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Friday, January 30, 2026

अवयस्क लड़की की सहमति से उसके साथ संबंध बनाने वाले लड़के को 20 साल की सजा


 अवयस्क लड़की की सहमति से उसके साथ संबंध बनाने वाले लड़के को 20 साल की सजा 

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भोपाल के विशेष POCSO न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि नाबालिग की सहमति कानून की नजर में कोई मायने नहीं रखती।

कोर्ट ने कहा कि यदि पीड़िता नाबालिग (18 वर्ष से कम) है, तो उसकी "सहमति" (Consent) को कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता। शारीरिक संबंध के मामलों में नाबालिग की मर्जी कानूनन शून्य होती है।
विशेष न्यायाधीश (पाक्सो) कुमुदिनी पटेल ने स्पष्ट किया कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम
(​POCSO Act / Protection of Children from Sexual Offences) का मूल उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण से बचाना है। भले ही नाबालिग ने अपनी इच्छा से संबंध बनाए हों, कानून इसे अपराध की श्रेणी में ही रखेगा।

इस मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए उसे 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
​भारतीय न्याय संहिता/ आईपीसी की ​धारा 375 के अंतर्गत अट्ठारह वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाना 'बलात्कार' की श्रेणी में आता है, चाहे उसकी सहमति हो या न हो।

​POCSO धारा 4 & 6 नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए कड़े दंड का प्रावधान करती हैं।
इस मामले में निशातपुरा, भोपाल का दिनेश 14 साल की अवयस्क लड़की को भगा कर ले गया था। उसने लड़की से शादी करके उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाए थे। लड़की के परिवार की शिकायत पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। घटना 17 मार्च 2024 की है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(4) के तहत किसी लोक सेवक (public servant) के विरुद्ध मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत तभी प्रस्तुत की जा सकती है, जब शिकायतकर्ता पहले धारा 175(3) का अनुपालन करे


सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(4) के तहत किसी लोक सेवक (public servant) के विरुद्ध मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत तभी प्रस्तुत की जा सकती है, जब शिकायतकर्ता पहले धारा 175(3) का अनुपालन करे

 

दिल्ली . सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(4) के तहत किसी लोक सेवक (public servant) के विरुद्ध मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत तभी प्रस्तुत की जा सकती है, जब शिकायतकर्ता पहले धारा 175(3) का अनुपालन करे।

अर्थात्, शिकायतकर्ता को यह दिखाना अनिवार्य है कि उसने पहले पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) के समक्ष शपथ-पत्र (affidavit) सहित लिखित शिकायत दी थी।
यह निर्णय जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने दिया। खंडपीठ के समक्ष यह प्रश्न था कि क्या धारा 175(4) एक स्वतंत्र प्रावधान है, जिसके तहत मजिस्ट्रेट मौखिक शिकायत पर भी कार्रवाई कर सकता है, या फिर यह धारा 175(3) का ही एक प्रक्रियात्मक विस्तार है, जिसमें Priyanka Srivastava Vs. State of U.P. (2015) में निर्धारित सुरक्षा उपाय लागू होंगे।

धारा 175(3) और 175(4) का संबंध

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 175(4) कोई स्वतंत्र या अलग-थलग प्रावधान नहीं है, बल्कि इसे धारा 175(3) के साथ सामंजस्यपूर्ण ढंग से पढ़ा जाना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि:
किसी लोक सेवक के विरुद्ध मजिस्ट्रेट के समक्ष सीधे शिकायत दाखिल कर जांच का आदेश नहीं मांगा जा सकता,
जब तक कि शिकायतकर्ता यह न दिखाए कि उसने पहले धारा 173(4) BNSS के तहत पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया था और
उसके बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष शपथ-पत्र सहित आवेदन प्रस्तुत किया गया हो।

अदालत ने कहा:

“पुलिस अधीक्षक के समक्ष उपलब्ध उपाय का सहारा लेना, न्यायिक मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र को सक्रिय करने के लिए एक अनिवार्य पूर्व-शर्त है।”
प्रक्रिया को दरकिनार करने की अनुमति नहीं
अदालत ने चेतावनी दी कि यदि धारा 175(4) को एक स्वतंत्र प्रावधान मान लिया जाए, तो इससे शिकायतकर्ता कानून द्वारा स्थापित क्रमबद्ध प्रक्रिया (statutory hierarchy) को दरकिनार कर सकेगा।
ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति बिना शपथ-पत्र और बिना पहले पुलिस अधीक्षक से संपर्क किए, सीधे मजिस्ट्रेट के समक्ष लोक सेवक के विरुद्ध शिकायत कर सकेगा, जो कि विधायी मंशा के विपरीत होगा।
अदालत ने कहा कि ऐसा करने से असंगत और अवांछित परिणाम उत्पन्न होंगे, क्योंकि धारा 175(3) स्पष्ट रूप से धारा 173(4) के तहत किए गए प्रयास और शपथ-पत्र की मांग करती है, जबकि धारा 175(4) को अलग-थलग पढ़ने से यह सुरक्षा समाप्त हो जाएगी।

अदालत के निष्कर्ष:

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निष्कर्ष इस प्रकार संक्षेपित किए:
धारा 175(3) और 175(4) को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ पढ़ा जाना चाहिए; धारा 175(4), धारा 175(3) का ही विस्तार है।
जांच का आदेश देने की शक्ति मुख्य रूप से धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट को प्राप्त होती है। धारा 175(4) भी यह शक्ति देती है, लेकिन लोक सेवकों से जुड़े मामलों में एक विशेष प्रक्रिया निर्धारित करती है।
धारा 175(4) में प्रयुक्त शब्द “शिकायत (complaint)” का अर्थ मौखिक शिकायत नहीं है। इसे उसी प्रकार के आवेदन के रूप में समझा जाएगा, जैसा धारा 175(3) में है—अर्थात् शपथ-पत्र से समर्थित लिखित आवेदन, जिसमें संज्ञेय अपराध के आरोप हों।
निष्कर्ष
अदालत ने दो टूक कहा कि लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायतों में वैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन अनिवार्य है, और कोई भी शिकायतकर्ता निर्धारित प्रक्रिया को छोड़कर सीधे मजिस्ट्रेट के पास नहीं जा सकता।

पंजाब सूचना आयोग के आदेश की अवहेलना पर लोक सूचना अधिकारी पर भारी जुर्माना, सूचना दस्तावेज भी देने होंगे

पंजाब सूचना आयोग के आदेश की अवहेलना पर लोक सूचना अधिकारी पर भारी जुर्माना, सूचना दस्तावेज भी देने होंगे

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पंजाब , पंजाब राज्य सूचना आयोग ने अपने आदेशों की लगातार अवहेलना को गंभीर मानते हुए एक लोक सूचना अधिकारी (PIO) पर भारी जुर्माना लगाया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत पारित आदेशों का पालन न करना गंभीर लापरवाही है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

मामले में यह सामने आया कि आयोग द्वारा पहले भी सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन संबंधित लोक सूचना अधिकारी ने न तो समय पर सूचना दी और न ही आदेशों का पालन किया। इस पर आयोग ने पहले ₹10,000 का जुर्माना लगाया था, जिसे अब बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि मांगी गई सूचना एवं संबंधित दस्तावेज़ अनिवार्य रूप से आवेदक को उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही कहा गया कि बार-बार आदेशों की अनदेखी करना RTI कानून की भावना के विरुद्ध है।

आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि लोक सूचना अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करते हैं, तो उनके विरुद्ध व्यक्तिगत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। सूचना आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना माफ करने का कोई आधार नहीं पाया गया।

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RTI के अन्तर्गत सूचना न देनेवाले के विरुद्ध कानूनी प्राविधान: RTI मे भी FIR दर्ज हो सकती है

 

RTI के अन्तर्गत सूचना न देनेवाले के विरुद्ध कानूनी प्राविधान: RTI मे भी FIR दर्ज हो सकती है

विनय जी. डेविड : 9893221036

लोक सूचना अधिकारी द्वारा कोई जवाब नहीं देना धारा-7(2) आरटीआई एक्ट का उल्लंघन है। लोक सूचना अधिकारी द्वारा आरटीआई एक्ट की धारा-7(8) का उल्लंघन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 166ए और 167 के तहत एफ आई आर होगी।

2. लोक सूचना अधिकारी द्वारा झूठी जानकारी देना जिसका प्रमाण आवेदक के पास मौजूद है उस स्थिति में भारतीय दंड संहिता की धारा 166ए, 167, 420, 468 और 471 के तहत एफआईआर दर्ज होगी।

3. प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा निर्णय नहीं किये जाने की स्थिति में भारतीय दंड संहिता की धारा 166ए, 188 के तहत एफ आई आर दर्ज कराई जा सकती है।

4. प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष लोक सूचना अधिकारी द्वारा सुनवाई के बाद सम्यक सूचना के भी गैरहाजिर रहने की स्थिति में भारतीय दंड संहिता की धारा 175, 176, 188, और 420 के तहत एफ आई आर दर्ज करवाई जा सकती है।

5. प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा निर्णय करने के बाद भी सूचनाएं नहीं देने की स्थिति में भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और 420 के तहत एफ आई आर दर्ज हो सकती है।

Thursday, January 29, 2026

लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायत के लिए (BNSS) की धारा 175(4) के तहत शपथ पत्र अनिवार्य : सुप्रीम कोर्ट


 लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायत के लिए (BNSS) की धारा 175(4) के तहत शपथ पत्र अनिवार्य :  सुप्रीम कोर्ट 


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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(4) के तहत किसी लोक सेवक (public servant) के विरुद्ध मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत तभी प्रस्तुत की जा सकती है, जब शिकायतकर्ता पहले धारा 175(3) का अनुपालन करे।

अर्थात्, शिकायतकर्ता को यह दिखाना अनिवार्य है कि उसने पहले पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) के समक्ष शपथ-पत्र (affidavit) सहित लिखित शिकायत दी थी।
यह निर्णय जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने दिया। खंडपीठ के समक्ष यह प्रश्न था कि क्या धारा 175(4) एक स्वतंत्र प्रावधान है, जिसके तहत मजिस्ट्रेट मौखिक शिकायत पर भी कार्रवाई कर सकता है, या फिर यह धारा 175(3) का ही एक प्रक्रियात्मक विस्तार है, जिसमें Priyanka Srivastava Vs. State of U.P. (2015) में निर्धारित सुरक्षा उपाय लागू होंगे।

धारा 175(3) और 175(4) का संबंध

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 175(4) कोई स्वतंत्र या अलग-थलग प्रावधान नहीं है, बल्कि इसे धारा 175(3) के साथ सामंजस्यपूर्ण ढंग से पढ़ा जाना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि:
किसी लोक सेवक के विरुद्ध मजिस्ट्रेट के समक्ष सीधे शिकायत दाखिल कर जांच का आदेश नहीं मांगा जा सकता,
जब तक कि शिकायतकर्ता यह न दिखाए कि उसने पहले धारा 173(4) BNSS के तहत पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया था और उसके बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष शपथ-पत्र सहित आवेदन प्रस्तुत किया गया हो।

अदालत ने कहा:

“पुलिस अधीक्षक के समक्ष उपलब्ध उपाय का सहारा लेना, न्यायिक मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र को सक्रिय करने के लिए एक अनिवार्य पूर्व-शर्त है।”

प्रक्रिया को दरकिनार करने की अनुमति नहीं

अदालत ने चेतावनी दी कि यदि धारा 175(4) को एक स्वतंत्र प्रावधान मान लिया जाए, तो इससे शिकायतकर्ता कानून द्वारा स्थापित क्रमबद्ध प्रक्रिया (statutory hierarchy) को दरकिनार कर सकेगा।
ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति बिना शपथ-पत्र और बिना पहले पुलिस अधीक्षक से संपर्क किए, सीधे मजिस्ट्रेट के समक्ष लोक सेवक के विरुद्ध शिकायत कर सकेगा, जो कि विधायी मंशा के विपरीत होगा।
अदालत ने कहा कि ऐसा करने से असंगत और अवांछित परिणाम उत्पन्न होंगे, क्योंकि धारा 175(3) स्पष्ट रूप से धारा 173(4) के तहत किए गए प्रयास और शपथ-पत्र की मांग करती है, जबकि धारा 175(4) को अलग-थलग पढ़ने से यह सुरक्षा समाप्त हो जाएगी।

अदालत के निष्कर्ष:

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निष्कर्ष इस प्रकार संक्षेपित किए:

धारा 175(3) और 175(4) को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ पढ़ा जाना चाहिए; धारा 175(4), धारा 175(3) का ही विस्तार है।
जांच का आदेश देने की शक्ति मुख्य रूप से धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट को प्राप्त होती है। धारा 175(4) भी यह शक्ति देती है, लेकिन लोक सेवकों से जुड़े मामलों में एक विशेष प्रक्रिया निर्धारित करती है।
धारा 175(4) में प्रयुक्त शब्द “शिकायत (complaint)” का अर्थ मौखिक शिकायत नहीं है। इसे उसी प्रकार के आवेदन के रूप में समझा जाएगा, जैसा धारा 175(3) में है—अर्थात् शपथ-पत्र से समर्थित लिखित आवेदन, जिसमें संज्ञेय अपराध के आरोप हों।

निष्कर्ष

अदालत ने दो टूक कहा कि लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायतों में वैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन अनिवार्य है, और कोई भी शिकायतकर्ता निर्धारित प्रक्रिया को छोड़कर सीधे मजिस्ट्रेट के पास नहीं जा सकता।

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Wednesday, January 28, 2026

आरटीआई आवेदक पर सूचना आयोग सहित कोई भी विभाग नहीं लग सकता कोई पाबंदी : हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय


आरटीआई आवेदक पर सूचना आयोग सहित कोई भी विभाग नहीं लग सकता कोई पाबंदी : हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

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ओडिशा हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी विभाग या आयोग किसी RTI आवेदक को भविष्य में जानकारी मांगने से ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकता। RTI कानून जनता का हथियार है और इसे छीना नहीं जा सकता।"

हाई कोर्ट का यह फैसला सूचना के अधिकार (RTI) की मूल भावना को सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ा कदम है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कोई भी सूचना आयोग अपनी मर्जी से नागरिकों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों को सीमित नहीं कर सकता।
​ओडिशा राज्य सूचना आयोग ने एक आदेश पारित कर एक आरटीआई आवेदक पर नई आरटीआई लगाने पर पाबंदी लगा दी थी। आयोग का तर्क था कि संबंधित आवेदक बार-बार आवेदन देकर सरकारी मशीनरी का समय बर्बाद कर रहा है और यह आरटीआई का दुरुपयोग है।
​ओडिशा हाई कोर्ट की एकल पीठ ने इस आदेश को अवैध और असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया।
कोर्ट ने साफ किया कि सूचना का अधिकार एक वैधानिक अधिकार है।

सूचना आयोग के पास ऐसा कोई कानूनी अधिकार (Jurisdiction) नहीं है कि वह किसी नागरिक को भविष्य में जानकारी मांगने से रोक सके।

यदि कोई आवेदक बार-बार जानकारी मांगता है तो आरटीआई कानून के तहत उपलब्ध प्रावधानों (जैसे धारा 7(9)) का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना कानून के दायरे से बाहर है।

सूचना आयोग का काम कानून को लागू करना और जानकारी दिलवाना है, न कि नागरिकों के अधिकारों पर कैंची चलाना।
​यह निर्णय उन सभी आरटीआई कार्यकर्ताओं और नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्हें अक्सर "परेशान करने वाला" (Vexatious) बता कर उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश की जाती है।

केस का विवरण -
• ​केस का नाम : प्रफुल्ल कुमार जेना बनाम ओडिशा राज्य सूचना आयोग और अन्य
• केस नंबर : WP(C) NO. 34339 of 2023
• ​कोर्ट : ओडिशा हाई कोर्ट, कटक
• ​न्यायाधीश : जस्टिस बिपिन चंदर चतुर्वेदी
• आदेश दिनांक : 21-03-2024
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो किसी व्यक्ति को भविष्य में आवेदन करने से रोक सके।
  • ​राज्य सूचना आयोग के पास किसी नागरिक को सूचना का अधिकार इस्तेमाल करने से रोकने की न्यायिक शक्ति नहीं है।
  • आवेदक को 'परेशान करने वाला' मान कर उस पर प्रतिबंध लगाने के सूचना आयोग के तर्क को हाई कोर्ट ने पूरी तरह गलत माना और कहा कि यह कानून की मूल भावना के खिलाफ है।
* आरटीआई एक्ट की धारा 7(9) में प्रावधान है कि किसी सूचना को साधारण तौर पर उसी प्ररूप (form) में उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें उसे मांगा गया है,

जब तक कि वह लोक प्राधिकारी के स्रोतों को गैर आनुपातिक रूप से विचलित न करता हो या संबंधित अभिलेख की सुरक्षा या संरक्षण के प्रतिकूल न हो।

इसके विपरीत स्थिति बनने पर सूचना देने का रूप बदला जा सकता है।

अब पुलिस किसी गिरफ्तार आरोपी को बाजार में बाल कटवाकर, महिलाओं के कपड़े पहनाकर या परेड कराकर नहीं घुमा सकेगी

Now the police will not be able to parade an arrested accused in the market after cutting his hair, dressing him in women's clothes or making him walk around.


अब पुलिस किसी गिरफ्तार आरोपी को बाजार में बाल कटवाकर, महिलाओं के कपड़े पहनाकर या परेड कराकर नहीं घुमा सकेगी। थाने के बाहर बैठाकर फोटो खींचना, अंडरगारमेंट में फोटो वायरल करना, बाल काटकर घुमाना आदि पुलिस को नहीं करने के आदेश जारी।


Tuesday, January 27, 2026

भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों पर एकाग्र "घुंघरू समारोह" 28 एवं 29 जनवरी को जबलपुर में, प्रदेश के सुविख्यात नृत्य कलाकार देंगे प्रस्तुतियाँj


भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों पर एकाग्र "घुंघरू समारोह" 28 एवं 29 जनवरी को जबलपुर में, प्रदेश के सुविख्यात नृत्य कलाकार देंगे प्रस्तुतियाँ

सभी जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036 

जबलपुर। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग, उस्ताद अलाउ‌द्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी द्वारा जिला प्रशासन - जबलपुर के सहयोग से भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों पर एकाग्र प्रतिष्ठापूर्ण "घुंघरू समारोह" का आयोजन 28 एवं 29 जनवरी, 2026 को महाकौशल शहीद स्मारक, जबलपुर में किया जा रहा है। प्रतिदिन सायं 7 बजे से आयोजित होने वाले इस समारोह में मध्यप्रदेश के सुविख्यात भारतीय शास्त्रीय नृत्य कलाकार अपनी नृत्य प्रस्तुतियां देंगे।

‘‘घुंघरू समारोह’’ 28 एवं 29 जनवरी को प्रदेश के सुविख्यात नृत्य कलाकार देंगे प्रस्तुतियाँ

मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग, उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों पर एकाग्र प्रतिष्ठापूर्ण ‘‘घुंघरू समारोह’’ का आयोजन 28 एवं 29 जनवरी को महाकौशल शहीद स्मारक, जबलपुर में किया जा रहा है। प्रतिदिन सायं 7 बजे से आयोजित होने वाले इस समारोह में मध्यप्रदेश के सुविख्यात भारतीय शास्त्रीय नृत्य कलाकार अपनी नृत्य प्रस्तुतियां देंगे।

उस्ताद अलाउ‌द्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक श्री प्रकाश सिंह ठाकुर ने बताया कि भारतीय शास्त्रीय नृत्यों पर केन्द्रित यह समारोह नृत्य साधना, परम्परा और सृजनात्मक अभिव्यक्ति का सजीव उत्सव होगा। इसमें कथक एवं भरतनाट्यम नृत्य शैलियों की मनोहारी प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध परम्परा से अवगत होने का अवसर मिलेगा। समारोह का उ‌द्देश्य शास्त्रीय नृत्य कला के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के साथ-साथ युवा पीढ़ी को इस विधा से जोड़ना भी है। कला प्रेमियों के लिए यह आयोजन एक अविस्मरणीय अनुभव सिद्ध होगा, जिसमें संगीत, लय और भाव का अनुपम संगम देखने को मिलेगा।

उन्होंने बताया कि दो दिवसीय इस प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन में प्रथम दिवस 28 जनवरी, 2026 को सुश्री साक्षी शर्मा एवं साथी, ग्वालियर का कथक समूह नृत्य होगा। तत्पश्चात सुश्री नीरजा सक्सेना एवं साथी, भोपाल का भरतनाट्यम समूह नृत्य होगा। प्रथम दिवस की अंतिम प्रस्तुति सुश्री वी. अनुराधा सिंह एवं साथी, भोपाल द्वारा कथक समूह नृत्य की प्रस्तुति होगी।

घुंघरू समारोह के ‌द्वितीय दिवस 29 जनवरी, 2026 को प्रथम प्रस्तुति सुश्री भैरवी विश्वरूप एवं साथी, जबलपुर द्वारा कथक समूह नृत्य की प्रस्तुति दी जायेगी। तत्पश्चात सुश्री अरुक्शा नायक एवं साथी, जबलपुर द्वारा भरतनाट्यम समूह नृत्य की प्रस्तुति दी जायेगी। द्वितीय दिवस की अंतिम प्रस्तुति नृत्याराधना नृत्य मंदिर संस्थान, उज्जैन द्वारा कथक समूह नृत्य की प्रस्तुति होगी।

घुंघरू समारोह में प्रस्तुति देने वाले नृत्य कलाकारों का परिचय : सुश्री साक्षी शर्मा, ग्वालियर (कथक नृत्यांगना)

साक्षी शर्मा जयपुर घराने की एक प्रख्यात कथक नृत्यांगना एवं अंतरराष्ट्रीय कलाकार हैं। वे कथक केंद्र, नई दिल्ली - राष्ट्रीय कथक नृत्य संस्थान की पूर्व छात्रा एवं दूरदर्शन से मान्यता प्राप्त कलाकार हैं। उनकी नृत्य शैली में सशक्त तालबद्धता, सुस्पष्ट अभिनय एवं प्रभावशाली मंचीय उपस्थिति देखने को मिलती है। उन्होंने कथक में पोस्ट-डिप्लोमा एवं स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है एवं राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय से स्वर्ण पदक के साथ स्नातक की उपाधि अर्जित की है। वर्तमान में साक्षी जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर से पी.एच.डी. कर रही हैं।

साक्षी शर्मा ने खजुराहो नृत्य समारोह खजुराहो, ताप्ती महोत्सव मुलताई, दिल्ली कथक महोत्सव, भारत पर्व, कालिदास समारोह उज्जैन, रामायण महोत्सव चित्रकूट, भोपाल गौरव उत्सव तथा टैगोर थिएटर, चंडीगढ़ जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियाँ दी हैं। वे स्पिक मैके (SPIC MACAY) की एम्पैनल्ड कलाकार हैं तथा देशभर के विश्ववि‌द्यालयों, शासकीय महाविद्यालयों एवं सांस्कृतिक संस्थानों में कार्यशाला - सह-व्याख्यान प्रस्तुतियाँ आयोजित कर चुकी हैं।

अपनी सौम्य अभिव्यक्ति, सशक्त तालबोध और भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से साक्षी शर्मा भारतीय शास्त्रीय कथक की परम्परा और आधुनिक संवेदनशीलता का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती हैं।

सुश्री नीरजा सक्सेना, भोपाल (भरतनाट्यम नृत्यांगना)

आप एक कुशल भरतनाट्यम नृत्यांगना एवं शिक्षिका भी है। आपने इन्दिरा कला एवं संगीत विश्ववि‌द्यालय, खैरागढ़ से अपना भरतनाट्यम में स्नातक व परास्नातक पूर्ण किया। आपने अपनी नृत्य शिक्षा सुविख्यात भरतनाट्यम नृत्य गुरु डॉ. लता मुंशी एवं सुश्री भारती होम्बल द्वारा ग्रहण की है।

भरतनाट्यम के क्षेत्र में अपने अप्रतिम योगदान हेतु आपको विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है, जैसे- राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल द्वारा कलासेवी सम्मान से सम्मानित किया गया। रामायण केंद्र अधिवेशन भोपाल द्वारा 2024 उर्वशी सम्मान से सम्मानित किया गया। इनके अतिरिक्त नृत्य श्री तन्वी, कला अर्पण, भरतनाट्यम कला सम्मान, गुरु सम्मान, सर्वश्रेष्ठ नृत्य शिक्षक सम्मान, दबंग दामिनी महिला सम्मान, कल के कलाकार आदि सम्मानों से सुश्री नीरजा सक्सेना अलंकृत हो चुकी हैं।

आपने 100 से अधिक मंचों पर एकल व समूह प्रस्तुतियाँ दी हैं, जिसमें विशेष हैं अंतरराष्ट्रीय रामायण अधिवेशन, त्रिवेणी संग्रहालय, उज्जैन में प्राकट्य पर्व में प्रस्तुति, G-20 E-governances कांफ्रेंस, इंदौर में प्रस्तुति, G-20 मिशन, खुजराहो में प्रस्तुति, संस्कृति पर्व, विक्रमादित्य समारोह आदि। नीरजा जी भोपाल में गत 15 वर्षों से भरतनाट्यम संस्था 'नृत्य मंजरी कला पीठ' संचालित कर रही हैं, जिसमें लगभग 150 विद्यार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

सुश्री वी. अनुराधा शर्मा, भोपाल (कथक नृत्यांगना)

आप भारतीय शास्त्रीय नृत्य की उन विरल विभूतियों में से हैं, जिन्होंने अपनी चार दशकों से अधिक की साधना, अनुशासन, तकनीकी उत्कृष्टता और सृजनात्मक नवाचारों के माध्यम से कथक को वैश्विक मंचों पर प्रतिष्ठा दिलाई है। भोपाल, मध्यप्रदेश की इस विशिष्ट कलाकार ने अब तक देश-विदेश में एक हजार से अधिक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समारोहों और सांस्कृतिक महोत्सवों में सशक्त प्रस्तुतियाँ देकर भारतीय नृत्य परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है।

1986 में आपको मध्यप्रदेश शासन से चार वर्षों की कथक छात्रवृत्ति प्राप्त हुई। आपने चक्रधर नृत्य केंद्र, भोपाल में स्व. पं. कार्तिकराम जी एवं पं. रामलाल जी से गहन प्रशिक्षण लिया। आपने 1991 में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से कथक में एम.ए. (स्वर्ण पदक) प्राप्त कर शैक्षणिक उत्कृष्टता भी सिद्ध की।

आप भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के इंटरनेशनल कल्चरल रिलेशन्स (ICR), फेस्टिवल ऑफ इंडिया अब्रॉड सेल में "उत्कृष्ट श्रेणी (Outstanding Category)" की एम्पैनल्ड एकल कथक नृत्यांगना हैं, जो आपकी सर्वोच्च कलात्मक गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मान्यता का प्रमाण है।

आपका प्रथम अंतरराष्ट्रीय नृत्य प्रदर्शन 1988 में भारत सरकार द्वारा आयोजित "फेस्टिवल ऑफ इंडिया - सोवियत संघ (USSR)" में हुआ, जिसने आपको वैश्विक पहचान दिलाई। इसके बाद आपने यूएई, थाईलैंड, सिंगापुर, उज़्बेकिस्तान, अमेरिका और यूरोप सहित अनेक देशों में भारतीय दूतावासों तथा प्रतिष्ठित मंचों पर भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व किया।

खजुराहो नृत्य समारोह, संकट मोचन (वाराणसी), कालीदास समारोह (उज्जैन व नागपुर), लखनऊ व छत्तीसगढ़ राज्योत्सव, गोलकुंडा महोत्सव, अल्वास महोत्सव, चक्रधर समारोह, NCPA मुंबई, राजगीर महोत्सव सहित लगभग 1000 प्रतिष्ठित मंचों पर प्रदर्शन कर वी. अनुराधा सिंह आज भारत की सर्वाधिक मंच प्रस्तुतियाँ देने वाली एकल कथक नृत्यांगना के रूप में सम्मानित और प्रेरणास्रोत हैं।

सुश्री भैरवी विश्वरूप, जबलपुर (कथक नृत्यांगना)

आप कथक नृत्य की सुप्रसिद्ध कलाकार और नृत्य गुरु हैं। आपने कथक में एम. ए. और B.P.A. संगीत (गायन) की शिक्षा प्राप्त की है। आपकी गुरु डॉ. उपासना उपाध्याय एवं श्रीमती नीलांगी कलंत्रे हैं। आप जबलपुर में नव नृत्यांजलि डांस एकेडमी का संचालन कर रही हैं, जहां अनेक विद्यार्थी नृत्य की विधिवत शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। आपने मां नर्मदा गौ कुंभ 2020, जबलपुर, नर्मदा महोत्सव 2017-22, जबलपुर, राजशेखर समारोह 2023, जबलपुर, म. प्र. संस्कृत गौरव दिवस 2023, विदिशा, भारत पर्व 2024 एवं 25 सिवनी, सतना, महादेव उत्सव 2024 एवं 25 महू, ओंकारेश्वर एवं विक्रम महोत्सव 2025 उज्जैन में प्रस्तुतियां दी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिंगापुर मलेशिया में नृत्य प्रस्तुति दे चुकी हैं।

सुश्री अरुक्शा नायक, जबलपुर (भरतनाट्यम नृत्यांगना)

अरुक्शा नायक, भारतीय शास्त्रीय नृत्य जगत की एक प्रतिभाशाली, समर्पित एवं राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त भरतनाट्यम नृत्यांगना हैं, जिनके पास 20 से अधिक वर्षों का समृद्ध मंचीय एवं शैक्षणिक अनुभव है। अपनी प्रभावशाली मंच उपस्थिति, शुद्ध तकनीक, लयबद्धता एवं सशक्त भावाभिव्यक्ति के माध्यम से उन्होंने कम आयु में ही कला क्षेत्र में विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

चार वर्ष की आयु से उन्होंने अपनी माता एवं प्रथम गुरु श्रीमती कामना नायक के सान्निध्य में भरतनाट्यम की कठोर साधना प्रारंभ की। तत्पश्चात 'श्रीम कथक पीठ' से गुरु स्वाति मोदी तिवारी से कथक की शिक्षा प्राप्त कर इंदिरा कला संगीत विश्ववि‌द्यालय, खैरागढ़ से भरतनाट्यम एवं कथक में डिप्लोमा तथा भरतनाट्यम में स्नातकोत्तर (एम.ए. परफॉर्मिंग आर्ट्स) उपाधि अर्जित की। उन्होंने विश्वविद्यालय की विद्रद्य अंतिम मेरिट सूची में द्वितीय स्थान प्राप्त कर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता का भी परिचय दिया। वर्तमान में वे बनस्थली वि‌द्यापीठ, जयपुर से भरतनाट्यम विषय में पी.एच.डी. शोधकार्यरत हैं।

अरुक्शा ने देश के प्रतिष्ठित मंचों 51वां खजुराहो डांस फेस्टिवल, नर्मदा महोत्सव, दूरदर्शन भोपाल सहित अनेक राष्ट्रीय समारोहों में प्रस्तुति दी है तथा थाईलैंड, दुबई एवं मलेशिया में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय संस्कृति का सफल प्रतिनिधित्व किया है।

उन्होंने प‌द्मश्री गुरु डॉ. गीता चंद्रन, गुरु मेदिनी होम्बल, गुरु रमा वैद्यनाथन, गुरु सरोजा वैद्यनाथन एवं अन्य प्रतिष्ठित आचार्यों के मार्गदर्शन में अभिनय, तकनीक एवं मंचीय अभिव्यक्ति का उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त किया है। गुरु सरोजा वैद्यनाथन जी के निर्देशन में 40 करणों का विशेष अभ्यास भी किया है।

भरतनाट्यम, कथक (जयपुर घराना) एवं ओडिसी में दक्ष अरुक्षा विगत 10 वर्षों से नृत्य शिक्षण में सक्रिय हैं तथा नृत्यांजलि कला अकादमी में वरिष्ठ नृत्य शिक्षिका के रूप में नई पीढ़ी को शास्त्रीय नृत्य की परंपरा से जोड़ने हेतु समर्पित रूप से कार्य कर रही हैं।

नृत्याराधना नृत्य मंदिर संस्थान, उज्जैन

नृत्याराधना - नृत्य मंदिर मध्य प्रदेश की एक प्रतिष्ठित एवं सुविख्यात शास्त्रीय नृत्य संस्था है, जिसकी स्थापना वर्ष 2014 में उज्जैन (मध्य प्रदेश) में की गई। संस्था का मूल उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय नृत्य परम्परा के संरक्षण, संवर्धन एवं शैक्षणिक विस्तार को सुनिश्चित करना है। विशेष रूप से संस्था कथक नृत्य की परम्परागत शुद्धता, लयात्मक अनुशासन एवं भावाभिनय की सूक्ष्म अभिव्यक्ति को केंद्र में रखकर निरंतर कार्यरत है।

वर्ष 2016 में नृत्याराधना को मध्य प्रदेश सोसायटी पंजीयन अधिनियम, 1973 के अंतर्गत विधिवत पंजीकरण प्राप्त हुआ। इसके पश्चात् संस्था को प्रदेश की प्रतिष्ठित शासकीय कला विश्वविद्यालय राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्ववि‌द्यालय, ग्वालियर (म.प्र.) से संबद्धता प्रदान की गई, जिसके अंतर्गत यह संस्था "नृत्याराधना संगीत एवं कला महावि‌द्यालय, उज्जैन (म.प्र.)" के रूप में संचालित है। वर्तमान समय में नृत्याराधना संस्था एवं महाविद्यालय के माध्यम से सैकड़ों वि‌द्यार्थी कथक नृत्य की पारम्परिक गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं तथा साथ ही स्नातक, स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा स्तर पर अकादमिक शिक्षा भी अर्जित कर रहे हैं।

निदेशक, उस्ताद अलाउ‌द्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी, भोपाल (मध्यप्रदेश)


‘‘घुंघरू समारोह’’ 28 एवं 29 जनवरी को प्रदेश के सुविख्यात नृत्य कलाकार देंगे प्रस्तुतियाँ

मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग, उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों पर एकाग्र प्रतिष्ठापूर्ण ‘‘घुंघरू समारोह’’ का आयोजन 28 एवं 29 जनवरी को महाकौशल शहीद स्मारक, जबलपुर में किया जा रहा है। प्रतिदिन सायं 7 बजे से आयोजित होने वाले इस समारोह में मध्यप्रदेश के सुविख्यात भारतीय शास्त्रीय नृत्य कलाकार अपनी नृत्य प्रस्तुतियां देंगे।

उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक श्री प्रकाश सिंह ठाकुर ने बताया कि भारतीय शास्त्रीय नृत्यों पर केन्द्रित यह समारोह नृत्य साधना, परम्परा और सृजनात्मक अभिव्यक्ति का सजीव उत्सव होगा। इसमें कथक एवं भरतनाट्यम नृत्य शैलियों की मनोहारी प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध परम्परा से अवगत होने का अवसर मिलेगा। समारोह का उद्देश्य शास्त्रीय नृत्य कला के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के साथ-साथ युवा पीढ़ी को इस विधा से जोड़ना भी है। कला प्रेमियों के लिए यह आयोजन एक अविस्मरणीय अनुभव सिद्ध होगा, जिसमें संगीत, लय और भाव का अनुपम संगम देखने को मिलेगा।

उन्होंने बताया कि दो दिवसीय इस प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन में प्रथम दिवस 28 जनवरी, 2026 को सुश्री साक्षी शर्मा एवं साथी, ग्वालियर का कथक समूह नृत्य होगा। तत्पश्चात सुश्री नीरजा सक्सेना एवं साथी, भोपाल का भरतनाट्यम समूह नृत्य होगा। प्रथम दिवस की अंतिम प्रस्तुति सुश्री वी. अनुराधा सिंह एवं साथी, भोपाल द्वारा कथक समूह नृत्य की प्रस्तुति होगी।

घुंघरू समारोह के द्वितीय दिवस 29 जनवरी, 2026 को प्रथम प्रस्तुति सुश्री भैरवी विश्वरूप एवं साथी, जबलपुर द्वारा कथक समूह नृत्य की प्रस्तुति दी जायेगी। तत्पश्चात सुश्री अरुक्शा नायक एवं साथी, जबलपुर द्वारा भरतनाट्यम समूह नृत्य की प्रस्तुति दी जायेगी। द्वितीय दिवस की अंतिम प्रस्तुति नृत्याराधना नृत्य मंदिर संस्थान, उज्जैन द्वारा कथक समूह नृत्य की प्रस्तुति होगी।




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