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आरटीआई एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले लोक सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कानूनी कार्यवाही |
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आरटीआई एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले लोक सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कानूनी कार्यवाही
भाई अरविंद भट्ट की पोस्ट -
RTI मे भी FIR दर्ज हो सकती है अगर सही कानूनी प्रकिया अपनाये तो।
* FIR / शिकायत – RTI उल्लंघन और धमकी -
प्रेषक / शिकायतकर्ता :
नाम : [आपका नाम]
पता : [आपका पूरा पता]
संपर्क : [मोबाइल / ईमेल]
प्रति,
थाना अधिकारी,
[पुलिस स्टेशन का नाम],
[शहर / जिला], [राज्य]
विषय : लोक सूचना अधिकारी / प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा RTI अधिनियम का उल्लंघन एवं धमकी के संबंध में शिकायत।
महोदय,
मैं, [आपका नाम], यह शिकायत/एफआईआर लोक सूचना अधिकारी / प्रथम अपीलीय अधिकारी के खिलाफ प्रस्तुत कर रहा हूँ। विवरण निम्नानुसार है :
1. सूचना न देने का उल्लंघन
दिनांक [DD/MM/YYYY] को RTI आवेदन संख्या [RTI नंबर] प्रस्तुत किया गया।
लोक सूचना अधिकारी ने समय पर या उचित जानकारी नहीं दी।
यह RTI Act धारा 7(2) का उल्लंघन है।
संबंधित BNS धारा 198 (Public servant disobeying law) के तहत एफआईआर दर्ज की जाए।
2. झूठी / भ्रामक जानकारी देने की स्थिति -
लोक सूचना अधिकारी ने जानबूझकर झूठी / अधूरी जानकारी प्रदान की।
इसके लिए BNS धाराएँ 199, 201, 318, 336, 340 लागू की जाएँ।
3. प्रथम अपीलीय अधिकारी का निर्णय न करना :
दिनांक [DD/MM/YYYY] को प्रथम अपीलीय अपील दायर की गई।
अधिकारी ने समय पर निर्णय नहीं दिया।
BNS धारा 198 के तहत एफआईआर दर्ज करवाई जाए।
4. गैरहाजिरी / सूचना देने से मना करना :
सुनवाई के दौरान या बाद में प्रथम अपीलीय अधिकारी ने सूचना उपलब्ध नहीं कराई।
इसके लिए BNS धारा 198 / 199 लागू हो।
5. निर्णय के बावजूद सूचना न देना :
निर्णय के बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
BNS धारा 198 / 318 के तहत कार्रवाई की जाए।
6. धमकी / उत्पीड़न :
लोक सूचना अधिकारी / प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा आवेदक को धमकाया गया।
संबंधित अपराध के लिए BNS Threat / Intimidation clauses के तहत एफआईआर दर्ज कराई जाए।
7. न्यायिक प्रमाण और हवाले -
* मुंबई हाई कोर्ट विवेक विष्णु पेंट कुलकर्णी बनाम महाराष्ट्र राज्य – RTI जवाब न देने पर FIR दर्ज करने के निर्देश।
* मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग :
सूचना न देने वाले अधिकारी पर ₹15,000 जुर्माना।

इसे भी पढ़ें :- सूचना के अधिकार की धज्जियां उड़ने वाले जबलपुर के खेल और लोक सूचना अधिकारी पर ₹10,000 का जुर्माना, म.प्र. राज्य सूचना आयोग द्वारा पारित आदेश की प्रति
* उत्तर प्रदेश का केस : तहसीलदार पर ₹25,000 जुर्माना।
* दिल्ली हाई कोर्ट :
RTI दंडात्मक कार्रवाई केवल सूचना आयोग द्वारा।
सुप्रीमकोर्ट : सूचना आयोगों में रिक्त पद भरना अनिवार्य।
• संलग्नक -
RTI आवेदन की प्रतिलिपि,
प्रथम अपीलीय अपील की प्रतिलिपि,
प्राप्त / नहीं मिली जानकारी का प्रमाण,
धमकी / नोटिस का कोई भी साक्ष्य।
दिनांक : [DD/MM/YYYY]
स्थान : [शहर / जिला]
शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर : _
और नाम : [आपका नाम]।
साभार : आत्मदीप आरटीआई इन्फो
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