Monday, August 27, 2012

घपलों घोटालों का रमन राज


घपलों घोटालों का रमन राज

विनोद उपाध्याय 
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कोल ब्लॉक आवंटन में अनियमितता पर आयी कैग रिपोर्ट में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को फंसता देख भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को लगा कि बैठे बिठाए दोनों हाथ में लड्डू मिल गया है और वे अगले आम चुनाव जीत कर सरकार बनाने का ख्वाब भी देखने लगे की इसी बीच छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की इस मामले में घालमेल सामने आ गई और भाजपा की बोलती ही बंद हो गई। भाजपा के ख्वाब को सबसे अधिक झटका छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह यानी चाउर वाले बाबा के कारनामों से लगा है।

रमन सिंह सरकार किस तरह काम करती आ रही है कैग की रिपोर्ट में दिखा दिया है। कोई ऐसा विभाग नहीं है जहां से भ्रष्टाचार की बू नही आ रही हो। सबसे बुरा हाल तो खुद उन विभागों का है जिनके मुखिया खुद मुख्यमंत्री रमन सिंह है। उर्जा विभाग तकरीबन 1700 करोड का चूना लगा गया।  इस घोटालों की उंगली सीधे ऊर्जा सचिव रमन सिंह की ओर उठ रही है।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आंनद शुक्ला कहते  है कि ऊर्जा विभाग की पांचों बिजली कंपनियां रिटायर्ड और संविदा अधिकारियों की चारागाह बन गयी है। राज्य में विद्युत का उत्पादन और वितरण सुचारू रूप से हो, इसलिए छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल का विखंडन कर पांच कंपनियों का निर्माण किया गया था, लेकिन विखंडन के बाद बिजली कंपनियां बेलगाम हो गई ई। भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार और लूट-खसोट के उद्देश्य से चहेते और अपात्र अधिकारियों को इन कंपनियों की कमान सौंप दी है। इसी का परिणाम है कि कभी विद्युत सरप्लस और मुनाफे वाला छत्तीसगढ़ आज अघोषित कटौती और घाटे का सामना कर रहा है।

सीएजी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में जो रिपोर्ट प्रस्तुत की है, उसमें सीएजी ने ऊर्जा विभाग और बिजली कंपनियों के 1700 करोड़ के अधिक के घोटालों को रेखांकित किया है। सीएजी के अनुसार निजी विद्युत उत्पादकों से बिजली खरीदी में विद्युत वितरण कंपनी को एक वर्ष में 420 करोड़ रूपए और विद्युत पारेषण कंपनी में ट्रांसमिशन हानि अधिक होने के कारण पांच वर्ष में राज्य को 1122 करोड़ रूपयों की हानि उठानी पड़ी है। अटल ज्योति योजना में विलंब और भ्रष्टाचार के कारण लगभग 115 करोड़ रूपए का नुकसान राज्य को हुआ। विद्युत मंडल का विखंडन कर नई कंपनियां बना दी गई। उनके वार्षिक बजट में 80 से 220 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी गई, लेकिन ये कंपनियां राज्य के लिये सफेद हाथी साबित हुई हैं।

खनिज विभाग ने तो हद ही कर दी। यह विभाग भी सीएम के पास है। इस विभाग के द्वारा कम कीमत पर कोयला ब्लाक दे दिया गया। खजाने को 1052 करोड़ की चपत लगा दी गई। भटगांव कोल ब्लाक में जिस कंपनी का नाम सामने आया है वह एसएमएस इन्फ्रा स्ट्रक्चर नागपुर है तथा इसके डायरेक्टरों का नाम अजय संचेती, अभय संचेती, आनंद संचेती है। इसी एसएमएस इन्फ्रा स्ट्रक्चर कंपनी को दुर्ग बाईपास के निर्माण मामले में जमा 1735 करोड़ को अवैध तरीके से वापस कर दिया गया था तथा सरकार को राजस्व का 1735 करोड़ का नुकसान हुआ था।

छत्तीसगढ़ में कैग की रिपोर्ट जारी होते ही कांग्रेस ने हल्ला मचाना शुरू किया। केन्द्र में भाजपा प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह सेे इस्तीफे की मांग कर रही है। राज्य में कांग्रेस बचाव की मुद्रा में है और इसके लिए वह भी संसद की लोकलेखा समिति का सहारा ले रही है। केन्द्र की रिपोर्ट को लेकर भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर हल्ला मचा रही है, लेकिन राज्य में भाजपा के नेता केवल विरोध की औपचारिकता निभा रहे हैं।  मुख्यमंत्री रमन सिंह का कहना है कि कैग की रिपोर्ट में सिर्फ अनुमान है। इसमें पुख्ता कुछ भी नहीं है। वहीं छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल का कहना है कि कैग की रिपोर्ट से भाजपा को सही चेहरा उजागर हो गया है।
कोयला घोटाले में कैग की रिपोर्ट से छत्तीसगढ़ का नाम कोयले के मामले में देशभर में जरूर चमक गया, लेकिन हकीकत यह है कि राज्य के उद्योग कोयले का जबर्दस्त संकट झेल रहे हैं। राजधानी और आसपास के सैकड़ों स्पांज आयरन और स्टील प्लांट की स्थिति ये है कि कोयले की कमी से ये बंदीकी ओर हैं। छत्तीसगढ़ में कोयले का इतना बड़ा भंडार है कि देश का हर छठा उद्योग चल सकता है। लेकिन राज्य के सैकड़ों कोल आधारित उद्योग इसकी खासी कमी झेल रहे हैं।

हजार करोड़ से अधिक के कोयला घोटाले की आंच राज्य के स्टील उद्योगों पर पड़ी है। पिछले कई साल से उद्योगपति कोयले की आपूर्ति को लेकर कोयला मंत्रालय के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन मांग के मुताबिक उन्हें आधा कोयला भी नहीं मिल पा रहा। इससे कई स्टील उद्योगों पर तालाबंदी की नौबत आ गई है।
प्रदेश में कोयला ही नहीं बॉक्साइट खनन में भी भारी गड़बड़ी का खेल जारी है। बॉक्साइट उत्खनन कर रही भारत एल्यूमिनियम कम्पनी लिमिटेड (बालको) ने तीन साल का कोटा एक ही बार में पूरा कर लिया। इसके बावजूद ठेका शर्तो की अनदेखी करते हुए राज्य सरकार ने उससे पूरी रॉयल्टी नहीं वसूली। इससे करीब 44 लाख रूपए कम राजस्व प्राप्त हुआ।

बॉक्साइट खनन में हुई इस अनियमितता का खुलासा इस वर्ष जारी नियंत्रक महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में हुुआ है। राज्य सरकार अनुबंध की शर्तो का पालन करने और कराने में असफल रही। इससे 43.88 लाख रूपए का नुकसान हुआ। रिपोर्ट के अनुसार मैनपाट स्थित खदान से बॉक्साइट खनन का ठेका तीन वर्ष के लिए बालको को मिला।
शर्तो के अनुसार बालको को हर साल वहां से एक लाख 20 हजार मीट्रिक टन बॉक्साइट निकालना था। इसके एवज में बालको सरकार को 160 रूपए प्रति मीट्रिक टन की दर से भुगतान करती। रिपोर्ट के अनुसार बालको ने शुरूआती दो वर्षो में निर्घारित से कम मात्रा में बॉक्साइट का उत्खनन किया, लेकिन तीसरे वर्ष में उसने लक्ष्य से कहीं ज्यादा बॉक्साइट निकाल लिया। इसके बावजूद सरकार ने अतिरिक्त खनिज की रॉयल्टी वसूल नहीं की और टेंडर की शर्तो का उल्लंघन करते हुए उसे पहले दो वर्षो में हुए कम खनन में जोड़ दिया।
इस तरह हुआ नुकसान
तीसरे वर्ष में बालको ने 207465.50 मीट्रिक टन बॉक्साइट निकाला। इस लिहाज से करीब 3.32 करोड़ रूपए रॉयल्टी का भुगतान किया जाना था। इसके विपरीत बालको द्वारा सरकार को केवल 180042.66 मीट्रिक टन की रॉयल्टी 2.88 करोड़ रूपए दी गई। बाकी बचे 27422.84 मीट्रिक टन को बीते दो वर्षो में किए गए कम खनन में जोड़ दिया।

उल्लेखनीय है कि  कोयला घोटाले पर आई कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ की सरकार ने गडकरी के करीबी अजय संचेती को कोल ब्लॉक देकर सरकारी खजाने को एक हजार करोड़ का चूना लगाया। संचेती भाजपा की टिकट पर राज्यसभा सदस्य बने हैं। कैग की रिपोर्ट पिछले सप्ताह छत्तीसगढ़ विधानसभा में रखी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के प्रशासन ने 2007 में एसएमएस कंपनी को कोल ब्लॉक्स आवंटित कर सरकारी खजाने को एक हजार करोड़ रूपए का चूना लगाया।
इस कंपनी के मालिक अजय संचेती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक संचेती को कंपनी को 129 रूपए 60 पैसे प्रति मीट्रिक टन की कीमत पर कोल ब्लॉक्स आवंटित किया जबकि इसी क्षेत्र में कोल ब्लॉक्स की कीमत 552 रूपए प्रति मीट्रिक टन है। जिस समय संचेती की कंपनी को कोल ब्लॉक्स आवंटित किए गए उस वक्त नितिन गडकरी भाजपा के अध्यक्ष नहीं थे लेकिन अब वह भाजपा अध्यक्ष हैं।

प्रदेश में अरबों रूपए के ऊर्जा घोटाले के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को जिम्मेदार ठहराते हुए उनसे इस्तीफा देने की मांग की है। जोगी ने कहा कि यह प्रदेश के सबसे बड़े घोटालों में एक है, लिहाजा तह तक जाने के लिए पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।

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