Saturday, May 22, 2010
प्रधान बनकर शासन का लाखों रूपये डकार
लोक निर्माण विभाग में फर्जीवाड़ा
hopaal// अवधेश भार्गव (टाइम्स ऑफ क्राइम)
लोक निर्माण विभाग ठेकेदारों और कथित बिचौलियों के हाथों का खिलौना बन गया है। एक और करोड़ों के ठेके फर्जी ठेकेदारों ने हथिया रखे हैं, वहीं अस्थाई प्रभारी मुख्यय अभियंताओं को प्लांटेशन की मानिन्द इधर-उधर रोपा जा रहा है। इस लचर व्यवस्था से हर अधिकारी जिम्मेदारी ओढऩे के बजाय गैर जिम्मेदाराना रवैया अखित्यार करते नजर आ रहे हैं। विभाग में इंजिनीयरों की कमी और सरकार के सौतेले व्यवहार को भांपकर बुजुर्ग अधिकारियों ने अपने चहेतों को विभिन्न श्रेणियों में पंजिकृत कराकर स्वयं पार्टनर बन गये हैं। चेहरे प
र सलवटें चढऩे के बावजूद कांपते हाथों वाले अपना रूतबा बखूबी गांठते हुए विभाग के बजट का एक मोटा हिस्सा बंदरबांट कर रहे हैं। यह सब देखने की फुरसत सरकार के पास नहीं है। लोक निर्माण विभाग की वेबसाईट खोलकर देखी जाए तो मालूम पड़ेगा कि इस भारी भरकम विभाग में 1236 ठेकेदार विभिन्न श्रेणियों में पंजीकृत हैं वर्ष 2009 की स्थिति में अ-5 श्रेणी के 404 ठेकेदार अ-4 श्रेणी के जनवरी 2007 की स्थिति में 385 ठेकेदार तथा अ-3 श्रेणी के जुलाई 2007 की स्थिति में 449 ठेकेदार पंजीकृत हैं। तकनीकी तथा वैधानिक दृष्टि से देखा जाए तो इन सारे ठेकेदारों के पंजियन अवैध हो चुके है। क्योंकि 6 माह के शोध पत्र के आधार पर विभाग ने इनका पंजीयन 5 वर्ष की अवधि के लिए कर दिया है। पंजियन में जो शोधपत्र प्रयुक्त किए गए है, वह भी एक चौथाई कूटरचित है जिनकी पुष्टि कराने की जरूरत तक नहीं समझी गई। हद तो तब हो गई कि कुछ ठेकेदारों ने तो बैंकों के नाम से फर्जी एफडीआर बनवाकर पंजीयन में लगाई और करोड़ों के काम हथिया लिए। भारी भरकम अमले की मौजूदगी के बाद भी कोई फाइलों के पन्ने पलटने की जहमत नहीं उठाता कल पुर्जों से खेलने वाले इन लोगों से और क्या उम्मीद की जा सकती है। प्रदेश सरकार के भारी भरकम बजट वाले इस विभाग के पास तीन श्रेणियों में 1236 पंजिकृत ठेकेदारों की फौज और भरापूरा अधिकारियों का अमला मौजूद है। जिसमें दो चार को छोड़ शेष हराम की तनखाह वसूल रहे है। सरकार के नीतिनिर्धारिकों में जातिगत जहर घोलकर इंजीनियरों के बीच एक दीवार खड़ी कर दी है। जिसमें आये दिन कोई न कोई अपना सिर मारता नजर आता है। इस शीत शुद्ध का लाभ उन सेवानिवृत कमटी अधिकारियों ने उठाया और किसी फर्म में भागीदार बनकर शासकीय खजाने में दीमक की तरह प्रवेश कर गए। विभाग की वेबसाइट पर समाचार लिखे जाने तक जो जानकारी पाई गई है वह या तो जनवरी 2007 की स्थिति की है या जुलाई 2009 की। शासकीय विभागों की जानकारियां वेबसाइट पर अपलोड करने के पीछे शासन कीयह मंशा थी कि इससे विभाग की कार्यशैली में निखार आएगा और जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। और विभागों की कार्यों तथा कार्यक्षमताव प्रगति का पता चल जाएगा, किन्तु लोक निर्माण विभाग वे दो वर्ष पीछे चल रहा है। लोक निर्माण विभाग में अ-5 श्रेणी के 404 ठेकेदार पंजीकृत है इनकी अह्र्ताओं में पंजियन हेतु दो लाख रूपए की किसी बैंक द्वारा जारी एफडीआर तथा कलेक्टर द्वारा जारी बीस लाख का सशत्रपरित्रा शोध क्षमता प्रमाण पत्र (सालवेंसी) या 20 लाख की एफडीआर या बैंक गांरटी शामिल है। इसी प्रकार अ-4 श्रेणी में एक लाख रूपए को बैंक द्वारा जारी एफडीआर तथा बैंक गारंटी या कलेक्टर द्वारा जारी संपत्ति शोध प्रमाण पत्र एवं अ-3 श्रेणी में 60.000 हजार रूपए की एफडीआर तथा बैंक गारंटी और कलेक्टर का संपत्ति शोध प्रमाण पत्र आवश्यक है। विभाग ने पंजीकृत ठेकेदार से पंजीयन के समय उक्त अर्हताए तो पूरी कार्यवाही किन्तु ठेकेदारों आधिकारियों एवं कर्मचारियों का घालमोल अरसे से इस प्रक्रिया में सेध लगा रहा है। पंजियन पांच वर्ष के लिए किया जाता है तथा शोध प्रमाण पत्र छ: वर्ष का लिया जाता है। इस नियम के पीछे शासन की मंशा यह रही होगी कि यदि ठेकेदार बीच में काम छोड़ देता है अथवा भुगतान अधिक प्राप्त कर लेता है तो इस एफडीआर न शोध प्रमाण पत्र के जरिये उस सशत्रपरित्रा के राजसात कर विभाग की भरपाई की जा सके। किन्तु इस प्रक्रिया के अगले चरण में ठेकेदार द्वारा प्रस्तुत एफडीआर बैंक गारंटी व सशत्रपरित्रा शोध प्रमाण पत्र का सत्यापन विभाग द्वारा जारी करने वाले अधिकारी से करवाया जाना अनिवार्य है। किन्तु बीच का रास्ता निकलते हुए विभाग सत्यापन हेतु एक साधारण चि_ी बनाकर ठेकेदार को ही पकड़ा देता है। और ठेकेदार हाथों हाथ पुष्टि पत्र लाकर विभाग को थमा देता है। पिछले एक वर्ष में ही कलेक्टर भोपाल द्वारा श्री तेजन्दर सिंह सलूजा अ-5 श्रेणी ठेकेदार राजेन्द्र सक्सेना ठेकेदार के विरूद्ध फर्जी संपत्ति शोध प्रमाण पत्र बनाने व उसका कपटपूर्ण उपयोग करने की पुलिस में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुरूषोत्तम राजानी विद्याराम राजानी अ-5 श्रेणी ठेके दार के विरूद्ध मामला जहांगिराबाद थाने अंतर्गत विवेचना में है। इसी प्रकार कुलदीप अवस्थी अ-5 श्रेणी ठेकेदार के विरूद्ध दस लाख रूपए व दो लाख रूपए की स्टेट बैंक आफ इंडिया दतिया शाखा के नाम पर फर्जी बनवाकर पंजीयन में उपयोग करने का मामला जहांगीराबाद थाने में ही विवेचनाधीन है यह मामले स्वयं ही विभाग की कार्यशैली की कहानी बयां करते हैं। कुलदीप अवस्थी के मामले में विभाग में आदना कर्मचारी से लेकर विभाग के तत्कालीन प्रमुख अभियंता आनंद कुमार सलेट तक ने भी बहती गंगा में हाथ धोने का लाभ उठाया है। ठेकेदार ठेकेदार कुलदीप अवस्थी का मामला तो अत्यंत रोचक और दिलचस्प है सस्पेन्स और साजिश से भरी किसी फिल्मी कथानक से कम नहीं है। उक्त ठेकेदार विभाग में पूर्व से ही अ-4 श्रेणी में पंजीकृत था, वर्ष 2005 के अन्त में उसने अ-4 से अ-5 श्रेणी मेंं पंजीयन हेतु विभाग में अपना आवेदन प्रस्तुत किया जहां अ-5 श्रेणी हेतु 750 लाख के कुल कार्य तथा 150 लाख का एकल कार्य अनिवार्य मापदण्ड है। वहीं विभागीय नोट सीश में इस टीप से साथ कि उक्त अनिवार्यता के बावजूद ठेकेदार द्वारा 716161 लाख के कुल कार्य तथा 341, 40 लाख के एकल कार्य सम्मिलित है जो पिछले तीन वर्षों में किए गए है। प्रकरण दिनांक 19.12.05 को प्रमुख अभियंता एके ऐलट को प्रस्तुत किया इस टीप के साथ कि ठेकेदार द्वारा रेवेन्प्यु सालवेन्सी के स्थान पर एफडीआर देने का उल्लेख भी आवेदन में किया गया है। जो दिनांक 30.08.05 को भरतीय स्टेट बैंक दतिया शाखा द्वारा जारी एवं एक वर्ष के लिए वैद्य बताकर सीढ़ी पर सीढ़ी प्रस्तुत की गई। साथ ही विभागीय कार्यवाही न होने का शपथ पत्र भी लिया गया, समस्त औपचारिकता के बाद पंजीयन समिति द्वारा दिनांक 9 जनवरी को पंजीयन को स्वीकृत प्रदान कर 19 जनवरी को प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। दिनांक 19 जनवरी 2005 को ही स्टेट बैंक ऑफ इंडिया दतिया शाखा को बारह लाख की दो एफडीआर एवं 25 लाख की बैंक गारंटी की पुष्टि (सत्यापन) हेतु पत्र जारी कर दिया गया। यह पत्र 23 जनवरी को हस्तांतरिक होकर दतिया भेजा गया जो बैंक के उस्त्रार में फर्जी पाई गई। इसी बीच साजिश कर ठेकेदार द्वारा अ-4 श्रेणी के वर्ष 2003 में पंजीयन के समय केन्द्रीय सहकारी बैंक दतिया द्वारा जारी की गई क्रमश: 40 एवं 60 हजार की एफडीआर हथिया ली। दिनांक 14.12.06 को बिना पुष्टि कराये ठेकेदार को वापस कर दी गई। इसी बीच दतिया का एक एफडीआर फर्जी होने का पत्र विभाग को प्राप्त हो चुका था जिसे दबा दिया गया। साजिश के इस अनोखे पहलू पर नजर डाली जाए तो देखेंगे कि ठेकेदार द्वारा किए गए फर्जीवाड़े से बनवाई गई एफडीआर फर्जी होने के बावजूद आज तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई और ठेकेदार शान से ठेके लेता रहा। लगभग ग्यारह माह बाद ठेकेदार को पुलिस का भय दिखाकर जुलाई 2006 में विभाग के प्रमुख अभियंता को ठेकेदार का पंजीयन निरस्त कर अपने कर्तव्य से छुटकारा पा लिया और बिना एफआईआर कराये फाइल बंद कर दी। इसी बीच एक नाटकीय घटना कृम के तहत उक्त ठेकेदार के पुत्र तथा पत्नि जो निरस्त फर्म के भागीदार थे के नाम से नया पंजीयन कर दिया गया जबकि मापदण्डों के अनुसार आवश्यक अर्हताओं में ठेकेदार के कार्यों को ही दर्शाया गया था यानि पूर्ण तह योजनाबद्ध रूप से मुख्य अभियंता ने उक्त ठेकेदार का साथ दिया जग जाहिर है बिना मीठे के कोई जूठा नहीं खाता। इस बीच मार्च 2009 में प्रमुख्य अभियंता सेलट विभाग से मुक्त होकर सीटीई बना दिए गए। ठेकेदार अवस्थी के दो वर्ष तक शांत रहने के बाद जिन्न की तरह प्रकट हुआ और एफडीआर जो फर्जी थी वापस करने आवेदन कर दिया और फाईल पुन: पुर्नजीवित हो गई। शिकायत होने पर दिनांक 20 मई 2009 को एफडीआर वापस नहीं की जा सकती आदेश के साथ फाईल बन्द कर दी गई। जबकि विभाग के ठेकेदार के विरूद्ध पुलिस को जनना चाहिए था। लोनिवि की इस लचर व्यवस्था का नाजायज लाभ फर्जी दस्तावेज से करोड़ों के ठेके आज भी बदस्तूर जारी है। एक शिकायत पर पुलिस अधिक्षक भोपाल ने थाना जहांगीराबाद को मामला विवेचना में दे दिया है। बताया जा रहा है कि विभाग के पास नस्ती नहीं।
Thursday, May 20, 2010
भोपाल में नौकरी दिलाने के नाम पर राजधानी में जिस्मफरोशी का खेल
दार खबर हुआ करती थी. वक्त के साथ इन बातों का कोई असर नहीं बचा क्योंकि शराब खोरी अब आम हो चुकी है. लेकिन शराब के साथ शबाब का खेल आज भी चौंकाने वाला है. आम तौर पर अच्छे राजनेता इन बुराईयों से बचते रहते हैं. इतना होने के बावजूद अय्याशी और जिस्मफरोशी आज भी जारी है. वह तब और असहनीय होती है जब उसे बड़े सत्ताधीशों की उनींदी आंखें नजरंदाज करती हैं. पिछले दिनों ऐसी ही एक बाला को पुलिस ने सूचना मिलने के बाद अपनी हिरासत में ले लिया लेकिन जब कुछ ही देर मेें पुलिस के आला अफसरों के पास फोन पहुंचे तो खुद की नौकरी बचाने की जद्दोजहद शुरु हो गई और पुलिस ने उस बाला को आनन फानन छोड़ देने में ही अपनी भलाई समझी. प्रथम पृष्ठ का शेष.....गुरेज तो इस बात का है कि यह देह का यह गंदा खेल एक धर्म के ठेकेदार के सहयोग से चलाया जा रहा है. मामला विधायक विश्रामगृह के सामने स्थापित कात्यायिनी शक्तिपीठ का है. यहां के महंत स्वामी पुष्करानंद को सत्ता के गलियारों में खासा सम्मान मिलता रहा है. चूंकि यह क्षेत्र विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में आता है इसलिए आम तौर पर सरकार
यहां के मामलों में दखल भी नहीं देती है. विधानसभा की एक अधिकारी तो इस शक्तिपीठ से ही शक्तियां लेती रहीं हैं और सत्ता के गलियारों में धमाचौकड़ी मचाती रहती हैं. ऐसे ही कई मंत्री, विधायक और अधिकारी भी धार्मिक कारणों से शक्तिपीठ के कार्यक्रमों में शिरकत करते रहे हैं. शक्ति का केन्द्र होने के कारण कई दिग्गजों का भी वरद हस्त इस मंदिर को मिलता रहा है.यही कारण है कि सुरक्षा के मसले पर तमाम मशक्कत के बावजूद शक्तिपीठ के मंदिर को प्रशासन ने यहां से नहीं हटाया. लेकिन विधानसभा के विशेषाधिकार में सेंध लगाता यह प्रतिष्ठान लड़की बरामद होने की घटना से एक बार फिर विवादों में आ गया. पुलिस को सूचना मिली कि कात्यायिनी शक्तिपीठ में एक लड़की उमरिया से लाई गई है और उसे चालीस हजार रुपए की पेशगी पर जिस्मफरोशी के लिए भेजा जा रहा है. सहसा पुलिस को भी भरोसा नहीं हुआ और उसने कोई कार्रवाई करने से इंकार कर दिया. लेकिन जब पुलिस के कई अफसरों तक यह बात पहुंची तो जिला पुलिस ने डरते सहमते मंदिर परिसर में अपने सिपाही भेजे. उन्हें बताया गया कि यहां तो साहू समाज की किसी नवब्याहता की गोद भराई चल रही है. लेकिन जब सूत्रों ने बार बार पुलिस पर दबाब बनाया कि मंदिर के तलघर की छानबीन करें वहां उस लड़की को छुपाकर रखा गया है.उस लड़की के फोटो और वीडियो फिल्म भी मौजूद है तो पुलिस ने तलघर में जाकर लड़की को बरामद किया. उसे लाने वालों के फोन नंबर भी पुलिस को प्राप्त हो गए और अधिकारी तो तब चौंके जब बाबा के मोबाईल में कई दिग्गज राजनेताओं और उनके रिश्तेदारों के फोन नंबर भी प्राप्त हुए. बाबा पुष्करानंद से पूछताछ की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि इस लड़की ने जन अभियान परिषद में नौकरी लगवाने के लिए ुएक बड़े राजनेता के पिता को बीस हजार रुपए दिए हैं. जबकि हकीकत में यह बीस हजार रुपए लड़की को जिस्म फरोशी के एवज में दिलाए जाने थे. शेष बीस हजार रुपए सभी दलालों में बंटने थे. पुलिस इस मामले की तहकीकात करती लेकिन तभी जहांगीराबाद पुलिस अफसरों के पास फोन पहुंचने लगे और उन्होंने मामला बिगडऩे से पहले लड़की को महिला पुलिस थाने पहुंचाने में ही अपनी भलाई समझी. पुलिस अभिरक्षा में लड़की कहती रही कि वह अपनी नौकरी लगवाने के लिए राजधानी पहुंची थी. उसके एक परिचित भाईजान उसे मंदिर लाए थे. अब कई सवाल खड़े होते हैं कि किसी मुस्लिम व्यक्ति को माता के मंदिर में जाने की जरूरत क्यों पड़ी. पुलिस ने दलालों के मोबाईल से किए गए काल रिकार्ड भी प्राप्त किए और तब जाकर हकीकत से परदा उठा. हकीकत तो यह थी कि यह लड़की इतनी पढ़ी लिखी भी नहीं थी कि उसे चपरासन की नौकरी भी दिलाई जा सके. इसके बावजूद पुलिस ने उसे बीस हजार रुपए दिलाए और उसके घर भिजवाने का प्रबंध किया. बाबा पुष्करानंद ने पुलिस को बताया कि उसने तो सबसे बड़े नेता के पिता को बीस हजार रुपए दिए हैं इसलिए लड़की की नौकरी जरूर लग जाएगी. यदि इस बात में थोड़ी भी हकीकत है तो यह शर्मनाक बात है.लेकिन यदि बाबा ने पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए यह तोहमत लगाई है तो यह बहुत बड़ा अपराध है और इसके लिए सरकार को बाबा का डेरा उखाड़ देना चाहिए. सरकार में बैठे नेताओं को यह भी मालूम करना चाहिए कि बाबा का जिस्मफरोशी का यह जाल कितना बड़ा है. उसे किस किस नेताओं और अफसरों का संरक्षण प्राप्त है. वह नौकरी लगवाने के बहाने से क्या मंदिर आने वाली सभी बालाओं पर भी बुरी निगाह रखता है. भाजपा सरकार सहजता से मठ मंदिरों पर अपना स्नेह रखती है. इसलिए वह आमतौर पर मंदिरों के कामकाज में हस्तक्षेप भी नहीं करती. लेकिन कुछ महीनों पहले जब सुरक्षा के नाम पर विधायक विश्रामगृह से लगी झुग्गियां हटाने की मुहिम चलाई गई तो कात्यायिनी शक्तिपीठ से लगी गौशाला को भी विस्थापित करने की बात कही गई. तब स्वामी पुष्करानंद ने काफी हो हल्ला मचाया और कहा कि धर्म विरोधी लोग मंदिर तोडऩे का षडय़ंत्र कर रहे हैं. उन्होंने राजधानी से लगे मंदिरों के मठाधीशों को भी बुलावा भेजा और मंदिर बचाने का अनुरोध किया. बाबा के बुलावे पर राजधानी के मठों के प्रभारी कात्यायिनी शक्तिपीठ पहुंचे. उनमें गुफा मंदिर के महंत चंद्रमादास, मोहनानंद ,मरघटिया हनुमान मंदिर के महंत शंकरदास, रविंद्र दास, स्वामी नवीन आनंद, संत दुर्गादास जैसे प्रतिष्ठित संत महंतों ने प्रशासन से पूछा कि मंदिर क्यों हटाया जा रहा है. तब विधानसभा के अधिकारियों ने बताया कि मंदिर को अतिक्रमण विरोधी मुहिम से कोई क्षति नहीं हुई है. उनके नकशे में पंद्रह फीट गुणा बीस फीट का मंदिर मौजूद है लेकिन गौशाला का कोई हवाला नहीं हैं. तब सभी के हस्तक्षेप से बाबा को गौशाला विस्थापित करने के लिए भदभदा के नजदीक दो एकड़ जमीन दी गई. इस जमीन पर उन्हें मंदिर के साथ साथ गौशाला बनाने की अनुमति भी दी गई थी. गौशाला के लिए आवश्यक टीन और बल्लियां भी बाबा को प्रशासन ने ही मुहैया कराईं थीं. बाबा ने इस मौके का उपयोग किया और नई जमीन स्वीकार करते हुए उस पर गौशाला भी बनवा दी. इसके बावजूद उसने मंदिर से अपना डेरा नहीं हटाया. अब जबकि मंदिर परिसर से चल रहे देह व्यापार के कारोबार की असलियत पुलिस प्रशासन के सामने आ चुकी है तब शासन को हस्तक्षेप करके इस कुरीती को बदलना होगा. यदि इस कारोबार को कुछ बड़े सत्ताधीशों की भी कृपा प्राप्त है तो भी धर्म को बदनाम करने वाले इस अड्डे को उखाड़ फेंका जाना जरूरी है. बाबा ने अपने बचाव में कहा है कि लड़की को नौकरी के लिए लाया गया था तो भी यह बात गले नहीं उतरती क्योंकि बाबा का नौकरी धंधे से आखिर क्या वास्ता. भारतीय समाज में साधु मार्गदर्शक होते हैं दलाल नहीं. फिर महिलाओं और लड़कियों के भडु़ए तो कतई नहीं हो सकते. इसलिए ऐसी किसी भी हरकत का विरोध पूरे समाज को करना होगा और बाबा की करतूतों से परदा उठाना होगा.(लड़की को बदनामी से बचाने के लिए उसका नाम नहीं दिया जा रहा है.)व्यभिचार में धराए डॉ.अशोक शर्मा के मददगारों की पोल कौन खोलेगा
कि गरीबों की दवाई पर डाका डालने वाला गिरोह अब विदा हो गया है. लेकिन डॉ. शर्मा के खिलाफ जिस तरह की कार्रवाई चल रही है उसे देखकर नहीं लगता कि सरकार पर भ्रष्टाचार का धब्बा लगाने वाले इस अधिकारी को उचित दंड देकर बीमारियों से जूझ रहे प्रदेश के आम लोगों के साथ न्याय किया जा सकेगा. ऐसा मानने के कई आधार साफ नजर आ रहे हैं. विभाग के कर्मचारी नेताओं और स्वास्थ्य विभाग को कई सालों से करीब से देखने वालों का मानना है कि विभाग के भ्रष्ट अफसरों को बचाने वाला दवा माफिया अब भी डॉ. अशोक शर्मा को मरा हाथी सवा लाख का मानकर चल रहा है. भ्रष्टाचार की गंगा बहाने वालों के लिए अब यही वह अधिकारी है जो काली कमाई के सारे राज जानता है. विभाग के मंत्री अनूप मिश्रा से लेकर सचिवालय तक के अफसरों से इसकी सीधी पकड़ है और वह किसी भी हद तक जाकर जनता के खजाने की लूटमार कर सकता है. शासन के उच्च अधिकारियों के बीच अश्लील सीडी कांड के बाद हुई मंत्रणा में यह पाया गया कि उच्च न्यायालय के जजों से सांठ गांठ करने में भी डॉ. शर्मा ने काफी हाथ पैर मारे हैं. जो बातचीत सीडी में दर्ज है उसमें उच्च न्यायालय के जजों को दी जाने वाली रिश्वत की रकम का भी हवाला दिया गया है. बताते हैं कि इस अधिकारी को ब्लैकमेल करने वाले दरअसल खुद को हाईकोर्ट का दलाल बताते हैं और उनका दावा है कि उनकी ही मदद के कारण इस अधिकारी को हाईकोर्ट से स्थगन मिल सका है. इस पूरी प्रक्रिया में स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा से लेकर सचिवालय तक के अफसरों की बदनामी हो रही है. क्योंकि इस अधिकारी के खिलाफ जो जांच चालू की गई थी उसका प्रतिवेदन पहले ही तैयार करके सचिवालय भेज दिया गया था. इसके बावजूद एक महीने चार दिनों बाद इस पर सचिवालय ने अपनी सहमति की मुहर लगाई. यह रिपोर्ट हाईकोर्ट मेें जानबूझकर नहीं भेजी गई. यदि एक साथ छह भ्रष्टाचार के प्रकरणों में जांच की असलियत उजागर हो जाती तो हाईकोर्ट को भी स्थगन देना कठिन हो जाता. 26 मार्च को जैसे ही हाईकोर्ट ने स्थगन दिया उसके बाद 28 अप्रैल को जांच प्रतिवेदन संचालनालय भेजा गया. जबकि इस प्रतिवेदन पर 23 मार्च की तारीख अंकित है. यदि 23 मार्च को तैयार किया यह प्रतिवेदन 26 मार्च को हाईकोर्ट में सरकारी वकील तक पहुंचा दिया जाता तो यह भ्रष्ट अफसर शासन के आदेशों को धता नहीं बता सकता था. अब जब शासन के आला अफसरों ने इस अधिकारी पर अपनी जांच का शिकंजा कसा है तब उससे जुड़े कई सूत्र जांच को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि जिस सुरेन्द्र उपाध्याय को जांच अधिकारी बनाया जा रहा है वह डिप्टी कलेक्टर स्तर का अधीनस्थ अधिकारी है. उसे डॉ. शर्मा का दुश्मन बताकर जांच अधिकारी इसलिए बनाया जा रहा है ताकि मिलीभगत से जांच को प्रभावित किया जा सके. इसके अलावा डॉ. शर्मा हाईकोर्ट से जांच अधिकारी की नियुक्ति को ही चुनौती दे सकें. यदि शासन स्वास्थ्य महकमे की तबियत वास्तव में ही सुधारना चाहता है तो उसे अपने ही स्वास्थ्य आयुक्त मनोहर अगनानी पर भरोसा करना होगा. यह जांच उन्हें सौंप दी जाए तभी संभव है कि गरीब की दवा के नाम पर घोटाला करने वालों का राज फाश हो सके. इसके बाद विभाग के संचालक डॉ. ए. के. मित्तल, संयुक्त संचालक डॉ. राकेश मुंशी, डॉ. के. के. ठस्सू, या डॉ. के. एल. साहू जैसे जानकार अधिकारियों को प्रस्तुत कर्ता अधिकारी बनाया जाना चाहिए. ये अधिकारी प्रकरणों के बारे में भी जानते हैं और उनका तबादला विभाग से बाहर भी नहीं किया जा सकता. जबकि सुरेन्द्र उपाध्याय का तबादला होते ही जांच की प्रकिया ढप पड़ जाएगी. यदि प्रस्तुत कर्ता अधिकारी मामले की तह तक नहीं जा सकेगा तो फिर उचित दंड का निर्धारण संभव नहीं है और शासन के आला अफसर अंधेरे में ही रहेंगे. मौजूदा जांच प्रक्रिया पर ही कई सवाल उठाए जा रहे हैं. जैसे हाईकोर्ट के 26 मार्च के आदेश के बाद स्वत: समझ लिया गया कि डॉ. शर्मा का निलंबन समाप्त हो गया है जबकि इस संबंध में शासन ने कोई आदेश निकाला ही नहीं था. निलंबन समाप्ति का आदेश निकाले बिना शासन ने भी यह कैसे मान लिया कि डॉ.शर्मा निलंबित नहीं हैं और इसके बाद उनकी छुट्टी भी मंजूर कर दी गई. इस दौरान उनका कमरा भी खाली नहीं कराया गया और गाड़ी भी वापस नहीं मांगी गई.छुट्टी पाकर वे हाईकोर्ट में अपनी जमावट करने के लिए दलालों के चक्कर काटने लगे और इसी दौरान उनकी अश्लील सीडी बना ली गई जिससे छूटने के लिए उन्हें कथित तौर पर तीस लाख रुपए देने पड़े. इसके बाद भी जब ब्लैकमेलर उनसे डेढ़ करोड़ की फिरौती मांगने लगे तो उन्हें एसटीएफ की मदद दिलाई गई और ब्लैकमेलरों को पकड़ा गया. गौरतलब है कि डॉ. शर्मा ने धार में भी ऐसा ही दवा घोटाला किया था.जिसमें जांच अधिकारी कवीन्द्र कियावत और वित्त अधिकारी रहमान ने कथित तौर पर मिलीभगत के बाद उन्हें बेदाग बरी कर दिया था. आज भी यदि उस जांच को किसी सक्षम अधिकारी से कराया जाए तो डॉ. शर्मा के काले कारनामों की कलई उतारी जा सकती है. यदि उस वक्त सही जांच हुई होती तो डॉ. शर्मा तभी बर्खास्त कर दिए गए होते. ऐसे में संचालक के पद पर रहकर उन्होंने सरकारी खजाने को जो करोड़ों रुपयों की चपत लगाई उससे प्रदेश के लोगों के लिए अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती थीं. जरूरी है कि इस भ्रष्ट अधिकारी को बुलंदियों तक पहुंचाने वाले नेताओं,अफसरों और दलालों की भी तलाश की जाए ताकि भविष्य में कोई संचालक या अन्य अधिकारी ऐसे गुलगपाड़े न कर सके. इस अधिकारी के सीडी कांड की असलियत भी उजागर होनी चाहिए ताकि पद के लिए सुरा और सुंदरी का नंगा नाच रोका जा सके. स्मार्ट कार

ये स्मार्ट कार , जी हाँ इसका नाम ही स्मार्ट कार है , मोंट्रियल सेक्यूबेक जाने वाले हाइवे पर टिम होर्तन्स के आउटलेट के बाहर देखी थी। यह कार उन लोगों के लिए है जो कार चलाते हैं और अकेले ऑफिस जाते हैं।और उनके लिए भी जो कार चलाने की तमन्ना रखते हैं।
Wednesday, May 12, 2010
विकास में बाधक है क्रिकेट: अग्रवाल
रिपोर्टर//उमेश कुमार पाण्डेय (भोपाल // टाइम्स ऑफ क्राइम)
आज जहां चारों तरफ ''क्रि
केट'' जो कि अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्ति खेल है लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है वहीं दूसरी तरफ यह विकास में बाधक भी है। यह बात ''आइसना'' के प्रान्तीय सम्मेलन में गुना में आयोजित समारोह में उभरकर सामने आयी। ऑल इण्डिया स्माल न्यूज पेपर्स एसोसिएशन का प्रान्तीय सम्मेलन 08 मई 2010 को मानस भवन गुना में आयोजित हुआ जिसमें प्रदेश भर से दूर दराज एवं ग्रामीण अंचलों से पत्रकार साथी सैकड़ों की संख्या में इक_ा हुए। समारोह की अध्यक्षता गुना विधायक राजेन्द्र सिंह कर रहे थे एवं मुख्य अतिथि के रूप में सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री श्री के. एल. अग्रवाल उपस्थित थे। समारोह की शुरूआत पत्रकारिता के क्षेत्र में विशेष रूप से योगदान देने वाले पत्रकारों को सम्मान समारोह के साथ हुआ। इसके बाद विशेष रूप से एक ही मुद्दा पूरे समय छाया रहा। श्री रमेश राष्ट्रीय एकता परिषद के उपाध्यक्ष में इसकी शुरूआत की उन्होंने कहा जहां विकास है वहां तो क्रिकेट नहीं है यह तो गरीब देशों की सौगात है। अमेरिका, चीन, जापान, कनाडा, ये देश तो क्रिकेट नहीं खेलते जबकि इनके पास सारे संसाधन मौजूद है एवं उनके पास धन की भी कमी नहीं है। क्रिकेट तो गरीब देश ही खेलते हैं। बांगलादेश, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, भारत, इत्यादि जितने भी गरीब देश हैं सब क्रिकेट के सहारे पैसा इक_ा करने में जुटे हैं। इस बात का समर्थन माननीय मंत्री जी कन्हैया लाल अग्रवाल ने भी किया। आज जिस तरफ भी आँख उठा के देखा जाय लोग टी.वी. रेडियों यहां तक सिनेमा हाल में भी उस दिन क्रिकेट का ही बोलबाला रहता है। जिस दिन भारत का मैच होता है। बच्चे, बूढ़े सभी दिन रात क्रिकेट के बुखार में ही पीडि़त हो जाते हैं। हार-जीत को खेल का हार जीत न मानकर देश के हार जीत से जोड़ के देखा जाने लगता है। ऐसे में सांप्रदायिक दंगे हो जाते हैं। ऐसा समय-समय पर हुआ भी है। और होता ही है। जहां बच्चों को सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए वो खाना-पीना छोड़कर मैच देखने में जुट जाते हैं। चाहे बोर्ड की परीक्षा हो या फिर प्रतियोगी परीक्षा। कई बार क्रिकेट के रोमांचक मुकाबले में हार-जीत के कारण लोगों को हार्ट अटैक तक आ जाते हंै। ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है। पत्रकारों के समारोह को सम्बोधित करते हुए मंत्री जी ने हर तरीके से सरकार की तरफ से यथासंभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के हित में जो भी मांगे होगी जो भी अड़चने आ रही है वो जल्द ही दूर होगी। और पत्रकारों की लेखनी सम्मान के साथ चलेगी। पत्रकारिता जो चौथा स्तम्भ माना जाती है उस पर ध्यान देने की जरूरत है आज ग्रामीण पत्रकार हो या शहरी पत्रकार उनसे दिग्विजय सरकार ने सारी सुविधाएँ छील ली है। अगर ये सेवाएँ शुरू हो जाय तो म.प्र. सरकार की (शिवराज सरकार) सौगात होगी। वहीं जहां क्रिकेट जैसे खेल पर इतना पैसा लुटाया जा रहा वहीं अगर पत्रकारों के लिए भी मासिक निर्धारण कर दिया जाये तो यह शिवराज सरकार की दूसरी सौगात होगी। वो भी अपनी रोज-रोटी चला सके एवं अपने आप को सुरक्षित महसूस करें। समारोह में उपस्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पुष्पेन्द्र बाल सिंह ने अपने उद्बोधन में पत्रकारिता से जुड़े सभी मुद्दों को बखुबी से रखा। उन्होंने पत्रकारों को निष्पक्षता, आत्ममूल्यांन, आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया वहीं दूसरी तरफ पत्रकारों पर हो रहे अत्याचारों की भी आलोचना की। पत्रकारों को न्याय मिले इस दिशा में हो रहे संघ के संघर्ष में उन्होंने कहा हम भी साथ हैं। पत्र-पत्रिकाओं की महत्वता को समझाते हुए कहा जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं तथा अब समय आ गया है कि पत्र-पत्रिकाओं की महत्वता को एक स्तर में स्वीकार किया जाना चाहिए। इसलिए इसे विशेष रूप से संरक्षण की भी जरूरत है।गुना से लौट कर रिपोर्टर उमेश पाण्डेय से सम्पर्क 95895 29987
कृषि विभाग भ्रष्टाचार की चारागाह
कृषि विभाग इन दिनों भ्रष्टाचार का अखाड़ा बना हुआ है। इस अखाड़े में कृषि विभाग के विभिन्न योजनाअंतर्गत राष्ट्रीय जलग्रहण क्षेत्र, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (दलहन/चावल) योजना, नलकूप योजना राष्ट्रीय कृषि विकास जैसी योजनाओं में उपसंचालक कृषि ललीत मोहन भगत द्वारा करोड़ों की अफरा तफरी करने पर सवालिया निशान लगाते स्वराज मजदूर यूनियन बाक्साईड खदान सरगुजा के अध्यक्ष ए.एन. पांडेय ने कृषि मंत्री भारत सरकार शरद पवार सहित प्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह मुख्य सचिव राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, संचालक कृषि एवं संयुक्त संचालक कृषि अंबिकापुर को पत्र भेजकर इन सभी मामलों की जांच करा कृषि उपसंचालक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। इतना ही नहीं। जशपुर में पदस्थ रहते ही ललीत मोहन भगत ने दवा क्रय के नाम किसानों से अंश राशि ली थी। जिसका हिसाब किताब भी सिर्फ एल.एम. भगत को ही पता है। जिसकी वर्तमान में पदस्थ कृषि उपसंचालक जशपुर ने शासन को अवगत कराया है किन्तु अब तक श्री भगत पर कार्रवाई न होना संचालनालय एवं शासन पर भी संदेह पैदा करता है उधर सरगुजा की वादियों में विभागीय सुगबुगाहट कह रही है कि एक अदना अधिकारी उपसंचालक पद पर रहते कृषि मंत्री को अपने पाकेट में रखता है। अब देखना यह है कि तेज तर्रार और नियमों के जानकार कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू वाकई उपसंचालक की पाकेट में है या फिर ऐसे भ्रष्टाचारी अधिकारी को बस्तर के दुर्गम पाकेट में भेजकर अपनी ईमानदारी का सबूत पेश करते हैं। शिकायत की जांच हेतु संचालक कृषि छगशासन ने 1-2-10 को एक पत्र संयुक्त संचालक अंबिकापुर को लिखा फलस्वरूप उपसंचालक कृषि अंबिकापुर ने शिकातकर्ता के नाम थाने में प्रकरण दर्ज करने की धमकी स्थानीय पत्रकारों को अति उत्साह में दे दी। इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ जिला सरगुजा अंबिकापुर ने उपसंचालक कृषि अंबिकापुर को दिए अपने पत्र हवाले से 3 बिन्दुओं पर सवाल खड़ा कर फटकार लगाई है। 1. राष्ट्रीय जलग्रहण क्षेत्र के अन्तर्गत अनियमितताउपसंचालक कृषि अंबिकापुर द्वारा जिला विपणन संघ अम्बिकापुर से 29.10.2009 को आदेश जारी कर 14.20 लाख की साय पर मेथ्रीन नामक दवा बिना जलागम संघ के क्रय की गई है। उक्त क्रय की गई दवा के किसानों के मध्य मुफ्त में विपरित किया गया है, जबकि इन्हें इसका अधिकार नहीं है। जिसके जांच करने पर स्थित स्वमेव स्पष्ट हो जावेगी। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (दलहन/चावल) योजनाउक्त योजना में वर्ष 2008-09 में प्राप्त राशि का व्यय न किया जाकर राशि शासन को समर्पित भी नहीं की गई, अपितु उक्त राशि से वर्ष 2009-10 में कालातित दवाईयों का क्रय किया गया है। उक्त राशि से खरीफ फसल की दवा रभी फसल के समय वितरित की गई है। जिसका कोई औचित्य नहीं है। उल्लेखनीय है कि उक्त दवाओं का क्रय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों एस.ए.डी.ओ के मांग पत्र के बिना किया गया है जिसके संबंध में छ.ग. ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ जिला सरगुजा अम्बिकापुर के पत्र क्रमांक 12 दिनांक 26.10.09 द्वारा उपसंचालक कृषि अम्बिकापुर को पत्र के बिन्दु क्रमांक-1 में पूर्व भण्डारित सामग्री का उठाव न किये जाने के संबंध में लेख किया गया है व भविष्य में मांग पत्र के आधार पर सामग्री का भण्डारण कराए जाने हेतु लेख किया गया (छायाप्रति संलग्न) उक्त पत्र को नजर अंदाज करते हुए क्रय की कार्यवाही की गई है, जिससे करोड़ों रूपये की अनियमितता की गई है। उप संचालक द्वारा अधीनस्थ अधिकारियों/कर्मचारियों को उक्त संबंध में ध्यान में लाए जाने पर उनके विरूद्ध कार्यवाही की धमकी दी जाती है। कुछ दवाई 2008 के दिसम्बर में विकास खण्डों को भेजा गया है, जिसका नाम निमोतीन एन.पी.वी. दोनों दवाई कालाति है, जिसकी जांच किया जाना आवश्यक है। आदेश दिनांक 03.09.09, 15.09.09, 03.09.09, 03.09.09, 13.08.09, 15.09.09, 27.09.09, 17.07.09, 29.09.09, 03.08.09, 17.07.09, एवं 6.10.09, उक्त दवाईयां जिला विपणन संघ के माद्यम से क्रय की गई है। (आदेशों की छायाप्रति संलग्न) उक्त आदेशों के माध्यम से क्रय की गई दवाईयां किसानों 50 प्रतिशत अनुदान कर बांटी गई है। उक्त सामग्री कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा विभिन्न प्रकार के आदान सामग्रियों के क्रय करने हेतु इस क्षेत्र के लिये अनुशंसित नहीं की गई है।
2. नलकूप योजना
उप संचालक, कृषि अम्बिकापुर द्वारा नलकूप योजना में अनुदान राशि काचेक पंप डीलरों को सीधे 18 प्रतिशत कमीशन लेकर प्रदान किया जा रहा है, जिसका आदेश दिनांक 11.11.09 को जारी किया गया है। 3. राष्ट्रीय कृषि विकास योजनाराष्ट्रीय कृषि विकास योजना से भी कार्यालय में टाईल एवं साज-सज्जा, ए.सी. रूम बनवाया गया है। जांच कर इनके विरूद्ध कार्यवाही करना उचित होगा। अत: कृपया उपरोक्त तथ्यों पर जांच समिति गठित कर श्री ललित मोहन भगत, उपसंचालक, कृषि अम्बिकापुर के विरूद्ध कार्यवाही करने का कष्ट करें। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन दलहन सरगुजा (छत्तीसगढ़ राज्य) द्वारा संचालित किया जाता है:-
(अ). इस योजना के अन्तर्गत गुलाब जैन माइक्रों न्यूट्रियेन्ट घटक के प्रदाय का लक्ष्य विकासखण्ड है इस योजना के अन्तर्गत अग्रिम राशि के विरूद्ध 500 रूपये प्रति हेक्टे. अनुदान प्रदाय करने हेतु जिला विपण अधिकारी अम्बिकापुर के कार्यालयीन पत्र क्रं. टी-7 रा.खा.सु.मि/2008-09/3136 दिनांक 03.09.09 के द्वारा किया गया है।
(ब). इसी प्रकार कार्यालयीन पत्र क्रं. टी-7 रा.खा.सु.मि/2008-09/3136 दिनांक 15.09.09 योजना अन्तर्गत माइक्रोन्यूट्रियेन्ट घटक से प्रदाय राशि के विरूद्ध 50 प्रतिशत अनुदान पर 500 रूपये प्रति हे. अनुदान दर पर विकास खण्डवार लक्ष्यानुसार माइक्रोन्यूट्रियेन्ट प्रदान करने हेतु जिला विपणन अधिकारी अम्बिकापुर को आदेशित किया गया है।
(स). उक्त योजना के एकीकृत से भी की आवश्यकता थी। नाशी जीव प्रबंधन हेतु सामग्री प्रदान करने हेतु ज्ञापन क्रं. 3098 दिनांक 03.09.09 द्वारा विकास खण्डों को प्रदान करने हेतु आदेशित किया गया है।
(द). ज्ञापन क्रं. 3134 दि. 03.09.09 द्वज्ञक्रा विकासखण्डों के लिये उक्त योजना अन्तर्गत पावर जेड एन प्रदान करने हेतु अग्रिम राशि के विरूद्ध 500 रूपये प्रति हे. अनुदान पर लक्ष्यानुसार गुलाब जैन माइक्रोन्यूटियेन्ट प्रदाय करने हेतु जिला विपणन अधिकारी अम्बिकापुर को आदेशित किया गया है। उक्त योजना के अंतर्गत कार्यालयीन पत्र कं्र. 2782 दिनांक 13.08.09 के द्वारा आई.पी.एस. योजना अन्तर्गत 500 रूपये प्रति हेक्टेयर अनुदान दर पर न्यूडोमोनास विकास खण्डवार लक्ष्यानुसार प्रदान करने का आदेश जिला विपणन अधिकारी अम्बिकापुर को किया गया है।
(ऊ). उक्त योजनान्तर्गत चिलेंटेड जिंक एडेटा 12 प्रतिशत प्रदाय करने हेतु कार्यालयीन पत्र क्रं. 3674 दिनांक 06.10.09 के द्वारा जिला विपणन अधिकारी, अम्बिकापुर को लेख किया गया है।
(इ). उक्त योजना के अन्तर्गत माइक्रोन्यूट्रियेन्ट प्रदाय करने हेतु जिला विपणन अधिकारी अम्बिकापुर को ज्ञापन क्रं. 3383 दिनांक 15.09.09 द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान पर 500 रूपये प्रति हे. अनुदान हर पर प्रदाय करने हेतु लेख किया गया है।
(ई). उक्त योजना के अन्तर्गत 19 विकासखण्डों को चिलेटेड जिंक वर्ष 2009-10 प्रदान करने हेतु ज्ञापन क्रं. 3497 दिनांक 27.09.09 द्वारा जिला विपणन अधिकारी को आदेशित किया गया है।
(2). राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (चावल योजना)
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन चावल योजना अन्तर्गत पौदा संरक्षण औषधी वर्ष 2009-10 प्रदाय करने हेतु विपणन संस्था अम्बिकापुर को कार्यालयीन पत्र क्रं. 3540 दिनांक 29.09.09 द्वारा 19 विकास कण्डों को प्रदाय करने हेतु आदेशित किया गया।
(क). उक्त योजना के अन्तर्गत बेन्टोनेट सल्फर 90 प्रतिशत प्रदान करने हेतु ज्ञापन क्रं. 3106 दिनांक 3.9.09 वर्ष 2009-10 हेतु आदेशित जिला विपणन अधिकारी को दिया गया है।
(ख). उक्त योजना के अंतर्गत 19 विकासखण्डों के लिये 2008-09 अग्रिम प्रदान राशि में जिकं ई.टी.डी.ए. प्रदाय करने हेतु जिला विपणन अधिकारी अम्बिकापुर को ज्ञापन क्रं. 2774 दिनांक 13.9.09 आदेशित किया गया है।
(ग). उक्त योजना के अन्तर्गत फफूंदनाशक एवं कीटनाशक प्रदान वर्ष 2009-10 में करने हेतु ज्ञापन कं्र. 2206 दिनांक 17.7.09 द्वारा जिला विपणन अधिकारी अम्बिकापुर को आदेशित किया गया है।
(3). राष्ट्रीय जल ग्रहण
क्षेत्र के अन्तर्गत माइक्रोवाइटरशेड में सायरफरमैथिन प्रदान करने बाबत्:- उप संचालक कृषि अम्बिकापुर सरगुजा के ज्ञापन क्रमांक टी-6/09-10/4018 दिनांक 29.10.09 द्वारा जिला विपणन अधिकारी अम्बिकापुर को सूची के अनुसार 19 विकास खण्डों को उनके सामने दर्शायों गये मात्रा 500 ग्राम पैकिंग कुल 3820 लीटर सप्लाई करने हेतु लेख करते हुए संबंधित परियोजना अधिकारियों के मुख्यालय विकास खण्ड में पहुंच कर उनसे पावती सहित देयक इस कार्यालय को भुगतान हेतु प्रस्तुत करें।
अम्बिकापुर तहसील कार्यालय में भेंट पूजा आम बात हो गयी
जहां छत्तीसगढ़ शासन हर शासकीय कार्य को पारदर्शी बनाना चाहता है वहीं शासकीय कर्मचारी भ्रष्ट आचरण के कारण लूट मचाए हुए है। शासकीय कार्यालयों में भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बन गया है। कलेक्ट्रेट परिसर में ही स्थित अनेकों शासकीय कार्यालयों में पैसों का लेन-देन खुलेआम होता है। बयान देना हो तो संबंधित शासकीय कर्मचारियों को शिष्टाचार के नाते जब तक नगद धनराशि नहीं दी जाती है वहां काम नहीं होगा, अगली तिथि देकर टरका दिया जायेगा। नजूल, अंतव्यवसायी निगम उद्योग केन्द्र ऐसे शासकीय कार्यालय है जहां बगैर राशि दिये कोई काम संभव नहीं है। जोइस परंपरा का पालन नहीं करता उसका काम होने का सवाल ही नहीं उठता कलेक्ट्रेट परिसर स्थित वे कार्यालय जहां सरकार की और से लोगों को जीविका रोजगार के साधन उपलब्ध कराने के शासकीय कार्य सम्पन्न होते है, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण जिला अंतव्यवसायी निगम, उद्योग केन्द्र, ऐसे शासकीय कार्यालय है जहां बगैर राशि दिये कोई काम संभव नही है, जो इस परंपरा का पालन नहीं करता उसका काम होने का सवाल नहीं उठता। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित वे कार्यालय जहां सरकार की और से लोगों को जीविका रोजगार के साधन उपलब्ध कराने के शासकीय कार्य संपन्न होते है, जिला ग्रामीण विकास अधिकरण जिला अंतव्यवसायी निगम, उद्योग केन्द्र, जिला शहरी विकास अधिकरण, आर.टी.ओ. ऑफिस, पंचायत के कार्यालयों में भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बन गया है। अब राशि देने की शिकायत भी नहीं करता क्योंकि आवेदक को अपना काम कराना है तो परंपरा का पालन कराकर काम करा लेना उचित समझता है। माननीय जिलाध्यक्ष सरगुजा से कलेक्ट्रेट परिसर के आम जनता से सीधे जुड़े विभागों के कार्यालयों में आकस्मिक निरीक्षण कर भ्रष्ट कर्मचारियों को दाखिल की एकमात्र उम्मीद जनता को है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना
खिलखिलाते चुटकुले---jokes
1. जज- तुम कसूरवार हो या बेकसूर ? कैदी- हुजूर, बेकसूर हूं। जज- इससे पहले भी कभी पकड़े गए हो ? कैदी-नहीं हुजूर, यह पहली ही बार है कि जब मैंने चोरी की है।
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2. बीवी पति से- न जाने इस शराब में क्या है कि आप इसे छोड़ते ही नहीं। आज मैं भी आपके साथ बार चलकर देखूंगी। बार में पहुंचते ही पति ने बार में दो पैग का ऑर्डर दिया। जब पत्नी ने जीभ पर रखा तो बोली- कितनी कड़वी है? इस पर पति बोला- देखा, हम कहते थे न कि वहां कितनी कड़वी चीज पीते हैं , पर तुम समझती थी कि हम वहां मौज करने जाते हैं।
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3. संता हनुमान जयंती पर मंदिर गए। पुजारी ने आरती की थाली संता को दी तो संता ने क्या किया ? संता ने दिया बुझा के बोला : हैपी बर्थडे हनुमान जी।
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4. संता को जैसे ही पता चला कि वह मंत्री बनाए जा रहे हैं , तो मारे खुशी के उन्होंने तुरंत पत्नी को फोन लगाया- क्या तुम एक मंत्री की पत्नी कहलाना पसंद करोगी ? संता की पत्नी: क्यों नहीं , यह तो मेरा सौभाग्य होगा, पर यह तो बताइए कि आप बोल कौन रहे हैं?
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5. मरीज- डॉक्टर साहब, मेरे पास पैसे नहीं हैं, बिल माफ कर दो। किसी दिन मैं आपके परिवार का काम मुफ्त में कर दूंगा। डॉक्टर- चलो ठीक है, पर आप करते क्या हो ? मरीज- श्मशान घाट में नौकर हूं ! तनुश्री
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6. लड़का- हमने जब से देखा तुम्हें कहीं चैन ना पाया ..हैरानी है अब तक क्यों नहीं तुमने हमें गले लगाया ? लड़की- हमारा हाल भी कुछ ऐसा ही है ... जब से तुम्हे देखा है सोचते है भगवान ने भी क्या विचित्र जीव बनाया।
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7. संता (बंता से)- शादी के लिए कैसी लड़की चाहिए। बंता: मुझे कम उम्र वाली लड़की चाहिए संता-क्यों बंता- यार मुसीबत जितनी छोटी हो, उतना अच्छा हैं।
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8. मालिक (नौकर से )- तुम बाथरूम में क्यों घुस आए, क्या तुम्हे पता नहीं कि मैं नहा रहा हूं। नौकर- ग़लती हो गई। मैंने समझा कि मालकिन नहा रही हैं।
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9. एक बार एक शराबी गंगा नदी के सामने से जा रहा था। उसी रास्ते से एक पुजारी आ रहा था। उन दोनों के बीच टक्कर हो गई। पुजारी बोलता है- हर हर गंगे। शराबी बोलता है- फिर क्यों लिए पंगे। पुजारी- रुको हम तुम्हें अभी श्राप देते हैं। शराबी- अबे रुक ग्लास तो लाने दे।
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10. चंदू की एक करोड़ की लॉटरी निकली। उसने खबर पत्नी को दी। बीवी डांटते हुए बोली- वो सब तो ठीक है, पर पहले ये बताओ तुमने मुझसे पूछे बिना लॉटरी का टिकट खरीदा कैसे?
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11. स्कूल ने नोटिस लगाया- छुट्टी लेने से पहले बच्चे के मम्मी-पापा को फोन से स्कूल को इन्फॉर्म करना होगा, तभी छुट्टी मिलेगी। दीपा फोन से- आज दीपा स्कूल नहीं आएगी, क्योंकि वह बीमार है। टीचर- आप कौन बोल रही हैं ? दीपा- मेरी ममी।
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12. संता - कल पापा कुएं में गिर गए, बहुत चोट लगी, बहुत चिल्ला रहे थे। बंता - अब कैसे हैं? संता - ठीक ही होंगे, कल से कुएं से कोई आवाज नहीं आई ना।
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13. मुकेश ने अपनी सास के बिस्तर पर एक सांप देखा। मुकेश ( सांप से )- मेरी सास को डस ले। सांप - इसे क्या डसूं, इसी से तो अपना जहर रिचार्ज करवाता हूं।
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14. आज मैंने एक जान बचाई, पूछो कैसे? एक भिखारी से मैंने पूछा, 1000 रुपये का नोट दूं तो क्या करेगा ? वह बोला, खुशी से मर जाऊंगा। तो मैंने उसे पैसे नहीं दिए।
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अनुदान की जमीन पर भोज की खेती
पत्रकारिता की डिग्री देने वाले माखनलाल चतुर्वेदी
विश्वविद्यालय ने अनुदान की जमीन पर खेती कर डाली है। इतना ही नहीं बिना रिकार्ड की जा रही इस खेती का हाल ही में सौ क्विंटल चना बाजार में बेचकर राशि का बंदरबांट भी कर लिया गया है। यह मामला उजागर होने के बाद विवि प्रबंधन इस मामले में पर्दा डालने में लगा हुआ है। सरकार द्वारा करीब दस साल पहले विवि को पचास एकड़ जमीन राजधानी में दी गई थी। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय को तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सन् 1999 में विशनखेड़ी में पचास एकड़ जमीन आवंटित की थी। इस जमीन पर दो साल पहले विवि द्वारा फेंसिंग कराई गई और वहां अजान सिंह नामक एक व्यक्ति को चौकीदार के रूप में रखा गया और उसका वेतन विवि द्वारा हर महीने भुगतान किया जाता था। जमीन की देख-रेख और चौकीदार को दिशा-निर्देश देने का जिम्मा सहायक रजिस्ट्रार विवेक सावरीकर के जिम्मे था। बताया जाता है कि 26 जनवरी को कुलपति और रजिस्ट्रार द्वारा उक्त भवन में दालबाटी का कार्यक्रम रखा गया था। जिसमें कुलपति और जिस्ट्रार सहित कई अधिकारी अपने परिवार सहित उक्त कार्यक्रम में शामिल थे। इसके बाद 18 मार्च को कुलपति रस्ट्रिार खेत का निरीक्षण करने उक्त परिसर में गए थे। इसी दौरान कुलपति वीके कुठियाला आए तो उन्होंने नए कैंपस में भवन निर्माण की रूपरेखा तैयार की और जमीन का मुआयना करने गए। चिन्हित जमीन पर चने की लहलहाती खेती देखकर वे चौंक गए, क्योंकि उनके साथ कुछ बाहर के भी अधिकारी थे। उन्होंने जब गार्ड अजान सिंह से पूछा तो उसने स्वीकार किया कि यहां चने की खेती होती है। कुलपति के साथ रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारी भी थे। कुलपति ने रजिस्ट्रार से कहा कि यहां खेती की जा रही है, इस संबंध में विवि के पास कोई रिकार्ड नहीं है, यह तो अपराध की श्रेणी में आता है। चौकीदार और संबंधित अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना चाहिए। विवि प्रबंधन द्वारा एफआईआर की तैयारी भी कर ली गई। इसी दौरान चौकीदार और संबंधित अधिकारियों ने कटाई-गहाई करा कर करीब सौ क्विंटल चना बाजार में बेच दिया। अब इस मामले में प्रबंधन लीपा-पोती करने में लगा हुआ है। बताया जाता है कि उक्त चोकीदार की नियुक्ति सहायक रजिस्ट्रार विवेक सावरीकर ने की थी। जमीन का निरीक्षण भी समय-समय पर श्री सावरीकर ही करने जाते थे। चौकीदार अजान सिंह वहीं का रहने वाला है और इस जमीन पर वर्षों से खेती कर रहा है। इसके साथ ही सब्जियां भी लगाकर बेचता है। इस मामले में कुलपति अचानक चुप हो गए जो विवि से जुड़े हुए लोगों के गले नहीं उतर रही है। बताया जाता है कि कुलपति ने सभी अधिकारियों के बैंक एकाउंट में पता लगाने में जुटे हुए हैं। नम्बर के पहिले बत्ती जरूरी नेता हो या अभिनेता
एक अंतर राष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह का खुलासा
1. आई.जी. श्री मीणा एवं एस.पी.श्री जोगा रीवा के निर्देशानुसार मिली सफलता।
2. नईगढ़ी थाने से गठन किये गये पुलिस बल ने अपनी सूझ-बूझ एवं साहस का परिचय देते हुए एक बड़ी कामयाबी हासिल की।
3. ए.एस.आई. रमेश पाण्डेय के नेत्रत्व में उनके साथ आरक्षक जगत नारायन मिश्रा एवं आरक्षक संकर सिंह, बेची गई युवती को हरियाणा राज्य से बरामद किया।
क्राइम रिपोर्टर// राजमणी कुशवाह (फौजी)(नईगढ़ी //टाइम्स ऑफ क्राइम)
22 फरवरी 2010 की रात शुशीला बसोर उम्र-16 वर्ष (परिवर्तित नाम) पुत्री इन्द्रमणि बसोर ग्राम अकौरी (रामपुर) अपने घर से अचानक गायब हो गई, शुशीला के पिता इन्द्रमणि बसोर अपनी लड़की की तलाश आस-पास एवं सगे सम्बंधियों के यहां कि लेकिन उन्हें लड़की का कहीं अता-पता नहीं चला तब जाकर इन्द्रमणि ने नईगढ़ी थाने में अपनी लड़की के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। कुछ दिन बीतने के पश्चात इन्द्रमणि को कुछ ऐसी भनक लगी कि उसकी लड़की को बाँदा (उत्तर प्रदेश) में बेच दिया गया है। इन्द्रमणि ने अपनी व्यथा आ.जी. रीवा को अवगत कराई, जिनके निर्देशानुसार नईगढ़ी थाने से एक पुलिस बल बाँदा भेजा गया। बाँदा भेजे गये पुलिस बल में मुख्य ए.एस.आई. रमेश पाण्डेय साथ में आरक्षक जगत नारायण मिश्रा एवं आरक्षक शंकर सिंह थे। उक्त पुलिस दल 16 अप्रैल 2010 को बुद्धिमान यादव को उसके घर पर दाबिश देकर दबोच लिया बुद्धिमान अपने ग्रह ग्राम खंडेहा थाना मऊ चित्रकुट का निवासी है। तीसरा साथी जितेन्द्र लोहार निवासी जमुहरा थाना कमासी जिला बाँदा का वासी है। ये तीनों लड़की को हरियाणा राज्य में ले जाकर ले जाकर बेच दिया था। पकड़े गये बुद्धिमान यादव को पुलिस रिमांड पर लेकर ए.एस.आई रमेश पाण्डेय आरक्षक जगत नारायन मिश्रा और शंकर सिंह ने नईगढ़ी थाने से हरियाणा के लिए कूच किया। मनजीत सिंह उर्फ अजीत सिंह/पिता जीत सिंह साकिम कन्ताखेड़ी थाना सदर फतेहाबाद जिला फतेहाबाद शुशीला को बुद्धिमान यादव एवं उसके साथी यही मनजीत सिंह के हाथों 50 हजार रूपये में बेचा था। मनजीत सिंह उक्त खरीदी गई लड़की को बतौर अपनी पत्नी बना कर रखा था। 20 अप्रैल 2010 को उक्त नईगढ़ी पुलिस बल ने थाने सदर फतेहाबाद से मदत लेते हुए मनजीत सिंह को उसके घर पर दबोच लिया साथ में शुशीला भी उसी के घर पर मिल गई। मनजीत सिंह एवं शुशीला दोनों को पुलिस हिरासत में नईगढ़ी लाया गया। मानव तस्करी करने वाले बुद्धिमान यादव को और लड़की की खरीद करने वाले अजीत सिंह को मऊगंज उप जेल भेज दिया गया है। शुशीला को उसके पिता इन्द्रमणि बसोर को सौंप दिया गया। गिरोह के बाकी रामायण नामदेव, शेषमणि यादव, कैलाश यादव, फुलचन्द्र यादव, और जितेन्द्र लोहार सभी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में सक्रिय है।च रिपोर्टर राजमणी कुशवाह से सम्पर्क 92003 88440
Sunday, May 9, 2010
आईसना का प्रांतीय सम्मेलन आयोजित
लेखनी को सशक्तकर ईमानदारी के साथ समाज में अपना भरोसा कायम कर -श्री अग्रवाल
Sunday, May 2, 2010
एक अंतर राष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह का खुलासा
क्राइम रिपोर्टर// राजमणी कुशवाह (फौजी)
(नईगढ़ी// टाइम्स ऑफ क्राइम)
रात शुशीला बसोर उम्र-16 वर्ष (परिवर्तित नाम) पुत्री इन्द्रमणि बसोर ग्राम अकौरी (रामपुर) अपने घर से अचानक गायब हो गई, शुशीला के पिता इन्द्रमणि बसोर अपनी लड़की की तलाश आस-पास एवं सगे सम्बंधियों के यहां कि लेकिन उन्हें लड़की का कहीं अता-पता नहीं चला तब जाकर इन्द्रमणि ने नईगढ़ी थाने में अपनी लड़की के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। कुछ दिन बीतने के पश्चात इन्द्रमणि को कुछ ऐसी भनक लगी कि उसकी लड़की को बाँदा (उत्तर प्रदेश) में बेच दिया गया है। इन्द्रमणि ने अपनी व्यथा आ.जी. रीवा को अवगत कराई, जिनके निर्देशानुसार नईगढ़ी थाने से एक पुलिस बल बाँदा भेजा गया। बाँदा भेजे गये पुलिस बल में मुख्य ए.एस.आई. रमेश पाण्डेय साथ में आरक्षक जगत नारायण मिश्रा एवं आरक्षक शंकर सिंह थे। उक्त पुलिस दल 16 अप्रैल 2010 को बुद्धिमान यादव को उसके घर पर दाबिश देकर दबोच लिया बुद्धिमान अपने ग्रह ग्राम खंडेहा थाना मऊ चित्रकुट का निवासी है। तीसरा साथी जितेन्द्र लोहार निवासी जमुहरा थाना कमासी जिला बाँदा का वासी है। ये तीनों लड़की को हरियाणा राज्य में ले जाकर ले जाकर बेच दिया था। पकड़े गये बुद्धिमान यादव को पुलिस रिपांड पर लेकर ए.एस.आई रमेश पाण्डेय आरक्षक जगत नारायन मिश्रा और शंकर सिंह ने नईगढ़ी थाने से हरियाणा के लिए कूच किया। मनजीत सिंह उर्फ अजीत सिंह/पिता जीत सिंह साकिम कन्ताखेड़ी थाना सदर फतेहाबाद जिला फतेहाबाद शुशीला को बुद्धिमान यादव एवं उसके साथी यही मनजीत सिंह के हाथों 50 हजार रूपये में बेचा था। मनजीत सिंह उक्त खरीदी गई लड़की को बतौर अपनी पत्नी बना कर रखा था। 20 अप्रैल 2010 को उक्त नईगढ़ी पुलिस बल ने थाने सदर फतेहाबाद से मदत लेते हुए मनजीत सिंह को उसके घर पर दबोच लिया साथ में शुशीला भी उसी के घर पर मिल गई। मनजीत सिंह एवं शुशीला दोनों को पुलिस हिरासत में नईगढ़ी लाया गया। मानव तस्करी करने वाले बुद्धिमान यादव को और लड़की की खरीद करने वाले अजीत सिंह को मऊगंज उप जेल भेज दिया गया है। शुशीला को उसके पिता इन्द्रमणि बसोर को सौंप दिया गया। गिरोह के बाकी रामायण नामदेव, शेषमणि यादव, कैलाश यादव, फुलचन्द्र यादव, और जितेन्द्र लोहार सभी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में सक्रिय है। लोकमान तिलक इंग्लिश मीडियम हाई स्कूल नईगढ़ी
नईगढ़ी शासकीय बालक हायर सेकण्ड्री स्कूल में पदस्थ वरिष्ठ शिक्षक हनुमान प्रसाद कुशवाहा दवंगई के साथ चला रहे प्रायवेट स्कूल -
वीरपुर (नईगढ़ी) में स्वयं के भवन में प्रायवेट स्कूल कई वर्षों से दमंगाई के साथ चला रहे हैं। उनकी प्रायवेट स्कूल का नाम लोकमान तिलक इंग्लिश मीडियम हाई स्कूल महाबीरपुर रजिस्टेशन नम्बर 2000 लिख रखे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस स्कूल में कक्षा 10 तक के छात्रों का एडमीशन कर रखे हैं। प्राप्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस स्कूल को 10वीं तक की मान्यता प्राप्त नहीं और परीक्षा दिलावाने के लिए दूसरे स्कूल में छात्रों को एटैच किया जाता है। हनुमान कुशवाहा द्वारा इस प्रायवेट स्कूल की पूरी देखरेख करने के साथ-साथ पीरियड लेना व छात्रों से फीस उगाही का दायित्व निभाते हैं। इसी स्कूल में कक्षा 10 वीं की छात्रा रीनू कुशवाहा का भी एडमीशन किया हुआ है। हनुमान प्रसाद कुशवाहा ने क्लास में आकर रीनू से कहा कि तुम फीस नहीं दोगी तो तुम्हें 10वीं की परीक्षा में नहीं बैठने दूंगा। बाद में रीनू ने पूंछा कि कितना फीस जमा करना है तब हनुमान कुशवाहा ने बताया कि 6000 रूपये तुम्हारा बकाया फीस है। रीनू ने अपने अभिभावक से यह बात घर में बताई। 
अधेड़ ने किया मासूम के साथ अनाचार
क्राइम रिपो
र्टर// टाइम्स ऑफ क्राइम
धमतरी ! एक अधेड़ ने पड़ोस मे रहने वाली पांच वर्षीय मासूम को बहला फुसला कर उसके साथ अनाचार किया। पुलिस ने अपराध दर्ज कर आरोपी को हिरासत में ले लिया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मकेश्वर वार्ड निवासी 45 वर्षीय बिसेसर सतनामी ने अपने घर के समीप रहने वाली एक मासूम बालिका को बहला फुसला कर उसके साथ अनाचार किया। बालिका के परिजनों की रिपोर्ट पर पुलिस ने अरोपी के खिलाफ धारा 376 के तहत अपराध पंजीबध्द करते हुए हिरासत में ले लिया है।
महिला स्वाधार योजना तहत हेल्पलाइन सेवा प्रारम्भ पीड़ित महिलाओं का निराकरण करेगें वरिष्ठ जनों की टीम
राधेश्याम मो.9826013975
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जिला ब्यूरो प्रमुख / तहसील ब्यूरो प्रमुख / रिपोर्टरों की आवश्यकता है
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‘‘ANI NEWS INDIA’’ सर्वश्रेष्ठ, निर्भीक, निष्पक्ष व खोजपूर्ण ‘‘न्यूज़ एण्ड व्यूज मिडिया ऑनलाइन नेटवर्क’’ हेतु को स्थानीय स्तर पर कर्मठ, ईमानदार एवं जुझारू कर्मचारियों की सम्पूर्ण मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले एवं तहसीलों में जिला ब्यूरो प्रमुख / तहसील ब्यूरो प्रमुख / ब्लाक / पंचायत स्तर पर क्षेत्रीय रिपोर्टरों / प्रतिनिधियों / संवाददाताओं की आवश्यकता है।
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पता :- ‘‘ANI NEWS INDIA’’
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23/टी-7, गोयल निकेत अपार्टमेंट, प्रेस काम्पलेक्स,
नीयर दैनिक भास्कर प्रेस, जोन-1, एम. पी. नगर, भोपाल (म.प्र.)
मोबाइल : 098932 21036
क्र. पद का नाम योग्यता
1. जिला ब्यूरो प्रमुख स्नातक
2. तहसील ब्यूरो प्रमुख / ब्लाक / हायर सेकेंडरी (12 वीं )
3. क्षेत्रीय रिपोर्टरों / प्रतिनिधियों हायर सेकेंडरी (12 वीं )
4. क्राइम रिपोर्टरों हायर सेकेंडरी (12 वीं )
5. ग्रामीण संवाददाता हाई स्कूल (10 वीं )
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