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रविवार की रात दिल्ली से लखनऊ जाने वाली लखनऊ मेल एक्सप्रेस पर एक मां और बेटी रवाना हुये। इसी के सामने की बर्थ संख्या 15 पर यूपी काडर के आईएएस अफसर शशिभूषण लाल सुशील बैठे हुये थे। वर्तमान में यह विशेष सचिव प्राविधिक शिक्षा के पद पर तैनात है। जब ट्रेन सुबह हरदोई पहुंची तो गूगल कंपनी में कार्यरत इस युवती ने अपनी मां से शिकायत की कि रात में उसके साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गयी।
चूंकि उस कोच में यही लोग थे लिहाजा महिला ने अपनी आपत्ति जतायी। उस वक्त तो अफसर ने पैर छूकर माफी मांग ली कहा कि वह बड़े पद पर तैनात हैं कोई शिकायत न की जाये वरना उनकी बदनामी हो जायेगी लेकिन महिला ने टीटीई से शिकायत कर दी। जैसे ही ट्रेन चारबाग स्टेशन पर रुकी यह अफसर वहां से निकल भागा, जिन्हें आरपीएफ की मदद से हिरासत में लिया गया। बाद में युवती की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। हालांकि मामला एक आईएएस अफसर से जुड़ा होने की वजह से पुलिस जांच के बाद ही कार्यवाही की बात करने लगी।
इसी दौरान पुलिस के पास तमाम सिफारिशी फोन आने लगे। हालांकि वर्ष 2001 के यूपी काडर के इस आरोपी आईएएस अफसर के खिलाफ मामला दर्ज होकर विधिक कार्यवाही शुरु हो गयी है। अब इनका आरोप है कि इन्हें जाति सूचक शब्द कहे गये और इन्हें फंसाने की साजिश की जा रही है लेकिन एक युवती किसी अनजान सहयात्री को छेड़छाड़ सरीखे गंभीर आरोप में क्यों फंसायेगी फिलहाल इसका जवाब अफसर के पास नहीं है।
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह अपने बयानों को लेकर अक्सर विवादों में रहते हैं लेकिन कोल आवंटन घोटाले मामले में बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी पर दिया गया बयान उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
sabhar -p7
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