Thursday, May 21, 2026

जबलपुर में नीट पेपर लीक के विरोध में युवा कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन: रेलवे ट्रैक पर उतरकर रोकी इंटरसिटी ट्रेन, लगे नारे : "प्रधानमंत्री वीक है, तभी तो पेपर लीक है"


जबलपुर में नीट पेपर लीक के विरोध में युवा कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन: रेलवे ट्रैक पर उतरकर रोकी इंटरसिटी ट्रेन, लगे नारे : "प्रधानमंत्री वीक है, तभी तो पेपर लीक है"

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जबलपुर। देशभर में चर्चित नीट पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों और युवाओं में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को जबलपुर में युवा कांग्रेस ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ता जबलपुर-आधारताल रेलवे ट्रैक पर उतर गए और भोपाल जाने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस को रोक दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। "प्रधानमंत्री वीक है, तभी तो पेपर लीक है" जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन की सूचना मिलते ही आरपीएफ और आधारताल थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने समझाइश के बाद प्रदर्शनकारियों को ट्रैक से हटाया और कुछ देर तक रुकी ट्रेन को पुनः रवाना कराया। इसके बाद रेलवे यातायात बाधित करने के मामले में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ की गई।

प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन

यह प्रदर्शन युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया के नेतृत्व में आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस कार्यकर्ता, छात्र और स्थानीय पदाधिकारी इसमें शामिल हुए। सभी ने हाथों में तख्तियां लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई।
युवा कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र में नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल में लगातार भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, जिससे देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है।

"22 लाख से ज्यादा छात्रों की मेहनत पर पानी फेर दिया"

यश घनघोरिया ने कहा कि इस वर्ष आयोजित नीट परीक्षा में लगभग 22 लाख 80 हजार छात्रों ने भाग लिया। इनमें से अधिकांश छात्रों ने डॉक्टर बनने के सपने के साथ दिन-रात मेहनत की थी। लेकिन पेपर लीक के आरोपों ने छात्रों की वर्षों की तैयारी और मेहनत पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा देश के लाखों छात्रों ने अपने भविष्य के लिए कठिन परिश्रम किया, लेकिन परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार और सरकार की लापरवाही ने उनके सपनों को झटका दिया है। सरकार को छात्रों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है।

छात्रों के सम्मान और भविष्य की सुरक्षा की मांग

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाया जाए। कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

रेलवे ट्रैक पर बैठकर किया विरोध

प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ता रेलवे ट्रैक पर बैठ गए, जिससे भोपाल की ओर जाने वाली इंटरसिटी ट्रेन कुछ समय तक रुकी रही। ट्रेन में बैठे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। हालांकि पुलिस और आरपीएफ ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए प्रदर्शनकारियों को हटाया और रेल यातायात सुचारु कराया।
मौके पर आरपीएफ टीआई राजीव खरब सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों ने शांति व्यवस्था बनाए रखते हुए प्रदर्शन समाप्त कराया।

मध्य प्रदेश में लोकायुक्त संगठन को आरटीआई से छूट दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल और जताई नाराजगी


मध्य प्रदेश में लोकायुक्त संगठन को आरटीआई से छूट दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल और जताई नाराजगी

MP हाईकोर्ट ने हाल में लोकायुक्त पुलिस को हर एफआईआर (FIR) को 24 घंटे के भीतर अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का भी आदेश दिया था

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश लोकायुक्त के विशेष पुलिस स्थापना (Special Police Establishment - SPE) को सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम से छूट देने के मामले में राज्य सरकार पर बेहद तीखी और कड़ी टिप्पणी की है।

​जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने सुनवाई के दौरान मप्र सरकार की खिंचाई करते हुए न केवल लोकायुक्त को मिली इस छूट की वैधता पर सवाल उठाए, बल्कि सरकारी वकीलों के कोर्ट में रवैये को लेकर भी भारी नाराजगी जाहिर की।

​​सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ये महत्वपूर्ण आपत्तियां दर्ज की -

​1. "लोकायुक्त कोई खुफिया या सुरक्षा संगठन है क्या?"

​कोर्ट ने मप्र सरकार द्वारा वर्ष 2011 में जारी की गई उस अधिसूचना (Notification) पर गंभीर सवाल उठाया, जिसके तहत लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना (SPE) को आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया गया था।
​कानूनी पहलू : आरटीआई अधिनियम की धारा 24(4) के तहत राज्य सरकारें केवल 'खुफिया और सुरक्षा संगठनों' (Intelligence and Security Organisations) को ही आरटीआई से छूट दे सकती हैं।
​कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा कि सरकार यह साबित करे कि लोकायुक्त संगठन किस तरह से एक खुफिया या सुरक्षा संगठन की श्रेणी में आता है? कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी नहीं लाया गया है जिससे यह साबित हो। इसके अभाव में, 2011 की यह अधिसूचना आरटीआई अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है और इसे "कानूनी मंजूरी (Sanction of law)" प्राप्त नहीं माना जा सकता।

​2. संतोषजनक जवाब न मिलने पर अधिसूचना रद्द करने की चेतावनी :

​सुप्रीम कोर्ट ने मप्र के मुख्य सचिव (Chief Secretary) और महाधिवक्ता (Advocate General) को इस मामले में औपचारिक नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई पर राज्य सरकार की ओर से इस बात का संतोषजनक जवाब नहीं मिला कि लोकायुक्त को किस आधार पर छूट दी गई, तो कोर्ट 2011 की उस अधिसूचना को पूरी तरह से निरस्त (Quash) कर सकता है।

​3. सरकारी वकीलों की लापरवाही पर भारी नाराजगी:

​मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने म प्र सरकार का पक्ष रखने वाले पैनल के वकीलों के लापरवाह रवैये पर भी गंभीर टिप्पणी की।
​कोर्ट ने पाया कि जब मामला पुकारा गया, तो प्रदेश सरकार की ओर से कोई वकील मौजूद नहीं था।
​दोबारा बुलाए जाने पर जब एक काउंसिल उपस्थित हुए, तो उन्होंने मामले के तथ्यों को लेकर पूरी तरह अनभिज्ञता (Ignorance) जाहिर की।
​कोर्ट ने कहा : "यह हर दिन की बात हो गई है कि जब भी प्रदेश सरकार के मामले सूचीबद्ध होते हैं, वकील अदालत में मौजूद नहीं रहते। बुलाने पर वे आते हैं और केस की जानकारी होने से इंकार कर देते हैं।
सरकारी पैनल के वकीलों का ऐसा प्रयास बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।"
​कोर्ट ने इस संबंध में राज्य के लॉ सेक्रेटरी और मुख्य सचिव को वकीलों के इस पैनल की उपयोगिता और निरंतरता की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

​मामले की पृष्ठभूमि :

यह पूरा विवाद मप्र हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसमें हाईकोर्ट ने लोकायुक्त को 30 दिनों के भीतर आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी देने और आदेश का पालन न करने पर ₹5,000 का जुर्माना भरने का निर्देश दिया था।
राज्य सरकार ने अपनी 2011 की अधिसूचना का हवाला देकर इस आदेश को चुनौती दी थी, जो अब सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद खुद ही कानूनी संकट में घिर गई है।
​* MP हाईकोर्ट ने हाल में लोकायुक्त पुलिस को हर एफआईआर (FIR) को 24 घंटे के भीतर अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का भी आदेश दिया था,
जो इस संस्थान की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को और रेखांकित करता है।

Saturday, May 16, 2026

आइसना मध्य प्रदेश इकाई में वरिष्ठ पत्रकार कैलाश गौर प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त


आइसना मध्य प्रदेश इकाई में वरिष्ठ पत्रकार कैलाश गौर प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त


भोपाल । ऑल इंडिया स्माल पेपर्स एसोसिएशन (आइसना) मध्यप्रदेश इकाई में श्री कैलाश गौर जी को प्रांतीय उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया है।

वरिष्ठ पत्रकार कैलाश गौर जी की संगठन के प्रति कर्मठता और जुझारू छवि को देखते हुए संगठन के मध्य प्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष विनय जी. डेविड ने मध्यप्रदेश प्रांतीय इकाई में शामिल करते हुए उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया है।
कैलाश गौर जी ने पूर्व में कई पत्रकार संगठनों में प्रांतीय पदाधिकारी के रूप में सेवा दी है एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने दैनिक भास्कर भोपाल में कई वर्षों तक अपनी सेवा दी है। अभी हाल में इंदौर के दैनिक नवभारत में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।



आइसना मध्य प्रदेश इकाई में वरिष्ठ पत्रकार कैलाश गौर प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त



ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर्स एसोसिएशन (आइसना) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शिव शंकर त्रिपाठी जी ने आशीर्वाद एवं सभी संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्य गणों की ओर से आपको इस विशेष अवसर पर ढेर सारी शुभकामनाएं दी गई है।
आप सभी पदाधिकारी एवं सदस्यगण कैलाश गौर जी को इस विशेष अवसर पर बधाइयां शुभकामनाएं दे सकते हैं।
शुभकामनाओं सहित

विनय जी. डेविड
9893221036
प्रांतीय अध्यक्ष (मध्य प्रदेश)
ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
(आइसना)

Tuesday, May 12, 2026

कोर्ट का बड़ा फैसला देखें : मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का डर दिखाकर 85 लाख सब्सक्राइबर्स वाले 4PM चैनल को बंद कर दिया, कोर्ट को कहना पड़ा चैनल बहाल करो

कोर्ट का बड़ा फैसला देखें : मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का डर दिखाकर 85 लाख सब्सक्राइबर्स वाले 4PM चैनल को बंद कर दिया, कोर्ट को कहना पड़ा चैनल बहाल करो


मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का डर दिखाकर 85 लाख सब्सक्राइबर्स वाले 4PM चैनल को बंद कर दिया. लेकिन जब मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुँचा तो सच अदालत के रिकॉर्ड में खुद सामने आ गया.

कोर्ट ने साफ लिखा कि 4PM पर लगभग 50 हजार वीडियो थे और उनमें से सिर्फ 26 वीडियो पर आपत्ति जताई गई.
फिर सवाल ये है कि 50 हजार वीडियो वाले पूरे चैनल को क्यों बंद किया गया ! क्या यही लोकतंत्र है !
अगर 26 वीडियो पर विवाद था तो कानून के मुताबिक उन्हीं वीडियो पर कार्रवाई होनी चाहिए थी.
लेकिन यहाँ पूरा चैनल बंद कर दिया गया. यानी निशाना वीडियो नहीं था. निशाना आवाज थी.
सरकार अदालत में राष्ट्रीय सुरक्षा और पब्लिक ऑर्डर जैसे भारी-भरकम शब्द लेकर पहुँची. लेकिन आखिर में कोर्ट को कहना पड़ा कि कथित आपत्तिजनक वीडियो अस्थायी रूप से ब्लॉक करो और चैनल बहाल करो.
मतलब साफ है. करोड़ों दर्शकों की आवाज बंद करने की कोशिश की गई.
आज देश में हालत ये है कि सरकार से सवाल पूछो तो राष्ट्रविरोधी सच दिखाओ तो खतरा और सत्ता की आलोचना करो तो पूरा चैनल बंद.



लेकिन याद रखिए.
4PM बिकने वालों में नहीं है.
डरने वालों में नहीं है.
झुकने वालों में नहीं है.
मोदी सरकार पूरी ताकत लगाकर भी सच की आवाज को स्थायी रूप से बंद नहीं कर सकी.
आखिरकार अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज हो गया कि 50 हजार वीडियो वाले चैनल को सिर्फ 26 वीडियो के नाम पर बंद किया गया था. साथ ही ये आज तक नहीं बताया गया कि इन 26 विडियो में आपत्तिजनक क्या था !
इतिहास गवाह है.
सत्ता हमेशा सवालों से डरती है.
और जब सरकार मीडिया से डरने लगे, समझ लीजिए सच अभी जिंदा है


सच की जीत हुई है। आवाज बंद करने की एक और कोशिश नाकाम साबित हुई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 4PM चैनल को खोलने का फैसला जारी कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि चैनल पर 50 हजार वीडियो अपलोड किए गए हैं। सरकार को 26 वीडियो पर आपत्ति है, तो सिर्फ उन वीडियो को temporary तौर पर ब्लॉक किया जाए। और सरकार कारण भी बताए कि उन 26 वीडियो में क्या दिक्कत है? साथ ही, सरकार, 4PM को उन 26 वीडियो पर अपना पक्ष रखने के लिए समय दे। इस फैसले से एक बार फिर साबित हो गया है, देश में सच अभी कहा जाता रहेगा। और ये भी कि सरकार इस तरह से मनमाने फैसले नहीं ले सकती। और सवाल पूछना, सच दिखाना ही असली देशभक्ति है। 4PM बिना डरे, बिना दबे, सच कहता रहेगा। इस मौके पर आप सभी दर्शकों का शुक्रिया, आभार।











Monday, May 11, 2026

राज्य शासन द्वारा बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच के आदेश, रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी 3 महीने में देंगे रिपोर्ट


राज्य शासन द्वारा बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच के आदेश,  रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी 3 महीने में देंगे रिपोर्ट


जबलपुर.  मध्य प्रदेश सरकार ने जबलपुर के बरगी बांध में हुई क्रूज दुर्घटना की न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं. इस जांच के लिए ‘राज्य शासन जांच आयोग अधिनियम, 1952’ के तहत एक सदस्यीय आयोग नियुक्त किया गया है. उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी इस आयोग की अध्यक्षता करेंगे.



30 अप्रैल को हुआ था हादसा
बरगी बांध में यह दुखद हादसा 30 अप्रैल को हुआ था. इस दुर्घटना में 13 लोगों की मौत हो गई थी. हादसे के बाद कई दिनों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था. इस मामले को लेकर जिला अदालत से लेकर हाई कोर्ट तक में अपील की जा चुकी है. अब सरकार ने आधिकारिक तौर पर न्यायिक जांच के बिंदु तय कर दिए हैं.
जांच के लिए तय किए गए 5 मुख्य बिंदु
शासन ने आयोग के लिए निम्नलिखित कार्यक्षेत्र निर्धारित किए हैं:
1. हादसे के कारण और जिम्मेदारी: आयोग दुर्घटना के असली कारणों का पता लगाएगा और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों या पक्षों का निर्धारण करेगा.
2. राहत कार्यों की समीक्षा: हादसे के दौरान और उसके बाद किए गए बचाव कार्यों और राहत कार्यों की पर्याप्तता की जांच की जाएगी.
3. सुरक्षा ऑडिट: प्रदेश में चल रही सभी नौकाओं और क्रूज का ऑडिट होगा. यह जांच ‘इनलैंड वेसल्स एक्ट, 2021’ और ‘एनडीएमए बोट सेफ्टी गाइडलाइंस’ के आधार पर होगी.
4. नई एसओपी (SOP): राज्य में क्रूज और नौकाओं के सुरक्षित संचालन और रख-रखाव के लिए एक समान ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) तैयार की जाएगी.
5. त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT): जल पर्यटन वाले स्थानों पर आपात स्थिति से निपटने के लिए ‘क्विक रिस्पॉन्स टीम’ के गठन की व्यवस्था सुनिश्चित करना.

Sunday, May 10, 2026

3 किलो 110 ग्राम गांजा कीमती लगभग 1 लाख 55 हजार 500 रूपये का एवं 1 मोबाइल, 2 टेªन टिकिट, थैला, गमछा जप्त


मादक पदार्थ गांजा की तस्करी में लिप्त आरोपी पुलिस गिरफ्त में


मादक पदार्थ गांजा की तस्करी में लिप्त आरोपी पुलिस गिरफ्त में

जबलपुर . पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री सम्पत उपाध्याय (भा.पंु.से.) द्वारा सभी राजपत्रित अधिकारियो एवं थाना प्रभारियो को मादक पदार्थो की तस्करी मे लिप्त आरेापियों की पतासाजी कर उनके विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही हेतु आदेशित किया गया है ।

आदेश के परिपालन में नगर पुलिस अधीक्षक गोरखपुर श्री एम.डी. नागोतिया के मार्गदर्शन में थाना संजीवनीनगर की टीम को 3 किलो 110 ग्राम गांजा के साथ आरोपी को रंगे हाथ हाथ पकडा गया है।

थाना प्रभारी संजीवनी नगर श्री बी.डी. द्विवेदी ने बताया कि दिनॉक 09-05-2026 को विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली कि अंधमुख वायपास तरफ से जसूजा सिटी के बीच एक व्यक्ति हाथ में सफेद रंग का थैला लिये हुये अवैध मादक पदार्थ गांजा बेचने की फिराक में घूम रहा है, यदि तुरंत दबिश दी गयी तो रंगे हाथों पकड़ा जायेगा।

सूचना पर एन.डी.पी.एस. एक्ट के प्रावधानो के तहत कार्यवाही करते हुये तत्काल योजनाबद्ध तरीके से मुखबिर के बताये स्थान पर दबिश दी गयी जहां मुखबिर के बताये हुलिये का व्यक्ति मचान फैमिली ढाबा ट्रांसफार्मर के पास हाथ में कपड़े का सफेद लाल रंग का थैला लिये घूमते दिखा, जिसे घेराबंदी कर पकड़ा, नाम पता पूछने पर अपना नाम शिवबालक पटेल उम्र 65 वर्ष निवासी पोलीपाथर बागड़ा दफाई रोड ग्वारीघाट बताया, जिसे सूचना से अवगत कराते हुये तलाशी लेने पर कब्जे मे रखे थैला को चैक करने पर थैले के अंदर भगवा रंग के गमछे में लिपटे हुये तीन पैकेट में मादक पदार्थ गांजा रखा हुआ मिला,

तौल करने पर कुल 3 किलो 110 ग्राम गांजा कीमती लगभग 1 लाख 55 हजार 500 रूपये का होना पाया गया, उक्त गांजा के संबंध मेें पूछताछ पर ब्यौहारी जिला शहडोल निवासी शिवे के कहने पर उक्त गांजा लाकर जबलपुर में शिवे द्वारा बताये व्यक्ति को देने हेतु लाना बताया, आरोपी पहने हुये कपड़ोें की जेब में 1 सेमसंग कम्पनी का कीपेड मोबाइल, 2 टेªन टिकिट, पर्स रखे मिला, आरोपी के कब्जे से 3 किलो 110 ग्राम अवैध मादक पदार्थ गांजा, 1 सेमसंग कम्पनी का कीपेड मोबाइल, 2 टेªन टिकिट, पर्स, भगवा रंग का गमछा जप्त करते हुये आरोपी शिवबालक पटेल के विरूद्ध धारा 8, 20 एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्यवाही की गई।

उल्लेखनीय भूमिका

आरोपी को रंगे हाथ गांजे के साथ पकड़ने में उप निरीक्षक दुर्गेेश मरावी चौकी प्रभारी धनवंतरी नगर, सहायक उप निरीक्षक श्रीकांत मिश्रा, प्रधान आरक्षक राजेश तिवारी, आरक्षक आशीष प्रताप सिंह की सराहनीय भूमिका रही।

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय एवं उनके 9 मंत्रियों ने ली शपथ


तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय एवं उनके 9 मंत्रियों ने ली शपथ


तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) चीफ और एक्टर से नेता बने सी जोसेफ विजय तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्होंने तमिल में शपथ ली। इस दौरान राहुल गांधी भी मौजूद रहे।

शपथ लेते समय विजय निर्धारित लाइनों के अलावा और बातें बोलने लगे, इस पर राज्यपाल अर्लेकर ने उन्हें टोक दिया और कहा कि वही पढ़ें जो लिखकर दिया है। विजय के साथ 9 और मंत्री भी शपथ ले रहे हैं। इनमें एन आनंद, आधव अर्जुन, डॉ. केजी अरुणराज, केए सेंगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, आर निर्मलकुमार, राजमोहन, डॉ. टीके प्रभु, सेल्वी एस कीर्तना का नाम शामिल है। ये सभी विजय की पार्टी TVK के ही विधायक हैं।

अभी सहयोगी दलों के किसी विधायक को विजय के पहले मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है। इससे पहले शनिवार को विजय ने राज्यपाल अर्लेकर को TVK, कांग्रेस, CPI, CPM, VCK और IUML के 121 विधायकों के समर्थन पत्र सौंपे। इसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का न्योता दिया। विजय की दो साल पुरानी पार्टी TVK ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में 234 में 108 सीटें जीतीं।

अब विजय के पास 121 विधायक हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 118 है। तमिलनाडु में 1967 के बाद यानी गैर-द्रविड़ दल का मुख्यमंत्री होगा। इससे पहले 1963-1967 तक कांग्रेस सरकार में एम भक्तवत्सलम मुख्यमंत्री थे।

थालापति विजय ने तमिनलाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, राज्य के नए सीएम बने


थालापति विजय ने तमिनलाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, राज्य के नए सीएम बने

टीवीके (TVK) प्रमुख थलपति विजय ने रविवार को तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में आयोजित समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय (थलपति विजय) ने 10 मई 2026 को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

यह 1967 के बाद पहली बार है जब द्रविड़ पार्टियों (DMK-AIADMK) से इतर किसी दल का नेता तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बना है। उनकी तमिलगा वेटरी कझगम (TVK), ने 108 सीटें जीतकर इतिहास रचा, और गठबंधन सहयोगियों (कांग्रेस, VCK, CPI, CPI(M), IUML) के समर्थन से बहुमत प्राप्त किया।

vijay : मैं जोसेफ़ विजय थलापति शपथ लेता हूं कि ,

" मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगा , मैं भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखूँगा ,

मैं तमिलनाडु राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करूँगा तथा मैं भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना, सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार न्याय करूँगा ",

#CMJosephVijay Chief Minister of Tamil Nadu में टीवीके प्रमुख सी जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। समारोह में बड़ी भीड़ और राजनीतिक हस्तियों की मौजूदगी देखी गई।

शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सीएम विजय सीधे राज्य सचिवालय पहुंचे और अपना कार्यभार संभाला। पद संभालते ही उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था की समीक्षा के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और नौकरशाहों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की । इस बैठक में उन्होंने अधिकारियों को राज्य में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
इस अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर विजय को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी और राज्य के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से साथ मिलकर काम करने की उम्मीद जताई। इसके जवाब में सीएम विजय ने आभार व्यक्त करते हुए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया।

Saturday, May 2, 2026

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया आपराधिक अवमानना ​​का नोटिस

 


बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, जबलपुर के अध्यक्ष, एडवोकेट धन्य कुमार जैन को आपराधिक अवमानना ​​का नोटिस जारी किया।

BCI की रिट याचिका के अनुसार, धन्य कुमार जैन ने जबलपुर के पुलिस अधीक्षक को शिकायत लिखी थी, जिसमें उन्होंने BCI के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज-जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली उच्च-स्तरीय चुनाव समिति के खिलाफ झूठे आरोप लगाए।

बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों की राज्य बार काउंसिल के चुनाव लड़ने की पात्रता के संबंध में जैन ने अपने पत्र में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ भी कथित तौर पर टिप्पणियां की थीं। अन्य बातों के अलावा, उन्होंने समिति के प्रमुख के रूप में जस्टिस धूलिया की CJI द्वारा की गई नियुक्ति पर संदेह जताया था, CJI पर उनके प्रति दुर्भावना रखने का आरोप लगाया। साथ ही बार निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण के CJI पीठ के आदेश को "न्यायिक पद का दुरुपयोग" बताते हुए उस पर सवाल उठाया।

इसके अलावा, जैन ने अपनी शिकायत में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर भी सवाल उठाया, जिसमें उसने दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज-जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया; जस्टिस वर्मा एक विवाद में तब घिर गए, जब आग लगने की एक घटना के बाद उनके आवास पर कथित तौर पर भारी मात्रा में नकदी मिली थी। शिकायत में दावा किया गया कि यह देश के लोकतंत्र के खिलाफ "देश की न्यायपालिका द्वारा किया गया जघन्य अपराध" है।

इसी पृष्ठभूमि में, CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने अवमानना ​​नोटिस का आदेश पारित किया। यह आदेश सीनियर एडवोकेट गुरु कृष्ण कुमार (BCI की ओर से) की दलीलें सुनने के बाद दिया गया। उन्होंने तर्क दिया कि जो कुछ हुआ वह "पूरी तरह से दुर्भाग्यपूर्ण" था और उस पर किसी न किसी तरह की कार्रवाई होनी चाहिए।

जस्टिस बागची ने टिप्पणी की,

"क्या वकीलों के नेता से इसी तरह के संयम की उम्मीद की जाती है?"

खंडपीठ ने धन्य कुमार जैन को नोटिस जारी कर यह बताने को कहा—

- उन पर 'अदालत की अवमानना ​​अधिनियम' के तहत आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए?

- उनका बार लाइसेंस क्यों न निलंबित कर दिया जाए?

- उन्हें बार एसोसिएशन के पदाधिकारी के पद से क्यों न हटा दिया जाए?

हालांकि, BCI ने राज्य को यह निर्देश देने की प्रार्थना की थी कि वह धन्य कुमार जैन द्वारा की गई शिकायत पर कोई कार्रवाई न करे, लेकिन खंडपीठ ने इस संबंध में कोई एकतरफा (Ex-Parte) आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।

CJI ने कहा,

"उन्हें पेश होने दीजिए... हमें अब भी उम्मीद है कि कुछ बेहतर समझ काम आएगी। आखिर, वकील तो वकील ही होते हैं। लेकिन जब हमें लगता है कि समझदारी की कोई गुंजाइश ही नहीं है तो हमें यह भी पता है कि नासमझ लोगों से कैसे निपटना है।"

Case Title: BAR COUNCIL OF INDIA Versus STATE OF MADHYA PRADESH AND ORS., W.P.(Crl.) No. 157/2026

बरगी क्रूज़ हादसे पर TNP NEWS की नज़रे लगातार बनी रही,TNP ने दिया बड़ी कवरेज़

 बरगी क्रूज़ हादसे पर TNP NEWS की नज़रे लगातार बनी रही,TNP ने दिया बड़ी कवरेज़...

https://www.youtube.com/watch?v=rhOXjJWwyPQ

जबलपुर जिला ब्यूरो विनय जी. डेविड और *बरगी संवाददाता* शिवम अवधिया के साथ
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*Vinay G. David*
जिला ब्यूरो चीफ, जबलपुर : 9893221036, 8989655519 ( व्हाट्सएप न. )
पता : 881/A (old), 1293 (new)
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अमित रजक

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जिला ब्यूरो प्रमुख / तहसील ब्यूरो प्रमुख / रिपोर्टरों की आवश्यकता है

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ANI NEWS INDIA

‘‘ANI NEWS INDIA’’ सर्वश्रेष्ठ, निर्भीक, निष्पक्ष व खोजपूर्ण ‘‘न्यूज़ एण्ड व्यूज मिडिया ऑनलाइन नेटवर्क’’ हेतु को स्थानीय स्तर पर कर्मठ, ईमानदार एवं जुझारू कर्मचारियों की सम्पूर्ण मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले एवं तहसीलों में जिला ब्यूरो प्रमुख / तहसील ब्यूरो प्रमुख / ब्लाक / पंचायत स्तर पर क्षेत्रीय रिपोर्टरों / प्रतिनिधियों / संवाददाताओं की आवश्यकता है।

कार्य क्षेत्र :- जो अपने कार्य क्षेत्र में समाचार / विज्ञापन सम्बन्धी नेटवर्क का संचालन कर सके । आवेदक के आवासीय क्षेत्र के समीपस्थ स्थानीय नियुक्ति।
आवेदन आमन्त्रित :- सम्पूर्ण विवरण बायोडाटा, योग्यता प्रमाण पत्र, पासपोर्ट आकार के स्मार्ट नवीनतम 2 फोटोग्राफ सहित अधिकतम अन्तिम तिथि 30 मई 2019 शाम 5 बजे तक स्वंय / डाक / कोरियर द्वारा आवेदन करें।
नियुक्ति :- सामान्य कार्य परीक्षण, सीधे प्रवेश ( प्रथम आये प्रथम पाये )

पारिश्रमिक :- पारिश्रमिक क्षेत्रिय स्तरीय योग्यतानुसार। ( पांच अंकों मे + )

कार्य :- उम्मीदवार को समाचार तैयार करना आना चाहिए प्रतिदिन न्यूज़ कवरेज अनिवार्य / विज्ञापन (व्यापार) मे रूचि होना अनिवार्य है.
आवश्यक सामग्री :- संसथान तय नियमों के अनुसार आवश्यक सामग्री देगा, परिचय पत्र, पीआरओ लेटर, व्यूज हेतु माइक एवं माइक आईडी दी जाएगी।
प्रशिक्षण :- चयनित उम्मीदवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण भोपाल स्थानीय कार्यालय मे दिया जायेगा, प्रशिक्षण के उपरांत ही तय कार्यक्षेत्र की जबाबदारी दी जावेगी।
पता :- ‘‘ANI NEWS INDIA’’
‘‘न्यूज़ एण्ड व्यूज मिडिया नेटवर्क’’
23/टी-7, गोयल निकेत अपार्टमेंट, प्रेस काम्पलेक्स,
नीयर दैनिक भास्कर प्रेस, जोन-1, एम. पी. नगर, भोपाल (म.प्र.)
मोबाइल : 098932 21036


क्र. पद का नाम योग्यता
1. जिला ब्यूरो प्रमुख स्नातक
2. तहसील ब्यूरो प्रमुख / ब्लाक / हायर सेकेंडरी (12 वीं )
3. क्षेत्रीय रिपोर्टरों / प्रतिनिधियों हायर सेकेंडरी (12 वीं )
4. क्राइम रिपोर्टरों हायर सेकेंडरी (12 वीं )
5. ग्रामीण संवाददाता हाई स्कूल (10 वीं )

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