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सुप्रीम कोर्ट 500 और 1000 के नोट बंद करने के खिलाफ दायर पीआईल पर 15 नवंबर को सुनवाई करेगा।
मद्रास हाई कोर्ट ने नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट बंद करने (विमुद्रीकरण) के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) को रद्द करते हुए कहा है कि सरकार का “विमुद्रीकरण का फैसला देश की भलाई में है।” इंडियन नेशनल लीग के राज्य महासचिव एम सीनी अहमद ने अदालत में ये याचिका दायर की थी।
याचिका में अहमद के वकील एएमए जिन्ना ने अदालत से कहा था कि सरकार के फैसले से आम जनता को बहुत समस्या होगी इसलिए इस फैसले को रद्द किया जाए। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दायक की गई एक पीआईल की सुनवाई 15 नवंबर को करेगा। केंद्र सरकार ने गुरुवार (10 नवंबर) को सर्वोच्च अदालत में एक कैविएट दायर करके कहा है कि इस मामले में किसी भी तरह का अंतरिम आदेश पारित करने से पहले उसका पक्ष जरूर सुना जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1000 बंद करने की घोषणा की।
सुप्रीम कोर्ट में नौ नवंबर को दिल्ली के वकील विवेक नारायण शर्मा ने एक जनहित याचिका दायर की थी जिसमें नरेंद्र मोदी सरकार के 500 और 1000 के नोट बंद करने के फैसले को चुनौती दी गई है। पीआईएल में कहा गया है कि सरकार के इस फैसले से लोगों के “जीवन और कारोबार से जुड़ा अधिकार” प्रभावित हुआ है।
याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च अदालत से सरकार के फैसले को रद्द करने की मांग की है। बुधवार को ही बॉम्ब हाई कोर्ट में भी 500 और 1000 के नोटों के विमुद्रीकरण के आदेश को रद्द कराने के लिए एक पीआईएल दायर की गई। मुंबई हाई कोर्ट के दो सीनियर एडवोकेट जमशेद मिस्त्री और जब्बार सिंह ने कोर्ट की वैकेशन बेंच से स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार के फैसले को रद्द करने की मांग की है।

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