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Sunday, February 15, 2026

मध्यप्रदेश : बिगडती छवि से दबाब में मोहन सरकार


बिगडती छवि से दबाब में मोहन सरकार 

@ राकेश अचल

मध्यप्रदेश में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. सरकार की छवि दिनोंदिन धूमिल हो रही है. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पार्टी संगठन में असंतोष के साथ ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के भी दबाव में है. सरकार ने अपने कामकाज के महिमामंडन के लिए शिवराज सिंह चौहान की सरकार में काम करने वाले अधिकारियों को फिर से महत्वपूर्ण पदों पर तैनात कर सबको चोंकाया है.

अमूमन हर प्रदेश में प्रशासनिक फेरबदल एक आम कवायद होती है लेकिन जिस तरह से बीते रोज मप्र में प्रशासनिक फेरबदल किया गया उससे जाहिर है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के पास सरकार की बिगडती छवि को सुधारने के लिए उन अधिकारियों को वापस लाने के अलावा कोई विकल्प बचा ही नही था जिन्हे दो साल पहले शिवराज सिंह चौहान का खास मानकर चलता कर दिया गया था.

डबरा में मप्र के पूर्व गृहमंत्री द्वारा तंत्र -मंत्र  से भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव आतंकित हैं. दूसरी तरफ मालवा में कैलाश विजयवर्गीय, बुंदेलखंड में गोपाल भार्गव सरकार के खिलाफ न सिर्फ आक्रामक हैं बल्कि निजी रूप से मुख्यमंत्री को क्षति पहुंचा रहे हैं. मीडिया भी सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति मुखर दिखाई दे रहा है, लेकिन मप्र का मेकअप डिपार्टमेंट यानि जनसंपर्क विभाग लचर साबित हो रहा था ऐसे में बहुत सोच विचार क बाद प्रदेश सरकार ने शनिवार देर रात एक बड़ीप्रशासनिक सर्जरी करते हुए 11 भाप्रसे अधिकारियों का तबादला कर दिया.

आपको याद होगा कि पिछले महिने ही मुख्यसचिव अनुराग जैन ने एक वीडियो कांफ्रेंसिंग में मैदानी अधिकारियों को प्रदेश में बढते भ्रष्टाचार के लिए आडे हाथों लिया था, उसी समय से ये संकेत मिल रहे थे कि प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी शुरू हो गई है. जैन का वीडियो वायरल होने और खबर लीक होने से भी सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को भारी क्षति हुई थी.

प्रशासनिक सर्जरी में सबसे महत्वपूर्ण मनीष सिंह की नयी पदस्थापना है. वे मप्र के छवि निर्माण का काम करने वाले जनसंपर्क विभाग का मुखिया बनाया गया है.एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अशोक बरनवाल को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. बरनवाल ने संदीप यादव की जगह ली है, जिन्हें फॉरेस्ट का प्रिंसिपल सेक्रेटरी बनाया गया है. यादव को एन आर आई  विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी का एडिशनल चार्ज भी दिया गया है. मप्र में पत्रकारों की आखरी पंचायत कराने वाले मनीष सिंह को एक बार फिर पब्लिक रिलेशन्स डिपार्टमेंट का कमिश्नर बनाया गया है और वे ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी का एडिशनल चार्ज भी संभालते रहेंगे.

पब्लिक रिलेशन्स कमिश्नर दीपक सक्सेना, जो चार महीने से इस पोस्ट पर थे. उन्होने इस संक्षिप्त कार्यकाल में ही विभाग का भट्टा बैठा दिया था. इस वजह से सरकार के साथ ही मुख्यमंत्री की छवि को भी गहरा धक्का लगा था. दीपक सक्सेना को हटाना मुख्यमंत्री की मजबूरी बन गई थी.सक्सेना अब ग्वालियर में एक्साइज कमिश्नर बनाये गया है. उन्होंने अभिजीत अग्रवाल की जगह ली है. जिन्हें स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया है.

गौरतलब है कि अभिजीत अग्रवाल का तबाला नई आबकारी लागू होने से पहले हुआ है. इसका सीधा सा मतलब है कि सरकार को अभिजीत की क्षमताओं पर भरोसा नहीं था. वैसे भी अग्रवाल मुख्यमंत्री का दिल नहीं जीत पाए थे.वे छग के एक भाजपा नेता के दामाद हैं.

अजय गुप्ता को किसान कल्याण और कृषि विकास के डायरेक्टर पद से ट्रांसफर करके ईस्ट रीजन पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी, जबलपुर का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया है.एक और आई एएस उमाशंकर भार्गव आठ महीने बाद राजभवन से किसान कल्याण और कृषि विकास के डायरेक्टर का पद संभालने के लिए लौटे हैं. भिंड जिला पंचायत के सीईओ सुनील दुबे को गवर्नर का डिप्टी सेक्रेटरी बनाया गया है. जबकि हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट की डिप्टी सेक्रेटरी संघमित्रा गौतम को अलीराजपुर जिला पंचायत का सीईओ बनाया गया है.

इस प्रशासनिक सर्जरी पर  मध्य प्रदेश कांग्रेस ने कहा है कि एक्साइज डिपार्टमेंट में भ्रष्ट लोगों को बचाया जा रहा है. अभिजीत अग्रवाल ने एक्साइज डिपार्टमेंट में भ्रष्ट लोगों को पनाह दी. इंदौर में 75 करोड़ रुपये के नकली चालान, जबलपुर में जहरीली शराब से 15 से ज़्यादा मौतें. लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई!"

इस प्रशानिक सर्जरी को लेकर जितने मुंह हैं उतनी बातें है. अब इन सब पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी मनीष सिंह पर है. वे साम, दाम, दंड, भेद का इस्तेमाल करने में दक्ष माने जाते हैं. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव उन्हे शिवराज सिंह चौहान की तरह कितनी छूट देंगे ये अभी पता नहीं है.


IAS अवि प्रसाद ने 10 वर्षों में रचाई 3 शादियां : दो पत्नियां जिले में कलेक्टर, तीन शादियां चर्चा का विषय


IAS अवि प्रसाद ने 10 वर्षों में रचाई 3 शादियां : दो पत्नियां जिले में कलेक्टर, तीन शादियां चर्चा का विषय 


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एमपी के एक IAS अफसर ने 10 वर्षों में रचाई 3 शादियां, तीनों पत्नियां भी मप्र में है IAS, दो अलग-अलग जिले में कलेक्टर, 10 वर्षों में हुई तीन शादियां चर्चा का विषय बनी। 

मध्य प्रदेश के एक आईएएस अफसर एक नहीं बल्कि 3 शादियां रचाई हैं। हालांकि आईएएस अफसर ने तलाक के बाद दूसरी और फिर तीसरी शादी रचाई है। लेकिन इसमें हैरत और खास बात यह है कि उनकी तीनों पत्नियां भी मध्य प्रदेश में ही IAS हैं जिसमें से दो अलग-अलग जिले में कलेक्टर है। 

मध्य प्रदेश कैडर के 2014 बैच के आईएएस अधिकारी अवि प्रसाद ने 11 फरवरी  को कूनो (Kuno) के एक रिसॉर्ट में अंकिता धाकरे के साथ विवाह किया. अंकिता 2017 बैच की आईएएस अधिकारी है और वर्तमान में मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर तैनात है.  यह विवाह समारोह बेहद निजी रखा गया था.

यहां पर सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है उसमें यह बताया गया कि कटनी जिले के कलेक्टर रह चुके अवि प्रसाद जिन्होंने 10 वर्षों के भीतर तीन शादियां रचाई है। तीसरी शादी अभी 2 दिन पहले शिवपुरी में रचाई गई। 

आईएएस अवि प्रसाद पहली शादी 2014 बैच की आईएएस रिजु बाफना से हुई थी, जो वर्तमान में शाजापुर की कलेक्टर है. हालांकि, यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चला और दोनों का तलाक हो गया.

इसके बाद आईएएस अवि प्रसाद की मुलाकात 2016 बैच की महिला आईएएस मिशा सिंह से हो गई, इसके बाद दोनों ने विवाह कर लिया। इस बार भी उन दोनों के बीच विवाह का बंधन ज्यादा दिन नहीं टिक सका और कुछ ही सालों में तलाक हो गया।आईएएस मिशा सिंह वर्तमान में रतलाम जिले की कलेक्टर है इसके पूर्व में वह उमरिया और जबलपुर जिले में अपर कलेक्टर रही। मिशा सिंह के साथ उनका रिश्ता लगभग चार साल तक रहा, जिसके बाद वे अलग हो गए.

इसके बाद जो जानकारी फिलहाल अभी मिल रही है वह यह कि आईएएस अवि प्रसाद ने 11 फरवरी, 2026 को कूनो नेशनल पार्क में 2017 बैच की आईएएस अधिकारी है और वर्तमान में मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर तैनात है.
IAS अंकिता धाकरे से विवाह किया। इसके पूर्व वह उज्जैन में जिला पंचायत की सीईओ रही है। इस तरह से आईएएस अवि प्रसाद ने बीते 10 वर्षों में तीन शादियां रचाई है जो प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बनी हुई है।

Saturday, February 14, 2026

भारत पेट्रोलियम के सीएसआर मद से बने शहपुरा में कन्या विद्यालय के नये भवन का लोकार्पण


भारत पेट्रोलियम के सीएसआर मद से बने शहपुरा में कन्या विद्यालय के नये भवन का लोकार्पण 


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जबलपुर. भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के सीएसआर मद से शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शहपुरा में नवनिर्मित भवन एवं शौचालय का लोकार्पण आज आयोजित कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीक एवं विधायक बरगी नीरज सिंह ठाकुर ने किया। इस भवन के निर्माण हेतु राशि सांसद सुमित्रा वाल्मीकि के प्रयासों से भारत पेट्रोलियम द्वारा उपलब्ध कराई गई थी।

राज्यसभा सांसद श्रीमती वाल्मीकि ने कार्यक्रम को संबोधित करते बताया कि वे भी इसी स्कूल से पढ़ी हैं और आज इस मुकाम तक पहुँची हैं। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में बच्चों को पढाई की ओर अधिक ध्यान देने तथा लगन एवं मेहनत से और अधिक ऊंचाइयों पर जाने की बात कही।कार्यक्रम में भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के क्षेत्रीय प्रबंधक शुभांग दत्त पांडेय, जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इंदौर में सनसनी : 25 वर्षीय लापता MBA छात्रा का नग्न शव क्लासमेट के कमरे से बरामद, शहर दहला


इंदौर में सनसनी :  25 वर्षीय लापता MBA छात्रा का नग्न शव क्लासमेट के कमरे से बरामद, शहर दहला


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इंदौर। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में शुक्रवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। द्वारकापुरी थाना क्षेत्र की अंकल गली में 25 वर्षीय लापता MBA छात्रा का शव उसके ही क्लासमेट के किराए के कमरे से नग्न अवस्था में बरामद होने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

10 फरवरी से थी लापता, अब मिली लाश

परिजनों के मुताबिक छात्रा 10 फरवरी को आधार कार्ड ठीक कराने की बात कहकर पिता के साथ घर से निकली थी। पिता ने उसे कलेक्टोरेट के पास छोड़ा था, जिसके बाद वह रहस्यमय तरीके से लापता हो गई। परिजन लगातार तलाश कर रहे थे, लेकिन शुक्रवार को जो खबर आई उसने सबको स्तब्ध कर दिया।

क्लासमेट के कमरे से मिला शव

पुलिस जांच में सामने आया कि जिस कमरे से शव बरामद हुआ वह उसके क्लासमेट पीयूष धनोतिया का किराए का कमरा है। दोनों सांवेर रोड स्थित एक निजी संस्थान से MBA की पढ़ाई कर रहे थे। युवक मूल रूप से मंदसौर का निवासी बताया जा रहा है।

नग्न अवस्था में शव, हत्या की आशंका

युवती का शव नग्न अवस्था में मिलने से मामला बेहद संदिग्ध हो गया है। प्रथम दृष्टया हत्या की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए। कमरे को सील कर दिया गया है और आरोपी की तलाश तेज कर दी गई है।

इलाके में तनाव, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है। परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद कई अहम खुलासे हो सकते हैं।इस सनसनीखेज वारदात ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह प्रेम प्रसंग का मामला है या सुनियोजित साजिश? पुलिस हर एंगल से जांच में जुटी है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आज नवपदस्थ आयुक्त (जनसम्पर्क) एवं प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश माध्यम श्री मनीष सिंह ने मुख्यमंत्री निवास पर सौजन्य भेंट की

 


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आज नवपदस्थ आयुक्त (जनसम्पर्क) एवं प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश माध्यम श्री मनीष सिंह ने मुख्यमंत्री निवास पर सौजन्य भेंट की





Friday, February 13, 2026

ईसाई महासंघ में समाजसेवी अतुल जोसफ को ईसाई महासंघ का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया, नियुक्ति से संगठन में हर्ष का माहौल


ईसाई महासंघ में समाजसेवी अतुल जोसफ को ईसाई महासंघ का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त  किया, नियुक्ति से संगठन में हर्ष का माहौल

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ईसाई महासंघ में अतुल जोसफ को ईसाई महासंघ का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त  किया, नियुक्ति से संगठन में हर्ष का माहौल

अतुल जोसफ की नियुक्ति से संगठन में हर्ष का माहौल

जबलपुर. ईसाई महासंघ के राष्ट्रीय महासचिव (प्रशासन) रंजन नायर एवं संगठन की कोर कमेटी की सर्वसम्मत सहमति से अतुल जोसफ को ईसाई महासंघ का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति की घोषणा के साथ ही संगठन एवं मसीह समाज में खुशी की लहर दौड़ गई है।

नवनियुक्त राष्ट्रीय सचिव अतुल जोसफ को संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों, धर्मगुरुओं एवं समाजसेवियों ने शुभकामनाएँ देते हुए संगठन को और अधिक सशक्त, सक्रिय एवं एकजुट बनाने की अपील की है।

इस अवसर पर ईसाई महासंघ के प्रभाकर तिर्की, हनी जॉन, राजेश सेल्वराज, फादर आनंद मुतुंगल, बिशप राजेश चौधरी, एडवोकेट मंजू पिल्लै, एडवोकेट अल्बर्ट एंथोनी, सैम्युएल जेम्स, विनय जी. डेविड सहित अनेक मसीह समाज के प्रबुद्धजनों ने बधाई संदेश प्रेषित किए।

सभी ने आशा व्यक्त की कि अतुल जोसफ के नेतृत्व में ईसाई महासंघ संगठनात्मक मजबूती, सामाजिक समरसता एवं अल्पसंख्यक हितों की रक्षा के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा।


आरटीआई एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले लोक सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कानूनी कार्यवाही


आरटीआई एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले लोक सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कानूनी कार्यवाही 

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RTI मे भी FIR दर्ज हो सकती है अगर सही कानूनी प्रकिया अपनाये तो।

* FIR / शिकायत – RTI उल्लंघन और धमकी -

प्रेषक / शिकायतकर्ता :

नाम : [आपका नाम]

पता : [आपका पूरा पता]

संपर्क : [मोबाइल / ईमेल]

प्रति,

थाना अधिकारी,

[पुलिस स्टेशन का नाम],

[शहर / जिला], [राज्य]

विषय : लोक सूचना अधिकारी / प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा RTI अधिनियम का उल्लंघन एवं धमकी के संबंध में शिकायत।

महोदय,

मैं, [आपका नाम], यह शिकायत/एफआईआर लोक सूचना अधिकारी / प्रथम अपीलीय अधिकारी के खिलाफ प्रस्तुत कर रहा हूँ। विवरण निम्नानुसार है :

1. सूचना न देने का उल्लंघन

दिनांक [DD/MM/YYYY] को RTI आवेदन संख्या [RTI नंबर] प्रस्तुत किया गया।

लोक सूचना अधिकारी ने समय पर या उचित जानकारी नहीं दी।

यह RTI Act धारा 7(2) का उल्लंघन है।

संबंधित BNS धारा 198 (Public servant disobeying law) के तहत एफआईआर दर्ज की जाए।

2. झूठी / भ्रामक जानकारी देने की स्थिति -

लोक सूचना अधिकारी ने जानबूझकर झूठी / अधूरी जानकारी प्रदान की।

इसके लिए BNS धाराएँ 199, 201, 318, 336, 340 लागू की जाएँ।

3. प्रथम अपीलीय अधिकारी का निर्णय न करना :

दिनांक [DD/MM/YYYY] को प्रथम अपीलीय अपील दायर की गई।

अधिकारी ने समय पर निर्णय नहीं दिया।

BNS धारा 198 के तहत एफआईआर दर्ज करवाई जाए।

4. गैरहाजिरी / सूचना देने से मना करना :

सुनवाई के दौरान या बाद में प्रथम अपीलीय अधिकारी ने सूचना उपलब्ध नहीं कराई।

इसके लिए BNS धारा 198 / 199 लागू हो।

5. निर्णय के बावजूद सूचना न देना :

निर्णय के बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

BNS धारा 198 / 318 के तहत कार्रवाई की जाए।

6. धमकी / उत्पीड़न :

लोक सूचना अधिकारी / प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा आवेदक को धमकाया गया।

संबंधित अपराध के लिए BNS Threat / Intimidation clauses के तहत एफआईआर दर्ज कराई जाए।

7. न्यायिक प्रमाण और हवाले -

* मुंबई हाई कोर्ट विवेक विष्णु पेंट कुलकर्णी बनाम महाराष्ट्र राज्य – RTI जवाब न देने पर FIR दर्ज करने के निर्देश।

* मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग :

सूचना न देने वाले अधिकारी पर ₹15,000 जुर्माना।

RTI में मांगी जानकारी न देना खेल अधिकारी आशीष पांडे को पड़ा महंगा, राज्‍य सूचना आयुक्‍त ने लगाया 10 हजार का जुर्माना

इसे भी पढ़ें :- सूचना के अधिकार की धज्जियां उड़ने वाले जबलपुर के खेल और लोक सूचना अधिकारी पर ₹10,000 का जुर्माना, म.प्र. राज्य सूचना आयोग द्वारा पारित आदेश की प्रति

* उत्तर प्रदेश का केस : तहसीलदार पर ₹25,000 जुर्माना।

* दिल्ली हाई कोर्ट :

RTI दंडात्मक कार्रवाई केवल सूचना आयोग द्वारा।

सुप्रीमकोर्ट : सूचना आयोगों में रिक्त पद भरना अनिवार्य।

• संलग्नक -

RTI आवेदन की प्रतिलिपि,

प्रथम अपीलीय अपील की प्रतिलिपि,

प्राप्त / नहीं मिली जानकारी का प्रमाण,

धमकी / नोटिस का कोई भी साक्ष्य।

दिनांक : [DD/MM/YYYY]

स्थान : [शहर / जिला]

शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर : _

और नाम : [आपका नाम]।

साभार : आत्मदीप आरटीआई इन्फो

Thursday, February 12, 2026

जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशानुसार जिले में अवैध रेत खनन और परिवहन पर नियंत्रण के लिए अभियान , खनिज माफिया कलेक्टर राघवेंद्र सिंह को दिखा रहे ठेंगा


जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशानुसार जिले में अवैध रेत खनन और परिवहन पर नियंत्रण के लिए अभियान , खनिज माफिया कलेक्टर राघवेंद्र सिंह को दिखा रहे ठेंगा

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जबलपुर जिले में अवैध रेत खनन और परिवहन पर नियंत्रण के लिए अभियान

जबलपुर. कलेक्टर श्री राघवेंद्र सिंह के निर्देशानुसार संपूर्ण जिला अंतर्गत खनिज रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर नियंत्रण की दृष्टि से एक साथ नर्मदा नदी एवं हिरन नदी के घाटों पर एसडीएम के नेतृत्व में राजस्व, पुलिस एवं खनिज अमले की टीम द्वारा छापामार कार्यवाही कराई गई। जिले में यह अभियान विगत 03 दिवस तक लगातार चलाया गया।
कार्यवाही के दौरान तहसील सिहोरा अंतर्गत ग्राम देवरी, खिरहेनी, घोराकोनी एवं मढ़ा क्षेत्र में नदी से रेत की अवैध निकासी न हो इसके लिए घाटों को जाने वाले रास्तों को अवरुद्ध किया गया एवं नदी के किनारे पड़ी रेत के ढेरों को नदी में समावेश किया गया।
इसी प्रकार तहसील कुंडम क्षेत्र में ग्राम कल्याणपुर एवं रानीपुर घाटों में जांच कर रास्ते को अवरुद्ध किया गया। तहसील शहपुरा क्षेत्र में ग्राम भड़पुरा, शीतलपुर क्षेत्र में जांच कर लगभग 4000 घनमीटर रेत अनाधिकृत रूप से अज्ञात व्यक्तियों द्वारा विभिन्न स्थलों पर एकत्र किया गया, उसे नदी में जेसीबी मशीनों द्वारा गिराया गया।
राजस्व, पुलिस एवं खनिज अमले द्वारा ग्राम सगड़ा झपनी में छापामार कार्यवाही कर 150 घनमीटर रेत एकत्रित किया गया को नर्मदा नदी में गिराया गया। तहसील पाटन क्षेत्र अंतर्गत हिरन नदी के घाट महुआखेड़ा, जूरीकला, पौड़ीकला, गाड़ाघाट, मडवा, कैमारी घाट का औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान गाड़ाघाट से लगे कोनीकला घाट में लगभग 200 घनमीटर रेत एकत्रित पाई गई, जिसे नदी के जल प्रवाह में डालकर विनिष्ट किया गया। इन घाटों पर बने रास्ते एवं रेम्प को भी नष्ट किया गया। तहसील सिहोरा क्षेत्र में जांच के दौरान 03 ट्रैक्टर ट्रॉली रेत अवैध परिवहन करते जप्त किया गया, जिनके विरुद्ध खनिज अधिनियम के तहत कार्यवाही करने हेतु प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में खनिज विभाग द्वारा प्रस्तुत किए गए।

थाना रांझी अंतर्गत हुई अंधी हत्या का खुलासा, एक्सीडेन्ट की घटना पर हुये विवाद पर क्रेटा कार चालक की मारपीट कर हत्या करने वाले 4 आरोपी गिरफ्तार


जबलपुर थाना रांझी अंतर्गत हुई अंधी हत्या का खुलासा, एक्सीडेन्ट की घटना पर हुये विवाद पर क्रेटा कार चालक की मारपीट कर हत्या करने वाले  4 आरोपी गिरफ्तार

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जबलपुर. थाना रांझी अंतर्गत हुई अंधी हत्या का खुलासा एक्सीडेन्ट की घटना पर हुये विवाद पर क्रेटा कार चालक की मारपीट कर हत्या करने वाले  4 आरोपी गिरफ्तार,  घटना में प्रयुक्त मोटर सायकिल एवं 4 मोबाईल जप्त

नाम पता गिरफ्तार आरोपी  

  • 1- शिवम बाजपेई पिता स्व.मनीष बाजपेई उम्र 29 वर्ष निवासी महात्मा गाँधी वार्ड निवाड़गंज पाण्डेय चौक कोतवाली  
  • 2. सुधीर चौधरी पिता ओमप्रकाश चौधरी उम्र 31 वर्ष निवासी सुशीला परिसर अमखेरा थाना गोहलपुर  
  • 3. सुमित चौधरी पिता बसंत चौधरी उम्र 26 वर्ष निवासी श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड कांचघर थाना घमापुर  
  • 4. अंकित चौरसिया पिता आनंद चौरसिया उम्र 31 वर्ष निवासी नन्हे जैन मंदिर के पास थाना हनुमानताल  

जबलपुर. थाना रांझी में दिनांक 8-2-26 की रात मारपीट में घायल एक व्यक्ति को सिविल अस्पताल रांझी में लाये जाने की सूचना पर पहुॅची पुलिस को ज्ञात हुआ कि एकांश साहू पिता सुरेश साहू उम्र 34 वर्ष निवासी सब्जी मंडी अधारताल को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा चाकू से हमलाकर सीना पेट में चोट पहुॅचा दी थी.

जिसे डाक्टर ने चैक कर मृत घोषित कर दिया, मौके पर उपस्थित समीर यादव उम्र 38 वर्ष निवासी यादव मोहल्ला गोकलपुर ने बताया कि दिनांक 8-2-26 की रात लगभग 11-30 बजे उसे मोहित ने सूचना दी कि लक्ष्मी मंदिर मेन रोड गोकलपुर में एकांश साहू की गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है तो वह गोकलपुर लक्ष्मी मंदिर के पास आया उसी समय विजय सिंह घोषी भी आ गया वहां पर एकांश साहू मिला जहां पर हम तीनों तथा और भी आसपास के लोग आ गये थे उसने देखा कि एक मोटर सायकल वाले ने एकांश की गाड़ी पर ठोकर मार दी थी.

मोटर सायकल के चालक के अन्य साथी ने मिलकर एकांश साहू से विवाद किये हम लोगों ने दोनों पक्षों को समझाया उसके बाद तीनों लोग बोले कि हम रांझी अस्पताल जाकर पट्टी करा लेगें और लक्ष्मी मंदिर के पास चले गये, थोड़ी देर बाद उन लोगों ने अज्ञात लड़कों को बुला लिया और एकांश साहू के साथ एक्सीडेंट की बात को लेकर लड़ाई झगड़ा करते हुये एकांश साहू के सीना एवं पेट में चाकू से हमलाकर चोट पहुॅचा दिये तथा सभी लक्ष्मी मंदिर मेन रोड़ रांझी से भाग गये, 

एक्सीडेंट वाली काले रंग की स्पेलेंडर मोटर सायकल क्रमांक एमपी 20 के एम 0511 को वही पर छोड़ दिये हैं, वह एकांश साहू को क्रेटा कार में अपने साथी विजय सिंह घोषी के साथ सिविल अस्पताल रंाझी लेकर आये जहां डाक्टर ने चैक कर एकंाश साहू को मृत घोषित कर दिया, अज्ञात लड़कों द्वारा चाकू से हमलाकर एकांश साहू के सीना पेट में चोट पहुॅचाने से एकांश साहू की मृत्यु हो गयी है। रिपोर्ट पर अपराध क्रमांक 103/26 धारा 103, 3(5) बीएनएस का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। 

पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री सम्पत उपाध्याय (भा.पु.से.) द्वारा घटित हुई घटना को गम्भीरता से लेते हुये आरोपियों की पतसाजी कर शीघ्र गिरफ्तारी हेतु आदेशित किये जाने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर श्री आयुष गुप्ता (भा.पु.से.), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अपराध श्री जितेन्द्र सिंह एवं नगर पुलिस अधीक्षक रांझी श्री सतीष कुमार साहू के मार्गनिर्देशन में थाना प्रभारी रांझी श्री उमेश गोल्हानी के नेतृत्व में क्राईम ब्रांच एवं थाना रांझी की टीम गठित कर लगायी गयी। 

गठित टीम द्वारा घटना स्थल के आसपास के सीसीटीव्ही फुटेज खंगाले गये, काले रंग की स्पेलेंडर मोटर साईकिल क्रमांक एमपी 20 केएम 0511 के रजिस्ट्रर्ड वाहन स्वामी संजय सिंह ठाकुर से पूछताछ की गयी जिसने वाहन को शिवम बाजपेयी को बेचना बताया ।

पतासाजी करते हुये विश्वसनीय मुखबिर की सूचना पर विजय नगर जीरो डिग्री में दबिश देते हुये शिवम बाजपेयी को  अभिरक्षा मे लेकर पूछताछ की गई जिसने अपने साथी सुधीर चौधरी, अकिंत चौरसिया , कमलेश महोबिया, सुमित चौधरी , जय बेन , छोटू ठाकुर व एक अन्य साथी के साथ मिलकर घटना करना स्वीकार किया ।  

आरोपी सुधीर चौधरी को अमखेरा, अंकित चौरसिया को घमापुर व सुमित चौधरी को विजय नगर से अभिरक्षा मे लेकर थाना लाकर पूछताछ की गई।

पूछताछ पर पाया गया कि दिनांक 08.02.2025 को रात्रि 11.00 बजे गोकलपुर मे काले रंग की क्रेटा कार से एक्सीडेटं होने पर कार चालक (मृतक एकांश साहू) से शिवम बाजपेई का विवाद होने पर फोन कर अपने साथी सुधीर चौधरी, अकिंत चौरसिया , कमलेश महोबिया, सुमित चौधरी , जय बेन , छोटू ठाकुर व एक अन्य साथी को गोकलपुर बुलाया तथा सभी के साथ मिलकर कार चालक के साथ मारपीट की, कमलेश महोबिया व छोटू ठाकुर ने कार चालक पर चाकूओ से हमला कर चोटें पहुंचा दी तथा सभी  मोटर  साईकिलो पर बैठकर भाग गये। 

आरोपियो की निशादेही पर घटना मे प्रय़ुक्त मोटर सायकिल, बाचतीच मे उपयोग किये गये 4 मोबाईल   जप्त करते हुये चारों आरोपियों को प्रकरण मे विधिवत गिरफ्तार किया गया। प्रकरण के अन्य आरोपी कमलेश महोबिया, जय बेन, छोटू ठाकुर व एक अन्य साथी फरार जिनकी तलाश जारी है ।

उल्लेखनीय भूमिका- अंधी हत्या के खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार करने में थाना प्रभारी रांझी श्री उमेश कुमार गोल्हानी, उप निरीक्षक मयंक यादव, सहायक उप निरीक्षक मनीष जाटव, सुभाष बागरी,  प्रधान आरक्षक पुरूषोत्तम, चन्द्रभान, आरक्षक मनीष, अभिषेक मिश्रा व क्राईम ब्रांच के सहायक उप निरीक्षक संतोष पाण्डेय, कैलाश मिश्रा,  प्रधान आरक्षक आनंद तिवारी, वीरेन्द्र चन्देल, आऱक्षक आशुतोष बघेल, सतेन्द्र बिसेन की सराहनीय भूमिका रही।

Wednesday, February 11, 2026

विभागीय योजनाओं का नियमित मॉनिटरिंग करते हुए प्रभावी कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें - संभागायुक्‍त श्री धनंजय सिंह


विभागीय योजनाओं का नियमित मॉनिटरिंग करते हुए प्रभावी कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें - संभागायुक्‍त श्री धनंजय सिंह

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जबलपुर. संभागायुक्त श्री धनंजय सिंह ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संभाग के सभी कलेक्टरों से शासन के कार्यक्रमों एवं प्राथमिकता अभियानों के संबंध में चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस बिंदुओं के पालन प्रतिवेदन पर विस्तार से चर्चा कर प्रगति का जायजा लिया।

इस दौरान उन्होंने राजस्व एवं सामान्य प्रशासन से जुड़े मामलों, जिसमें राजस्व न्यायालयों के लंबित प्रकरण, सीएम हेल्पलाईन, सीपीग्राम, सीएम तथा सीएस मॉनिट, लोक सेवा गारंटी, जीएडी, लोकायुक्त कार्यालय से प्राप्त शिकायतों, लंबित विभागीय जांचों, अनुकंपा नियुक्ति और पेंशन प्रकरणों पर समीक्षा कर इन्हें समय सीमा में निराकरण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मनरेगा योजना की समीक्षा के दौरान निर्धारित लेबर बजट एवं विगत वर्षों के अपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत स्वीकृत एवं पूर्ण आवासों की जिले वार समीक्षा की गई।

वीडियो कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कृषि एवं कृषि संबद्ध विभागों की कृषि वर्ष 2026 की कार्ययोजना की जिलेवार समीक्षा की गई। जिसमें मुख्य रूप से पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना, डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, हिरण्यगर्भा अभियान एवं क्षीरधारा ग्राम योजना के अलावा मत्स्य पालन में आधुनिक तकनीक का उपयोग करने की समीक्षा की गई। साथ ही धान उपार्जन उपरांत उपार्जित धान के भंडारण एवं परिवहन के साथ रबी सीजन के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज एवं खाद की उपलब्धता की भी समीक्षा की।

नगरीय प्रशासन विभाग अंतर्गत नगरीय क्षेत्र में एसबीएम 2.0 और अमृत 2.0 प्रोजेक्ट अंतर्गत लंबित भूमि आवंटन प्रकरणों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिये गये। उन्होंने उद्योग विभाग की समीक्षा के दौरान डीएलसीसी बैठक अंतर्गत चिन्हित विभिन्न योजनाओं की लक्ष्यपूर्ति समय सीमा में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

संभागायुक्त श्री सिंह ने सभी विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की विभागीय योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए प्रभावी कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। समीक्षा के दौरान जिले के कलेक्टर्स एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी वर्चुअली रूप से सम्मलित रहे।

Monday, February 9, 2026

यदि पुलिस अधिकारी FIR दर्ज करने से मना "करें तो क्या करें" अपनाएं ये कानूनी कदम...

 


यदि पुलिस अधिकारी FIR दर्ज करने से मना "करें तो क्या करें" अपनाएं ये कानूनी कदम...

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यदि पुलिस अधिकारी FIR दर्ज करने से मना करे (BNSS 2023 के तहत विस्तृत विश्लेषण)

भारत में अपराधों की रिपोर्टिंग और न्याय पाने का पहला कदम एफआईआर (FIR – First Information Report) दर्ज करना है। किसी भी नागरिक के लिए यह महत्वपूर्ण अधिकार है, विशेषकर जब मामला संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) का हो। संज्ञेय अपराध ऐसे अपराध होते हैं जिनमें पुलिस बिना कोर्ट की अनुमति के सीधे जांच शुरू कर सकती है। हालाँकि, कई बार पुलिस अधिकारी एफआईआर दर्ज करने से मना कर देते हैं। ऐसे में नए भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNSS 2023) ने स्पष्ट प्रक्रियाएँ और अधिकार दिए हैं ताकि नागरिक को न्याय मिल सके और पुलिस जवाबदेह रहे। नीचे इसका विस्तृत विवरण दिया गया है।


✅ 1. FIR दर्ज करने का कर्तव्य (Duty to Register FIR – Sec 173(1) BNSS)

BNSS 2023 के अनुसार, यदि कोई संज्ञेय अपराध घटित होता है तो पुलिस अधिकारी पर FIR दर्ज करना अनिवार्य है। यह पुलिस का प्राथमिक दायित्व है। यदि कोई नागरिक अपराध की जानकारी देता है, तो पुलिस जांच प्रारंभ करने के लिए FIR दर्ज करने से मना नहीं कर सकती।

महत्त्वपूर्ण बिंदु:

प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) केवल तब की जा सकती है जब अपराध की सज़ा 3 से 7 वर्ष के बीच हो और उसके लिए DSP (Deputy Superintendent of Police) की अनुमति आवश्यक हो।

सामान्य संज्ञेय अपराधों में किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है, और सीधे FIR दर्ज की जानी चाहिए।

FIR दर्ज करने से इनकार करना कानून का उल्लंघन है।

✅ 2. शून्य FIR (Zero FIR – Sec 173(2) BNSS)

कई बार पीड़ित को यह स्पष्ट नहीं होता कि अपराध किस थाने के क्षेत्र में हुआ है। ऐसी स्थिति में BNSS 2023 ने ‘Zero FIR’ का प्रावधान किया है। इसका अर्थ है कि पीड़ित किसी भी पुलिस स्टेशन में जाकर अपराध की रिपोर्ट दर्ज कर सकता है।

Zero FIR की विशेषताएँ:

थाना क्षेत्र की परवाह किए बिना FIR दर्ज की जाएगी।

बाद में इसे संबंधित क्षेत्र के थाना में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

शिकायतकर्ता को FIR की मुफ्त प्रति उपलब्ध कराई जाएगी।


यह प्रावधान विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, वंचित वर्गों, और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वालों के लिए अत्यंत उपयोगी है।


✅ 3. एसपी के पास शिकायत (Escalation to Superintendent of Police – Sec 173(4) BNSS)

यदि थाना प्रभारी (SHO) FIR दर्ज करने से मना करता है, तो नागरिक लिखित शिकायत एसपी (Superintendent of Police) को कर सकता है। एसपी को कानूनन अधिकार है कि:

FIR दर्ज करने का आदेश दे।

मामले की जांच का आदेश दे।

थाना प्रभारी की लापरवाही पर कार्यवाही करे।


यह प्रक्रिया नागरिक को न्याय पाने की अगली वैधानिक राह देती है।


✅ 4. मजिस्ट्रेट से राहत (Magistrate Intervention – Sec 175 BNSS जैसे प्रावधान)

यदि एसपी भी कार्यवाही नहीं करता है, तो नागरिक मजिस्ट्रेट के पास आवेदन कर सकता है। मजिस्ट्रेट शिकायत पर संज्ञान लेकर पुलिस को FIR दर्ज करने और जांच शुरू करने का आदेश दे सकता है। यद्यपि BNSS 2023 में स्पष्ट रूप से धारा 175 का उल्लेख नहीं मिलता, यह अधिकार पुराने CrPC की धारा 156(3) के समान है।


यह उपाय न्याय प्रणाली का तीसरा स्तर है, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।


✅ 5. उच्च न्यायालय में रिट याचिका (High Court Remedy – Article 226 of the Constitution)

यदि थाना और एसपी दोनों FIR दर्ज करने से मना करें, और मजिस्ट्रेट भी राहत न दे, तो नागरिक सीधे उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कर सकता है।


संभावित राहतें:

FIR दर्ज करने का निर्देश।

जांच की निगरानी का आदेश।

पीड़ित को मुआवजा प्रदान करने का निर्देश।

पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश।


उच्च न्यायालय नागरिकों के अधिकारों की अंतिम सुरक्षा प्रदान करता है।


✅ 6. FIR दर्ज न करने पर पुलिस अधिकारी पर दंड (Penalties for Police Refusal – Sec 199(c) BNSS)

BNSS 2023 में पुलिस अधिकारियों के लिए दंड का प्रावधान भी किया गया है। यदि कोई पुलिस अधिकारी जानबूझकर FIR दर्ज करने से इनकार करता है, तो:


उसे 6 महीने से 2 वर्ष तक की कैद की सजा हो सकती है।

साथ में आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।


यह प्रावधान पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित करता है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।


✅ 7. पुलिस अधिकारी के विरुद्ध अपराध (Offences Against Police – Sec 121 BNSS)


पुलिस के कार्य में बाधा डालने या उन्हें घायल करने वाले अपराधों के लिए भी BNSS ने कठोर दंड का प्रावधान किया है। यदि कोई व्यक्ति पुलिस को उनकी ड्यूटी निभाने से रोकने के लिए चोट पहुँचाता है, तो:


उसे 5 से 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है।

साथ में जुर्माना भी लगाया जाएगा।


यह प्रावधान पुलिस के सम्मान और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।


🔑 व्यावहारिक पहलू और सुझाव

FIR दर्ज न होने पर:

तुरंत उच्च अधिकारी से संपर्क करें, लिखित शिकायत दें, और शिकायत की रसीद या कॉपी लें।

Zero FIR का प्रयोग करें:

क्षेत्रीय अस्पष्टता की स्थिति में किसी भी थाना में जाकर शिकायत करें।

डिजिटल प्लेटफॉर्म:

कई राज्यों में ऑनलाइन FIR सुविधा भी उपलब्ध है। इसका उपयोग करें।

कानूनी सहायता लें:

वकील या विधिक सेवा प्राधिकरण से मदद लेकर उच्च न्यायालय या मजिस्ट्रेट से राहत लें।

FIR की कॉपी:

FIR की मुफ्त कॉपी अवश्य लें, जो भविष्य में सबूत के रूप में उपयोगी होगी।

✅ निष्कर्ष


BNSS 2023 ने नागरिकों को FIR दर्ज कराने का स्पष्ट और प्रभावी अधिकार दिया है। पुलिस का दायित्व है कि संज्ञेय अपराधों की रिपोर्ट तुरंत दर्ज करे। Zero FIR जैसे प्रावधान नागरिकों के लिए राहत का रास्ता खोलते हैं। SHO द्वारा मना करने पर एसपी, मजिस्ट्रेट और उच्च न्यायालय तक शिकायत का अधिकार है। साथ ही पुलिस अधिकारियों की लापरवाही पर दंड का प्रावधान न्याय प्रणाली को मजबूत बनाता है।


यह कानून न केवल अपराध की रिपोर्टिंग में मदद करता है बल्कि पुलिस की जवाबदेही, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और न्याय की उपलब्धता को सुनिश्चित करता है। नागरिकों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए और कानून द्वारा प्रदत्त सभी राहत उपायों का उपयोग करना चाहिए।


✅ 1. FIR क्या है?


FIR (First Information Report) अपराध की प्राथमिक जानकारी है जिसे पुलिस संज्ञेय अपराध की स्थिति में दर्ज करती है।


✅ 2. पुलिस पर FIR दर्ज करने का क्या दायित्व है?


पुलिस को संज्ञेय अपराध की शिकायत मिलते ही FIR दर्ज करनी होती है, बिना किसी अनुमति के।


✅ 3. Preliminary Enquiry कब की जा सकती है?


Preliminary enquiry केवल तब की जा सकती है जब अपराध की सजा 3 से 7 वर्षों के बीच हो और DSP की अनुमति ली जाए।


✅ 4. Zero FIR क्या है?


Zero FIR वह प्रक्रिया है जिसमें पीड़ित किसी भी थाने में जाकर FIR दर्ज करा सकता है, भले ही अपराध का क्षेत्र अस्पष्ट हो।


✅ 5. SHO FIR दर्ज न करे तो क्या करें?


SHO के मना करने पर शिकायत लिखित रूप में एसपी (Superintendent of Police) को दी जा सकती है।


✅ 6. यदि एसपी भी कार्यवाही न करे तो क्या उपाय है?


मजिस्ट्रेट के पास आवेदन कर FIR दर्ज कराने का आदेश लिया जा सकता है।


✅ 7. उच्च न्यायालय से क्या राहत मिल सकती है?


उच्च न्यायालय FIR दर्ज कराने का आदेश, जांच की निगरानी और मुआवजे का निर्देश दे सकता है।


✅ 8. FIR दर्ज न करने पर पुलिस अधिकारी को क्या सजा हो सकती है?


पुलिस अधिकारी को 6 महीने से 2 वर्ष तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।


✅ 9. पुलिस की ड्यूटी में बाधा डालने पर क्या दंड है?


जो व्यक्ति पुलिस को ड्यूटी से रोकने के लिए चोट पहुँचाता है, उसे 5 से 10 वर्ष तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।


✅ 10. FIR की कॉपी लेने का क्या लाभ है?


FIR की कॉपी भविष्य में सबूत के रूप में काम आती है और शिकायत की पुष्टि करती है।


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गरुड़ दल की कार्यवाही : बड़कुल रेस्टारेंट एवं बिट्टू दा ढाबा पर जुर्माना, अवैध रूप से संचालित बार किया सील


गरुड़ दल की कार्यवाही : बड़कुल रेस्टारेंट एवं बिट्टू दा ढाबा पर जुर्माना, अवैध रूप से संचालित बार किया सील

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जिला प्रशासन द्वारा गठित गरुड़ दल ने कल रविवार की रात दीनदयाल चौक बस स्टैंड स्थित बड़कुल रेस्टोरेंट, बिट्टू दा ढाबा एवं मदिरा बार का आकस्मिक निरीक्षण किया।अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कुंडेश्वर धाम प्रगति गनवीर के नेतृत्व में किये गए निरीक्षण में तहसीलदार वीर बहादुर सिंह धुर्वे, खाद्य सुरक्षा अधिकारी विनोद धुर्वे, आबकारी निरीक्षक अंकित जैन एवं माढ़ोताल थाने का पुलिस बल शामिल था।

बड़कुल रेस्टोरेंट एवं बिट्टू के ढाबे में बिना ग्लब्स के किचन में खाना बनाने एवं साफ सफाई का अभाव होने के कारण 5-5 हजार का और कुल 10 हजार रुपये का अर्थदंड नगर निगम की टीम द्वारा वसूल किया गया तथा बड़कुल रेस्टोरेंट के किचन से पनीर, पापड़ आदि के सैंपलिंग लेकर परीक्षण के लिये भेजे गए।

बिट्टू दा ढाबे के ऊपर संचालित मदिरा बार एवं पब में बिना लाइसेंस एवं सक्षम अनुमति के संचालित बार को सील कर विदेशी एल्कोहल जब्त कर आबकारी विभाग के सुपर्द किया गया। सालाना टर्नओवर 40 लाख होने के बाद भीं मदिरा बार के पास एफएसएसएआई का लाइसेंस नहीं था।

Sunday, February 8, 2026

माध्यमिक शिक्षा मण्डल की हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षाओं के लिये फ्लाइंग स्क्वाड गठित : कलेक्टर राघवेंद्र सिंह द्वारा आदेश जारी

माध्यमिक शिक्षा मण्डल की हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षाओं के लिये फ्लाइंग स्क्वाड गठित : कलेक्टर राघवेंद्र सिंह द्वारा आदेश जारी
जबलपुर . माध्यमिक शिक्षा मंडल की हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षाओं में अनुचित साधनों का उपयोग रोकने कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने अनुभाग स्तर, जिला स्तर तथा विकासखण्ड स्तर पर निरीक्षण दलों (फ्लाइंग स्क्वाड) का गठन किया है।.

अनुभाग स्तर पर गठित फ्लाइंग स्क्वाड की कमान संबंधित अनुभाग के एसडीएम को सौंपी गई है। वहीं, जिले में स्थित सभी परीक्षा केंद्रों के आकस्मिक निरीक्षण के लिये जिला शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में जिला स्तरीय निरीक्षण दल का गठन किया है। इसके अलावा विकासखण्ड शिक्षा अधिकारियों के नेतृत्व में विकासखण्ड स्तर पर निरीक्षण दल (फ्लाइंग स्क्वाड) भी गठित किये गये हैं।

माध्यमिक शिक्षा मण्डल की हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षाओं के लिये  फ्लाइंग स्क्वाड गठित : कलेक्टर राघवेंद्र सिंह द्वारा आदेश जारी


अनुभाग स्तर पर एसडीएम के नेतृत्व में गठित फ्लाइंग स्क्वाड अपने अनुभाग में स्थित परीक्षा केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण करेगी। जबकि जिला शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में गठित फ्लाइंग स्क्वाड जिले के सभी परीक्षा केंद्रों का तथा विकासखण्ड स्तर पर गठित फ्लाइंग स्क्वाड अपने विकासखण्ड के परीक्षा केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण कर सकेगी।
प्रत्येक निरीक्षण दल (फ्लाइंग स्क्वाड) में तीन से चार अधिकारियों- कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। फ्लाइंग स्क्वाड के प्रभारियों को परीक्षा केंद्रों के निरीक्षण की रिपोर्ट प्रतिदिन जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को सौपने के निर्देश कलेक्टर द्वारा दिये गये हैं।

Saturday, February 7, 2026

RTI का उल्लंघन : न्यायिक और अर्ध न्यायिक निर्णयों के आलोक में सूचना के अधिकार के विधिक पहलू, अब IPC नहीं, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की मदद ले

 
RTI का उल्लंघन : न्यायिक और अर्ध न्यायिक निर्णयों के आलोक में सूचना के अधिकार के विधिक पहलू, अब IPC नहीं, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की मदद ले

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 RTI का उल्लंघन :

जब सूचना रोकी जाती है, तो कानून आवेदक के साथ खड़ा होता है। सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के आवेदक-पक्षीय न्यायिक निर्देशों के आलोक में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 किसी अधिकारी की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि नागरिक को सशक्त बनाने के लिए लागू किया गया कानून है।
इसके बावजूद आज भी लोक सूचना अधिकारी सूचना को रोकना, टालना या भ्रामक उत्तर देना अपना विशेषाधिकार समझ बैठे हैं।
परंतु न्यायपालिका का रुख इस विषय में लगातार और स्पष्ट रहा है—
जहाँ सूचना रोकी जाती है, वहाँ कानून आवेदक के साथ खड़ा होता है।

Supreme Court -

नागरिक का जानने का अधिकार सर्वोपरि है।
सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार यह दोहराया है कि RTI किसी विभागीय कृपा का विषय नहीं है।
🔹
State of U.P. v. Raj Narain (1975) मामले में
SC ने ऐतिहासिक रूप से कहा —
“लोकतंत्र में जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकार क्या कर रही है।”
यह निर्णय आज भी RTI कानून की रीढ़ माना जाता है और पूर्णतः नागरिक-पक्षीय है।
🔹
S.P. Gupta v. Union of India (1981) केस में
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि खुली शासन व्यवस्था (open government) लोकतंत्र का मूल तत्व है और
गोपनीयता अपवाद है,
नियम नहीं।
🔹
Manohar Lal Sharma v. Union of India मामले में RTI से जुड़े अवलोकन कर
SC ने कहा कि सूचना से इनकार तभी संभव है,
जब वह कानूनन अपवाद में स्पष्ट रूप से आती हो।
अन्यथा सूचना देना बाध्यकारी है।
➡️

सुप्रीम कोर्ट का सिद्धांत :

RTI में देरी या अस्वीकार।
✔
बिना उचित आधार के सूचना न देना नागरिक के मौलिक अधिकार का उल्लंघन : केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) का आवेदक को केंद्र में रख कर दिया गया निर्णय।
CIC के अधिकांश निर्णायक आदेश यह स्थापित करते हैं कि —
🔹
Bhagat Singh v. CIC & Ors. (CIC में उद्धृत, बाद में HC द्वारा अनुमोदित सिद्धांत)
“सूचना रोकने का तर्कसंगत आधार बताने का भार लोक सूचना अधिकारी/ लोक प्राधिकार पर है,
न कि सूचना माँगने वाले नागरिक पर।”
🔹
CIC के निरंतर निर्णय (2023–2025) -
“रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं” कहना तब तक स्वीकार्य नहीं,
जब तक रिकॉर्ड के नष्ट होने/अस्तित्वहीन होने का विधिवत प्रमाण न हो।
अधूरी या भ्रामक सूचना देना, सूचना न देने के समान है
🔹
CIC का स्थापित सिद्धांत
यदि मामला प्रथम व द्वितीय अपील तक पहुँचा—
• यह स्वयं में PIO की विफलता का प्रमाण है
और दंडात्मक कार्रवाई का आधार बनता है।
• CIC का झुकाव स्पष्ट रूप से आवेदक-पक्षीय है,
न कि प्रशासन-संरक्षक।
• High Court : RTI नागरिक का औज़ार है, अधिकारी की ढाल नहीं।
उच्च न्यायालयों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि RTI अधिनियम को कमजोर करने की कोई भी कोशिश अस्वीकार्य है।
🔹
Delhi High Court – J.P. Agrawal v. Union of India (2011) मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा —
देने योग्य उपलब्ध सूचना देने के लिए PIO व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी है।
यह तर्क स्वीकार्य नहीं कि “विभाग ने सूचना नहीं दी।”
यह निर्णय स्पष्ट रूप से RTI आवेदक के अधिकारों की रक्षा करता है।
🔹
Bombay High Court : मुंबई हाईकोर्ट ने माना कि
RTI अधिनियम का पालन न करना गंभीर कदाचरण
(serious misconduct) है
और नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है।
🔹
Rajasthan High Court के निर्णयों का स्थापित रुझान -
यदि प्रथम अपीलीय अधिकारी लोक सूचना अधिकारी की गलती को ढंकने का प्रयास करता है,
तो वह भी समान रूप से दोषी माना जाएगा।

अब IPC नहीं, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की मदद ले :

आवेदक के अधिकार को आपराधिक कानून कानून के अंतर्गत संरक्षण ;
RTI उल्लंघन अब केवल जुर्माने का विषय नहीं रहा।

BNS लागू होने के बाद आवेदक का कानूनी संरक्षण और मजबूत हुआ है।
IPC 166 → BNS धारा 198 लागू होती है
लोक सेवक/लोक सूचना अधिकारी द्वारा जानबूझ कर कर्तव्य उल्लंघन कर
आवेदक को मानसिक/आर्थिक क्षति पहुँचाने पर।

IPC 166A → BNS धारा 199 लागू होती है
कानूनन आवश्यक कार्य (RTI सूचना देना) को नहीं करने पर।

IPC 175 → BNS धारा 221 लागू होगी
सूचना/दस्तावेज जानबूझ कर न देने पर।

IPC 188 → BNS धारा 223 लागू होती है प्रथम अपीलीय अधिकारी या केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग
(FAA / CIC / SIC) के आदेशों की अवहेलना करने पर।

निष्कर्ष : अब तराजू एक तरफ़ा नहीं

सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट और केंद्रीय सूचना आयोग (CIC, High Court, Supreme Court) — तीनों का संयुक्त संदेश स्पष्ट है :

  1. RTI आवेदक याचक नहीं, अधिकार-धारक है।
  2. सूचना रोकना अब प्रशासनिक गलती नहीं,
  3. बल्कि संवैधानिक और आपराधिक उल्लंघन है।
* Legal Ambit का स्पष्ट मत है कि अब अपीलों में उलझाने की संस्कृति समाप्त होनी चाहिए और
जहाँ आवश्यक हो, आवेदकों को सीधी विधिक कार्यवाही करना चाहिए।
#Legal Ambit एप आरटीआई उपयोग कर्ताओं की निशुल्क कानूनी मार्गदर्शन/ सहायता करता है। आरटीआई के क्षेत्र में सक्रिय वकीलों के समूह द्वारा संचालित है यह एप। आरटीआई संबंधी मामलों में विधिक कार्यवाही के लिए आप इस ऐप से सलाह ले सकते हैं।

- भाई विनोद कुमार की पोस्ट

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