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रायपुर. जगदलपुर की जेल में कैद एक बंदी इलाज के बहाने वहां से आकर राजधानी रायपुर के एक हॉस्पिटल में भर्ती हुआ और अपनी जगह प्रहरी को बेड पर लिटाकर खुद लेट नाइट पार्टिंयां करता रहा। दवा और इंजेक्शन का टाइम होने पर प्रहरी खुद ही टेबलेट लेता और इंजेक्शन भी लगवाने से नहीं चूकता। प्रहरी उसके साथ जगदलपुर से ही आया था। भांडा फूटने से जेल प्रशासन से लेकर पुलिस और डाक्टरों का पूरा अमला सवालों के दायरे में आ गया है।
सिविल ड्रेस पहनकर सोता था प्रहरी ...
- अंबेडकर हॉस्पिटल में भांडा फूटने के बाद बंदी सगीर खान गायब है। उसे लेकर आने वाले तीनों प्रहरियों का भी कहीं अता-पता नहीं है।
- हॉस्पिटल से गायब होने के पहले न तो बंदी ने डाक्टरों को बताया और न ही प्रहरियों ने।
- हॉस्पिटल प्रशासन की ओर से उनके खिलाफ मौदहापारा थाने में झांसा देने के आरोप में शिकायत भी दर्ज करा दी गई है।
- 15 दिनों पहले ही मेडिसिन विभाग से फर्जी केस टिकट बनवाने का मामला सामने आया था। उस मामले की जांच अभी पूरी हुई है।
चश्मदीदों ने बताया- सिविल ड्रेस पहनकर सोता था प्रहरी
- जेल में भर्ती होने वाले दिन से ही कैदी घूमने के लिए बाहर चला जाता था। उसकी जगह प्रहरी यूनिफार्म बदलकर सिविल ड्रेस में बिस्तर पर लेट जाता था।
- दवा का टाइम होने पर नर्स प्रहरी को ही इंजेक्शन लगाती थीं। वह छह दिन भर्ती रहा लेकिन इस बीच कंसल्टेंट डॉक्टर, जूनियर डॉक्टर व स्टाफ नर्सों को छह दिनों तक कोई शक ही नहीं हुआ।
दिवाली के दिन लाया गया
- सेंट्रल जेल जगदलपुर में बंद 38 वर्षीय कैदी सगीर खान को हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत पर दिवाली के दिन 30 अक्टूबर को रायपुर लाया गया था।
- राजधानी की जेल में आमद देने के बाद जगदलपुर पुलिस लाइन से लाए गए प्रहरी सीधे अंबेडकर हॉस्पिटल ले गए। उसी दिन से बंदी वहीं भर्ती था।
- जिस दिन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, उस दिन दिवाली थी। त्योहार होने के कारण ज्यादातर मरीज दिवाली मनाने गए थे।
- उस दिन अोपीडी डे एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एसके चंद्रवंशी की यूनिट का था, इसलिए उसे उन्हीं की यूनिट में भर्ती कराया गया।
देखें, कैसे हुआ मामले का खुलासा..
ऐसे हुआ खुलासा
- रविवार की रात दो बजे बंदी कहीं से पार्टी मनाकर हॉस्पिटल पहुंचा। उसे जिसने पार्टी दी थी, वह व्यक्ति उसे हॉस्पिटल तक छोड़ने आया था। दोनों नशे में थे।
- वार्ड पहुंचने के बाद दोनों के बीच जमकर कहा-सुनी हुई। इस पर हॉस्पिटल के स्टाफ व बाकी मरीज जाग गए। तब कैदी के पार्टी मनाने व ज्यादातर समय हॉस्पिटल से बाहर रहने की पुष्टि हुई।
- जब कैदी पार्टी बनाकर हॉस्पिटल आया, तब प्रहरी उसके बेड में सोया हुआ था। तब हॉस्पिटल स्टाफ ने प्रहरी को उसी समय खरी खोटी सुनाई।
- अगले दिन सुबह से ही वार्ड में उन्हीं के बारे में चर्चा थी। उसी के बाद फंसने के अंदेशे से चारों गायब हो गए।
सीधी बात - डॉ. विवेक चौधरी, हॉस्पिटल अधीक्षक
आखिर एक कैदी कैसे पार्टी कर अपनी जगह प्रहरी को भर्ती कर सकता है?
- मामला गंभीर है। इसलिए हमने एफआईअार दर्ज करवाया है।
- मामला गंभीर है। इसलिए हमने एफआईअार दर्ज करवाया है।
आखिर ऐसे कैसे हो गया कि स्टाफ प्रहरी व कैदी को न पहचाने और प्रहरी को इंजेक्शन लगाए?
- यह पड़ताल का विषय है कि आखिर ऐसे कैसे हुआ? इसमें स्टाफ से पूछताछ की जाएगी।
- यह पड़ताल का विषय है कि आखिर ऐसे कैसे हुआ? इसमें स्टाफ से पूछताछ की जाएगी।
मामला हाई प्रोफाइल लगता है? क्या मामले को दबाने का भी दबाव था?
जवाब- हां, कुछ राजनीतिक रसूख वालों का बार-बार मामले को दबाने के लिए फोन आया, लेकिन हमने एक न सुनी।
जवाब- हां, कुछ राजनीतिक रसूख वालों का बार-बार मामले को दबाने के लिए फोन आया, लेकिन हमने एक न सुनी।

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