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अवयस्क लड़की की सहमति से उसके साथ संबंध बनाने वाले लड़के को 20 साल की सजा |
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भोपाल के विशेष POCSO न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि नाबालिग की सहमति कानून की नजर में कोई मायने नहीं रखती।
कोर्ट ने कहा कि यदि पीड़िता नाबालिग (18 वर्ष से कम) है, तो उसकी "सहमति" (Consent) को कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता। शारीरिक संबंध के मामलों में नाबालिग की मर्जी कानूनन शून्य होती है।
विशेष न्यायाधीश (पाक्सो) कुमुदिनी पटेल ने स्पष्ट किया कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम
(POCSO Act / Protection of Children from Sexual Offences) का मूल उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण से बचाना है। भले ही नाबालिग ने अपनी इच्छा से संबंध बनाए हों, कानून इसे अपराध की श्रेणी में ही रखेगा।
इस मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए उसे 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
भारतीय न्याय संहिता/ आईपीसी की धारा 375 के अंतर्गत अट्ठारह वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाना 'बलात्कार' की श्रेणी में आता है, चाहे उसकी सहमति हो या न हो।
POCSO धारा 4 & 6 नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए कड़े दंड का प्रावधान करती हैं।
इस मामले में निशातपुरा, भोपाल का दिनेश 14 साल की अवयस्क लड़की को भगा कर ले गया था। उसने लड़की से शादी करके उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाए थे। लड़की के परिवार की शिकायत पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। घटना 17 मार्च 2024 की है।


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