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एक तरफ जहां भारतीय क्रिकेट टीम के पुरूष वर्ग ने अपने असाधारण प्रदर्शन के दम पर पूरी दुनिया में जीत के झण्डे गाड़े हुए हैं,वहीं दूसरी तरफ महिला क्रिकेट टीम ने भी जबरदस्त प्रदर्शन के दम पर अर्न्तराष्ट्रीय क्रिकेट में एक खास ख्याति बटोर ली है।

लाखों महिलाओं की प्रेरणा स्त्रोत बन चुकी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज ने हालिया समय में अपने उन लम्हों को याद किया,जब वे संघर्ष के दौर से गुजर रही थी।
पुरुष क्रिकेटरों से ज्यादा हमें उठानी पड़ती ये मुश्किलें

बड़ी तेजी से महिला क्रिकेट जगत में एक खास स्थान स्थापित कर चुकी मिताली राज ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा कि, एक पुरूष क्रिकेटर को उन दिक्कतों का सामना नहीं करता है,जो महिला क्रिकेटर उठाती है। यही बात राहुल द्रविड़ ने भी कहीं थी। जिसमें उन्होंने कभी भी रेल से यात्रा नहीं करने की बात कहीं थी।
हालाकिं ऐसी चीजें हमें मजबूत बनाती है,जब हम शुरूआती चुनौतियों का सामना करके उससे बाहर निकलते हैं, तो हम इससे मानसिक तौर पर मजबूत होते हैं।
शीर्ष पायदान पर मौजूद

गौरतलब है कि मौजूदा समय में मिताली राज आईसीसी के महिला वनडे रैंकिग में शीर्ष पायदान पर मौजूद हैं। इसके अलावा वे वनडे क्रिकेट में 6,000 रन बनाने वाली पहली महिला बल्लेबाज बन चुकी है।
जब दादी-दादी हुए क्रिकेट के खिलाफ

मिताली राज ने अपने बचपन के लम्हों को याद करते हुए कहा कि, मै साउफ इण्डिया की हूं और मेरे दादा-दादी मेरे क्रिकेट खेलने के सख्त खिलाफ थे। जिसकी वजह से मेरे माता-पिता को काफी कुछ सुनना पड़ा,लेकिन वह हमेशा मेरे लिए संघर्ष करते हैं और हर बात पर मेरा सपोर्ट करते थे।


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