पत्रकार सांथी सावधान दलालों और ब्लेकमेकरो के झांसे में न आये
जनसंपर्क विभाग पर लगाए गए आरोप निराधार और दुर्भावनापूर्ण — प्रशासनिक सूत्र
व्यक्तिगत टिप्पणियों और आंदोलनों की धमकी से व्यवस्था पर दबाव बनाने की कोशिश
जनसंपर्क संचालनालय, भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर प्रशासनिक और विभागीय सूत्रों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सूत्रों का कहना है कि कुछ लोग व्यक्तिगत कुंठा और निजी स्वार्थ के चलते अधिकारियों की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं, जो न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि पत्रकारिता की मर्यादाओं के भी विपरीत है।
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सूत्रों के अनुसार, विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की जीवनशैली, पहनावे और व्यक्तिगत गतिविधियों को लेकर सार्वजनिक मंच पर की जा रही टिप्पणियां पूरी तरह अशोभनीय, अप्रमाणित और व्यक्तिगत आक्षेप की श्रेणी में आती हैं। ऐसे आरोपों का न तो कोई दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत किया गया है और न ही किसी सक्षम जांच एजेंसी के समक्ष कोई ठोस शिकायत दर्ज कराई गई है।
वसूली के आरोपों पर सवाल
विज्ञापन फाइलों को लेकर कथित वसूली और कमीशन के आरोपों पर विभागीय सूत्रों का कहना है कि विज्ञापन स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया नीतिगत, ऑनलाइन और रिकॉर्ड आधारित है। यदि किसी को आपत्ति है तो उसके लिए विभागीय शिकायत तंत्र, लोकायुक्त और अन्य वैधानिक मंच उपलब्ध हैं। बिना जांच और प्रमाण के सार्वजनिक रूप से नाम लेकर आरोप लगाना दुर्भावना को दर्शाता है।
आंदोलन की चेतावनी पर कड़ी टिप्पणी
26 जनवरी के बाद आंदोलन की चेतावनी को लेकर भी प्रशासनिक हलकों में नाराजगी देखी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय पर्व को राजनीतिक या व्यक्तिगत दबाव का माध्यम बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। सरकार और विभाग दबाव की राजनीति से नहीं, नियम और कानून के तहत काम करते हैं।
लघु एवं मझोले समाचार पत्रों पर आरोप भ्रामक
लघु और मझोले समाचार पत्रों को खत्म करने के कथित षड्यंत्र पर भी विभागीय सूत्रों ने इसे भ्रामक प्रचार बताया। अधिकारियों के अनुसार विज्ञापन नीति में छोटे समाचार पत्रों के लिए प्रावधान यथावत हैं और भुगतान नियमों के अनुसार ही किया जा रहा है। किसी भी समाचार पत्र को केवल नीतिगत मानकों के आधार पर ही विज्ञापन दिया या रोका जाता है, न कि किसी व्यक्तिगत पसंद या नापसंद के आधार पर।
प्रशासन की दो टूक
प्रशासनिक सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन के पास भ्रष्टाचार से जुड़े ठोस प्रमाण हैं तो वे सक्षम जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत करें। मीडिया ट्रायल, व्यक्तिगत कटाक्ष और आंदोलन की धमकी से व्यवस्था को प्रभावित नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष:
जनसंपर्क विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि विभाग अपनी पारदर्शी व्यवस्था और नीति आधारित कार्यप्रणाली पर कायम रहेगा। व्यक्तिगत आरोप, भावनात्मक नारे और दबाव की राजनीति से न तो सच्चाई बदलेगी और न ही प्रशासनिक निर्णय।
अवधेश भार्गव फर्जी पत्रकार अपने आप में खुद ही फ्रॉड है
किसने जनसंपर्क विभाग में लाखों रुपए को घोटाले किए फर्जी दस्तावेज पेश करके कई विज्ञापन प्राप्त किया, फर्जी वेबसाइट संचालित करके शासन को लाखों रुपए का चूना लगाया, पत्रकारों के नाम पर और संगठन के नाम पर पत्रकारों को गुमराह करता रहा। 19 जनवरी 2026 के पहले जनसंपर्क आयुक्त को उनके पूरे काले कारनामे काले चिट्ठे सब सौंपे जाएंगे, यह लूटेरा पहले भी ऑल इंडिया स्माल न्यूजपेपर संगठन आईसना में अध्यक्ष रहा पत्रकार संगठन आईसना में नाम पर भी करीब 50 लख रुपए का घोटाला किया, मैं मध्य प्रदेश का महासचिव रहा, मैंने से कल करना में पड़े और इसके खिलाफ कई थानों में EOW में शिकायत दर्ज कराई जिसकी जांच चल रही है, जनसंपर्क विभाग में वेबसाइट घोटाला इसकी देने हैं, रंडी बाजी के मामले में कई बार पकड़ा है भी गया, रंडी बाजी करने गया था तब इसको वहां के लोगों ने एक महिला के साथ जबरदस्ती रेप करने की कोशिश के मामले में हाथ पैर तोड़कर के इसको नाले में फेंक दिया था, मैं स्वयं विनय डेविड इसको वहां से उठाकर इसके साथ हुई घटना की थाने में FIR लिखबा कर भोपाल हमीदिया अस्पताल में 56 टांके सर पर लगवा कर, इसकी जान बचाई, पत्रकारों के नाम पर इसने इसने पत्रकार संगठन आईसना के नाम पर फर्जीवाड़ा किया और एक फर्जी आईसना समिति पंजीयन में भोपाल में कर लिया, और फर्जी आईसना का राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गया, इसके बाद इसको चैन नहीं मिला तो इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट में भी इसने फर्जी बड़ा करके अपने आप को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करने का फर्जी बाड़ा किया है...?
अच्छा हुआ आपने पोस्ट डाल दी ताकि हमें सच्चाई लिखने का अवसर मिले....

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