राज अरजरिया // TOC NEWS
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चुनाव के पूर्व राज्य की जनता जहां भाजपा अपनी परंपरागत नीति को अपनाते हुए बड़े लोक लुभावने वायदे जनता से करने में लगी हुई है और इन वायदों में एक वायदा कि राज्य के मतदाताओं से करती नजर आ रही है कि यदि भाजपा की उत्तरप्रदेश में सरकार बनी तो खनिज माफियाओं पर कार्यवाही की जाएगी, भाजपाके इस वायदे के को लेकर राय के मतदाताओं में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं और लोग यह कहते नजर आ रहे हैं कि पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में विगत १३ वर्षों से सरकार के, उस भाजपा के १३ वर्षों में घोटाले-दर घोटाले हुए ही ळे तो वही राज्य में सबसे बड़ा घोटाला व्यापमं, भी भाजपा के शासनकाल के दौरान घटित हुआ था।
इस यही नहीं राज्य में भाजपा के शास नकाल के दौरान किसानों द्वारा आत्म्हत्या किये जाने का दौर भी जारी है तो वहीं प्रदेश में कानून व्यवस्था की यह स्थिति बद से बदतर है । भारतीय जनता पार्टी के राज्यों की कानून व्यवस्था की इस स्थिति का इस बात से इही अंदाजा लगाया जा सकता है कि पड़ोसी रज्ञज्य मध्यपदेश के मुख्यमंत्री की मां गले से दिन दहाड़े चैन छीनने की घटना घटित होती है तो फिर आम जनता की क्या स्थिति होगी .
भाजपा द्वार प्रदेश की जनता कोचुनाव के दौरान किसी जा रहे वायदों और दावों को लेकर यहां तरह-तरह की चर्चाएं हैं और लोग यक हकते नजर आ रहे हैं कि भाजपा किस तरह से प्रदेश की जनता को लुभावने वायदों में फंसाने के प्रयास में लगी हुइ है। उनके बाद अब वादों और दावों में कितनी सच्चाई है यह तो पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में ही देखा जा सकता है जहां मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के परिजन सत्ता के संरक्षण में धड़ल्ले से अवैध कारोबार में लिपत हैं
तो वहीं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के मंत्रिमण्डल के सदस्य राज्यमंत्री संजय पाठक जिनका मूल कारोबर ख्निज है जो कांग्रेस का दामन छोड़ अपने खनिज कारोबर को सत्ता का आवरण हासिल करेन के लिये तीस करोड़ रुपए देकर मंत्री पद हासिल किया और आज जब वह कटनी के एपेक्स बैंक में घटित पाँच सौ करोड़ के हवालाकांण्ड के आरोप से घिरे हुए हैं लेकिन भजपा उन्हें खनिज कारोबारी होने के बावजूद भी पद से हटाने में हिचक रही है,
इसस यह साफ जाहिर हो जाता है कि भाजपा जो कि खनिज माफियाओं पर कार्यवाही करने का झुनझुने के भ्रमजाल में फंसाने की कोशिश कर रही है उसमें कितनी सच्चाई है और भाजपा की कथन और करनी में कितना अंतर इस सबको लेकर राज्य के मतदाताओं में तरह-तरह की चर्चाओं का दौर गर्म है।

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