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Sunday, February 15, 2026

मध्यप्रदेश : बिगडती छवि से दबाब में मोहन सरकार


बिगडती छवि से दबाब में मोहन सरकार 

@ राकेश अचल

मध्यप्रदेश में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. सरकार की छवि दिनोंदिन धूमिल हो रही है. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पार्टी संगठन में असंतोष के साथ ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के भी दबाव में है. सरकार ने अपने कामकाज के महिमामंडन के लिए शिवराज सिंह चौहान की सरकार में काम करने वाले अधिकारियों को फिर से महत्वपूर्ण पदों पर तैनात कर सबको चोंकाया है.

अमूमन हर प्रदेश में प्रशासनिक फेरबदल एक आम कवायद होती है लेकिन जिस तरह से बीते रोज मप्र में प्रशासनिक फेरबदल किया गया उससे जाहिर है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के पास सरकार की बिगडती छवि को सुधारने के लिए उन अधिकारियों को वापस लाने के अलावा कोई विकल्प बचा ही नही था जिन्हे दो साल पहले शिवराज सिंह चौहान का खास मानकर चलता कर दिया गया था.

डबरा में मप्र के पूर्व गृहमंत्री द्वारा तंत्र -मंत्र  से भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव आतंकित हैं. दूसरी तरफ मालवा में कैलाश विजयवर्गीय, बुंदेलखंड में गोपाल भार्गव सरकार के खिलाफ न सिर्फ आक्रामक हैं बल्कि निजी रूप से मुख्यमंत्री को क्षति पहुंचा रहे हैं. मीडिया भी सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति मुखर दिखाई दे रहा है, लेकिन मप्र का मेकअप डिपार्टमेंट यानि जनसंपर्क विभाग लचर साबित हो रहा था ऐसे में बहुत सोच विचार क बाद प्रदेश सरकार ने शनिवार देर रात एक बड़ीप्रशासनिक सर्जरी करते हुए 11 भाप्रसे अधिकारियों का तबादला कर दिया.

आपको याद होगा कि पिछले महिने ही मुख्यसचिव अनुराग जैन ने एक वीडियो कांफ्रेंसिंग में मैदानी अधिकारियों को प्रदेश में बढते भ्रष्टाचार के लिए आडे हाथों लिया था, उसी समय से ये संकेत मिल रहे थे कि प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी शुरू हो गई है. जैन का वीडियो वायरल होने और खबर लीक होने से भी सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को भारी क्षति हुई थी.

प्रशासनिक सर्जरी में सबसे महत्वपूर्ण मनीष सिंह की नयी पदस्थापना है. वे मप्र के छवि निर्माण का काम करने वाले जनसंपर्क विभाग का मुखिया बनाया गया है.एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अशोक बरनवाल को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. बरनवाल ने संदीप यादव की जगह ली है, जिन्हें फॉरेस्ट का प्रिंसिपल सेक्रेटरी बनाया गया है. यादव को एन आर आई  विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी का एडिशनल चार्ज भी दिया गया है. मप्र में पत्रकारों की आखरी पंचायत कराने वाले मनीष सिंह को एक बार फिर पब्लिक रिलेशन्स डिपार्टमेंट का कमिश्नर बनाया गया है और वे ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी का एडिशनल चार्ज भी संभालते रहेंगे.

पब्लिक रिलेशन्स कमिश्नर दीपक सक्सेना, जो चार महीने से इस पोस्ट पर थे. उन्होने इस संक्षिप्त कार्यकाल में ही विभाग का भट्टा बैठा दिया था. इस वजह से सरकार के साथ ही मुख्यमंत्री की छवि को भी गहरा धक्का लगा था. दीपक सक्सेना को हटाना मुख्यमंत्री की मजबूरी बन गई थी.सक्सेना अब ग्वालियर में एक्साइज कमिश्नर बनाये गया है. उन्होंने अभिजीत अग्रवाल की जगह ली है. जिन्हें स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया है.

गौरतलब है कि अभिजीत अग्रवाल का तबाला नई आबकारी लागू होने से पहले हुआ है. इसका सीधा सा मतलब है कि सरकार को अभिजीत की क्षमताओं पर भरोसा नहीं था. वैसे भी अग्रवाल मुख्यमंत्री का दिल नहीं जीत पाए थे.वे छग के एक भाजपा नेता के दामाद हैं.

अजय गुप्ता को किसान कल्याण और कृषि विकास के डायरेक्टर पद से ट्रांसफर करके ईस्ट रीजन पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी, जबलपुर का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया है.एक और आई एएस उमाशंकर भार्गव आठ महीने बाद राजभवन से किसान कल्याण और कृषि विकास के डायरेक्टर का पद संभालने के लिए लौटे हैं. भिंड जिला पंचायत के सीईओ सुनील दुबे को गवर्नर का डिप्टी सेक्रेटरी बनाया गया है. जबकि हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट की डिप्टी सेक्रेटरी संघमित्रा गौतम को अलीराजपुर जिला पंचायत का सीईओ बनाया गया है.

इस प्रशासनिक सर्जरी पर  मध्य प्रदेश कांग्रेस ने कहा है कि एक्साइज डिपार्टमेंट में भ्रष्ट लोगों को बचाया जा रहा है. अभिजीत अग्रवाल ने एक्साइज डिपार्टमेंट में भ्रष्ट लोगों को पनाह दी. इंदौर में 75 करोड़ रुपये के नकली चालान, जबलपुर में जहरीली शराब से 15 से ज़्यादा मौतें. लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई!"

इस प्रशानिक सर्जरी को लेकर जितने मुंह हैं उतनी बातें है. अब इन सब पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी मनीष सिंह पर है. वे साम, दाम, दंड, भेद का इस्तेमाल करने में दक्ष माने जाते हैं. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव उन्हे शिवराज सिंह चौहान की तरह कितनी छूट देंगे ये अभी पता नहीं है.


Saturday, February 14, 2026

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आज नवपदस्थ आयुक्त (जनसम्पर्क) एवं प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश माध्यम श्री मनीष सिंह ने मुख्यमंत्री निवास पर सौजन्य भेंट की

 


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आज नवपदस्थ आयुक्त (जनसम्पर्क) एवं प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश माध्यम श्री मनीष सिंह ने मुख्यमंत्री निवास पर सौजन्य भेंट की





Monday, February 2, 2026

शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रभक्ति पर बोले कैलाश विजयवर्गीय, बयान को लेकर क्यों मचा राजनीतिक बवाल?


 शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रभक्ति पर बोले कैलाश विजयवर्गीय, बयान को लेकर क्यों मचा राजनीतिक बवाल?


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  • कैलाश विजयवर्गीय के वक्तव्य के बहाने जनसंवेदना और संस्कार की राजनीति
  • समाजसेवी से सत्ता तक का सफर और संस्कार की राजनीति से जननेता की बेबाकी पर क्यों हो रही सियासत?


भोपाल // विजया पाठक

मध्यप्रदेश की राजनीति में जब भी स्पष्ट विचार और सामाजिक सवालों की बात होती है तो कैलाश विजयवर्गीय का नाम चर्चा में आता है। इंदौर के पार्षद से लेकर प्रदेश के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री तक का उनका राजनीतिक सफर केवल पदों की कहानी नहीं, बल्कि संगठन, जनसंपर्क और वैचारिक दृढ़ता का उदाहरण है।

हाल के दिनों में उनके एक वक्तव्य को लेकर जिस तरह का विवादित माहौल खड़ा करने की कोशिश की गई, उसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज राजनीति में सच्चे और तीखे सवाल पूछना भी अपराध बनता जा रहा है? दरअसल, यह पूरा विवाद उस वक्तव्य से जुड़ा है जो कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में एक निजी शिक्षण संस्थान के कार्यक्रम के दौरान दिया। यह मंच शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे गंभीर विषयों पर संवाद का था। मंत्री विजयवर्गीय ने नई शिक्षा नीति, बच्चों के चरित्र निर्माण और माता-पिता की भूमिका पर बेबाक टिप्पणी करते हुए पूरे सिस्टम को आत्ममंथन के लिए कटघरे में खड़ा किया। लेकिन दुर्भाग्यवश, उनके कथन के एक उदाहरण को संदर्भ से अलग कर राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई।

व्यवस्था पर तंज, व्यक्ति पर नहीं

अपने वक्तव्य में कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि केवल नई शिक्षा नीति बना देने से बच्चों में चरित्र नहीं आ सकता, जब तक घर का वातावरण सही न हो। उन्होंने स्पष्ट रूप से यह बात रखी कि बच्चा दिन के लगभग 20 घंटे घर में और केवल 4 घंटे स्कूल में रहता है। ऐसे में अगर घर का माहौल ही अनुशासनहीन, भोगवादी या गलत आदतों से भरा हो, तो स्कूल में दी गई शिक्षा का असर सीमित रह जाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि घर का माहौल ऐसा हो कि पिता पीडब्ल्यूडी मंत्री है और बच्चों को कपड़े दिलाने ठेकेदार ले जा रहा है, तो फिर बच्चों से चरित्र की उम्मीद कैसे की जा सकती है। यह कथन किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप नहीं था, बल्कि भ्रष्ट व्यवस्था और गलत सामाजिक उदाहरणों पर करारा तंज था। स्वयं कैलाश विजयवर्गीय ने बाद में पत्र जारी कर अपने बयान के उद्देश्य को स्पष्ट भी किया।

तोड़-मरोड़ की राजनीति क्यों..?

सवाल यह उठता है कि एक वैचारिक उदाहरण को लेकर इतना बड़ा विवाद क्यों खड़ा किया गया? क्या विपक्ष यह संदेश देना चाहता है कि अब नेताओं को सामाजिक कुरीतियों और भ्रष्ट मानसिकता पर बोलने का अधिकार भी नहीं है? जनप्रिय नेता होने के कारण कैलाश विजयवर्गीय की हर बात को ध्यान से सुना जाता है और शायद यही वजह है कि उनके वक्तव्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जाती है। वास्तविकता यह है कि उनका पूरा वक्तव्य बच्चों के संस्कार, माता-पिता की जिम्मेदारी और सामाजिक वातावरण की भूमिका पर केंद्रित था। उन्होंने साफ कहा कि बच्चों के चरित्र की नींव घर से पड़ती है। माता-पिता ही बच्चों के पहले शिक्षक होते हैं। ऐसे में यदि घर में ही गलत आदतें, गलत उदाहरण और अनुचित व्यवहार मौजूद हो तो शिक्षा व्यवस्था अकेले चमत्कार नहीं कर सकती।

माता-पिता के लिए भी “सिलेबस” की बात

विजयवर्गीय का यह सुझाव कि माता-पिता के लिए भी एक “सिलेबस” होना चाहिए, अपने आप में दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। उनका आशय यह था कि जैसे बच्चों को स्कूल में क्या पढ़ाया जाए, इसकी योजना होती है, वैसे ही माता-पिता को भी यह समझना चाहिए कि बच्चों से कैसे संवाद करें, उनके सामने कैसा व्यवहार रखें और किस तरह का माहौल बनाएं। यह विचार किसी भी समाज सुधारक की तरह सामाजिक जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला है, न कि किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी।

राष्ट्रभक्ति और चरित्र निर्माण पर जोर

मंत्री विजयवर्गीय ने शिक्षा के साथ राष्ट्रभक्ति को भी अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि आज संस्थाएं इंजीनियर, डॉक्टर और प्रोफेशनल तो बना रही हैं, लेकिन चरित्रवान और राष्ट्रभक्त नागरिक बनाने पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि दुनिया में ऐसा कौन सा संगठन है, जो बच्चों को व्यवस्थित रूप से राष्ट्र भक्ति का पाठ पढ़ा रहा है? यह सवाल आज के समय में बेहद प्रासंगिक है, जब सफलता को केवल पैकेज और डिग्री से मापा जा रहा है। कैलाश विजयवर्गीय का मानना है कि जब तक शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध नहीं जुड़ता, तब तक समाज संतुलित नहीं हो सकता।

जिम्मेदार राजनीति का उदाहरण

जब उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया, तब कैलाश विजयवर्गीय ने पत्र जारी कर अपने उद्देश्य को स्पष्ट किया। यह कदम दर्शाता है कि वे संवाद और स्पष्टता में विश्वास रखते हैं। उन्होंने यह साफ किया कि उनका बयान भ्रष्टाचार पर कटाक्ष और सामाजिक वातावरण पर चिंता जताने के लिए था, न कि किसी व्यक्ति या वर्ग को लक्ष्य करने के लिए। आज जरूरत इस बात की है कि राजनीति में विचारों को सुनने और समझने की संस्कृति विकसित हो। कैलाश विजयवर्गीय का वक्तव्य बच्चों के चरित्र निर्माण, माता-पिता की भूमिका और राष्ट्रभक्ति जैसे मूलभूत मुद्दों पर केंद्रित था। इसे विवाद बनाना दरअसल उन सवालों से बचने की कोशिश है, जो समाज को आईना दिखाते हैं। विजयवर्गीय ने हमेशा सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता दी है। उनके विचारों से सहमत या असहमत हुआ जा सकता है, लेकिन उन्हें तोड़-मरोड़कर पेश करना न तो स्वस्थ राजनीति का संकेत है और न ही समाज के हित में है। आज जब राजनीति को दिशा और दृष्टि की जरूरत है, तब ऐसे स्पष्ट और साहसी वक्तव्यों को विवाद नहीं, विमर्श का विषय बनाया जाना चाहिए।

Friday, January 30, 2026

RTI के अन्तर्गत सूचना न देनेवाले के विरुद्ध कानूनी प्राविधान: RTI मे भी FIR दर्ज हो सकती है

 

RTI के अन्तर्गत सूचना न देनेवाले के विरुद्ध कानूनी प्राविधान: RTI मे भी FIR दर्ज हो सकती है

विनय जी. डेविड : 9893221036

लोक सूचना अधिकारी द्वारा कोई जवाब नहीं देना धारा-7(2) आरटीआई एक्ट का उल्लंघन है। लोक सूचना अधिकारी द्वारा आरटीआई एक्ट की धारा-7(8) का उल्लंघन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 166ए और 167 के तहत एफ आई आर होगी।

2. लोक सूचना अधिकारी द्वारा झूठी जानकारी देना जिसका प्रमाण आवेदक के पास मौजूद है उस स्थिति में भारतीय दंड संहिता की धारा 166ए, 167, 420, 468 और 471 के तहत एफआईआर दर्ज होगी।

3. प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा निर्णय नहीं किये जाने की स्थिति में भारतीय दंड संहिता की धारा 166ए, 188 के तहत एफ आई आर दर्ज कराई जा सकती है।

4. प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष लोक सूचना अधिकारी द्वारा सुनवाई के बाद सम्यक सूचना के भी गैरहाजिर रहने की स्थिति में भारतीय दंड संहिता की धारा 175, 176, 188, और 420 के तहत एफ आई आर दर्ज करवाई जा सकती है।

5. प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा निर्णय करने के बाद भी सूचनाएं नहीं देने की स्थिति में भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और 420 के तहत एफ आई आर दर्ज हो सकती है।

Monday, January 26, 2026

गणतंत्र दिवस पर पुलिस ग्राउंड में आयोजित जिले के मुख्य समारोह के बच्चों के साथ दोपहर भोज किया, भोज में खीर-पुरी, सब्जी के साथ लड्डू परोसे, बाकी 365 दिवस का कुछ पता नहीं


गणतंत्र दिवस पर पुलिस ग्राउंड में आयोजित जिले के मुख्य समारोह के बच्चों के साथ दोपहर भोज किया, भोज में खीर-पुरी, सब्जी के साथ लड्डू परोसे, बाकी 365 दिवस का कुछ पता नहीं


 मुख्य अतिथि ने किया स्कूली बच्चों के साथ दोपहर भोज

गणतंत्र दिवस पर पुलिस ग्राउंड में आयोजित जिले के मुख्य समारोह के तुरंत बाद मुख्य अतिथि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने शासकीय पूर्व प्राथमिक प्रशिक्षण संस्था (मांटेसरी स्कूल) के बच्चों के साथ दोपहर भोज किया। इस अवसर पर कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय, नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार, जिला पंचायत के सीईओ अभिषेक गहलोत, अपर कलेक्टर नाथूराम गोंड एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद थे। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत गणतंत्र दिवस पर स्कूली बच्चों को विशेष भोज दिया गया था। विशेष भोज में खीर-पुरी, सब्जी के साथ लड्डू परोसे गये थे।

गणतंत्र दिवस मुख्य समारोह में स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने फहराया राष्ट्र ध्वज


गणतंत्र दिवस मुख्य समारोह में स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने फहराया राष्ट्र ध्वज

सभी जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036 

जबलपुर. राष्ट्र का 77 वाँ गणतंत्र दिवस जिले भर में हर्षोल्लास से मनाया गया। गणतंत्र दिवस का जिले का मुख्य समारोह यहां पुलिस लाइन परेड ग्राउंड में आयोजित किया गया, जहां मुख्य अतिथि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया और परेड की सलामी ली।

गणतंत्र दिवस के जिले के मुख्य समारोह में राष्ट्र ध्वज तिरंगा फहराने के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सपंतिया उइके ने खुली सफेद जिप्सी में कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह एवं पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय के साथ परेड का निरीक्षण किया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का प्रदेश की जनता के नाम गणतंत्र दिवस के संदेश का वाचन किया। इस मौके पर सशस्त्र बलों ने हर्षफायर किये तथा छठवीं बटालियन के बैंड दल द्वारा राष्ट्रगान की धुन बजाई गई। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती उइके ने तिरंगे के तीन रंगों के गुब्बारे मुक्त आकाश में छोड़े। समारोह में परेड द्वारा शानदार मार्चपास्ट प्रस्तुत किया गया।

मार्चपास्ट में आईटीबीपी, एसटीएफ छठवीं वाहिनी, क्यूआरएफ छठवीं वाहिनी, होमगार्ड, जिला पुलिस बल पुरूष, नेशनल कैडेट कोर की नेवल यूनिट, नेशनल कैडेट कोर की सीनियर तथा जूनियर डिवीजन की बालक एवं बालिका, स्काउट एवं गाईड तथा शौर्य दल की प्लाटून शामिल थीं। परेड का नेतृत्व भारतीय पुलिस सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी शुभम सिंह ठाकुर ने किया। परेड के उप कमांडर सूबेदार अमित शिववंशी थे। मुख्य अतिथि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती उइके ने परेड की सलामी ली तथा मार्चपास्ट के बाद प्लाटून कमाण्डरों से परिचय प्राप्त किया। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों एवं लोकतंत्र सेनानियों का शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान भी किया।

गणतंत्र दिवस की 76वीं वर्षगांठ पर आयोजित जिले के मुख्य समारोह में शालेय छात्र-छात्राओं ने आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। भारत की विविध सांस्कृतिक विशेषताओं से परिचय कराते हुए इन बच्चों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में शिशु विद्या पीठ अंग्रेजी माध्यम स्कूल के विद्यार्थियों ने जहां पहलगांव घटना एवं ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित अभिनय नृत्य प्रस्तुत किया, तो वहीं शारदा चौक स्थित माउन्ट लिट्रा जी स्कूल के विद्यार्थियों ने राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् पर शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। समारोह में दिल्ली पब्लिक स्कूल मंडला रोड के छात्र छात्राओं ने ‘‘जयेतु जयेतु भारतम’’ पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। अधारताल स्थित यश नर्सरी हायर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थियों ने रानी अवंती बाई की जीवनी पर आधारित शानदार नृत्य प्रस्तुत किया तथा मध्यप्रदेश वुशु संघ द्वारा वुशु मार्शल आर्ट का सामूहिक प्रदर्शन किया गया।

मुख्य समारोह में राज्य शासन के तेरह शासकीय विभागों जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र और जनजातीय कार्य विभाग, कृषि विभाग, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस केन्द्रीय जेल, नगर निगम, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, स्वास्थ्य विभाग, मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, महिला एवं बाल विकास विभाग, यातायात पुलिस, जिला पंचायत, शिक्षा विभाग, सामाजिक न्याय विभाग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा शासन की योजनाओं, कार्यक्रमों एवं सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों पर केन्द्रित आकर्षक झांकियां निकाली गई। झांकियों में ‘‘जैविक हाट की है आहट’’ की थीम पर अधारित कृषि विभाग की झांकी को पहला पुरूस्कार प्राप्त हुआ। जबकि यातायात विभाग की यातायात नियमों के प्रति जागरूकता पैदा करने पर केन्द्रित झांकी तथा सजा भुगत रहे माता-पिता के साथ मजबूरन जेल के अंदर रहने वाले बच्चों की स्थिति और दशा को प्रदर्शित करती केन्द्रीय जेल की झांकी ‘‘गुड़िया’’ को संयुक्त रूप से दूसरा पुरस्कार प्राप्त हुआ। झांकियों के लिए तीसरा पुरस्कार शिक्षा विभाग की ‘‘आधार से आकाश तक’’ तथा नगर निगम की ‘‘वेस्ट टू एनर्जी प्लांट’’ की झांकी को संयुक्त रूप से दिया गया

मुख्य अतिथि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके द्वारा समारोह में प्रस्तुत आकर्षक मार्च पास्ट के लिए सशस्त्र प्लाटूनों में आईटीबीपी की प्लाटून को पहला, एसटीएफ छटवी वाहिनी की प्लाटून को दूसरा तथा जिला पुलिस बल (पुरूष) की प्लाटून को तीसरा पुरूस्कार प्राप्त हुआ। इसी प्रकार बिना शस्त्र प्लाटूनों में एनसीसी गर्ल्स सीनियर विंग की प्लाटून को पहला, शौर्य दल की प्लाटून को दूसरा तथा एनसीसी नेवल प्लाटून को तीसरा पुरूस्कार प्राप्त हुआ। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता करने वाले सभी शालाओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गये। समारोह में उत्कृष्ट कार्यों के लिए शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों एवं पुलिस जवानों को भी मुख्य अतिथि द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गये। समारोह में परेड का नेतृत्व करने के लिए परेड कमांडर शुभम सिंह ठाकुर को तथा छठवीं बटालियन के बैंड दल के शानदार प्रदर्शन पर सहायक उप निरीक्षक मनोज बरार को भी शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया।

गणतंत्र दिवस के जिले के मुख्य समारोह में महापौर श्री जगत बहादुर सिंह अन्नू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आशा मुकेश गोटिया, नगर निगम अध्यक्ष श्री रिकुंज विज, संभागायुक्त धनंजय सिंह, पुलिस महानिरीक्षक प्रमोद वर्मा, पुलिस उप महानिरीक्षक अतुल सिंह, कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह, एसपी संपत उपाध्याय, नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार, जिला पंचायत के सीईओ अभिषेक गहलोत, अपर कलेक्टर नाथूराम गोंड, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में स्कूल बच्चे मौजूद थे।
गणतंत्र दिवस पर पुलिस लाईन परेड ग्राउंड पर आयोजित मुख्य समारोह के साथ ही जिले में स्थित राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों एवं स्थलों, शासकीय भवनों, कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थाओं में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। जिले के सभी अनुविभागों, तहसील एवं विकासखण्ड मुख्यालयों, नगरीय निकायों तथा ग्राम पंचायत स्तर तक गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित किये गये और सम्मानपूर्वक राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।

Friday, January 23, 2026

स्वदेश के स्टूडियो में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुनाई निजी बातें, चाय-पोहे बेचे, परिवार को लेकर भावुक हैं मोहन यादव


स्वदेश के स्टूडियो में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुनाई निजी बातें, चाय-पोहे बेचे, परिवार को लेकर भावुक हैं मोहन यादव

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स्वदेश के स्टूडियो में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुनाई निजी बातें, चाय-पोहे बेचे, परिवार को लेकर भावुक हैं मोहन यादव

पिता के कहने से चाय-पोहे बेचे, परिवार को लेकर भावुक हैं मोहन यादव

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव धुरंधर मुख्यमंत्री होने के साथ एक धुरंधर स्वयंसेवक भी है। वे आसानी से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंचे हैं। एक समय अपने पिता की सलाह पर उन्होंने चाप पोहे बेचे, होटल चलाया और मकान बनाकर भी बेचे। लेकिन अब उन्होंने प्रदेश को ही अपना परिवार मान लिया है। वे मुख्यमंत्री हैं। वे काम में हमेशा इतने व्यस्त रहे कि उनको मह भी नहीं पता था कि निवास में भी अकेले राते उनकी छोटी सी बिटिया कब बैठना और चलना सीख गई। वे ऐसे पहले मुख्यमंत्री है जिन्होंने अपने बच्चों तक से कहा कि किसी को बोलना नहीं कि तुम्हारे पित्ता मुख्यमंत्री हैं। परिवार के किस्सों को लेकर अब वे बहुत भावुक हो जाते हैं।

अवसर था स्वदेश के स्टूडियो के उद्घाटन का। स्वयंसेवक से मुख्यमंत्री बने डॉ. मोहन यादव कुछ सवालों पर भावनाओं में बहते हुए भी दिखाई दिए। उन्होंने अपने जीवन के कुछ ऐसे पहलुओं को उजागर किया जो उनके मन मस्तिष्क में तैरते रहते हैं। मंत्री और मुख्यमंत्री बनने के बाद उनहोंने अपने परिवार को कुछ हिदायते भी दी और कुछ स्वनियमन का पालन भी किया।

परिवार की चर्चा पर मुख्यमंत्री की भायुक्ता उन्हें एक अलग दुनिया में ले जाती है। मुख्यमंत्री बताते है जब मेरा विवाह किया तो सबसे पहले संथ का परिवार वावा साहब नातू ने देखा। वहां मेरी पत्नी सीमा के पिठाली महलय मेरे

राजनीति और अध्यात्म दो ही रास्ते

80 के दशक में डॉ. मोहन गादा ने अखिल भारतीय विद्यायों परिषद के कार्यों में खुद को व्यस्त कर लिया था। ऐसे में उनके पिताजी की जायज चिंता थी कि मोहन कैसे कमाएमा और अपना घर कैसे चलाएगा? तब एक ज्योतिषी से उनके परिवार ने विमर्श किया तो पता चला मोहन यादव या तो धुरंधर राजनेता बनेंगे या अध्यात्म की राह पकड़ लेंगे। वया ये वाक्या सही है? इस पर ये कहते हैं कि उनकी अपनी कैलकुलेशन थी। उनहोंने कहा था कि जीवन में परमात्मा ने थोड़ा सा जिस प्रकार का सबका भाग्य बना दिया है तो तुम्हाने दो मार्ग हैं। या तो राजनीति के क्षेत्र में तुम अच्छे स्थान पर पहुंचोगे और अगर अध्यात्म की वृति रही ती एक अवस्था के बाद वहां अवसर है।

होटल चलाया, मकान

मुख्यमंत्री बताते हैं इस बीच बाहूजी का आग्रह था कि थोड़ा बांध के भी रखी, ये पुराने लोगों की अच्छी पद्धति रहती है। नौकरी मिल जाए तब भी अपना काम बंधा करी। बहूजी का भी था कि अगर आप कॉलेज जा रहे हो तो आप कोई अपना काम शुरू करो। एक दुकान जरूर चलाओ। उसके पीछे भाव रहता था कि पढ़ी तो पढ़ो या मत पढ़ो, लेकिन अपने काम धंधे से जीवन आप अच्छे से चलाओ। बाबूजी की बात का पालन मैंने तो फर्स्ट ईयर से ही किया। उन्नीस सी बयासी में मैंने चाय-पोहे की होटल खोली और तीन सखाल उसे चलाया। उसके बाद मुझे लगा कि समय बोड़ा कम पड़ रहा है. मैं पीएमटी में भी सिलेक्ट हो गया। लेकिन परिषद ने कहा कि चुनाव लड़ना है तो तुम बीएससी करों, फिर बीएससी सेकंड ईयर में प्रेसिडेंट लड गया, बहां जीत गया। दुकान भी चल रही थी। बाबूजी सब देख रहे थे। बोले- तुमको बिजनेस तो करने हैं तो ऐसा कनी। तुम्हें सुबह से लेकर रात तक चाय की दुकान में टाइम लगता है। तुम खाने का होटल बोल तो। होटल में फायदा है कि सुबह ग्यारह बजे से दोपहर दो बजे तक चलेगा, फिर तुम्हें गैध मिल जाएगा। इसके बाद शाम को सात बजे बाद होटल चालू होगी। दस म्यारह बजे तक चलेगी। फिर दो तीन साल होटल चली. पर तब तक में प्रदेश मंत्री बन गया। मेरे प्रवास होने लगे, समय नहीं था तब चाबूजी ने कहा ये छोड़ी प्राइवेट मकान बनाकर बेचों। तो फिर हमने प्राइवेट मकान बनाए और बेचे। उसमें एक फायदा मकान रोज नहीं बेचना पड़ता, रोज ग्राहक नहीं करना पड़ता ती सब काम जम गया। बाबूजी के कारण में आर्थिक रूप से स्वावलंबी रहा। उनका कहना था किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना।

बेटी कब बैठने लगी, पता ही नहीं चला

ससुर जी, वे संघ में कार्य करते रहे। वह घर से आठ-आठ दिन्न, दस-दस दिन प्रवास पर निकलते थे। तो उनके घर में आदत थी कि संघ कार्य में जाने में कोई आपति नहीं। यही देख मेरा विवाह हुआ कि यह घर में टाइम कम

देगा। मुझे इस बात का सरोष है कि मेरे परिवार ने कभी इसे अन्यथा नहीं लिया। एक उदाहरण दूंगा मेरी बेटी कर जी आज एक माइनोलोजिस्ट है हॉस्पिटल चलाती है। शादी के बाद में आमतौर पर संगठन के काम से सुबह

सात आठ बजे से घर से निकलता और रात ग्यारह बारह बजे घर पहुंचता। एक दिन में अपने एक दोस्त रावल के बर गया। तब मेरी बेटी छोटी थी आठ महीने की। उनकी माता जी ने मुझसे पूछा बेटा वो बेटी बैठने लगी है क्या? सी

बताना मत कि मुख्यमंत्री के बच्चे हो

डॉ. यादव बताते है कि आनंद ता आया, जब शादी के बाद बच्ची ने कहा उन्हें शादी के बाद हनीमून पर नहीं नर्मदा परिक्रमा पर जाना है। हमने कहा जाओ। तो बड़े बेटे ने कहा कि मैं भी क्या पापा नर्मदा परिक्रमा कर हूँ। मैंने कहा कर लो। तब मेरी बेटी दामाद जो डॉक्टर है, वो बोले हम भी जागने, हमने कहा तुम भी जाओ। लेकिन दी शर्त हैं। तुम जाओ, कोई दिक्कत नहीं। लेकिन तुम लोग कहीं भी यह परिचय नहीं देना कि मुख्यमंत्री वी बेटे-बेटी हो। स्थानीय विधायक, सांसद मंत्री इनको अपनी यात्रा की खबर नहीं करना। नर्मदा परिक्रमा में कोई धर्मशाला या कोई छोटा स्थान लेना और अपनी पूजा पट्टी पूरी करना। मुख्यमंत्री कहते है मुझे सतीध है सब अच्छे से हुआ और इनकी नर्मदा परिक्रमा का जब ओंकारेश्वर में समापन हुआ तब भी में ओंकारेश्वर नहीं गया। मैंने अपने आपकी इस पास से दूर रखा, क्योंकि ये उनकी आत्म याह है।

मेरे को एकदम झटका लगा। मैंने का एक मिनट, एक मिनट मामी। मैं जरा कुछ के बताऊँगा कि मैं जब सुबह निकलता हूँ तो वो सोए रहती है। रात को जब आता हूँ तो सो रही होती है। वो बैठती है. नहीं बैठती। मेरे की नहीं

सामूहिक विवाह में बेटे की शादी

मुख्यमंत्री बनने के बाद डॉ. मोहन यादव ने अपने दोनों पुत्री का मिसाल कायम की। एक बेटे का

विवाह सामूहिक विवाह में किया। इस पर उन्होंने कहा मेरे दोनों बेटों का विवाह जब मुख्यमंत्री हूँ. तभी हुआ है। हमारे यहां जब हम संघ में सीखते हैं कि हमारे लिए काम बढ़ा है, लेकिन व्यक्तिमत जीवन में लॉक दिखादे से बचना चाहिए। में भाषण में भी कहता हूँ शादी विवाह में दिखावा मत करो।

क्योंकि बड़ा आदमी बा कार्यक्रम करता तो छोटे पर गलत असर होता है। इसलिए जब बड़े बेटे का विवाह किया तो मैंने पुष्कर में जाकर पचास लोगों के साथ किया। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल जी बोले, मैं

आऊ क्या? इस कार्यक्रम में मेरी इच्छा है। तो मैंने उनको दिनसला से हाथ जोड़कर कहा, आप मत आना, क्योंकि अगर एक मुख्यमंत्री आएंगे तो फिर लाव लश्कर सब आ जाएगा और मजा बिगड़ जाएगा। इसके बाद छोटे बेटे के विवाह की बारी आई। हमने उसे सामूहिक विवाह की

बात बताई। उसने कहा कि पापा मजाक कर रहे है। हमने पूछा तुम्हारी क्या इच्छा है? तो उसने हो की। सामूहिक विवाह करना था तो हमारी मित्र के एक होटल है. उसके वेटर के यहां विवाह होना था, उसे जोड़ा। फिर एक किसान परिवार से बात की। ऐसे करते-करते मेरे ड्राइवर ने कहा, साहब आप हमाले बच्चे का विवाह भी सम्मेलन में कर दी। ऐसे करके इक्कीस जोड़े हो गए और बाइसवां मेरा बेटा, अन्तर आनंद आया। जब यह शादी का मामला बना तो मेरे सारे मुख्यमंत्री मित्रों ने कहा, हम आए क्या? हमने सबसे कहा, भाई साहब, हमने आपको सूचना दी है। आना नहीं है. आओगे तो हमारा सब काम बिगड़ जाएगा।

मालूम। फिर जब में रात को घर गदा मैंने फनी सीमा से पूछा, सीमा ये आकाक्षा बैठने लगी है क्या? जवाब मिता दो महीने पहले से बैठने सीख गई है। यह सब सेक्रिफाइस परिवार में हो जाता है। ये अच्छी बात है।

Wednesday, January 21, 2026

केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा का तीन दिवसीय जबलपुर प्रवास पर


केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा का तीन दिवसीय जबलपुर प्रवास पर
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जबलपुर. केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा का तीन दिवसीय प्रवास पर गुरूवार 22 जनवरी को जबलपुर आगमन होगा। श्री नड्डा गुरूवार की शाम 5 बजे नई दिल्ली से वायुयान द्वारा जबलपुर आयेंगे।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार केन्द्रीय मंत्री श्री नड्डा डुमना एयरपोर्ट से शाम 5.30 बजे लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह के साउथ सिविल लाईन स्थित निवास पहुंचेंगे तथा यहां से शाम 6.30 बजे मदन महल थाना के समीप स्थित सांसद श्री आशीष दुबे के कार्यालय के लिए रवाना होंगे। सांसद कार्यालय से आप शाम 7.40 बजे सुभाषचंद्र बेनर्जी मार्ग सिविल लाईन पचपेढी़ स्थित पूर्व सांसद श्रीमती जयश्री बेनर्जी के निवास के लिए प्रस्थान करेंगे तथा रात्रि विश्राम करेंगे।

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री शुक्रवार 23 जनवरी को सिविल लाईन पचपेढी़ से सुबह 10.50 बजे सिटी बंगाली क्लब पहुंचेंगे तथा यहां सिद्धी वाला बोस लाइब्रेरी एसोसिएशन के शताब्दी वर्ष समारोह में शामिल होंगे। श्री नड्डा दोपहर 12.30 बजे सिटी बंगाली क्लब से डुमना एयरपोर्ट प्रस्थान करेंगे तथा दोपहर 1 बजे डुमना एयपोर्ट से हेलीकॉप्टर द्वारा कटनी रवाना होंगे।

कटनी में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री का शाम 4.50 बजे डुमना एयरपोर्ट जबलपुर आगमन होगा। वे डुमना एयरपोर्ट से शाम 5.45 बजे गौरीघाट पहुंचेंगे तथा यहां नर्मदा महाआरती में शामिल होंगे। श्री नड्डा गौरीघाट से शाम 7 बजे सिविल लाईन पचपेढ़ी रवाना होंगे तथा यहां रात्रि विश्राम के बाद शनिवार 24 जनवरी को दोपहर 1.10 बजे साउथ सिविल लाईन पचपेढी़ से डुमना एयरपोर्ट प्रस्थान करेंगे और दोपहर 2 बजे डुमना एयरपोर्ट से विमान द्वारा नई दिल्ली रवाना होंगे।

Sunday, January 18, 2026

मंत्री श्री सिंह ने मां नर्मदा प्रकटोत्‍सव की तैयारियों के संबंध में गौरीघाट में बैठक कर दिये आवश्‍यक निर्देश

लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने मां नर्मदा प्रकटोत्‍सव की तैयारियों के संबंध में गौरीघाट में बैठक कर दिये आवश्‍यक निर्देश


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जबलपुर. लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने आज मां नर्मदा प्रकटोत्सव की तैयारियों के संबंध में गौरीघाट में बैठक आयोजित कर आवश्यक निर्देश दिये। जिसमें विगत वर्ष आयोजित मां नर्मदा प्रकोत्सव में आई कठिनाईयों के साथ उनके समाधान पर चर्चा की गई। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी गरिमामय रूप से मां नर्मदा का प्रकटोत्सव मनाया जायेगा।

बैठक में उत्सव के दौरान भंडारों के लिए समुचित जगह, आवागमन को व्यवस्थित करने, एम्बुलेंस, अस्थायी स्वास्थ्य शिविर, फायर ब्रिगेड, सीसीटीव्ही, कंट्रोल रूम, विद्युत व्यवस्था, निर्धारित मात्रा में ध्वनि, वन-वे व्यवस्था, पार्किंग, नर्मदा तट पर विगत वर्ष की भांति वॉच टावर लगाने के साथ तट पर कोई भी दुकान नहीं लगाने के संबंध में चर्चा की गई।

इस दौरान विशेष रूप से कहा गया कि पर्व के दौरान नर्मदा तट की साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित हो। साथ ही महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम, मोबाईल टॉयलेट, घाटो पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, साज-सज्जा करने व अस्थायी अतिक्रमण को समझाइश से दूर करने पर चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिये। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि नर्मदा तट पर मदिरा सेवन पूर्णत: बंद की जाये।

उन्होंने कहा कि पर्व के दौरान व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के लिए माता वैष्णो देवी यात्रा दल द्वारा वॉकी-टॉकी के साथ तैनात करेंगे। इसमें समरसता सेवा संगठन का भी सहयोग लिया जाये। उन्होंने कहा कि ई रिक्शा पर्याप्त मात्रा में रहे और उनकी नंबरिंग की जाये। ई रिक्शा नि:शुल्क रहेंगें। उन्होंने संबंधित अधिकारी से कहा कि बिना भुगतान के ई-रिक्शा न लगायें। साथ ही कहा कि श्रद्धालुओं के साथ अच्छा व्यवहार किया जाये।

निर्धारित पार्किंग स्थल से मंत्री श्री सिंह स्वयं पैदल जाएंगे मां नर्मदा तट

लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह ने बैठक में कहा कि प्रशासन द्वारा निर्धारित पार्किंग स्थल में वाहन पार्क होने के बाद वे स्वयं भी पैदल ही मां नर्मदा तट तक पैदल जाएंगे। साथ ही उन्होंने मां नर्मदा के भक्तो से भी अपील की है कि निर्धारित पार्किंग स्थल पर वाहन पार्क कर पैदल या आवश्यक होने पर प्रशासन द्वारा चयनित ई रिक्शा से ही तट पहुंचे।

इस दौरान महापौर श्री जगत बहादुर अन्नू, नगर निगम अध्यक्ष श्री रिकुंज विज, श्री लेखराज सिंह मुन्ना भैया, भाजपा नगर अध्यक्ष श्री रत्नेश सोनकर, श्री अभय सिंह ठाकुर सहित अन्य गणमान्य नागरिक तथा कलेक्टर श्री राघवेन्द्र सिंह, नगर निगम कमिश्नर श्री राम प्रकाश अहिरवार सहित सभी संबंधित अधिकारी व क्षेत्रीयजन मौजूद थे।

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