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भोपाल। जबसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस प्रदेश की सत्ता की कमान संभाली है तबसे लेकर आज तक उनके संयोग ही कहें कि उनके समक्ष जितनी समस्यायें इस प्रदेश के विपक्षी दलों के नेताओं और विपक्षी पार्टी के लोगों ने खड़ी नहीं की होंगी जिस तरह से शिवराज के शासनकाल में उनके परिजनों द्वारा अपने शिवराज के मुख्यमंत्रित्वकाल का भरपूर लाभ उठाने की तर तरह से प्रयास किये फिर चाहे वह रेत का अवैध खनन का मामला हो या फिर कोई अन्य मामला हो। कहने वाले तो यह तक कहते हैं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के परिजनों द्वारा शायद ही प्रदेश में ऐसा कोई कारोबार हो चाहे वह शराब कारोबार से जुड़ा हो या फिर रेत या खनिज या अवैध वन कटाई का मामला हो? इस तरह के अवैध कारोबार में कहीं न कहीं से मुख्यमंत्री के परिजनों का नाम जुडऩा इस बात की ओर इशारा करता है कि उनके परिजन सत्ता का पूरा लाभ उठाने में लगे हुए हैं
सकी वजह से वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जो राजनीति में जनता जर्नादन की सेवा करने आए हैं और दरिद्र नारायण की सेवा करना उनका एकमात्र उद्देश्य है और इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिये वह दिन-रात लगे हुए हैं, यही वजह है जिसका वह खुद खुलासा कर चुके हैं कि दरिद्र नारायण के उत्थान की चिंता करते-करते न तो उनके अन्य राजनेताओं और मुख्यमंत्रियों की तरह गाल लाल हो रहे हैं और न ही उनका पेट बढ़ रहा है। शायद इस तरह के बयानों को देकर वह अपनी पीढ़ा व्यक्त करने का प्रयास कर रहे हैं और इस तरह के बयानों से वह अपने परिजनों और जो मुख्यमंत्री के नाम का सहारा लेकर प्रदेश में अवैध कारोबार करने में सक्रिय हैं उन्हें चेताने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन उनके परिजन हैं जो मानते ही नहीं और यही नहीं आयेदिन यह परिजन कोई न कोई ऐसा कारनामा कर दिखाते हैं जिसकी वजह से मुख्यमंत्री के समक्ष कोई न कोई परेशानी खड़ी हो जाती है, हालांकि मुख्यमंत्री के अपने कार्यकाल के ११ वर्षों के दौरान जिस तरह की समस्यायें उनके परिजनों द्वारा खड़ी की गईं उतना शायद न तो इस प्रदेश के विपक्षी नेताओं ने खड़ी की होंगी और न ही विपक्षी दलों ने, अपनों के द्वारा आयेदिन कोई न कोई इस तरह की समस्यायें खड़ी किये जाने से मुख्यमंत्री परेशान तो हैं मगर ऐसा लगता है कि वह अपने परिजनों को अवैध कारोबार करने से मना क्यों नहीं कर पा रहे यह वही जानें लेकिन यह सच है कि मुख्यमंत्री के द्वारा इस प्रदेश की सत्ता की कमान संभालने के कुछ ही दिनों बाद उनके निर्वाचन क्षेत्र बुदनी से प्रारंभ हुए अवैध रेत के कारोबार का साम्राज्य आज पूरे प्रदेश में जारी है
इस कारोबार को रोकने वालों को सत्ता के अहम में यह कारोबारी ठिकाने लगाने से भी नहीं चूके हैं, जिसका जीता जागता उदाहरण है मुरैना की दो घटनाएं हालांकि आयेदिन इस तरह के कारोबार क ी खबरें कहीं न कहीं से सुर्खियों में बनी रहती हैं, लेकिन इस कारोबार से उनके परिजनों के जुडऩे की वजह से प्रदेश का कोई अधिकारी कुछ करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है यह अलग बात है कि मुख्यमंत्री की अपने परिजनों को इस तरह के कारोबार के लिए न तो कोई संरक्षण है और न सहमति लेकिन जैसा कि नगरीय निकाय चुनावों में सफलता प्राप्त करने के बाद सागर में सम्पन्न हुई प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में प्रदेश के संगठन के मुखिया नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा था कि ‘शिव से बड़ा शिव का नाम लगता है कि इस कारोबार में उनके परिजनों द्वारा यही नीति अपनाई जा रही है, हाल ही में सलकनपुर के पास शनिवार की शाम को खनिज विभाग ने छ: डम्परों को जब्त किया उनमें क्षमता से ज्यादा रेत भरी हुई थी, छ: में से चार डम्पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के भतीजे प्रद्मुम्न सिंह चौहान के बताये जा रहे हैं, माइनिंग इंस्पेक्टर रश्मि पांडे ने उन्हें सलकलपुर में उस वक्त रोका जब वह बुदनी के नर्मदा नदी के चरुआ रेतघाट से रेत भरकर भोपाल की तरफ जा रहे थे। रश्मि पांडे के अनुसार चालकों के पास रेत की रायल्टी तो थी लेकिन डम्परों में क्षमता से ज्यादा रेत भरी हुई थी इसलिये ओवर लोडिंग के प्रकरण बनाये हैं और सभी डम्परों को जब्त कर रेहटी थाने में खड़ा किया गया ओवर लोडिंग का प्रकरण दर्ज किया गया ऐसा सीहोर के खनिज अधिकारी एमए खान का कहना है।
डम्परों का जो विवरण प्राप्त हुआ उसके अनुसार चार डम्पर मुख्यमंत्री के भतीजे प्रद्मुम्न सिंह चौहान के नाम हैं जिनका वाहन क्रमांक एमपी ०४-एचई-३४०० वाहन मालिक प्रद्मुम्न सिंह चौहान पिता नरेन्द्र सिंह चौहान अलकापुरी मकान नं. ए-९१ भोपाल है तो दूसरे डम्पर का वाहन क्रमांक एमपी ०४ एचई ३७१८ व एमपी ०४ एचआई ३७२० वाहन मालिक प्रद्मुम्न सिंह चौहान निवासी मकान नं. २६२, ९-ए साकेत नगर भोपाल इसी प्रकार वाहन क्रमांक एमपी ०४ एचई २००५ वाहन मालिक प्रद्मुम्न सिंह चौहान निवासी अवधपुरी मकान नं. ए-९१ अवधपुरी भोपाल तो जब्त किए गए छ: डम्परों में से चार डम्पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भाई नरेन्द्र सिंह चौहान के पुत्र प्रद्मुम्न सिंह चौहान के नाम पर हैं तो दो वाहन एमपी ०४ एचआई २१४७ जिसके वाहन मालिक विनोद सनोदिया निवासी खजूरीकाल अवधपुरी भेल भोपाल, इसी प्रकार छठवें डंपर का नम्बर है एमपी ०४ एचई ३९०४ वाहन मालिक का नाम शिवशंकर पिता बच्चेसिंह निवासी अरेरा कालोनी मीरा नगर भोपाल। इस घटना से यह साफ जाहिर हो जाता है कि मुख्यमंत्री के परिजन शिवराज के सामने नित्य नई-नई समस्यायें खड़ी करने में लगे हुए हैं और जिनकी वजह से मुख्यमंत्री को परेशानी का सामना करना पड़ता है और उनकी स्वच्छ ईमानदार प्रशासनिक छवि धूमिल होती है।
हालांकि मुख्यमंत्री के सत्ता पर काबिज होने के बाद तत्कालीन भारतीय जनशक्ति के राष्ट्रीय महासचिव पूर्व सांसद प्रहलाद पटेल ने भी २८ सितम्बर २००७ को मीडिया के समक्ष एक पत्र जारी कर यह आरोप लगाया था कि कई जिलों में रसूखदार नेता चला रहे हैं अवैध खदान, उस समय पटेल मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े एक मुद्दे को लेकर उपवास पर बैठे थे और अपने उपवास के चौथे दिन खनिज एवं वन विभाग में वृहद स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार की उन्होंने पोल खोली थी, पटेल ने भ्रष्टाचार पर अपनी टिप्पणी में कहा था कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की ३२ चोरों की टीम का खुलासा करने में सात दिन का समय पर्याप्त है आज उस दिनांक को जारी अपने पत्र में उन्होंने कहा था कि आज हम जिन सरकारी विभाग की तथ्यात्मक जानकारी दे रहे हैं उनमें खनिज विभाग के तथ्यों को देखेंगे तो पता चलेगा कि मुख्यमंत्री ने अपने परिजनों के नाम पर दर्जनों खदानें ले रखी हैं, रही बात वन विभाग की तो जंगल काटने और कटवाने में मंत्रीमण्डल के कई सदस्य शामिल हैं पटेल ने अपने पत्र के माध्यम से मीडिया से कहा था कि उपवास की सफलता इस बात से परिलक्षित होती है कि मुख्यमंत्री के नजदीकी नरेन्द्र सिंह चौहान की खदान दो दिन पूर्व ही निरस्त की गई। यह उपवास की सफलता का द्योतक है,
उक्त पत्र में पटेल ने उक्त खदान के बालाघाट जिले में होने की बात कही थी, उसी दिन जारी मीडिया को जारी एक पत्र में उन्होंने बुदनी में रेत खनन का मुख्यमंत्री के परिजनों द्वारा संचालन, ग्वालियर जिले के बड़ागांव और जावोदा में मुख्यमंत्री के रिश्तेदार गुलाबसिंह धाकड़ के द्वारा खदान का संचालन करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे, यही नहीं उस दिन जारी अपने मीडिया को पत्र में तत्कालीन भारतीय जनशक्ति के राष्ट्रीय महामंत्री ने ऐसे कई राजनेताओं के नामों की एक सूची जारी की थी जिसमें शिवराज मंत्रीमण्डल के तत्कालीन कई मंत्रियों के द्वारा रेत खदान का अवैध संचालन और उनके कई रिश्तेदारों के नाम भी उजागर किए थे, उस पत्र में ऐसे कई नाम थे जो आज भी अपना कारोबार प्रदेश में जारी रखे हुए हैं और उन पर आज तक कोई कार्यवाही करने की जुर्रत प्रशासन में बैठे लोगों को नहीं हो रही है। यही नहीं उस समय प्रहलाद पटेल ने सीहोर के बुदनी और होशंगाबाद में रेत के अवैध उत्खनन में लगे कई डम्परों का भी नम्बर मीडिया को दिये अपने पत्र में उजागर किया था जिनका संबंध मुख्यमंत्री के परिजनों से था। लेकिन उस दिन से लेकर आज तक ऐसा प्रदेश में कई दिखाई नहीं दिया कि राज्य में अवैध रेत खनन और अवैध खनिज के कारोबार पर सख्ती से कार्यवाही की जा रही हो, शायद इसी का परिणाम है कि आज प्रदेश का शायद ही ऐसा कोई कोना बचा हो जहाँ इस तरह का खनिज कारोबार जारी न हो?

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