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Tuesday, January 20, 2026

मुख्यमंत्री सुक्खू का ऐलान, 70 साल से ऊपर वालों के बुजुर्गों को घर पर देंगे उपचार, एक ब्लड सैंपल से होंगे सारे टेस्ट


मुख्यमंत्री सुक्खू का ऐलान, 70 साल से ऊपर वालों के बुजुर्गों को घर पर देंगे उपचार, एक ब्लड सैंपल से होंगे सारे टेस्ट
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‘दिव्य हिमाचल’ के ‘डॉक्टर्स अवार्ड-2025’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुक्खू का ऐलान, 70 साल से ऊपर वालों के लिए नई योजना लाने जा रही प्रदेश सरकार

  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं देने वाले डाक्टर घर-घर जाकर देंगे सेवाएं
  • रोगी मित्र अस्पतालों में बुजुर्गों की मदद करेंगे, चिकित्सकों के 325 पद भरेगी सरकार
  • सुपर स्पेशलिस्ट को इनसेंटिव देंगे, दो मेडिकल कालेजों में आर्थो की रोबेटिक सर्जरी
  • टांडा और चमियाणा में आधुनिक एंजियोग्राफी मशीन के लिए 20 करोड़ मंजूर
  • अगले वर्ष से सभी मेडिकल कालेजों में शुरू होगी पोस्ट ग्रेजुएट कक्षाएं

हिमाचल. हिमाचल सरकार प्रदेश में 70 वर्ष की आयु से ऊपर के बुजुर्गों को घर में उपचार की व्यवस्था करेगी। इसके लिए सरकार जल्द ही एक योजना लाने जा रही है। सरकारी अस्पतालों में भी बुजुर्गों की मदद रोगी मित्र करेंगे। सरकार प्रदेश में 325 चिकित्सकों के पद भरेगी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इनकी तैनाती होगी। वहीं, राज्य में मेडिकल कालेज और प्रत्येक सीएचसी में अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक का प्रबंध भी सरकार कर रही है। प्रदेश के मीडिया ग्रुप ‘दिव्य हिमाचल’ के ‘डाक्टर्स अवार्ड’ समारोह में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने संबोधन में ये खुलासे किए। यह आयोजन रविवार सायं होटल पीटरहॉफ में हुआ। सीएम सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में 70 वर्ष की आयु से ऊपर के बुजुर्गों के लिए सरकार एक नई योजना लाने जा रही है। इस योजना के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं प्रदान करने वाले चिकित्सक घर पर जाकर बुजुर्गों का इलाज करेंगे।
उन्होंने कहा कि पीएचसी में चिकित्सकों की तैनाती के लिए सरकार 325 पदों को भी भरने जा रही है। उन्होंने कहा कि रोगी मित्र अस्पताल में आने वाले बुजुर्गों का चैकअप करवाएंगे और उन्हें घर तक छोडऩे की भी जिम्मेदारी रहेगी। इसके अलावा अगर बुजुर्ग को उपचार के लिए आगे ले जाने की आवश्यकता होगी, उसकी व्यवस्था भी यह देखेंगे। उन्होंने खुलासा किया कि शिमला के चमियाणा में डिजिटल सबस्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (डीएसए) के लिए 20 करोड़ रुपए की राशि की मंजूरी दे दी है। डीएसए एक उन्नत एक्स-रे तकनीक है, जो रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी संरचनाओं की स्पष्ट तस्वीरें लेने के लिए उपयोग होती है। सीएम सुक्खू ने ऐलान किया कि प्रदेश में एक वर्ष के भीतर सभी मेडिकल कालेजों और सीएचसी सहित सभी जिला अस्पतालों में अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके लिए सरकार 3000 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी मेडिकल कालेजों में भी सरकार अगले वर्ष से पीजी कक्षाएं आरंभ करने जा रही है। उन्होंने कहा कि चमियाना, आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कालेज में उन्नत स्मार्ट लैब के लिए 75 करोड़ रुपए की राशि की स्वीकृति दी है। स्मार्ट लैब के माध्यम से एक ही ब्लड सैंपल से बीमारी का स्टीक पता चलता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के चमियाणा और टांडा में रोबोटिक सर्जरी आरंभ की है। अब प्रदेश के दो मेडिकल कालेजों में आर्थो की रोबेटिक सर्जरी की दिशा में कदम आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत सुपर स्पेशलिटी डाक्टरों को मेडिकल कालेज में लिया जाएगा और उनके लिए डेजिगनेटड एसीस्टेंट प्रोफेसर की पोस्ट क्रिएट की जा रही है, जबकि सुपर स्पेशलिट डाक्टरों के लिए 20 प्रतिशत इनसेंटिव का प्रावधान भी कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार चिकित्सा विज्ञान में एआई और जेनरेटिक एआई का इस्तेमाल करने जा रहे है और इसको लेकर चिकित्सकों से भी बातचीत की जा रही है। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, एचपीटीडीसी के अध्यक्ष आरएस बाली, शिमला नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, सूचना एवं जन संपर्क विभाग के निदेशक राजीव कुमार, स्वास्थ्य निदेशक डॉक्टर गोपाल बेरी, आईजीएमसी की प्रिंसिपल डॉक्टर सीता ठाकुर, स्वास्थ्य सुरक्षा के निदेशक जितेंद्र सांजटा, हिमाचल मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन से डॉ राणा, आईजीएमसी आरडीए के पदाधिकारी, रिपन अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लोकेंद्र रॉकी, दिव्य हिमाचल समाचार पत्र के क्षेत्रीय संपादक संजय अवस्थी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

जीएसटी से हिमाचल प्रदेश को नुकसान हुआ

सीएम ने कहा कि जिस बद्दी से सरकार को पहले 4000 करोड़ रुपए का आता था, अब केवल 150 करोड़ रुपए मिल रहा है। जीएसटी दरें बदलने से नुकसान हुआ है। सीएम ने कहा कि कंज्यूमर बेसड है। जीएसटी लगने के कारण यह बाहरी राज्यों को इसका लाभ मिल रहा है, जबकि जिस राज्य में फार्मा कंपनियों के माध्यम से करीब 35 प्रतिशत दवाइयां बनाई जा रही है, उस राज्य को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। सीएम ने कहा कि जिन राज्यों में आबादी अधिक है, वहां दवाइयों की खपत ज्यादा है, जबकि हिमाचल को उसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। सीएम ने कहा कि यह मामला सरकार ने केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण के समक्ष उठाया गया है।

हमारे लिए वित्तीय चुनौती सबसे बड़ी

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे लिए वित्तीय चुनौती सबसे बड़ी है। सरकार को छठे वेतन आयोग के एरियर के रूप में 10 हजार करोड़ बकाया मिला। ओपीएस के कारण जिस प्रदेश की 1600 करोड़ की बोरोइंग बंद कर दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की जो आरडीजी होती है, उसमें पिछले साल हमें 6200 करोड़ रुपए मिले। इस साल घटकर वो 3200 करोड़ रुपए रह गया। सीएम ने कहा कि जो 15वें वित्त आयोग के तहत राज्य और केंद्र के बीच करों का वितरण होता है। 15वें वित्त आयोग के तहत टेपरिंग हुई है। 2019-20 में सरकार को जो 11,000 करोड़ रुपए मिलते थे। आज हमें 3200 करोड़ रुपए मिल रहे हैं। सीएम ने कहा कि हम इसे कैसे बदल रहे हैं। हमने उन कानूनों को रोका है, जिनके तहत भ्रष्टाचार के चोरों द्वारा जनता की संपत्ति लूटी जा रही थी और आम जनता को इसका पता भी नहीं चलता था।

दिल्ली में छात्रों को बिना बुकिंग मिलेगा कमरा

मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन एक नारा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था को परिवर्तित किया, जो बीते 40 साल से चली आ रही थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम कभी कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि 3500 करोड़ हम एयरपोर्ट के लिए खर्च करने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र जीवन दिल्ली में सोने को नहीं मिलता था। हम सोफे पर ही सो जाते थे। इन समस्याओं को देखते हुए हमने द्वारका में हिमाचल निकेतन बनाया। ये मई में बनकर तैयार हो जाएगा। हिमाचल का जो भी छात्र वहां जाएगा, उसे बिना आवेदन किए कमरा मिल जाएगा।

आपदा से 44 हजार करोड़ का नुकसान

सीएम सुक्खू ने कहा कि राजनीतिक दृष्टि से हमारे सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं। पहली चुनौती वित्तीय क्षेत्र में है। आपदा के कारण राज्य को 44,000 करोड़ का नुकसान हुआ। 2023-24 में लगभग 500 लोगों की मृत्यु हुई। कई परिवारों ने जीवन भर की कमाई से घर बनाए थे और उन्हें पता भी नहीं था कि एक रात में सब कुछ खत्म हो जाएगा। पीने का पानी का गिलास नहीं बचा। सरकार ने ऐसे 23,000 लोगों को बचाया।

सीएम सुक्खू की अपील, मरीजों के साथ अपनापन दिखाएं

मुख्यमंत्री सुक्खू ने सभागार में उपस्थित डाक्टर्स से एक अपील भी की। हालांकि उन्होंने आईजीएमसी में हुए प्रकरण का हवाला नहीं दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि डाक्टर मरीज के साथ अपनेपन से बात करें। इससे मरीज का आधा दर्द दूर हो जाता है। यदि मरीज को लाईलाज बीमारी है, तो भी जीने की हिम्मत देनी चाहिए। डाक्टर की सलाह का असर होता है।

पांचों मेडिकल कालेजों में स्थापित होंगी एमआरआई मशीन

सीएम ने कहा कि आधुनिक तकनीक से लैस एमआरआई मशीनों को प्रदेश के पांच मेडिकल कालेजों में स्थापित किया जाएगा। 10 लाख की यह मशीन है। जब हम 40 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी से मेडिकल कालेज चलाते हैं, तो उन कालेजों का क्या होगा, डाक्टर तनाव में रहेंगे और चिड़चिड़े हो जाएंगे। इन्हीं बातों का अध्ययन सरकार ने किया और सभी मेडिकल कालेजों में 12 घंटे ड्यूटी की प्रणाली लागू की गई है।

प्रदेश सरकार ने किसी किसान का सेब सडऩे नहीं दिया

मुख्यमंत्री ने कहा कि 23-24 में सेब का सीजन अपने चरम पर था। हमने एमआईएस के माध्यम से 140 करोड़ रुपए का प्रबंध किया, ताकि बागबानों को नुकसान न हो। सडक़ें टूट गई थीं, लोगों के पास पैसे नहीं थे। फिर भी सरकार ने किसी बागवान की पीठ पर बोझ नहीं डाला। समय से सभी सडक़ें ठीक की और समय पर बागबानों के सेब मंडी तक पहुंचाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाने को लकर ओज़ोनेशन तकनीक के लिए 100 करोड़ रुपए दिए हैं। विश्वस्तरीय जल शोधन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसे हम पांच जिलों में लागू कर रहे हैं। सीएम ने कहा कि यह सरकार जनता के लिए है।

खाने की पहली बार बनेगी न्यूट्रिशन पॉलिसी

सीएम ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में 750 स्कूलों को अन्य स्कूलों में मर्ज किया। इसका कारण यह है कि जिन स्कूलों में बच्चे पांच और शिक्षक तीन थे, ऐसे में बच्चों को स्कूलों मेें क्या एक्सपोजर मिलेगा? ऐसे में राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल 50 विधानसभा क्षेत्रों में बनाए जा रहे हैं। अगले साल 10 स्कूल शुरू होंगे, जहां 1000 बच्चे पढ़ेंगे, खेलेंगे और उन्हें भोजन भी दिया जाएगा। इन स्कूलों में छात्रों को सीबीएसई सिलेबस की पढ़ाई करवाई जाएगी। वहीं, स्कूलों में खेल गतिविधियों के साथ पढ़ाई भी उत्तम मिलेगी। बच्चों को इन स्कूलों में बेहतर खाना भी उपलब्ध होगा। सीएम ने कहा कि स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले खाने की न्यूट्रिशन वैल्यू को पूरी तरह से ध्यान में रखा जाएगा। इसके लिए सरकार न्यूट्रेशन पॉलिसी लाएगी।

‘डॉक्टर्स अवार्ड’ ‘दिव्य हिमाचल’ की अनूठी पहल
महिला डॉक्टरों के लिए अवार्ड में अलग सेग्मेंट का दिया सुझाव दिया
वरिष्ठ संवाददाता — शिमला

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि डाक्टर अवार्ड ‘दिव्य हिमाचल’ मीडिया समूह की अच्छी पहल है। सोशल मीडिया के दौर में पॉजिटिविटी को आगे बढ़ाने की आवश्यकता होती है। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि इस अवार्ड में भविष्य में महिला डाक्टर के लिए भी एक सेगमेंट दिया जाए। इस कार्यक्रम में सम्मानित किए गए 14 डाक्टरों, एक प्रशासनिक अधिकारी और पांच हैल्थ केयर सेंटर को मुख्यमंत्री ने बधाई दी। सीएम ने कहा कि हमने सत्ता में आते ही गर्वनेंस की सोच को बदलने का नया आयाम आरंभ किया।
प्रशासन के तरीके को बदलने के लिए व्यवस्था परिवर्तन किया। उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिर्वतन करना महज एक नारा नहीं है। 40 वर्षों से चली आ रही एक ही व्यवस्था को बदलने की कोशिश की है और उसे बदलने का काम किया है। उन्होंने कहा कि हैल्थ सेक्टर में कभी किसी ने मुझसे कुछ नहीं मांगा, हमें मेडिकल टेक्नोलॉजी की जरूरत है।

Monday, December 1, 2025

विश्व एड्स दिवस पर स्वास्थ्य शिविरों एवं जागरूकता की गतिविधियों का हुआ आयोजन

विश्व एड्स दिवस पर स्वास्थ्य शिविरों एवं जागरूकता की गतिविधियों का हुआ आयोजन

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जन-जागरूकता रैली को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा एवं जिला टीबी एवं एड्स नियंत्रण अधिकारी डॉ संतोष सिंह ठाकुर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में जिला चिकित्सालय के चिकित्सक एवं स्टाफ तथा सोसाइटी फॉर प्रगति भारत, जन जाग्रति युवा मंच, वन स्टॉप सेंटर, डॉ सुधा गुप्ता मेमोरियल सोसाइटी के पदाधिकारी एवं नर्सिंग छात्राएं मौजूद थे।

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विश्व एड्स दिवस हर साल एक दिसंबर को एचआईवी एड्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इस बीमारी से निपटने के लिए एकजुट होने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष की एड्स दिवस की थीम "बाधाओं पर विजय, एड्स प्रतिक्रिया में परिवर्तन" रखी गई है। इस थीम को एड्स को खत्म करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए चुना गया है।

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इसी उद्देश्य को लेकर जबलपुर जिले की समस्त स्वास्थ्य संस्थानों में भी एड्स के बचाव एवं जनजागरूकता हेतु शिविर एवं विभिन्न गतिविधियां आयोजन किया गया। एड्स के प्रति जागरूकता लाने के लिए रंगोली प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें प्रथम, द्वितीय, तृतीय विजेता नर्सिंग छात्राओं को पुरस्कृत किया गया।

Thursday, November 6, 2025

नवजात बच्ची को पीएम श्री एयर एंबुलेंस से भेजा गया मुम्बई, मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना से होगी हृदय की सर्जरी

 


नवजात बच्ची को पीएम श्री एयर एंबुलेंस से भेजा गया मुम्बई, मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना से होगी हृदय की सर्जरी

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जबलपुर. जिले के सिहोरा तहसील के ग्राम नुंजी निवासी सतीश दाहिया और शशि दाहिया की नवजात बच्ची का जीवन बचाने पीएम श्री एयर एंबुलेंस से जबलपुर से मुम्बई भेजा गया, जहाँ नारायण हृदयालय में मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना से उसके हृदय का ऑपरेशन किया जायेगा। यह प्रदेश का पहला ऐसा मामला है.

जिसमें मात्र तीन दिन की बच्ची को हृदय के उपचार के लिये राज्य शासन द्वारा पीएम श्री एयर एंबुलेंस से मुंबई भेजा गया है। बच्ची के हृदय की सर्जरी पर होने वाला पूरा खर्च भी राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना से वहन किया जायेगा।

डॉ. संजय मिश्रा प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की विभागीय जांच एक माह में पूरी करने के आदेश

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बच्ची को उपचार के लिये मुम्बई ले जाने मध्यप्रदेश शासन द्वारा शुरू की गई पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा की एयर एंबुलेंस आज दोपहर लगभग एक बजे नई दिल्ली से डुमना एयरपोर्ट पहुँची। तमाम औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद बच्ची को रसल चौक स्थित निजी अस्पताल जबलपुर हॉस्पिटल से डुमना एयरपोर्ट ले जाया गया, जहाँ करीब ढाई बजे पीएम श्री एयर एम्बुलेंस ने मुंबई के लिये उड़ान भरी। इस मौके पर सिहोरा विधायक श्री संतोष वरकड़े भी एयरपोर्ट पर मौजूद थे। उन्होंने बच्ची के शीघ्र स्वस्थ्य होने की कामना की तथा बच्ची की क्रिटिकल स्थिति को देखते हुये एयर एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिये प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का आभार व्यक्त किया।

ज्ञात हो कि श्रीमती शशि दाहिया ने मंगलवार को जबलपुर हॉस्पिटल में दो जुड़वां बच्चों एक बेटा और एक बेटी को जन्म दिया था। इनमें से मेडिकल परीक्षण में चिकित्सकों द्वारा बेटी को हृदय रोग से पीड़ित बताया गया और उसकी क्रिटिकल स्थिति को देखते हुये उपचार के लिये तुरंत मुंबई के नारायण हृदयालय ले जाने की सलाह दी गई थी। जबलपुर हॉस्पिटल के चिकित्सकों द्वारा इसकी सूचना जिला अस्पताल को भी दी गई।

जबलपुर सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा ने किया भ्रष्टाचार, विभागीय अफसरों पर हैं जांच दबाने के आरोप

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बच्ची की नाजुक हालत और उसके पिता की आर्थिक स्थिति को देखते हुये सूचना मिलते ही गुरुनानक जयंती के अवकाश के बावजूद राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के कार्यालय को खोलने का निर्णय लिया गया तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा के नेतृत्व में एक घण्टे के भीतर तमाम दस्तावेज तैयार कर मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना से मुंबई के नारायण हृदयालय में बच्ची के हृदय की सर्जरी की स्वीकृति प्रदान की गई।

बच्ची के पिता और उसके परिवारजनों ने बच्ची के जीवन को बचाने एयर एम्बुलेंस उपलब्ध कराने के लिये मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का धन्यवाद ज्ञापित किया है तथा अवकाश के दिन भी कार्यालय खोलकर तत्परता से मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना से हृदय की सर्जरी का प्रकरण स्वीकृत करने के लिये जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया है।

Wednesday, November 5, 2025

जन्म से ही हृदय रोग से पीड़ित दो दिन की नवजात बच्ची के जीवन को बचाने मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना से उपचार की स्वीकृति प्रदान

 


जन्म से ही हृदय रोग से पीड़ित दो दिन की नवजात बच्ची के जीवन को बचाने मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना से उपचार की स्वीकृति प्रदान


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जबलपुर सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा ने किया भ्रष्टाचार, विभागीय अफसरों पर हैं जांच दबाने के आरोप

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बच्ची को गुरुवार को राज्य शासन द्वारा संचालित पीएम श्री एयर एंबुलेंस से हृदय की सर्जरी के लिये नारायणा हृदयालय मुम्बई भेजा जायेगा। तब तक के लिये बच्ची को रसल चौक स्थित जबलपुर हॉस्पिटल में ही एनआईसीयू वार्ड में रखा गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा के अनुसार बच्ची को एयरलिफ्ट करने पीएम श्री एयर एंबुलेंस गुरुवार को दोपहर 12 बजे नई दिल्ली से जबलपुर एयरपोर्ट आयेगी।

डॉ. संजय मिश्रा प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की विभागीय जांच एक माह में पूरी करने के आदेश

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सिहोरा निवासी सतेंद्र दहिया की पत्नी शशि दहिया ने कल मंगलवार को जबलपुर स्थित निजी अस्पताल जबलपुर हॉस्पिटल में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। इनमें से बच्चा स्वस्थ्य है, जबकि मेडिकल जाँच में बच्ची के दिल में छेद पाये जाने पर चिकित्सकों ने तत्काल उसे उच्च स्तरीय उपचार हेतु मुंबई के नारायणा हृदयालय भेजने की सलाह दी थी।

बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की जिला प्रबंधक सुभाष शुक्ला को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम ने छुट्टी के दिन भी सुबह लगभग 11.30 बजे कार्यालय खोलकर सभी आवश्यक कार्यवाही पूर्ण की।

पूरा कार्य क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ संजय मिश्रा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिन्होंने सभी दस्तावेजों को अनुमोदित करते हुए मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना के अंतर्गत बच्ची के उपचार हेतु स्वीकृति पत्र जारी किया।

लोकायुक्त का छापा : MP में रिटायर्ड PWD चीफ इंजीनियर निकला 15 करोड़ का आसामी, ठिकानों से 3 करोड़ का सोना और 36 लाख कैश 

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जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ विनीता उप्पल, डॉ एस एस दहिया, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला प्रबंधक सुभाष शुक्ला, श्रीया अवस्थी, रोहित श्रीवास्तव, अमित बेन तथा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम का विशेष सहयोग रहा।

नवजात बच्ची की जान बचाने स्वास्थ्य विभाग, जिला अस्पताल और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की यह त्वरित और संवेदनशील कार्यवाही मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एवं उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल के उस संकल्प को साकार करती है, जिसमें “हर बच्चे को स्वस्थ जीवन का अधिकार” सुनिश्चित किया गया है।

Saturday, November 1, 2025

डॉ. संजय मिश्रा प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की विभागीय जांच एक माह में पूरी करने के आदेश


डॉ. संजय मिश्रा प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की विभागीय जांच एक माह में पूरी करने के आदेश


डॉ. संजय मिश्रा प्रभारी जबलपुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की विभागीय जांच एक माह में पूरी करने के आदेश

जबलपुर। संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने डॉ. संजय मिश्रा, प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) जबलपुर की विभागीय जांच करने के आदेश जारी किए गए हैं। बताया जाता है कि यह आदेश डॉ. मिश्रा के खिलाफ नरेन्द्र राकेशिया और प्रहलाद साहू से प्राप्त शिकायतों के आधार पर लोकायुक्त जांच प्रकरण क्रमांक 90-ई-2024 के पंजीकरण के बाद जारी किया गया है।

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जानकारी के मुताबिक शिकायत में आरोप लगाया गया था कि डॉ. मिश्रा ने शासन की अनुमति के बिना दो विवाह किए हैं और इसके साथ ही उन्होंने प्राइवेट पैथोलॉजी चलाकर प्राप्त आय से अपनी दूसरी पत्नी के साथ मिलकर एक फ्लैट खरीदा। इसके अतिरिक्त, शिकायत में यह भी कहा गया था कि डॉ. मिश्रा ने अपनी सेवा पुस्तिका में कूटरचना की और 8 पन्ने जोड़कर पेंशन संबंधी आईएफएमआईएस सॉफ्टवेयर में अपनी पहली पत्नी का नाम हटाकर दूसरी पत्नी का नाम जोड़ दिया।

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लोकायुक्त जांच के दौरान डॉ. मिश्रा ने अपनी पहली पत्नी और उससे उत्पन्न पुत्री के पहचान से संबंधित दस्तावेज छिपा लिए थे। संचालनालय द्वारा जारी विभागीय जांच आदेश में यह भी कहा गया कि डॉ. मिश्रा के खिलाफ शिकायत की जांच पहले ही कमिश्नर, जबलपुर संभाग द्वारा पूर्ण कराई जा चुकी थी। जांच प्रतिवेदन के आधार पर डॉ. मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उनका प्रतिवाद संतोषजनक नहीं पाया गया।

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इसके परिणामस्वरूप विभागीय जांच शुरू करने का निर्णय लिया गया। डॉ. खरे को दी जांच की जिम्मेदारी जांच में डॉ. संजय खरे, मेडिकल विशेषज्ञ, सिविल अस्पताल गोविन्दपुरा, जिला भोपाल को जांचकर्ता नियुक्त किया गया है, जबकि डॉ. मेहरवान सिंह, वरिष्ठ संयुक्त संचालक, संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, भोपाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है।

साथ ही शासन ने जांच दल को निर्देश दिया गया है कि वे डॉ. मिश्रा के खिलाफ प्रचलित शिकायती प्रकरण की जांच एक माह के भीतर पूरी करें और जांच प्रतिवेदन सहित आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, मध्य प्रदेश को प्रस्तुत करें।

Friday, October 31, 2025

गंभीर अनियमितताएं पाये जाने पर मदन महल एक्‍स-रे एवं सोनोग्राफी सेंटर सील, रिकार्ड जप्‍त, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की टीम ने की कार्यवाही


गंभीर अनियमितताएं पाये जाने पर मदन महल एक्‍स-रे एवं सोनोग्राफी सेंटर सील, रिकार्ड जप्‍त, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की टीम ने की कार्यवाही


 

कलेक्‍टर के निर्देश पर स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की टीम ने की कार्यवाही

‘‘टाइम्स ऑफ क्राइम’’ : सभी जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036

जबलपुर. स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा कई प्रकार की गंभीर अनियमितताएं पाये जाने पर चौकीताल लम्‍हेटाघाट स्थित मदन महल एक्‍स-रे एवं सोनोग्राफी सेंटर को रिकार्ड जप्‍त कर सील कर दिया गया है। मदन महल एक्‍स-रे एवं सोनोग्राफी सेंटर का कलेक्‍टर राघवेन्‍द्र सिंह के निर्देश में आज शुक्रवार को स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अधिकारियों की टीम ने आकस्मिक निरीक्षण किया था। कलेक्‍टर को इस एक्‍स-रे एवं सोनोग्राफी सेंटर द्वारा विभिन्‍न अनियमितताएं बरतने की शिकायतें प्राप्‍त हुई थी।

मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा के अनुसार मदन महल एक्‍स-रे एवं सोनोग्राफी सेंटर के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान पाया गया कि यहां सोनोग्राफी कराने आये मरीजों में से किसी का भी फॉर्म-एफ नहीं भरा जा रहा था, मरीजों के पंजीयन एवं भुगतान की रसीदें भी उपलब्‍ध नहीं थी। यहां योग्‍य चिकित्‍सक एवं तकनीकी स्‍टाफ के अभाव में एक्‍स-रे एवं सोनोग्राफी करना पाया गया। एक्‍स-रे एवं सोनोग्राफी नॉन-मेडिकल स्‍टाफ द्वारा की जा रही थी।

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मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी के अनुसार रेफरल फार्म का अभाव एवं ऑनलाईन पोर्टल पर रिपोर्ट भी इस एक्‍स-रे एवं सोनोग्राफी सेंटर द्वारा नहीं की जा रही थी। साथ ही इस सेंटर का संचालन आवासीय भूमि पर बिना अनुमति के किया जा रहा था। डॉ. मिश्रा ने बताया कि निरीक्षण के दौरान पाया गया कि क्‍लीनिक में आने वाली अधिकांश महिलाएं जबलपुर जिले से बाहर की थीं। उनमें से कई का पहला या दूसरा बच्‍चा लड़की था और कुछ की पूर्व में एक या दो बार गर्भपात की हिस्‍ट्री भी पाई गई। इन परिस्थितियों के आधार पर मदन महल एक्‍स-रे एवं सोनोग्राफी सेंटर पर निरीक्षण दल द्वारा भ्रूण लिंग निर्धारण से संबंधित अवैध गति‍विधियां संचालित किये जाने का अनुमान भी लगाया गया है।

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मुख्‍य चिक‍ित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी ने बताया कि निरीक्षण में पाई गई इन गंभीर अनियमितताओं एवं संदिग्‍ध परिस्थितियों को देखते हुए सेंटर को तत्‍काल प्रभाव से सील कर दिया गया है तथा सभी अभिलेख, रजिस्‍टर, रिपोर्ट एवं उपकरणों को जब्‍त कर सुरक्षित कर लिया गया है। उन्‍होंने बताया कि सेंटर में गंभीर अनियमितताओं एवं संदिग्‍ध परिस्थितियों को देखते हुए इसके संचालक डॉ. हेमलेश चंद्र दुबे के विरूद्ध पीसीपीएनडीटी 1994 के तहत वैधानिक कार्यवाही प्रारंभ की जा रही है। इस एक्‍स-रे एवं सोनोग्राफी सेंटर का पंजीयन निरस्‍त करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। भूमि उपयोग परिवर्तन एवं अनाधिकृत से आवासीय भूमि का वाणिज्यिक उपयोग करने पर राजस्‍व विभाग को भी कार्यवाही के लिए सूचना भेजी जा रही है। मदन महल एक्‍स-रे एवं सोनोग्राफी सेंटर के संचालक डॉ. हेमलेश चन्‍द्र दुबे से स्‍पष्टीकरण प्राप्‍त कर उनके विरूद्ध अभियोजन की कार्यवाही भी की जायेगी।

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मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी के अनुसार मदन महल एक्‍स-रे एवं सोनोग्राफी सेंटर का निरीक्षण करने वाले दल में पीसीपीएनडीटी सलाहकार समिति के रेडियोलॉजिस्‍ट डॉ. पुष्‍पराज भटेले, जिला स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी एवं पीसीपीएनडीटी प्रभारी डॉ. विनीता उप्‍पल एवं नोडल अधिकारी नर्सिंग होम शाखा डॉ. आदर्श विश्‍नोई तथा पटवारी प्रवीण सिंह शामिल थे।

Monday, October 27, 2025

एम्स भोपाल में ब्रेन डेड युवक के अंगदान से पांच मरीजों को मिला नया जीवन


एम्स भोपाल में ब्रेन डेड युवक के अंगदान से पांच मरीजों को मिला नया जीवन

एम्स भोपाल में एक 37 वर्षीय ब्रेन डेड युवक द्वारा किए गए अंगदान से पांच मरीजों को नया जीवन प्राप्त हुआ है। मरीज के परिजनों ने मानवता और परोपकार की मिसाल पेश करते हुए उसके हार्ट, दोनों किडनी और दोनों कॉर्निया दान किए।

इस प्रक्रिया में दान किया गया हार्ट 41 वर्षीय मरीज में प्रत्यारोपित किया गया, जो एम्स भोपाल का तीसरा सफल हार्ट ट्रांसप्लांट रहा। एक किडनी का प्रत्यारोपण एम्स भोपाल में 30 वर्षीय मरीज में किया गया, जबकि दूसरी किडनी भोपाल के निजी अस्पताल भेजी गई। साथ ही, दो कॉर्निया से दो मरीजों को दृष्टि प्राप्त होगी।

इस जटिल एवं संवेदनशील प्रक्रिया को सफल बनाने में कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एनेस्थीसियोलॉजी, नेत्र रोग, फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी सहित अंग निष्कर्षण और प्रत्यारोपण से जुड़ी सभी टीमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इस हार्ट ट्रांसप्लांट हेतु मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और एम्स भोपाल प्रशासन द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की गई। अंगदान के उपरांत, मुख्यमंत्री द्वारा घोषित राज्य स्तरीय प्रोटोकॉल के अनुसार पुलिस दल एवं एम्स भोपाल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जो समाज में अंगदान के प्रति सम्मान, प्रेरणा और जागरूकता का प्रतीक बना।

Saturday, October 18, 2025

स्वास्तिक हॉस्पिटल को नहीं मिली नगर निगम की NOC : दस्तावेज़ों ने खोली सच्चाई


स्वास्तिक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर

Represent by : रेवांचल टाइम्स विशेष फॉलोअप रिपोर्ट, जबलपुर


विजयनगर क्षेत्र स्थित स्वास्तिक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर को लेकर लगातार उठ रहे विवादों के बीच अब नगर निगम जबलपुर के आधिकारिक दस्तावेज़ों से बड़ा खुलासा हुआ है।
लोक सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में नगर निगम भवन शाखा ने स्पष्ट किया है कि “स्वास्तिक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर को अस्पताल संचालन हेतु कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) या अनुमति पत्र जारी नहीं किया गया है।”
RTI में मांगी गई जानकारी
लोक सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत 14 अगस्त 2025 को दायर आवेदन में यह पूछा गया था कि
> “क्या नगर निगम, अग्निशमन विभाग एवं भवन शाखा द्वारा स्वास्तिक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, आईटीआई रोड श्रीधाम कॉलोनी के सामने स्थित अस्पताल को संचालन हेतु कोई एन.ओ.सी. प्रदान की गई है?”
इस पर नगर निगम भवन शाखा ने अपने उत्तर पत्र क्रमांक-भ.शा./2025-26/642 दिनांक 22.09.2025 में कहा कि —
> “नगर निगम भवन शाखा द्वारा उक्त अस्पताल को संचालन हेतु किसी प्रकार की एन.ओ.सी./अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है।”
लोक सूचना अधिकारी का जवाब
लोक सूचना अधिकारी (नगर निगम जबलपुर) द्वारा 24 सितंबर 2025 को दिए गए उत्तर में कहा गया कि भवन शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त अस्पताल के पास नगर निगम की स्वीकृति नहीं है।
इस प्रकार, सूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आवेदन का निस्तारण करते हुए “प्रकरण निरस्त किया गया” उल्लेख किया गया है।
अस्पताल संचालन पर उठे नए सवाल
नगर निगम के इस जवाब के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि स्वास्तिक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर बिना वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र के संचालित किया जा रहा है।
यह स्थिति म.प्र. नगर पालिका अधिनियम 1956, म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 तथा स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों का सीधा उल्लंघन है।
पहले भी लगे थे गंभीर आरोप
इससे पहले रेवांचल टाइम्स ने अपनी विशेष रिपोर्ट में खुलासा किया था कि
स्वास्तिक हॉस्पिटल ने गलत खसरा नंबर दर्शाकर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से नक्शा स्वीकृत कराया, परंतु वास्तविक निर्माण अन्य भूमि पर किया गया।
इसके अलावा —
फायर सेफ्टी मार्ग एवं पार्किंग की व्यवस्था नहीं की गई,
सार्वजनिक रास्ता बंद कर भारी मशीनें लगाई गईं,
ध्वनि व वायु प्रदूषण फैलाने वाले कम्प्रेशर खुले में लगाए गए।
इन सबके कारण नागरिकों का आवागमन बाधित हो गया है और आसपास के रहवासी लगातार परेशानी झेल रहे हैं।
कानूनी स्थिति
RTI में प्राप्त उत्तर के अनुसार, यदि अस्पताल के पास नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग तथा फायर विभाग की अनुमति नहीं है, तो अस्पताल संचालन अवैध माना जाएगा।
कानूनी रूप से यह निम्न अधिनियमों का उल्लंघन है —
1. म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 — धारा 30, 33, 34
2. म.प्र. भूमि विकास नियम, 1984 — नियम 31, 42, 43
3. भारतीय न्याय संहिता, 2023 — धारा 318, 336, 338, 340
4. वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम, 1981 — धारा 21, 22
5. Noise Pollution Rules, 2000 — नियम 3, 4
शिकायत अब उच्च स्तर तक पहुँची
मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्रालय, नगर निगम आयुक्त, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित 11 विभागों को भेजी गई है।
शिकायत में यह माँग की गई है कि —
अस्पताल के स्वीकृत नक्शे व वास्तविक निर्माण की जाँच की जाए,
अवैध निर्माण को निरस्त कर रास्ता खुलवाया जाए,
प्रदूषण फैलाने वाली मशीनें हटाई जाएँ,
और दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
नगर निगम के आधिकारिक दस्तावेज़ों में “NOC जारी न होने” का खुलासा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अगर बिना अनुमति कोई निजी अस्पताल वर्षों से संचालित हो रहा है, तो यह जिम्मेदारी तय करना जरूरी है कि निगरानी और कार्रवाई किस स्तर पर रोकी




Thursday, October 16, 2025

जबलपुर सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा ने किया भ्रष्टाचार, विभागीय अफसरों पर हैं जांच दबाने के आरोप


जबलपुर सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा ने किया भ्रष्टाचार, विभागीय अफसरों पर हैं जांच दबाने के आरोप 


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इसके बाद लोकायुक्त ने कई पत्र जारी कर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था लेकिन विभाग के वल्लभ भवन भोपाल में पदस्थ जिम्मेदार अधिकारी आरोपी क्रमांक 2 तरुण राठी, आईएएस, स्वास्थ्य आयुक्त ने जानबूझकर मामले की जांच को दबाया और इसका परिणाम यह हुआ कि डॉ. संजय मिश्रा द्वारा कथित रूप से किए गए अपराधों की प्रारंभिक जांच ही डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी अधूरी होने से निर्णायक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जा सकी है।

आरोपी क्रमांक 2 स्वास्थ्य आयुक्त तरूण राठी ने डॉ. संजय मिश्रा के साथ मिलीभगत करके उन्हें कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए काम किया है और इस निष्क्रियता और प्रशासनिक अनुचित और अवैध देरी के फलस्वरूप डॉ मिश्रा के खिलाफ कोई दंडात्मक उपाय शुरू नहीं हो पाए।

उन्होने न्यायालय को बताया कि लोकायुक्त को प्रस्तुत शिकायत में डॉ संजय मिश्रा द्वारा कोषालय प्रणाली (आईएफएमआईएस साफ्टवेयर) में झूठी प्रविष्ठी दर्ज करने, सेवा पुस्तिका के 8 दस्तावेज में षड्यंत्रकारी छेड़छाड़ कर दस्तावेजों की कूटरचना करने तथा अवैध रूप से संचालित पैथोलाजी लेवों से प्राप्त आय से दूसरी पत्नि के नामे संपत्ति फ्लेट खरीदी का आरोप लगाया गया था। इसके अतिरिक्त, डॉ. संजय मिश्रा द्वारा जांच के दौरान महत्वपूर्ण और प्रासंगिक जानकारी को छुपाया जाकर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने और झूठा साक्ष्य दिए जाने का अपराध करने का आरोप भी शिकायत में लगाया गया था।

परिवादी के अधिवक्ता की बहस को सुनने और सबूतों के अवलोकन उपरांत न्यायालय द्वारा अपने पारित आदेश में व्यक्त किया कि परिवाद में यह तथ्य लेख किया है कि परिवादी ने अनावेदक क्रमांक 1 व 2 के विरुद्ध विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त जबलपुर के समक्ष शिकायत की थी। ऐसी दशा में पुलिस अधीक्षक, विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त कार्यालय जबलपुर से इस आशय का प्रतिवेदन मंगाया जाये कि परिवादी द्वारा की गई शिकायत पर उनके द्वारा क्या कार्यवाही की गई।

न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि परिवादी द्वारा अनावेदक क्रमांक 1 व 2 के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियमए 988 की धारा 3 एवं सूचना एवं प्रौद्योगिकी अधिनियमए 2000 की धारा 228, 229, 233, 235, 236, 237, 238, 239, 340, 202, 67, 240 एवं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिताए 2023 की धारा 24 के अंतर्गत कार्यवाही किये जाने हेतु यह परिवाद प्रस्तुत किया गया है.

अतः प्रकरण की संपूर्ण परिस्थितियों में परिवाद पर संज्ञान लेने के पूर्व अनावेदक क्रमांक 1 डॉ संजय मिश्रा व अनावेदक क्रमांक 2 तरूण राठी को अभिकथित घटना की परिस्थितियों के बारे में प्राख्यान कथन करने और उनके वरिष्ठ अधिकारियों से घटना के तथ्यों और परिस्थितियों को अंतर्विष्ट करने वाली जांच रिपोर्ट प्राप्त करना उचित होगा।

उक्त आधार पर न्यायालय ने लोकायुक्त पुलिस जबलपुर को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने, अनावेदक क्रमांक 1 डॉ संजय मिश्रा व क्रमांक 2 तरूण राठी, स्वास्थ्य आयुक्त को उनका प्राख्यान कथन प्रस्तुत करने तथा लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रमुख सचिव को प्रतिवेदन हेतु सूचनापत्र प्रेषित करने का आदेश जारी कर परिवाद की सुनवाई की अगली तिथी 03/12/2025 नियत की।

Tuesday, October 14, 2025

चिकित्सा महाविद्यालयों में नर्सिंग के लगभग 1000 पदों तथा नर्सिंग ट्यूटर के कुल 711 पदों की भर्ती शीघ्र, देखें पूरी खबर...


चिकित्सा महाविद्यालयों में नर्सिंग के लगभग 1000 पदों तथा नर्सिंग ट्यूटर के कुल 711 पदों की भर्ती शीघ्र

सभी जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036

भोपाल : उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की गतिविधियों की वृहद समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि नर्सिंग, ए.एन.एम. और अन्य तकनीकी संवर्गों की भर्ती प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के साथ पूर्ण किया जाए ताकि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मानव संसाधन सुदृढ़ हो सकें। उन्होंने उपकरणों की खरीदी प्रक्रिया और अधोसंरचना विकास कार्यों की समीक्षा की। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव श्री संदीप यादव और आयुक्त श्री तरुण राठी उपस्थित रहे।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विभाग में विभिन्न पदों पर की जा रही भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की और समय अनुसार पदपूर्ति की कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। बताया गया कि वर्ष 2023 में रिक्त 515 पदों पर प्रतीक्षा सूची से काउंसलिंग की प्रक्रिया 13 अक्टूबर से प्रारंभ की गई है, वर्ष 2024 की 972 पदों पर भर्ती कार्यवाही वर्ष 2023 की प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत की जाएगी। नर्सिंग संवर्ग के लगभग 1260 पदों के लिए नियम संशोधन का प्रस्ताव वित्त विभाग को प्रेषित किया गया है।

चिकित्सा महाविद्यालयों में नर्सिंग के लगभग 1000 पदों तथा नर्सिंग ट्यूटर (टीचर्स) के कुल 711 पदों (328 + 383) की भर्ती संबंधी प्रस्तावों पर विभागीय स्तर पर कार्यवाही प्रगति पर है। सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में मेडिकल टीचर्स के वेतन-भत्तों में वृद्धि, नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती शीघ्र पूर्ण करने और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कर उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने दिशानिर्देश दिए।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने रीवा जिला चिकित्सालय में 200 बेड उन्नयन उपरांत 225 नये पदों की स्वीकृति की प्रक्रिया की समीक्षा कर शीघ्र औपचारिकताओं की पूर्ति करने के निर्देश दिए। साथ ही सागर चिकित्सा महाविद्यालय में यू जी अपग्रेडेशन के लिए टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में श्योपुर और सिंगरौली के नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों के अनुबंध पुनरीक्षण की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए ताकि परियोजनाओं की समयसीमा में कोई विलंब न हो। इसके साथ ही बुधनी चिकित्सा महाविद्यालय के अनुबंध पुनरीक्षण एवं एम.पी.बी.डी.सी. द्वारा निर्माणाधीन सी.सी.एच.बी. भवनों के भुगतान संबंधी समस्याओं के निराकरण पर भी चर्चा हुई।

Saturday, October 11, 2025

ब्रिज हेमा मेडिकल स्टोर का लाइसेंस 2022 में समाप्त, क्या ड्रग इंस्पेक्टर के साथ सेटिंग से चल रहा था 2025 आज तक मेडिकल स्टोर 


ब्रिज हेमा मेडिकल स्टोर का लाइसेंस 2022 में समाप्त, क्या ड्रग इंस्पेक्टर के साथ सेटिंग से चल रहा था 2025 आज तक मेडिकल स्टोर 

जबलपुर के सिहोरा अनुभव आगे अधिकारी के निर्देश अनुसार मझौली में स्थित 6 मेडिकल स्टोर पर जांच अभियान चलाया गया। अनुविभागीय अधिकारी सिहोरा के निर्देशानुसार मझौली में स्थित छह मेडिकल स्टोर्स पर जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान मोहित मेडिकल, मेहंदी छाया मेडिकल, ब्रिज हेमा मेडिकल, न्यू हर्ष मेडिकल, चंद्र मेडिकल और नरसिंह मेडिकल की जांच की गई।जांच दल में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट राजेश मिश्रा, सीएचसी मझौली के डॉ. श्री रविकांत मिश्रा और डॉ. सतीश पटेल सहित अन्य सदस्य थे। निरीक्षण में बताया गया कि ब्रिज हेमा मेडिकल का लाइसेंस 2022 में समाप्त हो गया था, जिसके कारण ड्रग इंस्पेक्टर से चर्चा के बाद मेडिकल स्टोर को सील कर दिया गया। आज जब मध्य प्रदेश में कब सिर्फ को लेकर मौत का तांडव मचा हुआ है तब जांच दाल मझौली ने मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण किया, जिस पर ब्रिज एवं मेडिकल स्टोर का लाइसेंस 2022 में समाप्त हो गया बताया गया। क्या 2022 से लेकर 2025 आज तक क्षेत्रीय ड्रग इंस्पेक्टर की सेटिंग से यह मेडिकल स्टोर संचालित हो रहा था। आज जब मौत का तांडव मचा है तब इस बात का खुलासा हुआ। क्या क्षेत्रीय ड्रग इंस्पेक्टर को यह ज्ञात नहीं होता है कि कौन सा मेडिकल स्टोर का लाइसेंस किस दिनांक तक संचालित है और किस दिनांक को मेडिकल स्टोर का लाइसेंस समाप्त हो रहा है। प्रश्न खड़ा होता है कि कहीं ना कहीं मेडिकल स्टोर और क्षेत्रीय ड्रग इंस्पेक्टर जरूर तालमेल है वरना किसी की हिम्मत नहीं होती कि वह बिना लाइसेंस के मेडिकल स्टोर संचालित कर सके।


ब्रिज हेमा मेडिकल स्टोर का लाइसेंस 2022 में समाप्त, क्या ड्रग इंस्पेक्टर के साथ सेटिंग से चल रहा था 2025 आज तक मेडिकल स्टोर 

आज जबलपुर के मझौली में मेडिकल स्टोर को सील किया गया है। निरीक्षक द्वारा बड़ी मासूमियत से बताया गया है कि ब्रिज हेमा मेडिकल का लाइसेंस 2022 में समाप्त हो गया है था और 10 अक्टूबर 2025 तक यह आराम से संचालित हो रहा था अगर छिंदवाड़ा में मौत का तांडव नहीं होता तो यह मेडिकल स्टोर शायद इन्हीं ड्रग इंस्पेक्टर की मेहरबानी से संचालित होते रहते हैं।
जबलपुर ड्रग इंस्पेक्टर पर भी होना चाहिए करवाई यह बहुत गंभीर मामला है कि एक हेमा मेडिकल का लाइसेंस 2022 समाप्त हो गया और वह 3 साल तक बिना लाइसेंस के क्षेत्र में मेडिकल स्टोर संचालित करता रहा और ड्रग इंस्पेक्टर के साथ उसकी टीम कुंभकरण की नींद सोई रही। कहीं ना कहीं इस मामले में भ्रष्टाचार का मामला है और जबलपुर के ड्रग्स इंस्पेक्टर और उनकी टीम के खिलाफ लापरवाही की कार्रवाई की जाना चाहिए ।

Saturday, October 4, 2025

मध्यप्रदेश में 'Coldrif कफ सिरप' की ब्रिकी पर बैन, सिरप में पाया जाने वाला डाइएथिलिन ग्लाइकॉल कितना खतरनाक है जाने...

 


सभी जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036

  • मासूमों की मौत पर MP सरकार का कड़ा एक्शन
  • Coldrif की बिक्री को पूरे मध्यप्रदेश में बैन, सिरप बनाने वाली कंपनी केअन्य प्रोडक्ट की बिक्री पर भी लगेगा बैन

कोल्ड्रिफ सिरप को बनाने वाली कंपनी के अन्य प्रोडक्ट की बिक्री पर भी बैन पूरे मध्यप्रदेश में बैन कर दिया है. ये सिरप बनाने वाली फैक्ट्री कांचीपुरम में है. इसलिए घटना के संज्ञान में आने के बाद राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार को जांच के लिए कहा था. 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप को लेकर देशभर में दहशत मची हुई है। कथित रूप से 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप पीने से राजस्थान और मध्य प्रदेश छिंदवाड़ा में 12 बच्चों की मौत हो गई है। इस घटना के बाद से मध्य प्रदेश और तमिलनाडू में यह सिरप बैन कर दी गई है। वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय इस सिरप के नमूने लेकर जांच करवा रहा है।



छिंदवाड़ा में Coldrif सिरप के कारण हुई बच्चों की मृत्यु अत्यंत दुखद है। इस सिरप की बिक्री को पूरे मध्यप्रदेश में बैन कर दिया है। सिरप को बनाने वाली कंपनी के अन्य प्रोडक्ट की बिक्री पर भी बैन लगाया जा रहा है। सिरप बनाने वाली फैक्ट्री कांचीपुरम में है, इसलिए घटना के संज्ञान में आने के बाद राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार को जांच के लिए कहा था। आज सुबह जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट के आधार पर कड़ा एक्शन लिया गया है। बच्चों की दुखद मृत्यु के बाद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई चल रही थी। राज्य स्तर पर भी इस मामले में जांच के लिए टीम बनाई गई है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

इसे भी पढ़ें : छत्‍तीसगढ़ में जल-जीवन मिशन में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार, आला अधिकारियों की सांठ-गांठ से योजना में लग रहा पलीता

मध्य प्रदेश सरकार के अनुरोध पर तमिलनाडु एफडीए ने कांचीपुरम स्थित स्रेसन फार्मा (M/s Sresan Pharma) के कारखाने से Coldrif कफ सिरप के सैंपल लिए थे. इनकी रिपोर्ट 3 अक्टूबर 2025 की शाम आई, जिसमें सैंपल में DEG की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई है. इसी बीच, 3 अक्टूबर 2025 से देश के 6 राज्यों में स्थित 19 दवा कंपनियों पर रिस्क बेस्ड इंस्पेक्शन (जोखिम आधारित जांच) शुरू की गई है.

कितना खतरनाक है 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप में पाया जाने वाला डाइएथिलिन ग्लाइकॉल

डाई एथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol - DEG) एक विषाक्त, रंगहीन, गंधहीन, मीठा स्वाद वाला तरल है जिसका उपयोग औद्योगिक रूप से विलायक (solvent), प्लास्टिक और रसायनों के निर्माण में होता है, लेकिन यह एथिलीन ग्लाइकॉल का एक डिमर (dimmer) होने के कारण मनुष्यों के लिए अत्यधिक जहरीला होता है और दूषित दवाओं व भोजन के कारण गंभीर विषाक्तता फैला सकता है। 

रासायनिक गुण और उपयोग

  • सूत्र: (HOCH₂CH₂)₂O। 
  • गुण: यह रंगहीन, व्यावहारिक रूप से गंधहीन और मीठे स्वाद वाला होता है। 
  • घुलनशीलता: यह पानी, अल्कोहल, ईथर, एसीटोन और एथिलीन ग्लाइकॉल में घुलनशील है। 
  • उपयोग:
    • विभिन्न उपभोक्ता उत्पादों में एक सामान्य घटक के रूप में इस्तेमाल होता है। 
    • प्लास्टिक, कपड़ा, लुगदी, कागज और अन्य रबर उत्पादों के निर्माण में एक मध्यवर्ती के रूप में प्रयोग किया जाता है। 
    • सीमेंट उद्योग में पीसने में सहायक के रूप में उपयोग होता है। 

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2020 में जम्मू और कश्मीर के 17 बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए , आधे से ज़्यादा की किडनी फेल होने से मौत हो गई

2020 के पहले सप्ताह में, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के रामनगर के लगभग 17 बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए , जिनमें से आधे से ज़्यादा की किडनी फेल होने से मौत हो गई। क्षेत्रीय औषधि नियंत्रक अधिकारियों ने जांच के बाद पाया कि कोल्डबेस्ट पीसी कफ सिरप के एक दोषपूर्ण बैच में 34.97% डायथिलीन ग्लाइकॉल था, जिसके परिणामस्वरूप विषाक्तता और बाद में गुर्दे की विफलता हुई।

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उत्पाद को वापस बुला लिया गया और एक जांच के बाद, भारत के औषधि महानियंत्रक, वीजी सोमानी ने इंडिया फार्मा 2020 में कहा कि जीएमपी का पालन नहीं किया गया था, और उत्पादन प्रक्रिया के दौरान ही लापरवाही पाई गई थी। हिमाचल प्रदेश सरकार कंपनी और उसके अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर रही है।

Tuesday, September 23, 2025

Certificate in Community Health (CCH)

 


Certificate in Community Health (CCH) जन स्वास्थ्य में प्रमाणपत्र

 


Certificate in Community Health (CCH) जन स्वास्थ्य में प्रमाणपत्र 

सामुदायिक स्वास्थ्य में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम (CCH), जिसे हिंदी में जन स्वास्थ्य भी कहा जाता है, एक एक-वर्षीय प्रमाणन कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) के अंतर्गत राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) द्वारा संचालित है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य underserved क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों का सामना करने के लिए कुशल स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना है। यह कार्यक्रम सामुदायिक स्वास्थ्य में आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल प्रदान करने पर केंद्रित है, जिससे व्यक्ति प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकें, स्वास्थ्य जागरूकता फैला सकें, और आपातकालीन स्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया दे सकें।

CCH कोर्स की अवधिCCH कोर्स न्यूनतम योग्यताCCH कोर्स शुल्क
एक (1) वर्षमान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पासINR 15,000

जन स्वास्थ्य में प्रमाणपत्र (CCH) विवरण

भारत को विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े शहरी क्षेत्रों में उचित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं:

  • पूरी तरह से विकसित चिकित्सा सुविधाओं की कमी
  • जनसंख्या घनत्व के अनुसार पर्याप्त डॉक्टरों की कमी
  • आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित उपलब्धता, विशेष रूप से रात के समय
  • प्रशिक्षित कर्मियों की कमी जो आपातकालीन मामलों को अस्पतालों में निर्देशित या रेफर कर सकें
  • परिवार नियोजन, बीमारी की रोकथाम (जैसे पोलियो, एड्स), और स्वच्छता के बारे में समुदाय को शिक्षित करने में कठिनाई

CCH कोर्स इन स्वास्थ्य चुनौतियों को हल करने के लिए ऐसे स्वास्थ्यकर्मी तैयार करने का प्रयास करता है जो:

  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों, अस्पतालों, नर्सिंग होम, और हेल्थ क्लब में स्वास्थ्य सेवाओं में सहायता कर सकें
  • स्वास्थ्य, स्वच्छता, और बीमारी की रोकथाम के बारे में जागरूकता फैलाने में मदद कर सकें।
  • प्राथमिक उपचार और आपातकालीन उपचार प्रदान कर सकें।
  • शिक्षा और मार्गदर्शन के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकें।

जन स्वास्थ्य में प्रमाणपत्र (CCH) के उद्देश्य​

CCH कार्यक्रम को पूरा करने के बाद, प्रशिक्षु निम्नलिखित प्राप्त करेंगे:

  • मानव शारीरिक रचना और शारीरिकी का बुनियादी ज्ञान
  • स्वास्थ्य, स्वच्छता, और पोषण की समझ
  • रोगों का ज्ञान: संचारी, असंचारी और जीवनशैली से संबंधित रोग, जिसमें आपातकालीन उपाय और रोगों की रोकथाम शामिल है
  • व्यावहारिक कौशल: प्राथमिक उपचार, फार्मेसी, और दवा प्रतिक्रिया प्रबंधन
  • मार्गदर्शन करने की क्षमता: मातृ और शिशु स्वास्थ्य देखभाल, परिवार नियोजन, और टीकाकरण

CCH कोर्स से मिलने वाले रोजगार के अवसर

CCH प्रमाणपत्र धारक के पास निम्नलिखित क्षेत्रों में काम करने के अवसर होंगे:

  • सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के रूप में समुदायों, अस्पतालों, नर्सिंग होम, और स्वास्थ्य केंद्रों में।
  • स्वास्थ्य जागरूकता, स्वच्छता, और आपातकालीन सहायता के लिए प्रोत्साहक के रूप में।

ये प्रशिक्षित पेशेवर, विशेष रूप से पिछड़े क्षेत्रों में, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

CCH कोर्स पाठ्यक्रम

पाठ्यक्रम को तीन भागों में विभाजित किया गया है:

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जिला ब्यूरो प्रमुख / तहसील ब्यूरो प्रमुख / रिपोर्टरों की आवश्यकता है

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‘‘ANI NEWS INDIA’’ सर्वश्रेष्ठ, निर्भीक, निष्पक्ष व खोजपूर्ण ‘‘न्यूज़ एण्ड व्यूज मिडिया ऑनलाइन नेटवर्क’’ हेतु को स्थानीय स्तर पर कर्मठ, ईमानदार एवं जुझारू कर्मचारियों की सम्पूर्ण मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले एवं तहसीलों में जिला ब्यूरो प्रमुख / तहसील ब्यूरो प्रमुख / ब्लाक / पंचायत स्तर पर क्षेत्रीय रिपोर्टरों / प्रतिनिधियों / संवाददाताओं की आवश्यकता है।

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नीयर दैनिक भास्कर प्रेस, जोन-1, एम. पी. नगर, भोपाल (म.प्र.)
मोबाइल : 098932 21036


क्र. पद का नाम योग्यता
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2. तहसील ब्यूरो प्रमुख / ब्लाक / हायर सेकेंडरी (12 वीं )
3. क्षेत्रीय रिपोर्टरों / प्रतिनिधियों हायर सेकेंडरी (12 वीं )
4. क्राइम रिपोर्टरों हायर सेकेंडरी (12 वीं )
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