Showing posts with label राष्ट्रीय. Show all posts
Showing posts with label राष्ट्रीय. Show all posts

Thursday, May 21, 2026

मध्य प्रदेश में लोकायुक्त संगठन को आरटीआई से छूट दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल और जताई नाराजगी


मध्य प्रदेश में लोकायुक्त संगठन को आरटीआई से छूट दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल और जताई नाराजगी

MP हाईकोर्ट ने हाल में लोकायुक्त पुलिस को हर एफआईआर (FIR) को 24 घंटे के भीतर अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का भी आदेश दिया था

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश लोकायुक्त के विशेष पुलिस स्थापना (Special Police Establishment - SPE) को सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम से छूट देने के मामले में राज्य सरकार पर बेहद तीखी और कड़ी टिप्पणी की है।

​जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने सुनवाई के दौरान मप्र सरकार की खिंचाई करते हुए न केवल लोकायुक्त को मिली इस छूट की वैधता पर सवाल उठाए, बल्कि सरकारी वकीलों के कोर्ट में रवैये को लेकर भी भारी नाराजगी जाहिर की।

​​सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ये महत्वपूर्ण आपत्तियां दर्ज की -

​1. "लोकायुक्त कोई खुफिया या सुरक्षा संगठन है क्या?"

​कोर्ट ने मप्र सरकार द्वारा वर्ष 2011 में जारी की गई उस अधिसूचना (Notification) पर गंभीर सवाल उठाया, जिसके तहत लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना (SPE) को आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया गया था।
​कानूनी पहलू : आरटीआई अधिनियम की धारा 24(4) के तहत राज्य सरकारें केवल 'खुफिया और सुरक्षा संगठनों' (Intelligence and Security Organisations) को ही आरटीआई से छूट दे सकती हैं।
​कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा कि सरकार यह साबित करे कि लोकायुक्त संगठन किस तरह से एक खुफिया या सुरक्षा संगठन की श्रेणी में आता है? कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी नहीं लाया गया है जिससे यह साबित हो। इसके अभाव में, 2011 की यह अधिसूचना आरटीआई अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है और इसे "कानूनी मंजूरी (Sanction of law)" प्राप्त नहीं माना जा सकता।

​2. संतोषजनक जवाब न मिलने पर अधिसूचना रद्द करने की चेतावनी :

​सुप्रीम कोर्ट ने मप्र के मुख्य सचिव (Chief Secretary) और महाधिवक्ता (Advocate General) को इस मामले में औपचारिक नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई पर राज्य सरकार की ओर से इस बात का संतोषजनक जवाब नहीं मिला कि लोकायुक्त को किस आधार पर छूट दी गई, तो कोर्ट 2011 की उस अधिसूचना को पूरी तरह से निरस्त (Quash) कर सकता है।

​3. सरकारी वकीलों की लापरवाही पर भारी नाराजगी:

​मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने म प्र सरकार का पक्ष रखने वाले पैनल के वकीलों के लापरवाह रवैये पर भी गंभीर टिप्पणी की।
​कोर्ट ने पाया कि जब मामला पुकारा गया, तो प्रदेश सरकार की ओर से कोई वकील मौजूद नहीं था।
​दोबारा बुलाए जाने पर जब एक काउंसिल उपस्थित हुए, तो उन्होंने मामले के तथ्यों को लेकर पूरी तरह अनभिज्ञता (Ignorance) जाहिर की।
​कोर्ट ने कहा : "यह हर दिन की बात हो गई है कि जब भी प्रदेश सरकार के मामले सूचीबद्ध होते हैं, वकील अदालत में मौजूद नहीं रहते। बुलाने पर वे आते हैं और केस की जानकारी होने से इंकार कर देते हैं।
सरकारी पैनल के वकीलों का ऐसा प्रयास बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।"
​कोर्ट ने इस संबंध में राज्य के लॉ सेक्रेटरी और मुख्य सचिव को वकीलों के इस पैनल की उपयोगिता और निरंतरता की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

​मामले की पृष्ठभूमि :

यह पूरा विवाद मप्र हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसमें हाईकोर्ट ने लोकायुक्त को 30 दिनों के भीतर आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी देने और आदेश का पालन न करने पर ₹5,000 का जुर्माना भरने का निर्देश दिया था।
राज्य सरकार ने अपनी 2011 की अधिसूचना का हवाला देकर इस आदेश को चुनौती दी थी, जो अब सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद खुद ही कानूनी संकट में घिर गई है।
​* MP हाईकोर्ट ने हाल में लोकायुक्त पुलिस को हर एफआईआर (FIR) को 24 घंटे के भीतर अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का भी आदेश दिया था,
जो इस संस्थान की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को और रेखांकित करता है।

Saturday, May 16, 2026

आइसना मध्य प्रदेश इकाई में वरिष्ठ पत्रकार कैलाश गौर प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त


आइसना मध्य प्रदेश इकाई में वरिष्ठ पत्रकार कैलाश गौर प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त


भोपाल । ऑल इंडिया स्माल पेपर्स एसोसिएशन (आइसना) मध्यप्रदेश इकाई में श्री कैलाश गौर जी को प्रांतीय उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया है।

वरिष्ठ पत्रकार कैलाश गौर जी की संगठन के प्रति कर्मठता और जुझारू छवि को देखते हुए संगठन के मध्य प्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष विनय जी. डेविड ने मध्यप्रदेश प्रांतीय इकाई में शामिल करते हुए उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया है।
कैलाश गौर जी ने पूर्व में कई पत्रकार संगठनों में प्रांतीय पदाधिकारी के रूप में सेवा दी है एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने दैनिक भास्कर भोपाल में कई वर्षों तक अपनी सेवा दी है। अभी हाल में इंदौर के दैनिक नवभारत में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।



आइसना मध्य प्रदेश इकाई में वरिष्ठ पत्रकार कैलाश गौर प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त



ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर्स एसोसिएशन (आइसना) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शिव शंकर त्रिपाठी जी ने आशीर्वाद एवं सभी संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्य गणों की ओर से आपको इस विशेष अवसर पर ढेर सारी शुभकामनाएं दी गई है।
आप सभी पदाधिकारी एवं सदस्यगण कैलाश गौर जी को इस विशेष अवसर पर बधाइयां शुभकामनाएं दे सकते हैं।
शुभकामनाओं सहित

विनय जी. डेविड
9893221036
प्रांतीय अध्यक्ष (मध्य प्रदेश)
ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
(आइसना)

Tuesday, May 12, 2026

कोर्ट का बड़ा फैसला देखें : मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का डर दिखाकर 85 लाख सब्सक्राइबर्स वाले 4PM चैनल को बंद कर दिया, कोर्ट को कहना पड़ा चैनल बहाल करो

कोर्ट का बड़ा फैसला देखें : मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का डर दिखाकर 85 लाख सब्सक्राइबर्स वाले 4PM चैनल को बंद कर दिया, कोर्ट को कहना पड़ा चैनल बहाल करो


मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का डर दिखाकर 85 लाख सब्सक्राइबर्स वाले 4PM चैनल को बंद कर दिया. लेकिन जब मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुँचा तो सच अदालत के रिकॉर्ड में खुद सामने आ गया.

कोर्ट ने साफ लिखा कि 4PM पर लगभग 50 हजार वीडियो थे और उनमें से सिर्फ 26 वीडियो पर आपत्ति जताई गई.
फिर सवाल ये है कि 50 हजार वीडियो वाले पूरे चैनल को क्यों बंद किया गया ! क्या यही लोकतंत्र है !
अगर 26 वीडियो पर विवाद था तो कानून के मुताबिक उन्हीं वीडियो पर कार्रवाई होनी चाहिए थी.
लेकिन यहाँ पूरा चैनल बंद कर दिया गया. यानी निशाना वीडियो नहीं था. निशाना आवाज थी.
सरकार अदालत में राष्ट्रीय सुरक्षा और पब्लिक ऑर्डर जैसे भारी-भरकम शब्द लेकर पहुँची. लेकिन आखिर में कोर्ट को कहना पड़ा कि कथित आपत्तिजनक वीडियो अस्थायी रूप से ब्लॉक करो और चैनल बहाल करो.
मतलब साफ है. करोड़ों दर्शकों की आवाज बंद करने की कोशिश की गई.
आज देश में हालत ये है कि सरकार से सवाल पूछो तो राष्ट्रविरोधी सच दिखाओ तो खतरा और सत्ता की आलोचना करो तो पूरा चैनल बंद.



लेकिन याद रखिए.
4PM बिकने वालों में नहीं है.
डरने वालों में नहीं है.
झुकने वालों में नहीं है.
मोदी सरकार पूरी ताकत लगाकर भी सच की आवाज को स्थायी रूप से बंद नहीं कर सकी.
आखिरकार अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज हो गया कि 50 हजार वीडियो वाले चैनल को सिर्फ 26 वीडियो के नाम पर बंद किया गया था. साथ ही ये आज तक नहीं बताया गया कि इन 26 विडियो में आपत्तिजनक क्या था !
इतिहास गवाह है.
सत्ता हमेशा सवालों से डरती है.
और जब सरकार मीडिया से डरने लगे, समझ लीजिए सच अभी जिंदा है


सच की जीत हुई है। आवाज बंद करने की एक और कोशिश नाकाम साबित हुई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 4PM चैनल को खोलने का फैसला जारी कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि चैनल पर 50 हजार वीडियो अपलोड किए गए हैं। सरकार को 26 वीडियो पर आपत्ति है, तो सिर्फ उन वीडियो को temporary तौर पर ब्लॉक किया जाए। और सरकार कारण भी बताए कि उन 26 वीडियो में क्या दिक्कत है? साथ ही, सरकार, 4PM को उन 26 वीडियो पर अपना पक्ष रखने के लिए समय दे। इस फैसले से एक बार फिर साबित हो गया है, देश में सच अभी कहा जाता रहेगा। और ये भी कि सरकार इस तरह से मनमाने फैसले नहीं ले सकती। और सवाल पूछना, सच दिखाना ही असली देशभक्ति है। 4PM बिना डरे, बिना दबे, सच कहता रहेगा। इस मौके पर आप सभी दर्शकों का शुक्रिया, आभार।











Sunday, May 10, 2026

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय एवं उनके 9 मंत्रियों ने ली शपथ


तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय एवं उनके 9 मंत्रियों ने ली शपथ


तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) चीफ और एक्टर से नेता बने सी जोसेफ विजय तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्होंने तमिल में शपथ ली। इस दौरान राहुल गांधी भी मौजूद रहे।

शपथ लेते समय विजय निर्धारित लाइनों के अलावा और बातें बोलने लगे, इस पर राज्यपाल अर्लेकर ने उन्हें टोक दिया और कहा कि वही पढ़ें जो लिखकर दिया है। विजय के साथ 9 और मंत्री भी शपथ ले रहे हैं। इनमें एन आनंद, आधव अर्जुन, डॉ. केजी अरुणराज, केए सेंगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, आर निर्मलकुमार, राजमोहन, डॉ. टीके प्रभु, सेल्वी एस कीर्तना का नाम शामिल है। ये सभी विजय की पार्टी TVK के ही विधायक हैं।

अभी सहयोगी दलों के किसी विधायक को विजय के पहले मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है। इससे पहले शनिवार को विजय ने राज्यपाल अर्लेकर को TVK, कांग्रेस, CPI, CPM, VCK और IUML के 121 विधायकों के समर्थन पत्र सौंपे। इसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का न्योता दिया। विजय की दो साल पुरानी पार्टी TVK ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में 234 में 108 सीटें जीतीं।

अब विजय के पास 121 विधायक हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 118 है। तमिलनाडु में 1967 के बाद यानी गैर-द्रविड़ दल का मुख्यमंत्री होगा। इससे पहले 1963-1967 तक कांग्रेस सरकार में एम भक्तवत्सलम मुख्यमंत्री थे।

थालापति विजय ने तमिनलाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, राज्य के नए सीएम बने


थालापति विजय ने तमिनलाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, राज्य के नए सीएम बने

टीवीके (TVK) प्रमुख थलपति विजय ने रविवार को तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में आयोजित समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय (थलपति विजय) ने 10 मई 2026 को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

यह 1967 के बाद पहली बार है जब द्रविड़ पार्टियों (DMK-AIADMK) से इतर किसी दल का नेता तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बना है। उनकी तमिलगा वेटरी कझगम (TVK), ने 108 सीटें जीतकर इतिहास रचा, और गठबंधन सहयोगियों (कांग्रेस, VCK, CPI, CPI(M), IUML) के समर्थन से बहुमत प्राप्त किया।

vijay : मैं जोसेफ़ विजय थलापति शपथ लेता हूं कि ,

" मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगा , मैं भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखूँगा ,

मैं तमिलनाडु राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करूँगा तथा मैं भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना, सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार न्याय करूँगा ",

#CMJosephVijay Chief Minister of Tamil Nadu में टीवीके प्रमुख सी जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। समारोह में बड़ी भीड़ और राजनीतिक हस्तियों की मौजूदगी देखी गई।

शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सीएम विजय सीधे राज्य सचिवालय पहुंचे और अपना कार्यभार संभाला। पद संभालते ही उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था की समीक्षा के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और नौकरशाहों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की । इस बैठक में उन्होंने अधिकारियों को राज्य में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
इस अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर विजय को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी और राज्य के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से साथ मिलकर काम करने की उम्मीद जताई। इसके जवाब में सीएम विजय ने आभार व्यक्त करते हुए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया।

Saturday, May 2, 2026

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया आपराधिक अवमानना ​​का नोटिस

 


बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, जबलपुर के अध्यक्ष, एडवोकेट धन्य कुमार जैन को आपराधिक अवमानना ​​का नोटिस जारी किया।

BCI की रिट याचिका के अनुसार, धन्य कुमार जैन ने जबलपुर के पुलिस अधीक्षक को शिकायत लिखी थी, जिसमें उन्होंने BCI के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज-जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली उच्च-स्तरीय चुनाव समिति के खिलाफ झूठे आरोप लगाए।

बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों की राज्य बार काउंसिल के चुनाव लड़ने की पात्रता के संबंध में जैन ने अपने पत्र में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ भी कथित तौर पर टिप्पणियां की थीं। अन्य बातों के अलावा, उन्होंने समिति के प्रमुख के रूप में जस्टिस धूलिया की CJI द्वारा की गई नियुक्ति पर संदेह जताया था, CJI पर उनके प्रति दुर्भावना रखने का आरोप लगाया। साथ ही बार निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण के CJI पीठ के आदेश को "न्यायिक पद का दुरुपयोग" बताते हुए उस पर सवाल उठाया।

इसके अलावा, जैन ने अपनी शिकायत में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर भी सवाल उठाया, जिसमें उसने दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज-जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया; जस्टिस वर्मा एक विवाद में तब घिर गए, जब आग लगने की एक घटना के बाद उनके आवास पर कथित तौर पर भारी मात्रा में नकदी मिली थी। शिकायत में दावा किया गया कि यह देश के लोकतंत्र के खिलाफ "देश की न्यायपालिका द्वारा किया गया जघन्य अपराध" है।

इसी पृष्ठभूमि में, CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने अवमानना ​​नोटिस का आदेश पारित किया। यह आदेश सीनियर एडवोकेट गुरु कृष्ण कुमार (BCI की ओर से) की दलीलें सुनने के बाद दिया गया। उन्होंने तर्क दिया कि जो कुछ हुआ वह "पूरी तरह से दुर्भाग्यपूर्ण" था और उस पर किसी न किसी तरह की कार्रवाई होनी चाहिए।

जस्टिस बागची ने टिप्पणी की,

"क्या वकीलों के नेता से इसी तरह के संयम की उम्मीद की जाती है?"

खंडपीठ ने धन्य कुमार जैन को नोटिस जारी कर यह बताने को कहा—

- उन पर 'अदालत की अवमानना ​​अधिनियम' के तहत आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए?

- उनका बार लाइसेंस क्यों न निलंबित कर दिया जाए?

- उन्हें बार एसोसिएशन के पदाधिकारी के पद से क्यों न हटा दिया जाए?

हालांकि, BCI ने राज्य को यह निर्देश देने की प्रार्थना की थी कि वह धन्य कुमार जैन द्वारा की गई शिकायत पर कोई कार्रवाई न करे, लेकिन खंडपीठ ने इस संबंध में कोई एकतरफा (Ex-Parte) आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।

CJI ने कहा,

"उन्हें पेश होने दीजिए... हमें अब भी उम्मीद है कि कुछ बेहतर समझ काम आएगी। आखिर, वकील तो वकील ही होते हैं। लेकिन जब हमें लगता है कि समझदारी की कोई गुंजाइश ही नहीं है तो हमें यह भी पता है कि नासमझ लोगों से कैसे निपटना है।"

Case Title: BAR COUNCIL OF INDIA Versus STATE OF MADHYA PRADESH AND ORS., W.P.(Crl.) No. 157/2026

Friday, April 3, 2026

93 लाख के घोटाले में जबलपुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा निलंबित


93 लाख के घोटाले में जबलपुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा निलंबित

सभी जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे  (https://timesofcrime.com/ ) जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036

जबलपुर। लगातार घोटाले दर घोटाले की आंच आखिरकार सीएमएचओ जबलपुर डा संजय मिश्रा तक पहुंच गई और तत्काल प्रभाव से आयुक्त लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग ने निलंबित कर दिया है। प्रभारी मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी, जिला जबलपुर सह क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं जबलपुर संभाग यानी दो प्रमुख पदों से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही निलंबन काल में मिश्रा का मुख्यालय कार्यालय क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल संभाग नियत किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

जबलपुर सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा ने किया भ्रष्टाचार, विभागीय अफसरों पर हैं जांच दबाने के आरोप

इसे भी पढ़ें :- जबलपुर सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा ने किया भ्रष्टाचार, विभागीय अफसरों पर हैं जांच दबाने के आरोप

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा फर्जी देयकों से भुगतान मामले में जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह द्वारा गठित जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर भोपाल मुख्यालय से यह आदेश जारी किए गए हैं। इस पूरे मामले में सरकारी खजाने को करोडों रुपये की चपत लगाने के साथ ही महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों के गायब होने की पुष्टि हुई है। जांच में पाया गया कि विभागीय स्तर पर वित्तीय नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई और बिना सामग्री प्राप्त किए ही निजी कंपनियों को भुगतान कर दिया गया।


93 लाख के घोटाले में जबलपुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा निलंबित

उल्लेखनीय है कि कलेक्‍टर राघवेन्‍द्र सिंह ने मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी कार्यालय में फर्जी देयक लगाकर भुगतान किये जाने के प्रकरण में दोषी पाये जाने पर स्‍टोर कीपर का दायित्‍व संभाल रहे फार्मासिस्‍ट नीरज कौरव को तत्‍काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था‌। वही इसी मामले में संविदा आधार पर नियुक्‍त जिला कार्यक्रम प्रबंधक आदित्‍य तिवारी एवं फार्मासिस्‍ट जवाहर लोधी को मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी कार्यालय से हटाकर जांच पूरी होने तक सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र सिहोरा में पदस्‍थ किया है।

डॉ. राहुल अग्रवाल एवं डॉ. आकाश जैन द्वारा संचालित क्‍लीनिकों का पंजीयन तत्‍काल प्रभाव से निरस्‍त

इसे भी पढ़ें :-डॉक्‍टर्स हाउस सहित तीन क्‍लीनिकों का पंजीयन निरस्‍त, मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी ने जारी किया आदेश

संविदा आधार पर इन दोनों कर्मचारियों के विरूद्ध कार्यवाही का प्रस्‍ताव डायरेक्‍टर एनएचएम को भेजा गया था। ज्ञात हो कि कलेक्‍टर श्री सिंह द्वारा मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी कार्यालय में फर्जी देयकों के माध्‍यम से साईनेज निर्माण तथा स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र सामग्री के नाम से भोपाल की निजी कंपनी को बिना सामग्री प्राप्त हुए भुगतान किये जाने की शिकायतें प्राप्‍त होने पर डिप्‍टी कलेक्‍टर रघुवीर सिंह मरावी के नेतृत्‍व में जांच दल गठित किया था।

स्वास्तिक हॉस्पिटल को नहीं मिली नगर निगम की NOC : दस्तावेज़ों ने खोली सच्चाई

इसे भी पढ़ें :-स्वास्तिक हॉस्पिटल को नहीं मिली नगर निगम की NOC : दस्तावेज़ों ने खोली सच्चाई

जांच में पाया गया था 12 फर्जी देयकों के माध्‍यम से भोपाल की सिंह एंटरप्राइजे़ज को साइनेज एवं स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र सामग्री के नाम से 93 लाख 04 हजार 998 रूपये का भुगतान किया जा चुका है। जबकि, भौतिक रूप से यह सामग्री प्राप्‍त ही नहीं हुई थी। जांच रिपोर्ट को आगे की कार्यवाही के लिए डायरेक्‍टर एनएचएम भोपाल को प्रेषित कर दिया गया था।

  • भोपाल की एक फर्म को 82.51 लाख का क्रय आदेश जारी कर भुगतान भी कर दिया, जबकि सामग्री आज तक रिसीव नहीं हुई। 
  • शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं में बिना रंगाई-पुताई किए एवं बिना कम्प्यूटर सुधार किए 51.30 लाख का फर्जी भुगतान।
  • जबलपुर की एक फर्म को 25 लाख का भुगतान, इसमें वर्क ऑर्डर 2 मार्च को जारी हुआ और 3 दिन में बिल लगा दिया गया। 
  • जबलपुर की फर्मों से कम्प्यूटर सामग्री नहीं ली गई, सीएमएचओ स्टोर में इससे जुड़ी एंट्री नहीं है, फिर भी भुगतान किया गया।

Thursday, April 2, 2026

भड़पुरा में शोभापुर पहाड़ी के स्वरूप को परिवर्तित कर कॉलोनी निर्माण के प्रकरण में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का फैसला, 4 करोड़ रुपये का अर्थदंड अधिरोपित


कॉलोनाइजर और भूमि स्वामियों पर 4 करोड़ रुपये का अर्थदंड अधिरोपित.


कॉलोनाइजर और भूमि स्वामियों पर 4 करोड़ रुपये का अर्थदंड अधिरोपित.

भड़पुरा में शोभापुर पहाड़ी के स्वरूप को परिवर्तित कर कॉलोनी निर्माण के प्रकरण में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का फैसला

गूगल अर्थ की डिजिटल इमेज भी बनी साक्ष्य.

जबलपुर - राँझी तहसील के अंतर्गत ग्राम भड़पुरा में शोभापुर पहाड़ी के स्वरूप में परिवर्तन करने तथा बिना अनुमति के मिट्टी, मुरम और बोल्डर का खनन कर आवासीय कॉलोनी के निर्माण में उपयोग करने के प्रकरण में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कॉलोनाइजर सीओडी कॉलोनी निवासी अभिलाष तिवारी एवं भूमि स्वामी न्यू शोभापुर निवासी श्रीमती शोभना सिंह, मुकेश सिंह, महेश सिंह, नरेंद्र सिंह, श्रीमती रागिनी सिंह एवं रमेश सिंह के विरुद्ध 4 करोड़ 08 लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया है।

कलेक्टर श्री सिंह ने प्रकरण में पारित आदेश में तय समय के भीतर अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर वसूली के लिये आरआरसी जारी करने तथा इसके बावजूद भी अर्थदंड की राशि जमा नहीं किये जाने की स्थिति में तहसीलदार के माध्यम से कुर्की की कार्यवाही करने के आदेश खनिज अधिकारी को दिये हैं।

कलेक्टर कोर्ट में यह प्रकरण ग्राम भड़पुरा में पटवारी हल्का नम्बर 02 की खसरा नम्बर 391/13 क एवं अन्य खसरे की 4.24 हेक्टेयर भूमि में से 2.58 हेक्टेयर निजी भूमि पर अवैध उत्खनन और कॉलोनी निर्माण किये जाने की प्राप्त शिकायत पर तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पटवारी एवं खनिज निरीक्षकों द्वारा संयुक्त निरीक्षण के बाद दिये गये प्रतिवेदन के आधार पर प्रारंभ किया गया था।

राजस्व एवं खनिज विभाग को टीम ने जांच कर इस प्रकरण में भूमि स्वामी नरेंद्र सिंह ठाकुर के पुत्र निशांत सिंह एवं कॉलोनाइजर अभिलाष तिवारी द्वारा खनिज का अवैध भंडारण किये जाने पर एक हजार घनमीटर मुरम एवं एक हजार घनमीटर बोल्डर के लिये 50 लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित करना प्रस्तावित किया था। जिसके आधार पर भूमि स्वामियों और कॉलोनाइजर को नोटिस जारी तथा सुनवाई के बाद कलेक्टर कोर्ट ने आदेश जारी कर 50 लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया था। कलेक्टर कोर्ट के इस आदेश इस आदेश के विरुद्ध  कमिश्नर न्यायालय में अपील प्रस्तुत की गई थी तथा कमिश्नर द्वारा कलेक्टर  के आदेश को यथावत रखा गया था।

पहाड़ी के मूल स्वरूप में परिवर्तन कर कॉलोनी का निर्माण किये जाने की इस शिकायत पर बाद में कलेक्टर द्वारा अनुविभागीय राजस्व अधिकारी राँझी एवं जिला खनिज अधिकारी से भी शिकायत की जांच कराई गई थी। अनुविभागीय राजस्व अधिकारी एवं जिला खनिज अधिकारी अपने जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया था कि इस प्रकरण में समस्त अनुमतियां प्राप्त कर कॉलोनी के विकास कार्य हेतु समतलीकरण किया गया है। इसके बावजूद कमर्शियल प्रोजेक्ट होने से कॉलोनाइजर और भूमि स्वामी को खनिज का उपयोग किये जाने के पूर्व उपयोग किये गये खनिज की रॉयल्टी अग्रिम रूप से जमा करनी थी। किंतु, उनके द्वारा ऐसा न करके समतलीकरण के कार्य के दौरान निकले खनिज का उपयोग बिना रॉयल्टी का भुगतान किये किया गया, जो मध्यप्रदेश खनिज ( अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) नियम 2022 के प्रावधानों का उल्लंघन है। 

अनुविभागीय राजस्व अधिकारी राँझी एवं जिला खनिज अधिकारी ने अपने प्रतिवेदन में उल्लेख किया था कि बिना अनुमति उपयोग किये गये 13 हजार 600 घनमीटर खनिज (मिट्टी, मुरम और बोल्डर) की 6 लाख 80 हजार रुपये की रॉयल्टी की पंद्रह गुना 1 करोड़ 02 लाख रुपये अर्थदण्ड के रूप में तथा पर्यावरण क्षतिपूर्ती के 1 करोड़ 02 लाख रुपये और इस प्रकार कुल 2 करोड़ 04 लाख रुपये की राशि, एक हजार रुपये के प्रशमन शुल्क के साथ कॉलोनाइजर तथा भूमि स्वामियों से जमा कराकर प्रकरण का निराकरण किया जा सकता है।

गूगल अर्थ डिजिटल इमेज से भी हुई पहाड़ी के स्वरूप में परिवर्तन की पुष्टि :-


भड़पुरा में शोभापुर पहाड़ी के स्वरूप में परिवर्तन कर कॉलोनी के विकास करने के इस प्रकरण में कलेक्टर श्री राघवेंद्र सिंह द्वारा पारित आदेश में खनिज निरीक्षक द्वारा दिये गये जांच प्रतिवेदन के साथ संलग्न की गई गूगल अर्थ से प्राप्त डिजिटल इमेज का भी उल्लेख किया गया है। आदेश में कहा गया है कि वर्ष 2019 से वर्ष 2025 की गूगल अर्थ की डिजिटल इमेज के अवलोकन से भी यह स्पष्ट है कि वर्ष 2019 में प्रश्नाधीन भूमि का भौतिक स्वरूप पहाड़ीनुमा आकृति का था, जिसे वर्ष 2020, 2021 एवं वर्ष 2022 में परिवर्तित कर यहां निर्माण आदि की गतिविधियां की गई हैं।

Tuesday, March 31, 2026

महाराष्ट्र के बाबा अशोक खरात की 7 घंटे की प्रेमपुर्वक पूछताछ में पता चलीं यें बातें पढ़ लिजिए 👇


महाराष्ट्र के बाबा अशोक खरात की 7 घंटे की प्रेमपुर्वक पूछताछ में पता चलीं यें बातें पढ़ लिजिए

सभी जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे  (https://timesofcrime.com/ ) जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036 

वहीं इस मामले में बाबा की भक्तिन रहीं महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती रूपाली चाकणकर की तरफ से यें सफाई भी दी गई है कि बाबा के साथ जों उनकी फोटो/वीडियोज है वो उनके आयोग की अध्यक्षा बनने से पहले के हैं, और उन्हें महिला आयोग की अध्यक्षा का पद भी बाबा ने ही दिलवाया था!

यह सवाल अब भी है..??????
बाबा तो रुद्राक्ष वाले बाबा से भी बहुत ज़्यादा श्याणा निकला! बाबा 100 रुपये किलो के इमली बीज को बाबा बना देता था 'चमत्कारी सिद्ध बीज' बाबा बाजार से सौ रुपए किलो में साधारण इमली के बीज खरीदता था। फिर स्टाफ से पॉलिश करवाता था! चमकाता था! फिर पूजा-पाठ का ड्रामा रचता था!
और फिर बाबा भक्तों को बोलता था कि अब “ये बीज भगवान श्रीकृष्ण ने खुद आशीर्वाद में दिएं है! और इन्हें घर में रखो तो सारी परेशानियाँ, ग्रह दोष, दुश्मन सब भाग जाएंगे!” नो दो ग्यारा हो जाएंगे! सुख शांति और समृद्धि आ जाएंगी...
ऐसे में बाबा का एक-एक बीज ₹एक-1 लाख तक में बिकता था, भक्तों को कहता था कि यें बीज अभिमंत्रित है! जैसे रुद्राक्ष होता है! मूर्ख भक्त लोग रुपये देते और खुशी-खुशी यें सोचते हुए बड़े चाव से लेकर जाते थे कि यें ही तो बाबा का असली आशीर्वाद है...
🤔🤔🤔
बाबा कभी कभी नकली सांप का खेल भी दिखाता था जिसे भक्त लोग बड़ें चाव से देखते थे जैसे ही बाबा पुजा अर्चना पर बैठते थे तो अचानक रिमोट कंट्रोल से चलने वाले नकली प्लास्टिक के असली से दिखने वाले सांप हिलते थे तो लोग डर जाते थे और फिर बाबा उनको रिमोट कंट्रोल से कंट्रोल कर लेता था और भक्त लोग जानते थे कि यें देखो बाबा की शक्ति है..
यहीं नहीं बाबा के पास बाघ की खाल, जंगली जानवरों के नकली सामान सहित बाबा के पास पूरा का पुरा तांत्रिक सीन सेट रहता था! जिससे बाबा डर का माहौल बनाकर खुद को 'महान रक्षक' बताता था और फिर भक्तों से लाखों रुपये चढ़ावा में ऐंठ लेता था।


महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती रूपाली चाकणकर की तरफ से यें सफाई


यें तो हुईं पुरूषों के साथ खेल खेलने की बाबा की विध्धा.....
अब सुनो बाबा के महिलाओं के साथ तो खेल और भी खतरनाक खेल की दास्तां!
👇
बाबा पहले महिलाओं का भरोसा जीतता था, फिर कुछ महिलाएं तो अपने आप बाबा पर फिदा हो जाती थी और बाबा जो भी उनके साथ करता था उसे आशिर्वाद समझकर खुशी-खुशी ग्रहण कर लिया करती थी और जों नहीं मानती थी उन्हें बाबा नशे की दवा या हिप्नोसिस से बेसुध करके उनके गुप्त कैमरे से वीडियोज बनाता था और फिर उन्हें बाबा ब्लैकमेल करता था। बाबा के पास अब तक ऐसे 58 अश्लील वीडियो पुलिस को पेन ड्राइव में मिल चुके हैं।
बाबा पहले पीड़ित की आर्थिक स्थिति परिस्थितियों को पुरी तरह से देखता था, फिर उसी स्टेंडर्ड से उसके साथ ड्रामा रचता था और उल्लू बनाता था।
बाबा ने अबतक सौ से ज्यादा विदेशी यात्राएँ भी कर लीं है और बाबा के पास करीब 150 करोड़ से भी ज्यादा की संपत्ति है बाबा के पास यें सब कुछ अंधविश्वास की आड़ में लोगों से इकट्ठा किया गया धन संपत्ति है।
बाबा के उपर अब-तक 6 शिकायतें तो पुलिस के पास दर्ज़ हो चुकीं और रोज नई-नई बातें भी बाबा की सामने आती जा रही हैं। जरा सोचिये तो सही कि संत ज्ञानेश्वर और संत तुकाराम के इलाके में ये सब हुआ है...???????
नोट: बाकी बाबा की छानबीन में पूरी तरीके से पुलिस लगी है और कोई भी ठोस जानकारी आएगी तो आप तक जरूर शेयर की जाएगी।

कौन है ये 'बाबा' अशोक खरात, क्यों फंसी महिला आयोग की अध्यक्ष, क्या वायरल वीडियो रूपाली चाकणकर के साथ है?


कौन है ये 'बाबा' अशोक खरात, क्यों फंसी महिला आयोग की अध्यक्ष, क्या वायरल वीडियो रूपाली चाकणकर के साथ है?


🛑 'बाबा' अशोक खरात ये बंदा खुद को बहुत बड़ा ज्योतिषी और नंबरों का खेल जानने वाला (Numerologist) कहता है। नाशिक में इसका अच्छा-खासा रुतबा मन जाता था। कहता था कि मेरे पास आओ, मैं तुम्हारी सारी टेंशन दूर कर दूँगा।
लेकिन ये महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठाता था। आरोप है कि ये उन्हें👉 नशीली चीजें खिलाकर उनके साथ गलत काम करता और कैमरे से वीडियो बना लेता था ताकि बाद में उन्हें ब्लैकमेल कर सके।
🛑 रूपाली चाकणकर का इसमें क्या लेना-देना देखो रूपाली जी महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष थीं (जिनका काम महिलाओं को न्याय दिलाना है)।
अब हुआ ये कि इनका एक पुराना वीडियो (करीब 2021 का) बाहर आ गया। वीडियो में वो इस बाबा के पैर धो रही हैं, आरती उतार रही हैं और उसे 'भगवान' जैसा बता रही हैं।
👉पंगा यहाँ फंसा जनता कहने लगी कि जो महिला खुद औरतों के हक के लिए लड़ती है, वो ऐसे 'ढोंगी' बाबा के सामने नतमस्तक कैसे हो सकती है? लोग कह रहे रूपाली चाकणकर खुद बाबा का शिकार हो चुकी थी। और उन्हें सब पता नहीं था कि ये आदमी क्या गुल खिला रहा है?
🛑 धमाका कब हुआ 👇?
पुलिस ने जब बाबा के फार्महाउस पर छापा मारा, तो वहां 50 से ज्यादा महिलाओं के गंदे वीडियो मिले। जैसे ही बाबा गिरफ्तार हुआ, रूपाली चाकणकर वाला वो पुराना वीडियो फिर से वायरल हो गया और लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
🛑 अब क्या हुआ? (इस्तीफा और सियासत)
👉 सोशल मीडिया पर लोगों ने रूपाली चाकणकर को खूब ट्रोल किया। विपक्ष ने भी घेर लिया।
👉 रूपाली जी ने कहा कि मैं तो बस एक सत्संग/प्रोग्राम में गई थी, मुझे बाबा के काले कारनामों का आइडिया नहीं था।
👉 दबाव इतना बढ़ गया कि उन्होंने 'नैतिकता' (Ethics) के आधार पर महिला आयोग के पद से इस्तीफा दे दिया।
🛑लोग पूछ रहे है 👇
👉 क्या ये बाबा सिर्फ अपने दम पर इतना सब कर रहा था, या इसके पीछे बड़े-बड़े नेताओं का हाथ था?
👉 क्या बड़े लोगों के कनेक्शन की वजह से ही पुलिस इतने सालों तक चुप रही?
👉 क्या सिर्फ इस्तीफा दे देने से उन महिलाओं को न्याय मिल जाएगा जिनका वीडियो इस बाबा के पास है?

Popular Posts

dhamaal Posts

जिला ब्यूरो प्रमुख / तहसील ब्यूरो प्रमुख / रिपोर्टरों की आवश्यकता है

जिला ब्यूरो प्रमुख / तहसील ब्यूरो प्रमुख / रिपोर्टरों की आवश्यकता है

ANI NEWS INDIA

‘‘ANI NEWS INDIA’’ सर्वश्रेष्ठ, निर्भीक, निष्पक्ष व खोजपूर्ण ‘‘न्यूज़ एण्ड व्यूज मिडिया ऑनलाइन नेटवर्क’’ हेतु को स्थानीय स्तर पर कर्मठ, ईमानदार एवं जुझारू कर्मचारियों की सम्पूर्ण मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले एवं तहसीलों में जिला ब्यूरो प्रमुख / तहसील ब्यूरो प्रमुख / ब्लाक / पंचायत स्तर पर क्षेत्रीय रिपोर्टरों / प्रतिनिधियों / संवाददाताओं की आवश्यकता है।

कार्य क्षेत्र :- जो अपने कार्य क्षेत्र में समाचार / विज्ञापन सम्बन्धी नेटवर्क का संचालन कर सके । आवेदक के आवासीय क्षेत्र के समीपस्थ स्थानीय नियुक्ति।
आवेदन आमन्त्रित :- सम्पूर्ण विवरण बायोडाटा, योग्यता प्रमाण पत्र, पासपोर्ट आकार के स्मार्ट नवीनतम 2 फोटोग्राफ सहित अधिकतम अन्तिम तिथि 30 मई 2019 शाम 5 बजे तक स्वंय / डाक / कोरियर द्वारा आवेदन करें।
नियुक्ति :- सामान्य कार्य परीक्षण, सीधे प्रवेश ( प्रथम आये प्रथम पाये )

पारिश्रमिक :- पारिश्रमिक क्षेत्रिय स्तरीय योग्यतानुसार। ( पांच अंकों मे + )

कार्य :- उम्मीदवार को समाचार तैयार करना आना चाहिए प्रतिदिन न्यूज़ कवरेज अनिवार्य / विज्ञापन (व्यापार) मे रूचि होना अनिवार्य है.
आवश्यक सामग्री :- संसथान तय नियमों के अनुसार आवश्यक सामग्री देगा, परिचय पत्र, पीआरओ लेटर, व्यूज हेतु माइक एवं माइक आईडी दी जाएगी।
प्रशिक्षण :- चयनित उम्मीदवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण भोपाल स्थानीय कार्यालय मे दिया जायेगा, प्रशिक्षण के उपरांत ही तय कार्यक्षेत्र की जबाबदारी दी जावेगी।
पता :- ‘‘ANI NEWS INDIA’’
‘‘न्यूज़ एण्ड व्यूज मिडिया नेटवर्क’’
23/टी-7, गोयल निकेत अपार्टमेंट, प्रेस काम्पलेक्स,
नीयर दैनिक भास्कर प्रेस, जोन-1, एम. पी. नगर, भोपाल (म.प्र.)
मोबाइल : 098932 21036


क्र. पद का नाम योग्यता
1. जिला ब्यूरो प्रमुख स्नातक
2. तहसील ब्यूरो प्रमुख / ब्लाक / हायर सेकेंडरी (12 वीं )
3. क्षेत्रीय रिपोर्टरों / प्रतिनिधियों हायर सेकेंडरी (12 वीं )
4. क्राइम रिपोर्टरों हायर सेकेंडरी (12 वीं )
5. ग्रामीण संवाददाता हाई स्कूल (10 वीं )

SUPER HIT POSTS

TIOC

''टाइम्स ऑफ क्राइम''

''टाइम्स ऑफ क्राइम''


23/टी -7, गोयल निकेत अपार्टमेंट, जोन-1,

प्रेस कॉम्पलेक्स, एम.पी. नगर, भोपाल (म.प्र.) 462011

Mobile No

98932 21036, 8989655519

किसी भी प्रकार की सूचना, जानकारी अपराधिक घटना एवं विज्ञापन, समाचार, एजेंसी और समाचार-पत्र प्राप्ति के लिए हमारे क्षेत्रिय संवाददाताओं से सम्पर्क करें।

http://tocnewsindia.blogspot.com




यदि आपको किसी विभाग में हुए भ्रष्टाचार या फिर मीडिया जगत में खबरों को लेकर हुई सौदेबाजी की खबर है तो हमें जानकारी मेल करें. हम उसे वेबसाइट पर प्रमुखता से स्थान देंगे. किसी भी तरह की जानकारी देने वाले का नाम गोपनीय रखा जायेगा.
हमारा mob no 09893221036, 8989655519 & हमारा मेल है E-mail: timesofcrime@gmail.com, toc_news@yahoo.co.in, toc_news@rediffmail.com

''टाइम्स ऑफ क्राइम''

23/टी -7, गोयल निकेत अपार्टमेंट, जोन-1, प्रेस कॉम्पलेक्स, एम.पी. नगर, भोपाल (म.प्र.) 462011
फोन नं. - 98932 21036, 8989655519

किसी भी प्रकार की सूचना, जानकारी अपराधिक घटना एवं विज्ञापन, समाचार, एजेंसी और समाचार-पत्र प्राप्ति के लिए हमारे क्षेत्रिय संवाददाताओं से सम्पर्क करें।





Followers

toc news