Thursday, December 31, 2015

जंगलों में हो रही अवैध कटाई, राज्य सरकार ने नहीं बनाया वनों का डिजिटल मैप

 

यह खुलासा वाइल्ड लाइफ एक्टीविस्ट अजय दुबे ने गुरूवार को मीडिया से चर्चा में किया। उनके अनुसार सितंबर माह में दिल्ली में हुई प्रधान मुख्य वन संरक्षकों की बैठक में भारत सरकार ने यह आदेश जारी कर राज्यों के प्रत्येक जिले के वन क्षेत्र का जिओ रेफरेंस्ड डिस्ट्रिक्ट फारेस्ट मैप्स बनाकर 31 अक्टूबर तक केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को सूचित करने के लिए कहा था। लेकिन, मध्यप्रदेश सरकार के वन विभाग ने आज तक इसकी प्रक्रिया तक शुरू नहीं की। इसके कारण प्रदेश के वनों में हो रही पेड़ों की अवैध कटाई के बारे में पता लगाना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने रातापानी में रोजाना हो रही लकड़ी की कटाई और सागौन की तस्करी के फोटो भी जारी किए। उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जतायी कि मप्र सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार रातापानी अभ्यारण को टाइगर रिज़र्व बनाने की स्वीकृति 2008में दे चुकी है लेकिन आज तक राज्य सरकार ने अधिसूचना के लिए प्रस्ताव नहीं भेजा।
 

आईएसआईएस के अटैक का डर, नहीं हुआ राज्य सुरक्षा आयोग का पुनर्गठन
इसके साथ ही उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सिंहस्थ की सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर राज्य सुरक्षा आयोग का पुनर्गठन भी नहीं करने पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक तरफ आईएसआईएस का अटैक चल रहा है वहीं दूसरी ओर मप्र सरकार राज्य सुरक्षा आयोग के पुनर्गठन को लेकर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, जबकि दूसरी ओर १५ राज्यों में यह आयोग बन चुके हैं। वर्ष 2013 में यह आयोग बनाया गया था। इसका उद्देश्य सुरक्षा के लिए बेहतर नीति बनाना था।
 

इसी तरह आईएएस अफसरों के तबादलों के लिए सिविल सर्विस बोर्ड भी नहीं बनाने पर उन्होंने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार में जो जानकारी सामने आयी है उसके मुताबिक राज्य सरकार ने पिछले 23  महीनों में सिविल सर्विस बोर्ड के गठन के कोई प्रयास नहीं किए हैं। जबकि 25 राज्यों में यह आयोग बन चुका है। उन्होंने राज्य सरकार से राज्य सुरक्षा आयोग का पुनर्गठन और सिविल सर्विस बोर्ड का गठन करने की मांग की है।

नई ऊर्जा, नये संकल्पों के साथ करें 2016 का स्वागत : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा ब्लॉग.👇🏻
नई ऊर्जा, नये संकल्पों के साथ करें 2016 का स्वागत

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 नव वर्ष के शुभागमन पर सभी नागरिकों को शुभकामनाएँ।  नया क्षितिज, नई आशाएँ सामने हैं। नई ऊर्जा और नये संकल्पों के साथ हम सब 2016 का स्वागत करें। अपने हिस्से की खुशियाँ सब के साथ बाँटे और दूसरों के कठिन समय में उनका साथ दें।

लोकहित के संकल्पों को पूरा करने में वर्ष 2015 बीत गया। उपलब्धियों के साथ गौरव के क्षण आये तो विषम परिस्थितियाँ भी साथ रहीं। अल्प वर्षा से प्रदेश प्रभावित रहा। किसान भाइयों के लिये संकट का समय रहा। सरकार संकट में किसानों के साथ खड़ी रही। नये संदर्भों में पूरे कृषि परिदृश्य की समीक्षा की। कई समाधान सामने आये। पूरी सरकार गाँव में पहुँची। मैं मानता हूँ कि किसान सिर्फ व्यक्ति नहीं है, वह देश की अमूल्य मानव पूँजी है। हम कारखानों में विलासिता की कई चीजें बना सकते हैं लेकिन गेहूँ, चावल और दाल कारखानों में नहीं बनतीं। इसलिये जो किसान हमें अन्न उगाकर देते हैं उनके हितों की सुरक्षा सरकार का प्रथम दायित्व है। हमने वो सभी जरूरी कदम उठाये जिनकी किसानों को संकट के समय जरूरत थी। अब कोशिश है कि नये साल में किसान नई ऊर्जा और आत्म-विश्वास के साथ अपना काम शुरू करें।

          कई अर्थों में 2015 प्रदेश के लिये हितकारी और मान-सम्मान बढ़ाने वाला वर्ष रहा। दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन की मेजबानी एक चुनौती भरा काम था जो सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। स्वच्छ भारत मिशन में मध्यप्रदेश के योगदान का उल्लेख प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने दो बार लोकप्रिय कार्यक्रम 'मन की बात' में किया। देश के विकास परिदृश्य पर नजर रखने वाली विशेषज्ञ संस्थाओं ने मध्यप्रदेश को सबसे तेज गति से प्रगति करने वाला प्रदेश बताया।

विकास की कई अनूठी पहल देश में पहली बार मध्यप्रदेश से शुरू हुईं। घटना-स्थल पर पुलिस की तत्काल सहायता उपलब्ध करवाने के लिये डायल 100 देश में इस प्रकार की पहली योजना है। महिलाओं को शासकीय नौकरियों में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय प्रदेश में सामाजिक परिवर्तन लाने वाला सिद्ध होगा। हम चाहते हैं कि प्रदेश के नवनिर्माण में मातृशक्ति का सृजनात्मक उपयोग हो। जनगणना 2011 के ताजा आँकड़ों से स्पष्ट है कि महिलाएँ विकास में अपनी भागीदारी को लेकर उत्साहित हैं और चाहती हैं कि वे अपनी क्षमता और प्रतिभा के अनुरूप नौकरी करें। विकास का हर क्षेत्र उपलब्धियों से भरा है। अध्यापक संवर्ग को नये साल से छठवें वेतनमान का लाभ मिलने लगेगा। इससे एक लाख 84 हजार अध्यापकों को  लाभ मिलेगा। आईआईटी में मध्यप्रदेश के शासकीय विद्यालयों के अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों का चयन मध्यप्रदेश के लिये गौरव की बात थी। यह सिलसिला शुरू हो गया है। नये साल में हमें और ज्यादा मेहनत करनी होगी कि ज्यादा से ज्यादा बच्चे देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में जायें और प्रदेश का नाम रौशन करें। विशेषज्ञ स्वास्थ्य सुविधाओं तक आम लोगों की पहुँच भी आसान हुई है।

      वर्ष 2015 की शुरूआत से ही हमारी कोशिश थी कि हम युवाओं को उद्यमशील बनायें। उनमें उद्यमशीलता की भावना आये और वे आगे बढ़ें। मैं चाहता हूँ कि हर जिले में युवा उद्यमी तैयार हों। मुझे खुशी है कि कुछ युवाओं ने प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किये हैं। वे आज सफलतापूर्वक अपना उद्योग चला रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ अपने लिये बल्कि अपने अन्य युवा साथियों के लिये भी रोजगार निर्माण किया है। युवा उद्यमी नये साल में नये जोश के साथ नई मंजिलें तय करें।

अंत्योदय दर्शन को हमने हर योजना में अंगीकार किया है। गरीब कल्याण वर्ष में गरीबी उन्मूलन की योजनाओं पर सफलता से अमल कर अधिक से अधिक लोगों को उनका लाभ दिलाया गया। उद्देश्य यही था कि गरीब परिवार कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। कौशल उन्नयन को मिशन के रूप में लिया गया है। कौशल विकास से रोजगार निर्माण को और बढ़ाना हमारा मिशन है।

एक सुखद अनुभव यह रहा कि नागरिकों ने प्रदेश में धार्मिक सहिष्णुता और सदभाव का अदभुत परिचय दिया। मोहर्रम, विजयादशमी और देवी विसर्जन के धार्मिक अवसरों का एक साथ आना कानून-व्यवस्था के लिये चुनौती था लेकिन ये त्यौहार शांतिपूर्वक सम्पन्न हुए। मुझे प्रदेश के नागरिकों पर गर्व है। मुझे विश्वास है कि नये साल में भी सर्वधर्म समभाव की हमारी गौरवशाली परंपरा ऐसे ही जारी रहेगी।

नए साल में कौशल विकास, रोजगार निर्माण तथा शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य हमारी प्राथमिकताएँ होंगी। यही कामना है कि हर नागरिक प्रगति करे। सबको काम के अवसर मिलें। हर युवा हुनरमंद बने। हर परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आये। सब सुखी हों। सब निरोग हों।
( लेखक: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं )

महिला बाल विकास के ऑफिस के पास बाबू उमर खान को 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते लोकायुक्त ने पकड़ा

स्वसहायता समूह के बिल पास करने को लेकर महिला बाल विकास के ऑफिस के पास बाबू उमर खान को 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते लोकायुक्त ने पकड़ा। शिकायत करता सावित्री देवी पथरोटा निवासी है।
विजलेंस टीम में मनोज मिश्रा ti, अमरेश बोहरे ti, सुनील नाटा ti, आदित्य सेन ti, सरकारी गवाह 2 एवं अन्य टीम सदस्य महिला बाल विकास के बाबू उमर खान ग्रेट 3 को 25000 रु की रिश्वत  लेते पकड़ा।                              फरियादी (जिससे पैसे मांगे) सावित्री बाई पति गिरधारी लाल 54 वर्ष निवासी नयाखेड़ा पथरोटा कीर्ति स्वसहायता समूह की अध्यक्ष है जो 28 केन्द्रो में खाना बनाकर देतीं है। समूह में 10 बाई और 6 लड़के काम करते हैं। सावित्री ने 3 माह से बाबू को पैसे नही दिए थे, एक महीने में डेढ़ लाख रु समूह को मिलते हैं जिस पर बाबू एक लाख पर 27% बिल पास करने का लेता था।  फरियादिया को 3 माह का भुगतान देना था जिस पर से शिकायत हुई।

पुण्य स्मरण - मायाराम सुरजन

पुण्य स्मरण - मायाराम सुरजन
Toc news @ Vinay G David
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पिपरिया के समीप खापरखेड़ा गाँव मे जन्मे और अपनी प्रारम्भिक पढ़ाई -लिखाई पिपरिया मे करने वाले मध्यप्रदेश - छत्तीसगढ़ के मूर्धन्य पत्रकार - साहित्यकार -चिंतक श्री मायाराम सुरजन की आज पुण्यतिथि है l दैनिक देशबंधु पत्र समूह के संस्थापक एवं संपादक श्री सुरजन को अपनी जन्म भूमि और परिजनो से गहरा लगाव था l 29 मार्च 1923 को खापरखेड़ा (पिपरिया ) ग्राम में जन्मे श्री सुरजन ने 31 दिसंबर 1994 को भोपाल मे अंतिम सांस ली l मायाराम सुरजन का जीवन दुर्धर्षपूर्ण, हमेशा चुनौतियों से जूझने में बीता। लेकिन उन्होंने कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और अपने इन्हीं मूल्यों को पोषित करने की दृढ़ता के कारण बड़ी कीमतें चुकाईं। कई बार उन्हें आर्थिक तंगी और भावनात्मक स्तर पर भी गहरी चिंता का सामना भी करना पड़ा था, लेकिन इन सबके बावजूद अपने व्यक्तिगत अहसासों को उन्होंने कभी अपनी सृजनात्मक प्रतिबद्धता पर हावी होने नहीं दिया। वे ऐसे व्यक्ति के रूप में जिए, जिनमें किसी से दुश्मनी, कड़वाहट, या बदला लेने की भावना नहीं थी। पत्रकारिता जगत के मध्यप्रदेश राज्य के मार्गदर्शक के रूप में ख्यात श्री मायाराम सुरजन सही मायनों में स्वप्नदृष्टा और कर्मनिष्ठ तथा अपने बलबूते सिद्ध एक आदर्श पुरुष थे। वे बहुपठित और जनप्रिय राजनैतिक टिप्पणीकार थे और अनेक कृतियों के लेखक भी। इन्ही जीवन घाटियो मे ,मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश के ,अंतरंग ,सबको सन्मति दे भगवान ,धूप छांव के दिन आपकी प्रमुख प्रकाशित किताबे है l मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन ,प्रगतिशील लेखक संघ सहित अनेकों संगठनो से आपका सक्रिय जुड़ाव जीवन पर्यंत बना रहा l बाबूजी श्री मायारामजी सुरजन की स्मृति को शत शत नमन l

शिवराज के सचिन तो छोड़ो... पीए ने भी दिखाया कमाल लूटा लाखों का माल?

अवधेश पुरोहित @ present by:  Toc News

भोपाल । मध्यप्रदेश में भय, भूख और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने का वायदा कर सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान जिस तरह से सत्ताधीशों से लेकर आम छोटे अधिकारी तक जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है, उसका जीता-जागता उदारहण है परिवहन विभाग का आरक्षक जो करोड़पति निकला, वैसे तो शिवराज के  शासनकाल के दस वर्षों के दौरान जहां भी जांच एजेंसियों ने छापे की कार्यवाही की वह करोड़पति ही निकला लेकिन हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को सचिन तेंदुलकर के नाम से नवाजा गया था। यूं तो उन्होंने नगरीय निकाय से लेकर स्वास्थ्य विभाग में चौके-छक्के उड़ाने में अपना रिकार्ड बनाया है हाल ही में जो मामला प्रकाश में आया तो उसमें अब डॉ. नरोत्तम मिश्रा के निजी सचिव पाण्डे ने जो आदिवासी इलाकों में नर्सिंग कॉलेज की अनुमति देने में भी भ्रष्टाचार के चौके-छक्के लगाने में मंत्री से अपने आपको पीछे नहीं छोड़ा, स्थिति यह है कि प्रदेश में नर्सिंग कॉलेज खोलने के लिए राज्य सरकार द्वारा दी गई अनुमति संदेह के घेरे में आ गई। बताया जाता है कि भारतीय नर्सिंग काउंसलिंग की नई गाइड लाइन के अनुसार सामान्य जिलों में नये नर्सिंग महाविद्यालय वह ही संस्थाएं खोल पाएंगी जिनके पास स्वयं का ११० बिस्तरों वाला अस्पताल होगा, यह बंधनकारी नियम आदिवासी जिलों में लागू नहीं होगा, आदिवासी जिलों में संस्थाओं को वहां के जिला अस्पतालों के टेक्निकल ट्रेनिंग के लिये संबद्धता लेनी होगी और दूसरे मापदण्ड जैसे २३ हजार वर्गफिट का न्यूनतम भवन दो एमएससी व्याख्याता यदि कोई एमएससी और गायनो दोनों हो ही हो तो दो एमएससी व्यख्याता कम्प्यूटर लैब जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध हों तो राज्य सरकार अनापत्ति प्रमाण पत्र नर्सिंग महाविद्यालय खोलने के लिये जारी कर सकती है। इस तरह की अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने की अंतिम तारीख १८ दिसम्बर २०१५ होने के कारण ऐसा कोहराम मचा कि निजी सचिव पाण्डे ने मंत्री को अंधेरे में रखते हुए सारा खेल खेल डाला और १५-२० नर्सिंग महाविद्यालय को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करवा दिये। सूत्रों के अनुसार जिस नर्सिंग महाविद्यालय को खोलने के लिए झाबुआ, रतलाम, मण्डला, खरगौन, धार, बड़वानी, छिंदवाड़ा, बैतूल जैसे जिलों में अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किये गये हैं वहां के कोई भी नर्सिंग महाविद्यालय भारतीय नर्सिंग परिषद के मापदण्डों को पूरा ही नहीं करते हैं सूत्रों के अनुसार प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आदिवासी इलाकों में जब तक कोई संस्था नर्सिंग कॉलेज खोलने के समस्त मापदण्ड पूरे नहीं करती उन्हें अनुमति देने के लिये तैयार न हीं थे, परन्तु उसी विभाग के सचिव कुमरे और स्वास्थ्य मंत्री के निजी सचिव पाण्डेय ने संाठगांठ करके १५-२० नर्सिंग कॉलेजों के लिये ऐसी संस्थाओं के लिये अनुमति दे दी जो मापदण्डों को पूरा ही नहीं करती हैं मजे की बात यह है कि इन सब अनुमतियों पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का अनुमोदन भी विधिवत लिया गया इसके बाद भी जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था कि मेरी सब पर नजर है दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करूंगा यदि गड़बड़ी हुई है तो दोषियों को नहीं छोड़ूंगा हालांकि मप्र सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान की जानकारी में जब इस तरह के भ्रष्टाचार और अनियमितता के मामले लाये जाते हैं तो वह अक्सर एक ही डायलाग बोलते हैं कि भ्रष्टाचारियों को बक्शा नहीं जाएगा, हालांकि अभी तक उन्होंने जिन-जिन मामलों पर बयान दिये आज तक उनपर कोई कार्यवाही नहीं हुई है और यह भ्रष्ट अधिकारी आज भी मलाईदार पदों पर विराजमान होकर धड़ल्ले से अपने कारनामों को अंजाम देने में लगे हुए हैं। मुख्यमंत्री के इस तरह के किसी को बक्शा नहीं जाने वाले बयान को लेकर लोग तरह-तरह के मायने लगाने में लगे हुए हैं तो उनकी पार्टी के कुछ नेता यह कहने से भी नहीं चूक रहे हैं कि जब भी मुख्यमंत्री इस तरह के बयान देते हैं तो समझ लो कि वह उस भ्रष्ट अधिकारी को क्लीनचिट देने का काम को अंजाम दे रहे हैं और उसका कुछ भी बिगडऩे वाला नहीं है ऐसे एक नहीं अनेकों मामले कार्यवाही के अभाव में दबे पड़े हैं और उनपर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है, शायद मुख्यमंत्री के अनुसरण करते हुए जिन स्वास्थ्य मंत्री ने पाण्डे के द्वारा नर्सिंग कॉलेजों खोलने के लिये अनुमति प्रमाण पत्र जारी करने के लिये धड़ल्ले से लाखों रुपये का कमाल दिखाया और उन्हीं सभी फाइलों पर स्वास्थ्य मंत्री का अनुमोदन लिया है, मजे की बात यह है कि अब उन्हीं सभी मामलों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री यह कहते नजर आ रहे हैं कि दोषियों को छोड़ूंगा नहीं, इस मामले में कितना दम है और इस पर क्या कार्यवाही होगी यह तो भविष्य बताएगा लेकिन आदिवासी इलाकों में नर्सिंग कॉलेज खोलने के लिये पाण्डे द्वारा दी गई अनुमतियों का क्या होता है.

Wednesday, December 30, 2015

पत्नियों की अदला-बदली गंदा खेल

आए दिन करते थे पत्नियों की अदला-बदली 
Toc News
कानपुर के चकेरी में बीते दिनों वाइफ स्वैपिंग यानी पत्नियों की अदला-बदली का मामला सामने आया। एक महिला ने अपने पति के खिलाफ वाइफ स्वैपिंग की शिकायत थी।  महिला ने पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि उसके पति दोस्त, रिश्तेदारों की पत्नी, गर्लफ्रेंड से आए दिन अदला-बदली (वाइफ स्वैपिंग) करते हैं।  उसने पत‌ि और उसके भाई के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए थे।   जांच के बाद आरोपों की पुष्टि भी हो गई है। पीड़िता के मेडिकल में रेप के साथ अप्राकृतिक यौन संबध बनाने की भी पुष्टि हुई है।   महिला की तहरीर पर पुलिस ने जाजमऊ निवासी सैडलरी के बड़े कारोबारी पति और फुफेरे देवर के खिलाफ दुष्कर्म और अप्राकृतिक यौन संबध बनाने की रिपोर्ट दर्ज की थी।   इधर, आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से सहमी महिला शुक्रवार को औरैय्या स्थित मायके चली गई। जाजमऊ निवासी सैडलरी कारोबारी हंजला की पत्नी ने चार दिन पूर्व चकेरी में पति सहित पांच लोगों के खिलाफ रेप और अप्राकृतिक यौन संबध बनाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।  पीड़िता के मेडिकल के बाद शुक्रवार को चकेरी इंस्पेक्टर ने बताया कि 1 जनवरी को पीड़िता के मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज किए जाएंगे। आरोपी पति और रिश्तेदार घर छोड़कर फरार हो गए हैं। गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। वहीं लव मैरिज के बाद इस तरह का दुराचार होने से पीड़िता को गहरा सदमा लगा है।

मुंबई बार के गुप्त दरवाजे से निकली कुल 24 लड़कियां पुलिस हिरासत में

मुंबई। लंबे वक्त तक बार बालाओं के बेरोजगार रहने के बाद जब सुप्रीम कोर्ट ने डांस बार संचालन को मंजूरी दी थी तब इसके लिए लाइसेंस देने के लिए कुछ नियमों का पालन किया जाना अनिवार्य किया था। इन नियमों में दो शर्तें यह भी थीं कि डांस बार में काम करने वाली लड़कियों की उम्र 18 साल से कम नही होनी चाहिए तथा एक बार में केवल 4 लड़कियाँ ही बतौर बारगर्ल काम कर सकेगी। लेकिन मुंबई के लोटस बार में इन शर्तों का धड़ल्ले से उल्लंघन किया जा रहा था। मुंबई में पुलिस ने छापेमारी कर एक बार से 24 लड़कियों को छुड़ाया है।
बता दें कि अंधेरी में लोटस बार है, यहां पर तय संख्या से ज्यादा लड़कियों के होने की जानकारी मिलने पर पुलिस ने छापेमारी की थी। पुलिस ने जब यहां पर छापेमारी की तो पुलिसवालों के होश उड़ गए। पुलिस ने फ्लोर से 12 लडकियों को हिरासत में लिया। पुलिस ने एक एक कर जब बार के चप्पे-चप्पे की तलाशी लेनी शुरू की तो पुलिस को बार के किचन में एक इलेक्ट्रिक बटन मिला जिसे दबाते ही बार के तहखाने का तहखाना खुल जाता था। इस स्विच को ऑन करने पर दो तहखाने बारी बारी से खुले। इन तहखानों से पुलिस ने 12 लड़कियों को निकाला। पुलिस ने बार को फिलहाल सील कर दिया है। बार मालिक और मैनेजर फिलहाल फरार हैं।
सुप्रीम कोर्ट के नए नियमों के मुताबिक डांस बार में डांस बार में लड़कियों और ग्राहक के बीच कम से कम 2 मीटर की दूरी होनी चाहिए। इस नए ड्राफ्ट में ग्राहकों को लड़कियों पर नोट उड़ाने की भी मनाही है। लड़कियों के साथ ग्राहक ठुमके भी नही लगाएँगे।

'मेरे घर रात को आओ, तुम्हारे बेटे का सेलेक्शन हो जाएगा'

Represent by - Toc news
नई दिल्ली: दिल्ली में क्रिकेट को चलाने वाली संस्था डीडीसीए में भ्रष्टाचार को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली पर हमला बोलने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अब डीडीसीए को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जिस पर बड़ा विवाद हो सकता है.
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एनडीटीवी से बातचीत में केजरीवाल ने कहा है कि एक महीने पहले टीम में बेटे के सेलेक्शन के लिए डीडीसीए के अधिकारी ने एक वरिष्ठ पत्रकार की पत्नी को रात में घर पर बुलाया था. केजरीवाल का दावा है कि सुबह में उस पत्रकार को ये जानकारी दी गई कि उनके बेटे का सेलेक्शन हो गया है लेकिन शाम में जब लिस्ट आई तो उनके बेटे का नाम लिस्ट में नहीं था.

उसके बाद अगले दिन डीडीसीए के अधिकारी ने उस पत्रकार की पत्नी को SMS भेजकर कहा कि अगर वो रात में उसके घर आ जाती हैं तो उनके बेटे का सेलेक्शन हो जाएगा.

केजरीवाल ने अपने बयान में कहा, “उनका(एक वरिष्ठ पत्रकार) बेटा क्रिकेट खेलता है. उन्होंने मुझे बताया कि उनके बेटे के चयन का कॉल आया था. पर शाम को बेटे का नाम लिस्ट में नहीं था. अगले दिन पता है क्या हुआ, पत्रकार की पत्नी को एसएमएस आया कि मेरे(अधिकारी के) घर रात को आओ, आपके बेटे का सेलेक्शन हो जाएगा.“

भोपाल को नए साल का तोहफा, 1 जनवरी से मिलेगी फ्री वाईफाई सुविधा

INS NEWS @ Bhopal
भोपाल।एक जनवरी से भोपाल के कुछ क्षेत्रों में फ्री वाई-फाई मिलेगा। बुधवार को नगर निगम कमिश्नर तेजस्वी नायक ने इसकी घोषणा की है। निगम ने फिलहाल फ्री वाईफाई जोन में एमपी नगर जोन-1, जोन-2, न्यू- मार्केट, 10 नंबर मार्केट, बिट्टन मार्केट आदि को शामिल किया है।
इस बारे में निगम कमिश्नर तेजस्वी नायक ने बताया कि एक जनवरी से शहर के लोग वाई-फाई के जरिए फ्री में इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए समय सीमा तय की गई है। एमपी नगर में जल्द ही वाईफाई की सुविधा शुरू की जा रही है। जानकारी के अनुसार पूरे भोपाल को वाईफाई करने की कवायद की जा रही है।
ऐसे इस्तेमाल कर सकते हैं वाईफाई :
- नगर निगम की योजना है कि करीब 15 से 20 एमबीपीएस की स्पीड मुहैया कराई जाए।
- ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों को एमपी नगर में प्रीपेड मुहैया कराया जाएगा।
- प्रीपेड की कीमत 20 रुपए प्रति घंटा होने की उम्मीद है।
- एमपी नगर क्षेत्र में पहुंचते ही आपकी डिवाइस पर वाइफाई सिग्नल का मैसेज आएगा।
- सिग्नल कनेक्ट होने के बाद इसका उपयोग तभी हो सकेगा, जब नगर निगम भोपाल की साइट पर अपना ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर रजिस्टर करेंगे।
- वाईफाई से कनेक्ट होने के बाद डिवाइस पर ही नगर निगम भोपाल की वेबसाइट पर साइन इन करने का मैसेज आएगा।
- मैसेज आने के बाद अपनी मेल आईडी, पासवर्ड और मोबाइल नंबर डालते ही वाई-फाई कनेक्ट हो जाएगा।

7 हजार की रिश्वत लेते पकड़ाया लाइनमेन

Toc News @ Bhopal 
भोपाल !   लोकायुक्त पुलिस ने मप्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के लाइनमेन को सात हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। लोकायुक्त पुलिस ने बताया कि नरेला शंकरी निवासी थान सिंह ओरी गांव में खेती करते हैं। लाइनमेन रामसमुज यादव ने कुछ दिन पहले थान सिंह को खेत में चोरी की बिजली से खेत में पानी देते पकड़ा था। रामसमुज ने थान सिंह से मामला नहीं बनाने के एवज में चालीस हजार रुपए ले लिए थे। इसके बाद रामसमुज सात हजार रुपए और मांग रहा था। इसकी शिकायत थान सिंह ने लोकायुक्त में कर दी। लोकायुक्त ने योजनाबद्ध तरीके से रामसमुज को अयोध्या नगर बुलाकर रंगे हाथ रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया।

IFWJ के अध्यक्ष पद से हटाए गए के. विक्रम राव

Present by - Toc News ( Vinay G. David ) 
K. Vikram rao
भोपाल: इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय सचिव (उत्तर) हेमन्त तिवारी ने के. विक्रम राव को पत्र लिखकर सूचित किया है कि राष्ट्रीय महासचिव परमानंद पाण्डे ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सत्य पारिक, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मल्लिकर्जुनिअह, राष्ट्रीय सचिव (सैंट्रल) कृष्णमोहन झा, राष्ट्रीय सचिव (दक्षिण) के. असदुल्ला से चर्चा कर आई.एफ.डब्ल्यू.जे. के अध्यक्ष पर लगे गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के साथ ही संघ विरोधी गतिविधियों एवं आपराधिक कृत्य की वजह से के. विक्रम राव को अध्यक्ष पद से हटाने का निर्णय लिया गया है।
वर्किंग कमेटी के समस्त सदस्यों ने राष्ट्रीय महासचिव परमानंद पाण्डे के निर्णय पर अपनी सहमति जताई है साथ ही उस निर्णय का स्वागत भी किया है। इंडिया वन समाचार को मिली जानकारी के अनुसार तिवारी ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि आगामी माह में राष्ट्रीय महासचिव परमानंद पाण्डेय की अनुमति से नेशनल काउंसिल की बैठक आगरा या वाराणसी में आयोजित कर नए अध्यक्ष का चयन किया जाएगा। आई.एफ.डब्ल्यू.जे. के संविधान की धारा 63 के तहत किसी भी व्यक्ति के विरूद्ध आर्थिक आपराधिक एवं संघ विरोधी कृत्य किए जाने पर कार्यवाही का अधिकार वर्किंग कमेटी को है। तिवारी ने यह भी कहा है कि विक्रम राव द्वारा यदि अध्यक्ष के रूप में कोई पत्र व्यवहार किया जाता है तो यह अमान्य माना जाएगा और संगठन उन पर वैधानिक कार्यवाही करेगा।

केजरीवाल का नया आरोप, 'डीडीसीए में चल रहा है सेक्स रैकेट'

Wed, 30 Dec 2015 present by Toc  News

नई दिल्ली। दिल्ली क्रिकेट बोर्ड यानी डीडीसीए के मुद्दे पर केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली को घेरने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नया आरोप लगाया है।
केजरीवाल ने आज एक समाचार चैनेल में दिए अपने साक्षात्कार में कहा कि, डीडीसीए में सेक्स रैकेट चल रहा है। खिलाड़ियों के चयन के बदले यौनशोषण किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया।
एक टीवी चैनल से चर्चा में आम आदमी पार्टी के कर्ताधर्ता केजरीवाल ने कहा, एक वरिष्ठ पत्रकार ने मुझे बताया, उनके बेटे के क्रिकेट टीम में चयन के बदले एक रात के लिए पत्नी को भेजने की मांग कही गई थी।
पीएम को कायर, मनोरोगी कहने का कोई मलाल नहीं
दिल्ली सचिवालय पर सीबीआई छापे से नाराज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीएम को कायर और मनोरोगी कहा था। इसके बाद उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था लेकिन उनका कहना है कि मुझे पीएम को कायर और मनोरोगी कहने का मलाल नहीं है। उन्होंने कहा, मैं मानता हूं मैंने गलत भाषा का उपयोग किया लेकिन मुझे इसका मलाल नहीं है। जो बोला दिल से बोला, पीएम लच्छेदार भाषा बोलते हैं लेकिन उनके कृत्य अच्छे नहीं है।
एक न्यूज चैनल को दिए साक्षात्कार में अरविंद केजरीवाल ने फिर पीएम मोदी पर निशाना साधा और कहा कि वो हमें काम करने दें। पीएम ने मेरे दफ्तर पर सीबीआई की रेड करवाई। उन्हें घोटालेबाज नजर नहीं आते, उन्हें सिर्फ केजरीवाल ही भ्रष्टाचारी नजर आता है।
उन्होंने आगे कहा, हमने पीएम मोदी से मिलकर भी निवेदन किया है कि हम लड़ाई नहीं चाहते। हम सिर्फ काम करना चाहते हैं। आप स्वच्छ भारत अभियान की बात करते हैं तो मैं दिल्ली को चमकाऊंगा और सारा क्रेडिट आपको दूंगा। आप स्किल इंडिया की बात करते हैं तो मैं दिल्ली वालों को रोजगार दूंगा और सारा क्रेडिट आपको दूंगा। मैं सिर्फ काम करना चाहता हूं।
केजरीवाल ने पीएम से कहा, रोज-रोज की किचकिच बंद करवाएं। कभी एलजी तो कभी एसीबी को पीछे लगवा देते हैं हम झगड़ा नहीं, बल्कि दिल्ली का विकास चाहते हैं। हम पीएम से मिले और बोले कि हम आपके बच्चे जैसे हैं, हमें गाइड कीजिए राजेंद्र कुमार पर दबाव डाला जा रहा है।

जिस कोर्ट में चाय बेचता था पिता, उसी में जज बनी बेटी

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पंजाब। जालंधर के जिन सुरिंदर कुमार ने नाकोदर कोर्ट के बाहर चाय बेचकर जीवन यापन किया, अपने परिवार का भरण पोषण किया। जिस अदालत के बाहर चाय बेचकर अपनी बेटी को पढ़ाया, आज उसी बेटी ने उनका नाम गर्व से उंचा कर दिया है। जी हां, वो बेटी अब उसी अदालत में जज बन गई है।

23 साल की श्रूति ने पहले प्रयास में ही जज की परीक्षा पास कर ली है। यही नहीं श्रुति एससी कैटोगरी में फर्स्ट आईं हैं। हाल ही में राज्यसभा सांसद अविनाश राय ने श्रुति की तारीफ करते हुए कहा था कि वो पंजाब की गौरव हैं।

व्यापमं के बाद एसटीएफ ने कसा चिटफंड कंपनियों पर शिकंजा

Toc News @ Bhopal
एमपी के बहुचर्चित व्यापमं महाघोटाले की जांच करने के बाद अब एसटीएफ की रडार पर प्रदेश की चिटफंड कंपनियां आ गई हैं. चिटफंड कंपनियों के खिलाफ मिल रही शिकायतों और उनका निपटारा न होता देख इन मामलों को एसटीएफ को सौंपा गया है.
जानकारी के मुताबिक, एसटीएफ के जांच के दायरे में प्रदेश की आधा दर्जन से ज्यादा चिटफंड कंपनियां हैं. इनके खिलाफ मिली शिकायतों को आधार बनाते हुए एसटीएफ ने जांच शुरू कर दी है.
एसटीएफ की चिटफंड एंड कोऑपरेटिव फ्रॉड विंग अभी चार कंपनियों की जांच कर रही है. जिनमें फ्यूचर गोल्ड इंफ्राबिल्ट लिमिटेड, बीएनपी इंडिया लिमिटेड, साईं प्रकाश ऑर्गेनिक फूड्स लिमिटेड और साईं प्रकाश प्रॉपर्टी डेवलपमेंट लिमिटेड शामिल है.
इन चिटफंड कंपनियों का जाल प्रदेशभर में फैला हुआ है. आरोप है कि इन कंपनियों ने निवेश के नाम पर जनता से करोड़ों की धोखाधड़ी की है. पीड़ितों ने इस मामले में कई बार पुलिस में शिकायत की लेकिन वहां से किसी भी कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई.
जिसके बाद अब मामले की जांच एसटीएफ को सौंप दी गई है. एसटीएफ के पास अभी करीब एक दर्जन से ज्यादा शिकायतें पेंडिंग हैं. बताया जा रहा है कि एसटीएफ दोषी कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई करेगी. जांच पूरी करने और सबूत जुटाने के बाद दोषी कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी.

पुलिस इंस्पेक्टर 3 लाख रुपये घूस लेते गिरफ्तार

मुंबई के उपनगरीय बोरीवली में एक पुलिस इंस्पेक्टर को 3 लाख रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया गया। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने एक रिलीज में बताया है कि एमएचबी थाना के वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर सुभाष चव्हाण ने एक स्टूडियो चलाने वाले शिकायतकर्ता से उसकी एक अवैध जमीन के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के एवज में 4 लाख रुपये की मांग की।

इसमें बताया गया है कि शिकायत पर कार्रवाई करते हुये एक जाल बिछाया गया और चव्हाण को उस समय गिरफ्तार कर लिया गया जब वह घूस ले रहा था। इसमें बताया गया है कि इंस्पेक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।

उज्जैन के कलाकारों से कार्य करवाया और भुगतान निकाला धार की फर्म के नाम पर

नगरपालिका का कारनामा......
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धार। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नगर पालिका ने उज्जैन के कलाकारों से दीवारों पर चित्र मांडने के लिए उज्जैन के कलाकारों को बुलाया गया था और इन कलाकारों ने प्रति चिञ मांडने के लिए 100 भुगतान किया गया है। और इन कलाकारों को उज्जैन से लाने व ले जाने की व्यवस्था भी जिला प्रशासन ने करवाई थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नगर पालिका परिषद धार ने इन कलाकारों के द्वारा मांडे गये प्रति चिञ का भुगतान 400 रूपये प्रति चिञ के मान से भुगतान लगभग 40000 रूपये का किसी धार की फर्म के नाम पर किया गया है। और जिस फर्म के नाम पर भुगतान किया गया है उसमें भी जमकर कमीशनबाजी हुई है।
जब इस संबंध में नगर पालिका के प्रभारी सीएमओ को फोन लगाया गया तो उन्होंने रिसीव नहीं किया।
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Tuesday, December 29, 2015

भावसे अधिकारी स्थानांतरित

Toc news @ Bhopal 
राज्य शासन ने भारतीय वन सेवा के 18 अधिकारियों का तबादला करते हुए नवीन पदस्थापना आदेश जारी किए हैं। श्री वाय सत्यम अब अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) भोपाल, डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) भोपाल और सी.एच. मुरलीकृष्णन अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कार्य आयोजना आंचलिक) जबलपुर होंगे।
श्री अतुल कुमार जैन अब मुख्य वन संरक्षक भोपाल वृत्त होंगे। श्री आर.डी. महला मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान एवं विस्तार खण्डवा, श्री पदम सिंह मुख्य वन संरक्षक मनरेगा एवं आजीविका कार्यालय भोपाल, श्री विवेक जैन क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व, श्री एस.एस. रावत वन संरक्षक कार्य आयोजना खंडवा, श्री तरूण शेखर चतुर्वेदी वन संरक्षक कार्य आयोजना शहडोल होंगे। इसी तरह श्री डी.के. अग्रवाल वन संरक्षक कार्य आयोजना शिवपुरी, श्री ए.एस. तिवारी वन मंडलाधिकारी बड़वाह, श्री संजय श्रीवास्तव वन मंडलाधिकारी दमोह, श्री रमेश कुमार विश्वकर्मा, वनमंडलाधिकारी कूनो अभयारण्य, श्री जे.आर. वास्कले, वन मंडलाधिकारी दतिया, श्री अनुपम सहाय दक्षिण पन्ना वन मंडल, श्री अजय कुमार पांडे वन मंडलाधिकारी सिंगरोली और श्री अतुल खेड़ा को वनसंरक्षक कार्य आयोजना बालाघाट के पद पर स्थानांतरित किया गया है।
राज्य वन सेवा के 5 अधिकारी स्थानान्तरित
राज्य वन सेवा के स्थानांतरित होने वाले अधिकारियों में श्री संजीव झा अब प्रभारी वन मंडलाधिकारी बैतूल, श्री राजेश कुमार खरे प्रभारी वन मंडलाधिकारी झाबुआ, श्री तोमर सिंह सूलिया प्रभारी वन मंडलाधिकारी दक्षिण सिवनी, श्री गोपाल कछावा प्रभारी वन मंडलाधिकारी सेंधवा और श्री एम.आर. बघेल प्रभारी वन मंडलाधिकारी खरगोन वन मंडलाधिकारी होंगे।

भारतीय वन सेवा के 15 अधिकारी पदोन्नत

Toc news @ Bhopal
भोपाल : मंगलवार,
दिसम्बर 29, 2015
राज्य शासन ने भारतीय वन सेवा के 4 मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारियों को अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, 6 वन संरक्षक को मुख्य वन संरक्षक और 5 वन मंडलाधिकारी को वन संरक्षक के पद पर पदोन्नत करते हुए नवीन पद-स्थापना आदेश जारी किए हैं।

अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक

पदोन्नति के बाद डॉ.पी.सी. दुबे को उज्जैन से इंदौर पदस्थ किया गया है। श्री दुबे सिंहस्थ-2016 की समाप्ति तक उज्जैन के प्रभार में रहेंगे। श्री आलोक कुमार को पन्ना राष्ट्रीय उद्यान से प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय भोपाल, श्री बी.बी. सिंह को मुख्य कार्यपालन अधिकारी राज्य बाँस मिशन भोपाल और महेन्द्र यादुवेन्दु को भोपाल वृत्त से प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय भोपाल पदस्थ किया गया है।

मुख्य वन संरक्षक

पदोन्नति के बाद श्री अनिल कुमार खरे को मुख्य वन संरक्षक एवं प्राचार्य वन क्षेत्रपाल महाविद्यालय बालाघाट, श्रीमती ‍िबन्दु शर्मा को प्रोफार्मा पदोन्नति, श्री अनूप सिंह राजपूत को वन विकास निगम, श्री बी.एस. अन्निगिरी को उज्जैन वृत्त (सिंहस्थ-2016 की समाप्ति पर उज्जैन वृत्त का प्रभार लेंगे) श्री ए.के. भूगाँवकर को सागर वृत्त और श्री व्ही.के. नीमा को भोपाल पदस्थ किया गया है।

वन संरक्षक

पदोन्नति के बाद श्री एस.के. दुबे को प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय भोपाल, श्री संजय मोहर्रिर, अपर सचिव वन विभाग, श्री रेवाशंकर कोरी शिवपुरी, श्री के.पी. बांगर संयुक्त संचालक बाँधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान उमरिया और श्री ओ.पी. उचाड़िया को छतरपुर पदस्थ किया गया है।

पंधाना विधायक पति ने पत्रकार को फिर धमकी दी

Toc News
खंडवा. ख़बर प्रकाशन को लेकर पंधाना विधायक पति नवलसिंह बोरकर ने दैनिक भास्कर रिपोर्टर प्रशांत शर्मा के साथ गाली-गलौज, उठाकर पटकने व झूमाझटकी कर जान से मारने की धमकी दी। नवल ने कहा ये यूपी-बिहार नहीं खंडवा है। तुझे उठवा लुंगा। नवल ने 10 अक्टूबर 2014 को भी प्रशांत को फोन पर धमकी दी थी। मामले में मोघट पुलिस ने नवल के विरुद्ध अपराध क्रमांक 601/14 में धारा 506, 507 के तहत प्रकरण दर्ज किया था।

कांग्रेस के मुखपत्र में सरदार पटेल 'हीरो' और पंडित नेहरू 'विलेन'

Represent by - Toc News 
कांग्रेस के मुखपत्र 'कांग्रेस दर्शन' में छपे ताजा लेख ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. इसके मुताबिक, यदि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कश्‍मीर, चीन और तिब्‍बत पर सरदार वल्‍लभ भाई पटेल की सलाह मानी होती तो मौजूदा हालात कुछ और ही होते.
दिलचस्‍प बात यह है कि इस मुखपत्र के संपादक महाराष्‍ट्र कांग्रेस के दिग्‍गज नेता संजय निरूपम हैं. यह लेख 15 दिसंबर को सरदार वल्‍लभ भाई पटेल की पुण्‍यतिथि पर लिखा गया था.
'इस्‍तीफे देने की आ गई थी नौबत'
मिड डे में छपी खबर के मुताबिक, इसमें लिखा गया है, 'अंतरराष्‍ट्रीय मसलों पर नेहरू को पटेल की सलाह लेनी चाहिए थी. उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री होने के बाद भी पटेल के प्रधानमंत्री नेहरू के साथ तनावपूर्ण संबंध थे. एक वक्‍त तो ऐसा भी आया कि दोनों नेता अपने पद से इस्‍तीफा भी देना चाहते थे.'
मुखपत्र में लिखा है, 'सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुननिर्माण का संकल्‍प लिया, जो पंडित नेहरू के तीव्र विरोध के पश्‍चात भी बना. जहां तक कश्‍मीर रियासत का प्रश्‍न है इसे पंडित नेहरू ने स्‍वयं अपने अधिकार में लिया हुआ था. परंतु यह सत्‍य है कि सरदार पटेल कश्‍मीर में जनमत संग्रह तथा कश्‍मीर मुद्दे को संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ में ले जाने पर बेहद क्षुब्‍ध थे.'
(Photo Credit: Mid day)
चीन के प्रति सचेत किया था पटेल ने
मुखपत्र के मुताबिक, 'यद्यपि विदेश विभाग पंडित नेहरू का कार्यक्षेत्र था, परंतु कई बार उपप्रधानमंत्री होने के नाते कैबिनेट की विदेश विभाग समिति में पटेल का जाना होता था. उनकी दूरदर्शिता का लाभ यदि उस समय लिया जाता तो अनेक वर्तमान समस्‍याओं का जन्‍म न होता. 1950 में पंडित नेहरू को लिखे एक पत्र ने चीन तथा उसकी तिब्‍बत के प्रति नीति से सावधान किया था और चीन का रवैया कपटपूर्ण था. अपने पत्र में पटेल ने चीन को अपना दुश्‍मन उसके व्‍यवहार को अभद्रतापूर्ण और चीन के पत्रों की भाषा को किसी दोस्‍त की नहीं, भावी शत्रु की  भाषा कहा था.'
तो पहले मिल जाती गोवा को आजादी साल 1950 में लिखे पटेल के पत्र से भी नेहरू सहमत नहीं थे. 1950 में ही गोवा की स्‍वतंत्रता के संबंध में चली दो घंटे की बैबिनेट बैठक में लंबी वार्ता सुनने के बाद सरदार पटेल ने केवल इतना कहा, क्‍या हम गोवा जाएंगे. केवल दो घंटे की बात है. नेहरू इससे बड़े नाराज हुए थे. यदि पटेल की बात मानी गई होती तो 1961 तक गोवा की स्‍वतंत्रता की प्रतीक्षा न करनी पड़ती.
'मैं अपनी गलती स्‍वीकार करता हूं' मुखपत्र में छपे लेख को लेकर जब संजय निरूपम से सवाल किया गया तो शुरुआत में उन्‍होंने तो पूरे मामले से पल्‍ला झाड़ लिया. हालांकि, बाद में उन्‍होंने कहा, 'मैं अपनी गलती स्‍वीकार करता हूं. मैं नाममात्र का संपादक हूं. कांग्रेस दर्शन में गलती से लेख छप गया है. इस मामले में संपादकीय मंडल पर कार्रवाई की जाएगी.'

प्राइवेट फर्म में नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए खुशखबरी

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केंद्र सरकार प्राइवेट फर्म में काम करने वाली महिलाओं की मैटरनिटी लीव 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करना चाहती है.

महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने सोमवार को कहा कि श्रम मंत्रालय महिलाओं की मैटरनिटी लीव बढ़ाकर साढ़े छह महीने करने के लिए तैयार हो गई है. उन्होंने कहा कि हमने श्रम मंत्रालय को लिखा था कि मैटरनीटी लीव को बढ़ाया जाए क्योंकि बच्चों को मां का दूध छह महीने तक पिलाना अनिवार्य है.

श्रम मंत्रालय इसे लागू करने के लिए मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961 में बदलाव कर सकती है. इस एक्ट में फिलहाल महिला कर्मचारियों को 12 सप्ताह की ही लीव दी जाती है, जिसमें उन्हें पूरी सैलरी अपने कंपनी से मिलती है. इस एक्ट में संशोधन किया जा सकता है.

आपको बता दें कि सरकारी नौकरियों में भारत में महिलाओं को छह महीने की मैटरनि‍टी लीव सेंट्रल सीविल सर्विस 1972 के रूल्स के मुताबिक दी जाती है.

सिंहस्थ-2016 के लिए इंदौर में बनेंगें 3 अस्थायी बस स्टेंड, टोल नाकों पर 2 माह के लिये यातायात टैक्स फ्री

इंदौर-उज्जैन मार्ग पर टोल नाकों पर 2 माह के लिये यातायात टैक्स फ्री रहेगा
Toc News
उज्जैन-उज्जैन में वर्ष 2016 में होने वाले सिंहस्थ के लिए इंदौर में 3 अस्थाई बस स्टेंड बनाये जायेंगे। इन बस स्टेंड पर पेयजल, शौचालय और
श्रद्धालुओं को सुविधाजनक ढंग से रुकने की व्यवस्था रहेगी। पुलिस प्रशासन सभी अस्थाई बस और टेक्सी स्टेंडों पर पुलिस चौकी स्थापित करेगा।

सिंहस्थ के दौरान प्रतिदिन 5 से 10 लाख श्रद्धालु इंदौर होकर उज्जैन पहुँचेंगे इसको देखते हुए इंदौर में कई विकास के कार्य करवाये जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग द्वारा सिंहस्थ को देखते हुए 47 पुल-पुलिया का कार्य पूरा करा लिया गया है। इंदौर संभाग में 31 पुल-पुलिया का कार्य प्रगति पर है और
29 पुल का कार्य प्रस्तावित है।

इंदौर जिले की नगर परिषद् महू द्वारा सामुदायिक भवन और यात्री गृह की मरम्मत का कार्य तेजी से किया जा रहा है। सांवेर में रैन बसेरे का निर्माण
और बस स्टेंड के उन्नयन का कार्य तेजी से किया जा रहा है। यह सभी कार्य फरवरी 2016 तक पूरे कर लिये जायेंगे। सुपर कॉरिडोर पर रेलवे ओव्हर ब्रिज का कार्य 90 प्रतिशत से अधिक पूरा कर लिया गया है।

इंदौर जिले में मुख्य मार्ग पर आने वाले ग्रामों में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्याऊ बनवाई जा रही है,इंदौर-उज्जैन मार्ग पर टोल नाकों पर 2 माह के लिये यातायात टैक्स फ्री रहेगा। उज्जैन मार्ग में अतिक्रमण को विशेष मुहिम चलाकर हटाने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए जो कार्य करवाये जा रहे है उनकी पिछले दिनों कलेक्टर श्री पी.नरहरि ने संबंधित विभागों की बैठक में समीक्षा की।

आशिक ने महबूबा को मार डाला

Toc News 
मेरठ में एक आशिक ने अपनी ही महबूबा का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। दोनों के बीच पिछले 9 साल से आशिक-और माशूक का रिश्ता था। वारदात मेरेठ कके मेडिकल थाना क्षेत्र में जागृति विहार के सेक्टर 8 में हुई। सोमवार की रात करीब साढ़े दस बजे प्रेमी ने प्रेमिका को उसी के घर की तीसरी मंजिल पर ले जाकर गला घोंटकर मार। वारदात के बाद प्रेमी ने अपने दोस्त को फोन करके हत्या की सूचना दी। प्रेमी और उसके परिजन फरार हो गए। लिया जिले के मूल निवासी सीताराम तिवारी मेरठ में सिक्योरिटी गार्ड हैं। वह पिछले दस साल से परिवार सहित जागृति विहार सेक्टर आठ में रहते हैं।  उनकी पुत्री संगीता (35वर्ष) का इसी गली के गौरव से करीब 9 साल से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। गौरव मेडिकल कॉलेज के समीप हीरो होंडा शोरूम में नौकरी करता है। परिजनों को प्रेम-प्रसंग का पता चला तो पांच साल पहले उन्होंने गांव ले जाकर संगीता  की शादी कर दी। करीब चार महीने पहले सीताराम सेक्टर 8 स्थित मकान नंबर 502 में सोनू के मकान में आकर किराए पर रहने लगे। इसी के पीछे गौरव के दोस्त राजकुमार का भी मकान है। राजकुमार के मकान की छत के सहारे गौरव व संगीता का मिलना-जुलना जारी रहा।  सोमवार रात साढ़े दस बजे गौरव ने संगीता को उसी के घर की तीसरी मंजिल पर बुलाया। यहां उसने गला घोंटकर संगीता की हत्या कर दी।  हत्या के बाद गौरव ने राजकुमार को फोन करके हत्या करने की सूचना दी।

सीएम हेल्पलाइन में कोई भी प्रकरण लेवल 4 पर नहीं जाये

December 28, 2015

झाबुआ। सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करे कि सीएम हेल्पलाइन में कोई भी प्रकरण लेवल -4 पर नहीं जाना चाहिए। सीएम हेल्पलाइन की साइट पर प्रतिदिन लाॅगिन कर देखे जैसे ही प्रकरण आये उसका लेवल वन पर ही निराकरण करे। उक्त निर्देश समयावधि पत्रों की समीक्षा बैठक में कलेक्टर डाॅ. अरूणा गुप्ता ने दिये। बैठक में सीईओ जिला पंचायत अनुराग चोधरी सहित जिला अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में विभागवार लंबित समयावधि पत्रों, जनसुनवाई जनशिकायत की समीक्षा की गई एवं आवश्यक निर्देश दिये गये।
समग्र पोर्टल पर डुलीकेशन करवाए
बैठक में जिला आपूर्ति अधिकारी को कलेक्टर डाॅ. अरूणा गुप्ता ने निर्देशित किया कि राशन की दुकान से राशन वितरण के लिए समग्र पोर्टल पर दर्ज परिवार की समग्र आईडी का डुप्लीकेशन हुआ है। इससे जिले में समग्र आई डी संख्या जिले की जनसंख्या से अधिक प्रदर्शित हो रही है। अपात्र परिवारो को हटाने के लिए डिडूप्लीकेशन करवाये पात्र परिवारों को ही राशन दिया जाये। डुप्लीकेशन का कार्य पंचायत स्तर से होना है। इसके लिए सभी ग्राम पंचायत सचिवों को निर्देश जारी कर 15 दिवस में कार्यवाही पूर्ण करवाये।
पेंशन का वितरण करवाये
ग्रामीण क्षेत्रों में चोपाल के दौरान यह बात ध्यान में आई है कि सामाजिक सुरक्षा वृद्धा अवस्था एवं अन्य पेंशन योजना की राशि के वितरण में परेशानी आ रही है। लोगो को छोटी छोटी राशि लेने के लिए परेशान होना पड़ता है। जनपद द्वारा हितग्राही के खाते में राशि डाल दी जाती है किन्तु कियोस्क सेन्टर से थम्बइम्प्रेशन नहीं आ पाने की वजह से हितग्राही को भुगतान नहीं किया जाता है। इस वजह से हितग्राही बैंक के चक्कर लगाकर परेशान होते है। इसके लिए एलडीएम यह सुनिश्चित करे कि कियोस्क सेन्टर के प्रतिनिधि का हर ग्राम पंचायत में उपस्थिति का दिन नियत कर पेंशनरों को गाॅव में ही पेंशन का भुगतान हो जाये।
टी.एल में अनुपस्थित अधिकारियों के एक दिन का वेतन कटेगा
कलेक्टर डाॅ. अरूणा गुप्ता ने 28 दिसम्बर की टी एल में बगैर अनुमति के अनुपस्थित अधिकारियों के एक दिन का वेतन काटने के निर्देश कोषालय अधिकारी को दिये। अगले सप्ताह जिन जिला अधिकारियों द्वारा आवंटित पंचायत में 40 शोचालय निर्माण का लक्ष्य पूरा नहीं किया जाएगा उनका दिसम्बर माह का वेतन रोकने के निर्देश भी कोषालय अधिकारी को दिये।

भारतीय जनता पार्टी के 43 जिला अध्यक्षों की घोषणा

Toc News @ Bhopal
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष व प्रदेश संगठन चुनाव अधिकारी श्री अजयप्रताप सिंह ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सहमति से 43 जिला अध्यक्षों की घोषणा कर दी है।

मुरैना श्री अनूप सिंह भदौरिया, भिण्ड श्री संजीव कांकर, दतिया श्री विक्रम बुन्देला, ग्वालियर नगर श्री देवेश शर्मा, श्योपुर श्री अशोक गर्ग, शिवपुरी श्री सुशील रघुवंशी, सागर श्री राजा दुबे, टीकमगढ़ श्री अभय प्रताप सिंह यादव, छतरपुर श्री पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह, दमोह श्री देवनारायण श्रीवास्तव, पन्ना श्री सदानंद गौतम, रीवा श्री विद्या प्रकाश श्रीवास्तव, सीधी श्री लालचन्द गुप्ता, सिंगरौली श्री कांतदेव सिंह, शहडोल श्री अनुपम अनुराग अवस्थी, उमरिया श्री मनीष सिंह,जबलपुर नगर श्री जी.एस. ठाकुर, जबलपुर ग्रामीण श्री शिव पटेल, डिंडोरी डॉ. सुनील जैन, मण्डला श्री रतन लोधी, बालाघाट श्री रमेश रंगलानी, सिवनी श्रीमति नीता पटैरिया, नरसिंहपुर श्री कैलाश सोनी, छिंदवाडा श्री नरेन्द्र राजू परमार, हरदा श्री अमरसिंह मीणा, बैतूल श्री जितेन्द्र कपूर, भोपाल ग्रामीण श्री गोपाल सिंह मीणा,रायसेन श्री धर्मेन्द्र चौहान, विदिशा श्री सूर्यप्रकाश मीणा,राजगढ़ श्री बद्रीलाल यादव, इंदौर नगर श्री कैलाश शर्मा,इंदौर ग्रामीण श्री अशोक सोमानी, खण्डवा श्री हरीश कोटवाले, बुरहानपुर श्री विजय गुप्ता, खरगौन श्री बाबूलाल महाजन, बडवानी श्री ओम खण्डेलवाल,अलीराजपुर श्री राकेश अग्रवाल, झाबुआ श्री दौलत भावसार, धार डॉ. रजा वरफा, उज्जैन नगर श्री इकबालसिंह गांधी, उज्जैन ग्रामीण श्री श्याम बंसल,आगर श्री दिलीप सकलेचा और देवास श्री गोपीकृष्ण व्यास को जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है।

Monday, December 28, 2015

फर्जी नकल के मामले में पटवारी सहित तीन पर एफ आई आर का आदेश

Toc news
*न्यायाधीश श्री सुनील दंडोतिया ने किया आदेश*
खजुराहो /-व्यवहार न्यायलय राजनगर में फर्जी नकल तैयार कर प्रस्तुत करने और अपने पक्ष में मामला डिक्री कराने के अपराध में न्यायाधीस श्री सुनील दंडोतिया ने हल्का पटवारी सहित तीन अन्य पर एफ आई आर का आदेश किया है।
एडवोकेट बीरेन्द्र तिवारी ने बताया कि आरोपी परमलाल पटेल ने ग्राम खेरी तहसील राजनगर की भूमि खसरा नं 1713 1889 1892 व 1945 कुल रकवा 13 एकड़ की सम्वत 2020 से 2024 की नलम में फर्जी तरीके से अपने पिता धनुआ तनय खिल्लू कुर्मी का नाम लेख कर व्यवहार न्यायलय से अपने पक्ष में डिक्री करा ली थी जिस पर परिवादी प्रमोद पाण्डे निवासी खेरी ने अपने अधिवक्ता डी पी तिवारी बीरेन्द्र तिवारी व आर के गंगेले के माध्यम से न्यायालय श्री सुनील दंडोतिया के यहाँ परिवाद प्रस्तुत किया था जिस पर माननीय न्यायालय ने परिवाद के साथ प्रस्तुत दस्तावेजो और परिवादी के शपथ पत्र के आधार पर प्रथम दृष्ट्या अपराध प्रमाड़ित होने से थाना प्रभारी राजनगर को अभियुक्त परमलाल तनय धनुआ कुर्मी नोने तनय रमई कुर्मी लल्लू तनय जगन कुर्मी के साथ तत्कालीन हल्का पटवारी गुलंदी अहिरवार पर ipc की धारा 420 467 468 471 120 बी 34 का अपराध पंजीवद्द कर भारसाधक अधिकारी से जाँच कराने का आदेश दिया है

आईएएस अफसर मालपानी सस्पेंड, रिश्वत मांगने का ऑडियो हुआ था वायरल

Toc News @ Bhopal
भोपाल। मंत्रालय में ओएसडी और सीनियर आईएएस अफसर जेएन मालपानी को सोमवार को सस्पेंड कर दिया गया है। अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के तत्कालीन आयुक्त जेएन मालपानी सहायक आयुक्त आरके श्रोती से फोन पर रिश्वत मांग रहे थे। पिछले महीने उनके बीच हुई बातचीत का ऑडियो टेप वायरल हुआ था। 24 घंटे बाद ही उन्हें हटाकर मंत्रालय में ओएसडी पदस्थ कर दिया गया था। वे 1994 बैच के आईएएस अफसर हैं। इसके बाद एसीएस राधेश्याम जुलानिया इस मामले की जांच कर रहे थे।

सिवनी : जहरीली गैस से भरा कैप्सूल पलटा, लगा लंबा जाम

जबलपुर नागपुर मार्ग पिछले पाँच घंटे से बंद ..
जहरीली गैस से भरा कैप्सूल पलटा, एक गंभीर
लगा लंबा जाम
Toc News
सिवनी. छपारा- बंडोल के पास गोरखपुर गुरुद्वारे के सामने एनएच 7 पर जहरीली गैस से भरे कैप्सूल के पलट जाने से गैस रिसने लगी।यह गैस ट्रापलीन बताई जा रही है जो काफी जहरीली होती है।  यह टैंकर मथुरा से चेन्नई जा रहा था। जहरीली गैस के कारण कैप्सूल का ड्राइवर विकास गंभीर हो गया जिसके कारण उसे फौरन 108 की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। जहरीली गैस  भरे कैप्सूल की खबर मिलते ही दोनो ओर से वाहनों की आवाजाही एहतियातन रोक दी गई जिससे दोनों ओर लंबा जाम लगा हुआ है।

छपारा में ही आधा दर्जन से ज्यादा बसें रोकी गई हैं । मामले की गंभीरता को देखते हुए छपारा में एसडीओपी छोटे राजा समेत सभी पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पहुंच चुके हैं। वहीं बताया जा रहा है कि जिला कलेक्टर भरत यादव और एसपी एके पांडेय भी मामले पर नजर बनाए हुए हैं । दोनों अधिकारी मौके के लिए रवाना हो गए हैं। प्रशासन गैस निर्माताओं से संपर्क कर उसे निष्क्रीय करने की कोशिश में भी जुटा हुआ है। खबर लिखे जाने तक ट्रैफिक रुका हुआ है।

मौके पर एसपी एके पांडेय और एसडीएम व्हीके द्विेदी भी पहुंच गए हैं और निगरानी रख रहे हैं। सूत्रों ने जानकारी दी है कि छिंदवाड़ा से विशेषज्ञ बुलवाकर गैस रिसाव बंद करने की कोशिश  की जाएगी। इस घाटना से लोगों खासा परेशान होना पड़ा है..

बहसी पिता ने 9 साल की बेटी से किया रेप

- मां ने कराया गिरफ्तार
Toc NEWS @ Betul
बैतूल। एक शराबी पिता अपनी ही 9 साल की बेटी के साथ शराब के नशे में दुष्कर्म कर दिया. मासूम की मां ने साहस दिखाते हुए अपने ही पति के खिलाफ पुलिस थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है.
बोरदेही थाने के अनुसार महिला ने अपने पति के खिलाफ एफआईआर करने के अलावा उसे गिरफ्तार करने में भी पुलिस की काफी मदद की है.
बताया जा रहा है कि शराब के नशे में लड़की का पिता घर पहुंचा और बेटी के साथ जबरदस्ती की. मां को जब इस बात का पता चला तो उसने अपना विरोध जताया और तमाम दबाव के बावजूद उसने पुलिस थाने पहुंच कर एफआईआर दर्ज कराई.
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रेप और पास्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया.
अपने पिता की दरिंदगी का शिकार हुई मासूम की हालत बिगड़ने पर उसे मुलताई के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां उसका इलाज जारी है।

सहेलियों ने नाबालिग का दुष्कर्म करवा कर, एमएमएस किया वायरल

Toc News 
बरेली। बरेली में अपनी सहेली से उनकी दोस्तों ने बेहद घृणित बदला लिया। दो सहेलियों ने अपनी मित्र के साथ दुष्कर्म की मोबाइल क्लिपिंग बना ली। दोनों ने अपने बायफ्रेंड के साथ पीडि़ता के दोबारा से शारीरिक संबंध न बनाने पर दुष्कर्म एमएमएस वायरल कर दिया। मामला तूल पकडऩे पर पुलिस ने एमएमएस बनाने वाली दोनों लड़कियों को हिरासत में लिया है जबकि दुष्कर्म करने वाला फरार है।

बरेली के शेरगढ़ का यह कांड फिल्मी कहानी को मात कर देने वाला है। यहां पर दो नाबालिग सहेलियों ने तीसरी सहेली के साथ दुष्कर्म की मोबाइल से क्लिपिंग तैयार कर ली। उसके बाद ब्लैकमेल करने की कोशिश में लग गईं। नाकाम हुईं तो एमएमएस को नेट पर डाल दिया। दुष्कर्म का शिकार नाबालिग की गांव में बदनामी हुई तो घरवालों ने युवक और एमएमएस बनाने वाली दोनों नाबालिग लड़कियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। पुलिस ने लड़कियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनसे थाने में पूछताछ की जा रही है। युवक फरार हो गया।
डर्टी पिक्चर शेरगढ़ थाने के गांव बैरमनगर की है। यहां 18 दिसंबर को एक युवक ने 12 वर्षीय किशोरी को उसके घर में अकेला पाकर दबोच लिया। उसके पिता दूसरे बच्चों के साथ ससुराल गए हुए थे। युवक ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। इस दौरान उसने फोन करके गांव की दो नाबालिग लड़कियों को भी बुला लिया। दोनों उसकी प्रेमिका व किशोरी की सहेली बताई जा रही हैं। इन दोनों ने दुष्कर्म की क्लिपिंग तैयार कर ली। इसके बाद युवक और दोनों लड़कियां किशोरी को मुंह खोलने पर एमएमएस नेट पर डालने की धमकी देकर चले गये। किशोरी ने डर की वजह से घटना जिक्र परिवार में किसी से भी नहीं किया। उधर दुष्कर्मी युवक की तरफ से उस पर फिर संबंध बनाने के लिए दबाव बनाया जाने लगा। पीडि़ता नहीं मानी तो आरोपियों ने एमएमएस को नेट पर डाल दिया।

यह वीडियो एमएमएस से वायरल होकर गांव के कई युवाओं के मोबाइल में पहुंच गई। गांव में चर्चा शुरू हो गई। धीरे-धीरे बात पीडि़ता के परिवार के लोगों तक भी पहुंच गई। बदनामी होते देख युवक और दोनों दोनों लड़कियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। पुलिस ने गांव में दबिश देकर दोनों लड़कियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों का मेडिकल कराया। उन्हें थाने में ही बैठाया गया है। पुलिस उनसे घटना को लेकर पूछताछ कर रही है। दोनों ने एमएमएस बनाने की बात स्वीकार कर ली है। पकड़ी गई लड़कियों में एक की उम्र 15 साल और दूसरी की 16 साल बताई जा रही है। नाबालिग होने से पुलिस पशोपेश में है। पुलिस अब दुष्कर्म के आरोपी युवक अमन की तलाश कर रही है, जो गांव में दबिश से पहले ही फरार हो चुका था।

Sunday, December 27, 2015

चेयरमैन ने टीचर को क्रिसमस के लिए बुलाया, रेप कर डाला

नईदिल्ली। हरिनगर में एक प्राइवेट स्कूल की टीचर ने स्कूल के चेयरमैन पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, 24 वर्षीय पीड़िता अपने पति के साथ राजौरी गार्डन में रहती है। वह हरिनगर में एक निजी स्कूल में टीचर है। पीड़िता ने बताया कि 22 दिसंबर की दोपहर स्कूल से छुट्टी होने के बाद वह घर आ गई थी। कुछ देर बाद स्कूल के चेयरमैन रघुविंद्र का फोन आया। उसने बताया कि स्कूल के लिए क्रिसमस की खरीददारी करनी है। रघुविंद्र ने उसे तिहाड़ जेल के पास आने के लिए कहा।

जब वह पहुंची तो उसने रघुविंद्र को कार में बैठा हुआ पाया। कार में बैठते ही रघुविंद्र ने उसे कोल्ड ड्रिंक दी, जिसे पीते ही वह बेहोश हो गई। कुछ देर बाद उसे होश आया तो उसने खुद को हरिनगर डिपो के पास पाया।


उसके कपड़े अस्तव्यस्त थे। पीड़िता ने तुरंत घटना की जानकारी अपने पति को दी। उसके बाद दंपति ने हरिनगर थाने पहुंचकर घटना की जानकारी दी।

पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने उसका मेडिकल करवाया, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने इस बाबत मामला दर्ज कर लिया। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है।

यीशु के संदेश बना सकते हैं आतंकवाद मुक्त समाज : मुख्यमंत्री श्री चौहान

क्रिसमस कैरोल से गूंज उठा मुख्यमंत्री निवास प्रांगण

सर्वधर्म समभाव की श्रंखला में हुआ क्रिसमस पर्व का आयोजन
यीशु के संदेश बना सकते हैं आतंकवाद मुक्त समाज : मुख्यमंत्री श्री चौहान
 


प्रस्तुत: टीओसी न्यूज, विनय जी. डेविड
भोपाल : शनिवार, दिसम्बर 26, 2015, 
''सर्वधर्म समभाव'' की परंपरा को आगे बढ़ाते हुये मुख्यमंत्री निवास पर आज क्रिसमस का पवित्र पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। क्रिसमस कैरोल से मुख्यमंत्री निवास प्रांगण गूंज उठा।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह प्रभु मसीह के जन्मोत्सव में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने केक काटा और क्रिसमस की बधाईयां दी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सभी धर्मों के प्रमुख धार्मिक उत्सवों एवं त्यौहारों को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित करने की परम्परा की शुरूआत की है।


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि शांति, सद्भाव, भाईचारा, दया और प्रेम से परिपूर्ण समाज का निर्माण करने के लिए यीशु के उद्देश्यों को अमल में लाने की जरूरत है। प्रेम और शांति का मार्ग ही मानवता की रक्षा कर सकता है और आतंकवाद मुक्त समाज बना सकता है। उन्होंने कहा कि अंधेरे को कोसने के बजाय उजियारा करना ज्यादा बेहतर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं को मानवता का सेवक माना है और इसी भावना के साथ प्रदेश के पुनर्निमाण में लगे हैं।
आर्च बिशप लिओ कार्नोलियो ने कहा कि यीशु ने सिखाया कि सीधे सच्चे सरल बनो। प्रभु मानव पर अटूट विश्वास करते है। आज मानव समाज को ज्यादा उदार होने की जरुरत है। प्रेम, शांति और सेवा दया की सबसे ज्यादा जरुरत है।
मुख्यमंत्री ने लियो कार्नेलिओ को आल इंडिया कौंसिल ऑफ़ ह्यूमन राइट्स द्वारा मानव अधिकारों के सेवक के रूप में सम्मानित होने पर प्रदेश के नागरिको की ओर से अभिनन्दन किया। ईसाई समुदाय ने अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं लागू करने के लिए मुख्यमंत्री का सम्मान किया और उनके यशस्वी जीवन के लिए विशेष प्रार्थना की।
प्रभु यीशु मसीह के जन्म की कहानियों और उनकी शिक्षाओं पर आधारित नाटिकाओं का मंचन भी किया गया। मुख्यमंत्री निवास प्रांगण क्रिसमस कैरोल से गूंज उठा।
इस अवसर पर झाबुआ के बिशप श्री बेसिल भूरिया, इंदौर के बिशप डॉ. चाको थोटमरिकल, उज्जैन के बिशप डॉ. सेबस्टियन वाडाकेल, जबलपुर के बिशप डॉ. प्रेमचंद सिंह श्री रोबर्ट अली और बड़ी संख्या में प्रदेश से आए मसीह समाज के सदस्य उपस्थित थे।

भाजपा विधायक का विवादित बयान- एमपी में सुशासन नहीं कुशासन

Toc News
भाजपा विधायक पन्नालाल ने शिवराज सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि इस राज्य में सुशासन नहीं बल्कि कुशासन का राज है. सरकार के साथ ही विधायक ने अधिकारियों पर भी निशाना साधा.
दरअसल, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में सुशासन दिवस के मौके पर शनिवार को जिला प्रशासन द्वारा शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

इस मौके पर मुख्य अतिथि बनकर आए स्थानीय भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया.जिसके चलते कार्यक्रम में सन्नाटा पसर गया.
विधायक ने कहा कि राज्य में कुशासन का राज्य है और यदि प्रदेश में सुशासन है तो फिर सीएम हेल्पलाइन की क्या जरूरत.
विधायक यहीं नहीं रुके उन्होंने अधिकारियों पर भी चुटकी लेते हुए कहा कि शासकीय अधिकारी-कर्मचारी जिस कुर्सी पर भी बैठते हैं उन्हें पैसा मिलता है.
विधायक ने सरकारी सिस्टम पर भी हमला करते हुए फर्जी काम करने वालों को प्रमोशन मिलने की बात कही. उन्होंने कहा कि यहां उन अधिकारियों को तो प्रमोशन तक दे दिया जाता है जो फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाने का काम करते हैं. 

Friday, December 25, 2015

एमपी में पानी को लेकर खून बहा, खेतों में सिंचाई को लेकर कई राउंड फायरिंग

 Toc News
छतरपुर जिले में खेतों में सिंचाई को लेकर दो पक्षों में कई राउंड फायरिंग में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया. चार लोगों पर फायरिंग करने का आरोप लगा है.
जानकारी के मुताबिक, बमनोरा थाना क्षेत्र के हसरी गांव में शुक्रवार सुबह खेतों में सिंचाई को लेकर हुए विवाद खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया. इस दौरान दोनों तरफ से हुई फायरिंग में गोली लगने से जीत लाल यादव नाम का युवक घायल हो गया.
जीत लाल को इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल ले जाया गया. जहां गंभीर हालत को देखते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया.
घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया. अभी इस मामले में कोई भी गिरफ्तारी नहीं हुई है.
वहीं, फायरिंग के बाद पूरे गांव में भारी तनाव पसरा हुआ है. ऐहतियातन यहां अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया है 

सामान्य से दो गुना बड़ा था पत्रकार अक्षय सिंह का दिल, हार्ट अटैक से हुई मौत

Toc News
व्यापमं घोटाले का झाबुआ में कवरेज करने आए दिल्ली के पत्रकार अक्षय सिंह की रहस्यमयी मौत पर बड़ा खुलासा हुआ है. सीबीआई को मिली पीएम रिपोर्ट के मुताबिक अक्षय का दिल सामान्य से दो गुना था और उसकी मौत की वजह हार्ट अटैक थी.
जानकारी के अनुसार, दिल्ली एम्स में अक्षय सिहं के दिल, विसरा और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की जांच की गई थी. जिसमें ये बात सामने आई कि अक्षय का दिल समान्य से दो गुना से भी ज्यादा था. जहां समान्य दिल का वजन 320 ग्राम होता है वहीं अक्षय के मामले में ये वजन 700 ग्राम था.

दिल के बढ़े हुए आकार का कारण हालांकि अभी साफ नहीं हो सका है लेकिन जानकारों का कहना है कि बढ़े हुए आकार से अक्षय की मौत की वजह से कोई लेना-देना नहीं है. सीबीआई को मिली रिपोर्ट में मौत की वजह साफ तौर पर हार्ट अटैक बताया जा रहा है.

नहीं दिया गया जहर
इससे पहले आई विसरा की रिपोर्ट में भी ये साफ कर दिया गया था कि अक्षय को किसी प्रकार का जहर नहीं दिया गया था. नेशनल फारेंसिक लैब की रिपोर्ट में यह साफ हो गया था कि व्यापमं घोटाले में संदिग्ध एमजीएम कॉलेज इंदौर की छात्रा नम्रता डामोर की हत्या पर रिपोर्टिंग करने आए अक्षय सिंह के शरीर में जहर नहीं पाया गया.

4 जुलाई को हुई थी मौत
निजी टीवी चैनल के पत्रकार अक्षयसिंह की मौत 4 जुलाई को झाबुआ के मेघनगर में हो गई थी. वे यहां व्यापमं घोटाले की संदिग्ध एमजीएम कॉलेज इंदौर की छात्रा नम्रता डामोर की हत्या पर रिपोर्टिंग करने आए थे.
नम्रता के घर पहुंचने के कुछ देर बाद अक्षयसिंह की तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया. बाद में गुजरात के दाहोद भी ले जाया गया, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी. अक्षय का पोस्टमार्टम दाहोद के सरकारी अस्पताल में किया गया था. मामला मेघनगर थाने में दर्ज हुआ और मेघनगर पुलिस विसरा जांच के लिए सैंपल दिल्ली की नेशनल फारेंसिक लैब लेकर गई थी.

यीशु मसीह कौन है?


यीशु की खास भूमिका क्या है?
वह कहाँ से आया था?
वह कैसा इंसान था?
1, 2. (क) क्या एक मशहूर आदमी का सिर्फ नाम जानने का यह मतलब है कि आपकी उससे गहरी जान-पहचान है? (ख) यीशु के बारे में लोग कैसी अलग-अलग राय रखते हैं?
दुनिया में कई मशहूर और जानी-मानी हस्तियाँ हैं। कुछ लोग अपने समाज, शहर या देश में मशहूर हैं तो कुछ दुनिया-भर में। मान लीजिए, आप किसी मशहूर आदमी का सिर्फ नाम जानते हैं। तो क्या आप यह कह सकते हैं कि मेरी उससे गहरी जान-पहचान है? नहीं। सिर्फ नाम जानने का यह मतलब नहीं कि आपको उसकी ज़िंदगी की एक-एक बात पता है और यह भी कि वह कैसा शख्स है।

2 यीशु मसीह करीब 2,000 साल पहले धरती पर आया था, फिर भी आज सारी दुनिया के लोग उसके बारे में कुछ-न-कुछ ज़रूर जानते हैं। मगर कइयों को सही से पता नहीं है कि यीशु असल में कौन था। वे उसके बारे में अलग-अलग राय रखते हैं। जैसे, कुछ लोगों का कहना है कि वह एक नेक इंसान था। दूसरे कहते हैं कि वह बस एक नबी था। और कई लोगों का मानना है कि यीशु, परमेश्वर है और हमें उसकी उपासना करनी चाहिए। लेकिन क्या वाकई में उसकी उपासना की जानी चाहिए?

3. यीशु के बारे में सच्चाई जानना आपके लिए क्यों ज़रूरी है?
3 यीशु के बारे में सही-सही जानना आपके लिए बहुत ज़रूरी है। क्यों? क्योंकि बाइबल कहती है: “अनन्त जीवन यह है कि वे तुझ एकमात्र सच्चे परमेश्वर का, और जिसे तू ने भेजा है, अर्थात्‌ यीशु मसीह का ज्ञान लेते रहें।” (यूहन्ना 17:3, NW) जी हाँ, यहोवा परमेश्वर और यीशु मसीह के बारे में सच्चा ज्ञान लेने से आपको फिरदौस में हमेशा की ज़िंदगी मिल सकती है। (यूहन्ना 14:6) इतना ही नहीं, यीशु की बढ़िया मिसाल से आप सीख सकते हैं कि आपको अपनी ज़िंदगी कैसे बितानी चाहिए और दूसरों के साथ कैसा  बर्ताव करना चाहिए। (यूहन्ना 13:34, 35) इस किताब के पहले अध्याय में हमने सीखा था कि परमेश्वर के बारे में सच्चाई क्या है। इस अध्याय में हम देखेंगे कि यीशु मसीह के बारे में बाइबल असल में क्या सिखाती है।

वह मसीहा जिसके आने का वादा किया गया था
4. “मसीहा” और “ख्रिस्त” का मतलब क्या है?
4 यीशु के पैदा होने से बहुत पहले, बाइबल में बता दिया गया था कि परमेश्वर एक मसीहा या ख्रिस्त को भेजेगा। शब्द “मसीहा” इब्रानी भाषा से और “ख्रिस्त” यूनानी भाषा से निकला है और इन दोनों का मतलब है “अभिषिक्त जन।” भविष्यवाणी के इन शब्दों से पता चलता है कि यह वादा किया हुआ जन परमेश्वर का अभिषिक्त होगा, यानी परमेश्वर उसे खास ज़िम्मेदारी और पदवी देने के लिए उसका अभिषेक करेगा। परमेश्वर  के वादों के पूरा होने में मसीहा ने क्या अहम भूमिका निभायी, इस बारे में हम आगे के अध्यायों में और ज़्यादा सीखेंगे। हम उन आशीषों के बारे में भी जानेंगे जो यीशु की बदौलत आज हमें मिल सकती हैं। लेकिन जब यीशु धरती पर पैदा होनेवाला था, उस वक्‍त बेशक कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा था कि ‘वह मसीहा आखिर कौन होगा?’

5. यीशु के चेलों को उसके बारे में क्या यकीन था?
5 पहली सदी में, यीशु नासरी के चेलों को पूरा यकीन था कि भविष्यवाणी में बताया गया मसीहा वही है। (यूहन्ना 1:41) यीशु के चेले शमौन पतरस को उससे यह कहने में ज़रा भी हिचकिचाहट नहीं हुई कि ‘तू मसीह है।’ (मत्ती 16:16) लेकिन उन्हें कैसे यकीन हुआ कि यीशु ही मसीहा है, और हम भी यह कैसे यकीन कर सकते हैं?

6. यहोवा ने मसीहा को पहचानने में अपने लोगों की कैसे मदद की, इसे समझाने के लिए एक मिसाल दीजिए।
6 यीशु के आने से पहले नबियों ने मसीहा के बारे में कई भविष्यवाणियाँ की थीं। इनमें दी जानकारी की मदद से लोग मसीहा को पहचान सकते थे। इसे समझाने के लिए यह मिसाल दी जा सकती है। मान लीजिए, आप से कहा जाए कि आप फलाँ-फलाँ बस या हवाई-अड्डे या रेलवे-स्टेशन पर किसी को लेने जाएँ। मगर मुश्किल यह है कि आप जिसे लेने जा रहे हैं उसे आपने पहले कभी नहीं देखा। तो आप उसे पहचानेंगे कैसे? अगर आपको आनेवाले मेहमान के हुलिए और शक्ल-सूरत के बारे में कुछ बताया जाए, तो आपका काम आसान हो जाएगा, है कि नहीं? उसी तरह, यहोवा ने मसीहा को पहचानने के लिए, अपने नबियों के ज़रिए काफी जानकारी दी थी। जैसे कि वह क्या-क्या काम करेगा और उसे कैसे-कैसे ज़ुल्म सहने पड़ेंगे। इन ढेरों भविष्यवाणियों को पूरा होते देखकर परमेश्वर के सेवक साफ-साफ पहचान सकते थे कि कौन मसीहा है।

7. ऐसी कौन-सी दो भविष्यवाणियाँ हैं जो यीशु पर पूरी हुई थीं?
7 आइए अब मसीहा के बारे में ऐसी दो भविष्यवाणियों पर गौर करें। पहली भविष्यवाणी मीका की है। उसने मसीहा के आने से 700 साल पहले बताया था कि मसीहा, यहूदा देश में बेतलेहेम नाम के एक छोटे-से नगर में पैदा होगा। (मीका 5:2) यीशु कहाँ पैदा हुआ? इसी नगर में! (मत्ती 2:1, 3-9) दूसरी  भविष्यवाणी दानिय्येल 9:25 में है। इसमें मसीहा के आने से सदियों पहले बताया गया था कि वह सा.यु. 29 में लोगों पर प्रकट होगा। * यीशु, मसीहा बनकर किस साल प्रकट हुआ? ठीक उसी साल। इन दोनों के अलावा, दूसरी ढेरों भविष्यवाणियाँ पूरी होने से साबित हो जाता है कि यीशु ही मसीहा है।

यीशु के बपतिस्मे के वक्‍त, परमेश्वर की पवित्र शक्‍ति कबूतर के रूप में नीचे उतरते हुए, यह ज़ाहिर करने के लिए कि यीशु ही मसीहा है
बपतिस्मा होने पर यीशु, मसीहा या ख्रिस्त बना
8, 9. यीशु के बपतिस्मे के वक्‍त क्या सबूत मिला कि वही मसीहा था?
8 सामान्य युग 29 के आखिर में यीशु के बपतिस्मे के वक्‍त उसके मसीहा होने का एक और सबूत मिला। यहोवा ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले को मसीहा को पहचानने की निशानी दी थी। वह निशानी क्या थी? बाइबल बताती है कि जब यीशु ने यरदन नदी में बपतिस्मा लिया, तो क्या हुआ: “यीशु बपतिस्मा लेकर तुरन्त पानी में से ऊपर आया, और देखो, उसके लिये आकाश खुल गया; और उस ने परमेश्वर के आत्मा को कबूतर की नाई उतरते और अपने ऊपर आते देखा। और देखो, यह आकाशवाणी हुई, कि यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिस से मैं अत्यन्त प्रसन्न हूं।” (मत्ती 3:16, 17) पवित्र आत्मा उँडेलने के साथ-साथ यहोवा ने खुद इस मौके पर गवाही देकर सबूत दिया कि यीशु ही मसीहा था। यूहन्ना को यह सब देखने और सुनने पर पक्का विश्वास हो गया कि यीशु को परमेश्वर ने भेजा है। (यूहन्ना 1:32-34) जिस दिन यीशु पर परमेश्वर की आत्मा या सक्रिय शक्ति उँडेलकर उसका अभिषेक किया गया उस दिन यीशु, मसीहा या ख्रिस्त बना, यानी वह जिसे परमेश्वर ने प्रधान और राजा बनने के लिए चुना था।—यशायाह 55:4.

9 यीशु पर बाइबल की जो भविष्यवाणियाँ पूरी हुईं और खुद यहोवा परमेश्वर ने जो गवाही दी, उनसे साफ पता चलता है कि यीशु ही वादा किया गया मसीहा था। मगर यीशु मसीह के बारे में बाइबल और भी दो अहम सवालों के जवाब देती है: वह कहाँ से आया था और कैसा इंसान था?

यीशु कहाँ से आया था?
10. बाइबल के मुताबिक धरती पर आने से पहले यीशु कहाँ था?
10 बाइबल सिखाती है कि यीशु, धरती पर आने से पहले स्वर्ग में था। मीका ने अपनी भविष्यवाणी में जब कहा कि मसीहा बेतलेहेम में पैदा होगा तो उसने  यह भी बताया कि वह “प्राचीनकाल से” अस्तित्त्व में है। (मीका 5:2) कई मौकों पर खुद यीशु ने भी बताया कि वह धरती पर आने से पहले स्वर्ग में था। (यूहन्ना 3:13; 6:38, 62; 17:4, 5) स्वर्ग में वह एक आत्मिक प्राणी था और उसका यहोवा के साथ एक खास और करीबी रिश्ता था।

11. बाइबल कैसे दिखाती है कि यीशु, यहोवा का सबसे प्यारा बेटा है?
11 यीशु, यहोवा का सबसे प्यारा बेटा है और इसकी ठोस वजह भी हैं। बाइबल में उसे “सारी सृष्टि में पहिलौठा” कहा गया है, क्योंकि उसे सबसे पहले बनाया गया था। * (कुलुस्सियों 1:15) एक और वजह से भी यहोवा का यह बेटा उसे सबसे अज़ीज़ है। वह परमेश्वर का “एकलौता पुत्र” है। (यूहन्ना 3:16) इसका मतलब है कि अकेला वही ऐसा है जिसे परमेश्वर ने खुद रचा था। और अपनी बाकी सृष्टि को बनाने के लिए परमेश्वर ने सिर्फ उसी को इस्तेमाल किया था। (कुलुस्सियों 1:16) इसके अलावा यीशु को “वचन” भी कहा गया है। (यूहन्ना 1:14) इससे हमें पता चलता है कि वह यहोवा की तरफ से बोलता था। वह अपने पिता का संदेश और उसकी हिदायतें परमेश्वर के बाकी बेटों, यानी स्वर्गदूतों और इंसानों को पहुँचाता था।

12. हम कैसे जानते हैं कि परमेश्वर का पहिलौठा पुत्र, उसके बराबर नहीं है?
12 कुछ लोग मानते हैं कि पहिलौठा पुत्र यीशु, परमेश्वर के बराबर है। क्या यह सच है? बाइबल ऐसा नहीं सिखाती। जैसे हमने पिछले पैराग्राफ में देखा, यीशु की सृष्टि की गयी थी। तो ज़ाहिर है कि उसकी एक शुरूआत थी, जबकि यहोवा परमेश्वर की न तो कोई शुरूआत थी और ना ही कभी उसका अंत होगा। (भजन 90:2) और यीशु के मन में कभी अपने पिता के बराबर बनने का खयाल तक नहीं आया। बाइबल साफ-साफ बताती है कि पिता, पुत्र से बड़ा है। (यूहन्ना 14:28; 1 कुरिन्थियों 11:3) केवल यहोवा ही “सर्वशक्‍तिमान्‌ ईश्वर” है। (उत्पत्ति 17:1) इसलिए कोई उसकी बराबरी नहीं कर सकता। *

13. बाइबल में पुत्र को “अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप” क्यों कहा गया है?
 13 यहोवा और उसका पहिलौठा बेटा, अरबों-खरबों सालों से साथ-साथ रहे हैं, यानी तब से जब न यह आसमान था और ना ही यह ज़मीन। तो सोचिए उनके बीच कितना करीबी रिश्ता और गहरा प्यार होगा! (यूहन्ना 3:35; 14:31) परमेश्वर का यह प्यारा बेटा हर बात में हू-ब-हू अपने पिता जैसा था। यही वजह है कि बाइबल उसे “अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप” कहती है। (कुलुस्सियों 1:15) जिस तरह एक बेटे में बहुत-से गुण अपने पिता जैसे होते हैं, वैसे ही यीशु में भी अपने पिता जैसे गुण हैं और वह उसके जैसी शख्सियत रखता है।

14. यहोवा का एकलौता बेटा, एक इंसान के रूप में कैसे पैदा हुआ?
14 यहोवा का एकलौता बेटा, इंसान की ज़िंदगी जीने के लिए खुशी से स्वर्ग छोड़कर धरती पर आया। मगर आप शायद सोचें, ‘यीशु तो एक आत्मिक प्राणी था, फिर वह इंसान कैसे बना?’ इसे मुमकिन करने के लिए, यहोवा ने एक चमत्कार किया। उसने अपने पहिलौठे बेटे का जीवन एक भ्रूण के रूप में, मरियम नाम की एक यहूदी कुँवारी के गर्भ में डाला। इस तरह, इस बच्चे का कोई इंसानी पिता नहीं था। इसी वजह से, मरियम ने जिस बेटे को जन्म दिया वह सिद्ध था और उसने उसका नाम यीशु रखा।—लूका 1:30-35.

यीशु कैसा इंसान था?
एक घर में यीशु लोगों को प्रचार करते हुए
15. हम क्यों कह सकते हैं कि यीशु के बारे में सीखने से हम यहोवा को अच्छी तरह जान पाएँगे?
15 यीशु ने धरती पर रहते वक्‍त जो बातें कहीं और जो काम किए, उनके बारे में सीखकर हम उसे और भी अच्छी तरह जान सकते हैं। इससे भी बढ़कर, यीशु के ज़रिए हम यहोवा को और करीब से जान सकेंगे। वह कैसे? क्योंकि परमेश्वर का यह बेटा हर बात में हू-ब-हू अपने पिता की तरह था, जैसा कि हम पहले देख चुके हैं। इसीलिए उसने अपने एक चेले से कहा: “जिस ने मुझे देखा है उस ने पिता को देखा है।” (यूहन्ना 14:9) बाइबल में मत्ती, मरकुस, लूका और यूहन्ना नाम की ऐसी चार किताबें हैं जो हमें यीशु मसीह की ज़िंदगी, उसकी सेवा और उसके गुणों के बारे में बहुत कुछ बताती हैं। इन किताबों को सुसमाचार की किताबें कहा जाता है।

16. यीशु का खास संदेश क्या था, और यह किसकी तरफ से था?
 16 यीशु को लोग “गुरु” कहकर बुलाते थे क्योंकि वह सिखाने में बेजोड़ था। (यूहन्ना 1:38; 13:13) वह लोगों को क्या सिखाता था? ‘राज्य के सुसमाचार’ के बारे में। यही उसका खास संदेश था। उसने लोगों को यह खुशखबरी दी कि परमेश्वर का स्वर्गीय राज्य या सरकार बहुत जल्द सारी दुनिया पर हुकूमत करेगी और आज्ञा माननेवाले इंसानों को बेशुमार आशीषें देगी। (मत्ती 4:23) उसका यह संदेश किसकी तरफ से था? यीशु ने खुद इसका जवाब दिया: “मेरा उपदेश मेरा नहीं, परन्तु मेरे भेजनेवाले” यानी यहोवा परमेश्वर का है। (यूहन्ना 7:16) यीशु अच्छी तरह जानता था कि उसके पिता की यह मरज़ी है कि लोगों को राज्य की खुशखबरी सुनायी जाए। यह राज्य क्या है और यह क्या करेगा, इस बारे में हम अध्याय 8 में ज़्यादा सीखेंगे।

यीशु कुछ मछुआरों को प्रचार करते हुए
17. यीशु सिखाने के लिए कहाँ-कहाँ गया, और इस काम में उसने इतनी मेहनत क्यों की?
17 लोगों को सिखाने के लिए यीशु कहाँ-कहाँ गया? ऐसी हर जगह जहाँ लोग मिल सकते थे—घरों में, बाज़ारों में, गाँवों और शहरों में, यहाँ तक कि दूर-दूर के इलाकों में भी। यीशु ने कभी यह उम्मीद नहीं की कि लोग उसके पास आएँ बल्कि वह खुद उनके पास जाता था। (मरकुस 6:56; लूका 19:5, 6) आखिर क्या वजह थी कि यीशु ने प्रचार करने और लोगों को सिखाने में इतनी कड़ी मेहनत की, यहाँ तक कि अपना सारा वक्‍त लगा दिया? क्योंकि यीशु के लिए परमेश्वर की यही मरज़ी थी। और उसने हमेशा से वही किया है जो पिता उससे चाहता था। (यूहन्ना 8:28, 29) मगर उसके प्रचार करने की सिर्फ यही वजह नहीं थी। जब लोगों की भीड़ यीशु से मिलने आती थी, तो यह देखकर उससे सहा नहीं जाता था कि उनकी आध्यात्मिक हालत इतनी खराब है। (मत्ती 9:35, 36) उस ज़माने के धर्म-गुरुओं ने उन पर ज़रा भी ध्यान नहीं दिया था, जबकि उनका फर्ज़ था कि वे लोगों को परमेश्वर और उसके मकसद के बारे में सच्चाई सिखाएँ। यीशु अच्छी तरह जानता था कि लोगों को राज्य की खुशखबरी सुनाए जाने की कितनी ज़रूरत है।

18. यीशु के कौन-से गुण खास तौर पर आपके मन को भा जाते हैं?
18 यीशु प्यार की ज़िंदा मिसाल था। दूसरों का दर्द और उनकी तकलीफें देखकर वह तड़प उठता था। ऐसी सच्ची परवाह देखकर लोग उसके पास खिंचे  चले आते थे। यहाँ तक कि छोटे बच्चों को भी उससे बहुत लगाव था। (मरकुस 10:13-16) यीशु अमीर-गरीब या जात-पाँत नहीं देखता था, बल्कि उसकी नज़र में सभी एक-बराबर थे। उसे बेईमानी, धोखाधड़ी और अन्याय से सख्त नफरत थी। (मत्ती 21:12, 13) हालाँकि उस ज़माने में स्त्रियों को नीचा समझा जाता था और उन्हें बहुत कम अधिकार दिए जाते थे, मगर यीशु ने उन्हें लिहाज़ दिखाया और उनके साथ गरिमा से पेश आया। (यूहन्ना 4:9, 27) यीशु की नम्रता सच्ची थी। एक मौके पर उसने ऐसा काम किया जो आम तौर पर घर का सबसे तुच्छ सेवक करता है। गुरु होते हुए भी उसने अपने चेलों के पाँव धोए!

एक बीमार व्यक्‍ति को छूकर ठीक करने के लिए यीशु आगे बढ़ते हुए
यीशु ने ऐसी हर जगह प्रचार किया जहाँ लोग मिल सकते थे
19. कौन-सी घटना दिखाती है कि यीशु दूसरों की तकलीफ बखूबी समझता था?
19 यीशु महसूस कर सकता था कि दूसरे किस पीड़ा में हैं और उनकी ज़रूरतें क्या हैं। जब वह परमेश्वर की आत्मा के असर में चंगाई के काम करता था, तब उसकी यह हमदर्दी साफ नज़र आती थी। (मत्ती 14:14) मिसाल के लिए, एक कोढ़ी ने यीशु के पास आकर कहा: “यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।” उसकी यह दर्द-भरी फरियाद सुनकर यीशु से रहा नहीं गया। हाथ बढ़ाकर  उसने कोढ़ी को छूआ और कहा: “मैं चाहता हूं तू शुद्ध हो जा।” यह कहते ही वह कोढ़ी चंगा हो गया! (मरकुस 1:40-42) क्या आप उस आदमी की खुशी का अंदाज़ा लगा सकते हैं?

आखिरी साँस तक वफादार
20, 21. यीशु ने हर हाल में परमेश्वर की आज्ञा मानने में कैसी मिसाल रखी?
20 यहोवा की आज्ञा मानने और उसका वफादार रहने में यीशु से बढ़कर दूसरी कोई मिसाल नहीं है। हर हाल में और हर तरह का विरोध और ज़ुल्म सहते हुए भी वह अपने पिता का वफादार रहा। मिसाल के लिए, जब शैतान ने उसे परमेश्वर की आज्ञा तोड़ने के लिए उकसाया, तो उसने डटकर उसका सामना किया और उसके हर सवाल का मुँहतोड़ जवाब दिया। (मत्ती 4:1-11) एक वक्‍त ऐसा भी आया जब उसके अपनों ने उसका यकीन नहीं किया और उसे ‘पागल’ करार दिया। (मरकुस 3:21, नयी हिन्दी बाइबिल) फिर भी यीशु हिम्मत नहीं हारा बल्कि यहोवा की मरज़ी पूरी करने की धुन में लगा रहा। जब दुश्मनों ने उसे ज़लील किया और सताया, तब भी उसने अपना आपा नहीं खोया, न ही उनसे बदला लिया।—1 पतरस 2:21-23.

 21 हालाँकि उसके दुश्मनों ने उसे बड़ी बेरहमी से तड़पा-तड़पाकर मारा, फिर भी वह आखिरी साँस तक यहोवा का वफादार बना रहा। (फिलिप्पियों 2:8) गौर कीजिए कि उसने अपनी ज़िंदगी के आखिरी दिन क्या-क्या सहा। उसे गिरफ्तार किया गया, अदालत में झूठे गवाहों ने उस पर इलज़ाम लगाए, बेईमान और भ्रष्ट न्यायियों ने उसे मुजरिम करार दिया, लोगों की भीड़ ने उसकी खिल्ली उड़ायी और सैनिकों ने उसे कैसी-कैसी यातनाएँ दीं। आखिर में, उसे एक काठ पर कीलों से ठोंक दिया गया। दम तोड़ने से पहले उसने पुकारकर कहा: “पूरा हुआ”! (यूहन्ना 19:30) लेकिन मरने के तीसरे दिन, उसके पिता ने उसे एक आत्मिक शरीर में दोबारा ज़िंदा किया। (1 पतरस 3:18) इसके कुछ हफ्तों बाद, वह स्वर्ग लौट गया, जहाँ वह “परमेश्वर के दहिने जा बैठा” और उस वक्‍त का इंतज़ार करने लगा जब उसे राजा ठहराया जाता।—इब्रानियों 10:12, 13.

22. यीशु ने मरते दम तक वफादार रहकर क्या मुमकिन किया?
22 यीशु आखिरी साँस तक वफादार रहा, इससे क्या मुमकिन हो सका? यीशु की मौत से हमारे लिए फिरदौस में हमेशा की ज़िंदगी पाने का रास्ता खुल गया है, ठीक जैसा यहोवा ने शुरू से चाहा था। यीशु की मौत से यह कैसे मुमकिन हुआ, इस बारे में अगले अध्याय में चर्चा की जाएगी

Thursday, December 24, 2015

आइसना व् पुलिस के बीच होगा क्रिकेट मैच _ एस पी छतरपुर

राष्ट्रीय पत्रकार संगठन आइसना  व् पुलिस के बीच होगा क्रिकेट मैच  _ एस पी छतरपुर

छतरपुर. कल राजनगर में शांति समिति की बैठक के बाद जिला पुलिस अधीक्षक महोदय के साथ हुई बैठक में हुआ निर्णय की पुलिस व् पत्रकारो के बीच हो मैच । 25 तारीख 12 बजे मेला ग्राउंड में होगा मैच.

चावल घोटाले के खिलाफ याचिका मंज़ूर

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- आरटीआई एक्टिविस्ट आनंद ताम्रकार ने लगाई याचिका
बालाघाट। मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम बालाघाट से जुलाई और अगस्त 2015 की अवधि में रेलवे के जरिये 2500 मैट्रिक टन चांवल नागरिक आपूर्ति निगम विदिशा भेजा गया था उक्त चांवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिये उपभोक्ताओं को वितरित किया जाना था।


भेजे गये चांवल का आपूर्ति निगम के अधिकारियों द्वारा परिक्षण किये जाने पर चावल निर्धारित मापदण्ड के अनुसार गुणवत्ताहीन एवं अमानक स्तर का पाया जाने पर उसको सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से वितरित किये जाने पर रोक लगा दी गई थी। इन विसंगतियों के चलते कस्टम मिलिंग का अनुबंध करने वाले राईस मिलर्स एवं आपूर्ति निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों की संलिप्तता के कारण करोडों रूपयों की क्षति शासन को पहुचाते हुये भारी घोटाला किया गया है।


इस मामले को आधार बनाकर पत्रकार एवं आरटीआई कार्यकर्ता आनंद ताम्रकार ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका दायर की है याचिका क्रमांक डब्ल्यू. पी.21268/2015/8/12/2015 जिसे जस्टिस श्री रविशंकर झा की अदालत ने 9/12/2015 को विचारार्थ स्वीकार कर लिया।


आवश्यक वस्तु अधिनियम तथा मध्यप्रदेश चांवल वितरण एवं नियत्रंण आदेश 1973 के अधीन प्रस्तुत की गई इस याचिका में प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन महाप्रबंधक, मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम भोपाल, जिला प्रबंधक मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम बालाघाट तथा कलेक्टर को प्रतिवादी बनाया गया है। मामले की सुनवाई 10 जनवरी 2016 को नियत की गई है याचिकाकर्ता की ओर से डाॅ. अनुवाद श्रीवास्तव, संजीत कनौजिया, राहुल राय एवं रविन्द्र पाराशर अधिवक्ता पैरवी कर रहे हैं। 

भेल भोपाल फर्जी भर्ती मामले में पुलिस वरिष्ठ अधिकारियों से करेगी पूछताछ

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भोपाल। महारत्न कम्पनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) में एचआर एक्सजीक्यूटिव ट्रेनी पद में हुए फर्जी भर्ती मामले में राजधानी की गोविंदपुरा पुलिस ने शिकायतकर्ता आरएस सिंह के बयान दर्ज कर लिए हैं।

जांच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर रमेश राय ने इंडिया वन समाचार को बताया कि इस मामले में आरोपी साजी सेमुअल जिसे एक्सजीक्यूटिव ट्रेनी पद पर नियुक्ति दी गई है उसके अलावा पीके वैद्य उपमहाप्रबंधक, एम ईसाडोर अपरमहाप्रबंधक, केके नायर महाप्रबंधक और क्रिस्टोफर वरिष्ठ प्रबंधक को जल्द ही बयान लेने के लिए गोविंदपुरा थाने में बुलाया जाएगा। जांच अधिकारी ने आगे बताया कि इस भर्ती फर्जीवाड़े से संबंधित सभी दस्तावेज भेल भोपाल प्रबंधन से मांगे गए हैं।

जांच अधिकारी रमेश राय ने इंडिया वन समाचार को बताया कि यह जांच आरएस सिंह की शिकायत पर की जा रही है, जिन्होंने अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि भेल में एचआर एक्सजीक्यूटिव ट्रेनी पद पर कम्पनी के एचआर विभाग द्वारा फर्जीवाड़ा कर अपने चहेतों को नौकरी दी गई है। इसके अलावा नौकरी प्राप्त करने वालों में से एक साजी सेमुअल द्वारा यह नौकरी फर्जी मार्कशीट के आधार पर हासिल की है।

जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने एचआर विभाग के अधिकारियों के अलावा साजी सेमुअल जिसे इस कथित फर्जीवाड़े के तहत नौकरी मिली है द्वारा फर्जी एज्युकेशनल मार्कशीट के द्वारा नौकरी प्राप्त करने की भी शिकायत की है। शिकायत में कहा गया है कि साजी सेमुअल द्वारा एमबीए (एचआर) की डिग्री जो भेल मैनेजमेंट को दी गई है उसमें पहले, दूसरे और तीसरे सेमेस्टर की डिग्रियां नरेन्द्रदेवा यूनिवर्सिटी कुमारगंज फैजाबाद, उत्तरप्रदेश की है तथा चौथे सेमेस्टर की डिग्री विनायक मिशन्स रिसर्च फाउंडेशन डीम्ड यूनिवर्सिटी सेलम, तमिलनायडू की हैं। प्रथम दृ​ष्टया चौ​थे सेमेस्टर की डिग्री में कई गलतियां जैसे टोटल मार्क, प्राप्त मार्क, प्रतिशत, पास डिविजन और कुल सेमेस्टर का योग नहीं दिए जाने की वजह से फर्जी प्रतीत होती है। यह सारी मार्कशीट आरटीआई के द्वारा प्राप्त की गई हैं।
क्या है मामला…

भेल ने वर्ष 2007 में एक्सजीक्यूटिव एचआर के 600 पोस्टों के लिए भर्ती की थी। भेल के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने इस भर्ती परीक्षा में फेल हुए अपने कुछ चहेते डिपार्टमेंटल केंडीडेट्स को भर्ती करने के लिए वर्ष 2009 में सारे भर्ती नियमों को ताक में रखते हुए फिर से एचआर ट्रेनी पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरु की। प्रबंधन ने जो डिपार्टमेंटल केंडीडेट्स वर्ष 2007 की परीक्षा में बैठे थे उनके लिए तीस फीसदी क्वालिफाइंग मार्क कम करते हुए उन्हें सीधे इंटरव्यू के लिए बुला कर करीब दस कर्मचारियों का वर्ष 2009 में चयन कर लिया गया।

चयनित हुए दस डिपार्टमेंटल केंडीडेट्स में साजी सेमुअल स्टॉफ नं. 1257080, पी वी लथीका स्टॉफ नं. 1259458, कुंजीलाल कोल स्टॉफ नं. 1281607, माया सीधर स्टॉफ नं. 1287559, उमेश मारावी स्टॉफ नं. 1287680, नंद किशोर सातरावाला स्टॉफ नं. 1288512, कोकिला डिसूजा स्टॉफ नं. 1287559, रमेश कुमार जयसवाल स्टॉफ नं. 1293435, केशव चंद्र तिवारी स्टॉफ नं. 1272659 और अनुपम सक्सेना स्टॉफ नं. 1270540 शामिल हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता आरएस सिंह जिन्होंने एक्सजीक्यूटिव एचआर में इन दस डिपार्टमेंटल केंडीडेट्स की भर्ती के बारे में आरटीआई से जानकारी निकाली उसी से इस फर्जी भर्ती का खुलासा हुआ है। इस जानकारी के अनुसार वर्ष 2007 में एक्सजीक्यूटिव एचआर ट्रेनी पदों की भर्ती के लिए एमबीए एचआर, एमपीएम, एमएसडब्ल्यू, पीजी लेबर लॉ पर्सनल मैनेजमेंट का दो वर्ष का फुल टाइम रेग्युलर कोर्स कम से कम 60 प्रतिशत मार्क के साथ मिनिमम क्वालिफिकेशन रखी गई थी। आरएस सिंह को आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार इन सभी दस चुने गए केंडीडेट्स के पास या तो मिनिमम क्वालिफिकेशन थी ही नहीं या कुछ लोगों ने फर्जी मार्केशीट लगाकर यह नौकरी पाई है।

साजी सेमुअल स्टॉफ नं. 1257080 जो वर्तमान में भेल भोपाल में पदस्थ हैं उन्होंने जो एमबीए की जानकारी एग्जाम में अप्लाई करने के लिए दी थी उसके अनुसार उन्होंने डिस्टेन्स एजुकेशन से एमबीए किया है, जबकि रेग्युलर एमबीए करने वाले ही इस एग्जाम के लिए एलीजिबल थे। आरटीआई के द्वारा साजी सेमुअल की जो एमबीए की मार्कशीट की सर्टीफाइड कॉपी भेल प्रबंधन ने दी है उसके अनुसार साजी सेमुअल ने पहले, दूसरे और तीसरे सेमेस्टर की मार्कशीट नरेन्द्र देव यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, फैजाबाद, उत्तर प्रदेश की है, जबकि चौथे सेमेस्टर की मार्कशीट विनायक मिशन रिसर्च फाउंडेशन डीम्मड यूनिवर्सिटी, सेलेम, तमिलनाडु से है।

साजी सेमुअल की मार्कशीट के अनुसार उनके दूसरा सेमेस्टर 18 दिसम्बर 2004, तीसरा सेमेस्टर 15 अप्रैल 2005 और चौथा सेमेस्टर अगस्त 2005 का है। इन मार्कशीट की पहली विसंगति यह है कि तीन सेमेस्टर एक यूनिवर्सिटी से हैं और आखिरी सेमेस्टर एक दूसरी यूनिवर्सिटी से है। दूसरी विसंगति यह है कि हर सेमेस्टर के बीच में छह महीने का समय होना चाहिए, जबकि सेमुअल की मार्कशीट के अनुसार उनके सभी सेमेस्टर्स के बीच में चार महीने का अंतराल है।


Wednesday, December 23, 2015

आई.एफ.डब्ल्यू.जे. के अध्यक्ष पद से हटाए गए के. विक्रम राव

Present by - toc news

इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय सचिव (उत्तर) हेमन्त तिवारी ने के. विक्रम राव को पत्र लिखकर सूचित किया है कि राष्ट्रीय महासचिव परमानंद पाण्डे ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सत्य पारिक, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मल्लिकर्जुनिअह, राष्ट्रीय सचिव (सैंट्रल) कृष्णमोहन झा, राष्ट्रीय सचिव (दक्षिण) के. असदुल्ला से चर्चा कर आई.एफ.डब्ल्यू.जे. के अध्यक्ष पर लगे गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के साथ ही संघ विरोधी गतिविधियों एवं आपराधिक कृत्य की वजह से के. विक्रम राव को अध्यक्ष पद से हटाने का निर्णय लिया गया है। वर्किंग कमेटी के समस्त सदस्यों ने राष्ट्रीय महासचिव परमानंद पाण्डे के निर्णय पर अपनी सहमति जताई है साथ ही उस निर्णय का स्वागत भी किया है। श्री तिवारी ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि आगामी माह में राष्ट्रीय महासचिव परमानंद पाण्डेय की अनुमति से नेशनल काउंसिल की बैठक आगरा या वाराणसी में आयोजित कर नए अध्यक्ष का चयन किया जाएगा। आई.एफ.डब्ल्यू.जे. के संविधान की धारा 63 के तहत किसी भी व्यक्ति के विरूद्ध आर्थिक आपराधिक एवं संघ विरोधी कृत्य किए जाने पर कार्यवाही का अधिकार वर्किंग कमेटी को है। श्री तिवारी ने यह भी कहा है कि विक्रम राव द्वारा यदि अध्यक्ष के रूप में कोई पत्र व्यवहार किया जाता है तो यह अमान्य माना जाएगा और संगठन उन पर वैधानिक कार्यवाही करेगा।

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इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय सचिव (उत्तर) हेमन्त तिवारी द्वारा  के. विक्रम राव को लिखा पत्र इस प्रकार है :-
Dear Shri K. Vikram Rao,

This is with reference to your illegal show cause notice dated 18.12.2015 and so-called suspension letter sent to me today by email.

Your show cause notice and suspension both are unconstitutional, ultra vires and ridiculous and that is why, I did not think it necessary to send any reply to you. Since you have emailed fatuous letters to hundreds of other person that is why; I think it proper to tell you that you are no longer the President of IFWJ because no election has taken place for the post for the last many years. However, the Working Committee is in existence because it has been duly constituted in the last delegate session and by virtue of that Working Committee I continue to be the Secretary (North) of the IFWJ.

For your information National Council meeting to be held at Varanasi/Agra has been called by me in the capacity of Secretary (North) with the consent of Secretary General, your approval is not at all necessary because you do not exist to be the President of IFWJ. Apart from it, I would like to quote rule 63 which warrant action against you because you are playing in the hands of employer. This National Council meeting has been called to discuss the organisational matter to strengthen the organization and for deciding about the IFWJ Presidential Election. For your ready reference, I would like to reproduce rule 63 of the IFWJ Constitution.

Rule 63

Any member or affiliated body be liable to disciplinary action by the Working Committee of the Federation in case of:

(a)  default of payment;

(b)  criminal breach of trust;

(c)  defiance of any resolution or a directive of the delegates' conference, National Council and the Working Committee of the Federation;

(d)  any activity or utterance prejudicial to the interests of the Federation or actively serving the interests of the employers as against the interest of the employees;

A member against whom there is a complaint of indiscipline shall be given a charge sheet in writing by the Working Committee and he shall be asked to submit a written explanation. He shall have a right to address the Working Committee on the subject if he so desires. The Working Committee shall take the decision after hearing the member concerned.

(e)  Disclosure of IFWJ matters to the press or to a non-member.

Through this letter you are being asked within 72 hours as to why your membership from IFWJ be not terminated for;

A)   Financial irregularities

B)   Using the IFWJ's press and printing machine for your personal enrichment

C) For bringing disrepute to the organisation by submitting and collecting the inflated bills as a wage board member. The inquiry of the Labour Ministry is still going on against your misconduct.

D)   Hobnobbing with the newspaper proprietor against the interest of employees

E)   Disclosing the IFWJ matters to the Press and non-members

The charges against you are of very serious nature. However, you are asked to explain within 72 hours of the receipt of this show cause notice as to why the Working Committee, which is to meet at Agra/Varanasi should not take appropriate disciplinary action against you?

Thanking you

Yours sincerely


Hemant Tiwari
Secretary (North)-IFWJ

अयोध्या मामले में आग में घी न डालें पत्रकार: अखिलेश यादव

Toc News
बहराइच। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को कहा कि पत्रकार सोच समझ कर अपने दायित्व का निर्वहन करें तथा अयोध्या मामले में आग में घी डालने का काम नहीं करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने साम्प्रदायिक ताकतों को हराया है, अयोध्या का मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है लिहाजा पत्रकार सोच समझकर अपना दायित्व निभायें। सरकार संविधान और कानून के तहत काम करेगी।मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने श्रावस्ती में पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में यह बात कही।

कई योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करने आए मुख्यमंत्री से पत्रकारोंने अयोध्या में विश्व हिन्दू परिषद द्वारा राम मंदिर निर्माण के लिए पत्थर तराशेजाने तथा और ज्यादा पत्थर मंगाए जाने पर सवाल पूछा था। उन्होंनें जवाब में कहा कि पत्रकारों से अनुरोध है कि आग में घी डालने का काम न करें, सरकार अपना काम करेगी।

वेबमीडिया के नाम पर बूढ़ी बुआओं का विलाप…!

Toc news
बाला बच्चन दिखायें साहस ये सवाल पूछने का ?
कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने एक सवाल क्या पूछा भोपाली मीडिया के पत्रकार एक—दूसरे के कपड़े फाड़ने पर उतारू हो गये। खुराफाती लोग पड़ गये वेबसाईटों को दिये गये विज्ञापनों के पीछे। इस सब में जो दिग्गज नाम गिरामी लोग थे उनका तो कुछ नहीं लेकिन जो नये काम करने वाले पत्रकार थे उनका सारे मध्यप्रदेश के पत्रकारों ने फोन मैसेज करके जीना मुश्किल कर दिया। ऐसे में मल्हार मीडिया ने वो सवाल उठाये हैं जो वास्तव में पत्रकारिता के हित में खुद पत्रकारों को पूछने चाहिए और बाला बच्चन से उम्मीद की जाती है कि वे इन्हें विधानसभा के अगले सत्र में जरूर उठायें

पत्रकारिता की आढ़ में दलाली और वो सारे काम करने वाले जो गैरवाजिब माने जाते हैं करने वाले लोग न्यूज वेबसाईट्स को लेकर बूढ़ी बुआओं की तरह छाती पीटते नजर आ रहे हैं। अब तक कईयों को सफेद साड़ी पहना चुकी इन बूढ़ी बुआओं का हाजमा इसलिये बिगड़ गया क्योंकि ये लोग स्वीकार ही नहीं कर सकते कि तमाम पत्रकार ईमानदारी से वेबसाईट चलाकर काम करके खुद प्रगति कर सकते हैं और अपना घर चला सकते हैं। यहां सवाल न तो पत्रकारिता की बूढ़ी बुआयें हैं और न इनके सिरमौर बने कांग्रेस विधायक बाला बच्चन।

यहां सवाल यह है कि क्या बाला बच्चन में इतनी ताकत है कि वो दैनिक भास्कर, पत्रिका, नई दुनिया, दैनिक जागरण, स्वदेश, देशबंधु, या वेंटीलेटर पर पड़े मरीजों की तरह निकलने वाले कई छोटे अखबार मैगजीन को मिलने वाले विज्ञापनों के बारे में सवाल पूछ सकते हैं। बाला बच्चन की नासमझी तो इस बात से ही जाहिर हो गई कि उन्हें पता ही नहीं कि वेब मीडिया होता क्या है? उन्होंने अपने सवाल में वेबसाईट, वेबपोर्टल दोनों शब्दों का जिक्र किया है।

बाला बच्चन न तो नये जमाने से सरोकार रखते हैं और न ही नये जमाने के मीडिया से। अपनी विधायकी में रंगे हुये तमाम सारे बाला बच्चनों से निवेदन है कि वो विधानसभा में सवाल लगायें और पूछें कि दैनिक भास्कर और उससे जुड़े अन्य संस्थानों को कितना विज्ञापन मिला। हम जानते हैं इतना करने की क्षमता नहीं है अगर उन्होंने ऐसी गलती की तो उनका हश्र भी वैसा ही हो जायेगा जैसा उन तमाम विधायकों का हुआ जो अब विधायक नहीं हैं। इस समय के राजनेताओं की क्षमता सिर्फ छोटों पर आक्रमण और बड़ों के तलवे सहलाने से ज्यादा नहीं है।

बाला बच्चन से निवेदन है कि अगर वो पत्रकारिता का भला चाहते हैं तो सवाल लगायें और पूछें कि मध्यप्रदेश में ऐसे कितने पत्रकार हैं जिनके उपर गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। ऐसे कितने पत्रकार हैं जिनके अदालतों से वारंट और स्थायी वारंट जारी हैं और ये रसूख के दम पर अपना साम्राज्य फैलाये हुये हैं।

बाला बच्चन से निवेदन है कि वो ये सवाल भी सरकार से पूछें कि ऐसे कितने लोग हैं जो पत्रकारिता की आढ़ में गलत काम कर रहे हैं साथ ही सरकार से अधिमान्यता भी लिये हुये हैं। अधिमान्यता के सामान्य नियम हैं कि सरकार किसी भी अपराधी को पत्रकार होने का सरकारी तमगा नहीं देगी। वे यह भी पूछें आमतौर पर आवेदन लगाने के कितने समय बाद पत्रकारों को अधिमान्यता आसानी से मिल जाती है नियमों के तहत। लेकिन ऐसा करने के लिये जिस साहस की जरूरत है वो बाला बच्चन में नजर नहीं आता है।

बाला बच्चन पत्रकारों के हित में सवाल लगाकर यह भी पूछें कि ऐसे कितने न्यूज चैनल हैं जो सैटेलाईट पर तो कम और व्हाट्सएप पर ज्यादा नजर आते हैं उनको कितने—कितने विज्ञापन और क्यों चलाये जाते हैं। बाला बच्चन से एक निवेदन और है कि आम श्रमजीवी मेहनतकश खबरों से सरोकार रखने वाले पत्रकारों के हित में वे यह भी पूछें कि ऐसे कितने अखबार हैं जो मजीठिया आयोग की सिफारिशों को लागू किये हुये हैं।

बाला बच्चन सरकार से यह भी पूछें कि क्या आम पत्रकार को वो सभी सुविधायें मिल रही हैं जिसके वे हकदार हैं? नये जमाने के नये वेबमीडिया को लेकर बाला बच्चन ने अपने सवाल के जरिये जो काठ की हांडी चढ़ाई थी वो तो अब जल चुकी है लेकिन सवाल बाला बच्चन की नियत का है।

एक आम पत्रकार के हक में वो ये सवाल भी विधानसभा में पूछें और उन पत्रकारों के खिलाफ कार्यवाही भी करवायें जो दशकों से सरकारी मकानों में कब्जा जमाये बैठे हैं? सरकार से नाममात्र की राशि पर खैरात में जमीन लिये बैठे हैं और उसके बाद सरकारी मकानों का करोड़ों रूपये का किराया भी दबाये बैठे हैं। बाला बच्चन यह भी पूछें कि ऐसे कितने पत्रकार हैं जिन्होंने सरकारी मकान खाली कर दिये जमीनें मिलने के बाद। वे यह भी पूछें जमीन आवंटन के लिये बनाई गई सोसायटियों में पिता अध्यक्ष तो बेटे को भी जमीन मिल गई? मीडिया में बैठे इन बड़े कहे जाने वाले पत्रकारों के बारे में अगर बाला बच्चन खुलासा कर पायेंगे तो बधाई के पात्र होंगे।

लेकिन इतना सब अगर बाला बच्चन पूछ लेंगे तो ये तय है कि वेबसाईटों पर सवाल उठाने वाली मीडिया की बूढ़ी बुआयें बाला बच्चन को अभिमन्यू की तरह चरक्रव्यूह में घेर देंगे। बाला बच्चन पुराने कांग्रेसी नेता हैं उनको उनकी पार्टी के सर्वश्रेष्ठ नेता मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का शासन याद होगा।

विज्ञापन बांटने दिग्विजय सिंह भी किसी से पीछे नहीं थे तब बाला बच्चन भी उस सरकार का हिस्सा हुआ करते थे वो जमाना वेब मीडिया का नहीं था लेकिन तब दिग्विजय सिंह ने बिना रजिस्ट्रेशन वाली तमाम समाचार और आलेख सेवाओं को कैसे उपकृत किया था इसका जवाब बाला बच्चन विधानसभा में 1993 से लेकर अब तक हिसाब मांगें तो दूध का दूध और पानी का पानी करनें में ज्यादा समस्या नहीं होगी।

बाला बच्चन को तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के दौर के पर्चे भी याद होंगे। दिग्विजय सिंह बहुत स्प्ष्ट कहा करते थे पत्रकार मेरे पास चार कामों से आते हैं पहला मकान मांगने दूसरा विज्ञापन मांगने तीसरा पत्नियों की नौकरी लग जायेगा और चौथा तबादले कराने।

अब बाला बच्चन थोड़ा सा साहस जुटायें और सवाल लगाकर पता करें कि वो कौन पत्रकार थे जो कांग्रेस के शासन में पत्नियों की नौकरी तबादले विज्ञापन और मकान लेने में सफल रहे? पत्रकारिता की आढ़ में तमाम गोरखधंधे करने वाले इन लोगों के खुलासे के लिये जरूरी है कि ईश्वर बाला बच्चन को इतना सामर्थ्य दे कि वो इन सारी बातों पर मनन कर सवाल उठा सकें।

ये बातें इसलिये भी लाजिमी हैं कि मध्यप्रदेश में पत्रकारों का एक गिरोह नेताओं से पैसे लेता है सरकारी मकानों पर कब्जा करता है सरकार से सस्ती दरों पर जमीनें लेता है अपनी पत्नियों की सरकारी नौकरियां लगवाता है वक्त—बेवक्त तबादले कराता है और उसके बाद उसकी कोशिश होती है कि कोई आम पत्रकार कभी फलक को देखने की कोशिश भी न कर पाये।

मीडिया में एक वर्ग ऐसा है जो हर चीज को अपनी कमांड में रखना चाहता है। इन्हीं में ये बूढ़ी बुआयें शामिल हैं जो पत्रकारिता के नाम पर दलाली करती हैं। इनकी नैतिकता कहां चली जाती है जब इन पर लिखे सवाल पूछे जाते हैं और खुद के हितों की बात आती है ?

एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है पत्रकारों में जो महिला पत्रकारों को आगे बढ़ता नहीं देख सकता। इन्हें महिलायें अपने अधीन काम करते और दूसरों द्वारा तनख्वाह खाने का रोना रोते हुये ही अच्छी लगती हैं तब कोई किसी महिला के हक में खड़ा नहीं होता। तब नैतिकता कहां जाती है। क्यों ये सवाल पहली बार विधानसभा पहुंची महिला पत्रकार से पूछ लिया जाता है अरे आप यहां? क्यों ये सवाल उससे पूछा जाता है कि आपने विज्ञापन पाने के लिये क्या किया? इस क्या किया का आशय क्या था यह सवाल पूछने के अंदाज पर निर्भर करता है। क्या महिलाओं में काबिलियत नहीं कि वो अपने दम पर काम कर सकें?

बात वेबसाईट की है तो बाला बच्चन जी ये जरूर पूछें कि सभी वेबसाइट्स को विज्ञापन देने में समानता क्यों नहीं बरती जाती ?

और आखिर में एक सीधा सवाल उन पत्रकारों से जो खुद को विशुद्ध सही पत्रकार मानते हैं वे ही अपने हक के लिये आवाज क्यों नहीं उठाते क्यों चुप रहते हैं? और जो आवाज उठाता है उसे यह क्यों कहते हैं चलता है ये सब चुप रहो। कहीं न कहीं तो शुरूआत करिये बोलिये। निशाना वेब मीडिया ही क्यों? बाला बच्चन जी पत्रकार हित में आप यह सब पूछेंगे क्या सरकार से ?

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