ब्यूरो प्रमुख // राजेश रजक (सागर //टाइम्स ऑफ क्राइम)
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बिना व्यवस्था जिले में चल रहे 36 निजी नर्सिग होम
पूरा नर्सिग होम अतिक्रमण की आड़ मे चला रहें शर्मा जी सड़क पर जनरेटर की व्यवस्था है आवासीय कालोनियों का व्यवसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। शर्मा जी के पास पालिशन प्रदूषण बोर्ड का परमिशन है या नहीं है इन्हें केवल राजनैतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण शासन प्रशासन इन पर कार्यवाहीं करने से डर रहा है। शर्मा जी को केवल पैसो से मतलब इनको न बायो मेडिकल अपशिष्ट निकलने वाले कचरे से मतलब न ही यातायात व्यवस्था से मतलब न इनको आम जनता की सेहत से मतलब केवल नर्सिग होम चलना चाहिये पैसा आना चाहिये। शासन प्रशासन को आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के साथ क्या करना चाहिये..........
अपिता नर्सिग होम संचालक डॉ. अरूण सिंघई श्रीमति ममता सिंघई जो कि इनका नर्सिग होम हाऊसिंग नगर पद्माकर कालोनी नगर में स्थित जो कि पूर्णत: आवासीय कालोनी के बावजूद न पार्किग व्यवस्था, न ही अपशिष्ट पदार्थों की व्यवस्था की है। बल्कि इन्होंने अतिक्रमण की आड़ मे लेकर पूरे सड़क पर ही नर्सिग होम बना लिया और न ही प्रदूषण की मान्यता है फिर भी नर्सिग होम चल रहे हैं। चलिये बात करते है भागीरथी नर्सिग होम जो पद्माकर कालोनी मे स्थित है। आवासीय कालोनी इन्होंने तो नर्सिग होम के बाजू में में ही कचरा घर बना रखा है,जिनके संचालक है डॉ. साधना मिश्रा। डॉ. हर्ष मिश्रा डिलेवरी का पूरा काम होता है। निकलने वाली गन्दगी को नर्सिग होम के दो एकड़ जमीन में कचरा घर बना दिया है। अब बताइये प्रदूषण बोर्ड ने इनको मान्यता दी है।
शांति नर्सिग होम संचालक डॉ. राकेश शर्मा जो है इन डॉक्टर साहब ने नीचे घर, ऊपर नर्सिग होम बनाया हुआ है आवासीय कालोनी होने के बावजूद इससे निकलने वाले कचरे को सड़क पर फेक दिया जाता है। फरेनदास नर्सिग होम संचालक डॉ. कमला ठाकुर जो डिलेवरी पूरा काम करती है। इनक े स्टॉफ की विशेषता है कि सारे व्यक्ति 6-7 वीं पास सारे काम करते है एक भी योग्य प्रशिक्षित व्यक्ति नहीं जो इंजेक्शन लगा सकें। जिले में जितने भी नर्सिग होम है आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसा नहीं कि स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी नहीं हैं लेकिन राजनैतिक दबदबा होने के कारण शासन प्रशासन मौन और क्यों न हो इसका मोटा हिस्सा पहुंचा दिया जाता है।

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