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भोपाल। सीबीआई की विशेष अदालत ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से फर्जीवाड़ा कर करोड़ो रुपए का लोन लेने वाले आरोप तय कर आरोपियों को 3 साल कैद की सजा सुनाई है। सबूत के आभाव में एक आरोपी को बरी कर दिया गया। मामले का मुख्य आरोपी एलआईसी कर्मचारी एजे माहेश्वरी [अरुण जगदीश माहेश्वरी ] और उसका सहायक सुनील कुमार को अदालत ने फरार घोषित कर रखा है। यह फैसला गुरुवार को विशेष न्यायाधीश रविंद्रकुमार भद्रसेन ने सुनाया।
चम्बल ने उनको दी गयी सजा को गलत बताया और कहा हमें बली का बकरा बनाया गया उनका कहना है की हमारा कसूर सिर्फ यह है की वह अरुण माहेश्वरी के रिश्तेदार है और अरुण माहेश्वरी ने एक शादी प्रोग्राम की फोटो में से उनकी फोटो को निकाल कर फर्जी बैंक एकाउंट खोला था जिसकी उनको कोई जानकारी नहीं थी एवं उन्हें तो तब पता चला जब उन्हें सीबीआई द्वारा बुलाया गया उनकी लिखावट की एक्सपर्ट द्वारा जांच भी करवाई गयी जो बैंक में थी वह नहीं पायी गयी एवं इस रिपोर्ट को भी कोर्ट में नहीं रखा गया हमने 13 साल सहा है ऊपर और भी अदालते है इन्साफ के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगे।
अभिषेक निवासी उदयपुरा ने कहा आज इंसाफ हार गया केवल इसलिए की मेरी कही से ली गयी फोटो कही पर लगी थी और में गुनहगार हो गया क्या यही हमारा सिस्टम है हमारे खिलाफ कोई पुख्ता सबूत न होने के वावजूद भी आज में मुल्जिम हो गया में ऊपरी अदालत में जाउगा मुझे कानून पर पूरा भरोसा हे।
क्या है मामला
घटना 11 अगस्त 1991 से 26 फरवरी 2003 के बीच बैरसिया रोड भोपाल स्थित एलआईसी दफ्तर में हुई थी। एलआईसी के तत्कालीन सीनीयर ब्रांच मैनेजर आईबी श्रीवास्तव ने 13 अक्टुबर 2003 को सीबीआई कार्यालय में लिखित शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया था कि उनके कार्यालय सहायक अरुण माहेश्वरी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनकी संस्था से करीब 10 लोगों के नाम लोन आवंटित कराया है एवं जिनके नाम पर लोन आवंटित किए गए हैं वे व्यक्ति अस्तित्व में ही नहीं हैं। इस प्रकार एलआईसी को अरुण जगदीश माहेश्वरी ने 3 करोड़ 40 लाख 65 हजार 326 रुपए की आर्थिक हानि पहुॅंचाई है। शिकायत के आधार पर सीबीआई ने मामले की जॉच शुरू कर दी और एलआईसी कार्यालय सहायक अरुण माहेश्वरी के साथ ज्ञानेन्द्र पाठक , किशन कुमार गजभिये, बालकृष्ण गांधी, सुनील कुमार, सुनील गांधी, अभिषेक श्रीवास्व, चंबल नथानी, उदय नारायण वर्मा शिव शंकर प्रसाद व अन्य को फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोपी बनाया । सीबीआई ने कोर्ट में बताया की आरोपियों ने इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैरसिया रोड स्थित एलआईसी कार्यालय में लोन प्रपोजल तैयार कर पेश किया था। ये सभी लोन प्रपोजल किसी अन्य व्यक्तियों जो कि अस्तित्व में ही नहीं थे उनके नाम थे। इन दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों ने अलग-अलग बैंकों में भी फर्जी खाते खोल रखे थे।
अधिकांश बैंक खातों में आरोपी एजे माहेश्वरी [अरुण जगदीश माहेश्वरी ] ने खाताधारक की पहचान की थी। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एलआईसी से लोन आवंटित कराकर चेक प्राप्त कर लिये और अपने फर्जी खातों में चेक को भुनाकर करोड़ों रुपए हड़प कर लिए। मामला सामने आते ही मामले का मास्टर माइंड एजे माहेश्वरी [अरुण जगदीश माहेश्वरी ] फरार हो गया जिसे अदालत ने 7 अक्टुबर 2007 को फरार घोषित कर दिया जबकि अन्य आरोपी सुनील कुमार मामले की सुनवाई के दौरान फरार हो गया जिसे 5 जनवरी 2013 को फरार घोषित कर दिया गया। शेष के खिलाफ अदालत में सुनवाई की गई जिनके खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जीवाड़ा और षडयंत्र के तहत अपराध प्रमाणित पाए जाने पर उक्त सजा का फैसला सुनाया गया
यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है की इससे पहले भी इस तरह के फर्जीबाड़े एलआईसी में बहुत हुए है जो की सिस्टम में चूक बताता है।
अरुण माहेश्वरी 13 अक्टूबर 2003 से अपनी पत्नी अर्चना माहेश्वरी अपने बेटे राज माहेश्वरी बेटी राधिका माहेश्वरी के साथ आज तक फरार है।
सीबीआई ने इनाम घोषित कर रखा है

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