Saturday, July 23, 2016

राज्य में बह रही भ्रष्टाचार की गंगोत्री ?

अवधेश पुरोहित @ Toc News
भोपाल। राज्य सरकार के मुखिया शिवराज सिंह और उनके मंत्रिमण्डल के सदस्य भले ही राज्य को जीरा टालरेंस का दावा करते हों तो वहीं यह सरकार भय, भूख और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने के वायदे पर सत्ता में काबिज हुई हो, लेकिन यदि उमा भारती और बाबूलाल गौर के शासनकाल को छोड़ दिया जाए तो राज्य की सत्ता की कुर्सी पर शिवराज सिंह के विराजते ही राज्य में जिस तरह से मंत्रियों, अधिकारियों, सत्ता के दलालों और ठेकेदारों का जो रैकेट सक्रिय हुआ जिसकी चपेट में शायद ही ऐसी कोई सरकारी योजना हो जिसमें फर्जीवाड़ा न हुआ हो और ऐसा भी नहीं इस फर्जीवाड़े के चलते लोगों ने सरकारी योजनाओं को चूना लगाकर अपनी तिजोरी न भरी हो फिर चाहे वह प्रदेश के इतिहास के शिवराज सिंह के कार्यकाल में हुआ व्यापमं का भ्रष्टाचार हो या डीमेट या कृषकों के नाम पर आयेदिन सरकारी योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार की स्थिति यह है कि उसके चलते राज्य की खेती किसानी तो चौपट हो ही रही है

तो वहीं किसान बर्बादी के रास्ते पर पहुंचकर इस धंधे को छोडऩे का मन बना रहा है और ऐसे में किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी खेती किसानी जो कि पूरी तरह से सरकारी अधिकारियों के संरक्षण में की जा रही है उसके हर होने वाले उत्पादन की हजारों लाखों रुपये की बिक्री दिखाकर पता नहीं शिवराज सिंह चौहान क्या संदेश दे रहे हैं या फिर यूं कहें कि जैसा कि खेती किसानी की आय का सहारा लेकर लोग ब्लैक मनी को व्हाइट करने का जो सिलसिला अपनाते हैं उसी रास्ते पर चलकर शिवराज सिंह भी अपनी काली कमाई खेती में आय दिखाकर करने का काम कर रहे हैं,

ऐसी आम जनों में चर्चा है। कुल मिलाकर भ्रष्टाचार की जड़ें इस राज्य में ऊपर से नीचे तक इस तरह फैल गई हंै कि जिसके चलते न तो राज्य में किसी गरीब की सुनवाई है और न ही उसकी बिना चढ़ोत्री के आगे फाइल खिसकती नजर आ रही है, जिसका जीता-जागता उदाहरण है राज्यभर में होनेवाली जनसुनवाई और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में आने वाली शिकायतें इन शिकायतों और जनसुनवाई में बढ़ रही शिकायतें इस बात का सुबूत हैं कि राज्य में सत्ता में बैठे लोगों के लाख यह घोषणा करने कि प्रदेश जीरो टालरेंस की दिशा में आगे बढ़ रहा है की पोल खोलती नजर आ रही हैं लेकिन इसके बावजूद भी हमारे राज्य के शासक प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त करने का दावा करने से नहीं थक रहे हैं,

राज्य में आयेदिन रिश्वत लेते पकड़े जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों की घटनायें भी इस बात का सबूत हैं कि राज्य में बिना लक्ष्मी दर्शन के कोई काम लोगों के नहीं हो रहे। इसके पीछे का कारण लोग बताते हैं कि जब पटवारी से लेकर कलेक्टर तक की पदस्थापनायें बिना सत्ता की देवी को चढ़ोत्री चढ़ाए नहीं की जाती हैं तो फिर ऐसी स्थिति में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अपने बीवी के जेवर या जमीन जायदाद बेचकर तो सत्ता की देवी को चढ़ोत्री नहीं चढ़ाएगा वह तो इस चढ़ोत्री की वसूली के लिए जनता को ही माध्यम बनाएगा, यही स्थिति है कि राज्य में आज चहुंओर भ्रष्टाचार का बोलबाला है और इस बोलाबाला के चलते चाहे प्रदेश की आधी आबादी को दिये जाने वाला खाद्यान्न हो या फिर नन्हें मुन्ने बच्चों के कुपोषण होने का मामला हो या फिर गर्भवती महिलाओं के पोषण आहार का मामला हो,

इन सबमें डकैती डालकर राज्य के अधिकारी सत्ता की देवी को तो चढ़ोत्री चढ़ाने में लगे हुए हैं तो वहीं अपनी तिजोरी भरने का काम कर रहे हैं, जहां तक राज्य में अति कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाले पोषण आहार का मामला हो, तो इस मामले में सीधे राज्य के पोषण आहार बनाने वाली कम्पनियां, अधिकारी, पत्रकार और मुख्यमंत्री के चहेते आईएएस अधिकारी इस काम में वर्षों से लगे हुए हैं तभी तो राज्य में कुपोषित बच्चों के कुपोषण तो ठीक नहीं हो पाया लेकिन हाँ यह जरूर है कि मुख्यमंत्री के आस पास रहने वाले आईएएस अधिकारी जो कि एमीएग्रो में एमडी के रूप में पदस्थ रहे हैं वह जरूर पोषित हो गये हैं।

राज्य में अकेले कुपोषण आहार में डाका डालने का काम ही नहीं बल्कि ऐसे कई विभाग हैं जिनमें हितग्राहियों के लिये चलाई जा रही तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं में गड़बड़झाला और कागजी घोड़े दौड़ाकर जिस तरह से फर्जीवाड़ा कर सरकारी रकम में डकैती डालने का काम मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द रहने वाले नेताओं और आईएएस अधिकारियों के संरक्षण में धड़ल्ले से चल रहा है ऐसा नहीं कि यह सब नि:स्वार्थ भावना से हो रहा है

इसमें भी कुछ न कुछ लक्ष्मी दर्शन का खेल तो है ही, कुल मिलाकर मुख्यमंत्री के चहेते आईएएस अधिकारियों के संरक्षण में जिस तरह से भ्रष्टाचार दिन-दूना रात चौगुना राज्य में सुरसा की तरह पनप रहा है जिसके चलते सरकारी योजनाओं में डाक डालने और फर्जी आंकड़ेबाजी का खेल भी जोरों से जारी है, फिर चाहे वह कुपोषण आहार का मामला हो या फिर जल संसाधन विभाग का, जल संसाधवन विभाग में भजकलदारम के खेल के चलते भ्रष्टाचार के आरोपी एएनसी चौबे को पांचवीं बार संविदा नियुक्ति मिलना भी इस बात का प्रमाण है कि राज्य में भजकलदारम और लक्ष्मी दर्शन का खेल प्राथमिकता से जारी है और इसी खेल के चलते जहां भ्रष्टाचार चहुंओर पनप रहा है इसके बावजूद भी सरकार का यह जीरो टालरेंस का दावा एक जुमला मात्र बनकर रह गया है।

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