मध्यप्रदेश के भारतीय जनता पार्टी की सत्ता के मुखिया शिवराज सिंह चौहान की भी यह दिली इच्छा है कि मध्यप्रदेश को भी नशामुक्त घोषित किया जाए, तो वहीं इसी शराब से जुड़े मामलों को लेकर मुख्यमंत्री को कई बार रातों की नींद नहीं आई तो वहीं शराबबंदी को लेकर कई तरह की घोषणाएं समय-समय पर होती रहीं लेकिन आज तक उनपर कोई पालन नहीं हो सका,
एक समय ऐसा भी गुजरा जब मुख्यमंत्री ने देशी शराब की दुकानों से अंग्रेजी शराब की बिक्री करने की घोषणा की इस घोषणा करने के बाद उन्हें रातभर नींद नहीं आई और इस तरह की घोषणा के चिंतन के चलते उन्हें रातभर करवटें बदलते रहे और अंतत: उनके द्वारा की गई उस घोषणा को उन्होंने वापस ले लिया और अब जब पूरे प्रदेश में नमादि देवी नर्मदे यात्रा का आयोजन चल रहा है
तो उन्हीं के द्वारा यह घोषणा की गई कि नर्मदा किनारे शराब की दुकानें नहीं होंगी तो वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते हाईवे मार्गों से दूर शराब की दुकानें हटाने का भी निर्णय लिया गया। तो वहीं दूसरी ओर सरकार की नीतियों के चलते पूरे प्रदेश में शराब एक घर पहुंच सेवा के रूप में उपलब्ध हो रही है लोगों को भले ही रात के ११ बजे के बाद अपने बच्चों को पिलाने के लिए दूध उपलब्ध न हो लेकिन शराब की उपलब्धता की स्थिति यह है कि देर रात कभी भी लोग जहां चाहें वहां शराब आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
यही कारण है कि आज राज्य में शराब का प्रचलन अधिक हो गया है, लेकिन एक तरफ सरकार शराब पीने की प्रवृत्ति को लेकर चिंतित होने की नौटंकी करती नजर आ रही है तो वहीं दूसरी ओर शराब की बिक्री ज्यादा से ज्यादा हो इस दिशा में सरकार के प्रयास भी जारी हैं। इसी नीति के चलते अब मध्यप्रदेश सरकार होटल और बारों में शराब की बिक्री बढ़ाने को लेकर नये निर्देश जारी किये हैं और नये वित्तीय वर्ष में दस फीसदी से ज्यादा शराब की बिक्री बड़े इस तरह के प्रयास में सरकार लगी हुई है।
हालांकि सरकार की इस नीति का विरोध मध्यप्रदेश होटेलियर एसोसिएशन विरोध करती नजर आ रही है तो इस एसोसिएशन का यह मानना है कि ऐसी नीति सामाजिक और व्यवहारिक दोनों दृष्टि से अनुचित है, ज्यादा शराब बेचने के लिये होटल व्यवसायी और बार वालों को मजबूर करने की सरकार की गलत नीति के परिणाम अच्छे नहीं होंगे, इस समय मध्यप्रदेश में २५९४ देशी और १०८९ विदेशी शराब की दुकानें हैं शराब की बिक्री को लेकर सरकार की नीति की ओर ठेकों और दुकानों के अलावा ७३ बार, बार लायसेंस वाले १८१ होटल, तीन रिसोर्ट, शराब लायसेंस वाले १५ क्लबों के अलावा १६ कमिश्नीरियल क्लबों, १७३ आहतों के साथ-साथ १२० सेना की केंटीन्स के पास शराब बिक्री के लायसेंस हैं
इन सभी माध्यम से तो सुरा प्रेमियों को शराब उपलब्ध होती है तो वहीं राज्यभर का शायद ही ऐसा कोई गांव या कस्बा बचा हो जहां के सुरा प्रेमियों के लिये शराब घर पहुंच सेवा के रूप में उपलब्ध हैं और वह जब चाहें जहां चाहें उन्हें शराब उपलब्ध हो जाती है लेकिन सरकार जहां शराब की बिक्री को लेकर तरह-तरह की नीतियां बनाती नजर आ रही है तो उससे यह साफ जाहिर हो जाता है कि प्रदेश सरकार शराब की बिक्री अब होटलों बार और शराब की दुकानों के साथ-साथ शराब की बिक्री बढ़ाने के साधनों की तलाश में जुटी हुई है।
खैर देखना अब यह है कि एक ओर जहां प्रदेश के मुखिया इस प्रदेश में पूर्ण नशाबंदी करने संबंधी बयान दे रहे हैं तो वहीं उनके वित्तमंत्री और प्रशासन में बैठी अफसरशाही शराब की बिक्री से आय जुटाने के नये-नये तरीकों की खोज में लगी हुई है, इस स्थिति को देखते हुए यह साफ नजर आता है कि सरकार की शराब को नीति को लेकर उसकी कथनी और करनी में अंतर है।
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