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भोपाल। एक ओर जहां देश में सबदूर लोग वेलेंटाइन डे मना रहे थे तो वहीं दूसरी ओर सतपुड़ा की हसीन वादियों में जहां मौसम खुश्क और सुहाना था वहां भाजपा अपने विधायकों को प्रशिक्षण के नाम पर अपने मतदाताओं, कार्यकर्ताओं, मीडिया, सरकार और संगठन के प्रति जवाबदेही की घुट्टी पिलाकर यह साफ करने में लगी थी कि यदि समय रहते विधायकों ने अपने आचारण और व्यवहार में परिवर्तन नहीं किया तो उनके लिये अच्छा नहीं होगा।
दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान जहां केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से लेकर प्रभात झा, विक्रम वर्मा, सत्यनारायण जटिया तो वहीं संगठन के मुखिया नंदकुमार सिंह चौहान एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी विधायकों को अपने-अपने तरीके से सुधर जाने की चेतावनी दी तो वहीं प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार चौहान ने अपने संबोधन में बिना कुछ लाग लपेट के विधायकों को यह बताने में कोई परहेज नहीं किया कि हमारी सरकार सिर्फ और सिर्फ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दम पर चल रही है
मुख्यमंत्री के तंबू में लगे मंत्रियों और विधायकों का बंबू कमजोर है और यदि यही स्थिति रही तो वहीं मिशन-२०१८ को देखते हुए अपने मंत्रियों और विधायकों को चेत जाने की नसीहत तक दे डाली, नंदकुमार सिंह चौहान ने अपने संबोधन में प्रभारी मंत्रियों से अपने प्रभार वाले जिले में अपना आचरण और व्यवहार ठीक करने की बात कही, दो दिवसीय इस प्रशिक्षण शिविर में जहां केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधायकों को जनता और मीडिया से अपना आपसी सामंजस्य बनाने की सलाह दी तो विक्रम वर्मा ने विधायकों को अपने कार्यालय के मैनेजमेंट के संबंध में कई टिप्स देते हुए कहा कि यदि अफसरों को ठीक रखना है तो विधानसभा में सवाल लगाओ लेकिन वहीं इस शिविर में इस बात की भी घुट्टी पिलाने के प्रयास किये गये कि उन्हें सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच रखने के प्रयास करने चाहिए, तो वहीं विधायकों द्वारा विधानसभा में अपनी ही सरकार के मंत्रियों को घेरने से उठने वाली समस्याओं पर भी चिंता व्यक्त की गई और विधायकों को साम दाम दण्ड और भेद की नीति का पालन करते हुए उन्हें यह सलाह देने की कोशिश की गई कि वह विधानसभा में अपनी सरकार के खिलाफ विपक्ष की भूमिका अपनाना छोड़ दें,
इस शिविर के समापन भाषण के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधायकों से कहा कि वह जब भी बोलें सोच-समझकर बोलें आर्थिक रूप से सबल बनें, लेकिन संभलकर, गाड़ी, मकान या दुकान ऐसा कुछ मत करो जो जनता को दिखाई दे, ईमानदार रहो, ऐसा करो जिससे छवि न बिगड़े, अगर साख चली गई तो जनता को क्या मुंह दिखाओगे सीएम ने कहा कि मई तक विधायकों के कामकाज का सर्वे हो जाएगा, एक-एक कर सबके कामकाज का ब्यौरा हर विधायक को दे दूंगा, इस सर्वे के बाद विधायक अपने क्षेत्र में गंभीरता से सक्रिय हो जाएं मुख्यमंत्री ने इसी दौरान अजय विश्नोई, हरिशंकर खटीक, बृजेशप्रताप सिंह और केएल अग्रवाल का उदाहरण देते हुए कहा कि मैंने उन्हें चुनाव के पूर्व समझा दिया था कि वह अपना विधानसभा क्षेत्र बदल लें लेकिन वो नहीं माने और आखिरकार वह चुनाव ही हार गए। मुख्यमत्री ने अपने उद्बोधन में विधायकों को नसीहत देते हुए कहा कि मंगलवार की बात कर लो विधायक केदारनाथ शुक्ल को कौनसी बात कहां कहनी है खुद ही पता नहीं? उनके द्वारा कही गई बात समाचार पत्रों की सुर्खियां बन गई, दो दिवसीय चले इस शिविर में भाजपा संगठन में मंत्रियों के प्रति नाराजगी भी उनके अपने क्षेत्र में सक्रिय न होने तथा विधायकों की बात सरकार द्वारा न सुनी जाने को लेकर भी गंभीर शिकायतों का दौर भी जारी रहा,
तो वहीं दूसरी ओर मंत्रियों द्वारा भी विधायकों के द्वारा की जाने वाली सिफारिशों के उदाहरण देते हुए इस बात का खुलासा किया गया कि विधायक ऐसी-ऐसी सिफारिशें करते हैं जिसमें धारा ३०२ जैसे प्रकरण की भी शिकायतें शामिल हैं तो वहीं यह बात भी सामने आई कि विधायक स्थान्तरण और पोस्टिंग को लेकर ज्यादा सिफारिशें लेकर आते हैं तो वहीं मंत्री गोपाल भार्गव ने तो यहां तक कह डाला कि विधायक जिस तरह की सिफारिशें लेकर आते हैं, कई शिकायतें तो तुरत-फुरत निपटाने की होती हैं और उनका हल भी तुंरत कर दिया जाता लेकिन कुछ सिफारिशें ऐसी होती हैं जिनपर कार्यवाही करने पर कई समस्याएं भी खड़ी होती हैं, क्योंकि ऐसी सिफारिशों का स्वरूप भी कुछ अलग होता है
जिनको मानने में समस्याएं खड़ी हो जाती हैं दो दिवसीय चले सतपुड़ा की वादियों में विधायकों के प्रशिक्षण में कई मुद्दों पर चर्चा की गई तो वहीं विधायकों को संभल जाने की चेतावनी दी गई, साथ ही समय रहते अपने आचरण और व्यवहार में परिवर्तन लाने की भी हिदायतें दी गईं। तो वहीं अपने व्यवहार औरा आचरण में सुधार न करने वाले विधायकों और मंत्रियों को यह कहते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधायकों और मंत्रियों को इस बात की भी नसीहत दे डाली कि वह अपने कामकाज के तौर तरीके में परिवर्तन लाने में असफल साबित हुए तो वह २०१८ में टिकट मिलने का मुगालता न पालें तो वहीं संगठन के मुखिया नंदू भैया ने अपने सलाह और मशवरे की तर्ज पर विधायकों को नसीहत दे डाली कि वह अपने आचरण और व्यवहार पर समय रहते बदलाव लायें नहीं तो उसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे कुल मिलाकर इस शिविर के माध्यम से जहां विधायकों को अपना आचरण में मतदाताओं, कार्यकर्ताओं, मीडिया और सरकार के प्रति जवाबदेही के प्रति व्यवहार बदलने की घुटी पिलाई गई तो वहीं इस चिंतन शिविर में इस नीति को भी पुन: दोहराया गया कि जो संगठन में जिला अध्यक्ष के पद पर आसीन है
उन्हें विधानसभा में विधायक का टिकट नहीं दिया जाएगा। हालांकि ऐसा निर्णय २०१३ के चुनाव के पूर्व भी लिया गया था लेकिन जब टिकट वितरण का समय आया तो जिताऊ उम्मीदवार के रूप में कई जिला अध्यक्षों को टिकट दिए गए। देखना अब यह है कि इस बार इसको पुन: लागू किये जाने की बात का कितना पालन होता है क्योंकि भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है, वह जो कहती है उसका पालन करती नहीं है अब देखना यह है कि इस शिविर में विधायकों को जहां घुटी पिलाने का भी काम किया गया तो वहीं अपने आचरण और व्यवहार सुधारने की नसीहत देकर चेतावनी दिये जाने का भी दौर जारी रहा। कुल मिलाकर यह दो दिवसीय विधायकों के प्रशिक्षण शिविर के बाद सत्ता, संगठन, मंत्रियों व विधायकों के आचरण और व्यवहार में कितना परिवर्तन आता है और वह पिछले प्रशिक्षण शिविरों की तरह विधायकों को पिलाई जाने वाली घुट्टी का कितना पालन करता है यह तो समय बताएगा।
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मुख्यमंत्री के तंबू में लगे मंत्रियों और विधायकों का बंबू कमजोर है और यदि यही स्थिति रही तो वहीं मिशन-२०१८ को देखते हुए अपने मंत्रियों और विधायकों को चेत जाने की नसीहत तक दे डाली, नंदकुमार सिंह चौहान ने अपने संबोधन में प्रभारी मंत्रियों से अपने प्रभार वाले जिले में अपना आचरण और व्यवहार ठीक करने की बात कही, दो दिवसीय इस प्रशिक्षण शिविर में जहां केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधायकों को जनता और मीडिया से अपना आपसी सामंजस्य बनाने की सलाह दी तो विक्रम वर्मा ने विधायकों को अपने कार्यालय के मैनेजमेंट के संबंध में कई टिप्स देते हुए कहा कि यदि अफसरों को ठीक रखना है तो विधानसभा में सवाल लगाओ लेकिन वहीं इस शिविर में इस बात की भी घुट्टी पिलाने के प्रयास किये गये कि उन्हें सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच रखने के प्रयास करने चाहिए, तो वहीं विधायकों द्वारा विधानसभा में अपनी ही सरकार के मंत्रियों को घेरने से उठने वाली समस्याओं पर भी चिंता व्यक्त की गई और विधायकों को साम दाम दण्ड और भेद की नीति का पालन करते हुए उन्हें यह सलाह देने की कोशिश की गई कि वह विधानसभा में अपनी सरकार के खिलाफ विपक्ष की भूमिका अपनाना छोड़ दें,
इस शिविर के समापन भाषण के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधायकों से कहा कि वह जब भी बोलें सोच-समझकर बोलें आर्थिक रूप से सबल बनें, लेकिन संभलकर, गाड़ी, मकान या दुकान ऐसा कुछ मत करो जो जनता को दिखाई दे, ईमानदार रहो, ऐसा करो जिससे छवि न बिगड़े, अगर साख चली गई तो जनता को क्या मुंह दिखाओगे सीएम ने कहा कि मई तक विधायकों के कामकाज का सर्वे हो जाएगा, एक-एक कर सबके कामकाज का ब्यौरा हर विधायक को दे दूंगा, इस सर्वे के बाद विधायक अपने क्षेत्र में गंभीरता से सक्रिय हो जाएं मुख्यमंत्री ने इसी दौरान अजय विश्नोई, हरिशंकर खटीक, बृजेशप्रताप सिंह और केएल अग्रवाल का उदाहरण देते हुए कहा कि मैंने उन्हें चुनाव के पूर्व समझा दिया था कि वह अपना विधानसभा क्षेत्र बदल लें लेकिन वो नहीं माने और आखिरकार वह चुनाव ही हार गए। मुख्यमत्री ने अपने उद्बोधन में विधायकों को नसीहत देते हुए कहा कि मंगलवार की बात कर लो विधायक केदारनाथ शुक्ल को कौनसी बात कहां कहनी है खुद ही पता नहीं? उनके द्वारा कही गई बात समाचार पत्रों की सुर्खियां बन गई, दो दिवसीय चले इस शिविर में भाजपा संगठन में मंत्रियों के प्रति नाराजगी भी उनके अपने क्षेत्र में सक्रिय न होने तथा विधायकों की बात सरकार द्वारा न सुनी जाने को लेकर भी गंभीर शिकायतों का दौर भी जारी रहा,
तो वहीं दूसरी ओर मंत्रियों द्वारा भी विधायकों के द्वारा की जाने वाली सिफारिशों के उदाहरण देते हुए इस बात का खुलासा किया गया कि विधायक ऐसी-ऐसी सिफारिशें करते हैं जिसमें धारा ३०२ जैसे प्रकरण की भी शिकायतें शामिल हैं तो वहीं यह बात भी सामने आई कि विधायक स्थान्तरण और पोस्टिंग को लेकर ज्यादा सिफारिशें लेकर आते हैं तो वहीं मंत्री गोपाल भार्गव ने तो यहां तक कह डाला कि विधायक जिस तरह की सिफारिशें लेकर आते हैं, कई शिकायतें तो तुरत-फुरत निपटाने की होती हैं और उनका हल भी तुंरत कर दिया जाता लेकिन कुछ सिफारिशें ऐसी होती हैं जिनपर कार्यवाही करने पर कई समस्याएं भी खड़ी होती हैं, क्योंकि ऐसी सिफारिशों का स्वरूप भी कुछ अलग होता है
जिनको मानने में समस्याएं खड़ी हो जाती हैं दो दिवसीय चले सतपुड़ा की वादियों में विधायकों के प्रशिक्षण में कई मुद्दों पर चर्चा की गई तो वहीं विधायकों को संभल जाने की चेतावनी दी गई, साथ ही समय रहते अपने आचरण और व्यवहार में परिवर्तन लाने की भी हिदायतें दी गईं। तो वहीं अपने व्यवहार औरा आचरण में सुधार न करने वाले विधायकों और मंत्रियों को यह कहते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधायकों और मंत्रियों को इस बात की भी नसीहत दे डाली कि वह अपने कामकाज के तौर तरीके में परिवर्तन लाने में असफल साबित हुए तो वह २०१८ में टिकट मिलने का मुगालता न पालें तो वहीं संगठन के मुखिया नंदू भैया ने अपने सलाह और मशवरे की तर्ज पर विधायकों को नसीहत दे डाली कि वह अपने आचरण और व्यवहार पर समय रहते बदलाव लायें नहीं तो उसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे कुल मिलाकर इस शिविर के माध्यम से जहां विधायकों को अपना आचरण में मतदाताओं, कार्यकर्ताओं, मीडिया और सरकार के प्रति जवाबदेही के प्रति व्यवहार बदलने की घुटी पिलाई गई तो वहीं इस चिंतन शिविर में इस नीति को भी पुन: दोहराया गया कि जो संगठन में जिला अध्यक्ष के पद पर आसीन है
उन्हें विधानसभा में विधायक का टिकट नहीं दिया जाएगा। हालांकि ऐसा निर्णय २०१३ के चुनाव के पूर्व भी लिया गया था लेकिन जब टिकट वितरण का समय आया तो जिताऊ उम्मीदवार के रूप में कई जिला अध्यक्षों को टिकट दिए गए। देखना अब यह है कि इस बार इसको पुन: लागू किये जाने की बात का कितना पालन होता है क्योंकि भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है, वह जो कहती है उसका पालन करती नहीं है अब देखना यह है कि इस शिविर में विधायकों को जहां घुटी पिलाने का भी काम किया गया तो वहीं अपने आचरण और व्यवहार सुधारने की नसीहत देकर चेतावनी दिये जाने का भी दौर जारी रहा। कुल मिलाकर यह दो दिवसीय विधायकों के प्रशिक्षण शिविर के बाद सत्ता, संगठन, मंत्रियों व विधायकों के आचरण और व्यवहार में कितना परिवर्तन आता है और वह पिछले प्रशिक्षण शिविरों की तरह विधायकों को पिलाई जाने वाली घुट्टी का कितना पालन करता है यह तो समय बताएगा।


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