से आभारी हैं। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से सड़कों पर ताली बजाते किन्नरों को समाज के कटाक्ष सहते और उपेक्षित होते देखते रहे हैं। इसे देखकर ही उनके मन में किन्नरों को समाज की मुख्य धारा में शामिल करने का विचार आया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी गुलाम देश के नागरिक थे इसलिए उन्होंने गुलामी के खिलाफ लड़ाई लड़ी। नेल्सन मंडेला ने अश्वेत होने की प्रताड़ना झेली इसलिए उन्होंने रंगभेद के खिलाफ लड़ाई लड़ी। लेकिन राजा राम मोहन राय स्त्री नहीं थे इसके बावजूद उन्होंने विधवाओं को समाज की मुख्य धारा में शामिल करने की लड़ाई लड़ी। राजा राम मोहन राय की प्रेरणा से ही मैं किन्नरों की उपेक्षा और वेदना के प्रति समाज में चेतना जगाने आगे बढ़ता जा रहा हूं।उन्होंने कहा कि सदियों से किन्नर समाज के प्रति अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करते रहे हैं आज समय आ गया है कि जब हम किन्नर समुदाय का ऋण चुका सकते हैं। हम उनके प्रति यदि दुआ न भी कर सकें तो कम से कम उन्हें सम्मान से खडा़ होने की प्रक्रिया पर दया तो करें। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से किन्नर अखाड़ा जिस तरह आज सामने आया है वह लगातार इस दिशा में ईमानदारी से काम करते हुए आगे बढ़ता रहेगा और समाज की उम्मीदों पर खरा उतरेगा।
आईसना के अध्यक्ष अवधेश भार्गव ने ऋषि अजयदास और उनकी टीम के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया । उन्होंने कहा कि राजा भोज की नगरी में उन्होंने प्रथम महामंडलेश्वर का अवतरण करके प्रदेश की जनता को उनका आशीर्वाद दिलाया है। हमारे धर्म ग्रंथों में किन्नरों को उपदेवता माना गया है। उनका आशीर्वाद हमारे प्रदेश में खुशहाली और समृद्धि की वर्षा करेगा।
जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र वर्मा ने कहा कि भगवान शंकर का एक रूप अर्धनारीश्वर का है शायद इसीलिए किन्नर शिरोमणि लक्ष्मीनारायण जी को उज्जैन में महामंडलेश्वर बनने का अवसर मिला।उन्होंने कहा कि बुध ग्रह को धन संपदा और बुद्धि का प्रदाता माना जाता है।बुद्धि मानव जीवन की सबसे अमूल्य धरोहर है और बुध का ही भौतिक भाव किन्नर के रूप में हमारे बीच मौजूद है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि यदि बुध की उपासना करनी हो तो किन्नरों की सेवा करो। वे संयम से रहते हैं इसलिए उनका आशीर्वाद फलीभूत होता है। अपने त्याग, संयम और बलिदान के कारण ही तपस्वी किन्नर हमारे लिए पूजनीय होते हैं।
राष्ट्रीय एकता परिषद के उपाध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा कि शास्त्रों में मनुष्य से श्रेष्ठ गंधर्वों को माना गया है,और उनसे भी श्रेष्ठ किन्नरों को माना गया है।उन्होंने कहा कि भारत में प्राचीन काल से बच्चों को जन्म के बाद किन्नरों का आशीर्वाद दिलाया जाता रहा है। समय के साथ आई विसंगतियों के कारण आज किन्नरों को केवल चंदा वसूली करने वालों का गिरोह माना जाने लगा। अब समय आ गया है कि जब हम भारतीय संस्कृति के वैभव की ओर लौटें और किन्नरों को उनका खोया सम्मान दिलाने के लिए आगे आएं।
नगर पालिक निगम अध्यक्ष सुरजीत सिंह चौहान ने कहा कि किन्नर अखाड़े के संघर्ष की कहानी सबसे देखी सुनी है। इसके बावजूद किन्नरों को आज उनका खोया सम्मान मिल सका है ये संतोष की बात है। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज का ताना बाना अपने पूरे वैभव के साथ बरकरार रहे इसके लिए किये जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।
मनमोहन कुरापा ने कहा कि पत्रकार फाऊंडेशन वेलफेयर ऐसोसिएशन ने प्रदेश की खुशहाली के लिए किन्नर महामंडलेश्वर का जो अभिनंदन किया उसके लिए उसे बहुत बहुत शुभकामनाएं।
रोजगार निर्माण के संपादक पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने कहा कि उज्जैन सिंहस्थ के माध्यम से मध्यप्रदेश को समाज के एक बड़े उपेक्षित तबके का खोया सम्मान लौटाने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में हर व्यक्ति को समानता का अधिकार दिया गया है। इसके बावजूद किन्नरों को अपना आत्मसम्मान पाने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा। समाज तो उन्हें हमेशा से उपदेवता मानकर पूजता रहा है। आजादी के बाद उन्हें लेकर भ्रांतियां फैलती रहीं। अब उज्जैन सिंहस्थ में किन्नर अखाड़े के गठन के बाद महसूस हो रहा है कि समाज बदल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में किन्नरों को चुनाव ल़ड़ने का अधिकार रहा है लेकिन पड़ौसी पाकिस्तान में वर्ष 2013 में उन्हें चुनाव लड़ने का अधिकार मिल पाया। उन्होंने कहा कि समाज की उपेक्षा के चलते ही किन्नरों को छिपकर रहने को मजबूर होना पड़ा। सिनेमा ने उनकी छवि को बिगाड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के किन्नौर की एक आदिवासी जन जाति को किन्नर कहा जाता है। उसके कारण हिजड़ों को किन्नर कहा जाने लगा। उन्होंने कहा कि ऋषि अजय दास ने समाज के पाखंड और आडंबर के खिलाफ समानता की लड़ाई लड़ी है। हिजड़ों का खोया सम्मान लौटाने के लिए उन्होंने जो अभियान शुरु किया उससे समाज में समानता का भाव मजबूत होगा और ये भारतीय लोकतंत्र को भी मजबूती प्रदान करेगा।
कार्यक्रम के अंत में मुकेश अवस्थी ने महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को स्मृति चिन्ह भेंटकर उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन में शामिल गणमान्य नागरिकों का भी आभार माना। इसके बाद सहभोज का भी आयोजन किया गया।

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