मुंबई : यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने नोटबंदी को 2016 का सबसे बड़ा घोटाला करार देते हुए कहा कि इसके कारण GDP को 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
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उन्होंने कि कहा कि नोटबंदी की वजह से 2016-17 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6-6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो कि सीएसओ व आरबीआई के पूर्वानुमानों से कहीं कम है। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) ने 2016-17 में वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत और रिजर्व बैंक ने 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
सरकार को होगा गलती का एहसाससीनियर कांग्रेस चिदंबरम ने एक कार्यक्रम में कहा, 'मुझे यह अनुमान लगाते हुए खेद है कि 2016-17 में वृद्धि दर 6 से 6.5 प्रतिशत के बीच रहेगी, जोकि पूर्व के अनुमान से ठीक एक प्रतिशत कम है। इसका मतलब है जीडीपी पर 1.5 लाख करोड़ रुपये की चोट। इस साल जीडीपी 150 लाख करोड़ रुपये है इसमें एक प्रतिशत चोट का मतलब है 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, 'किसी के दिमाग में विचार आया और उसने टेलीविजन पर नोटबंदी की घोषणा कर दी जिससे (जीडीपी को) 1.5 लाख करोड़ रुपये की चोट लगी। देर सवेर सरकार को नोटबंदी की 'नादानी' का भान होगा।'
कांग्रेस नेता ने कहा कि नोटबंदी के बाद पुनर्मुद्रीकरण जून तक पूरा होगा। आप पहले नोटबंदी करते हैं और फिर कहते हैं कि हम नए नोट जारी कर रहे हैं, क्या मजाक है? सरकार ने एक झटके में 15.44 लाख करोड़ रुपये की करंसी को चलन से हटा दिया और अब सरकार वापस इतनी ही करंसी छाप रही है। मोदी शासनकाल में मीडिया खौफ मेंचिदंबरम ने कहा कि न सिर्फ दलित और अल्पसंख्यक, बल्कि मीडिया भी केंद्र की मोदी सरकार के शासनकाल में दबाव और खौफ के साये में जी रहा है।
उन्होंने कहा, 'दलित खौफ में जी रहे हैं, अल्पसंख्यक खौफ में जी रहे हैं, छात्र और विश्वविद्यालय खौफ में जी रहे हैं। मीडिया भी खौफ के साये में जी रहा है। उन्होंने बताया कि चैनल के एक वरिष्ठ पत्रकार ने उनका इंटरव्यू किया था, लेकिन आखिरी वक्त में इसका प्रसारण रोक दिया गया।

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