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Sunday, June 14, 2026

मध्य प्रदेश में RTI आवेदन सफल बनाने के लिए क्या करें और क्या न करें

 

✅ क्या करें - Do's

1. आवेदन तैयार करना

  • आवेदन निर्धारित फॉर्म में दें या सादे कागज पर स्पष्ट लिखें
  • जानकारी का विवरण साफ-साफ लिखें - कौन सा दस्तावेज, किस अवधि का, किस विषय से संबंधित है
  • अपना पूरा नाम, पता, मोबाइल नंबर और ईमेल जरूर लिखें ताकि जवाब मिल सके
  • आवेदन के साथ ID Proof लगाएं 

2. शुल्क का भुगतान

  • आवेदन के साथ ₹10/- शुल्क देना अनिवार्य है
  • नकद/डिमांड ड्राफ्ट/बैंकर्स चेक से भुगतान करें
  • BPL कार्ड धारकों को कोई शुल्क नहीं देना
  • अतिरिक्त जानकारी के लिए: A4/A5 पेज ₹2/- प्रति पेज, CD के लिए ₹50/-
  • फीस की रसीद आवेदन के साथ लगाएं 

3. सही जगह आवेदन भेजें

  • संबंधित विभाग के लोक सूचना अधिकारी PIO को भेजें
  • ऑनलाइन आवेदन के लिए: https://rtionline.gov.in/ या https://rti.mp.gov.in/
  • ईमेल से भेज रहे हैं तो 7 दिन के अंदर फीस जमा कर PIO को सूचित करें 

4. समय सीमा का ध्यान रखें

  • PIO को 30 दिन में जवाब देना होता है
  • अतिरिक्त शुल्क मांगा जाए तो वह अवधि 30 दिन में नहीं गिनी जाती
  • 30 दिन में जवाब न मिले तो कोई शुल्क नहीं लगेगा 

5. रिकॉर्ड रखें

  • आवेदन की कॉपी, फीस रसीद, स्पीड पोस्ट रसीद संभालकर रखें
  • 30 दिन में जवाब न आए या गलत जवाब आए तो प्रथम अपील करें 

❌ क्या न करें - Don'ts

1. आवेदन में ये गलतियां न करें

  • अस्पष्ट या बहुत व्यापक सवाल न पूछें - "सभी जानकारी दें" जैसा न लिखें
  • तीसरे पक्ष की निजी जानकारी, गोपनीयता से जुड़े सवाल न पूछें
  • काल्पनिक, अनुमान वाले सवाल न पूछें। RTI सिर्फ रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी के लिए है
  • एक आवेदन में 15-20 अलग-अलग विषय न मिलाएं

2. प्रक्रिया संबंधी गलतियां

  • बिना शुल्क के आवेदन न भेजें - 7 दिन में फीस न पहुंची तो आवेदन वापस माना जाएगा
  • गलत विभाग को आवेदन न भेजें। पहले पता करें जानकारी किस विभाग के पास है
  • केंद्र सरकार के विभाग के लिए राज्य पोर्टल पर आवेदन न करें 

3. अपील में देरी न करें

  • प्रथम अपील 30 दिन के अंदर करें
  • अपील में नए सवाल न जोड़ें - सिर्फ मूल आवेदन से जुड़े बिंदु रखें

मप्र में RTI के लिए मुख्य संपर्क

  • हर विभाग में PIO, सहायक PIO और प्रथम अपीलीय अधिकारी नियुक्त हैं
  • उदाहरण: MPPCB, IIM Indore, MP Bhawan, CM Helpline सभी के पास अलग PIO हैं 

बोनस टिप: MP का ऑनलाइन पोर्टल rti.mp.gov.in पर आप आवेदन, भुगतान और स्टेटस ट्रैक तीनों कर सकते हैं। इससे आवेदन गुम होने की टेंशन नहीं रहती। 

Saturday, May 30, 2026

राज्य पर्यटन विकास निगम RTI की धज्जियां उड़ाने वाले PIO संजय मल्होत्रा और FAA संदेश यशलाहा पर होगी जल्द विभागीय/दंडात्मक कार्रवाई

 

सूचना आयोग पहुंचा कलचुरी होटल टेंट टेंडर मामला: PIO और FAA दोनों पर पेनाल्टी की मांग


टाइम्स ऑफ क्राइम // विनय डेविड : 9893221036

"कलचुरी होटल में टेंट घोटाला? RTI मांगने पर PIO ने पूछा- 'निजी हित है या जनहित', फिर खुद ही अपने आदेश को सही ठहराया"

"जबलपुर: MPTDC अफसरों का खेल बेनकाब - सूचना छुपाने के लिए 'कृत्य की श्रेणी' की धमकी, FAA ने भी आँखें मूंदीं"

"सूचना आयोग पहुंचा कलचुरी होटल टेंट टेंडर मामला: PIO और FAA दोनों पर पेनाल्टी की मांग"

"RTI की धज्जियां उड़ाने वाले PIO संजय मल्होत्रा और FAA संदेश यशलाहा पर होगी जल्द विभागीय/दंडात्मक कार्रवाई"



जबलपुर। मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के अफसरों ने सूचना का अधिकार कानून को मजाक बनाकर रख दिया। होटल कलचुरी जबलपुर में "कौशिक टेंट हाउस" को दिए गए टेंडर की जानकारी मांगने पर पहले लोक सूचना अधिकारी ने गैर-कानूनी सवाल दागे, फिर प्रथम अपीलीय अधिकारी ने बिना कानून बताए फाइल बंद कर दी। अब मामला राज्य सूचना आयोग पहुंच गया है।


क्या है पूरा मामला?

टाइम्स ऑफ क्राइम के संपादक विनय जी डेविड ने 4 दिसंबर 2025 को RTI लगाकर होटल कलचुरी में लगे टेंट के बिल, वर्क ऑर्डर और टेंडर की जानकारी मांगी थी। शिकायतें थीं कि टेंट के ठेके में भ्रष्टाचार हुआ है।

PIO ने कानून तोड़ा, धमकी भी दी

6 जनवरी 2026 को लोक सूचना अधिकारी श्री संजय मल्होत्रा ने जवाब भेजा। हैरानी की बात ये कि जवाब के साथ प्रबंधक कलचुरी का पत्र लगा था जिसमें लिखा था - "जानकारी निजी हित के लिए माँगी जा रही है या जनहित, ये स्पष्ट करो... वरना ये कृत्य की श्रेणी में आता है।"

RTI एक्ट की धारा 6(2) साफ कहती है कि आवेदक से जानकारी मांगने का कारण नहीं पूछा जा सकता। "कृत्य की श्रेणी" जैसा कोई शब्द कानून में है ही नहीं। ये सीधी-सीधी धमकी थी।


RTI के बड़े खेल: एक नजर में

  1. 06.01.2026: PIO ने पूछा - "निजी हित या जनहित?" - धारा 6(2) का उल्लंघन
  2. खुलासा: PIO और प्रबंधक कलचुरी एक ही अफसर - हितों का टकराव
  3. 08.05.2026: FAA का आदेश - "व्यवसायिक संस्था" बताकर इनकार, पर धारा नहीं बताई
  4. देरी: RTI का जवाब 3 दिन लेट, FAA का आदेश 61 दिन लेट
  5. 30.05.2026: द्वितीय अपील दायर, दोनों अफसरों पर पेनाल्टी की मांग


सबसे बड़ा खेल: PIO और प्रबंधक एक ही आदमी


जांच में सामने आया कि प्रबंधक कलचुरी रेसीडेंसी और क्षेत्रीय प्रबंधक/PIO जबलपुर - दोनों पदों का चार्ज श्री संजय मल्होत्रा के पास ही है। यानी उन्होंने पहले प्रबंधक बनकर गैर-कानूनी सवाल पूछा, फिर PIO बनकर अपने ही सवाल को सही ठहरा दिया। कानून कहता है - "कोई भी व्यक्ति अपने ही केस में जज नहीं हो सकता।"

जबलपुर: पर्यटन विकास निगम अफसरों का खेल बेनकाब -
सूचना छुपाने के लिए 'कृत्य की श्रेणी' की धमकी, FAA ने भी आँखें मूंदीं

FAA ने भी आँख मूंद ली

प्रथम अपील पर सुनवाई करते हुए FAA श्री संदेश यशलाहा ने 8 मई 2026 को आदेश दिया कि MPTDC "व्यवसायिक संस्था" है, इसलिए बिंदु 1 से 4 की जानकारी "व्यवसायिक दृष्टि से देना संभव नहीं"। मजे की बात ये कि इसी आदेश में बिंदु 5 की जानकारी देने को कहा गया।

सवाल ये है कि जब MPTDC पर RTI लागू है तभी तो बिंदु 5 की जानकारी दी, फिर 1-4 के लिए कानून कैसे बदल गया? FAA ने आदेश में RTI की किसी धारा का हवाला तक नहीं दिया। ऊपर से 45 दिन की जगह 106 दिन में फैसला सुनाया।


अब सूचना आयोग में क्या मांग?


विनय डेविड ने 30 मई 2026 को द्वितीय अपील दायर कर दी है। मांग की है कि:

  1. PIO संजय मल्होत्रा पर धारा 20(1) के तहत ₹25,000 पेनाल्टी लगे, क्योंकि उन्होंने कानून तोड़ा, देरी की और हितों के टकराव में आदेश दिया।
  2. FAA संदेश यशलाहा पर धारा 20(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई हो, क्योंकि उन्होंने बिना विधिक आधार के अपील खारिज की।
  3. 10 दिन में सारी जानकारी निःशुल्क दी जाए।


क्यों जरूरी है ये मामला?

सुप्रीम कोर्ट RBI vs Jayantilal Mistry केस में कह चुका है - "पारदर्शिता नियम है, गोपनीयता अपवाद है।" MPTDC 100% सरकारी कंपनी है। सरकारी पैसा, सरकारी जमीन पर बने होटल के टेंट का बिल "व्यापारिक गोपनीयता" कैसे हो सकता है? अगर बिल साफ है तो छुपा क्यों रहे हैं?

टाइम्स ऑफ क्राइम इस मामले की सुनवाई तक नजर रखेगा। सूचना आयोग अब तय करेगा कि अफसर कानून से ऊपर हैं या नहीं।



RTI के बड़े खेल: एक नजर में

  1. 06.01.2026: PIO ने पूछा - "निजी हित या जनहित?" - धारा 6(2) का उल्लंघन
  2. खुलासा: PIO और प्रबंधक कलचुरी एक ही अफसर - हितों का टकराव
  3. 08.05.2026: FAA का आदेश - "व्यवसायिक संस्था" बताकर इनकार, पर धारा नहीं बताई
  4. देरी: RTI का जवाब 3 दिन लेट, FAA का आदेश 61 दिन लेट
  5. 30.05.2026: द्वितीय अपील दायर, दोनों अफसरों पर पेनाल्टी की मांग

Tuesday, May 26, 2026

बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच शुरू जस्टिस संजय द्विवेदी ने संभाला कार्यभार

 बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच शुरू जस्टिस संजय द्विवेदी ने संभाला कार्यभार

बरगी बांध में 30 अप्रैल 2026 को हुए क्रूज हादसे की न्यायिक जांच विधिवत शुरू हो गई। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्री संजय द्विवेदी ने आज एकल सदस्यीय जांच आयोग के अध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण कर लिया है।

राज्य शासन द्वारा बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच के लिए 10 मई को राजपत्र में अधिसूचना का प्रकाशन कर जांच आयोग अधिनियम 1952 की धारा 3 के तहत मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सेवा निवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया गया था।
न्यायमूर्ति श्री संजय द्विवेदी ने आज कार्यभार ग्रहण करते ही आयोग के कार्यों को अंजाम देना प्रारंभ कर दिया। पहले ही दिन नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शन मंच के अध्यक्ष डॉ पी जी नाजपाण्डे आयोग के समक्ष उपस्थित हुए और अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। आयोग ने इसे जांच में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर कार्यालय में बना आयोग का कार्यालय : दर्ज कराई जा सकेगी दुर्घटना से संबंधित शिकायत, दस्तावेज, कथन अथवा साक्ष्य.
एकल सदस्य जांच आयोग बरगी बांध क्रूज दुर्घटना का कार्यालय कलेक्ट्रेट कार्यालय के कक्ष क्रमांक 43 में बनाया गया है। क्रूज दुर्घटना से संबंधित व्यक्ति अपनी ऐसी शिकायत, दस्तावेज, साक्ष्य अथवा कथन आयोग के कक्ष क्रमांक 42 में उपस्थित होकर दर्ज करा सकते हैं, जो क्रूज दुर्घटना से संबंधित हों।
क्रूज दुर्घटना से संबंधित व्यक्ति दुर्घटना के बारे में ऐसी जानकारी, दस्तावेज, साक्ष्य या कथन जो दुर्घटना से सम्बंधित हो, आयोग के समक्ष उपस्थित होकर दे सकते हैं।

Thursday, May 21, 2026

मध्य प्रदेश में लोकायुक्त संगठन को आरटीआई से छूट दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल और जताई नाराजगी


मध्य प्रदेश में लोकायुक्त संगठन को आरटीआई से छूट दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल और जताई नाराजगी

MP हाईकोर्ट ने हाल में लोकायुक्त पुलिस को हर एफआईआर (FIR) को 24 घंटे के भीतर अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का भी आदेश दिया था

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश लोकायुक्त के विशेष पुलिस स्थापना (Special Police Establishment - SPE) को सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम से छूट देने के मामले में राज्य सरकार पर बेहद तीखी और कड़ी टिप्पणी की है।

​जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने सुनवाई के दौरान मप्र सरकार की खिंचाई करते हुए न केवल लोकायुक्त को मिली इस छूट की वैधता पर सवाल उठाए, बल्कि सरकारी वकीलों के कोर्ट में रवैये को लेकर भी भारी नाराजगी जाहिर की।

​​सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ये महत्वपूर्ण आपत्तियां दर्ज की -

​1. "लोकायुक्त कोई खुफिया या सुरक्षा संगठन है क्या?"

​कोर्ट ने मप्र सरकार द्वारा वर्ष 2011 में जारी की गई उस अधिसूचना (Notification) पर गंभीर सवाल उठाया, जिसके तहत लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना (SPE) को आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया गया था।
​कानूनी पहलू : आरटीआई अधिनियम की धारा 24(4) के तहत राज्य सरकारें केवल 'खुफिया और सुरक्षा संगठनों' (Intelligence and Security Organisations) को ही आरटीआई से छूट दे सकती हैं।
​कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा कि सरकार यह साबित करे कि लोकायुक्त संगठन किस तरह से एक खुफिया या सुरक्षा संगठन की श्रेणी में आता है? कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी नहीं लाया गया है जिससे यह साबित हो। इसके अभाव में, 2011 की यह अधिसूचना आरटीआई अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है और इसे "कानूनी मंजूरी (Sanction of law)" प्राप्त नहीं माना जा सकता।

​2. संतोषजनक जवाब न मिलने पर अधिसूचना रद्द करने की चेतावनी :

​सुप्रीम कोर्ट ने मप्र के मुख्य सचिव (Chief Secretary) और महाधिवक्ता (Advocate General) को इस मामले में औपचारिक नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई पर राज्य सरकार की ओर से इस बात का संतोषजनक जवाब नहीं मिला कि लोकायुक्त को किस आधार पर छूट दी गई, तो कोर्ट 2011 की उस अधिसूचना को पूरी तरह से निरस्त (Quash) कर सकता है।

​3. सरकारी वकीलों की लापरवाही पर भारी नाराजगी:

​मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने म प्र सरकार का पक्ष रखने वाले पैनल के वकीलों के लापरवाह रवैये पर भी गंभीर टिप्पणी की।
​कोर्ट ने पाया कि जब मामला पुकारा गया, तो प्रदेश सरकार की ओर से कोई वकील मौजूद नहीं था।
​दोबारा बुलाए जाने पर जब एक काउंसिल उपस्थित हुए, तो उन्होंने मामले के तथ्यों को लेकर पूरी तरह अनभिज्ञता (Ignorance) जाहिर की।
​कोर्ट ने कहा : "यह हर दिन की बात हो गई है कि जब भी प्रदेश सरकार के मामले सूचीबद्ध होते हैं, वकील अदालत में मौजूद नहीं रहते। बुलाने पर वे आते हैं और केस की जानकारी होने से इंकार कर देते हैं।
सरकारी पैनल के वकीलों का ऐसा प्रयास बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।"
​कोर्ट ने इस संबंध में राज्य के लॉ सेक्रेटरी और मुख्य सचिव को वकीलों के इस पैनल की उपयोगिता और निरंतरता की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

​मामले की पृष्ठभूमि :

यह पूरा विवाद मप्र हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसमें हाईकोर्ट ने लोकायुक्त को 30 दिनों के भीतर आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी देने और आदेश का पालन न करने पर ₹5,000 का जुर्माना भरने का निर्देश दिया था।
राज्य सरकार ने अपनी 2011 की अधिसूचना का हवाला देकर इस आदेश को चुनौती दी थी, जो अब सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद खुद ही कानूनी संकट में घिर गई है।
​* MP हाईकोर्ट ने हाल में लोकायुक्त पुलिस को हर एफआईआर (FIR) को 24 घंटे के भीतर अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का भी आदेश दिया था,
जो इस संस्थान की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को और रेखांकित करता है।

Saturday, May 16, 2026

आइसना मध्य प्रदेश इकाई में वरिष्ठ पत्रकार कैलाश गौर प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त


आइसना मध्य प्रदेश इकाई में वरिष्ठ पत्रकार कैलाश गौर प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त


भोपाल । ऑल इंडिया स्माल पेपर्स एसोसिएशन (आइसना) मध्यप्रदेश इकाई में श्री कैलाश गौर जी को प्रांतीय उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया है।

वरिष्ठ पत्रकार कैलाश गौर जी की संगठन के प्रति कर्मठता और जुझारू छवि को देखते हुए संगठन के मध्य प्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष विनय जी. डेविड ने मध्यप्रदेश प्रांतीय इकाई में शामिल करते हुए उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया है।
कैलाश गौर जी ने पूर्व में कई पत्रकार संगठनों में प्रांतीय पदाधिकारी के रूप में सेवा दी है एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने दैनिक भास्कर भोपाल में कई वर्षों तक अपनी सेवा दी है। अभी हाल में इंदौर के दैनिक नवभारत में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।



आइसना मध्य प्रदेश इकाई में वरिष्ठ पत्रकार कैलाश गौर प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त



ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर्स एसोसिएशन (आइसना) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शिव शंकर त्रिपाठी जी ने आशीर्वाद एवं सभी संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्य गणों की ओर से आपको इस विशेष अवसर पर ढेर सारी शुभकामनाएं दी गई है।
आप सभी पदाधिकारी एवं सदस्यगण कैलाश गौर जी को इस विशेष अवसर पर बधाइयां शुभकामनाएं दे सकते हैं।
शुभकामनाओं सहित

विनय जी. डेविड
9893221036
प्रांतीय अध्यक्ष (मध्य प्रदेश)
ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
(आइसना)

Tuesday, May 12, 2026

कोर्ट का बड़ा फैसला देखें : मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का डर दिखाकर 85 लाख सब्सक्राइबर्स वाले 4PM चैनल को बंद कर दिया, कोर्ट को कहना पड़ा चैनल बहाल करो

कोर्ट का बड़ा फैसला देखें : मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का डर दिखाकर 85 लाख सब्सक्राइबर्स वाले 4PM चैनल को बंद कर दिया, कोर्ट को कहना पड़ा चैनल बहाल करो


मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का डर दिखाकर 85 लाख सब्सक्राइबर्स वाले 4PM चैनल को बंद कर दिया. लेकिन जब मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुँचा तो सच अदालत के रिकॉर्ड में खुद सामने आ गया.

कोर्ट ने साफ लिखा कि 4PM पर लगभग 50 हजार वीडियो थे और उनमें से सिर्फ 26 वीडियो पर आपत्ति जताई गई.
फिर सवाल ये है कि 50 हजार वीडियो वाले पूरे चैनल को क्यों बंद किया गया ! क्या यही लोकतंत्र है !
अगर 26 वीडियो पर विवाद था तो कानून के मुताबिक उन्हीं वीडियो पर कार्रवाई होनी चाहिए थी.
लेकिन यहाँ पूरा चैनल बंद कर दिया गया. यानी निशाना वीडियो नहीं था. निशाना आवाज थी.
सरकार अदालत में राष्ट्रीय सुरक्षा और पब्लिक ऑर्डर जैसे भारी-भरकम शब्द लेकर पहुँची. लेकिन आखिर में कोर्ट को कहना पड़ा कि कथित आपत्तिजनक वीडियो अस्थायी रूप से ब्लॉक करो और चैनल बहाल करो.
मतलब साफ है. करोड़ों दर्शकों की आवाज बंद करने की कोशिश की गई.
आज देश में हालत ये है कि सरकार से सवाल पूछो तो राष्ट्रविरोधी सच दिखाओ तो खतरा और सत्ता की आलोचना करो तो पूरा चैनल बंद.



लेकिन याद रखिए.
4PM बिकने वालों में नहीं है.
डरने वालों में नहीं है.
झुकने वालों में नहीं है.
मोदी सरकार पूरी ताकत लगाकर भी सच की आवाज को स्थायी रूप से बंद नहीं कर सकी.
आखिरकार अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज हो गया कि 50 हजार वीडियो वाले चैनल को सिर्फ 26 वीडियो के नाम पर बंद किया गया था. साथ ही ये आज तक नहीं बताया गया कि इन 26 विडियो में आपत्तिजनक क्या था !
इतिहास गवाह है.
सत्ता हमेशा सवालों से डरती है.
और जब सरकार मीडिया से डरने लगे, समझ लीजिए सच अभी जिंदा है


सच की जीत हुई है। आवाज बंद करने की एक और कोशिश नाकाम साबित हुई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 4PM चैनल को खोलने का फैसला जारी कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि चैनल पर 50 हजार वीडियो अपलोड किए गए हैं। सरकार को 26 वीडियो पर आपत्ति है, तो सिर्फ उन वीडियो को temporary तौर पर ब्लॉक किया जाए। और सरकार कारण भी बताए कि उन 26 वीडियो में क्या दिक्कत है? साथ ही, सरकार, 4PM को उन 26 वीडियो पर अपना पक्ष रखने के लिए समय दे। इस फैसले से एक बार फिर साबित हो गया है, देश में सच अभी कहा जाता रहेगा। और ये भी कि सरकार इस तरह से मनमाने फैसले नहीं ले सकती। और सवाल पूछना, सच दिखाना ही असली देशभक्ति है। 4PM बिना डरे, बिना दबे, सच कहता रहेगा। इस मौके पर आप सभी दर्शकों का शुक्रिया, आभार।











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