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Tuesday, June 2, 2020

कैसे सफल होगा चाणक्य शाह का रोटेशन सिस्टम, आलाकमान ने किया इंकार पूर्व मंत्रियों पर बढ़ा सस्पेंस

कैसे सफल होगा चाणक्य शाह का रोटेशन सिस्टम, आलाकमान ने किया इंकार पूर्व मंत्रियों पर बढ़ा सस्पेंस

TOC NEWS @ www.tocnews.org
  •  पं. विनोद मिश्रा { उपसंपादक }

सतना। संभवतः पहली बार मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार करने में भाजपा सरकार और संगठन को दो माह से अधिक समय लग चुका है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट विस्तार को लेकर अंतिम फैसला नहीं हो पाया है।
गुजरात और कर्नाटक में जिस तरह से भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल में भाजपा चाणक्य और देश के गृहमंत्री अमित शाह के निर्देश पर रोटेशन सिस्टम प्राथमिकता से लागू किया गया। इसका मतलब दोनों राज्यों में उन नेताओं को आराम दे दिया गया जो भाजपा सरकार का पहले हिस्सा बनकर मंत्री रह चुके हैं। पुराने चेहरों की जगह गुजरात और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों ने कैबिनेट विस्तार में नये चेहरों को पूरी प्राथमिकता के साथ भाजपा सरकार में शामिल होने का अवसर प्रदान किया। मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के उपरांत जब मंत्रिमंडल विस्तार का समय आया तो एक बार फिर देश के गृहमंत्री अमित शाह ने रोटेशन सिस्टम के तहत पुराने चेहरों को आराम और नये चेहरों को मौका देने का फरमान जारी किया है।
भाजपा सरकार के पंद्रह साल के शासनकाल में जो विधायक मंत्री रह चुके हैं उन्हें इस बार कैबिनेट में शामिल नहीं किया जाएगा। रोटेशन सिस्टम के कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए कैबिनेट विस्तार और बड़ी चुनौती का काम बन गया है। सीएम के करीबी पूर्व मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल करना रोटेशन सिस्टम का सरासर उल्लंघन होगा। सूत्रों ने बताया कि भाजपा आलाकमान ने पूर्व मंत्रियों को सरकार से बाहर रखने के लिए कहा गया है। इसके बाद भी विंध्य, बघेलखंड क्षेत्र के पूर्व मंत्रियों का समूह अपने सर्मथको के साथ मिलकर कैबिनेट में शामिल किए जाने की मांग को लेकर लगातार भाजपा सरकार और संगठन पर दबाव बनाने में लगे हुए हैं। ऐसी दशा में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि भाजपा चाणक्य और देश के गृह मंत्री अमित शाह के रोटेशन सिस्टम को मध्य प्रदेश में सरकार और संगठन लागू करते हैं या नहीं।

इधर मंत्री बनाने और टिकट के लिए महाराज का दबाव

जहां एक तरफ पूर्व मंत्रियों का समूह इस बार भी सरकार में शामिल होने के लिए पुरजोर प्रयास कर रहे हैं तो वहीं ग्वालियर के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया का भारी दबाव भी भाजपा सरकार और संगठन के लिए टेंशन का विषय बना हुआ है। भाजपा आलाकमान के मना किए जाने के बाद भी पूर्व मंत्रियों का समूह मंत्री बनने के लिए हर तरह का जतन करने में लगे हुए हैं। वहीं मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार बनाने वाले 22 कांग्रेसी विधायकों के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पूरी ताकत लगाए हुए हैं। महाराज देश के पीएम नरेंद्र मोदी, गहमंत्री अमित शाह, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बीडी शर्मा से निरंतर मुलाकात कर दबाव बनाने में लगे हुए हैं। 22 बागियों को भाजपा का टिकट दिए जाने और भाजपा सरकार में दस मंत्री बनाए जाने की शर्त पर ही महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया ने न केवल भगवा धारण कर लिया बल्कि मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार को गिरवा भी दिया। सूत्रों की मानें तो भाजपा सरकार और संगठन के लिए महाराज गले की फांस बन गए हैं।

पंद्रह सालों में रीवा विधानसभा तक ठहरा रहा विकास

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सरकार को उखाड़ने के बाद सुश्री उमा भारती ने भाजपा की सरकार मध्य प्रदेश में बनाई। लगातार पंद्रह साल तक भाजपा सरकार सत्ता के सिंहासन पर काबिज रही। विंध्य क्षेत्र के रीवा से विधायक राजेंद्र शुक्ल को उमा भारती की भाजपा सरकार में मंत्री बनाया गया। सरकार में पूरा नियंत्रण होने के बाद भी विकास की गंगा का संपूर्ण जिले में विस्तार नहीं हो पाया। रीवा जिले का समुचित विकास भाषणो तक सीमित रह गया। रीवा जिले में कुल 8 विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिनमें से भाजपा सरकार के 15 वर्षीय शासनकाल के दौरान विकास की गंगा रीवा विधानसभा क्षेत्र तक सीमित रह गई।
रीवा जिले के सेमरिया, देवतालाब, मनगवां, गुढ, मऊगंज , सिरमौर, त्यों थर विधानसभा क्षेत्रों में आम जनता के लिए जमीनी विकास कार्य संभव नहीं हुए। सबसे बड़े हैरत की बात यह है कि 15 साल तक भाजपा सरकार में रीवा जिले से मंत्री रहने के बाद भी समुचित रीवा जिले का विकास एक समान भाव से संभव नहीं हो पाया कहीं ना कहीं जिले के दूसरे विधानसभा क्षेत्रों को लेकर भावनाएं सार्थक नहीं रही।
यही वजह है कि रीवा जिले में 7 विधानसभा क्षेत्रों में संचित विकास कार्य आज भी सपना बना हुआ है बिजली पानी सड़क साफ सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए आम जनता को इन विधानसभा क्षेत्रों में संघर्ष करना पड़ रहा है। 15 साल के दौरान रीवा विधानसभा क्षेत्र से बाहर विकास का पहिया ना पहुंचने की वजह से पूरे जिले का बेहतर विकास नहीं हो पाया। शायद यही वह सबसे बड़ी वजह है जिसके कारण पूर्व मंत्री और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल का भाजपा के अन्य विधायकों ने खुलकर विरोध किया है।
भाजपा के देवतालाब से गिरिश गौतम, गुढ विधायक नागेंद्र सिंह सहित अन्य विधायकों ने एक साथ मिलकर भाजपा आलाकमान और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित भाजपा संगठन से मुलाकात करते हुए रीवा विधायक को कैबिनेट में शामिल न किए जाने की मांग रखी है। वहीं भाजपा चाणक्य अमित शाह के रोटेशन सिस्टम को आधार बनाकर भी पूर्व मंत्री को आराम दिया जा सकता है। एक दो दिन में संभवतः मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल विधायकों के नाम सार्वजनिक कर शपथ ग्रहण समारोह आयोजित कराने की दिशा में काम कर रहे हैं।
✒ पं.विनोद मिश्रा {उपसंपादक}
ANI news india Bhopal
(8770448757, 9827334608)

Sunday, May 31, 2020

पश्चिम रेलवे स्पेंशल गाडि़यों में आपातकालीन कोटा के लिए आवेदन व्हाट्सएप पर

Ministry of Railways Indian Railways will start operations of 200 ...
पश्चिम रेलवे स्पेंशल गाडि़यों में आपातकालीन कोटा के लिए आवेदन व्हाट्सएप पर
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ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567
भोपाल । पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल से होकर जाने वाली स्पेंशल गाडि़यों में आपातकालीन कोटा हेतु आवेदन वाणिज्य विभाग में व्हाट्सएप पर लेने की व्यवस्था की जा रही है।   
इसकी जानकारी देते हुए मंडल रेल प्रवक्ताप ने बताया कि 01 जून 2020 से रतलाम मंडल से होकर 12 जोड़ी स्पेशल गाडि़यों का परिचालन किया जाएगा। 
कोविड-19 के प्रसार को देखते हुए रतलाम मंडल पर आवेदन लेने की कॉन्टेाक्टग लेस व्यवस्था की जा रही है। उक्त गाडि़यों जिसमें आपातकालीन कोटा पूर्व से उपलब्ध है उसमें आपातकालीन कोटा हेतु आवेदन फार्म जमा करने की व्यवस्था व्हाट्सएप के माध्योम से की जा रही है। 
जो भी यात्री आपात स्थिति में यात्रा करना चाहते हैं और वो यात्रा का पूरा विवरण, मोबाइल नम्ब र, अपना पता, यात्रा का कारण मोबाइल नम्बर 9752494550 पर व्हाट्सएप करें या पूर्ण रूप से भरे हुए आपातकालीन कोटा फार्म का फोटो व्हा्ट्सअप करें। 
उक्त  नम्बटर पर यात्री द्वारा आवेदन यात्रा आरंभ समय से 24 घंटें पहले तक भेजना होगा अन्य था उनके आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। सीट का आवंटन प्राथमिकता के अनुसार होगा।

Monday, May 25, 2020

पश्चिम रेलवे के मुंबई मंडल के 9 चुनिंदा स्टेशनों के पी आर एस काउंटरों पर यात्रियों को 27 मई, 2020 से मिलेगा पी आर एस टिकटों का रिफंड

पश्चिम रेलवे के मुंबई मंडल के 9 चुनिंदा स्टेशनों के पी आर एस काउंटरों पर यात्रियों को 27 मई, 2020 से मिलेगा पी आर एस टिकटों का रिफंड

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ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567
यात्रियों की सुविधा के लिए, भारतीय रेलवे ने 1 जून, 2020 से शुरू होने वाली 100 जोड़ी ट्रेनों के साथ चरणबद्ध तरीके से यात्री ट्रेन सेवाओं को बहाल करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के साथ, नामांकित स्टेशनों पर चयनित यात्री आरक्षण प्रणाली (PRS) के आरक्षण काउंटरों का कार्य 22 मई, 2020 से फिर से शुरू हो चुका है।
अब, इसी क्रम में पश्चिम रेलवे ने लॉकडाउन के कारण रद्द की गई यात्री ट्रेनों के पीआरएस ट्रेन टिकटों की रिफंड अदायगी भी फिर से शुरू करने का फैसला किया है। तदनुसार, पश्चिम रेलवे के मुंबई डिवीजन में, यात्री अपने पीआरएस टिकटों की रिफंड अदायगी 27 मई, 2020 से पा सकेंगे।
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री रविन्द्र भाकर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पश्चिम रेलवे के मुंबई डिवीजन के अंतर्गत चर्चगेट, मुंबई सेंट्रल, वसई रोड, वलसाड, सूरत और नंदुरबार सहित 6 स्टेशनों के चयनित पीआरएस काउंटरों पर यात्रियों द्वारा नकद या प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनों के माध्यम से विशेष ट्रेनों में आरक्षित टिकट बुक करने के का कार्य 22 मई, 2020 से शुरू हो चुका है।
इनके अलावा, 27 मई, 2020 से मुंबई मंडल के अंधेरी, बोरीवली और वापी सहित तीन और स्टेशनों के चयनित पीआरएस काउंटरों पर भी बुकिंग कार्य की शुरुआत की जायेगी। श्री भाकर के अनुसार अब यह भी निर्णय लिया गया है कि 22 मार्च, 2020 से 30 जून, 2020 के बीच रद्द की गई ट्रेनों की यात्रा के लिए बुक किये गये पीआरएस टिकटों की रिफंड अदायगी निर्धारित तारीखों के अनुसार दी जायेगी, जिनका विवरण नीचे दिया जा रहा है :-
A) यात्रा की शुरुआत की तारीख
22.03.2020 से 31.03.2020 तक
पीआरएस काउंटरों पर रिफंड की तारीख
27.05.2020 से
B) यात्रा की शुरुआत की तारीख
01.04.2020 से 14.04.2020
पीआरएस काउंटरों पर रिफंड की तारीख
03.06.2020 से
C) यात्रा की शुरुआत की तारीख
15.04.2020 से 30.04.2020 तक
पीआरएस काउंटरों पर रिफंड की तारीख
09.06.2020 से
D) यात्रा की शुरुआत की तारीख
01.05.2020 से 15.05.2020
पीआरएस काउंटरों पर रिफंड की तारीख
16.06.2020 से।
E) यात्रा की शुरुआत की तारीख
16.05.2020 से 31.05.2020 तक
पीआरएस काउंटरों पर रिफंड की तारीख
23.06.2020 से
F) यात्रा की शुरुआत की तारीख
01.06.2020 से 30.06.2020 तक
पीआरएस काउंटरों पर रिफंड की तारीख
28.06.2020 से
उल्लेखनीय है कि सभी यात्री अपनी निर्धारित यात्रा की तारीख से 180 दिनों के भीतर रेलवे द्वारा तय की गई धन वापसी का लाभ उठा सकते हैं। पश्चिम रेलवे द्वारा यात्रियों से अनुरोध किया गया है कि रद्द की गई ट्रेनों के लिए रिफंड का लाभ उठाने हेतु कोई जल्दबाज़ी न करें और सामाजिक दूरी के मानदंडों और स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन करते हुए भीड़भाड़ से बचें।

लॉकडाउन के बावजूद पश्चिम रेलवे द्वारा 263 पार्सल विशेष ट्रेनों के ज़रिये 40 हज़ार टन अत्यावश्यक सामग्री का परिवहन

लॉकडाउन के बावजूद पश्चिम रेलवे द्वारा 263 पार्सल विशेष ट्रेनों के ज़रिये 40 हज़ार टन अत्यावश्यक सामग्री का परिवहन

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ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567
पश्चिम रेलवे ने राष्ट्र के प्रति अपनी सम्पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ, बड़े पैमाने पर यह सुनिश्चित करना जारी रखा है कि कोरोना महामारी के इस कठिन समय में देश भर में अत्यावश्यक वस्तुऍं अनवरत उपलब्ध कराई जाती रहें।
यह गौरव की बात है कि देशव्यापी लॉकडाउन के बावजूद, पश्चिम रेलवे ने 40 हजार टन अत्यावश्यक सामग्री के बड़े ऑंकड़े को पार कर लिया है, जिसे पश्चिम रेलवे द्वारा लॉकडाउन की अवधि के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी 263 टाइम टेबल्ड पार्सल विशेष ट्रेनों के माध्यम से निर्धारित गंतव्यों तक पहुॅंचाया गया।
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री रविन्द्र भाकर द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 22 मार्च से 23 मई, 2020 तक, पश्चिम रेलवे द्वारा मालगाड़ियों के कुल 4488 रेकों का उपयोग 9.03 मिलियन टन आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए किया गया है। 8867 मालगाड़ियों को अन्य क्षेत्रीय रेलों के साथ जोड़ा गया, जिनमें 4464 ट्रेनें सौंपी गईं और 4403 ट्रेनें अलग-अलग इंटरचेंज पॉइंट पर ले जाई गईं। पार्सल वैन / रेलवे मिल्क टैंकरों (आरएमटी) के 264 मिलेनियम पार्सल रेकों को आवश्यक सामग्री जैसे दूध पाउडर, तरल दूध, चिकित्सा आपूर्ति और अन्य सामान्य उपभोक्ता वस्तुओं की मांगों का सामना करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा गया।
गौरतलब है कि, 23 मार्च से 23 मई, 2020 तक, 40 हज़ार टन से अधिक वजन वाली अत्यावश्यक वस्तुओं को पश्चिम रेलवे ने अपनी 263 पार्सल विशेष गाड़ियों के माध्यम से अपेक्षित स्थानों तक पहुॅंचाया है, जिनमें कृषि उपज, दवाइयां, मछली, दूध आदि मुख्य रूप से शामिल हैं। इस परिवहन से लगभग 12.14 करोड़ रु. की आय हुई है, जिसके तहत पश्चिम रेलवे द्वारा बत्तीस दुग्ध विशेष रेलगाड़ियाॅं चलाई गईं, जिनमें 23,500 टन से अधिक भार और वैगनों का 100% उपयोग से लगभग 4.04 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया गया। इसी तरह, 227 कोविड -19 विशेष पार्सल ट्रेनें भी अत्यावश्यक वस्तुओं के परिवहन के लिए चलाई गईं,
जिनके लिए अर्जित आय 7.3 करोड़ रुपये से अधिक रही। इनके अलावा, लगभग 78 लाख रु. की आय के लिए 100% उपयोग के साथ 4 इंडेंटेड रेक भी चलाये गये। श्री भाकर ने बताया कि 24 मई, 2020 को देश के विभिन्न भागों के लिए पश्चिम रेलवे से तीन पार्सल स्पेशल ट्रेनें रवाना हुईं, जिनमें बांद्रा टर्मिनस - लुधियाना, पोरबंदर - शालीमार और भुज - दादर स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मार्च, 2020 के बाद से उपनगरीय और गैर-उपनगरीय खंडों सहित पश्चिम रेलवे की कमाई का लॉकडाउन के कारण अनुमानित कुल नुकसान 1001.40 करोड़ रुपये रहा है।
इसके बावजूद, अब तक टिकटों के निरस्तीकरण के परिणामस्वरूप, पश्चिम रेलवे ने 280.12 करोड़ रुपये की रिफंड राशि वापस करना सुनिश्चित किया है। गौरतलब है कि इस रिफंड राशि में अकेले मुंबई डिवीजन ने 134.49 करोड़ रुपये का रिफंड सुनिश्चित किया है। अब तक, 43 लाख यात्रियों ने पूरी पश्चिम रेलवे पर अपने टिकट रद्द कर दिए हैं और तदनुसार उनकी रिफंड राशि प्राप्त की है।

Sunday, May 24, 2020

प्रेमिका से मिलने पहुंचे थे भाजपा नेता, अचानक घर पर पति आ टपका, तो तीसरी मंज़िल से लगा दी छलांग, वीडियो वॉयरल देखें

प्रेमिका से मिलने पहुंचे थे भाजपा नेता, अचानक घर पर पति आ टपका, तो तीसरी मंज़िल से लगा दी छलांग, वीडियो वॉयरल देखें  

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चंडीगढ़ - चंडीगढ़ पुलिस ने बताया कि हमें संदेश मिला कि कोई व्यक्ति सैक्टर 63 , मोहाली के मकान नंबर 2214 की दूसरी मंजिल से गिर गया है l
इसके बाद हमारी टीम मौके पर पहुंची तब पुलिस की पीसीआर उसे पीजीआई ले गई थी l जाँच करने पर पता चला कि करनाल 13 सैक्टर का रहने वाला चंद्रप्रकाश कथूरिया पंचकूला किसी काम से आया था और यहां 63 सैक्टर के फ्लैट में अपनी महिला मित्र से मिलने आया था l इस दौरान किसी ने घर की घंटी बजाई तो कथूरिया ने इससे बचने के लिए कपड़े की रस्सी बनाकर बालकोनी से नीचे जाने की कोशिश की लेकिन गिर गया l
पुलिस की पीसीआर उसे ईलाज के लिए पीजीआई ले गई जहां SHO 49 ने इससे बात करनी चाही लेकिन वह बात करने में असमर्थ था l पीजीआई से इसे फोर्टिस अस्पताल में शिफ्ट किया गया है l  शुक्रवार की शाम सोशल मीडिया पर खबर आई कि हरियाणा में भाजपा नेता व शूगरफेड के पूर्व चेयरमैन चंद्रप्रकाश कथूरिया ने सेक्टर-63 चंडीगढ़ स्थित एक सोसायटी की तीसरी मंजिल से संदिग्ध परिस्थितियों में छलांग लगा दी है।
चंद्रप्रकाश के पेअर पर मामूली चोटें तो आई हैं लेकिन गंभीर नहीं हैं। पुलिस उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले गई है। भाजपा नेता ने छलांग किन परिस्थितियों में लगाई उस वक्त यह पता नहीं चला लेकिन पुलिस ने अपनी प्रैस रिलीज जारी कर शुरूआती जाँच के बारे में बताया l

उस फ्लैट के बाहर ही कथूरिया की गाड़ी भी खडी दिखी, गिरते ही तुरंत किसी ने पूरा वीडियो भी बना डाला जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया l पुलिस पूरे मामले के तथ्य जुटाकर जाँच कर रही है l

Saturday, May 23, 2020

''दिल्ली क्राइम'' भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा का “संपादक” गिरफ्तार, मध्यप्रदेश सहित 260 फर्जी “पत्रकार” बना डाले, पंचरवाला, कबाड़ी कक्षा 3 पास 2100 में बन गया “पत्रकार”, पुलिस को मध्यप्रदेश में जाल बिछाने वाले सरगनाओं की तलाश

''दिल्ली क्राइम'' भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा का “संपादक” गिरफ्तार, मध्यप्रदेश सहित 260 फर्जी “पत्रकार” बना डाले, पंचरवाला, कबाड़ी कक्षा 3 पास 2100 में बन गया “पत्रकार”, पुलिस को मध्यप्रदेश में जाल बिछाने वाले सरगनाओं की तलाश 

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विशेष संवाददाता की रिपोर्ट
जबलपुर, दिल्ली से प्रकाशित होने वाले मंथली अखबार “दिल्ली क्राइम”/ भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा का एक “संपादक” को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, मध्यप्रदेश सहित 260 लोगों से 2100-2100 रुपए लेकर उन्हे “पत्रकार” बनाया है व आई कार्ड बांटे हैं। पुलिस इस सबकी भी जांच-पड़ताल कर रही है। 
 
“दिल्ली क्राइम”/ भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा का जाल उत्तर प्रदेश सहित देश के कई छेत्र में फैला हुआ है मध्यप्रदेश में भी इसका नेटवर्क जारी है यह शातिर लोग भोले भाले लोगों को पत्रकार बनाने का और नौकरी के नाम पर सैलरी झांसा देकर अपने जाल में फ़सा लेते है, ऐसे लोगों की हरकतों की वजह से पत्रकार विरादरी की भी बदनामी हो रही है, पुलिस ने जानकारी में बताया की इस फर्जी संस्थान के लोग और बनाये गये फर्जी पत्रकार अभी भी सक्रिय है जिनके नामों के खुलासे हुए है जांच चल रही है उनकी तलाश जारी है जल्द ही गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जायेगा,  “दिल्ली क्राइम”/ भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा का मुख्य सरगना अभी फरार है।
 
DELHI CRIME
DELHI CRIME
प्रेस का फर्जी कार्ड लेकर लोगों पर रौब गांठने वालों को भी सबक सिखाकर आम जनमानस में खराब हो रही पत्रकारिता की छवि को भी बचा रही है। लाॅकडाउन में आई बड़ी जिम्मेदारी के बीच भी एसएसपी अभिषेक यादव के निर्देशन व नेतृत्व में जिले की पुलिस लगातार अपराधियों के हाॅफ इनकाउंटर में उन्हे पुलिस की गोली का मजा चखाकर अस्पताल/जेल पहुंचा रही है तो फर्जी पत्रकारों के खिलाफ एसएसपी अभिषेक यादव स्वयं मोर्चा संभाले हुए हैं।
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DELHI CRIME 01
DELHI CRIME
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जिले में आजकल प्रेस लिखे वाहनों एवं तथाकथित पत्रकारों की बाढ़ सी आई हुई है। पुलिस ने फर्जी पत्रकारों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत दो दिनों में पांच फर्जी पत्रकारों को न केवल सलाखों के पीछे पहुंचाया, बल्कि ऐसे लोगों को “पत्रकार” बनाने वाले दिल्ली के एक “संपादक” को भी अपनी लिखा-पढ़ी की गिरफ्त में ले लिया है। एसएसपी अभिषेक यादव ने स्वयं प्रेस कांफ्रेंस कर पत्रकारों को इस बारे में जानकारी दी।
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DELHI CRIME
 
लाॅकडाउन में बाइक पर प्रेस का लोगो / स्टीकर लगाकर गले में “पत्रकार” का आई कार्ड डालकर घूम रहे किदवई नगर निवासी सलमान को सिविल लाइन पुलिस ने पकड़ा और थाने ले जाकर उससे पूछताछ शुरू ही की थी कि गांधीनगर, नई मंडी निवासी सतेंद्र सैनी साथियों के साथ थाने जा पहुंचा और ये सब भी अपने को पत्रकार बताकर पुलिस पर दबाव बनाने लगे। पुलिस ने व्यापक जांच-पड़ताल के बाद सलमान व सतेंद्र के साथ ही कूकड़ा, नई मंडी निवासी चंद्रभान, गांधीनगर-नई मंडी के सुरेंद्र व अमित बिहार-नई मंडी निवासी कथित पत्रकार प्रवेश कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया।
 
पुलिस के अनुसार पकड़ा गया सलमान कक्षा 3 पास है तथा कबाड़ी का काम करता है। सलमान ने पूछताछ में बताया कि सतेंद्र ने 2100 रुपए लेकर कथित रुप से दिल्ली से प्रकाशित होने वाले मंथली अखबार “दिल्ली क्राइम” का आई कार्ड, प्रेस का लोगों / स्टीकर दिलवाया था । सलमान ने यह भी बताया कि सतेंद्र व उसके साथियों ने जिले के करीब 260 लोगों से 2100-2100 रुपए लेकर उन्हे “पत्रकार” बनाया है व आई कार्ड बांटे हैं। पुलिस इस सबकी भी जांच-पड़ताल कर रही है।
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DELHI CRIME
DELHI CRIME
DELHI CRIME
DELHI CRIME
 
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पकड़े गए लोगों के कब्जे से प्रेस का लोगों / स्टीकर लगी बाइक ( UP 12AM/1725 ) , फर्जी आई कार्ड, प्रेस की 3 डायरियां व जिन्हे आई कार्ड बांटे गए, उनकी सूची बरामद हुई है। पिछले कुछ दिनों में मुजफ्फरनगर पुलिस ने जिन फर्जी “पत्रकारों” को पकड़ा उनमें से कोई साइकिल का पंचर बनाने का काम करने वाला निकला, कोई कपड़े प्रेस करने वाला तो कोई रिक्शा चालक निकला। मजे की बात यह है कि इनमें से ज्यादातर तथाकथित पत्रकार कक्षा 3 से कक्षा 5 तक ही पढ़े निकले। पुलिस ने मोतीनगर-दिल्ली निवासी कथित संपादक प्रेम नारायण को भी आरोपी बनाया है, जो अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। प्रेम नारायण पैसे लेकर “पत्रकार”/भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा की मेंबरशिप का आई कार्ड देता था।
 
DELHI CRIME
DELHI CRIME
 
पुलिस ने सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420/469/270 के साथ ही आपदा प्रबंधन की धारा 51 व महामारी दंड अधिनियम की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया है। फर्जी पत्रकारों के खिलाफ पुलिस के अभियान से जिले के वास्तविक पत्रकारों ने राहत की सांस ली है। यह मामला मुजफ्फरनगर का है.
 

Friday, May 22, 2020

नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेल्वेमैन के आहवान पर वे से रे म संघ द्वारा सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों व श्रमिक कानूनों में व्यापक बदलाव के खिलाफ हुआ विरोध प्रदर्शन

नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेल्वेमैन के आहवान पर वे से रे म संघ द्वारा सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों व श्रमिक कानूनों में व्यापक बदलाव के खिलाफ हुआ विरोध प्रदर्शन

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भोपाल । केंद्र सरकार द्वारा लगातार मजदूर विरोधी नीतियों श्रमिक कानूनों में व्यापक बदलाव व महंगाई भत्ता रोकने के विरोध में समस्त केंद्रीय श्रमिक संगठनों INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTNC, TUCC तथा NFIR के आहवान पर आज दिनाक 22 मई 2020 को पूरे देश में विरोध प्रदर्शन कर विरोध दिवस मनाया गया वे से रे म संघ के मीडिया प्रवक्ता रोमेश चौबे ने बताया कि संघ के अध्यक्ष डॉ आर पी भटनागर ने कहा कि सरकार कोविद 19 की आड़ में अपने मजदूर विरोधी इरादों को पूरा करना चाहती है सरकार ने रेल समेत समस्त केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्तों को रोककर तथा उसके बाद श्रमिक कानूनों में व्यापक बदलाव करने की दिशा में अपने मंसूबे जाहिर कर दिए.
संघ के महामंत्री अशोक शर्मा एवं कार्यकारी महामन्त्री सतीश कुमार ने बताया कि सरकार द्वारा देश के समस्त क्षेत्र के मजदूरों को गुलाम बनाने के उद्देश्य से लगातार मजदूर विरोधी निर्णय एव श्रम कानूनों को निष्प्रभावी करने की साजिश हो रही है सरकार द्वारा नौकरी की सुरक्षा खत्म करके काम के घंटे ज्यादा, कम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा में कटौती, ट्रेड यूनियन अधिकारों का खात्मा, बोनस एक्ट खत्म, श्रम कानूनों पर तलवार चलाई जा रही है.
मजदूरों को बधुआ बनाने का काम किया जा रहा है जो कि वे से रे म संघ कतई बर्दाश्त नहीं करेगा इसके विरोध में आज संघ द्वारा जबलपुर, भोपाल, कोटा तीनों मंडलों, कारखानों, मुख्यालयों, तथा सभी स्टेशनों पर विरोध प्रदर्शन किया गया विरोध प्रदर्शन में कर्मचारियों ने मास्क पहने और सोशल डिस्टेनसिंग का पालन किया भोपाल ,इटारसी,बीना में मंडल अध्यक्ष राजेश पाण्डेय, मंडल सचिव आर के यादव जी के नेतृत्व में एम एस पूरी, बी एल मिश्रा, भूमेश माथुर, अंशु भटनागर, मनोज अग्रवाल, वीरेश तिवारी, के एन गुप्ता, प्रभात उपाध्याय, विजय राघवन, आलोक त्रिपाठी, अनुपम गुप्ता, अभिषेक गुप्ता, कमलेश परिहार, चक्रेश जैन, मुकेश गुप्ता, हरिओमशरण मिश्रा, धर्मेन्द्र सिंह, परमजीत सिंह, निरंजन वर्मा,के के मूर्ति, रवि चौबे, दीपू ठाकुर, विशाल परोचे, सुदीप मालवीय, विशाल त्रिपाठी, आलोक कुशवाह, राजीव चौबे, अनिल मिश्रा, अनिल यादव, दिवाकर गुप्ता, मनोज चौरसिया, जगदीश साहू, पवन सिंह आदि मौजूद रहे

Thursday, May 21, 2020

मैं 'मज़बूर' मज़दूर क्या...? अधमरे मजदूरों को पूरा मार देंगी सरकारें....?

मैं 'मज़बूर' मज़दूर क्या...? अधमरे मजदूरों को पूरा मार देंगी सरकारें....?

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मजदूरों को लेकर राज्यों के बीच तालमेल का अभाव
  • विजया पाठक
लॉकडाउन को दो माह बीत चुके हैं। इन दो माह में देश के 12 करोड़ मजदूर अभी भी दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं। इरादों से बुलंद मजदूर अपनी बेबसी, लाचारी और कमजोरी के चलते अब राजनीति की भी भेंट चढ़ने लगा है। राज्यों की सीमाओं में फंसे इस प्रवासी मजदूरों की सुध तक नही ली जा रही है। राज्य सरकारें इन्हें बांटने पर तुली हुई हैं। जिसके परिणाम है कि दो माह बाद भी अपने घरों तक नहीं पहुँच पा रहे हैं।
सैकड़ों कि.मी. पैदल चलने के बाद भी राज्यों की सीमाओं पर फंसे हैं। प्रवासी मजदूरों को राज्यों में बांटकर नेताओं ने बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी हैं। किसी ने कल्पना नहीं की होगी कि एक दिन मजदूरों की बेबसी पर राजनीति हो सकती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, मध्यप्रदेश, राजस्‍थान, गुजरात जैसे तमाम राज्य हैं जो मजदूरों के पलायन पर एक-दूसरों पर छींटाकशी कर रहे हैं। इन्हें एक बात समझनी चाहिए कि यह सिर्फ देश के निर्माणकर्ता भर हैं। अपने खून-पसीने और मेहनत से इन्हों ने देश को खड़ा किया है।
लेकिन विडम्बना ही है कि राजनेताओं के कारण आज इस लॉकडाउन में सबसे ज्यादा मजदूर वर्ग ही परेशान है। रोजी-रोटी तो छिनी ही अब इन्हें अपनी जन्म-भूमि भी नसीब नहीं हो पा रही है। बड़ी त्रासदी है कि राज्य सरकारें आपसी तालमेल के अभाव में इन्हें अपनाने में आना-कानी कर रही हैं। हर रोज हम इस मीडिया और सोशल मीडिया नेटवर्क पर मजदूरों की बेबसी की तस्वींरें देख रहे हैं। कोई मॉं अपने बच्चों को लेकर चल रही है तो कोई बेटा अपने मॉं-बाप को कंधों पर बिठाकर चल रहा है। तस्वीरें हमें बहुत बिचलित करती हैं। ताज्जुब है कि हमारी सरकारें इन तस्वीरों को देखकर भी पसीज नही रही है। इनकी मानवता और मानवीयता बिल्कुल मर चुकी है।
कोरोना काल में जो दुर्दशा मज़दूर की हुई है उससे सबकी आंखों में पानी उतर रहा है, गले में रुदन हो रही है। आज की स्थिति में लगभग 70% प्रवासी कामगारों के पास न पैसे हैं न काम हैं। वे घर जाना चाहते हैं। अकेले गुजरात में 30 लाख प्रवासी कामगारों ने घर वापसी का आवेदन कर रखा है पर 10% की भी जाने की व्यवस्था सरकार द्वारा नहीं की है बल्कि उनका मार्ग अवरुद्ध कर रखा है।
यही स्थिति कमोवेश सभी औधोगिक राज्यों की है। प्रवासी मज़दूर की दुर्दशा के लिए हमारी प्रतिक्रिया आज के भारत का पतन दर्शाती है, निचले वर्ग (गरीब मज़दूर) की असमानताएं, समाज के नैतिक मूल्यों की हानि, राजनीति का पक्षघात और विषाक्त मीडिया, क्या हम दूर नाइजीरिया में कुछ मानवीय संकटों पर प्रतिक्रिया कर रहे थे उससे खराब स्थिति तो भारत की है। तालाबंदी के कारण 12 करोड़ से अधिक व्यक्तियों को अचानक नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इनमें से चार करोड़ से अधिक प्रवासी मजदूर हो सकते हैं। स्ट्रैंडर्ड वर्कर्स एक्शन नेटवर्क (स्वान) द्वारा चलाए जा रहे हेल्पलाइन नंबर पर कॉल के आधार पर एक सर्वेक्षण से उनकी स्थिति के बारे में पता लगता है। उनमें से 90 प्रतिशत को लॉकडाउन अवधि में किसी को भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया है।
80 फीसदी को कोई राशन नहीं मिला है। नौकरी के बिना और भविष्य की आशा के बिना ये प्रवासी श्रमिक अब बस एक चीज़ चाहता है घर वापसी। जाहिर है, एक करोड़ से अधिक श्रमिकों ने अपने घरों में लौटने के लिए पंजीकरण किया है। सरकार की ओर से यह कहते हुए तालाबंदी शुरू हुई कि प्रवासी श्रमिक मौजूद नहीं थे। सरकार के मूल दिशानिर्देशों में उनके बारे में एक शब्द भी नहीं था। उन्हें केवल तभी देखा गया जब उनमें से लाखों ने सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलना शुरू किया। कैमरों को दिखाई देने वाली भीड़ को तितर-बितर कर इस समस्या का प्रबंधन किया गया। उनमें से कुछ को बसों में पैक किया गया, अन्य को अस्थायी राहत शिविरों में भेज दिया गया। किसी को भी यात्रा करने की अनुमति नहीं देने के सख्त आदेश जारी किए गए थे। वे रुके नहीं, लाखों ने चलना जारी रखा।
लेकिन वे टीवी की सुर्खियों में नहीं थे। उस समय पाकिस्तान और हिंदु लिंचिंग प्राइम टाईम मे चल रहा था। जिन लोगों की पहली चिंता की गई उनमें उत्तराखंड में फंसे गुजराती पर्यटक, वाराणसी में फंसे आंध्र के तीर्थयात्री, पंजाबी तीर्थयात्री, कोटा में पढ़ रहे मध्यवर्गीय बच्चे, विदेशी नागरिक जिन्हें विशेष फ्लाइट पकड़ने की जरूरत थी और निश्चित रूप से किसी बड़े या छोटे वीआईपी से संबंधित थे। वे संक्रमित हो सकते हैं; वास्तव में उनमें से कई संक्रमित निकले। अब भारतीय रेलवे ने 15 लाख प्रवासी मज़दूरों के लिये श्रमिक ट्रेनें चलायी। उसके लिये वे शाबासी ले रहे हैं। जबकि भारतीय रेलवे कोरोना काल से पहले 2 करोड़ लोगों का रोज परिवहन करती थी। इसी भारतीय रेलवे ने भूकंप के बाद नेपालियों के लिए भी मुफ्त ट्रेनें चलाईं थी। पर इस देश में गरीब मज़दूर की किसी ने चिंता नहीं की।
बात मध्य प्रदेश की तो पहले से अधमरे मजदूरों को इस लॉकडाउन के बाद पूरा मारा जा रहा है, मध्य प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र ने श्रम कानूनों में बदलाव किया गया। इसका एक महत्वपूर्ण भाग है वर्किंग ऑवर बढ़ाना। पहले श्रम कानून के हिसाब से हफ्ते में श्रमिक 6 दिन काम करता था और रोजाना 8 घंटे मतलब हफ्ते के 48 घंटे के बाद एक रेस्ट दिन होता था, जिसे बदलकर अब दिन के 12 घंटे रोज और हफ्ते के 72 घंटे कर दिया गया है। इस नये कानून की मूलभावना सामंतवादी प्रतीत होती है। एक तो पुराने कानून में संशोधन करते वक्त किसी मज़दूर संगठन से मंत्रणा नहीं की। कम से कम भारतीय मजदूर संघ जो कि‍ आर.एस.एस की सह्योगी संस्था है उसी से मंत्रणा कर लेते। 
यह राज्यस सरकारों की बहुत बड़ी गलतफहमी है कि मजदूर किसी का नहीं है। यह वह वर्ग है जो सत्ताह परिवर्तन में अहम रोल अदा कर सकता है। जब मजदूर अपनी ताकत का इस्ते माल करता है तो सबको हिलाकर रख देता है। आज भले ही यह अपनी बेबसी, लाचारी के मारे शांत है, असहाय है लेकिन जब यह ताकतवर बनता है तो पसीने छुड़ा देता है। हमारी सरकारों को आज इनके हाल और हालात पर विशेष ध्यालन देना चाहिए क्योंनकि वर्तमान परिदृश्य में मजदूर बहुत बड़ी त्रासदी से गुजर रहा है। छोटे से प्रयास इन्हेंश खुशी दे सकते हैं।

Monday, May 18, 2020

Covid-19 : किस राज्‍य में कोरोना के कितने मामले, यहां देखिए पूरी लिस्‍ट

Covid-19 : किस राज्‍य में कोरोना के कितने मामले, यहां देखिए पूरी लिस्‍ट

नई दिल्‍ली. भारत में कोरोना वायरस केसेज की संख्‍या 90 हजार का आंकड़ा पार कर गई है। महानगरों से नए मामले लगातार सामने आ रहे हैं। दिल्‍ली, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे और चेन्‍नई में करीब 46 हजार मरीज कोविड-19 संक्रमित हैं। अकेले मुंबई में ही करीब 19 हजार मामले हैं।
कोरोना से मरने वालों की संख्‍या 2900 के करीब पहुंच गई है। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के मुताबिक, मरने वालों में से करीब 70 पर्सेंट मरीजों को अन्‍य दूसरी बीमारियां भी थीं। आइए जानते हैं क‍ि देश के किस राज्‍य में कोरोना के कितने मरीज हैं।
1.अंडमान निकोबार33330
2.आंध्र प्रदेश2355135349
3.अरुणाचल प्रदेश110
4.असम92412
5.बिहार11794537
6.चंडीगढ़191513
7.छत्तीसगढ़67560
8.दादरा एवं नगर हवेली100
9.दिल्ली93333926129
10.गोवा1770
11.गुजरात109884308625
12.हरियाणा88751413
13.हिमाचल प्रदेश78433
14.जम्मू-कश्मीर112154212
15.झारखंड2171133
16.कर्नाटक109249636
17.केरल5874954
18.लद्दाख43220
19.मध्य प्रदेश47892315243
20.महाराष्ट्र3070670881135
21.मणिपुर720
22.मेघालय13111
23.मिजोरम110
24.ओडिशा7371963
25.पुदुचेरी1391
26.पंजाब1946125732
27.राजस्थान49602839126
28.तमिलनाडु10585353874
29.तेलंगाना150997134
30.त्रिपुरा167640
31.उत्तराखंड88511
32.उत्तर प्रदेश42582441104
33.पश्चिम बंगाल2576872232
 राज्‍यों को रीएसाइन किए जा रहे केस290  
 कुल कोविड-19 मरीजों की स्थिति90927*341092872
*सोर्स : केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय (MoHFW) 16 मई की सुबह 8 बजे तक।

Thursday, May 14, 2020

प्रधानमंत्री ने गरीबों के लिए खजाना खोल दिया है : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

'वन नेशन वन राशन कार्ड'

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भोपाल // विनय जी. डेविड 9893221036 

    'वन नेशन वन राशन कार्ड' क्रांतिकारी फैसला    
 8 करोड़ से अधिक प्रवासी मजदूर होंगे लाभान्वित 

भोपाल : मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि प्रवासी मजदूरों, छोटे किसानों, रेहड़ी पट्टी वालों (स्ट्रीट वेंडर्स) आदि के लिए की गई घोषणाओं के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गरीबों के लिए खजाना खोल दिया है।
'वन नेशन-वन राशन कार्ड' क्रांतिकारी फैसला है, जिसके माध्यम से प्रवासी मजदूर जहां भी कार्य के लिए जाएंगे वहीं उन्हें राशन प्राप्त हो जाएगा। इसके साथ ही प्रवासी मजदूरों को अगले 2 माह तक नि:शुल्क राशन तथा 5 किलो अतिरिक्त राशन प्रदाय किया जाएगा।
रेहड़ी पट्टी वालों को बड़ी मदद
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सरकार द्वारा रेहड़ी पट्टी वालों (स्ट्रीट वेंडर्स) के लिए 5 हजार करोड़ रूपये की सहायता की घोषणा की है जो कोरोना संकट के दौर में उनके लिए बड़ी मदद साबित होगी।
मुद्रा स्कीम अत्यंत लाभकारी
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा शिशु लोन, किशोर लोन एवं तरूण लोन के जो प्रावधान किए गए हैं, वे अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे।
'किफायती किराए पर मकान योजना' अत्यंत उपयोगी
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि 'प्रधानमंत्री आवास किफायती किराए पर मकान योजना' अत्यंत उपयोगी है। इससे शहरी प्रवासी गरीबों को अत्यंत कम किराए पर शहरों में मकान मिल पाएंगे।

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